Update 33
गौतम सुबह उठा तो उसने सबसे पहले किशोर कुमार के पुराने गाने लगा कर कान में इयर बड्स लगा लिए औऱ ब्रश करता हुआ बाथरूम में आ गया.. टट्टी करने इंग्लिश पोट पर बैठकर गौतम फ़ोन चलाते हुए फ़ोन देख ही रहा था उसे कल आदिल की बात याद आई औऱ उसने व्हाट्सप्प खोल लिया फिर आदिल के भेजे फोटो देखने लगा..
जैसे ही गौतम ने आदिल की व्हाट्सएप मैसेज पर भेज़ी हुई तस्वीर देखी और उनमें किसी जोड़े की शादी को देखा तो वह हैरत में पड़ गया और अपना सर को खुजाते हुए उसने आदिल को फोन कर दिया…
गौतम ने आदिल से तस्वीर के बारे में पूछताछ की और आदिल ने जवाब दिया कि कल जब वो अपने दोस्त मोनू (फोटोग्राफर) की दुकान पर गया था तब उसने दुकान पर यह तस्वीर देखी.. औऱ वही से इन तस्वीरों की पिक लेकर उसे massage किया..
गौतम ने आगे औऱ कुछ पूछा तो आदिल ने जवाब दिया की ये तस्वीर मोनू ने परसो खींची थी जब उसे एक आदमी ने बुलाया था.. किसी पुराने धार्मिक जगह पर ये शादी हुई थी औऱ गिनती के 3-4 लोग ही उसमे शामिल थे..
गौतम ने फ़ोन रख दिया औऱ फ्रेश होकर बाहर आ गया उसने सबसे पहले रूपा को फ़ोन किया औऱ कहा…

(रूपा 41)
गौतम चिड़चिड़े पन से – ये क्या मज़ाक़ है?
रूपा – अच्छा तो तुम्हे खबर मिल गई? ये मज़ाक़ नहीं है नन्हे शैतान..
गौतम – माँ को पता चलेगा तो क्या होगा पता है ना?
रूपा – जो भी हो.. अब मैं कुछ नहीं कर सकती..
गौतम – तुम भी ना उड़ते तीर लेती हो.. अब संभालना माँ को आपको ही..
रूपा – मैं देख लुंगी.. तुम मत बताना..
गौतम – बताने के लिए ये कोई ख़ुशी खबर थोड़ी है.. आपने भी ना काण्ड कर दिया फालतू में.. पापा ही मिले थे आपको शादी करने के लिए..
रूपा – अच्छा ये सब छोड़.. ये बता तू केसा है..
गौतम – अब तक ठीक था पर आपने जो बम फोडा है उसके बाद सर दर्द होने लगा है..
रूपा हसते हुए – तू जल्दी से मेरे पास आजा मेरे नन्हे शैतान फिर मैं प्यार से तेरा सर दबाकर तेरा सर दर्द दूर कर दूंगी..
गौतम – हम्म्म..
रूपा – अपना ख्याल रखना नन्हे शैतान..
गौतम – ख्याल तो आप अपना रखना मम्मी.. जब से बाबाजी के पास होके आई हो एक बार भी मुझे अपनी गुफा में घुसने नहीं दिया.. इस बार कोई बहाना नहीं चलेगा..
रूपा – इस बार तुझे जो करना हो कर लेना मेरे नन्हे शैतान.. पर जल्दी से आजा बहुत दिन हो गए तुझे देखे हुए…
गौतम – रखता हूँ मम्मी.. कोई बुला रहा है..
रूपा – बाय गौतम..
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(माधुरी 36)
माधुरी – रूपा तुमने ये अच्छा नहीं किया.. किसी की मज़बूरी का फ़ायदा उठाना सही नहीं है..
रूपा – मैंने कहा किसी की मज़बूरी का फ़ायदा उठाया है माधुरी? मैंने तो बस एक सौदा किया था जगमोहन के साथ.. तुम भी तो राजी थी उसके लिए..
माधुरी – मैं राजी हुई क्युकी मेरे पास औऱ कोई रास्ता नहीं बचा था.. अगर तुम्हारी शर्त नहीं मानती तो जगमोहन को जेल हो जाती औऱ ये घर भी नीलाम हो जाता.. मैं सडक पर आ जाती..
रूपा – जगमोहन जुए में लाखों रुपए हार गया औऱ फिर रिश्वत लेते भी पकड़ा गया तो इसमें मेरी क्या गलती माधुरी? मैंने तो मदद करने की पेशकश की.. तुमने औऱ जगमोहन दोनों ने इसे माना था..
माधुरी – पर मैं ये नहीं समझ पा रही कि तुमने जगमोहन से शादी क्यों की? उसके पास ऐसा क्या है जो तुम्हे चाहिए.. मैंने बताया था तुम्हे कि वो अब किसी काम का नहीं.. ना उसके पासवर्ड कुछ ऐसा है जो तुम्हे वो दे सकता है..
रूपा – मुझे जगमोहन से सिर्फ उसकी पत्नी होने का दर्जा चाहिए था माधुरी.. वो मुझे मिल चूका है.. अब मुझे औऱ किसी की जरुरत नहीं..

