Update – 26
गजब की सुंदर और प्यारी लग रही थी वो और फिर मेरा भी मन नहीं किया उसे छोड़ कर जाने का तो मैंने भी मुठ मारने का इरादा छोड़ कर उसे और पास लेकर कर उसकी बाँहों को सहलाने लगा.
पिछली पूरी रात भर दफ्तर में काम किया था तो नींद पूरी हुई नहीं थी तो कब मुझे भी नींद लग गई मुझे पता ही नहीं चला…
मेरी नींद लगभग एक घंटे बाद खुली और उसका कारण यह था कि ईशा मेरे लोअर को नीचे कर के मेरे लंड को चूस रही थी, इसे महसूस करके मेरा हाथ उसके सर को सहलाने लगा…
जब उसने देखा कि मैं जाग गया हूँ तो वो मुझ से बोली- पंलग के बीच में आ जा ना…!
मैं बिना कुछ कहे पलंग के बीच में खिसक गया. इसके बाद उसने मेरे हाथों को पकड़ कर मुझे ऊपर उठाया और मैं थोड़ा ऊपर उठ गया, मेरे ऊपर उठते ही उसने मेरी टीशर्ट बनियान के समेत निकाल दी.
वो अभी भी उसी काली शमीज और पैंटी में थी और अब मैं उसके सामने सिर्फ लोअर में था वो भी आधे लोअर में.. मुझे लगा यह अभी लोवर भी निकालेगी लेकिन उसका ऐसा कोई इरादा नहीं था.
उसने मेरे लंड को फिर से मुँह में लिया और चूसना शुरू कर दिया. थोड़ी देर तक ईशा मेरे लंड को बिल्कुल ऐसे चुस्ती रही जैसे लोलीपॉप चूस रही हो, उसका इस तरह से लंड चूसना मुझे बहुत आनंद दे रहा था, वो मेरा लंड चूसती रही और मैं उसके सर को सहलाता रहा.
थोड़ी देर तक उसने इसी तरह से मेरा लंड चूसा और फिर मुँह निकाल कर वो मेरी नाभि को चूसने लगी… उसके नाखून मेरी पेट के दोनों तरफ के किनारों कमर पर बेल्ट से ऊपर की जगह हल्के से गड़ रहे थे और मैं तड़प रहा था आनंद के कारण.
उसके बाद ईशा ने मेरे पेट को चूमते हुए मेरी कमर का एक किनारा दांतों में दबा कर चूसना शुरू कर दिया. थोड़ी देर तक वो दायें किनारे को चूसती रही और उसके बाद वो मेरी कमर के बायें हिस्से को चूमने और चूसने लगी…
इससे पहले मेरे साथ ऐसा कभी किसी लड़की या औरत ने नहीं किया था तो मैं आनन्द के आसमान पर था. .
उसके बाद वो नीचे की तरफ खसकी और मेरे लंड के दोनों किनारों को जांघों की जुड़ने वाली जगह पर बारी बारी से चूमने लगी और हर बार वो हल्के से काट भी लेती थी… आनंद इतना ज्यादा था कि मुझे लगा कि मैं और नहीं रुक पाऊँगा और मेरे मुँह से भी अब सिसकारियाँ निकलने लगी थी…
जब ईशा ने मेरी सिसकारियों को सुना तो उसने मेरे लंड की चमड़ी को खिंच कर पलटा और फिर से मेरे लंड को चूसने लगी.
अब मैं ज्यादा देर टिकने की हालत में नहीं था, मुझे लगा मैं छूटने वाला हूँ तो मैंने उसे कहा,”ईशा, मैं छूटने वाला हूँ !”
मेरी बात सुन कर उसने अपना मुँह हटा लिया और और हाथों से लंड सहलाते हुए बोली,” इज़ इट ओके फ़ोर यू इफ़ आई डोन्ट ड्रिन्क इत ओर आई डोन्ट टेक इट ओन माई फ़ेस? ( अगर मैं इस ना पीऊँ और चेहरे पर भी ना लूँ तो तुझे कोई दिक्कत तो नहीं है?)
