Update – 18
शिप्रा थोड़ी देर वहि बैठि रहती है, और फिर गुड़ नाईट बोल कर निकल जाती है….
अब रूम मे केवल सतीश और सोनाली ही थे, दोनों ही एक दूसरे से बहुत कुछ कहना चाहते थे पर हिम्मत कोई नहि कर पा रहा था…..
सतीश बेड से उठता है और ड्रावर मे से दवाई निकल कर सोनाली को देता हुआ- माँ आप दवाई खा कर आराम करो मे भी सोने जाता हु…
सोनाली नोटिस करती है की सतीश उससे अब नजरे नहि मिला रहा था, शायद उसे अपनी माँ से नजरे मिलने मे अब शर्म आ रही थी….
सोनाली अपने मन मे- देखो तो इसको अब नजरे मिलाने मे शर्म आ रही है और वो सब करते हुए शर्म नहि आई इसे जरा सी…
सोनाली को अब सतीश का चेहरे देख कर हसि आ रही थी पर वो अपनी मुस्कान को छुपाते हुए उसके हाथ से दवाई लेकर खा लेती है….
सतीश- अब आप सो जाइये.. गुड़ नाईट
ओर इतना कह कर सतीश बाहर जाने लगता है…
सोनाली- सतीश
सतीश सोनाली की आवाज सुनकर पलटते हुये- हा माँ
सोनाली- अगर तुझे प्रॉब्लम न हो तो क्या तू आज मेरे पास सो सकता है,
सतीश को तो अपने कानो पर यकीन ही नहि होता की उसकी माँ उसे अपने पास सोने को कह रही है, उसका मन तो खुसी के मारे उछलने को कर रहा था पर वो अपने पर कण्ट्रोल करता हुआ- जैसा आप कहे…
सोनाली- ठीक है तो फिर नीचे वाली ड्रावर मे से टेबलेट की शीषी है उसमे से एक टेबलेट निकालकर मुझे देदे…
सतीश थोड़ा अस्मजस मे पड़ जाता है की उसकी माँ किस चीज की मेडिसिन लेती है…
सतीश-टेबलेट कैसी टेबलेट मोम….
सोनाली- वो बेटा मुझे रात को नींद नहि आती इस्लिये मुझे डॉक्टर ने स्लीपिंग पिल्स दी है ताकि मे रात को आराम से सो सकु…
सतीश अपने मन मे- ओह्ह तभी मे कहु की कल रात को मेरे इतना सब कुछ करने के बावजूद माँ की नींद कैसी नहि टुटी…
सतीश सोनाली को स्लीपिंग पिल्स की शीषी निकल कर दे देता है… सोनाली उसमे से २ टेबलेट निकल कर खा लेती है….
सतीश- माँ एक बार मे २ टेबलेट…
सोनाली पानी का गिलास रखते हुये- हा बेटा क्युकी मे नहि चाहती की मेरी नींद रात को किसी वजह से टूटे…
सतीश को तो ऐसा लग रहा था जैसे उसकी माँ ने उसे चोदने की परमिशन दे दी हो और वो उससे कह रही हो की मे नहि चाहती की जब तू मुझे चोदे तब मेरी नींद तूट जाए….
सतीश शीशी को ड्रावर मे वापस रखता है और लाइट्स ऑफ करके सोनाली के बगल मे आकर लेट जाता है… सोनाली टेबल लैंप ओन कर लेती है और लेट जाती है, एक चादर के अंदर मा और बेटे दोनों लेटे हुए थे….
सतीश का लंड तो अभी से आगे के बारे मे सोच कर खड़ा हुआ था और वो आँखे बंद करके अपनी माँ के सोने का इन्तजार कर रहा था…
सोनाली पर स्लीपिंग पिल्स का असर होने लगा था और वो धीरे धीरे नींद के आग़ोश मे जाने लगी थी…
ओर इधर सतीश बहुत उत्तेजित हुआ जारहा था उसे तो ये सब किसी सपने सा लग रहा थ, उसे एक पोर्न मूवी याद आ जाती है जिसमे एक बेटे को ये पता चल जाता है की उसकी माँ नींद की गोलियां खाकार सोती है और फिर उस रात उसकी माँ के सोने के बाद वो उसके रूम मे आता है और फिर अपनी सोती हुई माँ की जमकर चुदाई करता है…
सतीश की आँखों के सामने वो सभी स्लीपिंग सेक्स वाली वीडियो आ जाती है जो उसने देखि थि, सतीश को स्लीप सेक्स बहुत पसंद था और किसी सोती हुई लड़की के साथ सेक्स करना उसकी फंतासी थि, जोकि आज पूरी होने वाली थी वो भी अपनी ही माँ के साथ्…. सतीश अपनी माँ के सोने का बड़ी बेसब्री से इन्तजार कर रहा था… उसको एक एक मिनट एक एक वर्ष के समान लग रहा था…. जैसे तइसे वो आधा घंटा कटता है.
