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जवानी के अंगारे – Update 18

यानी वो पहले से ही प्लान करके बैठी थी की आज वो सर का माल अंदर लेगी

पर जो अभी हुआ था अंदर , उसे देखकर और सुनकर अनु ज़रूर मायूस हो चुकी थी.

वो उठी और दबे पाँव बाहर निकल गयी और फिर से उसने बाहर का लॉक लगा दिया

पर निकलने से पहले उसने एक निश्चय ज़रूर कर लिया

वो बाहर आई और कुछ देर बाद उसने बेल बजा दी अपने घर की

अंदर नंगे लेटे हुए सुधीर और शेफाली एकदम से चोंक गये

टाइम देखा तो अनु के आने में अभी भी 1 घंटा बचा था

यानी कोई और होगा, शायद कूरियर वाला, क्योंकि शेफाली ने कुछ मंगवा भी रखा था ऑनलाइन

इसलिए उसने सुधीर सर को बाहर भेजकर वो पैकेट लाने को कहा, क्योंकि उसे कपडे पहनने में ज्यादा टाइम लगता, सुधीर सर को नही

सुधीर ने जल्दी से अपनी पेंट और शर्ट पहनी और बाहर चल दिए

इस बात से बेख़बर की बाहर दरवाजे पर अनु उनकी पोल खोलने का इंतजार कर रही है

************

उधर सुधीर सर के पैरों की आहट दरवाजे तक आ रही थी और इधर अनु का दिल तेज़ी से धड़क रहा था

दिमाग़ एकदम से सुपरएक्टिव मोड पर आ गया

जो होने वाला है

जो होगा

उसका क्या परिणाम होगा

ये सब 5 सेकेंड में कैलकुलेट कर लिया उसने

और जैसे ही सुधीर सर ने अंदर से दरवाजा खोलकर बाहर देखा, वो उछलकर साइड में लगे खंबे के पीछे जा छिपी

बाहर कोई नही था, ये देखकर उन्हे बड़ा आश्चर्य हुआ

पूरा बाहर निकलकर वो देख नही सकते थे

किसी के द्वारा देखे जाने के डर था इसलिए दरवाजा बंद करके वो चुपचाप अंदर आ गया

अनु ने अपना सिर पीट लिया

‘ये क्या करने जा रही थी अनु की बच्ची, सारा खेल बिगड़ जाता अभी, सुधीर सर को ऐसे रंगे हाथो पकड़ने का मतलब था उन्हे जिंदगी भर के लिए शर्मिंदा कर देना (जो वो नही चाहती थी), हो सकता है उसके बाद वो उसके लिए और उसकी मॉम के लिए ऐसी बेरूख़ी अपना ले जो वो सहन ही ना कर पाए, ऐसे में क्या कर सकती है वो, अपने बाप की उम्र के आदमी से दिल लगाने का मतलब ये तो नही की उसपर उसका हक़ हो गया है, वो सिर्फ़ उसकी जवानी के मज़े देने वाला एक साधन है उसके अलावा कुछ नही, और उसकी मॉम के लिए भी वो वही साधन है, फ़र्क सिर्फ़ इतना है की उनका ऐसा करना उनकी उम्र के हिसाब से सही है…..वैसे देखा जाए तो उनके लिए सुधीर सर बिल्कुल सही है”

ये ख़याल आते ही उसकी आँखे चमक उठी

“यसस्स……ये बात मैने पहले क्यो नही सोची….सुधीर सर और मॉम एकदम पर्फेक्ट जोड़ी है, सुधीर सर तो शादी के बारे में भी सोच रहे है, वो अगर उसके पापा बनकर उसके घर आ जाए तो पूरी लाइफ उनके साथ वो मज़े ले सकती है….वाउ”

वो खुद ही बड़बडाये जा रही थी और उसकी आँखो की चमक बढ़ती जा रही थी

“और आज अगर उन्हे मैने पकड़ लिया तो ये सब यहीं ख़त्म हो जाएगा, मॉम भी शायद उसके साथ वो सब करने से कतराएगी जो पिछले कुछ दिनों से वो दोनो कर रहे थे, … “

यानी ऐसा करने में उसका डबल घाटा होगा जो वो हरगिज़ नही चाहती थी..