मैंने इशारे में हाँ कहा तो उसने बिस्तर पर ही पड़ा हुआ तौलिया मेरे लंड पर रखा मेरे बगल में लेट कर मेरे होंठों को चूसने लगी और तेजी से मेरी मुठ मारने लगी.. मैंने उसके एक स्तन को कस कर पकड़ लिया और कुछ ही सेकंड में मैं चीख चीख कर झड़ने लगा… मेरे सारा वीर्य उछल कर तौलिए, मेरे लोअर और मुझ पर फ़ैल गया.
मैं जब तक झड़ते हुए झटके मारता रहा, वो मेरे होंठों को प्यार से चूमती रही और मेरे लंड को उसके हाथों में थामे रही.
उसके बाद मुझसे बोली,” डिड आई डू नाईसली?”(क्या मैंने अच्छे से किया)
मैंने कहा,”हाँ बहुत अच्छे से !”
जब मैं पूरी तरह से झड़ गया तो उसने मेरा लंड छोड़ा, तौलिया उठाया उससे अपना हाथ पौंछा, मेरी जांघों पर जो मेरा वीर्य गिर गया था उसे तौलिए से साफ़ किया और फिर मेरे माथे को चूम लिया.
मैं उसे देख ही रहा था, वो बोली- चल जल्दी तैयार हो जा ! हम लोग घाट पर घूमने जा रहे हैं और उसके बाद खाना खायेंगे और… !
वो कहते कहते रुक गई…
मैंने पूछा,”और क्या….?”
खाना खाकर हम वापस आगये
कमरे में पहुँच कर ईशा ने अपना बैग उठाया और मुझे कहा- तू टीवी देख और जब मैं मैसेज करूँ तो मेरे कमरे में आ जाना !
मैंने कहा- अब मैं कही नहीं जाने दूंगा तुझे और मैं टीवी नहीं देखता तू भी जानती है.”
वो बोली- प्लीज यार मान जा ना ! थोड़ी देर की बात तो और है ! मैं बुलाती हूँ ना तुझे !
मुझे मालूम था कि यह लड़की और कुछ सोच कर आई है, मैंने कहा- ठीक है, जा !
और मैंने फ़िर से लोअर और टीशर्ट पहन लिया और मैं मोबाइल पर ऑरकुट पर दोस्तों से बात करने लगा. मैंने करीब आधे घंटे तक ऑरकुट पर एक एक सेकंड गिन कर बिताया होगा कि तभी ईशा का मैसेज आया- आ जा मेरे कमरे में ! दरवाजा खुला है, तू आकर बंद कर देना.
मैंने अपने कमरे को ताला लगाया और उसके कमरे की तरफ गया, उसने दरवाजा खोल ही रखा था, मैं अंदर गया तो सारी रोशनी बंद थी पर कमरे में गुलाब की खुशबू फैली हुई थी. मैंने दरवाजा बंद किया और बत्ती जलाई तो मैं ईशा को देख कर दंग ही रह गया…
उसने एक पारदर्शी लाल साड़ी पहन रखी थी और साड़ी के नीचे ना ही ब्लाउज था ना ही पेटीकोट पर सिर्फ लाल रंग की ही ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी जो साड़ी के बाहर से ही दिखाई दे रहे थे, रेशमी बालों से उसने एक जूड़ा बना रखा था जिस पर गुलाब का एक फूल लगा हुआ था, गुलाब मुझे बहुत पसंद है लम्बे बालों वाली लड़कियों पर, आँखों में हल्का सा काजल और होंठों पर लाल लिपस्टिक लगा रखी थी… माथे पर लाल बिंदिया !
कुल मिला कर उसका रूप ऐसा लग रहा था मानो कोई अप्सरा जमीन पर ही उतर आई हो.
ईशा को ऐसे देख कर उस आधे घंटे के हर सेकंड की कीमत पूरी तरह से वसूल होते हुए लगी.
मैं थोड़ी देर तक तो बस उसे निहारता ही रहा…
और वो बोली- ऐसे क्या देख रहा है? मेरे पास नहीं आएगा क्या?
मैंने कहा- सोच रहा हूँ, पास आया तो तुझे बाँहों में भर लूँगा और तू इतनी सुंदर लग रही है कि डर है तुझे छू लूँ तो तू गन्दी ना हो जाये कहीं?
मेरी बात सुन कर वो मेरे पास आई और उसने मुझे बाँहों में भर लिया और मेरे होंठों को चूमने लगी..
