चीरहरण – Update 53
Update 53
सरदार… सरदार..
क्या हुआ ढोला.. सुबह सुबह क्यों आये हो? क्या बात है?
सरदार.. नदी का प्रवाह बढ़ने लगा है.. इस बार बारिश में नदी के आसपास की सारी जगह डूबने की सम्भावना है.. आस पास के काबिले अपना पड़ाव यहां से उठाकर कहीं और डालने की बात कर रहे है.. हमें भी कोई कदम उठाना होगा..
हाक़िम – ठीक है ढोला.. तुम आज काबिले का अगला पड़ाव डालने के लिए कोई और जगह देखो और रात को मुझे बताओ… कल हम यहां से अपना पड़ाव उठा लेंगे और नदी के बहाव क्षेत्र से दूर चले जाएंगे.. मंगरू को भी अपने साथ ले जाना..
ढोला – सरदार… कल पढ़ाव उठाना अशुभ होगा.. कल अमावस्या है.. और नदी का प्रवाह कभी भी असामान्य रूप से बढ़ सकता है..
हाक़िम चौंकते हुए – कल अमावस्या है?
ढोला – हाँ सरदार.. कल अमावस्या है.. और मैंने काबिले का अगला पड़ाव डालने के लिए जगह भी देख ली है जो यहां से 12 मिल दूर पूर्बमें है.. हमें आज ही यहां से अगले पढ़ाव के लिए निकलना होगा..
हाक़िम गहरी सोच में खो जाता है जिसे उस सोच से बाहर निकालते हुए ढोला आगे कहता है – क्या हुआ सरदार? किस स्वप्न में चले गए.. हमें आज ही अगले पढ़ाव के लिए निकलना होगा..
हाक़िम – ठीक है.. तुम मंगरू के साथ पुरे काबिले को कह दो कि हम अगले पढ़ाव के लिए सूरज चढ़ते ही निकलेंगे..
ढोला – ठीक है सरदार..
हाक़िम – ढोला..
ढोला – जी सरदार…
हाक़िम – मैं जागीरदार से मिलने जा रहा हूँ तुम मंगरू के साथ मिलकर पुरे काबिले को अगले पढ़ाव तक ले जाओ.. मगर ध्यान रहे.. अगले पढ़ाव पर पानी कि उचित व्यवस्था हो..
ढोला – मैं सब देख चूका हूँ सरदार.. वहा एक छोटा पानी का स्रोत है जो नदी से निकलता है और अविरल बहता है.. आप निश्चित होकर जागीरदार से मिल आइये मगर सरदार पौखा बता रहा था आज जागीरदार किसी पर हमले के लिए सेना लेकर निकल चूका है.. सरदार.. जागीरदार वीरेंद्र सिंह ने आस पास की सारी रियासत तो पहले ही जीत ली अब पता नहीं किसपर हमले के लिए सेना लेकर जा रहा है…
हाक़िम – ढोला क्या कह रहा है? ये कब हुआ?
ढोला – सरदार आप पिछले एक महीने से आपकी पत्नियों के साथ थे.. मंगरू ने आपको बताना भी चाहा मगर आपने उसे जाने को कह दिया.. मैंने भी इन गतिविधियों से आपको सचेत करने का प्रयास किया किन्तु ऐसा करने में नाकाम रहा..
हाक़िम – मतलब बैरागी…
ढोला – बैरागी की मृत्यु हो चुकी है सरदार.. अफवाह है की जागीरदार ने उसकी हत्या कर दी.. रानी सुजाता भी मारी गई..
हाक़िम सर पकड़ के बैठता हुआ – इसका मतलब.. अब मैं बैरागी से नहीं मिल पाऊंगा..
ढोला – सरदार ये आप क्या कर रहे है.. हमें अभीकुछ देर में निकलना होगा..
हाक़िम – वीरेंद्र सिंह.. उसके पास जदिबूती की सारी जानकारी होगी.. इससे पहले की जोगी उससे नर्क दिखाए.. मुझे अब उससे ही मिलकर मुझे वो जदिबूती हासिल करनी पड़ेगी..
ढोला – कोनसी जदिबूती.. और कौन जोगी सरदार..
हाक़िम – कुछ नहीं ढोला.. तुम पुरे काबिले को कह दो की पढ़ाव की जगह बदलने वाली है सब अपना सामान बाँध ले..
ढोला जाते हुए – जी सरदार..
मंगरू – आपने बुलाया सरदार..
हाक़िम – मंगरू मैं जागीरदार के पास जा रहा हूँ.. ढोला ने एक नई जगह देखी है जहाँ अगला पढ़ाव डाला जाएगा.. उर्मि के साथ माँ और मौसी सकुशल अगले पड़ाव तक पहुंच जाए ये तुम्हारा काम है..
मंगरू – जी सरदार.. मैं समझा गया.. मगर आपका जागीर जाना उचित नहीं होगा.. पौखा ने कहा है जागीरदार बदल गया है अब वो काबिले के सरदारो से नहीं मिलता..
हाक़िम – वो सब तू मुझपर छोड़ दे मंगरू.. तू बस वही कर जो मैं कहता हूँ..
मंगरू – जी सरदार..
हाक़िम काबिले से चल देता है और जागीरदार के महल के पास पहुंचते पहुंचते सूरज चढ़ आया था और महल के आस पास हाक़िम लोगों को भागता हुआ देखता है.. हर तरफ अफरा तफरी मची हुई थी.. ऐसा लगता था की लोग अपनी जान बचा के वहा से भाग रहे है..
हाक़िम जब तक महल के दरवाजे पर पंहुचा उसने देखा की वहा कोई नहीं था और हर तरफ उजाड़ और ताबही का मंजर था.. वीरेंद्र सिंह को उसने महल के हर कोने में और आस पास की हर जगह देखा मगर उसे कहीं नहीं पाया.. हाक़िम सोच रहा था की अब वो क्या करेगा? कैसे जड़ी बूटी हासिल करेगा?