औमें र वैसे भी उसका ये आखरी साल था स्कूल

अगले साल से तो कॉलेज शुरू हो जाएगा, फिर तो सर से मिलना भी मुश्किल हो जाएगा

अगर वो उसके पापा बनकर उसके घर ही रहेंगे तो पूरी लाइफ उनसे चुद सकती है.

सर और मॉम की शादी की बात से उसके दिल में कुलबुली सी होने लगी थी

पता नही सर इसके लिए राज़ी होंगे या नही पर मॉम को तो इस उम्र में एक मर्द की सख़्त ज़रूरत है

ये बात वो महसूस भी कर चुकी थी

सिर्फ़ एक ही परेशानी थी इसमें

उसकी मॉम की उम्र और उनकी बेटी यानी मैं

सर ने तो अभी शादी भी नही की थी

और उनकी उम्र शायद मॉम से 5 साल कम होगी

उम्र का तो कोई पंगा नही पर एक जवान बेटी का होना शायद समाज और उनके घर वालो की नज़रों में काफ़ी ग़लत रिश्ता कहलाएगा

वो काम सर को करना होगा

वो देख लेंगे

पहले तो सर को पटाना होगा इस शादी के लिए

और उन्हे कैसे पटाना है ये उस जैसी जवान लड़की को बताने की ज़रूरत नही थी

वो अभी तक जो काम अपने मज़े के लिए कर रही थी वो अब एक मिशन की तरह करेगी

पहले मज़े लेने के लिए वो तरस रही थी

अब वो इस काम के लिए सर को तरसाएगी

और तब तक तरसाएगी जब तक वो इस शादी के लिए मान नही जाते

और इसलिए क्या-2 करना है ये उसके दिमाग़ पकना शुरू हो में चुका था

और इसकी शुरूवात आज से ही करनी थी उसे

पर सर को रंगे हाथो पकड़वा कर नही , किसी दूसरे तरीके से

वो जान तो चुकी थी की अंदर उसकी मॉम और सुधीर सर 2 बार चुदाई कर चुके है

इसलिए थोड़ी देर में वो बाहर आ ही जाएँगे

इसलिए अपनी प्लानिंग के अनुसार वो वहाँ अपने मोहल्ले से निकलकर माल में जाकर खड़ी हो गयी, क्योंकि बाहर निकलने का रास्ता वहीं से था

पर जैसा वो सोच रही थी की सर जल्दी आएँगे , वैसा हुआ नही

कारण था शेफाली की चूत के अंदर का वो दाना , जो फिर से सतरंगी तरंगे छोड़ रहा था

शेफाली : “क्या हुआ सुधीर, कौन था ? “

वो अपने आप को चादर से ढक कर बैठी थी

सुधीर : “कोई नही, बाहर गया तो कोई नही था….”

शेफाली : “पड़ोस के शरारती बच्चे होंगे, वो कभी-2 ऐसा करते है टोली बनाकर…”

इतना कहकर उसने मुस्कुराते हुए अपनी चादर उतार दी

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सुधीर ने उसके नशीले जिस्म को उपर से नीचे तक देखा तो उसका लॅंड एक बार फिर से टनक उठा

वो करना तो फिर से चहता था पर उसका लॅंड दर्द कर रहा था , 2 बार की चुदाई ने उसके अंदर की सारी एनर्जी ख़त्म कर दी थी

उसने टाइम देखा, शेफाली समझ गयी की उसे शायद अनु के घर आने का डर सता रहा है

शेफाली : “अभी से घड़ी क्यों देख रहे हो…अभी तो स्कूल की छुट्टी होने एक घंटे का टाइम है, फिर उसे आधा घंटा लगता है घर आने में …सो देखा जाए तो हमारे पास अभी डेढ़ घंटा है…”

