Update – 15
बसन्ती- मुझे ऐसे क्यों देख रहे हो सतीश बाबु, क्या आज से पहले मुझे कभी देखा नहि है क्या???
सतीश- देखा तो बहुत बार पर जब आज देखा तो पता चला की मैंने तो कभी तुम्हे देखा ही नहि और जो आज देखा है तो अब तो तुमसे.नजर ही नहि हट रही है….
बसन्ती अपनी तारीफ सुनकर मुस्कुराते हुये- अच्छा आज ऐसा क्या देख लिया…?
सतीश- अजी ये पूछिए की क्या नहि देखा… तुम्हारा ये भरा हुआ जिस्म, ये बड़े बड़े मम्मे, और ये भारी गांड देख कर तो मे ये सोच रहा हूँ की आज तक तुम पर मेरी नजर क्यों नहि पडी…. और अब जब पड़ी है तो मन कर रहा है की तुम्हे नंगा करके पूरे दिन तुम्हारी चुत मे लंड डाले तुम्हे चोदता रहु….
बसन्ती सतीश की बाते सुनकर गरम होने लगती है और उसका चेहरा अपनी तारीफ सुनकर शर्म से लाल.हुअ जा रहा था….
बसन्ती- क्या सतीश बाबू आप भी ना… झूटी तारीफ़ करते हुए आपको शर्म नही आती…
सतीश- झूटी तारीफ़??? तुम्हे ये झूटी तारीफ लगती है… अगर लगती है तो ये देख…
ओर सतीश अपने शार्ट को निचे खिसका देता है और उसका साँप दनदनाता हुआ बाहर आ जाता है……
सतीश- देखो जब से तुमको देखा है बैठने का नाम ही नहि ले रहा, क्या अब भी तुम्हे लगता है की मे झुट बोल रहा हु…
बसन्ती अपने मुह पर हाथ रखते हुये- हाय राम ये फिर से खड़ा हो गया, अभी आधा घंटा पहले ही तो मैंने इसको शांत करा था… पर ये तो फिर से तैयार हो गया, ये कभी बैठता भी है की नहि….
सतीश- जब सामने आप जैसा कड़क माल होगा तो ये कैसे बैठेगा भला… मेरा मन तो अब एक और राउंड लगाने का कर रहा है…
ओर वो बसंती की तरफ बढ़ता है , बसंती पीछे हटते हुये…
बसन्ती- अभी नहि सतीश, तुम्हारी मम्मी उठ सकती है किसी भी समय इस्लिये आज नहि अब कल करना जो जी चाहे…
सतीश अपने लंड की तरफ इशारा करते हुये- फिर इसका क्या करू मैं….
बसन्ती-वहि जो रोज करते थे…
ओर बसंती हंस देती है…
सतीश- मजाक उडालो हमारी हालत का…
ओर सतीश मुह फैला कर बैठ जाता है…
बसन्ती- ओह्ह्ह क्या हुआ मेरा बाबू रूठ गया…
पर सतीश कोई जवाब नहि देता….
बसन्ती- देखो सतीश इसमें खतरा है… तुम्हारी माँ ने देख लिया तो सब गड़बड़ हो जाएगा…. और मुझे घर भी जाना है
सतीश- रहने दो ये बहाने, तुम्हे मेरी बिलकुल चिंता ही नहि है वरना तुम मुझे यूँ छोड़ कर नहीं जाती.
बसन्ती- देखो सतीश इसमें खतरा है… तुम्हारी माँ ने देख लिया तो सब गड़बड़ हो जाएगा…. और मुझे घर भी जाना है
सतीश- रहने दो ये बहाने, तुम्हे मेरी बिलकुल चिंता ही नहि है वरना तुम मुझे यूँ छोड़ कर नहीं जाती.
बसन्ती- ठीक है मे इसे मुह मे लेकर चूसूंगी पर केवल चूसूंगी और इससे ज्यादा कुछ भी नहि…
सतीश एकदम खुश होते हुए उठ जाता है और अपना शार्ट निचे करने लगता है… बसंती उसे रोकते हुये- यहां नही..
सतीश- तो फिर कहा…
बसन्ती- तुम्हारे रूम में….
