जवानी के अंगारे – Update 22 | Incest Sex Story

जवानी के अंगारे - Incest Sex Story
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भले ही उसकी शादी की उम्र निकल चुकी थी, पर इसका मतलब ये तो नही की वो अपने से बड़ी उम्र की औरत के साथ शादी कर ले और वो भी अपने स्टूडेंट की माँ के साथ
उसके माँ बाप कभी नही मानेंगे
और उसके रिश्तेदार, समाज….वो क्या कहेंगे
उसका तो दिमाग़ ही हिल गया अनु की ये बात सुनकर

अनु समझ गयी की उसके दिमाग़ में भी वही सब चल रहा है जो ये बात सुनकर उसकी मॉम के दिमाग़ में चल रहा था
और वो जानती थी की उन्हे कैसे मनाना है
वो उठी और अपनी नन्ही सी गांड मटकाते हुए सर के पास चल दी
उन्हे समझाने के लिए
क्योंकि जिस अंदाज वो उन्हे समझने वाली थी , उसे पता था की वो मना नही कर पाएँगे.

*********

अनु ने अपनी शर्ट के 2 बटन खोल दिए और अपना भरंवा निप्पल निकाल कर सुधीर सर को दूर से दिखाया
और बोली : “आपको पता है पापा, ये रात को इतना पफ्फी सा हो जाता है की मुझे इसको ज़ोर-2 से दबाना पड़ता है, और करीब आधा घंटा लगता है इसको नॉर्मल होने में , तब जाकर नींद आती है मुझे…”

सुधीर की तो आँखे ही खुली रह गयी उसके ‘पफ्फ़ी’ निप्पल को देखकर
वो गोरी पहाड़ी पर खड़ा पहलवान जैसा लग रहा था जिसे अपने आकार और खूबसूरती पर नाज़ था
और अनु उसे इतनी बेदर्दी से मसल रही थी जैसे उसकी कोई शख्सियत ही नही थी

सुधीर के होंठ सूख गये उस बेचारे निप्पल की ऐसी हालत देखकर
वो जीभ से अपने होंठो को तर करने लगा जैसे कहना चाहता हो की वो उन्हे चूसकर ठीक कर देगा

और वही बात अनु ने बोल डाली : “काश आप मेरे पापा बनकर मेरे घर पर रहो, तो मैं भी आपकी बगल में आकर सो जाया करूँगी, मॉम के सोने के बाद आप मेरी हेल्प भी कर दिया करना, मॉम भी खुश और मैं भी….”

इतना लुभावना ऑफर और वो भी अपना प्रॉडक्ट दिखाकर, ऐसा काम सिर्फ़ एक कुशल सेल्समैन ही कर सकता है
पर वो तो सेल्स वालो से भी आगे निकल चुकी थी अपना प्रॉडक्ट बेचने के लिए
उसने अपने बेग से एक छोटी सी शीसी निकली और उसमें उंगली डुबोकर उसे अपने निप्पल पर मलने लगी

सुधीर ने देखा की वो तरल पदार्थ लगाते ही वो चमक उठे

सुधीर : “ये…ये क्या है, क्या लगा रही हो इनपर .”

अनु : “ये शहद है …. जब इतनी ज़ोर से मसलती हूँ तो दर्द होता है, शहद लगाने से आराम भी मिलता है और ठंडक भी…”

सुधीर का मुँह फिर से सूख गया, ये साली आख़िर चाहती क्या है

उसने देखा की शहद की लकीर बनकर नीचे फिसल रही है जो देखने मे काफ़ी सैक्सी लग रही थी

उसका तो मन हुआ की वो आगे बड़े और उस शहद को चाटकार उसे दिखा दे की उस से ज़्यादा ठंडक तो उसकी जीभ उसे दे सकती है
वो अपनी सीट से उठा ही था की दूर से उसे फिर से बिनोद आता हुआ दिखाई दिया
“ये साला किसी भटकती हुई आत्मा की तरहा क्यों घूम रहा है, हर बार ग़लत मौके पर आ जाता है”