माधुरी – बहुत अजीब बात है रूपा.. तुमने ऐसे आदमी से शादी की जो अब नामर्द बन चूका है औऱ तुम खुश भी हो.. तुमने जगमोहन की नोकरी बचाई उसे जेल जाने से बचाया औऱ अब इस घर पर बाकी लोन भी चुकाने को तैयार हो.. मैं तुम्हे समझ नहीं पास रही..

रूपा – माधुरी मैं तुम्हारे साथ इस घर में तुम्हारी बड़ी बहन बनकर रह सकती हूँ.. हमें आपस में लड़ने झगड़ने की जरुरत नहीं है.. मैं तुम्हे एक सच्चाई बताना चाहती हूँ..
माधुरी – कैसी सच्चाई रूपा?
रूपा – माधुरी मैंने जगमोहन से शादी इसलिए नहीं की कि मुझे जगमोहन पसंद है या मैं तुम्हारे साथ इस घर में रहना चाहती हूँ.. मेरे जगमोहन से शादी करने का कारण गौतम है.. मैं गौतम सको एक माँ औऱ एक प्रेमिका दोनों का प्यार देना चाहती हूँ..
माधुरी – ये क्या कह रही हो रूपा.. तुम होश में तो हो? गौतम बस एक बच्चा है.. जब उसे इसका पता लगेगा तो वो क्या सोचेगा तुम्हारे बारे में.. औऱ सुमन? सुमन तो तुम्हारी जान ही ले लेगी.. गौतम पर सिर्फ सुमन का अधिकार है..
रूपा – देखो माधुरी.. मैं जानती हूँ कि तुम भी गौतम के साथ उसी तरह रहना चाहती हो जैसे कि मैं.. मैंने कल तुम्हारी औऱ गौतम कि बाते सुनी थी औऱ मैं जानती हूँ तुम भी गौतम से वैसा ही रिश्ता रखना चाहती हो जैसा मैं रखना चाहती हूँ.. मुझसे तुम्हे कुछ छिपाने की जरुरत नहीं है.. हम दोनों मिलकर गौतम का हर तरह से ख्याल रख सकते है.. औऱ रही बात सुमन की तो उसे किसी भी तरह हमें समझाना पड़ेगा कि वो गौतम के साथ यहां हमारे साथ आकर रहे..

माधुरी – ये तुम क्या बोले जा रही हो रूपा.. सुमन कभी ऐसा नहीं करेगी..
रूपा – सब होगा माधुरी.. मैं तुम औऱ सुमन तीनो इस घर में एक साथ गौतम की माँ बनकर रहेंगी.. सुमन के पीठ पीछे हम गौतम को माँ के साथ साथ उसकी प्रेमिकाएं बनकर भी उसका ख्याल रखेंगी..
माधुरी कुछ देर सोचकर – क्या ये सच में हो सकता है रूपा? क्या ऐसा मुमकिन है? क्या गौतम हम दोनों के साथ वैसा रिश्ता रखेगा?

रूपा – हाँ माधुरी.. ऐसा जरुर होगा.. अब किसी तरह बस सुमन को यहां रहने के लिए राजी करना होगा.. मुझे पता है जब वो तुमपर गुस्सा है औऱ जब मेरी औऱ जगमोहन की शादी के बारे में जानेगी तब मुझपर भी गुस्सा होगी.. मगर हमें किसी भी तरह उसे मनाना होगा..
माधुरी कुछ देर ठहर कर – ठीक है रूपा.. मैं तैयार हूँ.. आज से हम दोनों बहने बनकर रहेंगी.. सुमन को मनाने में मैं तुम्हारी हर तरह से मदद करूंगी..
रूपा माधुरी के गले लगते हुए – मैं जानती थी माधुरी तुम जरुरत मेरी बात मान जाओगी..
माधुरी भी रूपा को गले लगाकर – बहन.. मैं तुम्हारे साथ हूँ.. तुम्हारी तरह मैं भी गौतम के बिना नहीं रह सकती..


रूपा – मैं समझ सकती हूँ माधुरी.. गौतम ने मेरी तरह तुम्हे भी अपना दीवाना बना दिया है..
माधुरी – उसकी क्या गलती रूपा.. उसके प्यारा सा चेहरा मीठी बातें औऱ मर्दानगी किसी को भी अपना गुलाम बना सकती है..
रूपा – सच में माधुरी..
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गायत्री – कुछ दिन औऱ रुक जाती सुमन..
सुमन – माँ.. आप तो जानती है वहा कितना काम पड़ा है? ग़ुगु के आखिरी एग्जाम भी आने वाले है..
गौतम सीढ़ियों से नीचे उतरता हुआ – उनमे अभी समय है माँ.. हम 2-3 दिन औऱ नानी के साथ रह सकते है..