इतना कहते हुए वो अंगड़ाई लेकर बेड के किनारे तक आई और उसने पेंट के उपर से ही सुधीर के लॅंड को छू लिया, जो कुछ-2 सख़्त होने लगा था

सुधीर : “वो…वो तो ठीक है, पर अभी…अभी मुझे कुछ देर का ब्रेक चाहिए, ताकि पूरा मज़ा दे सकूँ तुम्हे…और इसके लिए टाइम की कमी है…”

शेफाली : “वो तुम मुझपर छोड़ दो डार्लिंग…वो औरत ही क्या जो मर्द को चुदाई के लिए तैयार ना कर सके”

उफफफ्फ़,

शेफाली की इस बात ने सुधीर के लॅंड की गहराई तक दस्तक दे डाली

एक मर्द भी तो यही चाहता है की उसे ऐसी औरत मिले जो हमेशा सैक्स के लिए तैयार रहे

उसके बोलने से पहले वो समझ जाए की वो क्या चाहता है

लॅंड चुसवाना, चूत चूसना , चूत या गांड मारना या कुछ और भी…

इस वक़्त तो सुधीर सिर्फ़ अपने लॅंड की मसाज करवाना चाहता था उसके गुलाबी होंठो से, और शेफाली ने वो किया भी

शेफाली बेड के किनारे बैठ गयी और उसने सुधीर की पेंट की जीप खोल दी

वो बेचारा कुछ समझ पाता इस से पहले ही उसका आधा उठा लॅंड लटके हुए रबड़ के लॅंड की तरह लहराता हुआ शेफाली के मुँह में घुस गया, जिसे वो चपर -2 करके चूसने लगी

आधे घंटे पहले की चुदाई ने उसके लॅंड को सुजा कर रख दिया था,

शेफाली के गर्म मुँह में जाकर वो सिसक उठा,

नसों की तरावट करने वाली गर्माहट उसके लॅंड को अगली चुदाई के लिए तैयार कर रही थी

अपने पंजे पर उठकर उसने शेफाली के सर को पकड़ लिया और उसके लॅंड चूसने की गति को धीरा करने के लिए सिर को अपने हिसाब से आगे पीछे करने लगा ताकि मज़ा भी आए और दर्द भी ना हो

शेफाली भी उसकी दशा समझ गयी और उसे मालिक मानकर एक स्लेव की तरह अपने आप को उसके हवाले कर दिया

मन तो उसका कर रहा था की वो किसी कुतिया की तरह उसके गले में पत्ता डाले और उसे अपने इशारे पर नचाकर अपना लॅंड चूसने के लिए दे,

जो वो चाहे वो करवाए

अपने पैरों से लेकर लॅंड तक का सारा हिस्सा चटवाए

वो सब करने को तैयार थी

बस वो गले का पट्टा ले आए कहीं से

अपने आप को ऐसी स्थिति में सोचने मात्र से उसकी चूत का पानी उमड़-2 कर बाहर गिरने लगा

अब उससे रहा नही जा रहा था

उसने आनन फानन में सुधीर के कपड़े निकाल फेंके और उसे बेड पर खींच लिया

शेफाली की ये बेताबी देखकर सुधीर का लॅंड भी फुफ्कारे मारने लगा

आख़िर वो भी एक मर्द था

कब तक अपने आप को रोकता

उपर से शेफाली जैसी गर्म माल जो चुदाई के लिए खुद ही उसे उकसा रही थी

चुसाई के बाद उसका लॅंड रॉकेट जैसा हो चुका था

जो उसकी चूत के अंतरिक्ष में जाने के लिए पूरी तरह से तैयार था

उसने शेफाली की टांगे फेलाइ और उसके उबल रही चूत पर अपने होंठ रख दिए

“आआआआआआआअहह……. ओह सुधीईईईरररर, यू उ आआआआआर सूऊऊऊऊऊऊऊऊओ गूडssssssss ”

