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जवानी के अंगारे – Update 16

स्कूल बंद करने का समय हो चला था अब

इसलिए पीयून एक बार फिर से आता हुआ दिखाई दिया

अभी के लिए कुछ और हो नही सकता था

पर पीयून की नज़रों में आए बिना , आज से ज़्यादा मज़ा कल कैसे मिल सकता है, ये जान चुके थे दोनों

पर अभी तो सर को शेफाली की चूत के उद्घाटन का प्लान बनाना था

उसे और देर तक तड़पाकर वो हाथ आई हुई इस हीरोइन को खोना नही चाहते थे

अगला दिन काफी मजेदार होने वाला था

स्कूल से निकलकर अनु ने ऑटो लिया और घर की तरफ चल दी

पूरे रास्ते वो रह रहकर अपने बूब्स सहला रही थी, उनमे हो रही चुभन उससे अब बर्दाश्त नही हो रही थी

मन तो कर रहा था की इस ऑटो वाले को रुकने के लिए बोले और उसे पीछे बुलाकर अपने नन्हे बूब्स उसे चूसने के लिए दे डाले

इस वक़्त तो उसे अपने बूब्स चुसवाने लिए बस एक मर्द चाहिए था

फिर चाहे वो कोई भी हो

इस सैक्स की ललक ने उसे एक रंडी जैसा सोचने पर मजबूर कर दिया था

अभी तो उसने लॅंड लिया नही था किसी का

वो ले लेगी तो क्या कारनामे करेगी, ये सोचकर ही उसकी चूत में अजीब सी कसमसाहट होने लगी

ये आज पहली बार हुआ था उसके साथ

सर के साथ थी तब भी ऐसी फीलिंग आई थी नीचे से

शायद अभी तक जो आग उपर यानी उसके जवानी के अंगारो में लगी हुई थी, वो फैलकर नीचे तक आ चुकी थी

उसे ऐसा लग रहा था जैसे सैंकड़ो चींटियां उसकी चूत की दीवारों पर रेंग रही है

पर ये फीलिंग थी बड़ी ही मजेदार

क्योंकि एक अजीब सा गीलापन था इसमें

गाड़ा रास निकल कर अंदर ही अंदर घूम रहा था

जाँघो को भींचती तो फ़च की आवाज़ निकलती और एक रेशमी सा एहसास मिलता पूरे शरीर को

इसलिए जाँघो को आपस में रगड़ने में भी उसे एक नशे की प्राप्ति हो रही थी

ऑटोवाला : “मेडम….ओ मेडम….कहाँ उतरना है, आपका इंदिरपुरम तो आ गया….”

मैं जैसे सपने से जागी

“उम्म्म…ओह्ह ……वो….वो बस थोड़ा और आगे, वो रेड लाइट के बाद जो मॉल है, वहीं उतार देना साइड में ….”

मैं शर्म से लाल हुए जा रही थी उसे पैसे देते हुए भी

क्योंकि वो घूर कर मुझे उपर से नीचे तक देख रहा था

शायद जान चुका था की मैने ब्रा नही पहनी है और उपर से मैं जिस अंदाज से अपनी छाती और जांघे मसल रही थी उसे थोड़ा बहुत डाउट हो गया था की मैं खुद से ही मज़े ले रही थी

पर स्कूल ड्रेस में देखकर शायद वो कोई कदम उठाने से डर रहा था..

मैने भी चेंज वापिस लिया और तेज कदमो से चलती हुई घर पहुँची, लॉक खोला और रोजाना की तरह अपने कमरे में जाते-2 अपने सारे कपड़े निकाल फेंके

और पूरी नंगी होकर जब मेरी उंगलिया मेरी चिपचिपी चूत में उतरी तो ज़ोर से चिल्ला पड़ी मैं

“ओह………सुधीईईईईईर सर्ररर…………..य्आआआआआआआआररर्ररर…..कितना मज़ा आ रहा था……… उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़…… क्या सकककक करते हो आअप्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प……… देखो…..ये देखो…..अभी तक आपनी थूक लगी है इसपर……….आआआआआआआहह कााआआआअशह….आप यहां होते अभी…….खााआआआआअ जाआअती अभी आपकेकए……लॅंड को………….चूऊऊऊस लेती आपका लोढ़ा ….”

