Update – 25
मैंने मैसेज देखा तो वो खाली था, मैं समझ नहीं रहा था कि आखिर चाहती क्या है वो? मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं उसे मुझसे प्यार तो नहीं हो गया ना.
मैंने उसे जवाब दिया,”आई होप यू आर नॉट इन लव विद मी. (मैं यह उम्मीद कर रहा हूँ कि तुझे मुझ से प्यार नहीं हो गया है.)
उसने अंग्रेजी में ही जवाब दिया था, मैं हिन्दी में लिख रहा हूँ, उसने जवाब दिया,”नहीं, बिल्कुल नहीं.”
तभी फिर से उसका मैसेज आया जिसमें लिखा था,”मुझे सेक्स करना है.”
मैंने कहा- ठीक है तो कर ले न ! कुणाल तो पागल हुआ पड़ा है पहले से ही.
कुणाल उसका बॉय फ्रेंड था.
वो बोली,”कुणाल से नहीं, मुझे तेरे साथ करना है !”
अब मेरे लिए बात और चौंकने की थी, उसका बॉयफ्रेंड था, मुझसे ज्यादा अच्छा दिखता था, दोनों एक दूसरे को प्यार करते थे, फिर वो मेरे साथ क्यों सेक्स करना चाहती थी.
मैंने जवाब दिया,”मजाक बहुत हो गया, मैं घर जा रहा हूँ.”
तो उसका मैसेज आया,”तू मेरे घर आ जा, यही बात करते हैं.”
मैं कैफे से बाहर निकला और उसके घर पहुँचा, आंटी से पूछा,”कहा है वो गधी?”
आंटी ने मुझे देखा बोली,”य क्या हाल बना रखा है तूने सतीश?”
मैंने कहा,”क्या कहूँ आंटी ! मैडम का हुकुम था कि जैसे हो वैसे ही आ जाओ, तो आ गया !”
आंटी बोली,”कितना परेशान करती है यह लड़की तुझे ! जा वो अपने कमरे में ही है, तुझे अंदर ही बुलाया है उसने ! जा चला जा और नहा भी लेना ! तब तक मैं नाश्ता बनाती हूँ तेरे लिए !”
यह हम दोनों के लिए सामान्य बात थी कि एक दूसरे के घर रुक जाना और इस वजह से हमारे कपड़े भी एक दूसरे के घर पर पड़े रहते थे.
मैं अंदर गया तो वो मेरा ही इन्तजार कर रही थी, मेरे अंदर जाते ही मुझ पर भड़क गई,”इतने देर से यहाँ है और अंदर आने में इतनी देर लगा दी?”
जबकि मैंने आंटी से सिर्फ एक मिनट बात की थी पर मैडम को भड़कने के बहाने चाहिए होते हैं बस.
मैंने उसे कहा,”वो छोड़ और यह बता कि यह क्या लफड़ा है? कुणाल तुझे इतना प्यार करता है, तू उसे इतना प्यार करती है, शादी भी करना चाहता है वो तुझ से और तू….?”
मैं कहते कहते रुक गया.
वो मेरे पास आई अपने चेहरे को मेरे चेहरे के पास ला कर बोली,”हाँ मुझे तेरे साथ ही करना है और आज ही करना है ! समझ गया?”
मैंने फिर कहा,”तू पागल …”
लेकिन मेरी बात उसने पूरी नहीं होने दी और उसने मेरे होंठों पर होंठ रख दिए और मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया. मैं कुछ समझ ही नहीं पा रहा था कि क्या करूँ !
कुछ सेकंड तक तो मैं संशय में था और फिर मैंने भी उसे चूमना शुरू कर दिया और थोड़ी देर तक हम दोनों ही एक दूसरे को इस तरह से चूमते रहे.
फिर जब हम दोनों एक दूसरे से अलग हुए तो मैंने उससे सॉरी कहा तो बोली,”कट द क्रेप यार, तू यह बता कि क्या मैं तुझे उन लड़कियों की तरह सेक्सी और माल नहीं लगती जिन सबके साथ तूने सब कुछ किया है?”