हाक़िम वीरेंद्र सिंह को ढूंढ़ते हुए दुपहर की शाम कर चूका था मगर उसका कहीं पता नहीं था और अब हाक़िम यही सोच रहा था की वो वापस जाकर वीरेंद्र सिंह और बैरागी को क्या जवाब देगा?
हाक़िम अपने आप को इस सब का दोष देने लगा की वो भोग विलास में इतना डूब गया की उसे अपने लक्ष्य की याद ही नहीं रही..
हाक़िम काबिले के अगले पड़ाव की और चल दिया था की रास्ते में उसे जोगी की याद आई और वो सोचने लगा की जोगी को वीरेंद्र का पता होगा और वो वीरेंद्र सिंह को जरुर ढूंढ़कर उसे बता सकता है मगर अब जोगी उसे कहा मिलेगा? हाक़िम को उसी जगह की याद आई जागा जोगी की कुटीया थी.. हाक़िम तेज़ी से अपने कदम बढ़ाता हुआ जोगी की उस कुटिया के पास आ गया जहाँ उसने देखा की जोगी घोर विलाप के आंसू अपनी आँखों से बहा रहा है और वो जहाँ बैठा है वो मृदुला की क़ब्र थी..
हाक़िम – एक्सक्यूज़ मी अंकल…
जोगी अपनी रूआसी आँखों मी गुस्सा भरके हाक़िम की तरफ देखकर – कौन है तू और यहां क्या कर रहा है?
हाक़िम – अंकल मैं फ्यूचर.. मतलब भविष्य से आया हूँ और आपकी मदद चाहता हूँ..
जोगी – मैं तेरी कोई मदद नहीं कर सकता लड़के चला जा यहां नहीं तो मेरा क्रोध मुझे तेरे प्राण लेने पर विवश कर देगा.. चला जा अपने प्राण बचाके यहां से..
हाक़िम – देखो अंकल.. मैं चला जाऊँगा तो बहुत गलत हो जाएगा.. जिन लोगों ने मुझे यहां भेजा है उन्होंने कुछ काम देकर भेजा था मगर मैं वो काम नहीं कर पाया.. अगर वापस जाऊँगा तो मुझसे मेरा बड़ा लंड… मतलब मेरी शक्तियां छीन लेंगे और मुझे वापस दुख दर्द तकलीफ के साथ जीने को मजबूर कर देंगे.. आप प्लीज मेरी मदद करिये..
जोगी – लड़के तू मेरी बात मान और चला जा यहां से नहीं तो तेरे लिए ये घड़ी जीवन की अंतिम घड़ी हो जायेगी..
हाक़िम – मैं बिना आपसे मदद लिए नहीं जाऊँगा अंकल..
जोगी अपने क्रोध पर नियंत्रण रखते हुए – तू ऐसे नहीं मानेगी.. बता तुझे क्या चाहिए..
हाक़िम – अंकल.. वीरेंद्र सिंह का पता चाहिए..
जोगी क्रोध से – तू वीरेंद्र सिंह के साथ है? मैं तुझे जीवित नहीं छोडूंगा..
ये कहते हुए जोगी ने अपने सुला हाक़िम की तरफ फेंका मगर जोगी का सुला हाक़िम के ऊपर आकर बेअसर हो गया और जोगी हाक़िम को रहस्य की निगाहो से देखने लगा.. जोगी ने हाक़िम के गले में वही ताबिज़ देखा जो उसने बैरागी के गले में देखा था जब उसने बैरागी की क़ब्र के पास पड़ा हुआ देखा था.. और जोगी समझा चूका था की ये ताबिज़ वही है और इसके करण ही हाक़िम की रक्षा हुई है..
जोगी गुस्से में – तू वीरेंद्र सिंह को क्यों पूछ रहा है?
हाक़िम – जदिबूती के लिए..
जोगी – कोनसी जदिबूती?
हाक़िम – अरे वही जिसे खाकर वो अगले 800 सालों के लिए अमर हो गया.. मगर आपने उससे सारा भौतिक सुख छीनकर उसे धरती पर नर्क भोगने के लिए आजाद के दिया.. मैं उस जदिबूती के बारे में वीरेंद्र सिंह से पूछना चाहता हूँ जिससे मे वापस भविष्य में जा सकूँ.. और वापस भविष्य में जाकर वीरेंद्र सिंह को वही जड़ीबूटी खिला सकूँ जिससे वीरेंद्र सिंह मर कर मुक्त हो सके और बैरागी आगे आयाम पर जा सके..
जोगी – तू कैसे जानता है आज बैरागी को मैंने वीरेंद्र सिंह के सर पर बाँध दिया है..
हाक़िम आगे आते हुए – देखो अंकल… मैंने कहा मैं भविष्य से आया हूँ..
जोगी का शेर दहाड़ने लगता है..
हाक़िम – अंकल संभालो इस शेर को.. कहीं काट वात लेगा तो मैं जान और जहान दोनों से चला जाऊँगा..
जोगी – मैं तेरी मदद नहीं करूँगा लड़के.. तू जा यहां से वरना मैं तेरे गले से ये ताबिज़ निकालकर तेरी जान ले लूंगा..
हाक़िम पास आकर बैठते हुए – अंकल.. मैं जानता हूँ आपको दुख है तकलीफ है और मृदुला के जाने की बहुत पीड़ा है.. पर आपने वीरेंद्र सिंह के साथ बैरागी को भी सजा दे दी.. जो उन्होंने 300 सालों तक भोगा है.. अब और नहीं अंकल.. आप अपना गुस्सा शांत करके मेरी मदद करो अंकल…
जोगी – तू मुझसे झूठ कहता है.. तू भविष्य से कैसे आ सकता है.. भूतकाल और भविष्य पर किसका जोर चलता है..
हाक़िम – आज नहीं चलता मगर हो सकता है आगे चलकर चले.. देखो.. मैं झूठ नहीं बोल रहा है.. मेरा विश्वास करो… वीरेंद्र सिंह अब हर साधू सन्यासी और तांत्रिक के पास जाकर आपके बंधन को काटने की विद्या सीखेगा मगर उसे सफलता नहीं मिलेगी और आखिर में वो मुझे भविष्य से यहां अपने पिछले जन्म में भेजेगा..