वो ज़ोर -2 से अपनी चूत में उंगलियों को पंप किये जा रही थी….और तब तक करती रही जब तक उछल-2 कर पानी की बौछारें बाहर ना गिरने लगी

आज जैसी वो पहले कभी नही झड़ी थी

वो नोट कर रही थी की जैसे-2 वो जवान हो रही है, सैक्स के प्रति बढ़ रही उसकी रूचि के कारण उसे झड़ने में ज़्यादा आनंद की अनुभूति हो रही है

उसके शरीर का एक-2 अंग किसी मर्दाना दबाव को महसूस करना चाहता था

ताकि वो मदमस्त होकर, अपनी आँखे बंद करके उस मर्दन का मज़ा ले सके

अपनी चूत से निकले चिपचिपे पानी को अपनी उंगलियों से इकट्ठा करके वो धीरे-2 अपने शरीर पर मल रही थी

जैसे शरीर को चिकना रखने के लिए कोई बॉडीलॉशन लगा रही हो

अपने बूब्स पर

गर्दन पर

चेहरे पर

और जब उसे नाक पर रगड़ा तो ऐसा महसूस हुआ जैसे अपनी सांसो पर भी उसने उस मनमोहक सी गंध का पैगाम लिख दिया है

अपने ही अंदर से निकली अंगूरी शराब के नशे ने उसकी आँखों का रंग गुलाबी कर दिया

और अपने ही घी में चुपड़ी हुई अनु कब नींद के आगोश में पहुँच गयी, उसे भी नही पता चला

शाम को जब उसकी नींद खुली तो मॉम के आने का वक़्त हो चुका था

वो नहा धोकर तैयार हुई और खाना खाने के बाद दोनो माँ बेटियों ने पिछली 2 रातों की तरह एक दूसरे को खूब चूमा चाटा

अनु की तो प्यास आज सुधीर सर ने भड़का दी थी और शेफाली आज प्यासी ही रह गयी थी

इसलिए दोनों अपनी प्यास एक दूसरे से बुझा रहे थे

अब तो शेफाली ने उस ऐप का इस्तेमाल करना भी बंद कर दिया था

सुधीर सर से चुदे बिना वो अभी किसी और से मिलना नही चाहती थी

वैसे भी सुधीर सर उसे काफ़ी पसंद आ रहे थे

जवान भी है वो

कुँवारा भी और स्कूल में पढ़ाता है तो उसे भी अपनी इज़्ज़त की उतनी ही परवाह है जितनी शेफाली को अपनी इज्जत की है

इसलिए कोई रिस्क या परेशानी नही थी उनके साथ अफेयर करने में

अगले दिन नहाते वक़्त अनु ने अपनी चूत के बाल अच्छे से सॉफ कर लिए क्योंकि उसने निशा से सुना था की मर्दों को चिकनी चूत चाटने में ज़्यादा मज़ा आता है यानी अब वो सुधीर सर से अपनी चूत चटवाना चाहती थी

पर स्टाफ रूम में रहते हुए वो कैसे हो पाएगा ये सोचने वाली बात होगी

पर देखा जाएगा, जब सर का लॅंड चूसा जा सकता है तो उसकी चूत भी वहीं चूसी जाएगी

तैयार होकर वो मॉम को बाय बोलकर स्कूल के लिए निकल गयी

आज वो पहले से ज़्यादा चहक रही थी

क्लास में निशा ने उसे दबोच लिया और उसकी खुशी का कारण पूछा तो उसने कल वाली बात पूरे विस्तार से बता डाली

क्योंकि शुरू से ही दोनों अपनी बातें एक दूसरे से नहीं छुपाते थे

निशा की तो चूत ही पनिया गयी वो सब सुनकर

सुधीर सर का लॅंड उन्ही के स्टाफ रूम में चूस्कर आई थी उसकी सहेली

उसका बस चलता तो उसे ऑस्कर दे डालती इस पर्फॉर्मेन्स के लिए

निशा : “यार…..तो कितनी लक्की है, सर का मोटा लॅंड चूसने में कितना मज़ा आया होगा ना…..यार, मेरा भी मन कर रहा है उनका चूसने का….”

