गाँव का राजा – Update 2 | Incest Sex Story

गाँव का राजा - Incest Sex Story
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घर में चारो तरफ खुशी का वातावरण था क्यों की आज राजू का जनम दिन था. सुबह उठ कर शीला देवी ने घर की सॉफ सफाई करवाई, हलवाई लगवा दिया और खुद भी शाम की तैय्यारियों में जुट गई. राजू सुबह से बाहर ही घूम रहा था. पर आज उसको पूरी छूट मिली हुई थी. तकरीबन 12 बजे के आस पास जब शीला देवी अपने पति को कुच्छ काम समझा कर बाजार भेज रही थी तो उसकी मालिश करने वाली आया आ गई. शीला देवी उसको देख कर खुश होती हुई बोली “चल अच्छा किया आज आ गई, मैं तुझे खबर भिजवाने ही वाली थी, पता नही दो तीन दिन से पीठ में बड़ी अकड़न सी हो रखी है”. आया बोली “मैं तो जब सुनी कि आज मुन्ना बाबू का जनम दिन है तो चली आई कि कही कोई काम ना निकल आए”. काम क्या होना था, ये जो आया थी वो बहुत मुँह लगी थी चौधरायण के. आया चौधरायण की कामुकता को मानसिक संतुष्टि प्रदान करती थी. अपने दिमाग़ के साथ पूरे गाओं की तरह तरह की बाते जैसे की कौन किसके साथ लगी है कौन किस से फसि है और कौन किस पे नज़र रखहे हुए है आदि करने में उसे बड़ा मज़ा आता था. आया भी थोड़ी कुत्सित प्रवृति की थी उसके दिमाग़ में जाने क्या क्या चलता रहता था. गाओं, मुहल्ले की बाते खूब नमक मिर्च लगा कर और रंगीन बना कर बताने में उसे बरा मज़ा आता था. इसलिए दोनो की जमती भी खूब थी. तो फिर चौधरायण सब कामो से फ़ुर्सत पा कर अपनी मालिश करवाने के लिए अपने कमरे में जा घुसी. दरवाज़ा बंद करने के बाद चौधरैयन बिस्तेर पर लेट गई और आया उसके बगल में तेल की कटोरी ले कर बैठ गई. दोनो हाथो में तेल लगा कर चौधरायण की साडी को घुटनो से उपर तक उठाते हुए उसने तेल लगा शुरू कर दिया. चौधरायण की गोरी चिकनी टॅंगो पर तेल लगाते हुए आया की बातो का सिलसिला शुरू हो गया था. आया ने चौधरायण की तारीफो के पूल बांधना शुरू कर दिए था. चौधरायण ने थोड़ा सा मुस्कुराते हुए पुचछा “और गाओं का हाल चाल तो बता, तू तो पता नही कहा मुँह मारती रहती है मेरी तारीफ तू बाद में कर लेना”. आया के चेहरे पर एक अनोखी चमक आ गई “क्या हाल चाल बताए मालकिन, गाओं में तो अब बस जिधर देखो उधर ज़ोर ज़बरदस्ती हो रही है, परसो मुखिया ने नंदू कुम्हार को पिटवा दिया पर आप तो जानती ही हो आज कल के लड़को को.. उँछ नीच का उन्हे कुच्छ ख्याल तो है नही, नंदू का बेटा शहर से पढ़ाई कर के आया है पता नही क्या क्या सीखके के आया है, उसने भी कल मुखिया को अकेले में धर दबोचा और लगा दी चार पाँच पटखनी, मुखिया पड़ा हुआ है अपने घर पर अपनी टूटी टांग ले के और नंदू का बेटा गया थाने” “हा रे, इधर काम के चक्कर में तो पता ही नही चला, मैं भी सोच रही थी कि कल पोलीस क्यों आई थी, पर एक बात तो बता मैने तो ये भी सुना है कि मुखिया की बेटी का कुच्छ चक्कर था नंदू के बेटे से” “सही सुना है मालकिन, दोनो में बड़ा जबरदस्त नैन मत्तक्का चल रहा है, इसी से मुखिया खार खाए बैठा था”