मैंने कहा,”लेकिन मैंने आज तक तेरे बारे में कभी ऐसा सोचा नहीं है यार !”
वो तपाक से बोली,”तो अब सोच ले !”
तभी नीचे से आंटी की आवाज आई,”नाश्ता तैयार है बेटा, तू पहले कुछ खा ले ! यह तो तेरी जान खाती ही रहेगी दिन भर !”
मैंने कहा,”बस अभी आता हूँ आंटी !”
और मैंने ईशा को उठा कर उसके ही कमरे से बाहर किया और उसके बाथरूम में घुस गया.
इससे पहले कभी मैंने यह नहीं सोचा था कि ईशा भी एक सेक्सी सुन्दर और गजब की लड़की है लेकिन उस दिन जब मैंने उसकी बात सुनी और यह सब हुआ तो मैंने इस तरफ ध्यान दिया और पाया कि वो कितनी गजब की सुन्दर है, 23 साल की उम्र, कमर तक लम्बे रेशमी बाल, भरे हुए गाल, बड़ी बड़ी काली आँखें, प्यारी तीखी नाक, पतले पतले होंठ, होंठ पर दाईं तरफ एक काला तिल, चेहरे पर कोई भी दाग नहीं, रंग ऐसा जैसे बस अभी अभी दूध से नहा कर निकली हो, नाजुक इतनी कि जोर से पकड़ लो तो खून निकल आये, प्यारे प्यारे स्तन, पतली कमर, बड़े नितम्ब और चिकनी टाँगें…. ये सब मैंने पहले भी देखा था कई बार हम दोनों एक ही बिस्तर पर भी सो गए थे पढ़ते हुए लेकिन उस दिन से पहले इस तरह से उसके बारे में मैंने कभी नहीं सोचा था और उस दिन किसी और तरह से सोच ही नहीं पा रहा था.
मैं यह सब सोच कर रोमांचित भी हो रहा था और तभी बाथरूम के दरवाजे पर जोर जोर से खटखटाने की आवाजें आने लगी.
मैंने पूछा,”क्या हुआ?”
तो बाहर से ईशा की आवाज आई,”मुझे नहीं मालूम था कि गधे नहाने में इतना वक्त लेने लगे हैं.”
मैं अभी तक पूरे कपड़ों में था, मैंने दरवाजा खोला उसे देखा और कहा,”सोच रहा था तो नहा ही नहीं पाया.”
वो बोली,”क्या सोच रहा था?”
मैंने कहा,”वो ही सब जो आज तक नहीं सोचा.”
मेरी बात सुन कर वो शरमा सी गई, उसने मेरे कपड़े पलंग पर रखे और ‘माँ बुला रही है’ कहते हुए नीचे भाग गई.
मैं जल्दी से नहाया, कपड़े पहने और नीचे पहुँचा, तो ईशा आंटी का सर खा रही थी, उसका कहना था कि उसे कहीं जाना है और आंटी कह रही थी कि न उनके पास समय है ना अंकल के पास तो उसे अभी रुकना पड़ेगा.
यह सुन कर ईशा आंटी से बोली,”देखो माँ, मुझे आज ही घूमने जाना है, यह तुम भी जानती हो और पापा भी मैंने तीन दिन से कहा हुआ है कि मुझे महाबलेश्वर जाना है और मैं जाऊँगी, अगर आप लोग लेकर नहीं गए तो मैं अकेले चली जाऊँगी. समझ गए ना?”
यह सुनकर आंटी बोली,”तुझे अकेले तो मैं नहीं जाने दूँगी.”
ईशा तपाक से बोली,”तो अकेले मैं भी कहाँ जाने वाली हूँ ! यह गधा किस दिन काम में आएगा?”
और उसने उंगली मेरी तरफ उठा दी.
यह बात सुन कर आंटी बोली,”ठीक है, पापा से पूछ ले और साथ में ड्राईवर को भी ले जाना ! वो गाड़ी चला लेगा !”