जोगी हाक़िम के सर पर हाथ रखकर उसकी सारी यादे देखता है… और जब वापस आता है उसके मुंह से आवाज आती है – मृदुला..
जोगी – मृदुला??
हाक़िम – क्या हुआ? मृदुला… अंकल ओ अंकल.. प्लीज मुझे वीरेंद्रसिंह के पास वापस वो जदिबूती लेकर जाने में मेरी मदद करें..
जोगी – मुझे ले चल बेटा… अगले जन्म में मुझे ले चल..
हाक़िम – मुझे जड़ी बूटी लेकर जाना है अंकल… आपको लेजाकर क्या करूँगा…
जोगी – अगर तू मुझे नहीं ले जाएगा तो मैं तुझे यही समाप्त कर दूंगा.. मुझे मेरी मृदुला से मिलना है.. मैंने जाते हुए उससे वादा किया था..
हाक़िम – पर मृदुला तो आपको छोडके जा चुकी है.. आप कैसे उसे मिलोगे?
जोगी – मृदुला ने कुसुम बनकर जन्म लिया है.. और अगर तू मुझे अपने साथ लेकर नहीं गया और मुझे मेरी मृदुला से नहीं मिलवाया तो मैं तेरा काबिला समाप्त कर दूंगा…
हाक़िम – ठीक है ठीक है.. पर वीरेंद्र सिंह का क्या? बैरागी? वो कैसे मुक्त होंगे?
जोगी – तू मुझे उनके पास ले जा मैं उसका बंधन खुद ही काट दूंगा और वो मेरे बंधन से आजाद हो जाएंगे..
हाक़िम – पर मेरी शर्त है..
जोगी – क्या?
हाक़िम – मुझे ये पावर चाहिए जैसे आप सर पर हाथ रखकर सब देख लेते हो मुझे भी सीखना है..
जोगी – ये एक सिद्धि है बेटा.. अगर तू मुझे वापस ले गया तो मैं तुझे ये सिद्धि दे दूंगा..
हाक़िम – ठीक है.. कल सुबह मुझे जंगल पूर्व वाली झील पर मिलना..
जोगी – और एक बात सिर्फ मृदुला का ही नहीं मुन्नी का भी अगला जन्म हुआ है तेरे ही समकालीन..
हाक़िम – कौन?
जोगी – प्रमिला..
हाक़िम – मेरी माँ मुन्नी अगले जन्म में मेरी बुआ पिंकी है…
जोगी – हाँ… अब जा कल मैं तुझे झील के पास मिलूंगा सुबह समय से आ जाना…
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इतना समय क्यों लग गया तुम्हे..
हाक़िम रोते हुए – कुछ नहीं अंकल… बस ऐसे ही.. चलो उस पेड़ के नीचे आपको गाड़ना होगा फिर मैं इस झील में उतर जाऊँगा और हम दोनों अगले जन्म में पहुंच जाएंगे…
जोगी – रुको मैं खड्डा का निर्माण करता हूँ..
हाक़िम – ठीक है.. फ़ालतू मेहनत नहीं करनी पड़ेगी..
जोगी खड्डा बना देता है और उसमे बैठ जाता वही हाक़िम जोगी के ऊपर मिट्टी डालकर उसके दबा देता है और नंगा होकर रोते हुए झील में उतर जाता है..
वीरेंद्र सिंह गौतम को होश में आते देखकर – बैरागी ये देखो.. गौतम वापस आ गया है.. लगता है इसने हमारा कार्य सफल कर दिया है..
बैरागी – हुकुम पहले इसे पूरी तरफ होश में आने दो और पूछो कि क्या ये जदिबूती लाने में सफल हो भी पाया है या नहीं..
वीरेंद्र सिंह – गौतम… गौतम..
गौतम होश में आते हुए – बड़े बाबाजी.. प्रणाम..
वीरेंद्र सिंह उत्सुकता से – बोल बेटा.. क्या तुम वो जड़ी बूटी लाये हो.. क्या मेरा कार्य सफल हुआ है?
बोलो बेटा..
गौतम – जदिबूती तो नहीं ला पाया बाबाजी.. मैं जब तक महल पंहुचा सब बर्बाद हो चूका था..
वीरेंद्र सिंह क्रोध से – क्या?
बैरागी – तुमसे जो कहा गया था तुमने जरुरत उससे विपरीत कुछ किया होगा तभी ये कार्य सफल नहीं हुआ.. अब हमने हमेशा ऐसे ही रहना पड़ेगा..
गौतम – नहीं.. नहीं रहना पड़ेगा.. मैं कुछ ऐसा लाया हूँ जो बाबाजी के समस्या का समाधान करके मुक्ति दे देगा.. और तुमको भी आजाद कर देगा..
वीरेंद्र सिंह क्रोध को भूलकर ख़ुशी से – क्या? क्या लाया है जो मुझे मृत्यु दे देगा.. और मुक्त कर देगा उस अभिश्राप से..
गौतम – वो आप खुद ही पेड़ के नीचे खोद कर देख लो..
वीरेंद्र सिंह – नहीं वो तुम्हे खोदना पड़ेगा.. तभी तुम्हारी गाडी हुई चीज यहां आ पाएगी..
गौतम – ठीक चलते है.. मगर मेरी एक शर्त है..
वीरेंद्र सिंह – क्या?
गौतम – आपको मुक्ति मिलने मेरे पास जो है वो तो नहीं छीन जायेगा ना..
बैरागी – नहीं गौतम.. ऐसा कुछ नहीं होगा..
गौतम पेड़ के नीचे आते हुए – आप सच कह रहे है?
वीरेंद्र सिंह – हाँ.. सच है गौतम.. यकीन आ ये तो मैं तुझे अपनी सारी सिद्धिया और ज्ञान देकर मुक्ति लूंगा..
गौतम खड्डा खोदते हुए – ठीक है कोई पुराना मिलने वाला है आपका जिसमे में लाया हूँ..