आरती मुस्कुराते हुए – अब तो आप खुश है बुआ.. मेरे देवर ज़ी ने भी रुकने के लिए हामी भर दी है..
गौतम आरती को देखकर – अब आपने ख्याल ही इतना रखा है मेरा.. आपका कहा कैसे टाल सकता हूँ..
गायत्री – सुमन अब तो हमारे ग़ुगु ने भी कह दिया है अब तो रुकना ही पड़ेगा तुझे कुछ औऱ दिन मेरे साथ..
सुमन – पर माँ..
संजय – पर वर कुछ नहीं सुमन.. रुकना है तो रुकना है.. समझी?

(कोमल 42)
कोमल – अरे शबनम.. कहा मर गई तू..

(शबनम 30)
शबनम – आई मालकिन..
कोमल – कल से देख रही हूँ तू आहूत कामचोरी करने लगी है..
शबनम – नहीं मालकिन वो पैर में हलकी सी मोच आ गई थी इसलिए थोड़ा धीरे चल रही हूँ..
संजय – अब तेरे भी मेरो में मोच आ गई? माँ पता नहीं क्या हो रहा है? पहले कोमल फिर आरती बहु औऱ आपके मोच आई अब इस शबनम के भी मोच आ गई..
सुमन गौतम को देखकर – पत्थर की जगह पहाड़ से जाकर टकरायेगी तो मोच तो आएगी ना भईया..
संजय – मतलब सुमन?
सुमन – कुछ नहीं भईया.. सबको कहो देखकर चले.. मोच नहीं आएगी..
शबनम सबको चाय देते हुए गौतम के पासवर्ड आकर – ग़ुगु भईया चाय..
गौतम चाय लेते हुए धीरे से शबनम को – thanks मालकिन..
शबनम मुस्कुराते हुए वापस रसोई में चली जाती है..
चेतन बाहर से हॉल में आते हुए – पापा जीजाजी का फ़ोन आया था.. वो ऋतू को लेकर आने ही वाले है..
गौतम – कल विदाई हुई थी आज वापस भी आ रहे है..
गायत्री हसते हुए – ग़ुगु.. विदाई के बाद दुल्हन को पगफेरे की रसम के लिए वापस अपने माइके आना होता है..
सुमन – रहने दो माँ.. अंग्रेजी स्कूल में जाकर इसे ये सब रस्म औऱ रीवाज ढकोसला लगने लगा है..


कोमल गौतम का गाल चूमते हुए – ऐसा क्यों कहती हो सुमन.. मेरा ग़ुगु तो कितना प्यारा है.. शादी वाले दिन मेरे ग़ुगु के सामने कोई औऱ नहीं नज़र ही नहीं आ रहा था.. चादन सा है मेरा ग़ुगु..
सुमन से कोमल जलते हुए – इतना लाड प्यार करने की जरुरत नहीं है भाभी.. ये पहले ही बहुत बिगड़ चूका है औऱ मत बिगाडो इसे..
कोमल – अरे बिगड़ना तो रईसो का शोक रहा है.. अब मेरा ग़ुगु जवानी में नहीं बिगड़ेगा तो कब बिगड़ेगा?
सुमन को कोमल से अब औऱ जलन होने लगी थी औऱ समझ रही थी कोमल क्या करने की कोशिश कर रही है उसने कहा – रहने दो भाभी.. मेरा ग़ुगु कोई रईस नहीं है..
कोमल गौतम के बाल सहलाते हुए – ऐसा क्यों कहती हो सुमन.. इतना सब तुम्हारे भईया ने जो कमाया है उसे खर्च करने वाला भी तो कोई चाहिए… ग़ुगु नहीं करेगा तो कौन करेगा? आखिरी ग़ुगु भी इसी घर का बेटा है..
सुमन से इस बारहा ना गया तो उसने कहा – मैं औऱ मेरा ग़ुगु जिस हाल मैं है खुश है भाभी.. आपको अगर आपके पैसे उड़ाने के लिए कोई वारिश चाहिए तो भईया के साथ एक बच्चा औऱ कर लीजिये…
कोमल सुमन की बात सुनकर मन ही मन सुमन पर झल्ला रही थी औऱ उसे दो चार खरी खोटी सुना देना चाहती थी मगर सबके वहा होने से वो ये बातें मन ही मन दबा गई.. संजय औऱ गायत्री जानते थे की कोमल बाँझ है औऱ सुमन ने अभी अभी उसे ताना मारा था..
गायत्री ने बात सँभालते हुए कहा – अरे अब कोमल को क्या जरुरत है बच्चा करने की.. हमारा ग़ुगु है तो.. चेतन तो संजय की तरह ही काम धंधे में घुस गया.. औऱ ऋतू पराई हो गई.. अब तो आरती से उम्मीद है वो हमें खुशखबरी दे दे..
आरती मुस्कुराते हुए गौतम को देखकर रसोई में चली गई..
गायत्री – देखो कैसे शर्मा के चली गई गई..
संजय – माँ मुझे एक जरुरी काम से बाहर जाके आना है.. एक घंटे में आ जाऊंगा दामाद ज़ी आये तो आप संभाल लेना..
चेतन – पापा मैं भी चलता हूँ..
कोमल – अरे यहां भी तो कोई होना चाहिए..
चेतन – आप लोग हो ना.. ग़ुगु भी तो है..
कोमल सुमन की बातों को दिल में बैठा चुकी थी उसे अपने बाँझ होने का दुख हो रहा था औऱ सुमन पर गुस्सा आ रहा था.. कोमल छत पर बने कमरे के पीछे कोने में सिसकती हुई खड़ी हो कर आंसू बहाने लगी थी..
गौतम जानता था की कोमल को सुमन की उस बात का कितना दुख पंहुचा है.. इसलिए गौतम कोमल के पीछे पीछे कुछ देर बाद ही छत पर आ गया था..
गौतम ने रो रही कोमल को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया औऱ कोमल की गर्दन चूमते हुए कहा..
गौतम – मामी आपके मुंह से रोते हुए सिसकियाँ अच्छी नहीं लगती बल्कि चुदवाते हुए सिसकियाँ अच्छी लगती है..
कोमल गौतम को देखकर आंसू पोछते हुए – तू कब ऊपर आया बेटा? बता तो देता.. मैं रो नहीं रही थी.. मेरी आँखों में तो कचरा चला गया था..
गौतम कोमल को अपनी तरफ घुमाकर दिवार से स्टाते हुए – मुझसे झूठ बोलोगी तो ऐसी गांड मारूंगा मामी अगले दस दिन रेंगति हुई चलोगी.. समझी? माँ की बात का बुरा लगा ना आपको?
कोमल मुस्कुराते हुए – मुझे क्यों सुमन की बात का बुरा लगने लगा बेटा? मैं तो यूँ ही ऋतू को याद करके रो रही हूँ..
गौतम ब्लाउज के ऊपर से कोमल के चुचे पकड़तकर मसलते हुए – मामी आपको झूठ बोलना भी नहीं आता..
कोमल अपने बूब्स ओर से गौतम का हाथ हटाती हुई – ग़ुगु.. कोई आ जायेगा.. बंद कमरे वाली चीज़े खुले में मत करा कर.. ये बोलकर कोमल गौतम को पीछे कमरे में ले जाती है.. औऱ अपनी साडी का पल्लू गिराते हुए गौतम के सामने घुटनो ओर बैठकर उसकी जीन्स खोलते हुए लंड हाथ में लेकर कहती है – सुबह से मेरे आगे पीछे घूम रहा था.. मैं तभी समझ गई थी आज मेरी इज़्ज़त खतरे में है..