पर ईशा ने ड्राईवर के लिए सीधे मना कर दिया और बोली,” मैं आयशा को साथ में लेकर चली जाऊँगी गाड़ी चलाने के लिए पर नो ड्राईवर !”
मेरे ऊपर भड़कते हुए बोली,”गधे, तू कार चलाना क्यों नहीं सीख लेता?”
मैंने कहा,”तू है न उसके लिए मेरी ड्रायवर ! और ना मुझे तब कार चलाना आती थी ना अभी आती है”
चूंकि मेरे साथ जा रही थी तो अंकल को ना तो करना ही नहीं था सो हमने सामान पैक किया और दोपहर करीब दो बजे पुणे से महाबलेश्वर के लिए ईशा की कार से निकल गए.
ईशा ने घर से निकलते वक्त काले रंग का सूट पहना था और उस सूट में वो गजब की दिख रही थी और मेरी निगाहें भी आज बदल चुकी थी उसके लिए तो और गजब की दिख रही थी वो !
ईशा के घर से निकल कर हम मेरे घर गए, वहाँ मैंने अपने कपड़े पैक किए और लोअर और टी शर्ट पहन कर माँ को बताया मैं दोस्तो के साथ महाबलेश्वर जा रहा हु घूमने जल्दी हम लोग घर से निकल गए वरना शिप्रा भी जिद करके साथ आती
थोड़ी ही देर बाद हम लोग कन्नौज पार कर चुके थे, यह पहली बार था कि हम इतनी देर चुप रहे साथ होने पर भी !
और जैसे ही कात्रज घाट पार किया, मैंने कहा,”आयशा को नहीं लेगी क्या? उसका घर तो पीछे रह गया !”
ईशा मुस्कुरा कर बोली,” तू सच में गधा है, हमारे साथ कोई और नहीं आ रहा है ! सिर्फ हम दोनों हैं, समझा…?”
“मतलब यह सब तू पिछले तीन दिन से प्लान कर रही है?” मैंने पूछा.
उसने मुंडी हिलाई और बोली,”हाँ !”
मैंने कहा- ठीक है, आगे से वाइन ले लेंगे !”
तो बोली,”नहीं, यह मैं नशे में नहीं करना चाहती, आई वान्ट टू लूज़ माई विर्ज़िनिटी इन मैइ फ़ुल सेन्सेज़ ! आई वान्ट टू फ़ील एवेरी मूमेंट ऑफ़ इट !( मैं अपना कौमार्य पूरे होश में खोना चाहती हूँ, मैं इसका हर पल महसूस करना चाहती हूँ)
मैंने कहा,”तू सच में यह करना चाहती है?”
बोली,”तो तुझे अभी तक यकीन नहीं हुआ क्या?
उसने कार सड़क के किनारे रोक दी और आगे बढ़ कर मेरे होंठों को चूमने लगी और मेरा दायाँ हाथ अपने सीने की बाईं गोलाई पर रख दिया और बोली- फील कर इसको !
“एण्ड यू आर नॉट इन लव विद मी?” (और तुझे मुझ से प्यार नहीं हुआ है?) मैंने कहा.
वो बोली,”हाँ पागल ! नहीं हुआ है, अब चले नहीं तो यही रात हो जायेगी.”
मैंने कहा,”चल !”
और फिर बात करते हुए मैंने उसे बताया कि आज पहली बार मैंने उसे उस नजर से देखा तो वो फिर से शरमा गई.
मैंने उससे कई बार पूछा कि वो यह कुणाल के साथ क्यों नहीं करना चाहती, पर उसने मेरे कई बार पूछने के बाद भी मुझे यह नहीं बताया और बोली- हम वहाँ पहुँच कर ही बात करेंगे ना !
हम करीब छः बजे शाम को महाबलेश्वर पहुँचे… वहाँ पर अंकल ने पहले ही दो कमरे बुक करा रखे थे तो हमें होटल की कोई दिक्कत नहीं थी. हम लोगों को होटल वालों ने दोनों कमरे दिखाए और जैसे ही बैरा कमरे से बाहर निकला, ईशा बिना कुछ कहे कूद कर मेरे ऊपर चढ़ गई और उसने बेतहाशा मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया.
