घर की प्यासी बुर – Update 11 | Family Sex Story

घर की प्यासी बुर - Pariwarik Chudai Ki Kahani
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Update – 11

शिप्रा अपने रूम मे पहुच कर सतीश का नम्बर मिलाती है पर वो स्विच ऑफ था, फ़ोन रखते हुये- पता नहि कहा गया होगा भाई… सुबह से भूखा है मेरी वजह से…. पता नहि कोण से दोस्त के यहाँ गया होगा….

ऎसे ही काफी देर तक वो अपने विचारों मे खो जाती है फिर अचानक उसकी आँखों मे एक चमक आ जाती है और वो तुरंत अपना मोबाइल उठा कर एक नम्बर. डायल करती है…

दूसरी तरफ सागर के घर मे भारती अपने रूम मे बैठि हुई थी और वो अभी भी सतीश और सागर के सिगरेट पिने से ग़ुस्से मे थी…

तभी उसका मोबाइल बजने लगता है वो जब उसे उठा कर देखति है तो उसके चेहरे पर एक स्माइल आ जाती है… और वो फ़ोन पिक करके

भारती- तो इतने समय बाद राजकुमारी को इस गरीब की याद आ ही गयी…

दूसरी तरफ से- आरे यार तुझे भूलि ही कब थी जोकि तुझे याद करति… वैसे एक बात बताओ महारानी जी याद तो आप को भी नहि आई इस नाचीज की…

ये फ़ोन किसी और का नहि बल्कि शिप्रा का ही था, शिप्रा और भारती काफी अछि फ्रेंड थी और शिप्रा जानती थी की सतीश और भारती एक दूसरे को प्यार करते है और उसका बेस्ट फ्रंड सागर भारती का ही भाई है इस्लिये वो ज्यादातर इन्ही के यहां आता था क्युकी इस तरह वो अपने बेस्ट फ्रंड से और अपने प्यार दोनों से मिल लेता था, और उसका गेस सही भी था…

भारती उसकी बात सुनकर हस्ते हुये- दोनों भाई बहन एक ही डायलॉग मारते है…. इसके अलावा कोई और डायलॉग नहि आता क्या?

शिप्रा- अरे डार्लिंग आते तो बहुत है पर हर बन्दे के हिसाब से डायलॉग मारे जाते है ताकि उस बन्दे को अपनी बातो से झांसे मे लिया जा सके… अब तू ही देख मेरा भाई भी तुझे यहि डायलॉग मारके पटाता है और मे भी और तू एक ही डायलॉग से दो लोगो के झांसे मे आ गयी….

भारती- मैं किसी के झांसे मे नहि आई और तू यहां होती तो तुझे ये बात अच्छे से समझ आ जाती जब मेरा हाथ की उँगलियाँ तेरे गालो की शोभा बढाती…

शिप्रा- बड़ी आई मेरे गालो की शोभा बढ़ाने वाली…. मैं क्या फिर तुझे छोड़ देती…

ओर फिर दोनों हस् देती है

भारती- वैसे आज कैसे याद आ गई हमारी

शिप्रा- क्यों ऐसे ही याद नहि कर सकते क्या?

भारती- कर तो सकती है पर तेरी आवाज से से चिंता झलक रही है जल्दी बता क्या बात है

शिप्रा- वो यार मैंने ये पुछने के लिए फ़ोन किया था की भाई तेरे यहाँ है क्या?

भारती- हाँ है तो, क्यों क्या हुआ?

ओर फिर शिप्रा उसे सारी बात बताती है….

शिप्रा- … और फिर वो बिना कुछ खाए घर से निकल आये इस्लिये थोड़ी टेंशन थी की पता नहि उन्होंने कुछ खाया भी होगा की नहि…

भारती- अब तुझे टेंशन लेने की कोई जरुरत नहि है और थँक्स यार मुझे बताने के लिए की सतीश ने कुछ खाया नहि है….

शिप्रा- थँक्स तो मुझे बोलना चाहिए तुझसे की तूने मेरी प्रोबलम सोल्वे कर दि…

भारती- चल ठीक है मे थोड़ी देर मे तुझसे बात करती है….