गौतम कोमल को लोडा चूसाते हुए – अब आप हो ही इतनी ब्यूटीफुल मामी.. आपको देखकर दिल कैसे ना करें चोदने का.. रात को तो आप सो गई थी वरना रात को ही मैं आपको प्यार करता..
कोमल मुंह से लंड खड़ा करके खड़ी होती हुई – इतनी जरुरत थी तो जगा लेता ग़ुगु.. मैं कुछ कहती थोड़ी तुझे..
गौतम कोमल को उस कमरे के बेड पर लेटा कर साडी ऊपर करके चड्डी नीचे सरकता हुआ – आप सोते हुए प्यारी लग रही थी मामी.. मुझे जगाना सही नहीं लगा..
ये कहते हुए गौतम ने अपना लंड कोमल की चुत में डाल दिया औऱ धीरे धीरे प्यार से चोदने लगा..

कोमल गौतम को चूमकर आहे भरते हुए – आज क्या बात है ग़ुगु.. तू इतना प्यार से कर रहा है.. उस दिन तो जान निकाल दी थी तूने.. आज बहुत प्यार आ रहा है तुझे अपनी मामी पर?
गौतम चोदते हुए – मामी आप हो ही इतनी प्यारी.. प्यार तो आएगा ही औऱ आपकी चुत भी बहुत टाइट है.. खामखा जोराजोरी में बेचारी को दर्द सहना पड़ेगा..
कोमल – मेरी इतनी परवाह है तुझे ग़ुगु? काश तू मेरा अपना बच्चा होता.. फिर देखती वो सुमन की बच्ची कैसे मुझे इतना सब सुनाती..
गौतम कोमल को पलटकर पीछे से चुत चोदते हुए – मामी आप भी तो माँ को इतना सब सुना देती हो.. आप दोनों की कैट फाइट किसी फ़िल्मी मूवी से ज्यादा मसालेदार होती है..


