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जवानी के अंगारे – Update 17

कमरे का तूफान थम चुका था और अभी भी उनके पास 4 घंटे का समय था

इसलिए कुछ देर बाद नहा धोकर उन्होने बिना कपड़े पहने ही नाश्ता किया और वापिस बेड पर आकर एक दूसरे से चिपककर लेट गये

अपने अगले राउंड की तैयारी में

और यही वो वक़्त था जब अनु बाहर पहुँच चुकी थी

और सुधीर सर की कार देखकर वो बेचारी हैरान थी

उसने अपने बेग से घर की चाभी निकाली और लॉक खोलकर अंदर आ गयी

पर बेचारी को ये नही पता था की आज उसकी लाइफ का सबसे बड़ा झटका उसे लगने वाला है

**********

अंदर आते हुए अनु का दिल किसी अनहोनी आशंका से काँप रहा था

सुधीर सर की कार का उसके घर के बाहर खड़ा होना कोई इत्तफ़ाक नही हो सकता था

कहीं वो और उसकी मोंम ….

नही नही….ऐसे कैसे हो सकता है..

वो तो एक दूसरे को अच्छे से जानते भी नही है

और जानते भी होते तो सुधीर सर ऐसा थोड़े ही करेंगे

वो तो उसके साथ ही वो सब करना चाहते है

देखा था उसने उनकी आँखो में

मौका मिलता तो अब तक चुदाई भी कर चुके होते वो दोनो

फिर भला वो क्यों एक जवान बेटी के सामने उसकी बूड़ी माँ को चुनेंगे

बूढ़ी …वो बूढ़ी तो बिल्कुल नही है

उसने भी तो चखा था अपनी माँ को

एकदम उसके जैसी ही गर्मी भरी हुई थी उसके अंदर भी

इस उम्र में भी उस जैसी जवान लड़की को टक्कर देने की काबिलियत थी उनमें

वैसे भी , औरत इसी उम्र में आकर सबसे ज़्यादा उत्तेजना महसूस करती है

पर हो सकता है जैसा वो सोच रही हो वो सब उसका वहम हो

पर जैसे-2 वो अंदर आती जा रही थी, उसे अपनी मोंम और सुधीर सर के हँसने की आवाज़ें सॉफ सुनाई देने लगी

यानी जो वो सोच रही थी वो सब सच था

और जब वो मॉम के बेडरूम के बाहर पहुँची तो अंदर का नज़ारा देखकर उसकी आँखो के सामने अंधेरा सा छा गया

उसका शक सही निकला

उसकी मॉम शेफाली और सुधीर सर एक दूसरे से चिपक कर बेड पर नंगे लेटे थे

शेफाली का हाथ सुधीर के आधे खड़े लॅंड पर था

वही लॅंड जो कल उसके मुँह में था

अनु की तो झाँटे सुलग गयी ये नज़ारा देखकर

ये साले मर्द कितने हरामी होते है

ठरकी कहीं का

कल तक उसके साथ मज़े ले रहा था ये आदमी

और आज उसी के घर पर उसी की माँ चोद रहा है

मन तो कर रहा था उसका की अंदर जाए और दोनो के सामने ताली बजा कर उनकी पोल खोल दे और ऐसी बेइज़्ज़ती करे की वो जीवनभर उसके साथ आँख ना मिला सके

पर चाहकर भी वो ऐसा नही कर पाई

शेफाली के चेहरे की खुशी देखकर शायद वो रुक गयी थी

इतने सालो से उसकी माँ बिना सैक्स के रही थी

शायद यही कारण था की वो ये सब कर रही है

वैसे देखा जाए तो उसकी माँ कुछ ग़लत नही कर रही थी

ग़लत तो वो खुद कर रही थी, इस कच्ची उम्र में अपने बाप की उम्र के आदमी के साथ सैक्स करने की सोच रही थी वो

पर सुधीर सर भी तो उसके साथ वो सब करना चाहते है

यानी एक तरफ माँ और दूसरी तरफ बेटी

वो दोनो के साथ मज़े लेना चाहता है

मन तो उसका कर रहा था की अंदर जाकर सुधीर सर को कूट डाले

पर ऐसा करने से वो अपनी माँ की नज़रों में एक विलेन बनकर रह जाएगी जो उसकी खुशी देख नही सकती थी

अब वो अपनी माँ को ये थोड़े ही बताएगी की जिसके साथ वो सैक्स कर रही है वो भी उन्हे चाहती है

