अपनी मॉम की हां सुनते ही वो खुशी से चिल्लाने लगी
शेफाली को लगा की उसकी बेटी उसके लिए खुश हो रही है
पर उसे क्या पता था की उसे अपनी चुदाई की ज़्यादा खुशी थी , जो सुधीर सर हमेशा उसके घर पर रहकर करने वाले थे
और उसके बाद जो घमासान हुआ बेड पर उसका तो वर्ल्ड रिकॉर्ड बन जाता
दोनो करीब 2 घंटों तक एक दूसरे के बूब्स, पुस्सी और लिप्स चूसते रहे
और तब तक ऐसा करते रहे जब तक दोनो 2-3 बार झड़ नही गये और उनके अंदर और कुछ करने की ताक़त नही बची
झड़ने के बाद रोजाना की तरह दोनो एक दूसरे की बाहों में लिपटकर ऐसे ही सो गये
अनु की आँखो में नींद नही थी
उसके दिमाग़ में तो प्लान बन रहे थे, अगले दिन के लिए
की कैसे सर को पटाएगी, मॉम से शादी करने के लिए
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अगले दिन जब अनु स्कूल गयी तो उसके चेहरे की चमक देखते ही बनती थी
चेहरे पर खुशी थी और दिमाग़ में वो प्लान जो उसने सर के लिए बनाया था
उसकी फ्रेंड निशा भी उसे ऐसे खुश देखकर उसकी वजह जानने की कोशिश कर रही थी
पर वो उसे अभी सब कुछ बताकर बात का मज़ा खराब नही करना चाहती थी
इसलिए उसे सिर्फ़ सर से मिलने वाले मज़े के बारे में बोलकर उसने टाल दिया
खैर, धीरे-2 सारी क्लासेस ख़त्म हुई और सुधीर सर की क्लास आई
उनके चेहरे की स्माइल भी देखते ही बन रही थी
उनकी नज़रें कई बार अनु से मिली और हर बार अनु ने आँख मारकर उन्हे अपने दिल की उथल पुथल के बारे में अवगत करवाया
उनकी क्लास ख़त्म हुई और आख़िर वो टाइम भी आ गया जब स्कूल में कुछ ही लोग बचे थे
निशा का भी रुकने का मन कर रहा था ताकि वो सर के साथ अपनी सहेली को मज़े लेते देख सके पर आज संजू के साथ जाना भी ज़रूरी था, कल से वो उसकी चूत मारने के लिए छटपटा रहा था,
दूसरों की चुदाई देखने से बेहतर खुद चुदाई करवाना ज्यादा सही है
इसलिए उसने जाना ही बेहतर समझा
और उस दिन की तरह जब एक बार फिर अनु सर के स्टाफ रूम मे पहुँची तो उन्हे भी बड़ी बेसब्री से अपना इंतजार करते हुए पाया
वो मंद-2 मुस्कुराती हुई उनके सामने वाली चेयर पर जाकर बैठ गयी
थोड़ी ही देर में स्कूल का पियून बिनोद आया और उसने सुधीर सर को लंच या चाय के लिए पूछा जो उन्होने मना कर दिया और उन्हे डिस्टर्ब ना करने को कहकर उसे वापिस जाने को कहा
वो अपनी गोल आँखो से अनु को घूरता हुआ चला गया, जैसे उसे पता था की आज वहां क्या होने वाला है
पर वो जानता था की सुधीर सर की बात ना मानकर अगर वो उन्हे डिस्टर्ब करने आया तो उसकी खैर नही, इसलिए वो चुपचाप बाहर निकल गया
उसके नज़रों से ओझल होते ही सुधीर सर खुद ही लपककर अनु के करीब आए और पीछे से झुककर उन्होने उसके बूब्स पकड़े और उसकी गर्दन पर किस्स करने लगे
बेचारी अनु अपने उपर हुए अचानक हमले से घबरा सी गयी, पर वो एंगल ही इतना सेक्सी था की उसकी सिसकारी निकल गयी
‘’उम्म्म्ममममममममममममममममममम…..सर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर……..आआआआआआअहह धीईईरेईईईयययय……… खा जाओगे क्या मुझे……’’
वो सर के बाल सहला रही थी और वो उसके बूब्स को
शर्ट को उन्होने खींचकर स्कर्ट से बाहर निकाल दिया था और अपने हाथ अंदर डाल दिए थे.