उसकी चूत का स्वाद सच में काफ़ी मीठा था

ये स्वाद उसने अनु के होंठो से भी चखा था

क्या ऐसा हो पाएगा कभी की वो दोनो माँ बेटियों को एक साथ चोद सकेगा

उन्हे इसी बिस्तर पर लिटाकर उनकी चूत एक-2 करके चूस सकेगा

इस कल्पना मात्र से ही उसका लॅंड बेकाबू सा हो गया और उसने आव देखा ना ताव, सीधा उसकी खुली टांगो के उपर लेटता चला गया और उसका लॅंड सीधा उसकी चूत की दीवारों को रगड़ता हुआ अंदर तक धंसता चला गया

कहाँ तो शेफाली सोच रही थी की अभी कुछ देर और वो उसकी चूत चाटेगा पर एकदम से पता नही कौन सा भूत घुस आया उसके अंदर की उसने सीधा लॅंड ही पेल दिया

उसके इस अचानक प्रहार से वो बिफर उठी और उसके मुँह मे अपनी छाती घुसा कर उसे अपना निप्पल चूसने के लिए दे दिया

‘’आआआआआआआआआअहह साआआआआआआआआआाअल्ल्लीीईईईई………… इतनी जल्दी है तुझे……… चूत मारने की मेरी……. तो मार…… ले ज़ोर से माआआआआआआअर….. और चूस मेरे बूब्स को……काट इन्हे अपने दांतो से…….खा जा मुझे………..भेंनचोद ….”

एकदम बावली सी हो गयी थी शेफाली इस वक़्त….

शायद आज तक हुई चुदाइयों में सबसे रोमांचक चुदाई थी उसकी ये…

मुँह से गालियाँ निकल रही थी उसकी

सुधीर को भी इसमें मज़ा आ रहा था

एक औरत के हाथों इस तरह डोमिनेट होने में उसे एक अलग ही तरह का मज़ा मिल रहा था

जिसे लॅंड के ज़रिए वो उसे वापिस भी कर रहा था

और लगभग 15 मिनट तक लगातार चोदने के बाद वो पल भी आ ही गया जब वो झड़ने को तैयार था

और इस बार उसे पूछने की भी ज़रूरत नही थी की माल कहाँ निकाले,

अंत में आकर वो शेफाली से ज़ोर से चिपक गया और उसकी चूत की माँग को अपने लॅंड के माल से पूरा भर दिया

जो रख पाई वो अंदर गया और जो रह गया वो बूँद-2 करके बाहर निकल आया

कुछ ही देर में सब शांत हो गया

उन्होने टाइम देखा

अभी 45 मिनट और थे

पर वो आख़िरी वक़्त तक का तो इंतजार नही कर सकते थे

इसलिए सुधीर और शेफाली दोनो बाथरूम में जाकर एक साथ नहाए और अपने-2 कपड़े पहन कर तैयार हो गये

जाने से पहले दोनो ने एक लंबी सी स्मूच ली और अगली बार जल्दी मिलने का वादा भी किया

वहां से निकलकर जैसे ही सुधीर अपनी कार से मैन रोड तक आया, उसे दूर से अनु आती हुई दिखाई दे गयी

वो बेचारा हक्का बक्का रह गया, क्योंकि अभी भी स्कूल छूटने में आधा घंटा था

वो छुप भी नही सकता था, क्योंकि अनु ने उसे देख लिया था और उसे हाथ हिला कर हाय भी बोल रही थी

बेचारे सुधीर की फट्ट कर हाथ में आ गयी

उसके दिमाग़ ने तेज़ी से काम करना शुरू कर दिया ताकि कोई अच्छा सा बहाना बनाकर उसे सुना सके

बेचारा वो नही जानता था की अनु सब कुछ जानती है,

और वो अब उसके जाल में फंसने जा रहा है

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