भाग दो : सुधीर सर
स्कूल ख़त्म होने पर अनु जब निशा के साथ बाहर निकल रही थी तो सुबह की किस्स के बारे में ही सोच रही थी
तभी निशा की आवाज़ सुनके उसकी तंद्रा भंग हुई
निशा : “कहाँ खोई हुई है तू…अभी तक वो गौरव तेरे माइंड में घुसा बैठा है क्या ”
जवाब में अनु मुस्कुरा दी
निशा : “देख बैबी, ये सब तो चलता रहेगा, पर मेरी बात का भी ध्यान रख…कल मॉर्निंग में टाइम से स्कूल पहुँच जाना, वरना सुधीर सर को तो तू जानती ही है….ओह्ह फक्क…सुधीर सर से याद आया, उन्होने आज एक मैथ असाइनमेंट दिया था क्लास में , जो कल कंप्लीट करके लाना ज़रूरी है, वो लिया क्या तूने…?”
अनु अपनी हिरनी जैसी आँखो से उसे घूर रही थी, वो बोली : “मैं कैसे लेती, मैं तो क्लास के बाहर खड़ी थी…”
निशा : “ओह गॉड , यार….वो असाइनमेंट देते हुए उन्होने क्लियर्ली बोला था, ये कल मॉर्निंग में सॉल्व करके लाना बहुत ज़रूरी है, तू एक काम कर, सर अभी स्टाफ रूम में ही होंगे, तू जल्दी से अंदर जा, और उनसे असाइनमेंट लेकर आ, वरना कल भी बाहर खड़ा रहना पड़ेगा तुझे “
वो निशा को बोली की वो भी साथ चले,
पर तभी एक बाइक उनके पास आकर रुकी और निशा उचक कर उसपे बैठ गयी,
और उसे बाइ करते हुए बोली : “ये तेरा काम है, तू जा , और सर को पटा कर असाइनमेंट ले आ, ऑल द बेस्ट”
इतना कहकर उसने उस लड़के को इशारा किया और वो बाइक सवार निशा को लेकर चलता बना…
अनु हैरान परेशन सी उसे देखती रह गयी…
हैरान वो इसलिए थी की वो लड़का कितना लफंगा टाइप का लग रहा था, जैसे कोई झुग्गी में रहने वाला लड़का हो…
निशा जैसी खूबसूरत लड़की को ऐसे छिछोरे लड़के में क्या दिख गया जो उसके साथ चल पड़ी.
पर ये तो वो उससे कल भी पूछ सकती थी
अभी तो वो वापिस स्टाफ रूम की तरफ दौड़ पड़ी ताकि सुधीर सर से असाइनमेंट की कॉपी ले सके..
वो बस जाने की तैयारी ही कर रहे थे..और कोई नहीं था वहां पर
अनु : “एक्सक्यूस मी सर , वो…वो आज क्लास में जो आपने असाइनमेंट दिया था….वो मुझे नही मिला..”
सुधीर सर ने उसे उपर से नीचे तक देखा जैसे पहचानते ही ना हो
वो बोले : “तुम उसे लेकर भी क्या करोगी अनुप्रिया..तुमसे होना तो वैसे भी नही है”
वो तो जैसे उसका उपहास उड़ा रहे थे…
अनु को गुस्सा तो आया पर वो चुपचाप खड़ी रही
और तभी उसे निशा की कही हुई बात याद आई…”सर को पटा और असाइनमेंट ले आ”
वैसे ये तो उसने पहले भी कई बार बोला था और उसने सोचा भी था, पर कभी हिम्मत नही हुई,
पर अब उसे लग रहा था की उन्हें पटाये बिना वो पास नही हो पाएगी..
सिर की उम्र करीब 45 के आस पास थी…
ठीक ठाक से ही थे देखने में .. पर थे बिल्कुल फिट…जैसे जिम जाने वालों की बॉडी होती है ठीक वैसे.