ओर फिर भारती कुछ सोच्ने लगती है, उसके माथे पर शिकन थि, जिससे पता चल रहा था की वो किसी बात से परेशान है, फिर वो अपने सर को झटका देकर किचन की तरफ बढ़ जाती है….

दूसरी तरफ शिप्रा भी अब थोड़ा टेंशन फ्री हो गई थी… क्युकी उसे पता था की जितनी केयर वो अपने भाई की करती है उतनी केयर ही भारती करती है और वहां पर सतीश का मूड भी फ्रेश हो जायेगा…

थोड़ी टेंशन कम होते ही अब शिप्रा को भूक लगने लगी थी वो खाना खाने निचे चलि जाती है…

इस तरफ शिप्रा भी अब थोड़ा टेंशन फ्री हो गई थी… क्युकी उसे पता था की जितनी केयर वो अपने भाई की करती है उतनी केयर ही भारती करती है और वहां पर सतीश का मूड भी फ्रेश हो जायेगा…

थोड़ी टेंशन कम होते ही अब शिप्रा को भूक लगने लगी थी वो खाना खाने निचे चलि जाती है…

इधर सतीश को भूक तो बहुत तेज की लगी थी पर वो करता भी क्या आज फर्स्ट टाइम था जब वो सागर से कुछ कहने मे झिजक रहा था…

ओर सागर को लग रहा था की उसे शिप्रा की चिंता सता रही है… दोनों ही अब नॉर्मली बात चीत कर रहे थे…

तभी भारती सागर को आवाज लगाती है… और सागर सतीश से वेट करने को कहकर निचे आ जाता है…

सागर की फट रही थी वो सोच रहा था की भारती ने उसकी क्लास लेने के लिए उसे बुलाया है….

ओ भारती के पास पहुचता है तो भारती उसे घुरने लगती है, सागर अपनी नजरे चुराने लगता है..

भारती- तुम्हे कुछ पता भी है की नहि,

सागर- क्या?

भारती-यही की तुम्हारा दोस्त आज सुबह से भूखा है, और तुमने उससे खाने को पूछा भी नही…

सागर- अब मुझे कैसे पता चलता उसे कुछ चाहिए होता है तो वो खुद ही मांग लेता.. पर तू इतने यकीन से कैसे कह सकती है…

भारती- शिप्रा ने बताया मुझे फ़ोन करके… मे खाना लगा देती हु तुम सतीश को बुला लो….

सागर अपने कमरे मे जाकर पहले तो सतीश को सुनाता है क्युकी उसने सागर से ये छुपाया की वो आज सुबह से भूखा है…. और फिर उसे लेकर डायनिंग टेबल पर आकर बैठ जाता है….

सतीश के बैठते ही भारती उसे खाना लगाती है और वो भारती को ही देख रहा होता है, उसे भारती की आँखों मे ग़ुस्से की जगह अपने लिये प्यार और केयर के मिले जुले भाव नजर आ रहे थे…

सतीश के जिद करने पर सागर और भारती न चाहते हुए भी खाना खाने बैठ जाते है..

खाना ख़तम करके सतीश और सागर अपने हैंड वाश करने चले जाते है और भारती बर्तन समेट्ने लगती है….

पहले भारती बर्तन साफ़ करने के बाद सागर के पास आकर बैठ जाती है और फिर तीनो हसि मजाक करने लगते है और अपने बचपन की यादो को ताजा करने लगते है…

टाइम धीरे धीरे कटता जाता है और कब ८ बज जाते है पता ही नहि चलता…

भारती- सतीश अब काफी लेट हो गया है मेरे ख्याल से अब तुम्हे घर जाना चाहिये….

सागर कुछ बोलने को होता है पर भारती उसे इशारे से चुप रहने को कहती है… अब सतीश का मूड भी फ्रेश हो गया था और अब वो अच्छे से सोचने समझने लायक हो गया था, ग़ुस्से ने तो जैसे उसके दिमाग को जाम कर दिया था…

ओर वो जानता था की भारती उससे उसके भलाई के लिए कह रही थी…. वो जाने के लिए खड़ा हो जाता है….

