Update – 12
गेट के बंद होने की आवाज सुनकर सतीश तुरंत अपनी आँखे खोल देता है… और बेड से उठ कर गेट लॉक करता है, और लैपटॉप खोलके उसपर लिसा अन्न की पोर्न मूवी देखने लगता है और शिप्रा के सोने का वेट करने लगता है…
सतीश उस मूवी को देख कर काफी एक्ससिटेड हो गया था क्युकी लिसा अन्न की उम्र सोनाली के उम्र की ही थी और जो लड़का उसको घोड़ी बना कर पीछे से उसकी चुत मे अपना मूसल पेल रहा था वो उसके बेटे की उम्र का लग रहा था, वो मूवी मे लिसा अन्न की जगह सोनाली को इमेजिन करने लगता है… और उस लड़के की जगह खुद को इमेजिन करते हुए अपनी माँ की कल्पनिक चुदाई का आनंद लेने लगता है….
अब सतीश इमेजिन करता है की कैसे वो अपनी मम्मी को घोड़ी बना कर अपना लंड पीछे से उसकी चुत मे कर रहा था…. सतीश अपना लंड टोपे तक बाहर निकाल कर वापस अंदर पेलकर उसकी चुदाई कर रहा था और साथ ही साथ उसके चूतडो को अपने पंजे से मसल रहा था…. फिर वो उसके चूतडो पर जोर जोर से थप्पड़ मारने लगता है और थप्पड़ मार कर उसके चूतडो को लाल कर देता है उसके हर थप्पड़ पर सोनाली के मुह से दर्द भरी सिसकारी फुट्ने लगती है…
अब सतीश धक्को को रोक कर अपने हाथ बड़ा कर सोनाली के बड़े बड़े बॉब्स दबाने लगता है… और उसकी पीठ पर अपनी जीभ फेरने लगता है….
थोड़ी देर तक उसके बॉब्स के साथ खेल्ने के बाद सतीश अपना लंड उसकी चुत से बाहर निकाल लेता है….
सोनाली तुरंत सीधी होकर उसके लंड को अपने मुह मे लेकर चुसना सुरु कर देती है… और थोड़ी देर मे ही चूसकर उसके लंड को साफ़ कर देती है…
सतीश उसके मुह से लंड को निकालता है और उसे धक्का देकर पीठ के बल लिटा देता है… और उसकी दोनों टांगों से पकड़ निचे की तरफ खीचता है अब सोनाली की चुत बिलकुल बेड के किनारे पर थी और उसके पैर बेड से निचे लटक रहे थे सतीश उसके एक पैर को उठा कर सीधा कर लेता है और उसकी चुत मे अपना लंड पेलकर उसकी धमाकेदार चुदाई करने लगता है… थोड़ी देर मे वो झड़ने के करीब आता है तो वो अपना लंड उसकी चुत से निकलता है और अपना लंड का सारा माल उसके दूध और पेट् पर झाड देता है…. सोनाली उसके माल को अपने दूध से उठा कर अपने मूह मे डालकर चाट लेती है और बाकी माल को अपने दूध पर रगड़ने लगती है….. सोनाली के दूध अब चमकने लगे थे…
उधर मूवी ख़तम हुई इधर सतीश का लंड जिसे वो अपने हाथ से हिला रहा था, ने भी अपना लावा उगल दिया जोकि उसकी बेडशीट पर गिरा… पर सतीश तो आनंद मे खोया हुआ था और जब उसे होश आता है तब वो देखता है की उसका माल उसके बिस्तर पर पड़ा हुआ था… वो तुरंत अपने रुमाल से उसे साफ़ करता है पर बेडशीट पर निशान पड़ चुका था…
सतीश- शीट यार आज ही तो नई बेडशीट डालि थी और आज ही…
सतीश अपना माल झड़ने के बाद जोकि उसकी बेडशीट पर ही गिरा था को अपने रुमाल से बेडशीट साफ़ करता है और फिर अपने लौडे को साफ़ करके उसे अपने शार्ट मे वापस दाल देता है, अब सतीश थोड़ा हल्का महसूश कर रहा था वो घडी की तरफ देखता है जोक ११:३० बजा रही थी
सतीश- ४० मीनट. हो गये शिप्रा को गए हुए यानी की शिप्रा अब तक सो गई होगी….