ओर इतना कहकर वो ऊपर की तरफ बढ़ जाती है… सतीश भी उसके पीछे पीछे चल देता है……
दोनो उसके कमरे मे घुस जाती है और सतीश कमरे मे आकर गेट लॉक कर देता है और उसे अपनी बाँहों मे लेकर अपने बेड पर लीता देता है और खुद उसके ऊपर लेट कर उसे किस करने लगता है…
किस ख़त्म होते ही बसंती उसको धक्का देकर अपने ऊपर से हटा देती है और बैठते हुये- ये चादर भी गन्दी करनी है क्या? पुराणी चादर कहा है?
सतीश उसे इशारे से बता देता है, बसंती चादर उठा कर- अब बैठे रहोगे या हटोगे भी…
सतीश खड़ा हो जाता है बसंती नै चादर हटा कर पुराणी चादर बिछा देती है….
सतीश तुरंत अपना शार्ट उतार कर बेड के किनारे से बैठ जाता है, उसका लंड झटके खा रहा था…
बसन्ती उसके पैरों के बिच मे बैठ जाती है और उसके लंड को अपने हाथो मे लेकर उसकी मुट्ठ मारने लगती है… और थोड़ी देर तक मुट्ठ मारने के बाद लंड को अपने मुह मे ले लेती है और उसे चुसना शुरू कर देती है…
सतीश अपने हाथ पीछे बेड पर टीका देता है और लंड चूसाई का मजा लेने लगता है…
बसन्ती उसके लंड को अपने मुह मे लेकर चुस रही थि, वो कभी उसके सुपाडे पर अपनी जीभ फिराती और उसके लंड को अपने मुह मे लेकर लॉलीपॉप की तरह चुस्ने लगती है…
बसन्ती भी इस चूसाई से गरम होने लगी थी…
सतीश अब अपने हाथो से उसके बालो को पकड़ कर कुछ बड़े स्ट्रोक मारता है और फिर उसके सर को पीछे करके अपना लंड बसंती के मुह से बाहर निकालता है, बसंती उसकी तरफ हैरत भरी निगहाओं से देखति है सतीश बेड से उठता है और बसंती को खड़ा करके उसे पीठ से झुका देता है बसंती अपना हाथ बेड के किनारे पर टीका देती है उसे समझ आ गया था की अब क्या होने वाला है पर वो उसका विरोध नहि करती क्युकी उसकी चुत को भी लंड चाहिए था……
सतीश उसे झुका कर उसकी साड़ी को पेटीकोट सहित उसकी कमर पर दाल देता है… और अपने लंड क उसकी चुत के छेद पर टीका कर एक धक्का देता है… उसका आधा लंड चुत मे था, सतीश अब दूसरा धक्का मरता है और अपना लंड चुत की गेहराई मे उतार देता है…
बसन्ती- हायःआहः सतीश बाबू कितना बड़ा है तुम्हारा… आअह्हह्ह्….और जोर से चोदो….हहह्म्म ऐसे ही…
सतीश उसकी कमर को पकड़ कर ताबाड तोड़ धक्के लगाने लगता है…. और एकबार फिर से रूम का माहोल गरम हो गया था….
सतीश का लंड बसंती की बच्चेदानी पर टक्कर मार रहा था… सतीश और बसंती तो जैसे जन्नत मे थे…
सतीश- आह्ह्ह्ह…. बसंती इतनी उम्र मे भी तेरी चुत कितनी टाइट है…. आअह्हह्ह्… मजा आ गया….
