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Update – 16

(Present)

उसकी सोचो को झटका लगता है जब डोर बेल्ल बजती है और वो बेड से उठ कर गेट खोलने को चल देती है…. बाहर शिप्रा और सतीश खड़े थे शिप्रा अंदर चलि जाती है और सतीश सोनाली से नजरे नहि मिला पा रहा था, वो अपनी गर्दन झुकाए घर के अंदर चल देता है… उसकी हरकत को देख कर सोनाली के होंठो पर स्माइल आ जाती है और वो गेट बंद करके किचन की और चल देती है… शिप्रा अपने रूम मे चेंज करने गई हुई थि, सतीश सोनाली को.किचन की तरफ जाता देख कर…..

सतीश- आप कहा जा रही हो माँ?

सोनाली पलट कर उसकी तरफ देखति है तो सतीश अपनी नजरे चुरा कर इधर उधर देखने लगता है, सोनाली अपने होंठो पर स्माइल लिए हुये- किचन मे जा रही हु, खाना बनाने के लिये…

सतीश- पर तुम्हे तो डॉक्टर ने आराम करने को बोला है ना…

सोनाली- पर अब तो मे ठीक हूँ ना और खाना ही तो बनाना है खाना बनाने मे कोई इतनी बड़ी दिक्कत थोड़े ही आ जाएगी….

सतीश अब उसकी नजारो मे एकटक देखते हुए उसकी तरफ बड जाता है- देखो माँ आपको आराम करना चाहिए और एक टाइम का खाना नहि खाएँगे तो हम मर थोड़े ही जाएंगे…

सोनाली- एक थप्पड़ मारूंगी अगर कभी ऐसी बात अपने मुह से निकाली तो….

सतीश उसके बिलकुल करीब पहुच कर उसकी आँखों मे झाकते हुये- एक हि क्या… एक हजार मार लेना पर आपको काम नहि करने दूँगा, आज तो आपको आराम करना ही पड़ेगा और आप खुद नहि जाओगी तो मे आपको गोदी मे उठा के ले जाऊंगा……

सोनाली भी एकटक सतीश की नजरो मे ही देख रही थी और उनमे उसे अपने लिए अताह प्रेम नजर आ रहा था…

सोनाली- अच्छा तू इतना बड़ा हो गया है की अब अपनी मम्मी को गोद मे उठा लगा…

सतीश-क्यों आपको यकीन नहि है क्या की मैं इतना बड़ा हो गया हूँ की आपको अपनी बाहो मे उठा सकू……..

सोनाली- नहि मुझे तो यकीन नहि की तू इतना बड़ा हो गया की मुझ जैसी मोटी को अपनी बाँहों मे उठा सके, बहुत वजन है मेरे में…

सतीश- आप और मोटी….?

सतीश सोनाली की गर्दन के पीछे अपना एक हाथ ले जाता है और एक हाथ उसके पैरों के पीछे लगा कर उसे अपनी बाँहों मे उठा लेता है…..

सोनाली उसकी इस हरकत से चौक जाती है- अरेरे… सतीश मे गिर जाऊंगी…

सतीश- क्यों यकीन नहि क्या मुझ पर… ?

सोनाली कुछ नहि कहती और डरणे का बहाना करके उसके गले मे अपनी बाहे दाल देती है सतीश उसे अपनी बाँहों मे उठाये हुये उसके रूम की तरफ चल देता है….

सोनाली एकटक उसे ही देख रही थि, उसे सतीश पर बहुत प्यार आ रहा था… सतीश सोनाली के रूम मे जाकर उसे बेड पर लीटा देता है…. और फिर उसके पास बैठकर….

सतीश- हम्म्म्म आप और मोटी….

सोनाली- क्यों नहि हूँ क्या?

सतीश- फूल जितना वजन नहि है आपमें और कह रही हो अपने आप को मोटी, आप तो फूल की तरह नाजुक हो मम्मी…. और अब तो यकीन हो गया ना की आपका बेटा अब बड़ा हो गया है….

सोनाली- हम्म्म मुझे तो पता ही नहि चला की कब तू जवान हो गया…. तू तो अब इतना बड़ा हो गया की अपनी माँ का वजन भी तुझे कुछ नहि लग रहा….

सतीश ताव मे आकर- अरे माँ आपने अभी देखा ही कहा है की आपका बेटा कितना बड़ा हो गया है, जब देख लोगी तब पता चलेगा की आपका बेटा इतना बड़ा हो गया है आप जैसी कइयो को हैंडल कर सकता है….

ओर ये सब बोल कर सतीश झेप जाता है उसे यकीन ही नहि होता की उसने फिर से इतनी बड़ी बेवकूफ़ी कैसे कर दि… सोनाली उसकी ये बात सुनकर मुस्कुरा देती है….

सोनाली- अब बातो से ही अपनी माँ का पेट् भरेगा क्या? वैसे तो बड़ी चिंता करता है अपनी माँ की और इस बात की बिलकुल फ़िक्र नहि की तेरी माँ ने सुबह से नाश्ते के अलावा कुछ भी नहि खाया है….