कोमल मुस्कुराते हुए – मैं तेरी माँ से कितना भी लडू ग़ुगु.. तू कभी मुझसे नाराज़ मत होना.. मैं बहुत प्यार करती हूँ तुझे..
गौतम हलके तेज़ धक्के मारते हुए – जानता हूँ मामी.. आप तो मेरी गर्लफ्रेंड हो.. औऱ इतनी टाइट चुत वाली गर्लफ्रेंड से नाराज़ नहीं होता मैं..
कोमल सिसकियाँ लेते हुए – ग़ुगु बेटा.. फ़ोन आ रहा है..
गौतम चुदाई रोककर साइड में पड़े फ़ोन को उठाते हुए – आपका आ रहा है मामी..
कोमल फोन उठाकर – हेलो..
चेतन – माँ जीजाजी.. दस मिनट में पहिचने वाले है..
कोमल – औऱ तु अपने पापा के साथ कब आ रहा है?
चेतन – हम निकल चुके है आधा घंटा लग जाएगा..
कोमल फ़ोन काट कर – ठीक है..
कोमल – ग़ुगु बेटा जल्दी कर दस में ऋतु आने वाली है..
गौतम वापस चुदाई शुरू करता हुआ – ठीक है मामी बस पांच मिनट औऱ.. ये कहते हुए गौतम सुमन की चुत में ताबड़तोड़ झटके मारने लगा जिससे कोमल औऱ ज्यादा सिसकियाँ भरने लगी..
कोमल सिसकिया भरते हुए – बेटा थोड़ा धीरे.. ग़ुगु.. आह्ह… बेटा आराम से.. आह्ह.. ग़ुगु धीरे चोद बेटा अपनी मामी को..

गौतम – मामी आप लग ही इतनी प्यारी रही हो.. कहा था ना चुदवाते हुए सिसकियाँ लेती हुई अच्छी लगती हो.. रोते हुए नहीं..
कोमल झड़ते हुए – ग़ुगु.. आहहह… बेटा…
गौतम कोमल के साथ झड़ते हुए – आहहह… मामी मैंरा भी हो गया..
कोमल औऱ गौतम एक साथ झड़े औऱ मुस्कुराते हुए कोमल गौतम को बेतहाशा चूमती हुई प्यार करने लगी.. फिर दोनों ने खड़े होकर अपने आपको ठीक किया..


कोमल मुस्कुराते हुए गौतम का गाल खींचकर – बस.. हो गयी इच्छा पूरी? अब तो खुश मेरा ग़ुगु?
गौतम मुस्कुराते हुए कोमल का हाथ चूमकर – बहुत खुश मामी.. जितना फेशन आप करती हो.. आपको देखकर कोई नहीं कह सकता आपकी इतनी टाइट होगी..
कोमल – तुझे मज़ा आया ना बेटा..
गौतम – बहुत मामी..
कोमल – ग़ुगु तू सुमन को समझा ना.. यही क्यों नहीं रह जाती वो तुझे लेकर.. क्यों ज़िद पर अड़ी हुई है.. मैं जानती हूँ उसके औऱ जगमोहन के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा.. वहा उस छोटे से पुलिस क्वाटर में कब तक दिन गुजारेगी?
गौतम – आप खुद ही क्यों नहीं समझा देती मामी.. मेरे समझाने से तो वो नहीं समझेगी.. उनकी औऱ आपकी लव स्टोरी भी तो बहुत उलझी हुई है..
कोमल गौतम के गाल सहला कर हसते हुए – चुप पागल.. चल नीचे.. ऋतू आ गई लगता है..
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राहुल ऋतू, ऋतू की सास औऱ ससुर सब हॉल में बैठे हुए थे.. उसके साथ गायत्री सुमन आरती औऱ अब कोमल भी आ बैठी थी.. नाश्ता सामने टेबल रखा था.. हंसी ख़ुशी का माहौल था.. शबनम चाय बना रही थी औऱ शबनम के पीछे गौतम उसे इधर उधर छू कर छेड रहा था जिस पर शबनम मुस्कुराते हुए बार बार गौतम को छूने से रोक रही थी..

गौतम ने थोड़ा सा मौका पाकर शबनम की कमर पर अपने हाथों से चीकूटी काट ली औऱ शबनम गौतम की तरफ बनावटी गुस्से वाली आँखों से देखती हुई धीरे से बोली बोली..
शबनम – अब कुछ किया तो थप्पड़ पड़ेगा..
गौतम मुस्कुराते हुए गाल आगे करके – मारो ना मालकिन..
शबनम रसोई के दरवाजे को देखकर जल्दी से एक प्यार भरा चुम्मा गौतम के गाल पर करके एक धीमा सा थप्पड़ मार देती है..
गौतम शबनम को पकड़कर बाहों में भरता हुआ – गाल पर भी कभी चुम्मा होता है मालकिन? चूमा तो होंठों से होंठ मिलते है तब होता है..
शबनम दरवाजे को देखती हुई – छोड़ ग़ुगु कोई आ गया तो मेरी नोकरी चली जायेगी..
गौतम होंठ आगे करके – पहले चुम्मा दो मालकिन तभी छोडूंगा..
शबनम जल्दी से गौतम के होंठ चूमकर – बस अब छोड़..

