Update – 17
सतीश सोनाली के रूम मे से निकल कर बाहर ड्राइंग रूम मे आकर सोफ़े पर बैठ जाता है और टीवी ऑन करके चैनल चेंज करके कुछ देखने लायक मटेरियल सर्च करने लगता है पर सब पर वही घिसि पिटी मूवी और बकवाश सीरिअल्स, बोर होकर सतीश म्यूजिक का चैनल लगा कर म्यूजिक सुनने लगता है….. थोड़ी देर मे ही उसे नींद आने लगती है और वो टीवी ऑफ करके सोफ़े पर ही सो जाता है…
शाम को ६ बाजे शिप्रा उसे उठाती है…
सतीश- क्यों परेशान कर रही है यार सोने दे ना…
शिप्रा- ओये शाम के ६ बजे है और तुझे अभी भी सोने की पड़ी है….
सतीश अपना मोबाइल उठा कर टाइम देखता है उसमे ६:०५ हो रहे थे, सतीश तुरंत सोफ़े से उठ कर बैठ जाता है… और अपने रूम की तरफ बढ़ जाता है… रूम से फ्रेश होने के बाद वो बाहर आ जाता है और सोनाली के रूम की तरफ बढ़ जाता है… शिप्रा सोनाली के पास ही बैठि हुई उससे बाते कर रही थी सतीश भी बेड पर जाकर अपने पैर फैला कर लेट जाता है…
शिप्रा- ओये मनहूस अभी तो सो कर उठा है और अब फिर से लेट गया..
सतीश कुछ कहता नहि बस उसे घुर कर देखता है, सोनाली शिप्रा के कंधे पर थप्पड़ मारते हुये- क्यों छेडती है तू उसे इतना जा जाकर चाय बना ले सबके लिये…
शिप्रा अपना कन्धा सहलाते हुए किचन की तरफ बढ़ जातीहै…. सतीश अब अपना सर सोनाली के गोद मे रख कर लेट जाता है अब उसका फेस के आगे सोनाली का नंगा गोरा मख़मली पेट् था…. और सोनाली भी प्यार से उसके बालों मे अपना हाथ फिराने लगती है….
सतीश- अब आपकी तबियत कैसी है मोम…
सोनाली- मे तो एकदम ठीक हूँ और अब तो हर काम भी खुद कर सकती हूँ पर तुम दोनों मुझे बिस्तर से उठेने ही नहि दे रहे….
सतीश- अभी आप काम के बारे मे कोई फ़िक्र मत करो वो हम हैंडल कर लेंगे आप बस अपनी सेहत का ध्यान रखो…
सतीश की नजरे सोनाली के नंगे पेट् पर ही टीकी हुई थी और उसका मन कर रहा था की वो आगे बढ़ कर उसके पेट् पर अपने होंठ रख कर उसे खूब चुसे और चाटे पर वो ये सब नहि कर सकता था क्युकी उसे डर था की कही जल्दवाजी मे सब बिगड ना जाये और कही माँ को पता चल गया तो पता नहि वो क्या सोचेगी उसके बारे में… वो थोड़ी देर तक वैसे ही लेटे रहता है और फिर हिम्मत करके उसकी कमर मे अपना एक हाथ दाल देता है और अपना चेहरा आगे बड़ा लेता है अब सोनाली के नंगे पेट् और उसके चेहरे मे कुछ इंच का ही गैप था… सोनाली सतीश की गरम साँसों को अपने पेट् पर महसूस कर रही थी और सतीश भी उसकी खुश्बु को सूँघ पा रहा था..
सतीश बहुत एक्ससायटेड हो रहा था और वो अपने होठ आगे बड़ा कर उसके पेट् पर रख देता है… सतीश की इस हरक़त से सोनाली के बदन मे करंट सा दौड जाता है और वो सतीश के बालों को अपनी मुट्ठि मे भीच कर उसको अपने पेट् से और चिपका लेती है… सतीश को अपनी माँ से ये उम्मीद नहि थी पर वो सब कुछ भूल कर इन पलो का मजा लेने लगता है…. थोड़ी देर मे सोनाली को होश आता है तो उसे अपनी हरक़त पर घिन आती है वो सोचती है की सतीश मुझे प्यार से ये सब कर रहा है और मे अपनी हवस उससे मिटा रही हु…
सोनाली थोड़ी देर मे ही होश मे आ जाती है तो उसे अपनी हरक़त पर शर्म आती है और वो अपने हाथ उसके बालों से हटा लेती है…. सोनाली को यकीन नहि हो रहा था की वो कैसे अपने बेटे के साथ ये सब कर सकती है
सोनाली को अपने ऊपर शर्म आ रही थी की कैसे वो अपने बेटे के साथ ये कर सकती है, जबकी उसका बेटा उसे प्यार के कारन गोद मे सर रख कर लेटा हुआ था…..