सतीश- आरे मुझे तो ध्यान ही नहि था, आप वेट करो मे अभी खाने की ब्यवस्था करता हु….

ओर सतीश बेड से उठ कर चल देता है तभी उसे सीडियों से उतरती शिप्रा नजर आती है, वो बिना रुके गेट की तरफ चल देता है की तभी शिप्रा पीछे से उसे आवाज देकर रोक लेती है…

शिप्रा- भाई कहा जा रहे हो और माँ कहा है?

सतीश- माँ की तबियत सही नहि है

शिप्रा परेशान होते हुये- क्यों क्या हुआ माँ को?

सतीश-कुछ नहि हल्का सा बुखार था मैंने डॉक्टर अंकल को बुलवा के दिखवाया उन्होंने कहा है की माँ को आराम की सख्त जरुरत है और वो कुछ ही दिनों मे फिट हो जाएंगी…

शिप्रा-ओह्ह, पर तुम कहा जा रहे थे…..

सतीश-बाहर से खाना लेने जा रहा हु, क्युकी मैंने मम्मी से खाना बनाने को मना कर दिया है, उन्हें आराम की जरुरत है इसलीये….

शिप्रा- तो बाहर जाने की क्या जरुरत है मे घर पर ही खाना बना लेती हु थोडे टाइम मे खाना तैयार कर लुंगी….

सतीश उसकी तरफ हैरत से देखते हुये- क्या कहा तूने?? खाना तू बनाएगी…. है है ह

शिप्रा रुआंसी होते हुये- क्यों मे नहि बना सकती क्या?

सतीश- हा, बना सकती है पर आज हमे डाबर हाजमोला की जरुरत पडने वाली है तेरे खाने को पचाने के लिये….

शिप्रा- क्या भैया, जाओ मे नहि बनाती ले आओ बाहर से…

ओर शिप्रा रूठ कर सोफ़े पर जाकर बैठ जाती है….

सतीश उसके पास जाकर उसे उठा कर अपने गले से लगा लेता है- अरे पगली मे तो मजाक कर रहा था… चल अब जल्दी से उठ मेरे पेट् मे चुहे कुद रहे है जल्दी से खाना बना दे…..

शिप्रा खुश होकर उससे अलग होती है- बस आप थोड़ी देर वेट करो मे अभी बनाती हूँ पर पहले मम्मी से मिललु…

ओर शिप्रा सोनाली के रूम की तरफ बढ़ जाती है और सतीश भी उसके पीछे चल देता है… शिप्रा सोनाली के रूम मे जाकर उसके बेड पर बैठ कर उसके गले लग जाती है और उसका हाल चाल पुछने लगती है और मैं बाहर गेट पर खड़ा ये सब देख रहा था, मैं अपनी आँखों से मम्मी के हर मूवमेंट और हर एक्सप्रेशन को कैच करने की कोसिश कर रहा था, मेरी नजरे उन्ही पर टिकी हुई थी और ये बात उन्होंने भी जान ली थी और उनके होंठो पर एक स्माइल आ गई थि, और वो शिप्रा से बात करते हुए बिच बिच मे मेरी तरफ देख रही थी और मे तो जैसे खो ही गया था उनकी सुंदरता मै…

थोड़ि देर बात करके शिप्रा बाहर खाना बनाने चलि जाती है… और सतीश अंदर सोनाली के पास जाकर बैठ जाता है….

सोनाली- गेट पर खड़े हुए तू घुर घुर कर क्या देख रहा था…….

सतीश- कुछ नहि देख रहा था की आप माँ बेटी मे आपस मे कितना प्यार है….

सोनाली- और कुछ तो नहि देख राह था ना….

सतीश- ह्ह्ह्हम्मम्म, देख तो रहा था….

सोनाली- क्या?

सतीश-आपको नहि पता की मे क्या देख रहा था….

सोनाली- अगर पता होता तो तेरे से पूछती क्या?

सतीश- मे इस दुनिया की सबसे खूबसूरत लेडी को देख रहा था……

सोनाली- अच्छा और कौन है ओ….

सतीश- ये तो मे अभी नहि बता सकता…. पर जल्द ही आपको पता चल जायेगा…..