वो अंदर आया और उन्हे एक सर्क्युलर की कॉपी देकर चला गया जो शायद प्रिन्सिपल ने भेजा था, ये उसी ओलम्पियाड के बारे में था जो 2 दिन बाद था

उसे देखकर सुधीर को याद आया की जिस काम के लिए उसने अनु को साथ बिठाया है वो तो हुआ नही और इधर-उधर की बातों में लगकर 3 दिन कब बीत गये पता ही नही चला, काम कुछ हुआ नही था अभी तक

अनु ने तब तक अपनी शर्ट के बटन बंद कर लिए थे
पर उसके निप्पल्स पर लगा शहद उभरकर सफेद शर्ट से बाहर ज़रूर निकल आया
और ये उस हरामी बिनोद की नज़रों से बच नही सका

उसने मन में सोचा : “ये लड़की के सीने पर गीलापन क्यों है, दूध देने लगी है क्या अभी से, या पानी लगाकर ये सुधीर सर को पटाने का प्रयास कर रही है, इसपे तो नज़र रखनी पड़ेगी”

इतना सोचते हुए वो बाहर निकल गया और उसे अपनी जवानी का जलवा दिखाकर अनु भी मंद-2 मुस्कुरा उठी
क्योंकि ये भी उसने जान बूझकर किया था

उसके आँखो से ओझल होते ही सुधीर सर लपककर उसके करीब आए और उसकी शर्ट के बटन खोलकर उसका शहद से भीगा रसगुल्ले जैसा रसीला मुम्मा मुँह में भरकर चूसने लगे

“आआआआआआअहह……… ओह पापा……………………. सक मिईईईईईईईईईईईईईईई……….. ये पीयून ना आता तो अभी तक ना जाने क्या-2 कर चुके होते हम….तभी तो बोल रही हूँ …..मेरा कुछ तो ख़याल करो……कर लो ना मॉम से शादी….”

उसने अपना मुँह उपर उठाया और बोला : “पर…..मेरे माँ बाप….वो…वो नही मानेंगे….और मेरे गाँव के लोग , रिश्तेदार, समाज….वो क्या कहेगा….”

अनु ने झत्ट से अपना दूसरा बूब भी निकाल कर उनके सामने परोस दिया और बोली : “वो सब मैने सोच लिया है….मैं ये बस अपने और आपके लिए ही कर रही हूँ …मैं चाहती हूँ की मेरी पूरी लाइफ आपके साथ गुज़रे…शादी के बाद भी मैं ऐसे ही आपसे प्यार करती रहूंगी पापा…”

सुधीर ने झत्ट से किसी गीदड़ की तरह झपट्टा मारकर दूसरे बूब पर भी कब्जा जमा लिया…
वो दोनो हाथो से उन छोटी-2 बूबीयों को मसल रहा था और उनपर लगे मोटे बेर जैसे निप्पल्स को निचोड़ कर उनका शहद पी रहा था

अनु ने उसे अपना प्लान समझाया : “आप अभी अपने माँ बाप को मॉम से ये कहकर मिलवा दो की ये भी उनकी तरहा शादी नही करना चाहती थी, इसलिए अभी तक कुँवारी है, और आपको तो पता ही है, मेरी मॉम का फिगर ही ऐसा है की वो लगती भी नही है शादीशुदा…और उन्हे ये भी बताने की ज़रूरत नही है की उनकी एक बेटी भी है…वैसे भी वो लोग तो ज़्यादातर गाँव में ही रहेंगे, जब कभी यहाँ आए तो मैं उनके सामने नही आउंगी , या मॉम की कोई भांजी/भतीजी बनकर मिल लूँगी उनसे, और बाकी रही बात रिश्तेदारो की तो हमारे यहाँ तो ऐसी कोई खास रिश्तेदारी नही है , इतने सालो तक मॉम और मैं अकेले ही रह रहे है, कोई नही आता पूछने की कैसी लाइफ चल रही है, सब अपने में मस्त है, इसलिए उन्हे भी कुछ बताने की ज़रूरत नही है…कोर्ट मैरिज करेंगे, आपके भी सब रिश्तेदार गाँव में ही है, इसलिए मॉम कभी कभार आपके साथ चली जाय करेगी, वो भी खुश और आप भी…और यहाँ शहर में हम सब एक साथ भी खुश …”