उसके खोये से बने लड्डू जब सुधीर सर के हाथ में आए तो वो उन्हे मसल कर उसकी मिठास अपनी उंगलियो में क़ैद करने लगे..
और वो झल्ली, अपनी सुध बुध खोकर चेयर पर बैठी ऐसे मचल रही थी जैसे जिंदा मछली को पानी से बाहर निकाल लिया हो
अगर वो स्कूल में ना होते तो अभी मदरजात नंगी होकर नागिन डांस कर रही होती वो
पर जो भी था, मज़े बहुत आ रहे थे उसे
सुधीर सर ने अपना लॅंड बाहर निकाल लिया, ऐसा करते हुए उनकी नज़रें चारों तरफ थी, खिड़की पर और पीछे के दरवाजे पर
जहाँ से कोई , कभी भी आ सकता था
हालाँकि वो दूर से ही आता हुआ दिख जाता पर अपनी तरफ से चौकन्ना रहना उनका फर्ज़ था
सर के लॅंड को अपनी गर्दन पर महसूस करते ही वो काँप कर रह गयी, उसके बदन से ऐसी तरंगे उठने लगी जैसे बर्फ़ीली हवा में उसे नंगा खड़ा कर दिया हो
उनके लॅंड से निकल रही महक उसे मदहोश किए जा रही थी
सर थोड़ा घूमकर उसके सामने आ गये और अपनी गांड टेबल पर टीका कर उसके सामने खड़े हो गये
अब वो रंगीला लंड उसकी आँखो के सामने था जिसका रस पीकर वो जन्मो की प्यास बुझा लेना चाहती थी
एकदम काला , मोटा और लम्बा लंड था उनका , उसपर हाथ रखकर उसने उनके लंड के टोपे को बाहर निकाला
पर अब तो उसके प्लान की शुरूवात करने का समय था
वो उसे अपने हाथों में लेकर उसे मसलने लगी
सर की गोटियों को अपनी नर्म उंगलियों से दबा कर उसके वजन को नापने लगी
अपनी गर्म साँसे उनके लॅंड पर छोड़कर उन्हे और ज़्यादा तड़पाने लगी
उसने अपनी जीभ निकाली और सर के लंड को नीचे से लेकर ऊपर तक अपनी लार से नहलाती चली गयी

अब सुधीर से सहन नही हो रहा था
उन्होने अपना हाथ उसके सर के पीछे रखा और अपना लॅंड लेजाकर उसके होंठो से सटा दिया और एक जोरदार धक्का मारा
पर उसने अपना मुँह खोला ही नही
उनके लॅंड का टोपा उसके रसीले होंठो से टकरा कर रह गया
वो तो पहले से ही अपनी जवानी के रस से तर बतर थे, उपर से सुधीर सर के लॅंड का प्रिकम निकलकर उसके होंठो पर लगा तो ऐसा लगा जैसे किसी ने ओस की बूँदो से भीगा गुलाब उसके होंठो पर रगड़ दिया हो
गाड़े रस की बूंदे उसके होंठो पर जम कर रह गयी
और ना चाहते हुए भी उसने जीभ फेरकर उस रस को निगल लिया
सुधीर सर भी उसकी इस हरकत से तड़प कर रह गये
वो बोले : “उफफफफफ्फ़ ऐसे क्यो तड़पा रही है अनु….प्लीज़ अपने होंठ खोलो ना बैबी….आई वॉंट टू फकक योर माउथ ..”
उसने चमक कर अपनी आँखे बाहर निकली और उनके लॅंड को अपनी मुट्ठी में पकड़ कर जोरों से रगड़ते हुए बोली : “क्या कहा आपने…फिर से बोलो एक बार प्लीज़…”
सुधीर : “मैने कहा…आई वॉंट टू फक्क योर माउथ ”
अनु : “नही….ये नही उस से पहले “
सुधीर सोचने लगा : “उस से पहले……हां ….क्यों पड़पा रही हो…”
अनु ने ज़ोर से उसके टटटे अपनी उंगलियों दबा लिए : “उम्म्म्मम….ये नही….उन दोनो के बीच में ..”