भारती- और सतीश अपना मोबाइल ऑन कर लेना…

सतीश भारती की तरफ देखता है और फिर एक स्माइल के साथ अपने मोबाइल को निकालकर ऑन करता है और फिर उसे अपनी जेब के सुपुर्द करता है…

अब सतीश भारती और सागर को फिर मिलने का कहकर अपने घर की तरफ निकल देता है…

तीस मिनट्स मे सतीश अपने घर पहुच जाता है, बाइक कड़ी करके वो डोर बेल्ल बजाता है… डोर शिप्रा ने ओपन किया था…

शिप्रा कुछ कहने के लिए मुह खोलती है, पर सतीश उसके साइड से होते हुए अपने रूम की तरफ बढ़ जाता है…

शिप्रा डोर लॉक करके- आरे भय्या सुनो तो…

शिप्रा सतीश के पीछे पीछे उसके रूम मे पहुंच जाती है….

शिप्रा- आई एम सॉरी भइया…

सतीश- मे थक गया हूँ मुझे आराम करने है…

शिप्रा- पर भेया…

सतीश-पर वर कुछ नही…

शिप्रा वहि खड़ी रहती है उसकी आँखे अब नम हो चुकी थी…. और उसकी आँखों से आँसु बहने लगते हैं वो सतीश से बहुत कुछ कहना चाहती थि, पर कुछ कह नहि पाती और वहि खड़े आँसु बहाने लगती है….

सतीश जब गेट की तरफ देखता है तो शिप्रा को रोता हुआ देख वो तुरंत उसके पास आकर उसके कन्धो को पकड़ते हुये

सतीश- अरे पगली तू रो रही है….

शिप्रा उसके गले लगते हुये- प्लीज् भाई मुझे माफ़ कर दो मे जानती हूँ की मैंने आपका दिल दुखाया है, पर आगे से ऐसा नहि होगा और अब मे प्रिंस से भी नहि मिलूँगी पर प्लीज् आप मुझसे नाराज मत होना……

सतीश ने तो सोचा भी नहि था की प्रिंस नाम की प्रॉब्लम से इतनी जल्दी छुटकारा मिल जाएगा,

सतीश- अरे पगली मे तुझसे नाराज नहि हु… वो तो मे थक गया था इस्लिये तेरे से बात नहि कर रहा था…….

शिप्रा सुबकते हुये- सच कह रहे हो ना…

सतीश- एकदम सच्… भला मे तुझसे झुट क्यों बोलूंगा… चल अब टेसुए बहाने बंद कर और अपना मुह धोले जाकर….

शिप्रा उससे अलग होकर अपने रूम मे चलि जाती है और सतीश भी अपना लैपटॉप खोल कर बैठ जाता है…. थोड़ी देर मे ही सोनाली उनको खाने के लिए बुला लेती है.. सतीश जब निचे पहुचता है तो खाने की टेबल पर सोनाली और शिप्रा उसका वेट कर रही थी….

सतीश जैसी ही वह पहुचता है सोनाली उससे सवालो की झड़ी लगा देती है वो चुपचाप उनके जवाब देता है और फिर सब लोग भोजन करके अपने अपने रूम मे चले जाते है…

आज सतीश की आँखों मे नींद नहि थी वो तो बस शिप्रा के सोने का वेट कर रहा था क्युकी उसे आज रात का हॉट लाइव शो देखना था और उस पल के बारे मे सोच कर उसका लंड अभी से जोर मार रहा था……

पर तभी उसके डोर पर नॉक होती है जिससे वो ख्ययालो की दुनिया से बाहर आ जाता है…

सतीश घडी की तरफ देखता है जिसमे १० बज रहे थे- इस समय कोण होगा….

ओर सतीश बेड से उठ कर डोर खोलने के लिए बढ़ जाता है और गेट खोलते ही उसे अपना प्लान चोपट होता हुआ नजर आता है….

गेट खोलते ही सतीश का सारा प्लान चोपट हो जाता है, सामने शिप्रा खड़ी हुई मुस्कुरा रही थी….