उसने बड़ी सरलता से सुधीर सर की सभी बातों का जवाब दे दिया…

पर सुधीर के मन में अभी तक कुछ खटका था
शायद वो सोच रहे थे की जब ये सब बिना शादी के मिल रहा है तो शादी की जरुरत ही क्या है…
और शादी के बाद अगर शेफाली ने उसे और अनु को किसी आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया तो क्या होगा
उसकी कितनी बेइजत्ती होगी शेफाली के सामने
ये बात भी उसे बुरी तरह से सता रही थी…

अनु भी उसकी मनोस्थिति समझ गयी और जान गयी की इसके लिए उन्हे अलग से पटाना पड़ेगा…

सुधीर ने जब अच्छे से उसके बूब्स को चूस लिया तो वो अपने कपड़े ठीक करती हुई वापिस अपनी सीट पर जाकर बैठ गयी

सुधीर ने भी अपनी हालत ठीक की
2 बार उसका लॅंड खड़ा होकर बैठ चुका था
इतने में तो वो उसकी माँ की 2 बार चुदाई कर चुका होता
पर स्कूल में ये सब पॉसिबल भी तो नही था
शायद अनु सही कह रही थी
पर फिर भी उसे सोचने के लिए कुछ समय चाहिए था
वो अपनी जिंदगी का इतना बड़ा फ़ैसला खड़े लॅंड के आधार पर नही लेना चाहता था

उसके मन की उलझन को समझकर अनु ने उसे भी दूर कर दिया

वो बोली : “पता है सर…आई मीन पापा…आप जब भी मुझे इस तरह आधा अधूरा तड़पने के लिए छोड़ देते हो तो उसके बाद मुझे बहुत तकलीफ़ होती है सोने में …कई बार तो मॉम को मेरी हेल्प करनी पड़ती है…”

सुधीर (आँखे फेला कर) : “शेफ़ाली को ??? कैसे….मतलब कैसे करती है वो हैल्प…”

अनु : “वही….जो जलन होती है मुझे….उसे दूर करती है…शहद लगाकर….”

शेफाली और अनु को एकसाथ बेड पर नंगे होकर एक दूसरे को शहद लगाने की कल्पना मात्र से ही उसका आठ इंच का लौड़ा फिर से अकड़ कर बैठ गया उनकी कहानी सुनने के लिए

सुधीर : “बोलो ना…डीटेल में बताओ….कैसे क्या करती है वो…”

अनु : “ठीक है, पर आप प्रॉमिस करो पापा, ये बात मॉम को नही बताओगे”

सुधीर : “प्रॉमिस…..गॉड प्रॉमिस…मुझे मेरे माँ बाप की कसम…बताओ प्लीज़….क्या करती है शेफाली तुम्हारे साथ…”

अनु (मासूम सा चेहरा बनाती हुई बोली) : “वो एक बार याद है आपको, आपके घर जब गये थे, तब आपने मेरे साथ वो पहली बार….मेरे बूब्स को…”

सुधीर : “हाँ …हाँ …याद है, आगे बोलो “

वो असली बात सुनने के लिए उतावलेपन से मरा जा रहा था

और अनु उसकी हालत देखकर मन ही मन हंस रही थी, उसे पता था की तीर निशाने पर लगा है

अनु : “उस दिन पता नही घर जाकर क्यों मेरे बूब्स पर और नीचे वाले पार्ट्स में अजीब सी जलन होने लगी….मैं ठंडे पानी से 2 बार नहाई पर कुछ फ़र्क नही पड़ा…मैने इन्हे बहुत मसला, नीचे भी फिंगरिंग की, मज़ा तो बहुत आया पर रात को सोते हुए फिर से वही जलन होने लगी…तो ….तो मैने…”

सुधीर के मुँह से लार निकलकर अब नीचे गिरने लगी थी

“हाँ बोलो ना मेरी जान, मेरी बच्ची ….क्या किया तुमने…”

अनु : “तो मैने अपने सारे कपड़े निकाल दिए और बेड पर नंगी ही सो गयी….”