गौतम शबनम को छोड़कर – चाय बनाने के बाद छत पर आ जाना मालकिन.. साथ में एक सुट्टा मारेंगे..
शबनम – अभी नहीं ग़ुगु.. मालकिन बुला लेगी मुझे.. बाद में..
गौतम शबनम का बोबा दबाकर – ठीक है मालकिन..
शबनम मुस्कुराते हुए गौतम को धक्का देकर – अब जा यहां से.. वरना कोई देख लेगा..
गौतम रसोई से हॉल में आ जाता है..

आरती गौतम का हाथ पकड़कर अपने पास बैठाते हुए – देवर ज़ी आओ.. हमारे साथ भी बैठो.. देखो आपकी दीदी.. आते ही आपके बारे में पूछ रही है.. मैंने भी कह दिया हमने अभी तक देवर ज़ी को कहीं जाने नहीं दिया औऱ रोक कर रखा है..
गौतम ऋतू को देखकर – भाभी दीदी की बोलती बंद है.. लगता है वापस आकर अच्छा नहीं लगा दीदी को..
ऋतू सरक कर अपने बगल में जगह बनाती हुई – तू इधर आ मेरे पास.. अभी बताती हूँ तुझे..

गौतम उठकर ऋतु के पास बैठ जाता है.. औऱ ऋतू गौतम का कान पकड़कर – कब से आकर बैठी हूँ औऱ तू है की छिपा हुआ था?
राहुल हसते हुए – आराम से ऋतू.. भाई है तुम्हारा..
ऋतू की सास बबिता – हा ऋतू.. कितना जोर से कान खींचा है तूने.. दर्द होगा बेचारे को..
ऋतू – कुछ नहीं होगा इसे.. जब देखो मुझे सताने के बहाने ढूंढता रहता है..
सुमन – ऋतू आराम से बेटा..
ऋतू – आप बीच में मत बोलो बुआ.. जब से गई हूँ सबने फ़ोन किया है एक इसी बेशर्म को मेरी याद नहीं आई..
गौतम कान छुड़ाते हुए – अच्छा सॉरी ना.. छोडो..
संजय औऱ चेतन भी आकर सोफे पर बैठ जाते है..
सब हंसी ख़ुशी के माहौल में थे आपस में बातें कर रहे थे शबनम चाय की ट्रे लाकर चाय बाँट देती है औऱ नाश्ता करते हुए सब चाय पिने लगते है.. कुछ देर इसी तरह बातें करने के बाद में रितु अपने कमरे में चली जाती है और उसके कुछ देर बाद गौतम भी ऋतु के कमरे में चला जाता है..
गौतम ऋतू को गले लगता हुआ – बहुत खूबसूरत लग रही हो ऋतू.. याद आई मेरी रात में?
ऋतू – कमीने.. तेरी याद में तो नींद भी नहीं आई.. पता नहीं कैसे रहूंगी तेरे बिना अब..
गौतम – चिंता मत कर ऋतू.. मैं टाइम टाइम पर आता रहूँगा तुझसे मिलने.
ऋतू अपनी साडी उठाकर गौतम का लंड निकालकर अपनी चुत में घुसाती हुई – काश में तेरी दुल्हन बन पाती मेरे भाई.. तुझसे मिलने के लिए छुपना नहीं पड़ता..
गौतम चोदना शुरु करते हुए – फ़िक्र मत कर मेरी बहना जल्दी ही कोई ना कोई औऱ उपाय खोज लेंगे हम दोनों…

ऋतू चुदवाते हुए – मैं तो कल से तेरे इस लंड के बारे में ही सोच रही थी ग़ुगु.. बहुत मस्त औऱ मोटा है.. काश हर रात ये मेरे नसीब में होता.. पता नहीं कौन इसे हर रात अपनी चुत में लेगी.. भाई तू वादा कर मुझे हर दम ऐसे ही प्यार करेगा..
गौतम – ऋतू तू मेरी बहन है जो कहेगी मैं मरते दम तक वही करूँगा.. बस मुझे अपनी ये गांड दे दे
ऋतू – आज नहीं भाई.. वक़्त नहीं है.. कभी फुर्सत में लेना मेरी गांड.. अभी मेरी चुत से काम चला ले.. अगली बार मैं खुद तेरे सामने अपनी गांड परोस दूंगी..
गौतम – वादा कर रही है ऋतू.. भूलना मत.. अगली बार गांड नहीं दी तो जबरदस्ती ले लूंगा..
ऋतू – ले लेना भाई.. मेरे ऊपर तेरा पूरा हक़ है.. अभी जल्दी कर नहीं तो भाभी आ जायेगी..
गौतम चोदते हुए – बस बहाना झड़ने वाला हूँ तेरी चुत में..
ऋतू – मैं भी झड़ने वाली हूँ भाई.. साथ में झड़ते है.. आहहह…
गौतम रितु एक साथ झड़ जाते हैं और फिर कुछ देर बाद एक दूसरे को देखते हुए बातें करने लगते है..
ऋतू – विक्रम का फ़ोन आया था..
गौतम – क्या बोला उसने?
ऋतू – माफ़ी मांग रहा था.. मैंने कह दिया वापस नज़र आया तो वीडियो नेट पर वायरल कर दूंगी..
गौतम – अच्छा किया बहना.. अब सबसे बचा के रखना अपनी चुत का अनमोल गहना..
ऋतू गौतम को चूमते हुए – वापस जाना पड़ेगा भाई..
गौतम – फ़ोन करती रहना बहना.. अगली बार मिलने का इंतजार रहेगा..
ऋतू – मुझे भी..
ऋतु रस्म निभाकर शाम को वापस चली जाती है औऱ अगले दो दिन गौतम गायत्री कोमल आरती औऱ शबनम की जहा मौका मिलता है वही चुदाई करता है.. औऱ आज सुमन के साथ वापस अजमेर जाने को तैयार था.. दोनों दोपहर को अजमेर के लिए निकलने वाले थे औऱ अभी सुबह हो रही थी..
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देवर ज़ी कुछ दिन औऱ रुक जाओ ना.. आपके बिना सब कुछ सुना हो जाएगा फिर से..