और मैंने भी उसे बाँहों में भर कर उसका साथ देना शुरू कर दिया.
हम दोनों थोड़ी देर तक ऐसे ही एक दूसरे को चूमते रहे, फिर मैंने उसे उठाया और बिस्तर पर ले जाकर लिटा दिया, मैं उसके ऊपर लेट गया.
जब उसे बिस्तर पर लिटाया तो एक और आश्चर्य मेरा इन्तजार कर रहा था, बिस्तर पर उसने दूसरी चादर बिछा रखी थी सिल्क फिनिश वाली साटन के कपड़े की, और तभी मैंने ध्यान दिया कि एक वैसी ही चादर और रखी हुई थी.
मैंने उसे देखा और पूछा- तू यह सब कब से प्लान कर रही थी?
तो वो आँखे मटका कर मुस्कुराते हुए बोली- कई दिनों से !
“कई दिन ! मतलब?”
वो बोली- सच कहूँ तो जब रितु ने मुझे बताया कि तूने उसे उस दिन कैसे पागल कर दिया था, तब से मेरा भी बहुत मन हो रहा था तो मैंने सब प्लान करना शुरू कर दिया.
हम दोनों थोड़ी देर तक ऐसे ही एक दूसरे को चूमते रहे, फिर मैंने उसे उठाया और बिस्तर पर ले जाकर लिटा दिया, मैं उसके ऊपर लेट गया.
जब उसे बिस्तर पर लिटाया तो एक और आश्चर्य मेरा इन्तजार कर रहा था, बिस्तर पर उसने दूसरी चादर बिछा रखी थी सिल्क फिनिश वाली साटन के कपड़े की, और तभी मैंने ध्यान दिया कि एक वैसी ही चादर और रखी हुई थी.
मैंने उसे देखा और पूछा- तू यह सब कब से प्लान कर रही थी?
तो वो आँखे मटका कर मुस्कुराते हुए बोली- कई दिनों से !
“कई दिन ! मतलब?”
वो बोली- सच कहूँ तो जब रितु ने मुझे बताया कि तूने उसे उस दिन कैसे पागल कर दिया था, तब से मेरा भी बहुत मन हो रहा था तो मैंने सब प्लान करना शुरू कर दिया.
उसकी बात सुन कर मैं मचल गया, वो मेरी बाँहों में तो थी ही, मैंने उसकी साड़ी के ऊपर से ही उसके स्तनों को सहलाना शुरू कर दिया, मैंने कहा- तो मोहतरमा की और कोई इच्छा है जिसमें कुछ खास हो या सिर्फ एक ही इच्छा थी?
तो वो बोली- है पर बाकी बाद में बताऊँगी लेकिन अभी की इच्छा यही है कि अब तू मुझे जैसे चाहे वैसे कर ! पर मेरा कौमार्य भंग होने के बाद तू तेरे इसको बाहर निकाल कर मेरी चूत का खून मुझे दिखायेगा.
“पर तुझे दर्द होगा बार बार अंदर-बाहर करने में !” मैंने कहा.
बोली- एक ही बार तो होगा ना? और यह मेरी इच्छा है ! अब कर ना !
उसकी बात सुन कर मुझे और जोश आ गया, मैंने उसकी साड़ी को पहले उसके सीने पर से हटा दिया और फिर कमर पर भी साड़ी की गांठ खोल दी और फिर उसकी पूरी साड़ी उसके बदन से अलग कर दी.
अब वो सिर्फ लाल रंग की पैंटी और ब्रा में थी जिसमें से उसके स्तन बाहर निकलने को बेचैन हो रहे थे.
मैंने ईशा को हल्का सा ऊपर उठाया और पीछे से उसकी ब्रा के हुक को खोलने लगा, और फिर उसकी तरफ देख कर मैंने उससे कहा- अब तो निकाल
सकता हूँ ना?
अब वो सिर्फ लाल रंग की पैंटी और ब्रा में थी जिसमें से उसके स्तन बाहर निकलने को बेचैन हो रहे थे.
मैंने ईशा को हल्का सा ऊपर उठाया और पीछे से उसकी ब्रा के हुक को खोलने लगा, और फिर उसकी तरफ देख कर मैंने उससे कहा- अब तो निकाल सकता हूँ ना?
तो उसने सिर्फ हाँ में सर हिला दिया.