बसन्ती- तो कर दे न तू ढीली…. ऊऊफफफफ…. आह्हः… तेरा लंड मेरी बच्चेदान से टकरा रहा है…. कितना बड़ा है रे तेरा…. आह्ह्ह्हह
ओर सतीश धक्के पर धक्के लगाये जा रहा था…. और फिर २० मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद सतीश और बसंती एक साथ झड जाते है…
सतीश बसंती की पीथ से टिक कर अपनी साँसे कण्ट्रोल करने लगता है… और फिर अपना लंड निकाल कर उसके पेटीकोट से पोछ देता है… बसंती की चुत से सतीश और बसंती का मिला जुला रस निचे टपकने लगता है…
बसन्ती अपनी चुत को अपने पेटीकोट से पोछ कर अपनी साड़ी निचे करती है… और फिर निचे पड़े माल को गन्दी चादर से साफ़ करके उसे ढ़ोने के लिए दाल देती है… और नई चादर बिछा कर सतीश को किस करके…
बसन्ती- अब तो खुश्…
सतीश-बहुत…
फिर बसंती उसके रूम से निकलती है और निचे उतर कर अपने घर के लिए चलि जाती है…. और सतीश भी अपने कपडे चेंज करके निचे आ जाता है…. उसकी माँ अभी भी सो रही थी… अब उसे चिंता होने लगती है, क्युकी उसकी माँ कभी भी दिन मे नहि सोती थी और आज तो उसे सोते हुए भी काफी टाइम हो गया था…
ओ उसके कमरे मे जाता है और उसे आवाज लगाता है… आवाज पर कोई रिस्पांस न देणे से वो उसको हिला कर जगाने के लिए जैसे ही उसके हाथ पर अपना हाथ रखता है वो चौक जाता है, सोनाली का हाथ काफी तप रहा था वो उसके माथे पर हाथ रख कर चेक करता है उसका माथा बहुत तेज तप रहा था सोनाली को बहुत तेज बुखार था और उसका जिस्म बुखार की वजह से तप रहा थ, सतीश अपनी माँ की हालत देख कर बहुत परेशान हो जाता है और तुरंत अपने फॅमिली डॉक्टर को कॉल करता है, और किचन मे जाकर एक बाउल मे पानी ले आता है और अपने रुमाल को पाणी मे भिगो कर उसे निचोडने के बाद वो सोनाली के माथे पर रख देता है…. और नवरत्न आयल से उसके तलवो की मालिश करने लगता है… और बिच बिच मे वो रुमाल को वापस भिगा करा उसके माथे पर रख देता है…
सोनाली को अब थोड़ा आराम मिला था और सतीश के दोबारा गिला कपडा रखने पर उसकी आँखे खुल जाती है… और वो उठने की कोशिश करती है पर सतीश उसे उठने से रोकते हुये- आप लेती रहो मोम, सतीशने डॉक्टर अंकल को बुलाया है वो आते ही होंगे….
सोनाली- पर….
सतीश-पर वर कुछ नहि आप लेटे रहिये चुपचाप और सतीश वापस उसके पैरों की तरफ आकर उसके तलवो.की मालिश करने लगता है….
ओर सोनाली उसे ये सब करते देखति रहती है
सोनाली सतीश को ही देख रही थि, उसे सतीश की आँखों मे अपने लिए केयर और प्यार दोनों नजर आ रहे थे और उसे सतीश पर बहुत प्यार आ रहा था पर इस प्यार मे लस्ट नहि था और न ही सतीश के मन मे इस समय कोई गन्दा ख्याल था अपनी माँ को लेकर, वो तो बस अपनी माँ के दर्द से दुखी था और उसको ख़तम करने की जी तोड मेहनत कर रहा था…
सोनाली- रहने दे सतीश अब मे सही हु…
सतीश- नहि माँ जब तक डॉक्टर अंकल नहि आ जाते तब तक मे आपको नहि छोडूंगा….
तोड़ि देर मे ही डोर बेल्ल बजती है, सतीश सोनाली को लेटे रहने की हिदायत देकर डोर खोलने के लिए चल देता है…. बाहर डॉक्टर अंकल थे सतीश उनके हाथ से बैग लेकर उन्हें अंदर सोनाली के रूम मे ले जाता है…..
डोक्टर सोनाली का चेकउप करते है….
सतीश- अंकल क्या हुआ है मम्मी को……
ड़ोक्टर- कुछ नहि बेटा नार्मल सा बुखार था, लगता है आज कल तुम्हारी मम्मी कुछ ज्यादा ही टेंशन लेती है, जिसके कारन इन्हे ये बुखार हुआ है मे दवाई लिख देता हूँ तुम ले आना पर अगर इन्होने चिंता करना नहि छोडी तो इनकी तबियत और भी ज्यादा सीरियस हो सकती है इस्लिये इन्हे खुश रखने की जिम्मेदारी तुम्हारी है…….