वीरेंद्र सिंह – ऐसा कौन मेरा पुराना मिलने वाला हो सकता है जो मेरी मुक्ति कर सके..
गौतम खड्डे खोड़कर – खुद देख लो..
वीरेंद्र सिंह जोगी को देखकर उसके पैरों में गिरता हुआ – माफ़ी… माफ़ी… माफ़ी… दे दो मुझे.. मेरी गलती की माफ़ी दे दो महाराज…
जोगी – मैं तुझे मुक्ति देने ही आया हूँ वीरेंद्र सिंह..
बैरागी – मुझे भी माफ़ी चाहिए बाबा..
जोगी – तुझे नहीं मुझे तुझसे माफ़ी मांगनी चाहिए रागी… मैं इतना क्रोध में था कि मृदुला के मरने का क्रोध तेरे ऊपर भी उतार दिया.. और तुझे वीरेंद्र सिंह के साथ बाँध दिया.. लेकिन अब मैं तुम्हे इस बंधन से मुक्त करने आ गया हूँ…
गौतम – अंकल बाबाजी को मुक्त करने से पहले बाबाजी मुझे अपनी सिद्धिया देना चाहते है..
जोगी – बेटा तू प्रकृति से खिलवाड़ मत कर.. वीरेंद्र सिंह ने जो हासिल किया है वो आम विद्या नहीं है.. और ना ही तू इसे संभाल पायेगा..
गौतम – तो क्या अब आप वो सर ओर हाथ रखकर यादे देखने वाला मंतर भी नहीं सिखाओगे मुझे? मतलब आपने मुझे चुतिया बना दिया..
जोगी – मैं तुझे वो दूंगा जिसकी तुझे जरुरत है.. मगर उसकी मांग मत कर जो तेरे किसी काम का नहीं..
गौतम उदासी से – ठीक है.. अब जल्दी मुक्ति दो बाबाजी और बैरागी को.. बेचारे 300साल से लटके हुए है..
जोगी बीरेंद्र सिंह और बैरागी पर से अपने बंधन को वापस ले लेता है जिसके कारण बैरागी कि आत्मा अपने नए आयाम में चली जाती है और पुनर्जन्म के लिए आगे बढ़ जाती है वही वीरेंद्र सिंह के ऊपर से बामधन हटते ही वो फिर से एक आम इंसान बन जाता है जो 73 वर्ष का वृद्ध होता है.. मगर अब वो अपनी मर्ज़ी का खा सकता था पहन सकता था और सो भी सकता था..
वीरेंद्र सिंह हाथ जोड़ कर – मुझे माफ़ कर दो..
जोगी – अब जो हुआ उसे भूल जाओ वीरेंद्र सिंह.. तुम्हारे करण बहुत लोगों का कल्याण भी हुआ जिसका फल तुम्हे मिलेगा.. तुम चाहो तो मृत्यु को गले लगा सकते हो या कुछ और साल जीवित रहकर मन मुताबित जीवन जी सकते हो..
वीरेंद्र सिंह हाथ जोड़कर – मुंहे तो मृत्यु ही चाहिए.. बहुत तरसा हूँ मैं मृत्यु के लिए अब जीने की लालसा ख़त्म हो गई है.. मगर एक बार में विरम से मिलना चाहता हूँ और उसे अपने जाने की बात बतलाना चाहता हूँ…
जोगी – जैसा तुम चाहो वीरेंद्र सिंह.. आज तुम्हरे प्राण स्वाहा हो जायेगे…
गौतम – देखो अंकल अब चलो.. और ये भेस नहीं चलेगा.. बाबाजी आश्रम में कुछ अच्छे कपड़े होंगे?
वीरेंद्र सिंह – विरम सबकी व्यवस्था कर देगा..
गौतम जोगी को आश्रम में ले आता है और जोगी नहा कर वर्तमान के कपड़े पहन लेता है गौतम भी नहा कर नये कपड़े पहन लेता है..
गौतम – आज रात यही रहो अंकल.. कल सुबह में कुसुम से मिलवाने ले जाऊँगा आपको..
जोगी – ठीक है बेटा..
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तू नहीं आता वही अच्छा था.. दोपहर से मेरी चुत में घुसा हुआ है मन नहीं भरता क्या तेरा? मैं कितना झेल पाउंगी तुझे.. मेरी चुत फिर पहले जैसी कर दी तूने.. कमीने तेरी माँ हूँ थोड़ी तो शर्म कर.. जिस चुत से निकला है उसीको चोद चोद के सुजा दिया है.. पहले तेरी शकल देखकर प्यार आता था अब शर्म आती है..
गौतम मिशनरी में पेलते हुए – शर्म तो औरत का गहना होता है माँ.. तू शरमाते हुए इतनी प्यारी लगती है कि क्या कहु.. माँ जब तू चुदवाते हुए मुंह बनाती है ना दिल कि धड़कन बढ़ जाती है.. मन करता है तुझे ऐसे ही चोदता रहू..
सुमन – हां.. तू तो मुझे चोदता रहेगा मगर मेरा क्या? मुश्किल से चाल सही हुई थी तूने आते ही वापस मुझे लंगड़ी घोड़ी बना दिया.. दोपहर से बस नंगा करके लिटा रखा है.. ना खाना खाया है ना कुछ और..
गौतम चुत में झाड़ता हुआ – मतलब भूक लगी है मेरी माँ को? अभी तो रात के 10 बजे कोई ना कोई रेस्टोरेंट खुला होगा.. बाहर चलके खाते है..
सुमन गुस्से से आँख दिखाती हुई – लंगड़ी करके बाहर ले जाएगा खाना खिलाने? तूझे बिलकुल शर्म नहीं है ना.. और अब निकाल अपने लंड को मेरी चुत से बाहर.. कैसी लाल कर दी है..
गौतम लंड निकालता हुआ – ठीक है माँ.. अच्छा यही आर्डर कर लेते है रुको.. बताओ क्या खाओगी?
सुमन अपनी चुत से निकलता वीर्य साफ करते हुए – कुछ मगा ले..