वो अब सीरियस होकर सोचने लगा
और अपनी बातों को रीवाइंड करके सोचने लगा और अचानक खुशी से चिल्ला कर बोला : “अच्छा वो….बैबी”
इस बार अनु ने उसके लॅंड को चूम लिया और जो थोड़ा बहुत रस उसके होंठो पर रह गया था उसे वापिस सर के लॅंड पर रगड़ दिया अपने होंठो से
सुधीर इस बार अपने पंजो पर खड़ा होकर अपने लॅंड को उसके चेहरे के करीब ले जाने लगा और बोला : “लो बेबी….मेरी जान….मेरी शोना …चूसो इसको…”
वो सुधीर सिर की आँखो मे देखते हुए बोली : “ओके पापा….”
और इतना कहकर उसने सुधीर सर के लॅंड के टोपे को मुँह में लिया और एक जोरदार चुप्पा मारकर उसे चूसने लगी
उसके मुँह से पापा सुनकर एक बार के लिए तो सुधीर गिरते-2 बचा
और बोला : “ये…ये क्या….पापा…..पापा क्यो ?”
उसने लॅंड बाहर निकाला और बोली : “आपने भी तो बैबी बोला मुझे….और वो मुझे अच्छा लगा….और पापा बोलकर उस से भी अच्छा लगा….”
सर समझ गये की वो रोल प्ले खेल रही है उसके साथ
वैसे देखा जाए तो वो थी भी उसकी बेटी की उम्र की
और अगर सच में ऐसी उम्र में आकर अपनी जवान बेटी से लॅंड चुसवाना पड़ जाए तो कैसा लगेगा किसी मर्द को
इस कल्पना मात्र से ही उनके लॅंड की नसें चमक कर बाहर निकल आई
भले ही वो उसके पापा नही थे पर उसके साथ इस रिश्ते का खेल खेलने में जो उत्तेजना उसे महसूस हो रही थी वो पहले से कही ज़्यादा थी
वो बोले : “यस माय लव….माय बैबी……सक इट…..चूसो अपने पापा का लॅंड….मेरी जान….चूसो बेटी ”
और अपने पापा की इतने प्यार से कही बात भला कैसे टाल सकती थी वो
उसने अपने २ बटन खोले और सर का हाथ पकड़कर अंदर धकेल दिया
अनु : “ ऑश पापा, कितना बड़ा है आपका……आई वॉंट टू सक्क इट हार्ड……….”
उन्होंने उसके बालों को पकड़ा और उसके मुंह में अपना लंड पेलकर उसे चोदने लगे
“ओह्ह्ह , कितना मज़ा आ रहा है , यू आर सोओ सैक्सी , प्लीज् फ़क्क मीssssss ”
अनु ने अपने दिल का हाल सर के सामने उजागर कर दिया
सुधीर : “एस्स…..मेरी रानी….मेरी बच्ची ….आई विल फ़क्क यू …..लेट्स फक इट….”
इतना कहकर वो बड़ी ही बेसब्री से उसकी स्कर्ट को खींचकर उतारने लगे, जैसे आज ही कांड कर देंगे उसका.
पर अनु भी समझदार थी, अपना जाल तो वो फेंक ही चुकी थी और सर उसमे फँस भी गये थे
अब आगे उन्हे कैसे तड़पाना है उस जाल में फँसा कर ये देखना बाकी था बस.
अनु : “सर…वो…वो कोई आ रहा है”
उसने जब खिड़की की तरफ इशारा करके ये बात कही तो सुधीर सर की तो हालत ही ख़राब हो गयी
क्योंकि उसकी मारने के चक्कर में वो बाहर की पहरेदारी करना भूल ही गये थे
उनका लॅंड जो अभी खंबे की तरह खड़ा था, हवा निकले गुब्बारे की तरह मुरझाकर नीचे झूल गया
उन्होने आनन फानन में अपने कपड़े सही किए और सीट पर जाकर बैठ गये
और अपने लॅपटॉप में देखकर कुछ बोलने का नाटक करने लगे
अनु भी नोटबुक लेकर उसमे कुछ लिखने का नाटक करने लगी
पर जब सुधीर की नज़रें सामने बैठी अनु पर गयी तो उन्हे हार्ट अटॅक आते-2 बचा, वो पगली अभी तक अस्त व्यस्त होकर बैठी थी, ऊपर के २ बटन खुले हुए थे, जिसमे से उसका आधे से ज्यादा मुम्मा साफ़ दिखाई दे रहा था, शायद भूल गयी थी की आवेश में उसने शर्ट बहार की थी , बटन खोले थे पर ऐसी हालत में उसे सही भी करना है ये भूल गयी वो
सर ने जल्दी से उसे शर्ट सही करने को कहा, वो भी सॉरी-2 करती हुई शर्ट के बटन लगाने लगी और अपने कपड़े दुरुस्त करके फिर से उसी पोज़िशन में बैठ गयी
पर जब कुछ देर तक कोई नही आया अंदर तो सर ने चैन की साँस ली
अनु : “मैं देखकर आती हूँ बाहर “
सुधीर ने सर हिलाकर उसकी बात मान ली, वो बाहर गयी और कुछ देर में अंदर आ गयी
बाहर कोई था ही नही तो दिखता कैसे पर अंदर आकर उसने कहा : “वो शायद बिनोद ही था, पर दूर से निकल गया, खिड़की के पास होता तो अंदर देख लेता..”