वो पूरी तरह से मुझ पर चढ़ी हुई थी, मेरी कमर पर उसने दोनों टांगे लपेट रखी थी और उसके दोनों हाथों को उसने मेरी गर्दन के गिर्द लपेट रखा था, वो जैसे ही ऊपर चढ़ी तो मैंने भी दोनों हाथों का सहारा दे दिया था उसे और मैं भी उसके साथ चुम्बनों का मजा ले रहा था, साथ ही साथ मेरे हाथ ईशा की पैंटी की महसूस कर रहे थे, मैंने ऐसे ही ईशा को अपनी बाहों में भरे हुए ही बिस्तर पर लेटा दिया और मैं खुद उसके ऊपर लेट कर उसे चूमने लगा और एक हाथ उसके सर के नीचे ले जाकर उसके बालों से खेलने लगा.
मेरा लंड लोअर के अंदर था पर पूरी तरह से ईशा की फैली हुई टांगों के बीच चूत पर टकरा रहा था और वो भी इस सब का पूरा मजा ले रही थी.
हम दोनों एक दूसरे को बेतहाशा चूम रहे थे और कभी मैं ईशा की जीभ चूस रहा था और कभी वो मेरी ! इसी बीच मेरे दूसरे हाथ से मैंने ईशा का एक स्तन दबाना शुरू कर दिया जिससे उसे और मजा आने लगा.हम दोनों इसी तरह से काफी देर तक एक दूसरे को चूमते और चूसते रहे और फिर मैंने घुटनों के बल बैठ कर ईशा को उठा कर अपनी गोद में बैठा लिया, उसकी दोनों टांगें फैल कर मेरी कमर को लपेटे हुए थी और उसकी चूत मेरे लंड पर टकरा रही थी.
मैंने उसकी कुर्ती उतारने की कोशिश की तो उसने अपने दोनों हाथ ऊपर कर दिए और मैंने बड़े ही आराम से उसकी कुर्ती उतार दी. कुर्ती के नीचे उसने एक काले रंग की शमीज पहनी हुई थी और उसके अंदर एक काले ही रंग की ब्रा भी थी जिसके किनारे समीज के किनारों से दिख रहे थे.
मैंने जब शमीज उतारने की कोशिश की तो बोली- अभी नहीं, इसे बाद में उतारना प्लीज…
और मैंने उसकी बात मान कर उसकी शमीज छोड़ दी और उसे गर्दन पर चूम लिया, जवाब में उसने भी मुझे गालों पर चूमा और मेरे सर को अपने वक्ष पर रख कर मुझे कस के पकड़ा और उसकी चूत को मेरे लंड पर दबा कर उसे महसूस करने लगी.
अद्भुत था वो अहसास भी !
वो मेरे लंड को महसूस कर रही थी, मैं उसकी शमीज की नीचे उसकी चिकनी कमर को महसूस कर रहा था और उसके उसके कंधों को उसके बालों सहित सहला रहा था. ना वो हिल रही थी ना मैं हिल रहा था सिर्फ एक दूसरे को पूरी तरह से महसूस कर रहे थे कपड़ो को ऊपर से ही.
थोड़ी देर हम ऐसे ही रहे, फिर उसने मुझे ढीला छोड़ा, मेरे होंठों को एक बार चूमा और बिस्तर पर लेट गई और सलवार की तरफ इशारा करते हुए बोली- इसे उतार ना !
मैंने उसकी सलवार के साथ ही उसकी पैंटी भी उतारने की कोशिश की तो बोली- नहीं, सिर्फ सलवार ! पैंटी नहीं प्लीज…
मैं क्या कहता, मुझे उसकी बात माननी ही थी… तो मैंने एक ही झटके में उसकी सलवार उतार दी.
जब मैंने उसे सलवार उतरने के बाद देखा तो मैं एक बार तो देखता ही रह गया… दो चिकनी टांगों के बीच एक प्यारी सी काली पैंटी ने चूत को ढक रखा था और उसकी काली शमीज ईशा की पूरी खूबसूरती में चार चाँद लगा रही थी.