“बड़ा खराब जमाना आ गया है, लोगो में एक तो उँछ नीच का भेद मिट गया है, कौन किसके साथ घूम फिर रहा है ये भी पता नही चलता है, खैर और सुना, मैने सुना है तेरा भी बड़ा नैन मत्तक्का चल रहा है आज कल उस सरपंच के छ्होरे के साथ, साली बुढ़िया हो के कहा से फसा लेती है जवान जवान लोंडो को”

आया का चेहरा कान तक लाल हो गया था, छिनाल तो वो थी मगर चोरी पकड़े जाने पर चेहरे पर शर्म की लाली दौड़ गई. शरमाते और मुस्कुराते हुए बोली “अर्रे मालकिन आप तो आज कल के लोंडो का हाल जानती ही हो सब साले च्छेद के चक्कर में पगलाए घूमते रहते है”

“पगलाए घूमते है या तू पागल कर देती है,,,,,,,,,,,अपनी जवानी दिखा के”

आया के चेहरे पर एक शर्मीली मुस्कुराहट दौड़ गई, “क्या मालकिन मैं क्या दिखौँगी, फिर थोड़ा बहुत तो सब करते है”

“थोड़ा सा….साली क्यों झूट बोलती है तू तो पूरी की पूरी छिनाल है, सारे गाओं के लड़को को बिगाड़ के रख देगी,,,,,,,,,,

“अर्रे मालकिन बिगड़े हुए को मैं क्या बिगाड़ूँगी, गाओं के सारे छ्होरे तो दिन रात इसी चक्कर में लगे रहते हैं”.

“चल साली, तू जैसे दूध की धूलि है”

“अब जो समझ लो मालकिन, पर एक बात बता दू आपको कि ये लोंडे भी कम नही है गाओं के तालाब पर जो पेड़ लगे हुए है ना उस पर बैठ का खूब तान्क झाँक करते है”

“अक्चा, पर तुम लोग क्या भगाती नही उन लोंडो को………..”

“घने घने पेड़ है चारो तरफ, अब कोई उनके पिछे छुपा बैठा रहेगा तो कैसे पता चलेगा, कभी दिख जाते है कभी नही दिखते”

“बड़े हरामी लोंडे है, औरतो को चैन से नहाने भी नही देते”

“लोंडे तो लोंडे, लड़कियाँ भी कोई कम हरामी नही है”

“क्यों वो क्या करती है”

“अर्रे मालकिन दिखा दिखा के नहाती है”

“अच्छा, बड़ा गंदा माहौल हो गया है गाओं का”

“जो भी है मालकिन अब जीना तो इसी गाओं में है ना”

“हा रे वो तो है, मगर मुझे तो मेरे लड़के के कारण डर लगता है, कही वो भी ना बिगड़ जाए”

इस पर आया के होंठो के कमान थोड़े से खींच गये. उसके चेहरे की कुटिल मुस्कान जैसे कह रही थी की बिगड़े हुए को और क्या बिगाड़ना. मगर आया ने कुच्छ बोला नही.

शीला देवी हँसते हुए बोली “अब तो लड़का भी जवान हो गया है, तेरे जैसी रंडियो के नज़रो से तो बचाना ही पड़ेगा नही तो तुम लोग कब उसको हाज़ाम कर जाओगी ये भी पता नही लगेगा”

“अब मालकिन झूठ नही बोलूँगी पर अगर आप सच सुन सको तो एक बात बोलू”

“हा बोल क्या बात”