गौतम – ठीक है हांडी मटन और नान मगा लेता हूँ.. रायते के साथ..
सुमन ब्रा पेंटी पहनते हुए – नहीं.. आज मंगलवार है.. तू कुछ वेज मंगा..
गौतम – मिक्स वेज कर देता हूँ चपाती के साथ.. और कुछ?
सुमन बेड से खड़ी होती हुई – नहीं..
और लचकती हुई बाथरूम चली जाती है..
हेलो बुआ?
हां मेरे बाबू..
कैसी हो?
मैं अच्छी.. तू तो टूर ओर क्या गया गायब ही हो गया.. पता नहीं कैसे निकला है ये महीना तुझसे बात किये बिना..
अब नहीं जाऊँगा बुआ.. I love you.. पता है किसी ने मुझे बताया है कि पिछले जन्म में आप मेरी माँ थी..
काश इस जन्म में भी होती मेरे बाबू..
मेरी नहीं तो क्या हुआ मेरे बच्चे ही तो हो बुआ..
कल आ रही हूँ मैं तेरे पास.. अब मिले भी ना रहा जाता मेरे बाबू..
बुआ गाँव आना.. कल गाँव जा रहा हूँ मैं..
क्यों?
बुआ कल कुसुम को बंधन में लेने वाला हूँ..
अरे पर तीन महीने बोला था ना अभी तो एक ही हुआ है..
बुआ वो नाराज़ है एक महीने उससे भी बात नहीं कि थी तो मेरा फ़ोन तक नहीं उठा रही.. लगता है मेरी शामत आने वाली है..
अरे अरे.. इतना भी क्या अपनी होने वाली पत्नी से डरना..
डरना तो पड़ेगा बुआ वो कोई आम लड़की थोड़ी है.. शैतान है उसके अंदर अगर उसे खुश नहीं रखूँगा तो मेरा पता नहीं क्या हाल करेगी वो..
ठीक है.. वो तो खुश हो जायेगी..
फ़ोन तो उठाये मेरा..
अरे तू चिंता मत कर मैं बोल देती हूँ उठा लेगी फ़ोन..
थैंक्स बुआ.. यू आर बेस्ट..
सुमन – किसका फ़ोन है?
गौतम – बुआ का.. बात करोगी..
सुमन – मैं क्या बात करूंगी.. तू कर ले..
गौतम सुमन का हाथ पकड़ कर खींचते हुए – अरे बुआ माँ बनने वाली है..
सुमन – पता है.. बताया था जगमोहन ने..
गौतम – मेरे बच्चे की…
सुमन हैरात से – क्या?
पिंकी – ग़ुगु..
गौतम फ़ोन स्पीकर पर डाल कर – बुआ माँ को सब पता है हमारे बारे में..
पिंकी – क्या कह रहा है तू.. पागल हो गया है क्या..
गौतम – लगता है खाना आ गया.. बुआ माँ से बात करो..
सुमन – पिंकी..
पिंकी – भाभी ग़ुगु की बात को सीरियस मत लेना वो मज़ाक़ कर रहा है..
सुमन – मैं सब जानती हूँ पिंकी.. अब मुझसे छिपाने की जरुरत नहीं है तुम्हे.. मुझे तेरे और गौतम के रिश्ते से कोई ऐतराज़ नहीं है..
पिंकी – भाभी क्या आप भी..
सुमन – अब मैं कुछ छिपाना नहीं चाहती तुझसे पिंकी.. मैं भी गौतम के साथ वैसे ही रिश्ते में हूँ जैसे कि तू..
पिंकी – भाभी ग़ुगु आपका बेटा है.. उसके साथ आप.. ये सही नहीं है..
सुमन – ये बात तुम कर रही हो पिंकी.. हवस में अंधी होकर अपने भतीजे के साथ सोने में तुम्हे शर्म नहीं आई और मुझे सही गलत समझा रही हो.. पिंकी मैं जानती हूँ तुम भी गौतम से बहुत प्यार करती हो.. मैं तुम्हे कुछ नहीं कहूँगी..
पिंकी – भाभी.. ग़ुगु के साथ आपका वो रिश्ता समाज के लिए पाप है.. आपने मुझे अपने बारे में बता दिया है पर आप और किसीसे इस बात का जिक्र तक नहीं करना.. कुसुम से तो बिलकुल नहीं..
सुमन – मैं अच्छे से जानती हूँ पिंकी.. मुझे किसके साथ क्या बात करनी है.. तूम उसकी चिंता मत करो..
गौतम – खाना तैयार है माँ.. आ जाओ..
सुमन – लो बात करो अपनी बुआ से..
गौतम – हाँ बुआ..
पिंकी – कमीने कुत्ते अपनी माँ के साथ ही सो गया तू.. भाभी ने सब बता दिया कैसे तूने भाभी के साथ अपना रिश्ता बनाया..
गौतम हसते हुए – बुआ अब मैं क्या करू.. आपकी तरफ माँ से भी बहुत प्यार करता हूँ..
पिंकी – अच्छा.. तो क्या भाभी को नंगा ही रखेगा घर में.. बेचारी तुझे इतना प्यार करती है और तू उनके साथ पता नहीं क्या क्या करता है.
गौतम खाना खाते हुए – आप आ जाओ ना.. बचा लो अपनी भाभी को मुझसे..
पिंकी – जल्दी आउंगी.. अब खाना खा..
गौतम – अच्छा किस्सी तो दे दो गीली वाली..
पिंकी – उम्महां… अब मिलूंगी ना भाभी के साथ मिलकर तेरा चीरहरण करूंगी.. चल बाय..
गौतम – love you बुआ..
पिंकी – love you too बाबू..
सुमन – बाय पिंकी..
पिंकी – बाय भाभी.. ज्यादा तंग करें तो एक थप्पड़ रख देना इस शैतान के..
सुमन हसते हुए – अच्छा ठीक है.. बाय…
सुमन और गौतम खाना ख़ाकर वापस बेड ओर आ जाते है..
सोने दे ना ग़ुगु..