उसके बाद मैंने उसकी ब्रा का हुक खोला और बिना उसकी ब्रा को उसके सीने पर से हटाये मैं उसकी पैंटी उतारने लगा तो वो बोली- रुक ना !
और उसने मेरी टीशर्ट उतार दी और बोली- तू घूम कर अपनी टाँगें मेरे सर की तरफ कर और फिर उतार इसे.
मैं नहीं जानता था कि वो क्या करने वाली है लेकिन जैसा उसने कहा, मैंने वैसा ही किया और जब मैं धीरे धीरे उसकी पैंटी उतार रहा था तो उसी वक्त वो मेरा लोअर और अंडरवियर भी उतार रही थी.
जब मैंने उसकी पैंटी उतारी तो उसी वक्त मैं भी पूरा प्राकृतिक अवस्था में आ चुका था पर मेरा लंड तना हुआ था.
मैं उसकी चूत को चूसना चाहता था और मुझे लगा भी कि वो 69 करना चाहेगी पर वो मुझ से बोली- अब तू जैसा चाहे वैसा कर मैं कुछ नहीं करने वाली अब.
मैंने कहा- ठीक है !
और मैं पलट कर वापस सामान्य स्थिति में आ गया..
अभी भी ईशा की ब्रा उसके उभारों पर ही थी और उसने दोनों हाथों से चूत को ढक रखा था.
मैंने उसके हाथों को हटाने की कोशिश नहीं की पर उसके स्तनों पर पड़ी हुई खुली ब्रा को मैंने उसके कंधों पर से नीचे करना शुरू कर दिया और धीरे धीरे ब्रा को मैं उसकी बाँहों से सरकाता हुआ उसकी चूत पर लेकर आया और उसकी ही ब्रा से उसकी चूत को ढक कर उसे सहलाने लगा जो पहले ही गीली हो चुकी थी और उसके हाथों को मैंने वहाँ से हटा दिया.
उसके बाद मैंने ब्रा को भी हटा कर नीचे फैंक दिया.
क्या गजब की सुन्दर लग रही थी ! ऐसा लगता था जैसे बदन का एक एक हिस्सा सांचे में ढाल कर बनाया हो ! कहीं से भी जरा सा भी ज्यादा नहीं, कम नहीं ! ऐसा लगता था मानो खजुराहो की कोई मूर्ति सजीव रूप ले कर आ गई हो. बदन पर एक भी दाग नहीं ! और पूरी चिकनी चूत सिर्फ थोड़े से बाल चूत के ऊपर थे जो जानबूझ कर छोड़े हुए लग रहे थे.
मैंने उसे देख कर उसकी चूत पर एक चुम्बन दे दिया और फिर मैं उसकी चूत को चाटने लगा तो मचलने लगी और मचलते हुए ही बोली- मुझे इस बार इस तरह से स्खलित नहीं होना पर इस बार तू अंदर डाल कर ही मुझे स्खलित करवाएगा, समझ गया ना?
मैंने उसकी चूत को चूसना बंद कर दिया और उसकी चूत को फैला कर देखा तो उसकी कुँवारी चूत का कुंवारापन दिख रहा था.
वो बोली- क्या कर रहा है?
मैंने कहा- कुछ नहीं ! सिर्फ तेरी चूत का कुंवारापन देख रहा हूँ.
बोली- अब और नहीं सतीश… अब मुझे करना है, जल्दी कर अब !
मैंने कहा- वैसलीन कहाँ है? तू जरूर लाई होगी.
तो उसने मुस्कुराते हुए लेटे लेटे ही तकिये के नीचे से वैसलीन निकाल कर मुझे दे दी…
मैंने थोड़ी सी वैसलीन मेरे लंड पर लगाई, थोड़ी उसकी चूत के किनारों पर और उसकी चूत पर लंड रख दिया…
मैंने उससे कहा- चीखेगी तो नहीं?
बोली- पता नहीं.
तो मैंने लंड को वापस हटा लिया और उसकी चूत पर लंड से चोट मारने लगा…
मेरी इस हरकत से उसे मजा तो बहुत आया पर बोली- अब और मत तड़पा ना ! अंदर डाल दे.
मैंने कहा- ठीक है !