ओ बेड से उठता है और फिर धीरे से अपना डोर खोल कर बाहर आ जाता है नीचे जाने से पहले वो शिप्रा का डोर चेक करता है जोकि अंदर से लॉक्ड था…
सतीश- लगता है सो गयी…
ओर फिर वो सीडियों से निचे उतरता है तो देखता है की उसके माँ के कमरे की लाइट ओपन थी…
सतीश- लगता है माँ चालू हो गये…
ओर वो धीरे धीरे उनके गेट की तरफ बढ्ने लगता है… जैसे ही वो गेट के नजदीक पहुचता है उसे सिसकारियों की आवाज आने लगती है…
ओर गेट पर पहुचते ही उसके सामने जन्नत का नजारा था….
उसकी माँ यानी की सोनाली बेड पर अपना सर तकिये पर टिकाये नंगी लेटी हुई थी और उसका एक हाथ अपने बॉब्स को मसल रहा था और दूसरे हाथ से वो डिलडो को अपनी चुत मे अंदर बाहर कर रही थी…
उसका बदन एकदम संगेमरमर की तरह चमक रहा था और उसके सेक्सी बदन को और उसकी एक्टिविटी को देख कर सतीश का लंड फिर से उसके शार्ट मे खड़ा हो जाता है….
उधर अब सोनाली अपना हाथ दूध से हटा कर अपनी क्लीट को सहलाने लगती है… सोनाली अपनी सिस्कियों को रोक्ने की भरपूर कोशिश करती है ताकि सतीश और शिप्रा तक उसकी आवाज न पहुचे…. पर फिर भी उसके मुह से सिसकारी फुट रही थी….
सतीश अपने लंड को बाहर निकालकर सहलाते हुये…. आह माँ आप क्या माल हो ये आपको भी नहि पता तभी आप इतना तड़प रही हो वरना आपको इतना तडपना नहि पडता अपनी प्यास बुजाने के लिये….
ह.दी.- भोसडी के यहि खड़ा अपना हिलाते रहियो तु… और तेरी माँ किसी और से चुदवा बैठेगी…
सतीश- नही यार फिर से नहि,
ह.दी.-क्या फिर से नहि बे…
सतीश- तू ऐसे बार बार मुझे डिस्टर्ब नहि कर सकता…
ह.दी.- हरामखोर मे तुझे डिस्टर्ब नहि करता हूँ बल्कि तुझे सच्चाई से और लंड की ख्वाहिश तुजसे जाहिर करता हु… और तेरा लंड इस समय इसकी चुत की गहराई नापना चाह रहा है…. और तू भोसडी के यहा अपना लंड हिला रहा है….
सतीश- तो कर भी क्या सकता हूँ सतीश….
ह.दी.- जाकर अपना लंड पेल दे अपनी माँ की चुत मे और बनजा मादरचोद और इस समय वो इतनी गरम है की बड़ी आराम से तेरा लंड ले लेगी….
सतीश- भोसडी के तू सोचता कहा से है…
ह.दी.- जहा से तू नहि सोचता…
सतीश- जरूर तू लंड से ही सोचता है… पर मुझे तेरी इस बकवास से कोई मतलब नहि…
ह.दी.- ह…
इस पहले की ह.दी. कुछ कह पता सतीश- और हाँ अब मुझे डिस्टर्ब मत कर और मुझे लाइव शो देखने दे…
ओर सतीश वापस अपने लौडे को हिलाते हुए अपनी माँ का लाइव शो देखने लगता है….
सोनाली अपने एक हाथ से अपनी क्लीट को सहलाते हुये अपने दूसरे हाथ से डिलडो अंदर बाहर करती है… और धीरे धीरे उसकी स्पीड बढ्ने लगती है और थोड़ी देर मे ही उसका शरीर अकड जाता है और उसकी कमर बेड से ऊँची उठ जाती है और उसकी चुत सारा पानी बहा देती है… और उसकी कमर वापस बेड से टिक जाती है उसकी चुत अभी भी रस बहा रही थी….