“चलो रहने दो मालकिन” कह कर आया ने पूरा ज़ोर लगा के चौधरायण की कमर को थोड़ा कस के दबाया, गोरी खाल लाल हो गई, चौधरायण के मुँह से हल्की सी आह निकली गई, आया का हाथ अब तेज़ी से कमर पर चल रहा था. आया के तेज चलते हाथो ने चौधरायण को थोरी देर के लिए भूला दिया कि वो क्या पुच्छ रही थी. आआया ने अपने हाथो को अब कमर से थोड़ा नीचे चलाना शुरू कर दिया था. उसने चौधरायण की पेटिकोट के अंदर ख़ुसी हुई साडी को अपने हाथो से निकाल दिया और कमर की साइड में हाथ लगा कर पेटिकोट के नाडे को खोल दिया. पेटिकोट को ढीला कर उसने अपने हाथो को कमर के और नीचे उतार दिया. हाथो में तेल लगा कर चौधरायण के मोटे-मोटे चूतरो के मंसो को अपने हथेलियो में दबोच दबोच कर दबा रही थी. शीला देवी के मुँह से हर बार एक हल्की सी आनद भरी आह निकल जाती थी. अपने तेल लगे हाथो से आया ने चौधरायण की पीठ से लेकर उसके मांसल चूतरो तक के एक-एक कस बल को ढीला कर दिया था. आया का हाथ चूतरो को मसल्ते मसल्ते उनके बीच की दरार में भी चला जाता था. चूतरो के दरार को सहलाने पर हुई गुद-गुडी और सिहरन के कारण चौधरायण के मुँह से हल्की सी हसी के साथ कराह निकल जाती थी. आया के मालिश करने के इसी मस्ताने अंदाज की शीला देवी दीवानी थी. आया ने अपना हाथ चूतरो पर से खींच कर उसकी सारी को जाँघो तक उठा कर उसके गोरे-गोरे बिना बालो के गुदाज़ मांसल जाँघो को अपने हाथो में दबा-दबा के मालिश करना शुरू कर दिया. चौधरायण की आँखे आनंद से मुंदी जा रही थी. आया का हाथ घुटनो से लेकर पूरे जाँघो तक घूम रहे थे. जाँघो और चूतरो के निचले भाग पर मालिश करते हुए आया का हाथ अब धीरे धीरे चौधरायण के चूत और उसकी झांतो को भी टच कर रहा था.

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आया ने अपने हाथो से हल्के हल्के चूत को छुना शुरू कर दिया था. चूत को छुते ही शीला देवी के पूरे बदन में सिहरन सी दौड़ गई थी. उसके मुँह से मस्ती भरी आह निकल गई. उस से रहा नही गया और पीठ के बल होते हुए बोली “साली तू मानेगी नही”

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“मालकिन मेरे से मालिश करवाने का यही तो मज़ा है”

“चल साली, आज जल्दी छोड़ दे मुझे बहुत सारा काम है”

“अर्रे काम-धाम तो सारे नौकर चाकर कर ही रहे है मालकिन, ज़रा अच्छे से मालिश करवा लो इतने दीनो के बाद आई हू, बदन हल्का हो जाएगा”

चौधरायण ने अपनी जाँघो को और चौड़ा कर दिया और अपने एक पैर को घुटनो के पास से मोड़ दिया, और अपनी चूचियों पर से साडी को हटा दिया. मतलब आया को ये सीधा संकेत दे दिया था कि कर ले अपनी मर्ज़ी जो भी करना है मगर बोली “हट साली तेरे से बदन हल्का करवाने के चक्कर में नही पड़ना मुझे आज, आग लगा देती है साली……………चौधरायण ने अपनी बात अभी पूरी भी नही की थी और आया का हाथ सीधा साड़ी और पेटिकोट के नीचे से शीला देवी के चूत पर पहुच गया था. चूत की फांको पर उंगलिया चलाते हुए अपने अंगूठे से हल्के से शीला देवी की चूत के क्लिट को आया सहलाने लगी. चूत एकदम से पनिया गई. आया ने चूत को एक थपकी लगाई और मालकिन की ओर देखते हुए मुस्कुराते हुए बोली “पानी तो छोड रही हो मालकिन”. इस पर शीला देवी सिसकते हुए बोली “साली ऐसे थपकी लगाएगी तो पानी तो निकलेगा ही” फिर अपने ब्लाउस के बटनो को खोलने लगी.

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आया ने पुचछा “पूरा कर्वाओगि क्या मालकिन”.