गजब की खूबसूरत लग रही थी वो…
मैं सिर्फ उसे देखते ही रह गया और मेरी नजरों के कारण वो शरमा सी गई, उसने दूसरी तरफ चेहरा कर लिया और मुझसे बोली,”प्लीज यार, ऐसे मत देख, शर्म आती है.”
दोस्तो, यकीन मानो एक लड़की जितनी बिना कपड़ों के सेक्सी हो सकती है उससे ज्यादा सेक्सी वो कम कपड़ों में लगती है !
कम से कम मुझे तो लगती है ! और यह बात ईशा को बहुत अच्छे से पता थी.
मैं कुछ सेकंड तक उसे और देखता रहा और फिर मैंने उसकी पैंटी उतारने की कोशिश की तो वो बोली- नहीं, इसे मत उतार.
मैंने कहा,”अब मत रोक, नहीं तो तेरा देह शोषण हो जायेगा मुझसे !”
वो बोली,” ऐसा कुछ नहीं होगा लेकिन….”
“लेकिन क्या?”
वो बोली,” ऐसा कुछ नहीं होगा लेकिन मैं चाहती हूँ मेरी जो इच्छा है वो हर इच्छा पूरी हो तो प्लीज मान जा और अगर तुझे करना ही है तो मैं रोकूँगी नहीं.”
उसकी आँखों में अजीब सी कशिश और उदासी थी यह कहते हुए ! मैंने आज तक उसे कभी उदास नहीं होने दिया, उसकी हर इच्छा चाहे कितनी ही बेवकूफी भरी क्यों ना हो, मैंने पूरी की थी तो इस बात के लिए उसकी बात ना रखता ऐसा हो ही नहीं सकता था.
मैंने कहा,”तो रो क्यों रही है इतनी सी बात के लिए? बता क्या इच्छा है?”
वो बोली,” आई वान्ट यू टू मेक मी कम वंस इन दिस कण्डीशन, नो मोर क्लोथ रिमूविंग ! ( मैं चाहती हूँ कि तू मुझे इसी हालत में एक बार चरम-सुख दिलाए, बिना और कोई कपड़ा उतारे) ना तेरे ना मेरे !”
मैंने कहा,”ऐसा क्यों?”
तो बोली,” मेरी यही इच्छा है ! कैन यू डू इट (क्या तू कर सकता है) ?”
मैंने कहा,”अगर मैं यह नहीं कर सकता तो वो भी तेरे लिए, तो मैं कुछ नहीं कर सकता !”
और मैंने कपड़े के ऊपर से ही उसकी गीली हो चुकी चूत को चूम लिया, एक मदमस्त कर देने वाली गंध आ रही थी उसमें, मैंने उसकी चूत में एक बार तो मेरा चेहरा गड़ा ही दिया था.
फिर मैं थोड़ा ऊपर आया उसके पेट को उसकी शमीज से ढका और कपड़े के ऊपर से उसकी नाभि में मेरी जीभ चलाने लगा…
मेरी इस हरकत से वो मचल से गई..
थोड़ी देर तक मैं यही करता रहा और वो मचलती रही. इस बीच मेरे हाथ उसकी दोनों चिकनी टांगों पर फिसल रहे थे, मैं उसकी चिकनी टांगों पर से हाथ ही नहीं हटा पा रहा था. और फिर मैं थोड़ा और ऊपर आया और उसके वक्ष पर हाथ चलाने लगा और उसके बाद कपड़ों के ऊपर से ही मैंने उसके एक चुचूक को चूसना शुरू कर दिया…
मैं सिर्फ चुचूक को चूस रहा था और दूसरे हाथ से मैं उसके दूसरे चुचूक को सहला रहा था, नीचे मेरा लंड ईशा की चूत से टकरा रहा था और वो चिल्ला रही थी- प्लीज सतीश, सहन नहीं हो रहा ! कुछ कर ना ! प्लीज सतीश, मैं पागल हो जाऊँगी प्लीज….