और उसकी चूत को फैला कर लंड टिकाने की जगह बनाई और उसकी टांगें पकड़ कर जैसे ही थोड़ा सा धक्का मारा तो वो दर्द से बिलबिला गई जबकि मेरा लंड तो सिर्फ उसकी कुंवारी चूत से टकराया ही था, अगर मैंने उसकी टांगों को कस कर पकड़ नहीं रखा होता तो मेरा लंड वहाँ से हट ही जाता.
पर चूंकि इस एक धक्के से मेरा लंड पूरी तरह से जगह पर आ चुका था तो यह तय था कि अब सिर्फ एक और तेज धक्का उसकी चूत को फाड़ते हुए अंदर चले जायेगा.
मैंने ईशा से कहा- अब बिल्कुल मत हिलना, बिल्कुल भी नहीं.
उसने इशारे से हाँ की.
उसके बाद मैं ईशा के ऊपर लेट गया और उसके होंठों को अपने होंठों से बंद करके चूसने लगा दिया और ईशा अपने हाथों से मेरे सर को पकड़ कर मेरा साथ दे रही थी, मेरे दोनों हाथों से मैंने उसकी जांघों को पकड़ रखा था.
मैंने ईशा को चूमना छोड़ कर उससे कहा- ईशा, अगले पल में जो होने वाला है उसके बाद कभी भी पहले जैसा नहीं हो पायेगा ! सोच ले?
वो बोली- पहले से सोचा हुआ है, अब तू आगे बढ़ !
उसका इतना कहना था कि मैंने उसके होंठों को फिर से होंठों में भर लिया और एक जोरदार धक्के से मेरा लंड मैंने उसकी चूत में घुसा दिया जो उसकी कौमार्य झिल्ली को फाड़ता हुआ अंदर चला गया.
उस वक्त ईशा दर्द से तड़प उठी थी, अगर मैंने ईशा का मुँह अपने मुँह से बंद ना किया हुआ होता तो वो इतनी जोर से चीखी होती कि आसपास के कमरों वाले तो जरूर सुन लेते.और मेरे होंठों से उसके होंठ बंद होने के बाद भी उसके मुँह से एक घुटी सी चीख निकल ही गई.
मैंने ईशा के होंठों को छोड़ा और देखा तो उसकी आँखों से आंसू निकल रहे थे … पर उसकी आँखों में एक अजीब सी खुशी भी थी.
मैंने कहा- तू रो रही है?
तो बोली- नहीं रे ! दर्द के कारण आंसू आ गए थे !
हालांकि उसे दर्द तब भी हो रहा था जो उसके चेहरे से मुझे पता चल रहा था.
मैंने कहा- थोड़ी देर रुकते हैं !
तो बोली- नहीं, मुझे बाहर निकाल कर दिखा !
मैं पीछे खींच कर लंड बाहर निकालने लगा तो बोली- रुक जरा..
और उसने अपनी कमर और कूल्हों के नीचे तौलिया खिसका दिया ताकि चादर पर खून न लगे.
जब मैंने लंड निकाला तो वो पूरी तरह खून से सना हुआ था जैसे कोई चाकू किसी के पेट में घुसने के बाद खून से सना हो.
उसने मेरे लंड को बड़े प्यार से देखा और फिर तकिये के नीचे से एक छोटा से टावेल निकाल कर उसे साफ कर दिया और बोली- मेरी चूत भी साफ़ कर दे ना.
मैंने उसकी चूत के आसपास जो खून लगा था और जो बह कर आ रहा था वो साफ़ करा किया और थोड़ी देर तक उसकी चूत पर ही तौलिया रख कर खून साफ करता रहा.
तब तक उसका दर्द कम हो चुका था शायद तो बोली- चल अब करते हैं.
मैंने कहा- फिर से दर्द होगा !
तो बोली- सहन कर लूँगी.
मैंने कहा- इस बार होंठ नहीं बंद करूँगा और चीखना मत !
तो बोली- हाँ ! नहीं चीखूँगी.
मैंने नीचे से तौलिया हटा दिया और फिर से उसकी चूत पर लंड रखा, टांगे पकड़ी और एक धक्का मारा, मेरा साढ़े पाँच इंच तक लंड उसकी चूत को चीरता हुआ आधा अंदर चला गया, इस बार ईशा चीखी नहीं लेकिन दर्द इस बार भी उसे बहुत हुआ था.
