Update – 8
जबकि अंदर प्रियंका मजे मे अपनी गांड हिला हिला कर अपनी गांड मे लंड
ले रही थी-“आअह्हह्ह्ह्हह…..बहुत बड़ा मादरचोद है रे तु… आखिरकार
तूने गांड मे लंड पेल ही दिया,….. ऊम्म्ह…. बहुत मजा आ रहा जान और तेज,……
फ़क माय अस्स…ओहह येस…..हारडर…..यमः”
सतीश तो जैसे सातवे आसमान पर था, वो अपने धक्को की स्पीड और
बढा देता है….. और १० मिनट की चुदाई के बाद सतीश- “मे झरने वाला हूँ प्रियंका”….
प्रियंका- “मे भी सतीश……आंह्’……
ओर फिर सतीश अपना लास्ट शॉट लगा कर अपना लंड गांड मे
पुरा अंदर दाल कर उसमे ही झड़ने लगता है… और इसी के साथ प्रियंका भी अपनी
गंद मे सतीश के माल को मह्सुश कर झड़ने लगती है…….
सतीश अपना सारा माल उसकी गांड मे गिराने के बाद अपना
लंड प्रियंका की गांड से निकाल लेता है और साइड मे बेड पर लुडक जाता है,
ओर अपनी आँखे मुंदकर अपनी साँसे कण्ट्रोल करने लगता है…. प्रियंका भी
सतीश के सीने पर अपना सर
रखकर अपनी उखड़ी साँसे कण्ट्रोल करने लगती है….
थोड़ि देर मे जब सतीश की साँसे क़ाबू मे आती है तो उसे नलिनी का ध्यान आता
ही और वो तिरछी नजर से खिड़की की तरफ देखता है, पर नलिनी तो इनदोनो के
झडने के साथ ही झड गई थी और जब ये दोनों अपनी साँसे कण्ट्रोल करने मे
लगे हुए थे तभी वो वहा से अपने चुत से निकले रस को साफ़ करके निकल लेती है….
सतीश के होंठो पर कुछ सोच कर मुस्कान फैल जाती है…. इधर प्रियंका को जब होश
आता है तो वो अपने सर को सतीश के सीने से हटा कर उसके होंठो पर एक छोटा सा कीस करके- “बहुत गंदे हो तुम्, हमेशा अपने मन की करते रहते हो मेरी तो कोई चिंता ही नहीं है तुम्हे”….
सतीश- “क्यों तुम्हे मजा नहीं आया”….
प्रियंका-“मजा तो बहुत आया पर पहले दर्द भी बहुत हुआ”….
सतीश- “अरे जान इस खेल मे जितना ज्यादा दर्द शुरु मे मिलता है उतना ही मजा बाद मे आता है….. वैसे कल का क्या प्लान है,…
मै सोच रहा था की कल भी एक राउंड हो जाये तो”…..
प्रियंका-“भूल जाओ”….
सतीश- “क्यों क्या हुआ….. नाराज हो मुझसे”…
प्रियंका- “ऐसी बात नहीं है, वो कल मुझे अपनी कजिन की बर्थडे
पार्टी मे जाना है, कल सुबह निकलूँगी और फिर २-३ दिन बाद ही आउंगी”….
सतीश-“२-३ दिन बाद, तो २-३ दिन तक मे क्या करुन्गा”….
प्रियंका-“वही जो पहले करते थे- हस्तमैथुन…. ह… ह…. ह”
सतीश-“अच्छा बहुत मजा आ रहा है न मेरी हालत पर हसले पर जब लौट कर आएगी तो तेरी माँ-बहन एक कर दूँगा”…
पहले दोनों अपने-अपने कपडे पहनते हे, और प्रियंका सतीश को
गुड बाय किस देती है… और सतीश निचे चल देता है और प्रियंका ऊपर जो
धमाचौकडी हुई थी उसके सबुत मिटाने मे लग जाती है….
सतीश जब निचे पहुँचता है तो नलिनी को सोफ़े पर बैठा
पाता है वो कोई मैगज़ीन पड़ रही थी… सतीश को निचे आता
देख नलिनी अपनी मैगज़ीन निचे रखते हुये….
नलिनी- “हो गई स्टडी बेटा”…
सतीश- “जी औंटी”….
नलिनी- “काफी मेहनत कर रहे हो”…
सतीश- “जी वो कुछ प्रॉब्लेम्स काफी टफ थी जिन्हे सोल्व करने मे टाइम लग गया”…
नलिनी- “हु… वो तो मे देख ही रही हूँ की तुम काफी तन्न मन
लगा कर स्टडी कर रहे हो”….
तन पर काफी जोर दिया था नलिनी ने….
सतीश- “क्या करे आंटी अच्छे रिजल्ट के लिए तन्न मन तो लगाना ही पडेगा”…
नलिनी-“हमं….तब तो काफी थक भी जाते होगे, और अब तो और मेहनत करने का दम भी नहीं रहा होगा और न ही तुम्हारी कलम में इतनी इंक़”…
सतीश- “अब इतनी मेहनत करेंगे तो थोड़ी थकन तो होगी ही,….
पर मेहनत करने के लिए मे हमेशा तैयार रहता ह, अभी भी ५-६ घंटे बिना रुके मेहनत कर सकता हु….
और कलम की चिंता मत कीजिये, उसमे इंक की कभी कोई कमी नहीं होति,
ओर अगर इंक निकल भी जाये तो, ५-१० मिनट मे दुबारा भर जाती है”….