पर तभी उसका दूसरा दिमाग उसका विरोध करता है- तू पागल है सोनाली, सतीश तेरे गोद मे सर रख कर ही नहि लेटा बल्कि वो तेरे पेट् पे किस कर रहा है…
सोनाली अपने मन मे- वो किस नहि कर रहा है वो अपनी माँ को प्यार कर रहा है, और वो मेरे बारे मे कुछ गलत नहि सोच सकता….
सोनाली अपने मन को समझा रही थी की उसका बेटा उसके लिए कोई गलत सोच नहि रखता पर वो आज दिन मे अपने बेटे साथ हुई कन्वर्सेशन को भूल गई थी पर वो नहि जानती की उसका बेटा उसे प्यार नहि कर रहा बल्कि केवल अपनी हवस मिटा रहा था….
सतीश अपने होठ उसके नंगे पेट् पर रखे ही उसके जिस्म की खुश्बु और उसके स्पर्श का मजा ले रहा था….
थोड़ि देर मे ही शिप्रा चाय लेकर रूम मे एंटर होती है तो वो सतीश को सोनाली की गोद मे सर रखे लेटा देखति है, पीछे से उसे ये दिखाइ नहि देता की सतीश अपनी माँ के पेट् पर होठ रखे हुए था….
शिप्रा- क्या बात है बड़ा प्यार हो रहा है माँ बेटे में…
शिप्रा की आवाज सुनकर सतीश एकदम से उठ कर बैठ जाता है,
सतीश- बड़ी जल्दी चाय बना ली तूने…
शिप्रा- तेरी तरह सुस्ती से काम नहि करती मैं…
सतीश- तू कुछ ज्यादा ही नहि बोलने लगी है…
शिप्रा- ज्यादा नहि सही बोल रही हु…
सतीश- रुक अभी बताता हूँ तुझे
ओर सतीश तुरंत बेड से उठने लगता है की तभी सोनाली उसका हाथ पकड़ कर उसे रोक लेती है- तुम लोग थोड़ी देर बिना लडे नहि रह सकते…
सतीश- इसी ने सुरुआत करी थी मे तो चुपचाप लेटा हुआ था…
सोनाली- तुझे मैंने पहले भी मना किया है की इसे मत छेड़ा कर फिर क्यों छेडती है तू इसे…
शिप्रा सब को चाय देती है और चुपचाप वहि बैठ कर चाय पिने लगती है…
ऐसे ही हलकी फुल्की बातों और छेड़छाड़ करते पता ही नहि चलता की कब ८ बज जाते है… शिप्रा किचेन मे खाना बनाने चलि जाती है और सोनाली सतीश के साथ बाहर आकर सोफ़े पर बैठ कर साँस बहु वाले टिपिकल शोज देखने लगती है सतीश बोर तो बहुत हो रहा था पर वो एक पल के लिए भी अपनी माँ से अलग नहि होना चाह रहा था.. और वो उसके कंधे पर सर रख कर बैठ जाता है….
सोनाली- क्या बात है आज बहुत प्यार आ रहा है अपनी माँ पर…
सतीश कुछ कहता नहि बस बैठा रहता है…
८:४५ तक शिप्रा खाना तैयार कर लेती है सब साथ मे खाना खाते है और फिर शिप्रा किचन. के काम निपटाने लगती है और सतीश और सोनाली, सोनाली के रूम मे जाकर टीवी देखने लगते है…
थोड़ि देर मे ही शिप्रा आ जाती है और सोनाली के बगल मे लेट कर वो भी टीवी देखने लगती है…. अब सीन ये था की सोनाली बिच मे थी और उसके लेफ्ट हैंड की तरफ सतीश लेटा हुआ था और राईट हैंड की तरफ शिप्रा लेटी हुई थि, थोड़ी देर तक टीवी देखने के बाद सोनाली चादर उठा कर सब के ऊपर दाल देती है अब एक चादर मे सोनाली सतीश और शिप्रा तीनो लोग थे… सोनाली और शिप्रा तो टीवी देखने मे व्यस्त थे पर सतीश का ध्यान तो अपनी माँ की तरफ था और वो सोच रहा था की कैसे वो अपनी माँ की बॉडी को टच करके उसका आनंद उठाये….