थोड़ी देर मे ही सोनाली बेड से उठती है और बाथरूम मे चलि जाती है… इधर पता नहीं सतीश को क्या सूझता है वो सोनाली के बाथरूम मे जाते ही अंदर उसके बेड के पास पहुच जाता है और बेड पर पड़े सोनाली की चुत के रस के पास अपनी नाक ले जाकर उसे सूंघता है…
सतीश जैसे ही सांस अंदर खीचता है उसके चुत के रस की खुशबू उसके नथुनो से होते हुए अंदर तक पहुच जाती है और वो मदहोश होने लगता है
सतीश- आह… क्या मदहोश कर देणे वाली खुसबू है, ऐसी खुसबू तो मैंने आज तक नहि सुंघी….
ओर सतीश अपनी जीभ निकाल कर उस बेड शीट पर पड़े रस को चाटने लगता है, उसकी मधहोशी पल पल बढ़ती जा रही थी…
सतीश- क्या स्वाद है माँ की चुत के रस का….
ओर वो किसी कुत्ते की तरह अपनी जीभ निकालकर ज्यादा से ज्यादा रस बेडशीट से चाटने की कोशिश करने लगता है….
तभी उसके कान मे बाथरूम का गेट खुलने की आवाज आती है सतीश हडबडा जाता है उसके पास बाहर निकलने का वक़्त नहि था वो हड़बड़ाहट मे बेड के निचे छुप जाता हैसतीश की धड़कने बहुत तेज हो गई थी वो बेड के निचे से झांक कर देखता है की सोनाली नंगी ही बाथरूम से बाहर आ गई थी और फिर वार्ड रॉब से अपनी नाइटी जोकि रेड कलर की थी को निकाल कर पहन लेती है, नाइटी पूरी तरह से पारदर्शी थी और उसके थाय तक ही आ रही थी और ऊपर उसके आधे से ज्यादा दूध नाइटी से बाहर झलक रहे थे…
डर के मारे सतीश का जो लंड सिकुड गया था अब वो पूरी तरह से खड़ा हो चुका था…
ओर उधर सोनाली नाइटी पहनकर लाइट्स ऑफ करती है और नाईट लैंप ऑन करके अपने बिस्तर पर लेट जाती है…
ओर इधर बेड के निचे सतीश बेचारा बुरी तरह फास गया था…
सतीश- यार कहा फस गया आज, वो तो अच्छा हुआ माँ की नजर नहि पड़ी मुझ पर वरना आज तो लौडे लग जाने थे…
ओर अब तो मे जा भी नहि सकता जब तक माँ नहि सो जाती…
सतीश निचे पड़े पड़े ही सोनाली के सोने का वेट करने लगता है… ३० मीनट. बाद सतीश बेड के निचे से निकलता है… अभी वो बाहर की तरफ निकलने वाला था की उसकी नजर सोनाली पे पड़ती है, सोनाली पीठ के बल सो रही थी और सोटे हुए बहुत सेक्सी लग रही थी उसकी नंगी चिकनी टाँगे देख कर सतीश का मन डोलने लगता है वो वापस बेड के किनारे आकर बैठ जाता है और नाईट लैंप की हलकी रौशनी मे अपनी आधी नंगी सोती माँ को देखने लगता है….
सोनाली की नंगी चिकनी टाँगे देख कर उसका लंड पूरी तरह अकड जाता है और उसका मन सोनाली की टाँगो को छूने को मचलने लगता है….
ओर सतीश हिम्मत करके अपना हाथ सोनाली की टाँगो पर रख देता है और फिर अपने हाथ को वहि रख कर अपनी माँ की तरफ देखता है, वो गहरी नींद मे थी उसे सोता देख सतीश की हिम्मत बढ़ जाती है और वो अपने हाथ को अपनी माँ की टांगो पर नीचे से ऊपर की तरफ बडाने लगता है अपनी माँ के मख़मली टांगो पर हाथ फिराते हुए उसके पूरे बदन मे सिहरन सी दौड जाती है वो सोनाली की टाँगो पर हाथ फिराते हुए घुटने तक ले आता है… घुटने पर अपने हाथ को रोक कर वो फिर से सोनाली की तरफ देखता है वो अभी भी नींद मे थी… अब सतीश की हिम्मत और बढ़ गई और सतीश अपने दोनों हाथ उसके पैरो पर रख कर उनके घुटनो को.सहलाने लगता है और फिर अपने होंठ उसकी नंगी टाँग पर रख कर निचे से घुटनो तक उसकी टाँग को चूमता है अब वो अपने हाथो को घुटने से आगे बड़ा कर उसकी जाँघ पर रख देता है….