उसकी बात सुनकर अनु हैरानी से उसे देखते हुए बोली : “अच्छा जी, अब तेरा भी मन कर रहा है, तू तो पहले से ही पूरे मज़े लेकर बैठी है अपने बाय्फ्रेंड से “

निशा : “कौन….वो संजू…..ओ हेलो, वो कोई मेरा बाय्फ्रेंड नही है, वो तो बस मज़ा लेने का एक ज़रिया है, ये मेरी कोई उम्र है भला बाय्फ्रेंड बनाने की “

ओह्ह तो वो शुरू से ही क्लियर है इस रिलेशनशिप को लेकर

ये सब जो वो संजू के साथ कर रही थी वो सिर्फ़ अपनी जवानी के मज़े लेने के लिए

वैसे ठीक भी था, अभी तो हमारी जवानी की शुरुवात है

यही मौका है हर तरह के एक्सपीरियन्स लेने का

बाय्फ्रेंड के चक्कर में एक पर ही टीके रहने में कोई फ़ायदा नही है

निशा : “हेलो, कहाँ खो गयी तू…..”

मैं : “नही वो बस ऐसे ही….मैं सोच रही थी की जब वो तेरा बाय्फ्रेंड नही है तो क्या मैं भी…..”

निशा का चेहरा खिल उठा, वो बोली : “वो तो मैं पहले ही समझ गयी थी , उस दिन तेरे घर जब पहली बार उसने मुझे फक किया था…वो जिस तरह से तुझे देख रहा था, तेरे नंगे बूब्स को छू रहा था, मुझे भी लग रहा था की वो तुझमे इंटरेस्टेड है, पर शायद मुझसे डर लग रहा था उसे, पर अब मुझे मेरे हिस्से का आनंद मिल चुका है तो तू क्यों पीछे रहे, आख़िर यू आर माय बेस्ट फ्रेंड, अब जल्द ही तेरी भी सेट्टिंग करवाती हू उसके साथ, अभी तो वो 2 दिन के लिए अपने गाँव गया है, उसकी रिश्तेदारी में कोई मर गया है, तो अपनी माँ को लेकर गया है, जैसे ही आएगा, प्रोग्राम बनाते है तेरे घर का…”

प्रोग्राम के नाम से ही अनु की चूत की चींटियां फिर से रेंगने लगी

निशा : “पर मेरी भी एक शर्त है, तू अपना हो जाने के बाद मेरी भी हेल्प करेगी सुधीर सर के साथ…..”

साली, कितनी कमीनी है, दोस्ती का नाम लेकर अदला बदली का खेल ख़ेल कर रही है

खैर, कोई बात नही, मुझे भी तो डबल मज़ा मिलेगा

सुधीर सर के बाद संजू का

इसलिए मैने भी मुस्कुरा कर हां कर दी

पर मेरी मुस्कुराहट थोड़ी देर में ही गायब हो गयी जब मुझे पता चला की आज सुधीर सर की तबीयत खराब थी, इसलिए वो स्कूल नही आए