उनका सुधीर सर के साथ सैक्स करना उम्र के हिसाब से और हालत के हिसाब से सही था

पर वो खुद दोनो ही जगह ग़लत कहलाती

इसलिए बेचारी दर्शक बनकर खड़ी रहने के अलावा कुछ और नही कर सकती थी

शेफाली के हाथ लगकर सुधीर का छोटा सिपाही एक और जंग लड़ने के लिए तैयार होने लगा था

वो भी शेफाली के मोटे मुम्मे मसल कर उसे उत्तेजित कर रहे थे

और साथ ही उसके होंठो का रसपान करके अपने अंदर नयी उर्जा का संचार भी कर रहे थे

सुधीर : “उम्म्म्म शेफाली तुम्हारे होंठ कितने मीठे है, मन करता है इन्हे चूसता ही रहूं ”

अनु को पता था की वो सही कह रहे थे

उसकी मॉम के होंठो की मिठास तो उसे भी पसंद थी

शायद ज़्यादा फ्रूट खाती है वो इसलिए इतनी मीठी है

उपर से भी और नीचे से भी

वो दोनो किसी पुराने लवर्स की तरह नंगे लिपट कर एक दूसरे से बात कर रहे थे

अब सुधीर सर का लॅंड पहले से बड़ा हो चुका था

अनु के मुँह में भी पानी आ रहा था उसे बड़ा होते देखकर

एक मर्द को, सुधीर सर को, आज उसने अपनी लाइफ में पहली बार पूरा नंगा देखा था उसने

इस बात पर ध्यान जाते ही उसके दिल की धड़कने तेज होने लगी

टाँगो के बीच एक जानी पहचानी सी नमी आ गयी

और वो छिपकर वहीं दरवाजे की दरार से अंदर का नज़ारा देखने लगी

मन तो उसका कर रहा था की वो अंदर जाए और बैठ जाए सुधीर सर के सामने

अपनी छाती नंगी करके

अपनी जीभ निकाल के

और नंगे सुधीर सर दाल दे उसके मुंह में अपना मोटा लंड

और चोद दे उसके मुंह को

किसी रंडी की तरह

चूसने के बारे में वो सोच रही थी पर वो काम उसकी मॉम ने कर दिया

वो उठी और सुधीर सर के पैरों के बीच जाकर बैठ गयी

लंड मॉम को देखकर भी ज्यादा भड़क उठा

फिर मैंने वो देखा जो अक्सर पोर्न मूवीज में दिखाया जाता है

मॉम ने एक गाड़ी सी थूक सीधा सर के लंड पर गिरायी और उसे ऊपर से नीचे तक क्रीम की तरह मल दिया

और फिर कुछ देर की मालिश के बाद वो झुकी और सर की आँखों में देखते हुए धीरे-२ वो उनके लंड को निगल गयी

उफ़फ्फ़…..

उनके चेहरे का सुकून देखकर ही पता चल रहा था की उन्हे वो मोटा लॅंड चूसने में कितना मज़ा आ रहा था

वो नीचे फर्श पर बैठ गयी और उसका हाथ अपने आप उसकी स्कर्ट के अंदर घुस गया और अपनी गन्ने के रस से भीगी चूत को पेंटी के उपर से ही सहलाने लगी वो

शेफाली की जीभ सुधीर के लॅंड पर ऐसे चल रही थी जैसे वो कोई कुल्फ़ी चाट रही हो

नीचे से लेकर उपर तक सिर्फ़ जीभ की लार से नहला रही थी वो

और उपर जाते-2 लॅंड के उपर लगे हीरे को वो मुँह में लेकर चूस रही थी

और अपने हाथ से वो सर की बॉल्स को सहला भी रही थी

फिर नीचे आने से पहले लॅंड के छेद को जीभ की नोक से कुरेद कर सुधीर सर को सिसकियां लेने पर मजबूर कर रही थी

ये नज़ारा देखकर अनु को ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी क्लास में बैठी है और लॅंड कैसे चूसा जाता है इसका प्रॅक्टिकल देख रही है, सीख रही है

उसने सोच लिया की अगली बार जब भी उसे मौका मिलेगा वो भी इसी तरह से लॅंड चुसेगी…यही तरीका अपनाएगी

सर उसे स्कूल में सिखाते थे और उसकी माँ उसे यहाँ सीखा रही थी

दोनो ही उसके टीचर्स थे इस वक़्त

जो आपस में मिलकर एक नया अध्याय लिखने की कोशिश कर रहे थे

लॅंड अब रॉकेट बन चुका था

इतना लंबा की एक ही बार में माँ-बेटी दोनो को भेद डाले

पर सर को तो उसे और भी लंबा करना था

पिछली बार से भी ज़्यादा

ताकि शेफाली को और भी ज़्यादा मज़ा मिले

इसलिए उन्होने शेफाली को घुमा कर उसके पैरों को अपने उपर कर लिया और 69 की पोज़िशन में लेकर अपने होंठ शेफाली की टपक रही चूत पर रख कर उसका रसपान करने लगे