उसे बहोत सुखद अनुभव हो रहा था उसकी मख़मली जाँघो को छूते हुये, सतीश अपनी माँ के शरीर की गर्मी को उनकी जाँघो से ही महसूश कर रहा था….
सतीश अपने माँ की जाँघों पर अपने होंठ रख देता है… और फिर उसे किस करते हुए ऊपर की और बढ्ने लगता है…. और ऐसा ही वो दूसरे को किश करते हुये ऊपर बढ़ता है….
अब सतीश बेड पर अपनी माँ के पैरो के दोनों और अपने घुटने टेक कर बैठे हुये था और उनकी जाँघो को सहला रहा था… अब उसके दोनों हाथ जाँघो पर फिसलते उसकी नाइटी तक पहुंच गए सतीश वहा पर अपनी माँ की चुत की गर्मी को महसूश कर सकता था यानी की उसकी माँ की चुत उससे थोड़ी दूरि पर ही थी पर बीच मे नाइटी दिवार बनकर खड़ी थी उसने हिम्मत करके नाइटी को कमर तक खिसका दिया और अब उसके सामने जन्नत का द्वार था उसकी माँ की चिकनी चुत उसकी आँखों के सामने थी जिसे वो नाईट लैंप की रौशनी मे अच्छे से देख सकता था, जिस चुत ने उसे पागल बना दिया था अब वो उसके सामने थी उसके थोड़ी ही दूरि पर….
सतीश अपने चेहरे को उसके चुत के करीब ले जाता है बहुत करीब और फिर एक गहरी सांस लेकर उसकी चुत की स्मेल को अपने अंदर खींचता है, सतीश का लंड झटके मारने लगता है…
सतीश अपनी माँ की चुत की गर्मी को अपने चेहरे पर अच्छे से महसूश कर रहा था उसका मन तो कर रहा था की वो आगे बड़कर अपनी माँ की चुत को अपने मुह मे भर ले पर वो बड़ी मुस्किल से अपने पर कण्ट्रोल करके अपने चेहरे को जाँघो के बीच से हटा लेता है और ऊपर सोनाली के चेहरे की तरफ बढ़ जाता है, सोनाली गहरी नींद मे थी सतीश उसके चेहरे को देखता है वो किसी एंजेल.की तरह लग रही थी सतीश उसके होंठो की तरफ देखता है बिना किसी लिपस्टिक के ही उसके होंठ काफी गुलाबी थे सतीश अपने पर कण्ट्रोल नही कर पाता और उसके होंठो पर अपने होंठ रख देता है और तुरंत ही हटा लेता है…
सतीश सोनाली के गुलाबी होंठो पर अपने होंठ रख देता है और तुरंत ही अपने होंठ हटा लेता है, सतीश का मन तो कर रहा था की उसके होंठो को अपने होंठो मे लेकर चुस लु पर उसकी हिम्मत नहि हो रही थी क्युकी उसकी इस हरकत से सोनाली जाग सकती थी…
सतीश सोनाली के होंठो पर २-३ छोटी किस करता है, और फिर उसकी गर्दन पर किश करते हुए नीचे आता है अब सतीश की नजर सोनाली के नाइटी से बाहर झलकते हुए चूचियों पर पड़ती है सतीश का मन सोनाली की चूचियों को नंगा देखने को मचलने लगता है, सतीश हिम्मत करते हुए उसकी नाइटी मे अपनी उँगलियाँ फसा देता है और उसकी नाइटी को चूचियों पर से निचे खिसकाने लगता है ये सब करते हुए सतीश की नजर सोनाली पर ही टीकी हुई थी…
उसकी मेहनत रंग लाती है और थोड़ी देर मे ही सोनाली की चूचियां सतीश के सामने नंगी थि, सतीश तो उन्हें देखते ही रह जाता है सोनाली की चूचियां वेल शेप्ड और एकदम गोरी थी…. इस उम्र मे भी सोनाली ने अपने फिगर को काफी अच्छे से मेन्टेन कर रखा था…. सतीश उसकी चूचियों पर अपने हाथ रख देता है अपनी माँ की मख़मली चूचियों के एहसाश से उसके मुह से सिसकि निकल जाती है….