मेरे तो सारे प्लान चोपट हो गये

मैने आज के लिए क्या-2 सोचा था

अपनी पुस्सी सर से सक्क करवाउंगी, उनके लॅंड को चूसूंगी

पर सब धरा का धरा रह गया

ये सर भी ना, अपना ध्यान नही रख सकते क्या

मेरा तो सारा मूड ही ऑफ हो गया

मैने भी तबीयत खराब का बहाना बनाकर शॉर्ट लीव ली और घर की तरफ चल दी

मन तो कर रहा था की सुधीर सर के घर जाकर उन्हे अच्छे से कूट डालूं

इतना गुस्सा आ रहा था

ऐसे ही मन ही मन कूड़ती हुई अपने घर पहुँच गयी

घर पहुँचकर देखा तो मैं हैरान रह गयी

सर की कार मेरे घर के बाहर खड़ी थी

ये कैसे हुआ, क्यों हुआ, अनु को कुछ पता नही चल पा रहा था

असल में हुआ ये था की एक दिन पहले जब सुधीर सर अनु के साथ स्टाफ रूम में अपना लॅंड चुसवा कर निकले थे तो शेफाली का कॉल आया था, जिससे सुधीर ने बाहर जाकर बात की थी

और शेफाली को अपने लॅंड के लिए तड़पता देखकर उनके दिमाग में ये प्लान आया था की अगले दिन वो स्कूल से छुट्टी कर लेंगे, और शेफाली को भी ऑफीस से छुट्टी लेने की सलाह दी थी उन्होने, ताकि अनु के घर आने से पहले वो अच्छे से चुदाई का आनंद ले सके शेफाली के घर पर

इसलिए अनु के स्कूल जाते ही शेफाली ने सुधीर को अपने घर की लोकेशन भेज दी, वो तो पहले से ही उसी एरिया में चक्कर लगा रहे थे , लोकेशन मिलते ही वो 10 मिनट में वहां पहुँच गये

शेफाली ने कल रात एक नाईटी पहनी हुई थी , जिसे रात को अनु ने उतार दिया था

सुधीर सर ने जब बेल बजाई तो उसने सोचा की ऐसे ही नंगी चली जाए बाहर पर फिर कुछ सोचकर उसने वो नाईटी पहन ही ली

वैसे उसे पहनना और ना पहनना एक ही बात थी

पारदर्शी होने की वजह से उसके अंदर का एक-2 अंग सॉफ दिखाई दे रहा था सुधीर को

दोनो ने मुस्कुरा कर एक दूसरे को देखा, और शेफाली ने झट्ट से उसका हाथ पकड़ कर अंदर खींच लिया ताकि कोई अड़ोसी पड़ोसी उन्हे अंदर आता हुआ ना देख ले

अंदर आते ही दोनो एक दूसरे से ऐसे लिपटे जैसे बरसों से बिछड़े प्रेमी प्रेमिका हो

शेफाली के हाथ सीधा सुधीर के लॅंड पर आए और सुधीर के उसके मोटे बूब्स पर

दोनो ही अपनी पसंद की चीज़ें सहला रहे थे

शेफाली के बूब्स तो ऐसे थे जैसे नंगे ही पकड़ रखे है, सिर्फ़ एक महीन सा कपड़ा ही तो था बीच में

सुधीर ने सामने से उसकी नाईटी की डोरियाँ खोल डाली

जिसके खुलते ही उसका भरा हुआ नंगा जिस्म सुधीर की आँखो के सामने था

ऐसा लग रहा था जैसे काम की देवी साक्षात उसके सामने आकर खड़ी हो गयी है

योवन से लदा हुआ मादक शरीर

निचोड़ दो तो कामरस की बूंदे उभर आए शरीर पर

सुधीर के मुँह से भरभराकर लार बाहर निकल आई और जैसे ही वो फिर से गिरने को हुई, उसने अपना गीला मुँह सीधा लेजाकर शेफाली के मुम्मे पर रख दिया और उसे चूसने लगा

सुधीर सर की लार से लथपथ चूसम चुसाई ने शेफाली के जिस्म को आग के गोले में बदल दिया

वो जवानी की आग में झुलसती हुई चिल्ला उठी

“ओह म्म्म्ममममममममममममममममममममममम मजाआाआआआआआअ आआआआआआआआअ गय्ाआआआआआआअ……… आई लव दिस ……….. सक इटटटट………. ज़ोरररर से चूऊऊऊसस्स्स्सूऊऊऊऊओ मेरे बूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊबससस्स्स्सस्स”