सतीश- तू सोयी नहि अभी तक्…

शिप्रा- आपको मे सोयी हुई लगती हूँ क्या…

सतीश- मेरे कहने का मतलब है की तू इतनी रात को यहा क्या कर रही है, जा जाकर सोजा…

शिप्रा- क्या भाई मे आपसे बात करने आई हूँ और आप मुझे भगा रहे हो…

सतीश- हाँ बता क्या बात करनी है…

शिप्रा- क्या भाई अब गेट पर खड़ा रखोगे क्या अंदर नहि बुलाओगे…

सतीश अपने रूम को देखता है की कहि कुछ उल्टा सीधा तो नहि है फिर अपना पूरा गेट खोल कर उसे अंदर बुलाता है…

शिप्रा आकर सतीश के बेड पर टाँगे फैलाकर लेट जाती है और पास मे पड़े रिमोट को उठा कर टीवी ऑन कर लेती है, सतीश भी उसके पास आकर लेट जाता है…

सतीश- तू क्या टीवी देखने आई है यहां पर…

शिप्रा- नहि भाईया मे तो आपसे बात करने आई थी….

सतीश- बता तुझे क्या बात करनी है…

शिप्रा- भाई आप तो भारती से प्यार करते हो न…

सतीश उसकी तरफ देखता है पर शिप्रा अपनी नजरे टीवी पर टिकाये हुए थी…

शिप्रा- बताओ न भाई…

सतीश- हम्म बहोत प्यार करता हु…

शिप्रा- फिर ये प्रियंका कौन है भाई….

सतीश एक बार फिर से उसे देखता है पर वो अभी भी नजरे टीवी पर टिकाये हुए थि, सतीश उसकी बात का कोई जवाब नहि देता…

शिप्रा- आप भारती को कही चीट तो नहि कर रहे..

सतीश उसकी बात से बौखलाते हुये- तू पागल है क्या तू जानती है की मे उसे चीट नहि कर सकता…

शिप्रा- तो फिर प्रियंका कोण है….

सतीश- फ्रेंड है…

इस बार शिप्रा सतीश की तरफ देखति है पर वो ऐसे बिहेव करता है जैसे की कितने ध्यान से टीवी देख रहा हो… शायद अब वो शिप्रा से नजरे नहि मिला रहा था…

शिप्रा- तो भारती को तो पता ही होगा ना प्रियंका के बारे मे… क्यों भाईया?

सतीश- नहि… उसे नहि पता…

शिप्रा- यानी की आप उसे चीट कर रहे हो…

सतीश- तू आज कुछ ज्यादा ही सवाल जवाब नहि कर रहि…

शिप्रा- वो तो मे बस ऐसे ही जनरल नॉलेज के लिए ही पूछ रही थी…

सतीश उसके बालो को पकड़ कर धीरे से खीचते हुये- मे बढ़ाऊ तेरी जनरल नॉलेज.

शिप्रा- नही छोड़ो दर्द हो रहा है भाई, आपको नहि बताना तो मत बताओ इसमें इतने नाराज होने की क्या बात है…

सतीश उसके बाल छोड़ते हुये- चल भाग अपने रूम में…

शिप्रा बेड से उठते हुये- अगर आप नहि बता पा रहे है तो मे बात दू भारती को प्रियंका के बारे मे….

सतीश अपने बेड से उठ कर शिप्रा का हाथ पकड़ते हुये- तुझे मेरी कसम है शिप्रा तू भारती को कुछ भी नहि बतायेगि, तुझे पता है मे उसके बगैर नहि जी सकता….

ये बात सतीश ने बहुत सीरियसली कहि थी…

शिप्रा- डोंट वरि भाई मे उसे कुछ नहि बताऊंगी…

सतीश- थँक्स फ़ॉर धिस

शिप्रा- तो अब बताओगे की ये प्रियंका कौन है,

सतीश- सही टाइम आने पर बता दूँगा… अब तू जाकर सोजा मुझे बहुत जोर की नींद आ रही है, और जाते समय लाइट ऑफ कर जाना…

ओर सतीश आँखे बंद करके ऐसे रियेक्ट करता है जैसे उसे कितनी तेज नींद आ रही हो…

शिप्रा सतीश को देख कर मुस्कुरा देती है और फिर रूम की लाइट ऑफ करके वो गेट को बंद करके बाहर निकल जाती है….

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