सतीश को समझ आ गया था की उसकी माँ को उससे ऐसी बाते करने मे कोई प्रॉब्लम नहि है और न ही वो उसकी किसी बात से नाराज है…. जब्कि इधर सोनाली भी अपने बेटे से अपनी तारीफ़ सुनकर गरम हो रही थी इतनी तारीफ़ तो कभी उसके हस्बैंड ने भी नहि करी थी जितनी की सतीश ने एक दिन मे कर दी थी….. कुछ तो था जो सोनाली को सतीश की तरफ अट्रॅक्ट कर रहा था अब चाहे वो सतीश का प्यार हो या फिर खुद उसकी जिस्म की आग जोकि काफी समय से ख़त्म नहि हुई थी और अब वो उसे अपने बेटे की तरफ ही आकर्षित कर रही थी….. पर जो भी हो सोनाली को इससे कोई आपत्ति नहि थी वो खुल कर सतीश के साथ मजे लेने का मन बना चुकी थी पर कही अंदर से उसकी आत्मा उसे अपने बेटे की तरफ अट्रॅक्ट होने से रोक रही थी और यहि वजह थी जोकि सोनाली अपने ऊपर कण्ट्रोल करी हुई थी वरना तो सतीश के प्यार को देख कर तो उसे ऐसा लग रहा था की अभी सतीश को अपनी बाँहों मे लेकर उसे जी भर कर प्यार करे……

सोनाली अपनी सोच मे खोई हुई थी….

सतीश- कहा खो गई माँ?

सोनाली की सोच पर ब्रेक लगता है…

सोनाली- हुह्ह्… नहि कुछ भी तो नही…

सतीश उठ कर टीवी ऑन कर लेता है और रिमोट लेकर सोनाली के बगल मे ही अपनी पीठ टीका कर लेट जाता है…. और सोनाली के साथ बात करते हुए टीवी देखने लगता है थोड़ी देर मे ही उन्हें शिप्रा कीआवाज सुनाई देती है जोकि उन्हें खाने के लिए बाहर बुला रही थी…. सतीश टीवी को ऑफ करके सोनाली के साथ बाहर आ गया शिप्रा ने खाना लगा दिया था, सतीश और सोनाली खाने की टेबल पर पहुच कर शिप्रा के साथ खाना खाते है….

शिप्रा- खाना कैसा बना है?

सतीश-इसे तुम खाना कहती हो इसे खा कर तो मुझे उल्टी आ रही है… आखिर इतना बुरा खाना कैसे बना सकती हो तुम्…

सोनाली मुस्कुरा कर- क्यू परेशान कर रहा है उसे, अच्छा तो बना है खाना…

शिप्रा- इसमें इसकी कोई ग़लती नहि माँ भला बन्दर क्या जाने अद्रक का स्वाद……..

सतीश- क्या माँ आपने भी इस छिपकली के दिमाग ख़राब कर रखा है… इतनी झूटी तारीफ भी मत करो इसकी…

शिप्रा- ओये बन्दर चुपचाप खाना खा और नहि खाना तो उठ जा….

सतीश- खाने की थाली से उठा नहि करते और वैसे भी बहुत जोर की भूख लगी है वरना तो मे इस खाने को हाथ भी नहि लगाता और हाँ मुझे अब इस बारे मे कोई बहस नहि करनी इसलिये मुह बंद करके खाना खा…

ओर सतीश चुपचाप खाना खाने लगता है शिप्रा और सोनाली एक दूसरे की तरफ देख कर मुस्कुरा देती है…

खाना ख़तम करके सतीश सोनाली के साथ उसके कमरे मे आ जाता है और शिप्रा बर्तन किचन मे ले जाती है…

सोनाली- आज खाना वाक़ई मे बहुत अच्छा बना खा कर मजा आ गया…

सतीश- हम्म खाना तो वाक़ई मे टेस्टी था पता नहीं छिपकली ने इतना बढ़िया खाना कैसे बना लिया..

सोनाली उसकी तरफ मुस्कुरा कर देखति है…

सतीश- अब आप ऐसे क्यों मुझे देख कर हस रही हो…

सोनाली- मे देख रही हूँ कि तु बाहर तो बहुत बुराई कर रहा था शिप्रा के खाने की और अंदर तू उलटी गंगा बहा रहा है….

सतीश- क्या माँ अगर मे उसके सामने कह देता तो उसका दिमाग सातवे आसमान पर पहुच जाता अपनी तारीफ सुनकर…

सोनाली बस मुस्कुरा देती है… सतीश सोनाली की मेडिसिन उसे देता है और किचन मे से एक गिलास पानी लेकर उसे खाने को देता है…. सोनाली मेडिसिन अपने हाथों मे लेकर मुह बनाते हुये….

सोनाली- सतीश क्या ये दवाई खानी जरुरी है…

सतीश- दवाई तो आपको खानी ही पड़ेगी वरना आप ठीक कैसे होगी…

सोनाली- पर मे तो बिलकुल ठीक हूँ अब…

सतीश- कोई बहाना नहि चलेगा आपका जल्दी से दवा खाओ और फिर आराम करो…

सोनाली दवाई ख़ाति है और फिर बेड पर आँखें बंद करके लेट जाती है… सतीश उसके सर पर हाथ फिराता है…

सतीश- अब आप आराम करो और मे बाहर ही सोफ़े पर लेटा हूँ किसी चीज की जरूरत हो तो आवाज लगा देना…

सोनाली अपनी आँखे बंद कर सतीश की केयर मे छुपे प्यार को महसूस करके मुस्कुरा रही थी…

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Next soon….

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