शेफाली भी किसी कुशल नर्तकी की तरह बिना लॅंड को मुँह से निकाले घूमती चली गयी

ये देखकर अनु की हालत पहले से ज़्यादा खराब हो गयी

उसने कच्छी साइड में करके अपनी दो उंगलिया अपनी चूत की फांको में उतार दी और उसे जोरों से रगड़ने लगी

ये 69 वाली पोज़िशन का काम तो वो कब से करने के सपने देख रही थी सर के साथ

अपनी मॉम के साथ तो वो काई बार कर चुकी थी वो

बस सर के साथ करने की इच्छा थी

और सुधीर सर का चेहरा देखने वाला था

वो इसलिए भी की पहली बार उनके हाथ शेफाली की चूत लगी थी चूसने के लिए

पहले तो चुदाई का नशा ही इतना था की आने के साथ ही सीधा लॅंड अंदर ढोंक थोक दिया था उन्होने

अब वो शेफाली की चूत की पंखुड़ियों को अच्छे से फेला कर अंदर का दाना निकाल कर चूस रहे थे

उनके दोनो होंठ चूत के इतने अंदर तक जा रहे थे की वो अनु को दिख भी नही रहे थे

क्या सर उसकी चूत को भी ऐसे ही अंदर मुंह डालकर चूसेंगे

किसी कुत्ते की तरह अपनी थूथनी अंदर घुसेड़ देंगे उसकी चूत में

वो जब घुसेंगे तब घुसेंगे

पर अभी के लिए तो शेफाली की चूत में थी उनकी थूथनी

चूत की महक से और अपने लॅंड पर मिल रही स्पेशल मसाज़ से सर का लॅंड अब पहले से ज़्यादा लम्बा और मोटा हो चुका था

उसकी नसें सॉफ नज़र आ रही थी

उन्होने शेफाली को अपने उपर से नीचे उतारा और उसे घोड़ी बनाकर अपने फड़फड़ाता हुआ लॅंड पीछे से उसकी चूत पर लगाकर अंदर धकेल दिया

चूत इतनी गीली थी की वो मोटा लॅंड बड़ी आसानी से अंदर फिसलता चला गया

और पूरे कमरे में शेफाली की एक बर्फ़ीली सिसकारी तैर गयी

वो तो खुलकर सिसकारी मार रही थी, चुदने के मज़े ले रही थी

उसे क्या पता था की घर पर वो अकेले नही है

उसकी बेटी वो सब सॉफ सुन भी रही थी और देख भी रही थी

और शायद उसका मज़ा भी ले रही थी अब तो

कच्छी का अवरोध उससे बर्दाश्त नही हुआ और उसने वो उतार फेंकी

अब वो नंगी चूत पर उंगलियाँ चलाती हुई अपनी चूत के दाने को मसल कर , निचोड़ कर मज़े ले रही थी

सर भी शेफाली के कूल्हे पकड़कर उसकी चूत का बेंड बजा रहे थे

हर धक्के से शेफाली के भरे हुए चूतड़ लहरा कर रह जाते

उनके मिलन से निकल रही ठप्प ठप्प की आवाज़ें और शेफाली मे मुँह से निकल रही उह्ह आहहह की आवाज़ मिलकर एक नया ही संगीत निकाल रहे थे

मॉम का चेहरा देखने लायक था

उनका चेहरा अपनी चुदाई से दमक कर चमक रहा था

कुछ देर तक उसे ऐसे चोदने के बाद सुधीर सर ने मॉम को अपने उपर बुला लिया

क्योंकि चुदाई के साथ-2 वो उसे चूमना भी चाहते थे और उसके मुम्मों को पकड़कर उनका दूध भी पीना चाहते थे

शेफाली भी शायद यही चाहती थी

इसलिए उपर बैठकर जैसे ही वो लॅंड उसने अंदर लिया वो आनंद से कराह उठी

वो झुकी और सुधीर सर के होंठो से होंठ मिला कर उन्हे चूसने लगी

सर के हाथ उसके बूब्स पर थे, वो उसके निप्पल्स को अपनी उंगलियो में दबा कर उमेठ रहे थे

और नीचे से धक्के लगाकर अपना पहाड़ी लॅंड उसकी चूत में पूरा उतार रहे थे

अनु के हाथ भी तेज़ी से अपनी चूत पर चलने लगे थे

अब वो किसी भी वक़्त झड़ सकती थी

अंदर भी लगभग वही माहौल था

सर झड़ने के करीब थे

उन्होने अपना लॅंड पिछली बार की तरह बाहर निकालना चाहा पर शेफाली ने रोक दिया

वो धीरे से फुसफुसाई

“अंदर ही निकालो….अंदर ही….आई वॉंट टू फील इट ”

सर कुछ बोलने की हालत में नही रह गये थे

वो शेफाली के एक्शप्रेशन देखकर ही पिघलते चले गये और उनके लॅंड का रस पिचकारियाँ मारता हुआ शेफाली की चूत की दीवारों की वाइट वॉश करने लगा

“आआआआआआआआहह…… शेफ़ाआआआाआली………………………. उम्म्म्ममममममममममममममममममममम”

शेफाली तो अब तक 2 बार झड़ चुकी थी….