सतीश अपनी माँ के सोने का बड़ी बेसब्री से इन्तजार कर रहा था…. उसको एक एक मिनट एक एक बर्ष के समान लग रहा था…. जैसे तइसे वो आधा घंटा कटता है…
आधा घंटा होते ही वो उठ कर सोनाली की तरफ करवट लेकर लेट जाता है…. और अपनी माँ को हिला कर और आवाज लगा कर चेक करता है की वो सो गई है की नहि, जब काफी देर तक आवाज देणे के बावजूद वो कोई रिस्पांस नहि देती तब सतीश को कन्फर्म होता है की उसकी माँ पर गोलियों का असर हो गया है और अब वो नहि जगने वाली…
सतीश बेड से उठ कर रूम का डोर अंदर से लॉक करता है और वापस बेड पर आकर अपनी माँ के ऊपर से चादर को.हटा देता है, अब उसकी आँखों के सामने उसकी माँ ब्लैक कलर की नाइटी मे पीठ के बल सो रही थि, नाइटी उसके घुटनो पर से सरक गई थि, और अब उसकी टांगे घुटनो तक उसके सामने थी…. टेबल की रौशनी मे उसकी सफ़ेद टाँगे देख कर सतीश की आँखे चौंधिया जाती है… सतीश आगे बढ़ कर उसकी नाइटी की रॉब खोल देता है और नाइटी को उसके ऊपर से खिसका कर साइड मे कर देता है…. अब उसकी माँ उसके सामने मादरजात नंगी थी और उसका मख़मली सफ़ेद जिस्म सतीश की आँखों के सामने था सतीश तुरंत ही अपने कपडे उतार देता है और अपनी माँ के साइड मे आ जाता है और फिर अपनी माँ के जिस्म को ऊपर से निचे और निचे से ऊपर तक अपनी आँखे फाडे देखता है वो अपने माँ के जिस्म को अपनी आँखों मे बसाना चाहता है और फिर जब वो निचे से ऊपर उसके एक एक अंग अंग को देखता हुआ उसके रसीले गुलाबी होठो तक पहुचता है तो उससे कण्ट्रोल नहि होता और वो उसके ऊपर आकर उसके होठो को अपने होठो मे भर कर चुस्ने लगता है वो आज अपनी माँ के होठो का सारा रस पि जाना चाहता था…. थोड़ी देर तक होठो को चुस्ने के बाद वो उसकी गर्दन को चाटता हुआ निचे आता है और अब उसकी आँखों के सामने उसकी माँ की चूचियां थी जिन निप्पल्स से उसने बचपन मे दूध पिया था आज उन्ही को अपने मुह मे लेकर.चूस रहा था और साथ ही साथ चूचियों को मसल रहा था…. एक निप्पल को मुह से निकलता तो दूसरे को मुह मे भर लेता काफी देर तक चूचियों से खेलने के बाद वो अपनी जीभ से उसके जिस्म को चाटता हुआ निचे की और बढ़ता है… और उसकी नैवल पर पहुच कर उसमे अपनी जीभ डालकर उसको चाटता है और फिर निचे बड़कर सोनाली के पैरों को फैला देता है उसके सामने उसका जन्मस्थान था जहा से वो निकला वो जगह उसकी आँखों के सामने थी… वह आँखे फाडे अपनी माँ की चुत को देख रहा था, सोनाली की चुत एकदम क्लीन थी एक भी बाल नहि था उसकी चुत पर… एकदम फूली हुई चुत उसकी दोनों फाके खुली हुई थि, सतीश देखता है की उसकी चुत गिली थी यानी उसकी माँ नींद मे ये सब फील कर रही थी और उसकी चुत पानी बहा रही थी….