सुधीर ये सुनते ही आँखे बंद करके उस पल की कल्पना करने लगे, जब उसने अपने कपड़े निकाले थे…

“आआआआआआअहह……. नंगी……. यानी….. पूरी नंगी…….”

इतना कहते हुए सुधीर ने झट्ट से अपनी जीप खोली और अपने फड़फड़ाते हुए लॅंड को बाहर निकाल कर उसे जोरों से मसलने लगे..

इस वक़्त उन्हे बिनोद के आने का भी डर नही था, वो खुल्लम खुल्ला अपने लॅंड को बाहर निकाल कर, लहरा कर अनु के सामने मूठ मारने लगे…

एक पल के लिए तो अनु के मुँह भी पानीमें आ गया और उसने सोचा भाड़ में जाए ये सब प्लॅनिंग, अभी जो लॅंड खड़ा है, उसके साथ मज़े ले अनु और निकल ले..

पर वो जानती थी की वो जो भी कर रही है, उसके बाद ये मज़े उसे जिंदगी भर मिलने वाले है

इसलिए वो अडीग रही और उस लॅंड को देखकर पिघली नही

पर सर को ऐसे मुठियाते देखकर उसकी चूत से पानी ज़रूर निकलने लगा, जिसे वो अपनी उंगलियो से दबा कर कंट्रोल करने की असफल कोशिश करने लगी..

सर भी मुठ मारते हुए काफी सैक्सी लग रहे थे

“फिर….उसके बाद क्या हुआ…..मेरी जान…बोलो…जल्दी बोलो…”

उनके हाथ की स्पीड ही इतनी थी की उन्हे लंबी कहानी सुनाती तो वो अधूरी ही रह जाती, इसलिए उसे शॉर्ट में कर दिया अनु ने

वो बोली : “मेरा तो बदन तप रहा था, और मैं फिर से बूब्स को रगड़ते हुए फिंगरिंग करने लगी, तो पता नही कैसे मॉम को मेरी सिसकारियां सुनाई दे गयी और वो आ गयी, मुझे देखते ही वो समझ गयी की क्या हुआ है, वो भी मेरी उम्र से निकल चुकी थी…वो मेरे पास आई और मुझे सहलाने लगी, पहले तो मैं डर गयी, शर्म के मारे कुछ नही बोली, फिर उनके समझाने पर की ये सब तो इस उम्र में आम होता है, मैं फिर से वही करने लगी, मैने मॉम को अपनी जलन के बारे में बताया और उन्होने पता है क्या किया पापा….”

सुधीर का लॅंड फटने की हालत में था

वो किसी भी वक़्त झड़ सकता था

आज जैसा कड़कपन उसके लॅंड में शेफाली की चुदाई के वक़्त भी नही आया था

वो बोला : “क…..क…क्या…किया अsssssssss ……बोल ना…”

उसने इतराते हुए वो शहद की शीशी दिखाई और बोली : “ये शहद निकाल कर लाई फ्रिज से और अपनी जीभ से उसे मेरे बूब्स पर लगाया….और फिर नीचे भी…मेरी पुस्सी पर…”

इस सीन की कल्पना मात्र से ही उनकी आँखे भींचती चली गयी और अपने फौलादी लॅंड को पीटते हुए वो ज़ोर से चिल्ला पड़े

“आआआआआहह……. ओह मेरी ज़ाआाआआआआआआआन्……. कितना मज़ा आया होगा ना तुम्हे….. बोलो….आया था ना…”

इस बार वो अपनी जगह से उठी और उनके सामने आकर बैठ गयी, ठीक उनके लॅंड के सामने

और बोली : “बहुत मज़ा आया था पापा….मॉम ने वो शहद से डूबी जीभ से मुझे पूरा चाटा था उस रात…मेरी निप्पल्स को…मेरी नेवल को….मेरी पुस्सी को भी पापा…मेरी पुस्सी के अंदर उन्होने अपनी जीभ घुसा दी थी…मेरे अंदर का शहद भी वो पी गयी जब निकला तो…सच में पापा…बहुत मज़ा आया था..बहुत मज़ा….”