सिर के लॅंड से निकली आग ने उसकी चूत की परतों में जमीं रस की आख़िरी बूँदो को भी पिघला दिया और वो भी झड़ती हुई निढाल सी होकर सिर के उपर गिर पड़ी

“ओह माआआआआआयययययययययययी गोडssssss ……. वॉट ए फीलिंग………मजाअ आआआआआ गय्ाआआआआआ”

और उसके बाद दोनो एक दूसरे को बुरी तरह से चूमते हुए वहीं पड़े रहे

उनका झड़ना देखकर अनु के हाथ भी तेज़ी से अपनी चूत पर चलने लगे और जब वो झड़ी तो उसने बड़ी मुश्किल से अपने मुँह पर हाथ रखकर अपनी सिसकारियाँ दबाई

अब माहौल शांत हो चुका था

तीनो झड़कर शांत हो चुके थे

सुधीर सर ने शेफाली की आँखो में देखा जिनमे एक अलग ही चमक थी

वो बोले : “बाहर क्यों नही निकालने दिया….कॉन्डोम भी नहीं लगाया था , प्रेगञेन्ट हो गयी तो”

शेफाली भी मस्ती के मूड में थी, वो बोली “हो गयी तो हो जाने देंगे…”

सुधीर : “अच्छा ….और दुनिया को क्या कहेंगे….अपनी बेटी अनुप्रिया को क्या बोलोगी ”

शेफाली : “बोल दूँगी…पसंद आ गये है तुम्हारे सर मुझे….शादी कर लेंगे…”

ये बात सुनकर सुधीर सर के साथ-2 अनु भी चोंक गयी

सर का चेहरा देखकर शेफाली खिलखिलाकर हंस दी

वो बोली : “हा हा…..अपना चेहरा तो देखो….इतना डर क्यों रहे हो….मैं सुंदर नही हूँ क्या…शादी नही कर सकते क्या मुझसे…”

सुधीर को समझ नही आ रहा था की वो सीरियस है या मज़ाक कर रही है

वो बोले : “उम्म….वो….नही…ऐसा कुछ नही है….तुम सच में खूबसूरत हो….पर….”

शेफाली : “पर…पर क्या ? “

सुधीर : “वो दुनिया….क्या बोलेगी…और…तुम्हारी बेटी..”

अब मामला सीरियस हो रहा था कमरे में

अनु को भी समझ नही आ रहा था की उसकी मॉम सीरियस है या ऐसे ही सर के साथ पंगे ले रही हैम उन्हें चेक कर रही है

शेफाली : “दुनिया की मुझे कोई परवाह नही है…और रही बात अनु की तो वो अच्छे से जानती है की मुझे इस वक़्त एक मर्द की कितनी ज़रूरत है….”

बात तो वो सही कह रही थी

पर फिर भी सुधीर सिर कुछ सोचे जा रहे थे

उन्हे गहरी सोच मे देखकर शेफाली की एक बार फिर से हँसी छूट गयी

और वो बोली : “डोंट वरी….अभी ऐसा कुछ प्लान नही है मेरा….और रही बात अंदर निकालने की तो उसके लिए मैने पहले से ही टैबलेट ले रखी है, प्रेगनेंट मुझे भी नहीं होना”

यानी वो पहले से ही प्लान करके बैठी थी की आज वो सर का माल अंदर लेगी

पर जो अभी हुआ था अंदर , उसे देखकर और सुनकर अनु ज़रूर मायूस हो चुकी थी.

वो उठी और दबे पाँव बाहर निकल गयी और फिर से उसने बाहर का लॉक लगा दिया

पर निकलने से पहले उसने एक निश्चय ज़रूर कर लिया

वो बाहर आई और कुछ देर बाद उसने बेल बजा दी अपने घर की

अंदर नंगे लेटे हुए सुधीर और शेफाली एकदम से चोंक गये

टाइम देखा तो अनु के आने में अभी भी 1 घंटा बचा था

यानी कोई और होगा, शायद कूरियर वाला, क्योंकि शेफाली ने कुछ मंगवा भी रखा था ऑनलाइन

इसलिए उसने सुधीर सर को बाहर भेजकर वो पैकेट लाने को कहा, क्योंकि उसे कपडे पहनने में ज्यादा टाइम लगता, सुधीर सर को नही

सुधीर ने जल्दी से अपनी पेंट और शर्ट पहनी और बाहर चल दिए

इस बात से बेख़बर की बाहर दरवाजे पर अनु उनकी पोल खोलने का इंतजार कर रही है

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