वो उन्हे उपर से नीचे तक स्केन करने लगी…
उनके बारे में उसके मन में गंदे विचार आने लगे…
जिन्हे सोचकर उसके जवानी के अंगारे भड़क उठे….
अंगारे यानी उसके निप्पल्स…
ये निप्पल्स उसकी लाइफ का वो हिस्सा थे जो उसपर पूरा नियंत्रण रखने की क्षमता रखते थे…

कोई उन्हे पकड़ कर उमेठ दे तो वो आँखे बंद करके उससे लिपट जाए और कुछ भी कर डाले…
इसका कारण ये था की उसकी पूरी बॉडी का वो वीक पॉइंट थे, देखने में वो जितने खूबसूरत थे उतने ही सेन्सिटिव भी..
पिंक कलर के नन्हे -2 निप्पल्स के चारों तरफ महीन दानों की चादर बिछी हुई थी जो उनका सरक्षण करती थी
और जब वो उत्तेजित होती थी तो वो नन्हे निप्पल अंगारे बनकर उसका बदन जलाते और चारों तरफ के दाने उसकी जवानी के उन्माद में और भी निखर जाते और कड़क होकर उसका साथ देते.
सुधीर : “अब खड़ी क्या हो, वो सामने वाली अलमारी से निकाल लो और कल टाइम से क्लास में आना और ये कंप्लीट करके लाना”
वो जिस तरह से दाँत पीस के ये सब बोल रहे थे, वो ये बताने के लिए काफ़ी था की वो ऐसा ना कर पाई तो क्या होगा.
वो सहमी हुई सी पलटी और अलमारी खोलके पेपर ढूँढने लगी,
कहाँ तो वो उन्हे पटाने की सोच रही थी और कहाँ वो भीगी बिल्ली बनी कुछ कर भी नहीं पा रही थी.
“ध्यान कहाँ है तुम्हारा, वो नीचे के हिस्से में रखे है, एक लो और जाओ घर, मुझे भी निकलना है”
वो झुकी और अलमारी में सबसे नीचे के हिस्से में रखे बंडल से असाइनमेंट निकालने लगी, पर उन्हे बाँधा हुआ था, इसलिए वो उन्हे खोलने में लग गयी…
और तभी एक ठंडी हवा का झोंका उसे पीछे से अपनी चूत पर महसूस हुआ, और अगले ही पल उसका शरीर नम सा पड़ गया..
दरअसल उसने पेंटी तो पहनी नही थी,
झुकने की वजह से उसकी स्कर्ट उपर उठ गयी और पीछे चल रहे एसी ने रही सही कसर पूरी करते हुए उसकी स्कर्ट को थोड़ा और उपर खिसका दिया,
सामने लगे एसी से निकल रही ठंडी हवा सीधे उसकी नंगी और गर्म चूत से टकरा रही थी…
कुछ पल पहले जो अंगारे सुधीर सर की बात सुनके बुझ गये थे वो फिर सुलग उठे.

और वो जानती थी की पीछे खड़े सुधीर सिर भी वो सब देख पा रहे थे,
उसने सिर पीछे करके देखा तो उसकी आशा के अनुरूप सुधीर सर बिना पलक झपकाए उसकी नंगी चूत को ही निहार रहे थे…
उनका मुँह थोड़ा खुल सा गया था…
अनु की लाइफ का ये पहला मौका था जब वो अपनी कुँवारी चूत किसी मर्द को दिखा रही थी
गौरव को भी उसने अभी तक कुछ नही दिखाया था
सिर्फ़ गंदी बातों के अलावा कुछ भी नही किया था
पर यहाँ, पहली ही बार में वो अपनी चूत उघेड़े अपने मैथ टीचर के सामने झुकी खड़ी थी…
बंडल तो खुल चुका था, वो चाहती तो पेपर निकाल कर उठ सकती थी, पर कुछ देर और झुक के वो सर को पूरी तरह से अपने वश में कर लेना चाहती थी
वो खुद भी उत्तेजित हो चुकी थी, और इसी वजह से उसकी चूत से एक गाड़े रस की धार निकलकर उसकी जाँघों पर बहने लगी
सुधीर सर भी अपने खड़े लॅंड को बिठाने के लिए उसे छुपा रहे थे अपने बेग से…
बस, इतना बहुत था अभी के लिए..