सतीश- उसकी चिंता आप मत करो अंकल मे जानता हूँ की माँ को
कैसे खुश रखना है…
ड़ोक्टर उसे दवाई लिख कर देता है और उसे समझा देता है की कब और कैसे उसे दवाई सोनाली को खिलानी है…
सतीश डॉक्टर को बाहर तक छोड़ कर आता है और फिर सोनाली को आराम करने को बोल कर वो दवाई लेने के लिए निकल जाता है…
थोड़ि देर मे ही वो दवा लेकर आजाता है और किचन से हल्का नाश्ता और एक गिलास जूस लेकर सोनाली के पास आ जाता है… और उसे उठा कर बेड से टीका कर बैठा देता है और फिर अपने हाथो से ही उसे नाश्ता कराता है, और नाश्ते के बाद उसे मेडिसिन दे देता है सोनाली पानी से मेडिसिन लेती है और गिलास को सतीश को पकड़ा देती है सतीश उस गिलास को टेबल पर रख कर उसे जूस का गिलास उठा देता है….
सोनाली उसके हाथ से गिलास लेते हुये- क्या बात है आज बड़ी केयर कर रहा है अपनी इस बूढी माँ की………..
सतीश- मे आपकी केयर नहि करूँगा तो भला कौन करेगा आखिर आप मेरी इतनी प्यारी मम्मी हो….. और रही बात बूढ़ी होने की तो ये आप अपने दिमाग से निकाल दो की आप बूढ़ी हो, आपके सामने तो जवान लड़किया भी फेल है और इस उम्र मे भी आपने अपनी बॉडी को काफी फिट रखा है…. अगर आप एक इशारा कर दो तो लड़को की लाइन लग जाएगी…..
सोनाली अपनी प्रसंसा सुन कर खुश हो जाती है और उसके कंधे पर धीरे से हाथ मारते हुये- धत पागल कहि का कुछ भी बोल देता है…. भला मे कहा टक्कर ले लुंगी आज की लड़कियों से….
सतीश- अरे नहीं माँ मे सही कह रहा हूँ आपकी बॉडी इतनी फिट है की जो कोई देख ले देखता ही रह जाए और ऊपर से आपकी सुन्दरत, आपका गोरा बदन आपकी सुंदरता मे ४ नहि बल्कि ४० चाँद लगा देता है…..
सोनाली को अपने बेटे के मुह से अपनी तारीफ सुन्ने मे बहुत रोमाँचित सा फील हो रहा था पर वो अपने एक्सप्रेशन को छुपाते हुये- तुझे अपनी माँ से झुट बोलते हुए शर्म नहि आति, अपनी बूढ़ी का मजाक उड़ा रहा है तू उसकी झूटी तारीफ करके….
सतीश अब खिसिया गया था,- अरे कौन कहता है आपसे की आप बूढ़ी हो गई हो, अभी इस उम्र मे आप इतनी सेक्सी लगती हो की जब आप रोड पर गुज़रती हो तो सब की नजर आप पर ही टिक जाती है, चाहे बच्चा हो या बूढ़ा सब आपको पलट पलट कर देखते है…. आप इतनी उम्र मे भी बहूत हॉट एंड सेक्सी लगती हो, जवानो की तो छोड़ ही दो बुड्ढों का भी आपको देख कर खड़ा हो जाता है….
अनायास ही सतीश के मुह से अपनी माँ के लिए हॉट और सेक्सी जैसे सब्द निकल गए थे और अपनी आखिरी लाइन बोलकर तो उसकी फट गई थी….. और यही हाल सोनाली का भी था वो अपने बेटे के मुह से अपने लिए हॉट एंड सेक्सी जैसे वर्ड सुन कर शर्म से पानी हुए जा रही थी…. और सतीश की आखिरी लाइन ने तो उसकी चुत को भी गिला कर दिया और उसके गाल टमाटर की तरह लाल हो गए थे….
थोड़ी देर तक रूम मे काफी शान्ति हो जाती है किसी को समझ ही नहि आ रहा था की क्या बोले और कैसे बोले….
सतीश- आप आराम करो मे शिप्रा को ले आता हु….
ओर इतना कह कर सतीश शिप्रा को लेने चला जाता है….
जबकि दूसरी तरफ सुबह जब शिप्रा कॉलेज पहुचती है तो वो देखति है की प्रिंस कॉलेज गेट पर अपने फ्रेंड्स के साथ खड़ा हुआ बातें कर रहा था….