मैं कहा रोक रहा हूँ सोने से माँ..
ऐसे छेड़खानी करेगा तो कैसे सो पाउंगी.. तू वापस शुरू हो गया.. देख सोने वरना सच में एक थप्पड़ मार दूंगी..
अच्छा ठीक है मेरी माँ.. सो जाओ..
तू कहा जा रहा है?
कहीं नहीं.. छत पर..
क्यों?
बस ऐसे ही..
नहीं जाना.. यहां आ.. मेरे पास.. सो जा तू भी..
गौतम सुमन को बाहों में भरकर लेट जाता है..
अरे अब किसका फ़ोन आ गया तेरे फ़ोन पर?
कुसुम का है माँ..
बात कर क्या कहती है..
कहेगी क्या.. मुझे ताने मारेगी..
बात तो कर..
हेलो…
बोलो?
क्या बोलू?
बुआ ने कहा तुम कुछ बोलना चाहते हो तो बोलो..
इतना गुस्से में क्यों है तू? एक महीने बात नहीं कि तो इतनी नाराज़गी?
एक महीना… तुम्हारे लिए सिर्फ एक महीना है.. पता है मेरा कितना बुरा हाल हुआ है.. रोज़ तुम्हे याद करके.. मन तो कररहा है फ़ोन में घुसकर तुम्हारा वो हाल करू कि याद रखो तुम..
अच्छा सॉरी ना कुसुम..
सॉरी.. सोरी से सब ठीक नहीं होता.. कितने फ़ोन और massage किये पर तुम हो कि.. छोडो.. जो कहना है कहो मुझे सोना है..
अकेले सोना है? मेरे साथ नहीं सोना चाहती?
मसखरी करने के लिए फ़ोन किया है? कितने बुरे तो तुम.. जरा भी अंदाजा नहीं है तुम्हे मेरे मन का.. क्या बीत रही है मेरे ऊपर.. और तुम्हे इस रात में मसखारी करनी है..
ठीक है मेरी प्यारी कुसुम.. कल आ रहा हूँ मैं तुझे लेने.. मैं भी तेरे बिना नहीं रह पाऊंगा अब…
फिर से मसखरी.. देखो ऐसा करोगे ना तो याद रखना मैं भी बहुत सताऊंगी तुम्हे..
मज़ाक़ नहीं कर रहा पागल.. सच में कल आ रहा हूँ मैं माँ को लेकर.. यक़ीन ना हो तो बात कर लो..
सुमन – हेलो कुसुम…
कुसुम – हाँ बड़ी माँ..
सुमन – गौतम मज़ाक़ नहीं कर रहा बेटा.. कल वो सच में आ रहा है.. और कल ही तेरे साथ बंधन करके तुझे अपने साथ ले आएगा..
कुसुम ख़ुशी से – सच..
गौतम सुमन से फ़ोन लेकर – और क्या मज़ाक़ कर रहा हूँ?
कुसुम – हाय.. मुझे तो लाज आ रही है..
गौतम – अभी से.. अभी तो कुछ हुआ भी नहीं..
कुसुम फ़ोन काटते हुए – छी…
सुमन मुस्कुराते हुए – बेचारी…
गौतम बिन बताये सुमन कि पेंटी सरकाकर लंड अंदर घुसाते हुए – माँ गलती से चला गया..
सुमन सिसकते हुए – अह्ह्ह.. बार बार यही गलती करता है ना तू..
गौतम – माँ गलती से अंदर फिसल गया सच्ची..
सुमन – अह्ह्ह.. बेशर्म.. अब चोद भी गलती से रहा है क्या?
गौतम – माँ.. पता नहीं.. अपने आप लंड अंदर बाहर हो रहा है..
सुमन – झूठे मक्कार.. बहाने बहाने से चुत में घुसा देता है.. कहता है गलती से हो गया. अह्ह्ह.. आराम से मदरचोद..
गौतम चोदते हुए – गाली कितनी प्यारी लगती है तुम्हारे मुहसे माँ…
सुमन – कमीने मेरा बेटा नहीं होता ना.. बहुत मार खाता तू..
गौतम – घोड़ी बनो ना..
सुमन – बाल नहीं खींचेगा..
गौतम – ठीक है..
सुमन घोड़ी बनती हुई – प्यार से कर..
गौतम चुत में ड़ालते हुए – आराम से करूँगा माँ तुझे भी मज़ा आएगा..
सुमन चुदवाते हुए – अह्ह्ह… अह्ह्ह… अह्ह्ह…
गौतम टीवी पर एक ब्लू फ़िल्म चला देता है और अपनी माँ को घोड़ी वाले पोज़ में चोदता रहता है..
सुमन – अब झड़ भी जा.. मैं कितना झेलू तुझे.. तू तो बस चोदना ही जानता है.. झड़ने का नाम ही नहीं लेता..
गौतम – माँ यार मैं क्या करू? आप जल्दी झड़ जाती हो तो.. मेरा होने में टाइम लगता है..
सुमन मिशनरी में चुदवाती हुई – एक घंटा हो गया.. जलन सूजन और अब दर्द भी होने लगा है मुझे.. और तू है कि बस..
गौतम चुत में झड़ते हुए – अच्छा बस हो गया माँ…
सुमन – अह्ह्ह… महीने भर से दूर तो बहुत याद आता था अब आ गया है तो ऐसा लगता है दूर ही अच्छा था.. कितना गन्दा चोदता है तू.. कुसुम का तो पता नहीं क्या हाल होगा.. देख… कितना सूज गई है फिर से..
गौतम – चाटकर सूजन कम करदु.. आप कहो तो?
सुमन – अब सो जा शहजादे.. कल जाना भी है गाँव…
गौतम – ठीक है माँ..
अह्ह्ह…
क्या हुआ? ठीक तो हो माँ…
कल इतना बुरा किया और पूछ रहा है ठीक हूँ या नहीं.. वापस लंगड़ी कर दिया तूने..
अच्छा सॉरी माँ.. लो आओ मैं गोद में उठाके ले चलता हूँ..