वो पेपर उठा कर खड़ी हुई और बाहर जाने लगी.
सिर ने पीछे से उसे आवाज़ दी
“सुनो अनुप्रिया….एक मिनट यहाँ आओ…”
और इस बार उनकी आवाज़ मे एक अलग ही मिठास थी.
अनु के चेहरे पर कुटिल मुस्कान तैर गयी, वो मासूम सा चेहरा बनाके पलटी और बोली : “जी सर …”
सर वापिस अपनी चेयर पर जाकर बैठ चुके थे, शायद अपने खड़े लॅंड को छिपाने के लिए.
उन्होने उसे सामने बैठने के लिए कहा, पर उसने मना कर दिया…
उसकी चूत पूरी तरह से भीग चुकी थी, वो बैठती तो उसकी स्कर्ट खराब हो जाती.
सर बड़े ही प्यार और नर्म आवाज़ में बोले : “देखो, मैं भी नही चाहता की तुम्हारा साल खराब हो, ख़ासकर मेरी वजह से…इसलिए मेरी क्लास में थोड़ा ध्यान दिया करो…मैं भी अपनी तरफ से कोशिश करूँगा की तुम्हारा ख़ास ध्यान रख सकूँ”
उन्होने ‘ख़ास’ शब्द पर कुछ ज़्यादा ही ज़ोर देते हुए कहा
अनु मुस्कुरा उठी, उसके हुस्न का जादू काम कर गया था.
वो बोली : “थेंक्स सर , मैं भी पूरी कोशिश करुँगी की आपको नाराज़ होने का कोई मौका ना दूँ ”
इतना कहकर वो पलटी और अपनी नन्ही और अंदर से नंगी गांड को मटकाती हुई बाहर निकल गयी
बाहर निकली तो उसका दिल जोरों से धड़क रहा था….
उसे तो यकीन ही नही हो रहा था की अभी कुछ देर पहले उसने अपनी नंगी चूत के दर्शन अपने टीचर को करवा दिए…
अनु का पूरा बदन इस वक़्त जल सा रहा था…
वो उसे शांत करना चाहती थी…
उसने जल्दी से एक ऑटो लिया और घर पहुँचकर सीधा अपने रूम में गयी,
अपने सारे कपड़े उतारके नंगी हुई और जाकर ठंडे पानी के शावर के नीचे खड़ी हो गयी.
आआआआआआआअहह सससससससस sssssssss

एक लंबी सी सिसकारी निकली जब उसके गर्म जिस्म पर ठंडा पानी पड़ा तो
उसके हाथ अपने नन्हे बूब्स पर आ गये और वो उन्हे प्यार से सहलाने लगी
दूसरा हाथ उसकी चूत पर मंडराने लगा
वैसे तो ये उसका रोज का काम था, मॉम तो इस वक़्त ऑफीस में रहती थी, इसलिए वो खुल कर , नंगी होकर अपने बाथरूम में एक घंटा लगाकर नहाती , अपनी चूत को मसलती और लगभग रोज मास्टरबेट करके झड़ जाती
पर आज के लिए तो उसके पास इतना मसाला था की उसे सोच-सोचके ही उसकी चूत झड़ने को तैय्यार थी.
वो गौरव के बारे में सोचने लगी….उसके साथ बाथरूम हुई किस्स के बारे में सोचने लगी.
पर फिर अचानक उसके विचारों में सुधीर सर बीच में आ गये ,
उसकी नंगी चूत को घूरते हुए जो उनके चेहरे पर एक्शप्रेशन था, उसे सोचते ही वो मुस्कुरा दी.
वहां स्कूल में तो वो कुछ नही कर पाए थे, पर यहाँ उसकी ‘सोच’ में तो वो कुछ भी कर सकते थे.