रुकना तो मैं भी चाहता हूँ भाभी.. मगर क्या करू? आप तो जानती है माँ को अब अगर मैं कुछ बोलूंगा तो वो मुझे कितना सुनाएंगी..
आरती जीन्स के ऊपर से गौतम के लंड पर हाथ फिराती हुई – बहुत ख्याल रखा है अपने अपनी इस भाभी का देवर ज़ी.. औऱ बहुत सुख भी दिया है.. आप तो कुछ दिनों में दिल के अंदर इतना गहरा उतर गए कि सागर की गहराई भी उसके आगे कुछ नहीं है.. मैंने आपका कितना दिल दुखाया कितना कुछ बोला मगर आपने मुझे कितना प्यार किया.. मुझे माफ़ कर देना देवर ज़ी..
गौतम आरती के होंठ पकड़कर – कितनी ड्रामेबाज़ हो आप भाभी.. मैंने कहा ना हर महीने आपसे मिलने आऊंगा.. आप फ़िक्र मत करो.. आपकी चुत को वापस सिकुड़ने नहीं दूंगा..
आरती मुस्कुराते हुए – शुक्रिया देवर ज़ी..
गौतम – सुबह सुबह आपकी चुत से शुरुआत हुई है.. लगता है आज दिन अच्छा जाएगा मेरा..
आरती छत पर से नीचे जाते हुए – वापस चाहिए तो बता दो देवर ज़ी मैं कुछ नहीं बोलूंगी..
गौतम – अब थोड़ा वक़्त लगेगा भाभी..
आरती – ठीक है देवर ज़ी..
आरती छत से नीचे चली जाती हैऔऱ उसके कुछ देर बाद चेतन ऊपर आ जाता है..
यहां अकेला क्या कर रहा है ग़ुगु..
कुछ नहीं चिंटू भईया बस कुछ सोच रहा था..
क्या सोच रहा था ग़ुगु?
भाभी के बारे में भईया.. भाभी ने बहुत ख्याल रखा है मेरा..
चेतन मुस्कुराते हुए – ख्याल तूने भी अपनी भाभी का बहुत रखा है.. वो बता रही थी कैसे तू उसका सबसे प्यारा साथी बन गया..
गौतम – कहा चेतन भईया.. मैं बस थोड़ा हंसबोल लिया भाभी से.. भाभी इतने में ही खुश हो गई..
चेतन – ग़ुगु मैं भी तुमसे सिर्फ 6 साल बड़ा हूँ.. मुझे चिंटू ही कहकर बोल.. जैसे पहले बोला करता था.. ये फॉर्मेलिटी छोड़ दे..
गौतम – ठीक है चिंटू..
चेतन – अच्छा तूने एग्जाम के बाद का क्या सोचा है?
गौतम – कुछ नहीं.. बस कोई जॉब कर लूंगा औऱ क्या..
चेतन – पागल हो गया है हम जॉब देते है करते नहीं है.. तू एग्जाम के बाद बुआ को लेके यही आ जाना.. यहां अपना कितना काम है उसे कौन संभालेगा..
गौतम – नहीं चिंटू.. माँ कभी इस बात के लिए राज़ी नहीं होगी..
चेतन – ग़ुगु.. मैं जानता हूँ बुआ नहीं मानेगी मगर वो तेरी बात मानने से इंकार नहीं करेगी.. औऱ कल रात आरती भी तेरे जाने का सोच कर रो रही थी..
गौतम – भाभी रो रही थी.. मगर अभी तो उन्होंने कुछ नहीं बताया उसके बारे में..
चेतन – औरत को बात छुपीना औऱ बताना अच्छे से आता है ग़ुगु.. मैं जान चूका हूँ कि वो तुझसे प्यार करने लगी है तेरे बिना नहीं रह पाएगी… उसकी ख़ुशी के लिए एक बार कोशिश करना..
गौतम – चिंटू.. भाभी तुम्हारी पत्नी है..
चेतन – काहेकि पत्नी ग़ुगु.. उसे कभी पत्नी वाला सुख तो मैं दे ही नहीं पाया.. मैं सुबह से रात तक इसलिए दूकान पर रहता हूँ कि मुझे आरती की बातें उसके ताने ना सुनने पड़े.. मगर जब से तू आया है उसने एक बार भी मुझसे गुस्से में या अपने अड़ियलपन से बात नहीं की.. ग़ुगु मैं जानता हूँ तू अपनी भाभी के साथ सो चूका है.. तूने उसे वो सुख दिया है जो एक मर्द से एक औरत चाहती है..