और मैंने उसका बायां चुचूक होंठों से चूसना शुरू कर दिया और दायें पर उंगलियाँ चलाने लगा .. नीचे से मेरा लंड उसकी चूत को धक्के लगा ही रहा था और ईशा भी नीचे से अपनी चूत को उठा कर मेरे लंड का पूरा साथ दे रही थी.
मैं जानता था कि अब यह ज्यादा देर तक टिक नहीं पाएगी पर फिर भी थोड़ी देर मैं उसके चुचूक को ही चूसता रहा.
अब वो नीचे से और ज्यादा धक्के लगा रही थी, उसकी टांगों ने मेरी कमर को पूरी तरह से लपेट रखा था, वो अपने हाथों से मेरे सर को इस तरह से दबा रही थी कि मैं उसके चुचूक की बजाय उसके पूरे स्तन को मेरे मुँह में भर लूँ पर मेरा इरादा सिर्फ उसके चुचूक चूसने का ही था.
साथ ही साथ वो चिल्लाती जा रही थी- सतीश प्लीज ! अब नहीं सहन हो रहा, प्लीज जल्दी कुछ कर ! अगर ऐसे नहीं हो सकता तो उतार दे मेरे पूरे कपड़े और चोद दे मुझे ! पर अब और तड़पा मत मुझे, और नहीं सहन कर सकती यार…
मैंने उसके चुचूक से मुँह हटाया और ईशा के चेहरे की तरफ देखा तो उसकी पलकों के किनारे भीगे हुए थे.
यह देख कर मैं और रुक नहीं सकता था मैंने उसको चुचूक को छोड़ा और मेरे होंठों को सीधे उसकी चूत पर लगा दिया, इसके लिए मैंने ईशा की पैंटी नहीं उतारी पर उसे हाथों से खींच कर एक तरफ कर दिया था.
मैंने अपने होंठों से उसकी चिकनी बिना बालों वाली गीली चूत को चूसना शुरू कर दिया और एक उंगली से उसके दाने को हल्के से सहलाना शुरू कर दिया…
उसने अपने हाथों से मेरे सर को अपनी चूत में और जोर से दबा लिया, और मेरे सीने को उसकी टांगों में जकड़ लिया था, मैंने इस तरह से उसे थोड़ी ही देर चूसा होगा कि उसका बदन अकड़ने लगा और वो झड़ने लगी.. उसके मुँह से कोई आवाज नहीं निकल रही थी सिवाय आनन्द से भरी आह के…
वो काफी देर तक झटके मार मार कर झड़ती रही और मैं उसे चूसता रहा..
जब वो पूरी तरह से झड़ कर पस्त हो गई तो उसने मुझे ढीला छोड़ा…
मैं हटा तो मैंने देखा वो पूरी तरह से पस्त हो चुकी थी, पसीने में लथपथ और वो जरा भी हिल नहीं रही थी थकावट के कारण !
मुझे लगा कि वो अब सो ही जायेगी.
मैं अभी तक बाकी ही था लेकिन उसकी ऐसी हालत देख कर उसे कुछ भी कहना मुझे ठीक नहीं लगा तो मैं उठ कर बाथरूम जाने लगा मैंने सोचा वहाँ मुठ मार लूँगा और इस प्यारी सी गधी को अभी सोने दूँगा लेकिन मैं जैसे ही जाने लगा तो वो बोली- रुक यहाँ आ मेरे बगल में लेट.
मैंने कहा- ठीक है !
और मैं उसके बगल में जाकर लेट गया, वो बोली- कम्बल भी ओढ़ ले ! ठण्ड लग रही है अब मुझे.
मैं उसके बगल में कम्बल ओढ़ कर लेटा तो वो मेरे कंधे पर सर रख कर मुझ से चिपक कर लेट गई और उसने मेरे लोअर में हाथ डाल कर मेरे लंड को पकड़ लिया, फिर बोली,”तू बाथरूम मत जा, प्लीज मुझे थोड़ा सा वक्त दे दे प्लीज !”
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