सुधीर ने भी चैन की साँस ली, अनु मंद-2 मुस्कुरा रही थी उनकी हालत देखकर
सुधीर : “हमे ही चौकन्ना रहना था, मैं तो भूल ही गया था की हम स्कूल में हैं , आज तुमने मुझे पूरा उत्तेजित कर दिया था “
उन्हे छेड़ने के लिए वो फिर से उसी सैक्सी आवाज़ में बोली : “ तो आओ ना पापा…मुझे तो अभी तक कुछ-2 हो रहा है…यहां भी और यहां भी…”
उसने बारी-2 से अपने बूब्स और पुस्सी पर हाथ लगाकर अपना हालेदिल उन्हे बताया
और वो जिस सैक्सी अंदाज में उसे पापा बोल रही थी, सुधीर तो पागल ही हुए जा रहा था
पर अभी कुछ करने के लिए 100 बार सोचना पड़ता
अब शायद सही मौका था सुधीर सर के सामने अपना आख़िरी पासा फेंकने का
अनु : “ऐसे तो हम कभी कुछ कर ही नही पाएँगे पापा….आपके घर आपके मॉम डेड है , वहां भी पासिबल नही है…मेरे घर भी मॉम का खतरा बना ही रहता है”
फिर कुछ देर चुप रहकर एकदम से चहकति हुई वो बोली : “पर एक प्लान है मेरे पास, अगर आप मान जाओ तो”
सुधीर की आँखे चमक उठी, वो जानता था की दिमाग़ तो काफ़ी है इस लड़की में , ज़रूर कुछ अच्छा ही प्लान सोचा होगा
सुधीर : “सच….बताओ फिर जल्दी, मैं भी मरा जा रहा हूँ तुम्हारे साथ सब कुछ करने के लिए…”
अनु : “पापा…आप मेरे पापा बन जाओ “
एक पल के लिए तो उसे कुछ समझ नही आया की वो बोल क्या रही है
क्योंकि जब से उसने पापा बोलना शुरू किया था उसे तो यही लग रहा था की वो रोल प्ले कर रही है और अब ये भी उसी का हिस्सा है.
उन्हें ऐसे ताकते देखकर वो फिर से बोली : “आप समझे के नही…आप मेरे पापा बन जाओ, सच में , मेरी मॉम से शादी करके”
इस बार उनके दिमाग़ की बत्ती जल गयी
ये क्या बोल रही है वो
ये बात सच थी की वो उसकी मॉम की ले चूका था , मजा भी काफी देती है वो
और अब अनु की भी लेना चाहता था वो
पर इसका मतलब ये तो नही की वो शादी ही कर ले
बिना शादी के भी तो वो उसकी माँ के साथ मज़े ले ही रहा है
और अनु भी आज नही तो कल उसे दे ही देगी
इसमे शादी कहाँ से आ गयी
भले ही उसकी शादी की उम्र निकल चुकी थी, पर इसका मतलब ये तो नही की वो अपने से बड़ी उम्र की औरत के साथ शादी कर ले और वो भी अपने स्टूडेंट की माँ के साथ
उसके माँ बाप कभी नही मानेंगे
और उसके रिश्तेदार, समाज….वो क्या कहेंगे
उसका तो दिमाग़ ही हिल गया अनु की ये बात सुनकर
अनु समझ गयी की उसके दिमाग़ में भी वही सब चल रहा है जो ये बात सुनकर उसकी मॉम के दिमाग़ में चल रहा था
और वो जानती थी की उन्हे कैसे मनाना है
वो उठी और अपनी नन्ही सी गांड मटकाते हुए सर के पास चल दी
उन्हे समझाने के लिए
क्योंकि जिस अंदाज वो उन्हे समझने वाली थी , उसे पता था कीमें वो मना नही कर पाएँगे.



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