गौतम नज़र झुका – मैं बहका गया था चिंटू.. मैं भाभी के साथ वो सब नहीं करना चाहता था मगर अपने आप सब होता चला गया.. मुझे माफ़ कर दे..
चेतन – ग़ुगु.. इसमें माफ़ी वाली कोई बात नहीं है.. मैं तो खुश हूँ कि तू आरती का ख्याल रख रहा था.. मैं अब भी वही चाहता हूँ.. तू ऐसे ही आरती का ख्याल रखे.. मुझे तेरे औऱ आरती के रिश्ते से कोई ऐतराज़ नहीं है..
ग़ुगु – मैं जानता हूँ चिंटू तू ऐसा क्यों बोल रहा है.. तू चिंता मत कर भाभी को मैं अच्छे से खुश रखूँगा.. वो तुझे परेशान नहीं करेंगी.. औऱ अब तू अपनी जिंदगी भी खुलकर ज़ी सकता है.. यूँ घुट घुट कर जीने की तुझे क्या जरुरत? दुनिया की परवाह छोड़ दे चिंटू.. दुनिया ने किस किस को क्या कुछ नहीं बोला..
चिंटू – मैं समझ नहीं पाया ग़ुगु.. तू कहना क्या चाहता है..
ग़ुगु चिंटू का हाथ पकड़ कर – चल दोनों भाई कहीं घूम के आते है..
चिंटू – कहा ग़ुगु..
ग़ुगु – अभी पता चल जाएगा..
गौतम चिंटू के साथ कहीं चला जाता है औऱ किसी को कुछ massage करता है…
गौतम चिंटू को लेकर एक फाइव स्टार होटल की तरफ आ गया था जहा किसी फ़िल्म की स्टार कस्ट ठहरी हुई थी.. गौतम चिंटू को लेकर एक रूम में आ गया था..
चिंटू – ग़ुगु मुझे यहां क्यों लेकर आया है? मुझे दूकान जाना है..
ग़ुगु – थोड़ी देर वेट करो चिंटू.. सब पता चल जाएगा..
चिंटू – तू क्या कर रहा है मेरी समझ ही नहीं आता..
गुगु – चिंटू मैं जानता हूँ तुझे लड़कियों में कोई दिलचस्पी नहीं है.. तू गे है.. औऱ तू ये बात अब तक सबसे छीपाता आया है.. मगर अब तुझे इस तरह घुट घुट कर जीने की कोई जरुरत नहीं..
चिंटू हैरानी से – ग़ुगु कैसे?
गौतम – चिंता मत करो चिंटू.. मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगा औऱ ना ही तुझे ऐसे घुट घुट के जीने दूंगा..
चिंटू शरमाते हुए – तुझे कैसे पता ग़ुगु.. मेरे बारे में..
गौतम – शादी वाली रात की अगली सुबह.. जब मैं टहल रहा था तब मैंने देखा था.. तू जिस आदमी के साथ था उसे रात को मैने ही बुलाया था..
दरवाजा की बेल बजते ही गौतम दरवाजा खोलकर – आओ वसीम.. किसी ने रोका तो नहीं..
वसीम – ऐसी जगह हमारे जैसे गरीब लोगों तो रोका ही जाता है भईया.. पर आपने रिसेप्शन पर बोला हुआ था इसलिए ज्यादा तकलीफ नहीं हुई आने में..
गौतम – वसीम.. अब से तुम्हे ये काम करने की जरुरत नहीं.. मेरा भाई तुम्हे काम पर रखना चाहता है.. जितना तुम महीने में कमाते हो उससे दुगुनी तनख्वाह मिलेगी.. काम सिर्फ इतना की मेरे भाई को हर दम खुश रखना होगा…
वसीम – जैसा आप बोले..
गौतम चेतन की तरफ इशारा करते हुए – जाओ वसीम भईया इंतजार कर रहे है..
वसीम चेतन के पास जाकर प्यार से उसके होंठ चूमने लगता है औऱ चेतन शर्माते हुए ग़ुगु को देखकर वसीम को रोकते हुए – ग़ुगु सुन.. ग़ुगु..
गौतम रूम से बाहर जाते हुए – एन्जॉय करो भईया..
ये कहकर गौतम रूम से बाहर आ जाता है औऱ दरवाजे पर डु नॉट डिस्टर्ब का sign लटका कर जैसे ही पीछे मुड़ता है उसका पैर फिसल जाता है औऱ वो इस रूम के जस्ट सामने वाले रूम में आगे की तरफ जाते हुए जमीन पर गिर जाता है..
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