नलिनी- “काफी स्टैमिना है तुममे”…..
सतीश- “वो तो आप देख ही चुकी हे…..
नलिनी एक दम शॉक होते हुये- “क्या??? सतीशने कब देख….
सतीश- अरे आज देखा नहीं आपने की आज सतीशने नॉन-स्टॉप २.३० घंटे तक
आपकी बेटी के साथ स्टडी की है”….
नलिनी- “तो कल तो तुम आ ही रहे हो न मेरी बेटी को स्टडी करने”….
सतीश-“कल लेकिन”…..
नलिनी-“लेकिन वेकिन कुछ नहीं कल तुम आ रहे हो, मे चाहती हु की तुम
मेरी बेटी को, एक दम एक्सपर्ट बना दो”….
सतीश- “लेकिन औंटी”….
इससे पहले की सतीश कुछ बोलता उसका हरामी दिमाग उसे चेतने आ जाता है….
ह.दी.- “अबे भोसडी के कब तुझे अकल आयगी, साले जब देखो अपने लंड पे
कुल्हाड़ी मारता रहता है”….
सतीश-“अरे यार अब तू कहा से आ गया, दिमाग चाटने”…
ह.दी.- “दिमाग तेरे पास हो तो चाटूँगा ना, पर भोसडी के तेरे ऊपर के माले मे,
भूसा ही भुसा भरा हुआ है,…… मे तो तुझे ये बताने आया हु, की ये साली तुझे
खुली दावत दे रही है की कल आओ और मेरी फुद्दी मार लो और तू साले लोडुपंती
दिखा रहा है”….
सतीश- “तुझे साले यही सब सूझता है क्या…
ओ मुझसे कल प्रियंका के साथ पढ़ने आने के लिए बोल रही हे, जब्कि वो कल बाहर अपनी कजिन के यहाँ जा रही है”….
ह.दी.- “साले चूतिया, चुतीया नंदन है तु….
अबे लोडु, ये उसकी अम्मा है इसे नहीं पता होगा क्या की इसकी बेटी कल बाहर जा रही है, और वैसे भी ये तुम दोनों को
स्टडी करते हुए देख चुकी की तुम कैसी स्टडी करते हो…
इसलिए लोडु ये तुझे अपनी लौंडिया को पड़वाने नहीं बल्कि अपनी फड़वाने के लिए बुला रही है,… क्योकि कल घर पर कोई
नही होगा, और इससे अच्छा मौका और नहीं हो सकता, इस रंडी के लिए अपनी
चुत मरवाने का”…..
सतीश- “ऊह्ह्ह्हह्ह्…. हाँ ये तो सतीशने सोचा ही नहीं था”….
ह.दी.- “मादरचोद तू सोचता ही कब है”….
नलिनी- “क्या हुआ बेटा क्या सोच रहे हो…. ?
कल आ रहे हो ना मेहनत करने के लिए??
ये बात उसने बहुत ही सेक्सी आवाज मे कही थी
सतीश- “जी मे कल इसी टाइम पर आ जाऊंगा”……
ओर फिर सतीश वह से निकल जाता है, बाहर आकर टाइम देखता है तो
कॉलेज छूटने मे अभी भी टाइम था…. और वैसे भी वो चुदाई के बाद
काफी थकान मह्सुश कर रहा था, इस्लिये वो बाइक उठाकर सीधा घर की तरफ
चल देता है…..
१५ मिनट मे सतीश की बाइक उसके घर के बाहर पहुँच जाती है….
सतीश के द्वारा की गई मेहनत(चुदाई) के कारन उसके पेट् मे बहुत जोर से
चुहे कुद रहे थे, इस्लिये वो बाइक को स्टैंड पर लगा कर तेजी से गेट की तरफ
बढ़ता है और वो डोर बेल्ल बजाने
ही वाला था की उसकी नजर गेट पर पड़ती है, गेट लॉक नहीं था ये देख सतीश
थोड़ा चौकता है क्योकि अक्सर सोनाली जब भी कोई घर पर नहीं होता था तो गेट
लॉक ही रखती थी……
सतीश अपने मन में हो सकता है की आज ध्यान न दिया हो….
ओर वो गेट को लॉक करके अंदर आ जाता है… वो अपने बैग को सोफ़े
पर पटकता है और अभी वो अपनी माँ को आवाज लगाने ही वाला था की
उसे किसी की सिसकारियों की आवाज सुनाइ पड़ती है… वो इस सिसकि को पहचान सकता था ये सिसकि किसी और की नहीं वल्कि उसकी माँ की ही थी उसे तो अपने कानो पर यकीन ही नहीं होता….
सतीश मन सतीश-तो सब के जाने के बाद माँ किसी गैर मर्द के साथ रंग रलिया करती है, तभी मे कहु की आज गेट कैसे खुला छूट गया,
चुत की आग बुजाने के चक्कर मे गेट भी लॉक करना भूल गई
सतीश ग़ुस्से मे सोनाली के कमरे की तरफ बढ़ता है, सोनाली के मुह से निकलि
सिस्कियाँ उसके अंदर ग़ुस्से की आग को और भड़का रही थी वो सिसकियाँ उसके कानो मे पिघले लोहे की तरह मह्सुश हो रही थि, आज लाइफ मे पहली बार उसे इतना गुस्सा आया था आज उसकी माँ
के साथ जो कोई भी हो उसका क़त्ल होना तय था……. पर रूम के पास पहुँचते ही उसकी आँखें
फ़टी की फटी रह जाती हे….
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