सतीश यहि सोचते सोचते सोनाली के कंधे पर अपना सर रख देता है और सोनाली के डीप ब्लाउज मे से झांक रही उसकी दूध की गहराई को देखने लगता है सोनाली उसके सर पर अपना हाथ रख कर उसे प्यार से थपथपाने लगती है जिससे सतीश का सर सरक कर उसके सीने पर आ जाता है… अब सतीश की आँखों के सामने सोनाली का क्लीवेज था, और सोनाली भी सतीश की गरम साँसों को अपने क्लीवेज पर महसूस. कर रहीथी…. अब सतीश अपना हाथ चादर के अंदर से ही अपनी माँ की जाँघो पर रख देता है. पर ये सब करते समय उसकी फट बहुत रही थी ये सोच कर की पता नहि इस बात पर उसकी माँ क्या एक्शन लेगी… पर सोनाली कोई रियेक्ट नहि करती और चुपचाप टीवी देखति रहती है, अपनी माँ की तरफ से कोई रियेक्ट न पाकर उसकी हिम्मत बढ़ जाती है और वो अपने हाथ को अपनी माँ की जाँघ पर रख कर ऊपर की तरफ बढ़ाने लगता है… सोनाली उसकी इन हरकतो से गरम होने लगती है और उसकी तेज सांसो के साथ उसके दूध ऊपर निचे होने लगते है… सतीश सोनाली की ऊपर निचे होती चटियों से समझ जाता है की उसकी माँ अब गरम हो गई है और वो भी इस सबके मजे ले रही है… सतीश अब अपनी माँ की जांघों को सहलाते हुए अपने हाथ को ऊपर की तरफ बढाता है अब उसका हाथ अपनी माँ की चुत को छूने ही वाला था की सोनाली अपने हाथ से उसके हाथ को पकड़ लेती है, पर वो अपनी नजरे टीवी पर से नहीं हटाती है, सोनाली की चुत सतीश की हरकतों से गिली हो गई थी… और वो इससे आगे नहि बड़ना चाहती थी क्युकी उसे पता था की वो अपने पर कण्ट्रोल नहि कर पायेगी और वो शिप्रा के कारन उससे कुछ कह भी नहि पा रही थी… और सतीश भी ये बात समझ गया था और वैसे भी उसकी माँ के विरोध मे दम नहि था क्युकी उसने बहुत हलके से उसके हाथ को पकड़ा था सतीश एक झटका देकर अपने हाथ को झटका देकर चुरा लेता है और अपने हाथ को अपनी माँ की चुत और अपने जन्मस्थान पर साड़ी और पेटीकोट के ऊपर से ही रख देता है… सतीश का हाथ अपनी चुत पर पड़ते ही सोनाली की बॉडी मे करंट दौड जाता है उसकी समझ बंद हो जाती है और वो बड़ी मुस्किल से अपने मुह से निकलने वाली सिसकारी को रोकती है, उसकी चुत जोकि पहले से गिली थी एकदम से पानी छोड़ देती है… सोनाली की साँसे अब और भी तेज हो गई थी…
ईधर चादर के अंदर माँ बेटे ये सब कर कर रहे थे उधर शिप्रा टीवी देखने मे ही मस्त थी उसे तो ये भी नहि पता था की उसकी माँ और भाई अंदर ही अंदर क्या गुल खिला रहे है . . सतीश अब अपने हाथ को उसकी चुत पर से निचे तक फिरा देता है.
ईधर चादर के अंदर माँ बेटे ये सब कर कर रहे थे उधर शिप्रा टीवी देखने मे ही मस्त थी उसे तो ये भी नहि पता था की उसकी माँ और भाई अंदर ही अंदर क्या गुल खिला रहे है . . सतीश अब अपने हाथ को उसकी चुत पर से निचे तक फिरा देता है…
सतीश अब अपने हाथ को उसकी चुत पर से निचे तक फिरा देता है… सोनाली फिर से अपना हाथ बड़ा कर सतीश के हाथ को पकड़ कर दबा कर उसे रुकने का इशारा करती है पर सतीश अब कहा रुकने वाला था वो बहुत एक्ससायटेड हो गया था और उसका लंड अब पेण्ट मे पूरा खड़ा हो गया था… सतीश सोनाली की चुत को भी तेजी मे रब करने लगता है…. और ऊपर अपनी माँ की ऊपर निचे होती छातियों को देख रहा था….
सोनाली का तो बुरा हाल हो गया था उसे लग रहा था की अब वो किसी भी समय झड जायेगी…. क्युकी अपनी बेटी के पास ही अपने बेटे से अपनी चुत सहलवाने से वो काफी गरम हो गई थी और ये उसके लिए बिलकुल नया अनुभव था उसका पति तो हमेशा अकेले मे ही उसके बदन से खेलता था पर उसका बेटा तो अपनी बहन के सामने ही अपनी माँ के शरीर से खेल रहा था….