सतीश से कण्ट्रोल नहि होता और वो अपनी माँ की चुत मे अपना मुह दे देता है और उसकी चुत को अपने मुह मे भर कर अमृतपान करने लगता है, अब वो अपनी जीभ निकाल कर चुत को कुरेदने लगता है… कभी वो उसके चुत के डेन को अपने मुह मे लेकर चूसता और कभी उसकी चुत मे अपनी जीभ अंदर बाहर करता…
अब सतीश से और कण्ट्रोल नहि होता और वो उसकी टाँगो के बिच बैठ कर अपना लंड चुत पर टीका कर उसके पानी से अपने टोपे को गिला करता है और फिर चुत पर सेट करता है और हल्का सा पुश करता है पर उसका लंड चुत से फिसल जाता है… सतीश फिर लंड को सेट करके थोड़े जोर से पुश करता है उसका लंड का टोपा सोनाली की चुत के लबो को फैलाता हुआ अंदर घुस जाता है सतीश के मुह से एक सिसकि निकल जाती है… उसकी माँ की चुत उसकी सोच से ज्यादा टाइट थी…. सतीश जैसे ही अपने लंड को और पुश करने की कोशिश करता है उसका लंड उसकी माँ की चुत को फैलाता हुआ थोड़ा और अंदर चला जाता है, सोनाली की बॉडी मे हलचल होती है शायद उसे थोड़ा पैन फील हुआ था, अब सतीश का ३.५ इंच लंड सोनाली की चुत मे फसा हुआ था, सतीश को अपना लंड सोनाली की चुत मे काफी कसा हुआ फील हो रहा था उससे ऐसा लग रहा था की उसका लंड माँ की चुत की गर्मी को बर्दाश्त नहि कर पायेगा और अभी लीक हो जायेगा वो अपने ऊपर कण्ट्रोल करता है अब वो अपनी कमर को धक्का देकर अंदर करने की कोशिश करता है उसका लंड बहुत कसा हुआ थोड़ा सा अंदर जाता है पर सोनाली की बॉडी मे दर्द की वजह से हलचल होती है और इस बार तो उसके मुह से सिसकि भी निकल जाती है, सतीश समझ जाता है की उसकी माँ दर्द को फील कर रही है और उस से सोते टाइम सेक्स करना पॉसिबल नहि है क्युकी दर्द की वजह से वो बेहोषी से बाहर आ सकती थी और अगर वो नींद से उठ गई और उसने अपने आप को इस पोजीशन मे देख लिया तो मेरी तो शामत आ जायेगी….
सतीश जितना अपनी माँ की चुत मे लंड कर पाया था उसी से काम चलाने की सोचता है और वो अपने लंड को टोपे तक बाहर निकाल कर वापस अंदर करके झटके लगाने लगता है और ये सब वो बड़े ही आराम से कर रहा था ताकि उसकी माँ को दर्द न हो….
सतीश अब धीरे धीरे धक्के मारता हुआ अपनी माँ की चुदाई कर रहा था और उसे इसमें बहुत मजा आ रहा था…. उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसका लंड किसी आग की भट्टी मे जा रहा हो और वो ज्यादा देर तक नहि टिक पाता, उसके लंड की नसे फुलने लगती है और उसे ऐसा लगता है जैसे की वो झड़ने वाला है और वो अपने लंड को अपनी माँ की चुत से बाहर निकालता है और अपना सारा माल उसकी चुत पर दाल देता है…. आज उसके लंड ने बहुत माल निकाला था और वो माल झड़ने के बाद अपनी माँ के बगल मे लेट जाता है और अपनी साँसों को कण्ट्रोल करने लगता है….
सतीश को बहुत कमजोरी फील हो रही थी…. और वो अपनी आंखे बंद कर के लैटा था की तभी
ह. दी(हरामी दिमाग)- कसम से यार आज तो मजा आ गया…
सतीश-ओह्ह तो तू आ ही गया मे सोच ही रहा था की तू आखिर ग़ायब कहा हो गया…
ह.दी- ग़ायब नहि हुआ था बस तू वही सब कर रहा था जो मे चाहता था इस्लिये मे नहि आया, जब तू अपने उस चूतिये दिमाग से काम लेगा तब तब मे तुझे दिशा दिखाने आऊंगा…
सतीश- मे जनता हूँ तू मुझे कौन सी दिशा दिखायेगा तेरी सारी दिशाएं चुत पर जाकर ही ख़तम होती है… और देख आज तूने मुझसे मेरी ही माँ चुदवा दि…
ह.दि- तो क्या हुआ मजा तो तुझे भी आया ना, क्या चुत थी साली की एकदम कसी हुई…
सतीश- हम्म मजा तो आया पर अगर पूरा लंड दाल कर चुदाई करता तो अलग ही मजा आता….
ह.दी- मे तो आज ही पूरा लंड दाल कर उसे चुदवा देता पर साले तूने मेरी न सुन कर उस बगुला भगत की बात सुन ली और थोड़े से काम चला लिया….