नहीं रहने दे मैं चलकर ही गाडी में बैठ जाउंगी..
गौतम सुमन को उठाते हुए – ज्यादा नखरे मत किया करो… समझी..
सुमन – अरे दरवाजा तो बंद कर दे.. और लॉक भी कर दे..
गौतम – ठीक है..
गौतम रास्ते में उसी पहाड़ी के नीचे आजाता है..
सुमन – बाबाजी के पास क्यों लाया है? गाँव जाना था ना..
गौतम किसीको फ़ोन करता हुआ – एक और आदमी है जो गाँव चलेगा..
हेलो… हाँ.. नीचे बरगद के पास.. ठीक आ जाओ…
सुमन – कौन आदमी गौतम?
गौतम – है कोई बाबाजी चाहते है बंधन के समय वो उपस्थित रहे…
सुमन – मुझसे तो कुछ नहीं कहा बाबाजी ने..
गौतम – पर मुझसे कहा था… लो वो आ गया.. कैसे हो अंकल…
किशोर जोगी को गाडी में बैठाते हुए – गौतम बड़े बाबाजी और बैरागी…
गौतम – जानता हूँ…
जोगी – बहुत तरक्की कर ली है दुनिया ने..
गौतम गाडी चलाता हुआ – हाँ अंकल..
जोगी – ये तुम्हारी माँ है..
गौतम – हाँ… आप तो सब जानते हो..
सुमन – ये कौन है गौतम?
गौतम – माँ ये बाबाजी के पापा जी है.. जो बाबाजी नहीं कर सकते वो सब ये कर सकते है.. उन्होंने बताया है कि बुआ पिछले जन्म में मेरी माँ थी.. अंकल माँ के बारे में बताओ ना कुछ.. अगले पिछले जन्म में माँ कौन थी..
जोगी – क्या करेगा ये जानकार बेटा…
सुमन – नहीं नहीं.. मुझे कुछ ऐसी पहेली बुझा दो कि ये मुझसे झूठ ना कह पाए कभी..
जोगी – तेरा बेटा जब भी झूठ बोलेगा तुझे पता चल जाएगा बेटी…
सुमन – कैसे?
जोगी – तेरा मन तुझे बता देगा..
गौतम – अंकल ऐसा मत करो… यार..
सुमन – अब बोल बच्चू…
गौतम – अंकल ठीक नहीं किया आपने.. अब आपको मृदुला से नहीं मिलवा सकता..
सुमन – कौन मृदुला?
गौतम – कुसुम पिछले जन्म में इनकी बेटी मृदुला थी.. और ये 300 साल पहले से यहां आये है..
सुमन हसते हुए – चल झूठा..
गौतम – अंकल आप ही समझा दो..
जोगी – बेटी ये सच कह रहा है…
सुमन – अच्छा..
गौतम – हाँ.. और मैं कोई टूर पर नहीं गया था.. पिछले जन्म में गया था बड़े बाबाजी के काम से..
सुमन – बड़े बाबाजी तुझसे मिले थे?
गौतम – सिर्फ मिले नहीं थे.. उन्होंने ही मुझे पिछले जन्म में भेजा था.. ताकि मैं जदिबूती लाकर उनको दे सकूँ और वो मर सके.. बड़े बाबाजी को अंकल ने ही जागीरदार से एक फ़कीर बना दिया था.. और 300 साल से बड़े बाबाजी अपनी सजा काटरहे थे..
सुमन – क्या कह रहा है ग़ुगु…
गौतम – सच कह रहा हूँ माँ.. मैं जदिबूती कि जगह अंकल को ले आया और अंकल ने बड़े बाबाजी और उनके ऊपर जो बैरागी की आत्मा थी दोनों को मुक्ति दे दी..
जोगी – और कितना समय है बेटा..
गौतम – बस आधे घंटे में पहुंच जायेंगे अंकल.. वैसे कुसुम तो आपको पहचानेगी नहीं फिर आप क्या करोगे?
जोगी – मैंने मृदुला से वादा किया था बेटा.. मैं उसे मिलने जरुर आऊंगा.. वो जैसे ही मुझे देखेगी उसे सब याद आ जाएगा..
गौतम – बैरागी भी?
जोगी – इस जन्म में उसके लिए अब तू ही बैरागी है बेटा..
सुमन – क्या बात हो रही मेरी तो कुछ समझ नहीं आता..
गौतम – आप मत समझो.. लो अंकल आ गया गाँव भी.. मिल लो आपकी मृदुला से…
हेमा – आओ बेटा… ये बहुत अच्छा फैसला किया तुमने जो बंधन जल्दी करने की हामी भर ली.. आज रात बहुत धूमधाम से सब होगा..
मानसी – आओ जमाई राजा.. बड़ा इंतजार हो रहा है तुम्हारा.. आओ सुमन..
गौतम – कुसुम कहा है?
मानसी – थोड़ा सब्र रखो जमाई राजा.. कुसुम अपने कमरे में है.. शाम को बंधन के बाद आराम से मिल लेना और ले जाना अपने साथ..
शाम को पंचायत के सामने बंधन की सारी रस्मे हो जाती है और गौतम कुसुम को पत्नी के रूप में स्वीकार कर लेता है..
कुसुम – छत ओर क्या कर रहे हो?
गौतम – किसीको मिलना है तुमसे..
कुसुम – कौन?
गौतम – तुम्हारे बाबा..
कुसुम – बाबा?
गौतम – हाँ.. देखो..
कुसुम जोगी को देखकर आंसू बहती हुई – बाबा…
जोगी – रोते हुए – मृदुला..
सुमन नीचे से ऊपर छत पर आती हुई – गौतम??
जोगी – मैंने वादा किया था ना मृदुला.. मैं तुमसे मिलने जरुर आऊंगा..
कुसुम – बाबा… आप कहा चले गए थे..
जोगी – मृदुला.. तूने व्यर्थ ही हठ करके जान गवा दी.. अगर बैरागी की बात मानकर जंगल से बाहर चली जाती तो शायद मुझे और तुझे मिलने के लिए इतना इंतेज़ार नहीं करना होता..