वो बोली- रुक जा जरा !
मैंने कहा- एक धक्का और ! फिर पूरा अंदर हो जायेगा, बाबू, फिर रुक जाऊँगा.
और यह कहते हुए मैंने एक धक्का और मार कर पूरा 9 इंच लंड उसकी चूत में अंदर तक घुसा दिया.
इस बार उसके मुँह से दर्द से एक चीख निकल ही गई थी, मैंने उसकी टांगो को छोड़ कर दोनों हाथों को उसके दोनों स्तनों पर रख कर उसके स्तन दबाने लगा और होंठों से उसके होंठों को चूसने लगा. मैं थोड़ी देर तक यही करता रहा और उसे भी आराम मिलने लगा था और ईशा ने भी मेरे कंधो और बालों पर अपने हाथ चलाना शुरू कर दिए थे.
जब मुझे लगा कि ईशा का दर्द कम हो गया है तो मैंने नीचे से धक्का मारा और ईशा ने भी एक मस्ती भरी सिसकारी ली तो मुझे यकीन हो गया कि अब उसे कोई दर्द नहीं है.
मैंने ईशा के होंठों को चूमना बंद किया तो वो बोली- अब मेरी अगली चाहत बताने का वक्त है.
मैंने पूछा- वो क्या?
तो उसने पास में से दूसरी चादर उठाई और बोली- अब हम इसे ओढ़ कर करेंगे बाकी का काम.
वो चाहत तो मेरी भी थी तो ईशा ने उस चादर को मुझे औढ़ा दिया और अब चादर के बाहर सिर्फ हम दोनों के सर दिख रहे थे.
ईशा ने मेरी कमर को अपनी टांगों में लपेट लिया और मैंने उसकी पीठ को एक हाथ में लपेटा हुआ था और दूसरे हाथ से मैं उसके जूड़ा बने बालों को सहला रहा था. ईशा ने अपने दोनों हाथों से मुझे जकड़ रखा था, मैं नीचे से धक्के मार रहा था.
और उस हालत में वो चिकनी चादर और मजा बढ़ा रही थी. हर धक्के पर उसके मुँह से एक आह निकल रही थी.
हम दोनों ने इसी तरह से चार पांच मिनट किया होगा कि वो झड़ने लगी, उसका बदन झटके मारने लगा और मैं उसके हर झटके पर उसे धक्के मार रहा था. मेरा हर धक्का उसे चरमसुख के और पास ले जा रहा था.
जब वो पूरी तरह से झड़ गई तो पहले जैसी ही निढाल सी हो गई, मैं अभी भी बाकी था पर इस बार मेरा मन रुकने का नहीं था..
मैंने कहा- ईशा साथ दे पायेगी मेरा?
तो बोली- बस दो मिनट दे दे…
मैंने कुछ नहीं कहा पर उसके एक स्तन को मुँह में लेकर पीने लगा और दूसरे स्तन को हाथ से दबाने लगा.
मैंने थोड़ी ही देर यह किया होगा कि वो फिर से जोश में आ गई और उसने मुझे फिर से पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया और मैंने भी धक्के मारना शुरू कर दिया.
मैं अब पूरी ताकत से धक्के मार रहा था और वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी. इस बीच कभी मैं उसके दूध पीने लगता था, कभी हाथों से दबाता था और कभी उसके होंठों को चूसने लगता था.
हम दोनों थोड़ी देर तक इसी तरह से एक दूसरे से प्यार करते रहे और फिर जब मुझे लगा कि मैं छुटने वाला हूँ तो मैंने ईशा से कहा- मैं छूटने वाला हूँ, मुझे निकालना पड़ेगा, मैंने कंडोम नहीं लगाया है.
वो बोली- मैं भी आने वाली हूँ और तू अंदर ही आ जा, चिंता की बात नहीं है.
उसकी बात सुन कर मैंने उसे और तेज धक्के लगाना शुरू कर दिए और उसका बदन भी अकड़ना शुरू हो गया. तभी मैं सारा वीर्य उसकी चूत में फव्वारे की तरह छोड़ने लगा और वो मेरे साथ ही झड़ने लगी. हम दोनों एक दूसरे को कस कर पकड़ कर एक साथ झड़ने का आनन्द लेते रहे.
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