सतीश- अबे पर माँ जाग जाती तो….
ह.दी- तो क्या??? कहती की बेटा पूरा लंड दाल कर चुदाई कर थोड़े मे मजा नहि आ रहा….
सतीश- भोसडी के गांड फाड़ देती मेरी….
ह.दी- अबे हाँ गांड को तो मे भूल ही गया क्या मस्त गांड है साली की एकदम गोल गोल… साले मेरी बात मान इससे पहले की वो तेरी गांड फाडे तू ही उसकी गांड मे अपना लंड दाल के उसकी गांड फाड़ दे…. हेहहे…
सतीश- भोसडी के हमेशा लंड से सोचियो कभी दिमाग का यूज़ भी कर लिया कर…. और हाँ अब मुझे डिस्टर्ब मत कर जा सोने दे मुझे…
ह.दी- भलाई का तो जमाना ही नहि है साले एक तो मे इतना मस्त आईडिया दे रहा हु, ऊपर से तू मुझे ही सुना रहा है लवडू कहि का… जा रहा हूँ मे पर एक बार सोच ले इतना मस्त मौका नहि मिलेगा देख कितना मस्त माल तेरे पास लेटा है तेरे पास और इसकी गांड तो तू देख ही चुका है हाय क्या जालिम गांड है मुर्दे का भी खड़ा हो जाए अगर वो देख ले तो… हहाहा.. पर वो देखेगा कैसे…हेहेह… पर तू तो देख ही सकता है चूतिये की दुम्…
ओर इसी के साथ( हरामी दीमाग) चला जाता है पर सतीश के मन मे उथल पुथल मचा जाता है और जो सतीश अभी कमजोरी फील कर रहा था अब उसका लंड अपनी माँ की गांड के बारे मे सोच कर फुल्ली खड़ा होकर झटके खा रहा था…
सतीश उठ कर बैठ जाता है और अपनी माँ की तरफ देखता है उसकी माँ उसी कंडीशन मे थी… सतीश अपनी माँ को अपने हाथो से पलट कर उनकी करवट बदल देता है और उन्हें पेट् के बल लेता देता है…
कब उसकी माँ की चौडी गोल गांड उसकी आँखों के सामने थी सतीश गांड को अपने हाथ मे लेकर मसलने लगता है और पागलो की तरह उसकी पूरी गांड पर किश करने लगता है और उसे अपनी जीभ से चटने लगता है… अब सतीश अपनी माँ की गांड के दोनों पाटो को फैला देता है अब सोनाली की गांड का छेद उसके सामने खुल कर आ गया था सतीश अपनी नाक अपनी माँ के गांड के पास लेजा कर उसकी खुसबू को अपने अंदर खिंच लेता है… अपनी माँ की गांड की खुसबू से वो मदहोश होने लगता है… क्या खुसबू है गांड की आह्ह्ह्ह…ओर सतीश एक दो बार उसकी खुसबू को अपने अंदर खिंचता है और फिर अपनी जीभ से उसके छेद को लीक करने लगता है… और फिर उसे चाट चाट कर उसे पूरा गिला कर देता है… बहुत देर तक अपनी माँ की गुद्वार से खेलने के बाद वो अपना लंड उसकी गांड की पाटो मे फसा कर धक्के लगाने लगता है…. आह्हः माँ क्या गांड है तुम्हारी मन तो कर रहा है की अपना लंड आपकी गांड मे दाल कर.खुब कस कर आपकी गांड मारु…. और वो गस्से लगाने लगता है..
उसे बहुत मजा आ रहा था और दस मिनट तक गस्से लगाने के बाद वो अपना पानी अपनी माँ की गांड पर निकाल देता है और फिर अपने लंड को उसकी नाइटी से साफ़ करके अपने कपडे पहनता है और सोनाली को सीधा लीटा कर उसकी नाइटी को सही करता है और उसे बाँध देता है… और बेड पर लेट कर दोनों के ऊपर चादर लेकर लेट जाता है…
सतीश अपने सोये हुए लंड को थप थपाते हुए चिंता न कर जल्द ही तुझे माँ की चुत और गांड मे घुसाउंगा बस थोड़ा सब्र कर ले क्युकी सब्रा का फल मीठा होता है….
ओर थोड़ी ही देर मे सतीश भी थकान के कारन सपनो की हसीन वादियों मे खो जाता है….
Big update so comment Big and keep reading keep supporting like give suggestions
Dm for incest chat

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