थोड़ि देर मे ही सोनाली अपने चरम पर पहुच जाती है और वो सतीश का हाथ कस कर अपनी चुत पर दबा लेती है और उसकी चुत अपना सारा रस बहा देती है… सोनाली की आँखे मजे की अधिकता मे बंद हो जाती है और लाख रोक्ने के बावजूद उसके मुह से सिसकारी निकल ही जाती है….
सोनाली-आह्हः…उफ्फ्फ्….
उसके मुह से सिसकारी सुनकर शिप्रा का ध्यान टीवी पर से हटता है…
शिप्रा-क्या हुआ मोम…
सतीश भी अपना हाथ छुड़ा कर बैठ कर अन्जान बनते हुए अपने चेहरे पर चिंता का भाव लिये हुये…
सतीश- क्या हुआ मोम…
सोनाली थोड़ी देर तक आँखें बंद करे लेती रहती है और अपनी साँसों को कण्ट्रोल करने लगती है… उसे तो यकीन ही नहि हो रहा था की वो आज इतनी जल्दी चरम पर कैसे पहुच गई और आज उसे काफी समय बाद उसकी चुत ने इतना रस बहाया था ….
शिप्रा बहुत टेंशन मे आ गयी थी वो समझ रही थी की उसकी माँ की तबियत ख़राब हो रही है वो सोनाली को हिलाते हुये- माँ क्या हुआ आपको, आप ठीक तो हो ना, आप कुछ बोलती क्यों नही…
सोनाली आँखे बंद करे ही- मे ठीक हु, जा एक गिलास पानी ले आ…
शिप्रा बेड से उठ कर चलि जाती है, उसके जाते ही
सतीश- माँ आप ठीक तो हो ना….
सोनाली अपनी आँखे खोलती है उस पर अभी भी खुमारी छायी हुई थि, सोनाली सतीश की तरफ देखति है और बेड से उठ कर बाथरूम की तरफ चलि जाती है….
सतीश सोनाली के देखने के तरीके से कुछ समझ नहि पाता की उसकी आँखों मे उसके लिए गुस्सा था या फिर प्यार..
सोनाली बाथरूम मे जाकर अपनी साड़ी और पेटीकोट उतार देती है, उसकी चुत ने इतना पानी बहाया था की पेटीकोट के साथ साथ साड़ी भी गिली हो गई थी…
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सोनाली अपनी चुत को देखति है तो उसके गाल लाल हो जाते है उसकी चुत के लब खुले हुये थे और सतीश की रगडन के कारन वो लाल हो गई थी…. सोनाली अपनी चुत को पानी से साफ़ करती है…. साड़ी तो पहनने के लायक रही नहि थी इसलिये वो अपना ब्लाउज भी उतार देती है और बाथरूम मे टँगी नाइटी पहन लेती है अब सोनाली के दिमाग से ख़ुमारी का नशा उतर गया था और अब उसे सतीश के साथ किये गए काम पर शर्म आ रही थी वो मन ही मन अपने आपको कोस रही थी की कैसे उसने अपने बेटे के साथ ये सब किया, और सतीश ग़लती तो उसकी भी है वो कैसे अपनी माँ के साथ ये सब कर सकता है, मे उसे कितना शरीफ समझती थी पर वो तो….
ओर सतीश की हरकतो को याद करके उसके होठो पर मुस्कान आ जाती है… पर थोड़ी ही देर मे उसके मन मे अन्तर्द्वन्द चल्ने लगता है जहा एक मन इस सबके पक्ष मे था वहि दूसरा मन इसका विरोध कर रहा था….
ये तुझे क्या हो गया है सोनाली तू कैसे अपने बेटे के साथ ये कर सकती है भला कभी कोई माँ अपने बेटे के साथ ऐसे सम्बन्ध बनाती है, तू अपने जिस्म की प्यास बुजाने के लिए इस हद तक गिर सकती है ये मैंने सोचा भी नहि था…
ओर अब सोनाली को ये सब बहुत गलत लग रहा था और साथ ही साथ उसे सतीश पर गुस्सा आ रहा था की कैसे वो अपनी माँ के साथ ऐसी गन्दी हरकत कर सकता है…. मुझे उससे बात करनी ही होगी इस बारे में…
सोनाली बाथरूम से बाहर आती है, वो देखति है की शिप्रा भी बेड पर बैठि है… वो शिप्रा के सामने शांत रहना ही उचित समझती है…और बेड पर आकर शिप्रा के बगल मे बैठ जाती है और पानी का गिलास लेकर अपने गले को तर करने लगती है….
शिप्रा- आप ठीक तो हो ना मोम….
सोनाली- हा मे ठीक हूँ बेटी,..
Comment atlist two three lines and like keep reading keep supporting give suggestions
Dm me for incest chat

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