सुधीर को तो वैसे भी कुछ बोलने और सिखाने की ज़रूरत नही थी, टीचर जो था वो

वो चाहे तो ऐसी बातें सीखा कर बेस्ट टीचर का अवॉर्ड ले जाए

पर अभी तो उसे अपना एक्सपीरियन्स दिखाना था उन मक्खन के गोलों पर

जिसपर लगे हुए चैरी जैसे निप्पल पक्क की आवाज़ से उसके मुँह से निकलते और वो उन्हे फिर से दबोच कर चूसना शुरू कर देता

नाईटी पूरी उतर चुकी थी, शेफाली का पूरा नंगा शरीर पहली बार देख रहा था सुधीर

वो सच में किसी अप्सरा जैसी लग रही थी,उसे देखकर कोई बोल भी नही सकता था की वो एक जवान बेटी की माँ है

उसी बेटी की जिसके साथ वो कल स्कूल में मज़े ले रहा था

पर अभी तो उसका पूरा ध्यान इस बेशक़ीमती नगिने पर था, जिसकी नागमणियाँ वो अभी चूस रहा था

मुम्मे चुस्वाते-2 वो उछल कर सुधीर सर की गोद में चढ़ गयी

सुधीर उसे लेकर चलता हुआ बेडरूम तक आया और उसे बेड पर पटक दिया

और उसके नागिन जैसे बदन को बिस्तर पर मचलते देखकर वो भी अपने कपड़े उतारने लगा

जैसे-2 सुधीर के कपड़े उतर रहे थे, उसका बलिष्ट शरीर शेफाली की आँखो के सामने उजागर हो रहा था

सच में , एक मॉडेल जैसी बॉडी थी उसकी, एक ऐसा मर्द जिसकी कल्पना वो हर बार किया करती थी जब वो नहाते हुए या सोते हुए मास्टरबेट किया करती थी

पर अब वो सब करने की ज़रूरत नही थी

क्योंकि एक असली मर्द इस वक़्त उसके बेडरूम में खड़ा हुआ अपने कपड़े उतार रहा था

जो उसे चोदने वाला था

उसके बरसों से प्यासे बदन को अपने प्यार से सींचने वाला था

और जब उसके बदन की खुदाई करने वाला हल उसके सामने आया तो उसकी साँसे ही अटक कर रह गयी

पार्किंग लॉट के अंधेरे में देखा वो लॅंड इस वक़्त किसी मूसल जैसा लग रहा था

वो अपने पूरे आकार में था, उसकी तनी हुई नसें सॉफ चमक रही थी

वो लपककर उठी और अपनी गीली जीभ से उसकी चटाई करने लगी

एक मर्द को ऐसी लॅंड की प्यासी और लॅंड चूसने वाली औरत मिल जाए तो उसकी आँखे अपने आप ही बंद हो जाती है

सुधीर के साथ भी ऐसा ही हुआ

उसने शेफाली के सर पर हाथ रखा और उसे अपने लॅंड पर पूरा दबा कर उसके गले तक अपना खूँटा गाड़ दिया

बेचारी घों घों करती हुई छटपटाने लगी

पर इस छटपटाहट में भी एक मज़ा था

जिसे वो सुधीर की बॉल्स को मसलकर और भी ज़्यादा एंजाय कर रही थी

कुछ ही देर में सुधीर का लॅंड उसकी चूत की गहराइयाँ नापने के लिए पूरा तैयार था

उसने शेफाली को बेड पर धक्का दिया और उसकी टांगे फेला कर उत्तर दक्षिण दिशा में कर दी

बीच में थी उसकी आलोकिक चूत

जिसे इस वक़्त मन तो चूसने का भी कर रहा था पर लॅंड था की पहले वो अंदर जाने की जिद्द किये बैठा था

इसलिए अपने छोटे सिपाही की बात मानते हुए सुधीर ने उसे शेफाली की चूत पर लगाया और धीरे से दबाव डालकर उसे जंग के मैदान के अंदर धकेल दिया