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“पूरा तो करवाना ही पड़ेगा साली अब जब तूने आग लगा दी है…”

आया ने मुस्कुराते हुए अपने हाथो को शीला देवी की चुचियों की ओर बढ़ा दिया और उनको हल्के हाथो से पकड़ कर सहलाने लगी जैसे की पूछकर कर रही हो. फिर अपने हाथो में तेल लगा के दोनो चूचियों को दोनो हाथो से पकड़ के हल्के से खीचते हुए निपपलो को अपने अंगूठे और उंगलियों के बीच में दबा कर खीचने लगी. चुचियों में धीरे-धीरे तनाव आना शुरू हो गया. निपल खड़े हो गये और दोनो चूचियों में उमर के साथ जो थोड़ा बहुत थुल-थुलापन आया हुआ था वो अब मांसल कठोरता में बदल गया. उत्तेजना बढ़ने के कारण चुचियों में तनाव आना स्वाभाविक था. आया की समझ में आ गया था कि अब मालकिन को गर्मी पूरी चढ़ गई है. आया को औरतो के साथ खेलने में उतना ही मज़ा आता था जितना मज़ा उसको लड़को के साथ खेलने में आता था. चुचियो को तेल लगाने के साथ-साथ मसल्ते हुए आया ने अपने हाथो को धीरे धीरे पेट पर चलना शुरू कर दिया था.

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चौधरायण की गोल-गोल नाभि में अपने उंगलियों को चलाते हुए आया ने फिर से बाते करनी शुरू कर दी.

“मालकिन अब क्या बोलू, मगर मुन्ना बाबू (चौधराईएन का बेटा) भी कम उस्ताद नही है

मस्ती में डूबी हुई अधखुली आँखो से आया को देखते हुए शीला देवी ने पुच्छा

“क्यों, क्या किया मुन्ना ने तेरे साथ”

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“मेरे साथ क्या करेंगे मुन्ना बाबू, आप गुस्सा ना हो एक बताउ आपको. चौधरायण ने अब अपनी आँखे खोल दी और चोकन्नि हो गई

“हा हा बोल ना क्या बोलना है”

“मालकिन अपने मुन्ना बाबू भी काम नही है, उनकी भी संगत बिगड़ गई है”

“ऐसा कैसे बोल रही है तू”

“ऐसा इसलिए बोल रही हू क्यों की, अपने मुन्ना बाबू भी तलब के चक्कर खूब लगते है”

“इसका क्या मतलब हुआ, हो सकता है दोस्तो के साथ खेलने या फिर तैरने चला जाता होगा”

“खाली तैरने जाए तब तो ठीक है मालकिन मगर, मुन्ना बाबू को तो मैने कई तालाब किनारे वाले पेड़ पर चढ़ कर छुप कर बैठे हुए भी देखा है”.

“सच बोल रही है तू……..”

“और क्या मालकिन, आप से झूट बोलूँगी, कह कर आया ने अपना हाथ फिर से पेटिकोट के अंदर सरका दिया और चूत से खेलने लगी. अपनी मोटी मोटी दो उंगलियों को उसने गचक से शीला देवी के चूत में पेल दिया. चूत में उंगली के जाते ही शीला देवी के मुँह से आह निकल गई मगर उसने कुच्छ बोला नही. अपने बेटे के बारे में जानकर उसके ध्यान सेक्स से हट गया था और वो उसके बारे और ज़यादा जान ना चाहती थी. इसलिए फिर आया को कुरेदते हुए कहा

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“अब मुन्ना भी तो जवान हो गया है थोड़ी बहुत तो उत्सुकता सब के मन में होती, वो भी देखने चला गया होगा इन मुए गाओं के छोरो के साथ”

“पर मालकिन मैने तो उनको शाम में अमिया (आमो का बगीचा) में गुलाबो के चुचे दबाते हुए भी देखा है”

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चौधरैयन का गुस्सा सातवे आसमान पर जा पहुचा, उसने आया को एक लात कस के मारी, आया गिरी तो नही मगर थोड़ा हिल ज़रूर गई. आया ने अपनी उंगलिओ को अभी भी चूत से नही निकलने दिया. लात खाकर भी हस्ती हुई बोली “मालकिन जितना गुस्सा निकालना हो निकाल लो मगर मैं एक दम सच-सच बोल रही हू. झूट बोलू तो मेरी ज़ुबान कट के गिर जाए मगर मुन्ना बाबू को तो कई बार मैने गाओं की औरते जिधर दिशा-मैदान करने जाती है उधर भी घूमते हुए देखा है”

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