सतीश- आह्हः माँ क्या माल हो आप, दिल तो करता है की आपकी चूचियों को अपने हांथो मे लेकर मसल दू और आपकी निप्पल्स को मुह मे लेकर चुसू और काटु….
सतीश अपनी माँ की चूचियों पर अपने हाथ हलके हलके फेरने लगता है इस समय सतीश जैसे जन्नत की सैर कर रहा था….
अब वो उसकी दोनों चूचियों पर अपने होंठो से चूमने लगता है और अपने अंगूठो से निप्पल्स को रब करने लगता है और ये सब वो बहुत ही आराम से कर रहा था और बीच बीच मे सोनाली की तरफ भी देखता की कही उसकी माँ की नींद न तूट जाए….
काफी देर तक किश करने के बाद सतीश अपनी जीभ से उसकी दोनों चूचियां बारी बारी से चाटने लगता है… और चूचियों चाटने के बाद वो सोनाली के निप्पल्स को अपने मुह मे लेकर चुस्ने लगता है थोड़ी देर तक चुस्ने के बाद वो दूसरे निप्पल को अपने मुह मे भर कर चुस्ने लगता है सतीश इतना एक्ससायटेड हो जाता है की वो भूल जाता है की वो कहा और किसके साथ ये सब कर रहा है और निप्पल को हलके से बाईट कर लेता है, उसकी इस हरकत से सोनाली कसमसा उठती है सतीश तुरंत ही बेड से निचे उतार कर उसके निचे छुप जाता है जबकि ऊपर सोनाली हलकी सी कसमसा कर अपनी करवट बदल कर लेट जाती है उसकी नींद अभी भी नहि टुटी थी ऐसा लगा था जैसे आज वो काफी समय बाद इतने सुकून की नींद ले रही हो….
बेड के निचे छुपे सतीश की तो फट कर मुह को आ गई थी उसने सोचा की आज तो उसकी वाट लगनी तय है और डैड तो उसे घर से ही निकल देंगे अगर उन्हें पता चला तो… पर जब वो काफी टाइम तक बेड पर कोई हरकत नहि देखता तो बेड के निचे से बाहर निकल कर देखता है तो उसे अपनी माँ को सोता देख सुकून मिलता है और सोनाली का चेहरा उसकी तरफ ही था और उसके दोनों चूचियां लटक रही थी… और निचे से उसकी नाइटी कमर से भी ऊपर हो गई थी….
ये सीन देख कर सतीश की आँखों मे फिर से हवस के कीड़े रेंगने लगते है, और वो उठ कर सोनाली के नंगे पैरों पर हाथ फिराते हुए ऊपर की तरफ बढ़ते हुए उसकी गांड तक पहुच जाता है सोनाली की मोटी गांड अब उसकी आँखों के सामने थी सतीश उसकी गांड देख कर पागल हो जाता है, मोटी और बड़ी गांडो का तो दीवाना था सतीश, वो बेतहाशा सोनाली की गांड को चूमने लगता है और उसकी गांड को हलके हाथ से मसलने लगता है… उसकी गांड को नंगी देख कर उसपर एक पागलपन सवार हो गया था और उसका लंड उसके शार्ट मे खड़े खड़े दर्द करने लगा था सतीश अपने लंड को बाहर निकाल कर सोनाली के पीछे लेट जाता है और अपना लंड उसकी गांड के पट्टो के बिच मे फसा देता है और धीरे धीरे घस्से मारने लगता है… सतीश अब जन्नत की सैर कर रहा था वो अपना एक हाथ आगे बड़ा कर उसके बॉब्स पर रख देता है और धीरे धीरे उन्हें सहलाने लगता है….
धीरे धीरे सतीश की स्पीड बढ्ने लगती है और वो अपनी कमर को तेजी से आगे पीछे करना लगता है उसका मुसल लंड गांड के बीच मे से होते हुए उसकी चुत से टकरा रहा था…
सतीश को ऐसा लग रहा था जैसे वो सच मे अपनी माँ की गांड मे लंड दाल के तेजी मे पेल रहा है, उसके आनंद की तो कोई सीमा ही नहि थी….