वो आगे बड़े और अपना हाथ उसकी नंगी चूत पर रखकर उसे ज़ोर से उसे दबा दिया…
आँखे बंद करके नहाती हुई अनु ने अपनी चूत को अपने हाथों के पंजों में जोरों से भींच लिया…
जैसे उसे निचोड़कर उसका सारा रस निकाल डालेगी
हाथ उसका था पर एहसासों में सुधीर सर उसे रगड़ रहे थे.
ओह सर …….प्लीईईईईईईईईईईस……..धीऱे एएएईई sssssssss ….
घर में कोई नही था, इसलिए वो खुलकर कुछ भी कर सकती थी…..
चिल्ला सकती थी.
सुधीर सर के हाथ की उंगली उसकी चूत का दरवाजा तलाशने लगी..
अनु ने अपनी उंगली भी लेजाकर वहां रख दी जहाँ से चिकनाई भरे रास्ते शुरू होती हैं.

सुधीर सर की बीच वाली मोटी उंगली धीरे-2 अंदर घुसने लगी…
अनु ने भी अपनी दो उंगलियों को एकसाथ अंदर खिसकाना शुरू कर दिया
एक अजीब सी सिहरन दौड़ रही थी उसके पूरे शरीर में
अपने पंजों पर खड़ी हो गयी वो जब उसकी उंगलिया उसके मटर दाने से जा टकराई…
एक बार फिर एक गहरी और मादक सिसकारी से पूरा घर गूँज उठा…
उम्मम्मम्मम्मम्म्म्मममममममममममममममममममम आआआआआआआआआआअहह स्स्स्सस्स्स्स
सुधीर सर ने वो घी से चुपड़ी उंगली को बाहर खींचा और उसे अपने मुँह में लेकर चूस लिया…
ये काम अनु खुद करना चाहती थी, इसलिए सुधीर सर से वो सब करवा रही थी जो उसे पसंद था.
उसने अपनी दोनो उंगलियाँ बाहर निकाली और अपने शहद रस से भीगी उन गोरी उंगलियों को मुँह में लेकर चूसने लगी…
दूसरे हाथ से वो अपने जवानी के अंगारों को पकड़कर उन्हे और ज़्यादा सुलगा रही थी….
क्योंकि वही रास्ता था उसके ऑर्गॅज़म तक जाने का.
सुबह से अपनी चूत में जिस तूफान को वो समेटे बैठी थी, उसके निकालने का समय अब आ चूका था.
उसने तेज़ी से अपनी चूत को रगड़ते हुए , अपने निप्पल्स को उमेठते हुए ज़ोर-2 से चिल्लाना शुरू कर दिया
ओह सुधीर सर ……..प्लीज़ …………. और अंदर डालो…..अपनी फिंगर…….घुसा दो पूरी…..उंगलियाँ…..सारी उंगलिया……एक साथ…..डाल दो….पूरा हाथ अंदर तक…….आआआआआआआअहहsssssssss …..
चरम सुख प्राप्त करते हुए वो उत्तेजना के मारे इस तरह से कांपी की उसका खड़ा रहना भी मुश्किल हो गया….
वो वहीं बाथ टब के उपर बैठ गयी और अपनी चूत से निकल रहे गाड़े रस को अपनी वहीँ पर मलकर उसका शृंगार करने लगी…

और जब वो उस नशे से उभरी तो उसका पूरा शरीर निढाल हो चूका था….
बड़ी मुश्किल से वो उठी और एक बार फिर से शावर के नीचे खड़े होकर अपने आप को सॉफ किया और नंगी चलती हुई अपने रूम में गयी और बेड पर लेट गयी….
कब उसका बदन सूखा, कब उसकी आँख लगी उसे पता ही नही चला.
ये जवानी का उन्माद था जो उसके सिर चढ़कर उसे गहरा नशा प्रदान कर रहा था…
ये तो बस शुरूवात थी…
अभी तो इस नशे में उसे पूरी तरह से भीगना था.