इतना बहुत था उसकी कल्पनाओ को उस सीमा तक ले जाने के लिए, जिसके लिए सुधीर ने काफ़ी देर से अपनी आँखे भींच रखी थी

और एक साथ कई पिचकारियाँ निकल कर उन्होने अनु के चेहरे को अपने लॅंड की सफेदी से रंग डाला..

“आआआआआआअहह…..अनुउऊउ……..मेरी जाआअंन्न……मैं भी चुसूंगा तुझे ऐसे ही……तुझे शहद में डुबोकर….तुझे चाटकर सॉफ करूँगा मैं ….आआआआआआअहह मेरी बच्ची ……. मेरी जान्न्sssssss …..”

और जब आखरी बूँद तक उन्होने उसके चेहरे पर गिरा दी तो अनु की आँखे तक खुल नही पा रही थी….

उसका चेहरा बर्फानी सा होकर छिप गया था , जैसे सीधा चेहरे पर ही बर्फ़बारी हुई हो

फिर उसने उस क्रीम को अपने हाथो से इकट्ठा करके अपने मुँह में डाल लिया….

जो भी मलाई निकली थी उसकी एक-2 बूँद को उसने उंगलियो से इकट्ठा करके पी लिया

इस कीमती शहद का भी कोई मुकाबला नही था, ये वो अच्छे से जानती थी

सर ने आस पास देखा और जल्दी से दोनो ने अपना हुलिया ठीक किया

अनु को उन्होने अपना रुमाल पानी से गीला करके दिया ताकि वो चेहरे को अच्छे से सॉफ करले…

और दोनो ने अपने-2 कपड़े सही करके वहां से जाना सही समझा…

पर जाने से पहले अनु ने अपना आख़िरी पासा फेंका

“पापा….सोचो अगर आप हमारे घर आ जाओ, तो मेबी आने वाले टाइम में ऐसा हो सकता है की आप एकसाथ मेरे और मॉम के साथ वो सब कर पाओ, जो आपने अभी सोचा…कितना मज़ा आएगा फिर…जस्ट थिंक.”

उसकी बात सुनकर वो एक बार फिर से हवा मे उड़ने लगा

अनु : “आपको देखना है की मॉम कैसे करती है वो सब…मेरे साथ….”

अँधा क्या चाहे, दो आँखे

वो लगभग चिल्ला पड़ा : “हाँ …..देखना है…बिल्कुल देखना है, क्या ये पासिबल है..?”

अनु उनके करीब आई और उनके होंठो को चूमकर बोली : “अपने प्यारे पापा के लिए इतना तो मैं कर ही सकती हूँ …आप एक काम करना, आज शाम मेरे घर आना…मैं आपको दिखाने का इंतज़ाम करती हूँ ..”

इतना कहकर वो उनके गालो को सहलाती हुई बाहर निकल गयी

और पीछे छोड़ गयी सुधीर को, जो अभी तक उन माँ बेटी के रिश्तो की सच्चाई जानकार सदमे में था और उससे ज़्यादा सदमा या ये कहलो खुशी का सदमा ये की वो उन्हे ये सब दिखाने के लिए अपने घर इन्वाइट भी कर गयी है

भले ही सिर्फ़ 1 मिनट हुआ था उन्हे झड़े हुए, पर पता नहीं क्यो फिर से उनके लॅंड में एक तनाव सा उत्पन्न होने लगा

और ये तब तक रहने वाला था जब तक उन माँ बेटी की रासलीला वो अपनी आँखो से नही देख लेता.

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