प्रिन्स शिप्रा को आते हुए देख कर अपने दोस्तों से- देख बेटा सतीशने नया पंछी फास लिया, क्या गजब का माल है ये शिप्रा दिल तो करता है की यहि इसे नंगी करके इसकी चुत मे अपना लंड डाल दु….
प्रिन्स का दोस्त- अबे साले तुझे पता भी है ये कौन है, ये सतीश की बहन है और अगर उसे पता चल गया ना तो वो तेरी गांड फाड़ देगा….
प्रिन्स उसके गिरेबान को पकड़ कर- साले तमीज़ से बात कर वरना यहि तेरी माँ चोद दूँगा… और मुझे पता है की ये सतीश की बहन है तभी तो मे इसे अपने जाल मे फसा रहा हु, ताकि सतीश को भी पता चले की उसने कितने गलत बन्दे से पन्गा लिया है, इसको एक बार चोद लु फिर देखियो कैसे सतीश को अपने जूति तले रखुंगा….
उसका दूसरा दोस्त- भाई बहोत बढ़िया प्लान बनाया है तूने अगर ये फस गई तो सतीश को कण्ट्रोल करने की चाबी तेरे हाथ मे और फिर से कॉलेज पर अपना राज होगा….. पर भाई जब तू इसका रस चख ले तो थोड़ा हमे भी दे दियो चखने को….
प्रिन्स- है है ह…. सला आ गये अपनी औकात पर चिंता मत कर इसे तो मे बाजारू रंडी बना दूंगा इसकी वीडियो बना कर नेट पर दाल दूंगा तब उस हरामी को पता चलेगा की प्रिंस से टकराने का अन्जाम क्या होता है…. चलो अब तुम लोग खिसको वो यहा पहुचने ही वाली है….
शिप्रा जैसे ही प्रिंस के पास पहुचती है वो उसे एक बड़ी सी स्माइल देता है… पर शिप्रा उसकी और देखति भी नहि और उसके पास से होकर गुजर जाती है… प्रिंस की तो नीचे के बाल ही सुलग जाते है वो उसके पीछे आवाज लगाते हुए बढ़ता है….. और उसके पास आकर उसके हाथ को पकड़ लेता है, शिप्रा पलट कर उसकी तरफ देखति है..
प्रिन्स- क्या हुआ शिप्रा, नाराज हो क्या मुझसे, मे देख रहा हूँ की तुम मुझे इग्नोर मार रही हो, और मेरे आवाज देणे.पर भी तुमने नहि सुना….
शिप्रा अपना हाथ छुड़ाते हुये- देखो प्रिंस मुझे तुमसे कोई बात नहि करनी और आइन्दा मुझे रोक्ने की कोशिश मत करना वरना मुझसे बुरा कोई नहि होगा….
ओर शिप्रा आगे बढ़ जाती है, प्रिंस वहि खड़े उसे आवाज लगाते रहता है पर वो नहि रुकति….. प्रिंस के दोस्त जोकि ये सब बड़े ध्यान से देख रहे थे उसके पास आ जाते है…. और उसका एक दोस्त उसके कंधे पर हाथ रखते हुये- भाई चिड़िया तो उड़ गई फुर्र्र से…. अब तुम क्या करोगे?
प्रिन्स- बहुत पर निकल आये है साली के जरूर सतीश ने इसे मेरे खिलाफ भड़काया होगा…..
उसका दोस्त- भाई सतीश तो आपकी सोच से भी एक कदम आगे निकला अब आप उससे कैसे बदला लोगे…. और आपके हाथसे तो इतना मस्त आइटम भी निकल गया….
प्रिन्स- निकल के जायेगा कहा हमारे हाथ से हमे इस चिड़ियाँ के पर कुतरने ही पडेंगे…..
सतीश शिप्रा को लेने कॉलेज पहुचता है तो देखता है की शिप्रा बाहर कड़ी किसी ऑटो का वेट कर रही थि, सतीश उसके आगे बाइक लगा देता है
सतीश- लिफ्ट चाहिए????
शिप्रा उसे देख कर खुश हो जाती है और बाइक पर बैठते हुये- क्या भाई आज तुम्हे अपनी बहन की याद कैसे आ गई??