उसका लंड अब तेजी से गांड के बिच मे से होते हुए उसकी माँ की चुत पर ठोकर मार रहा था जिससे उसकी चुत पनिया गई थि, सोनाली की चुत इतना पानी बहा रही थी की सतीश का लंड टोपे तक उसके चुत के पानी से भीग गया था…. सतीश अपने लंड को गांड मे घस्से मारते हुए उसकी चूचियों को अपने हाथ से मसल रहा था
सतीश को ऐसा लग रहा था जैसे वो सच मे अपनी माँ की गांड मे लंड दाल के तेजी मे पेल रहा है, उसके आनंद की तो कोई सीमा ही नहि थी….
उसका लंड अब तेजी से गांड के बिच मे से होते हुए उसकी माँ की चुत पर ठोकर मार रहा था जिससे उसकी चुत पनिया गई थि, सोनाली की चुत इतना पानी बहा रही थी की सतीश का लंड टोपे तक उसके चुत के पानी से भीग गया था…. सतीश अपने लंड को गांड मे घस्से मरते हुए उसकी चूचियों को अपने हाथ से मसलने लगता है….
इधर सोनाली अपने सपने मे – आह आह उफ़्फ़फ़ डार्लिंग और जोर से हाँ ऐसे ही करते रहो बहोत अच्छा लग रहा है और जोर से दबाओ आह्ह्ह्ह….
सतीश को समझते देर नहि लगती की उसकी माँ सपने मे डैड से चुद रही है जबकि हक़ीक़त ये थी की उसका बेटा खुद उसे पेल रहा था….
सतीश अब अपनी स्पीड और तेज कर देता है उसका लंड तेजी मे उसकी गांड के बीच से होता हुआ उसकी चुत से टकरा रहा था…
अनजाने मे ही सही पर सोनाली भी इस सबका मजा ले रही थी….
अब सतीश के धक्के और तेज होने लगे थे और वो झड़ने के करीब पहुच गया था की तभी डोर बेल्ल बजती है,
सतीश हडबडा कर अपनी माँ से अलग होता है और तेजी से अपने शॉर्ट्स को ऊपर चड़ा कर गेट की तरफ बढ़ जाता है क्युकी वो दर रहा था की डोरबेल के बार बार बजने से उसकी माँ की आँख खुल सकती थी जोकि वो नहि चाहता था…. वो समझ गया था की गेट पर डैड हैं क्युकी इस समय किसी और के होने का तो चांस ही नहि बनता….
ओ तेजी मे गेट पर पहुच कर गेट को ओपन करता है… बाहर उसके डैड जोकि पूरी तरह नशे मे धुत्त थे और उनका दोस्त दुश्यंत रोज की तरह उन्हें छोड़ने आया था पर आज सतीश को गेट खोलता देख कर उसके सोनाली से मिलने और उसकी एक सेक्सी झलक पाने के अरमाओ पर पानी फिर चुका था वो अविनाश को सतीश को सौपते हुये- हेलो बेटा हाउ आर यु??
सतीश-ठीक हु अंकल और आप?
दुश्यंत- मि टू बेटा और आज मम्मी नहि आई तुम्हारी?
सतीश- माँ की तबियत ठीक नहि है इस्लिये आज वो जल्दी सो गयी…
फिर दुश्यंत उसको गुड नाईट बोलकर चला जाता है और सतीश अपने डैड को उनके बैडरूम मे ले आता है और एंटर होते ही देखता है की उसकी माँ ने फिर से करवट बदल ली है और अब वो पीठ के बल लेट कर सो रही थी…
सतीश अपने डैड को जोकि बेहोषी की हालत मे थे बेड पर साइड पे लीटा देता है और लाइट ऑन करके अपनी माँ के सुन्दर बदन को निहारने लगता है काफी टाइम तक अपनी माँ का चक्षु चोदन करने के बाद सतीश अपने डैड के शूज और शॉक्स उतार देता है…
ओर फिर लाइट्स ऑफ करने के बाद अपने खड़े लंड को हल्का करने के लिए वो वापस बेड पर आ जाता है और अपनी माँ के पैरो को थोड़ा सा फैला देता है अब सोनाली की चूत खुल कर उसके सामने आ जाती है…. सतीश देर न करते हुए उसकी चुत पर एक किस्स करता है और फिर अपने लंड को बाहर निकाल कर उसके चुत पर रख कर मिशनरी पोजीशन मे उसके ऊपर आता है पर उसकी बॉडी पर अपना वेट नहि ड़ालता और ऊपर से ही उसकी चुत पर घिसाई करने लगता है थोड़ी देर मे ही सोनाली की चुत पानी बहाना सुरु कर देती है और सतीश को धक्के लगने मे आसानी हो जाती है इस समय उसका मजा दोगुना था क्युकी वो अपनी माँ की चुत पर लंड से धक्के लगा रहा था और उसका बाप उसकी माँ के बगल मे लेटा हुआ था इस बात से एक अलग ही रोमाँच आ रहा था उसके अंदर…. और वो इसको ज्यादा बरदास्त नहि कर पाता और झड़ने के करीब पहुच जाता है झड़ने से पहले ही वो अपने लंड का टोपा सोनाली की चुत मे अंदर कर देता है और टोपे के चुत मे घुसते ही वो अपना सारा रस उसमे उडेल देता है….