घप्प की आवाज़ के साथ वो शेफाली की रेशमी गुफा में फिसलता चला गया

और उसकी दीवारों पर रगड़ देता हुआ उसके गर्भ से जा टकराया

ये एक ऐसा एहसास था जो उसे पिछली चुदाई में भी नही मिला था

लंबे लॅंड की पहुँच भी लंबी ही होती है

ये वो आज जान चुकी थी

एकदम अंदर तक ठूंस कर अपना किल्ला गाड़ा था सुधीर ने शेफाली की चूत में

बेचारी रस्सी से बँधी बकरी की तरह मिमिया कर रह गयी उसके इस प्रहार से

“आआआआआआआययययययययययययययययययययययययययययययययययीीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई………… माआआआआअरर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर गायययययययययययीीईईईईईईईईईईईईईईईईईई अहह…… उम्म्म्मममममममममममममममममममममम…………”

अब सुधीर रुकने वाला नही था

उसे तो मज़ा आ रहा था

काफ़ी दिनों बाद ऐसी भरंवा औरत मिली थी उसे

जिसके गुदाज जिस्म को चूस्कर, चाटकर, मसलकर चोदने में उसे आनंद आ रहा था

शेफाली भी अपने आप को तृप्त महसूस कर रही थी इस वक़्त

आज सुधीर का लॅंड उस गहराई तक जा रहा था जहाँ आज से पहले कोई और लॅंड नही गया था

वो उछलकर उपर आ गयी और लॅंड को अड्जस्ट करने के बाद अपने तरीके से सुधीर के घोड़े की सवारी करने लगी

तेज धक्को और गहरी सांसो से पूरा कमरा गूँज रहा था

“आआआआहह अहह और ज़ोर से चोदो मुझे सुधीर…..और तेज…….. आज जैसा मज़ा….. अहह….. मुझे ……उम्म्म्मममम किसी और ने नही दिया……… ज़ोर से चोदो मुझे …अपनी रांड को……..चोदो मुझे सुधीर …चोदो अपने मोटे लॅंड से….अपनी रांड को…..”

चुदाई के समय वो सब अपने आप ही बाहर आने लगा जो अभी तक वो सोचा करती थी

सुधीर की रांड बनकर ही रहना चाहती थी वो

जिसे आज उसने अपनी ज़ुबान से बोल भी दिया

सुधीर भी अपनी पूरी ताकत से उसकी चुदाई करने लगा

उसके हिप्स को स्टेयरिंग बनाकर उसने अपना ट्रक उसकी चूत के हाइवे पर ऐसा दौड़ाया , ऐसा दौड़ाया की स्पीडोमीटर भी टूट गया

और जब झड़ने का टाइम आया तो उसने अपना लॅंड बाहर निकाल लिया

क्योंकि पहली बार की चुदाई में ही वो उसे प्रेगनेंट नही करना चाहता था

लॅंड निकालने से पहले वो 2 बार झड़ चुकी थी

उसमे अब इतनी हिम्मत भी नही बची थी कि ढंग से बैठकर सुधीर के लॅंड की मलाई खा सके

सुधीर ने लॅंड को पकड़ा और उसके चेहरे पर देदनादन 8-10 बौछारें दे मारी

उसके गाड़े रस से नहाकर वो किसी नयी नवेली दुल्हन सी सज धजकर अपने बेड पर बैठी रह गई

कमरे का तूफान थम चुका था और अभी भी उनके पास 4 घंटे का समय था

इसलिए कुछ देर बाद नहा धोकर उन्होने बिना कपड़े पहने ही नाश्ता किया और वापिस बेड पर आकर एक दूसरे से चिपककर लेट गये

अपने अगले राउंड की तैयारी में

और यही वो वक़्त था जब अनु बाहर पहुँच चुकी थी

और सुधीर सर की कार देखकर वो बेचारी हैरान थी

उसने अपने बेग से घर की चाभी निकाली और लॉक खोलकर अंदर आ गयी

पर बेचारी को ये नही पता था की आज उसकी लाइफ का सबसे बड़ा झटका उसे लगने वाला है

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