कुसुम – बाबा.. आप अब कहीं नहीं जाएंगे ना..
जोगी – जाना तो पड़ेगा मृदुला.. प्रकृति के नियम तोड़कर मैं यहां नहीं रह सकता मुझे वापस उस दुनिया में जाना होगा…
कुसुम – मैं भी आपके साथ चलूंगी बाबा…
जोगी कुसुम के सर ओर हाथ रखकर – नहीं मृदुला.. मैं तुझे तेरी सारी विद्या जो पिछले जन्म में तेरे पास थी उसे तुझे स्मरण करवा रहा हूँ.. अब तू साधारण नहीं है..
गौतम – ओ अंकल ये सब मत करो.. ये पहले ही मुझे बहुत तंग करती है इतना ताक़त और शक्ति पाने के बाद तो ये पागल हो जायेगी..
कुसुम हस्ती हुई – बाबा… ये बहुत मनमौजी है..
जोगी – इसका उपचार तो तू ही कर सकती है मृदुला… अब मुझे जाने दे.. अब मैं सुख से रह पाऊंगा वहा..
कुसुम गले लगते हुए – बाबा..
सुमन हैरात से – मतलब… सच में..
गौतम सुमन – और क्या मैं मज़ाक़ कर रहा था..
जोगी – अपना ख्याल रखना मेरी बच्ची…
जोगी ये कहकर जने लगता है..
गौतम – वापस जाओगे कैसे ससुर जी?
जोगी – मरने से पहले वीरेंद्र सिंह से मैंने आयामों के मध्य का रहस्य जान लिया था.. मेरे लिए वापस जाना कठिन नहीं.. लेकिन अब मेरी मृदुला की रक्षा और सुख तेरे ऊपर है बेटा..
गौतम – टेंशन मत लो.. ससुर जी..
कुसुम – बाबा.. मेरी चिंता मत करो..
जोगी जाते हुए – सुखी रह मेरी बच्ची..
जोगी के जाने के बाद..
सुमन – कुसुम सँभालना अपने गौतम को.. मुंह मारने की आदत है इसे…
कुसुम गौतम को पकड़कर उसके लंड ओर हाथ लगती हुई – आप फ़िक्र मर करो बड़ी माँ.. घर के अलावा अगर ये किसी और के साथ मुंह काला करना भी चाहेगा तो इसका सामान खड़ा नहीं होगा..
गौतम – ऐ जादूगरनी… ये फालतू का जादूगर टोना मुझे ओर मत करना समझी ना..
कुसुम मुस्कुराते हुए – जादू तो हो चूका है..
सुमन – घर की मतलब?
कुसुम – मैं आपका मन पढ़ सकती हूँ बड़ी माँ.. मैं गौतम का मन भी पढ़ सकती हूँ.. घर की मतलब घर की..
सुमन – कुसुम.. तू?
कुसुम – हाँ बड़ी माँ.. आप और बुआ सब..
गौतम – और भाभी..
कुसुम – हम्म भाभी भी घर की है..
गौतम कुसुम और सुमन को बाहों में भरकर – मतलब दोनों दुल्हन आज मेरे साथ…..
एक जोर का थप्पड़ सो रहे गौतम के गाल पर पड़ता है….
गीतम नींद से जागता हुआ – हा…. क्या.. क्या हुआ..
सुमन गुस्से में – खड़ा हो जा.. कब तक सोता रहेगा.. ऊपर से नींद में अनाप शनाप बोले जा रहा है… जल्दी से तैयार हो जा… आज बाबाजी के जाना है.. तेरे पापा भी आज जल्दी थाने चले गए..
गौतम. – ये पुलिस क्वाटर?
सुमन – तो और क्या महल में रहता है तू… उठा जा.. और ये सपने देखना बंद कर…
गौतम – मतलब ये सब सपना था…
सुमन गुस्से से – ओ सपनो के सौदागर… उठता है या और एक जमाउ तेरे गाल पर… बस सपने ही देखता रहता है दिन रात…
गौतम सोच रहा था की कितना हसीन सपना था.. जिसमे उसकी सारी ख्वाहिश और इच्छाएं पूरी हो रही थी.. वो उठकर बाथरूम में चला जाता है और आम दिनों की तरह मुट्ठी मारके नहाता है और फिर अपना कीपेड फ़ोन उठाकर अपनी माँ सुमन को उसी पुरानी और बाबा आदम के जामने की बाइक जिसे उसके बाप जगमोहन ने दिलवाया था उसपर बैठाकर बाबाजी के चल पड़ता है..
गौतम उदासी से – पेट्रोल नहीं है..
सुमन – 500 का नोट देती हुई.. डलवा ले..
गौतम 200 का पेट्रोल डलवा कर 300 जेब में डाल लेता है और सुमन को बाबाजी के पास उसी पहाड़ी के नीचे बरगद के पास ले आता है..
सुमन – चल ऊपर..
गौतम – नहीं जाना आप जाओ..
सुमन – सुबह से देख रही हूँ जब से जागा है अजीब बर्ताव कर रहा है.. क्या बात है..
गौतम कुछ नहीं… आप जाओ मैं यही इंतेज़ार कर लूंगा..
सुमन – ठीक है तेरी मर्ज़ी पर यही मिलना.. समझा..
सुमन चली जाती है और गौतम के फ़ोन ओर आदिल का फ़ोन आता है..
आदिल – क्या कर रहा था रंडी?
गौतम – नींद में तेरी अम्मी शबाना को चोद रहा था..
आदिल – अबे लोड़ू.. फालतू बात मत कर..
गौतम – तो बोल ना रंडी के क्या बात है..
आदिल – रांड चोदने चलेगा रात को..
गौतम – पैसे तू दे तो चल…
आदिल – आज तक कौन तेरा बाप ठुल्ला दे रहा था.. रात को 7 बजे घर आ जाना..
गौतम – ठीक है गांडू…
गौतम मन में – कितना हसीन सपना था यार… काश वो सब सच होता…