हल्का होने के बाद सतीश अपना टोपा जोकि चुत के होंठो मे फसा हुआ था को बाहर निकलता है और उसे अपनी माँ की थाय पर रगड कर साफ़ करके अपने शार्ट मे दाल कर रूम बाहर निकल जाता है और अपने कमरे मे चला जाता है उसे तो यकीन ही नहीं हो रहा था की उसने ये सब किया तो किया कैसे….
ओ इस बात के बारे मे ज्यादा न सोचते हुए फुल नुड हो जाता है और जानबूझकर अपना दरवाजा खुला छोड़ देता है ताकि अगर उसका शक सही है की उसकी माँ ने उसका लौडा देख लिया है तो वो फिर से देखेंगी… वो अपने मोबाइल मे सुबह ६ बजे का अलार्म लगता है ताकि वो उठ कर अपनी माँ के एक्सप्रेशन देख सके सोने की एक्टिंग करते हुये….
सतीश बेड पर लेट जाता है और थोड़ी देर मे ही नींद के आग़ोश मे चला जाता है….
सूबह जब सोनाली की आँख खुलती है तो वो अपनी हालत देख कर शॉकेड रह जाती है, वो अपने पास अपने पति को लेटा देख कर….
सोनाली अपने आप से बुड़बुड़ाते हुये- ये किस टाइम आ गए इन्होने तो आने को मना कर दिया था इस्लिये मे स्लीपिंग पिल्स लेकर सो गई थि, जरूर इन्होंने मेरी ये हालत होगी क्युकी अपने आप तो बॉब्स नाइटी से बाहर आ नहि सकते….
सोनाली अब अपनी चुत की तरफ देखति है उसे चुत के निचे की चादर पर पड़े निशान दिखाइ देते है….
सोनाली अपने आप से- लगता है कल मेरी चुत ने काफी पानी बहाया है पर ये निशान तो वीर्य के लग रहे है, जरूर अविनाश ने ट्राय करा होगा और हर बार की तरह चुत की गर्मी से बाहर ही अपना माल झाड़ दिया होगा, इस नशे की लत ने तो इन्हे कही का नहि छोडा पहले हम साथ मे कितना एन्जॉय करते थे और अब तो ये आते ही बिस्तर पर लेट जाते है और कभी ट्राय भी करते है तो कुछ करने से पहले ही झड जाते है….
सोनाली बिस्तर से उठ कर बाथरूम मे फ्रेश होने चलि जाती है… आज उसने काफी अच्छी नींद ली थी जिसका असर उसके चेहरे से पता चल रहा था वो काफी फ्रेश लग रही थि, थोड़ी देर मे ही सोनाली फ्रेश होकर वाशरूम से बाहर निकलती है और सबके लिए टी बनाने के लिए किचन मे चलि जाती है….
ईधर सतीश के रूम मे ६ बजे अलार्म बजता है, अलार्म की आवाज से सतीश की नींद तूट जाती है और वो उठ कर अलार्म बंद करता है और फिर बिस्तर पर लेट जाता है, सतीश बेसब्री से अपनी माँ का इन्तजार कर रहा था… और थोड़ी देर मे ही उसके इन्तजार की घडी ख़त्म होने वाली थी क्युकी सोनाली कप्स मे चाय डालकर उसके रूम की तरफ ही बढ़ रही थी…..
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