सतीश बाइक आगर
बड़ा देता है- याद आ गई मतलब…
शिप्रा- मतलब ये की आज तुम मुझे लेने कैसे आ गये, आज से पहले तो कभी नहि आये…
सतीश- खाली बैठा था सोचा की तुझे ही ले आउ…
शिप्रा उसकी कमर मे हाथ दाल कर उसे चिपकते हुये- थँक्स भाई…….
ऐसे ही ही नॉर्मली बात चित करते हुए दोनों घर आ जाते है…. घर आते ही सतीश को अपनी माँ से की गई बाटें ध्यान आ जाती है…
सतीश मन मे- यार पता नहि माँ के सामने कैसे मे वो सब कह गया, पता नहि क्या सोच रही होंगीं मेरे बारे में…. कैसे जाउँगा मे उनके सामणे….
जब्कि दूसरी तरफ सतीश के जाने के बाद सोनाली के चेहरे पर एक अलग ही चमक आ जाती है, सतीश की बाटें रह रह कर उसके जेहन मे गुंज रही थी… उसे तो अभी भी यकीन नहि हो रहा था की उसके बेटे को वो हॉट और सेक्सी लगती है….
सोनाली- मेरा बेटा मेरे बारे मे ऐसी सोच रखता है??? उसने ये सब क्याजुअली कह दिया था या फिर…. कहि वो मेरे बारे मे कुछ गलत सोच तो नहि रखता?? कही वो मेरी तरफ अट्रॅक्ट तो नहि हो रहा??? वो कह रहा था की मुझे देख कर जवान तो क्या बूढों का भी खड़ा हो जाए और जवान तो वो भी है इसका मतलब कही उसका मुझे देख कर खड़ा तो…. नहि… नहि ये मे क्या सोच रही हूँ मे उसकी माँ हूँ भला कोई बेटा अपनी माँ के बारे मे ऐसा सोच सकता है??? ये मेरा ही दिमाग है जो पता नहि क्या क्या गंदे विचार रख रहा है
ओर फिर वो ऐसे ही अपनी सोचो मे खो जाती है….
जो कुछ दिन पहले उसके साथ हुआ था
सोनाली चाय बनाती है और उन्हें कप में डालकर शिप्रा और सतीश के कमरो की तरफ चल देती है,..
सीढ़ियां चड़ते ही पहला रूम शिप्रा का पडता है, फिर उससे लगा हुआ रूम सतीश का और सतीश के रूम के सामने श्वेता का रूम था, पर उस पर अभी टाला लगा हुआ था… क्योकि श्वेता मुम्बई में रहकर अपनी स्टडी कर रही है…
ओर शिप्रा के जस्ट सामने एक कॉमन बाथरूम है, श्वेता के रूम से सटा हुआ,..
सोनाली शिप्रा के रूम में जाकर उसको जगाती है, शिप्रा थोड़ी देर तो कसमसाती है फिर उठ कर अपनी माँ को गुड़ मॉर्निंग बोल कर फ्रेश होने चलि जाती है.
.. सोनाली उसका कप टेबल पर रखकर सतीश के रूम की तरफ बढ़ जाती है…
सतीश अपने रूम में हसीन सपनो की दुनिया में खोया हुआ था… सोनाली सतीश का गेट खोलकर जैसे ही अंदर घुसती है उसकी आँखें फटी की फटी रह जाती हे… सामने सतीश पीठ के बल पूरा नंगा सोया हुआ था… और उसका लंड अपनी पूरी औकात में खड़ा हुआ था…. सोनाली तो उसका मूसल जैसा लंड देख कर अपने मुह पर हाथ रख लेती है उसे तो अपनी आँखों पर विस्वास ही नहीं हो रहा था…
सोनाली- “हे भगवान् किसी का इतना बड़ा भी होता है क्या”…?
लंड को देख कर उसकी साँसे फूलने लगती है और उसकी चुत गिली होने लगती है…
सोनाली- अपनी साड़ी( जो की उसने फ्रेश होने के बाद पहन ली थी ) पर से अपनी चुत को मसलते हुये- हे भगवान् ये मुझे क्या हो रहा है मेरी चुत, अपने बेटे का लंड देखके ही पाणी बहा रही है, ये सब गलत है ऐसा नहीं होना चहिये…
ओर इसी के साथ वो उसके रूम के डोर को बंद करके बाहर आ जाती है…
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Dm for incest chat
