गाँव का राजा – Update 12 | Incest Sex Story

गाँव का राजा - Incest Sex Story
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“हा इसी तरह से जीभ को चोरो तरफ घूमाते हुए, धीरे धीरे”. चुदाई की ये कोचैंग आगे जा कर munna के बहुत काम आने वाली थी जिसका पता दोनो में से किसी को नही था. जीभ को चुचि पर बड़े आराम से धीरे धीरे चला रहा था निपल के चारो तरफ के काले घेरे पर भी जीभ फिरा रहा था. बीच बीच में दोनो चुचि को पूरा का पूरा मुँह में भर कर भी चूस लेता था. उर्मिला देवी को बड़ा मज़ा आ रहा था और उसके मुँह से सिसकारिया फूटने लगी थी “ऊऊउउउईई….आअहह… ..सस्स्सिईईई… .राजू बेटा… ……आहह….. ऐसे ही मेरे राजा,,,,,,,,,,सीईईईईईईईईईई एक बार में ही सीख गया, हाई मज़ा आ रहा है”

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“हाई मामी, बहुत मज़ा है, ओह मामी आपकी चुचि……..सीईई कितनी खूबसूरत, हमेशा सोचता था कैसी होगी आज……

“उफफफ्फ़ सस्स्स्स्स्स्स्सिईईईईई……., आअराआअम से आराम से, उफ्फ साले खा जा तेरी मा का भेजा हुआ लंगड़ा आम है भोसड़ी के…….चूस के सारा रस पी जा “.

मामी की गद्देदार मांसल चुचियों को munna, सच में शायद लंगड़ा आम समझ रहा था. कभी बाई चुचि मुँह में भरता तो कभी ढहिनी चुचि को मुँह में दबा लेता. कभी दोनो को अपनी मुट्ही में कसते हुए बीच वाली घाटी में पुच…प्यूच करते हुए चुममे लेता, कभी उर्मिला देवी की गोरी सुरहिदार गर्दन को चूमता.

बहुत दीनो के बाद उर्मिला देवी की चुचियों को किसी ने इस तरह से माथा था. उसके मुँह से लगातार सिसकारियाँ निकल रही थी, आहे निकल रही थी, चूत पनिया कर पसिज रही थी और अपनी उत्तेजना पर काबू करने के लिए वो बार-बार अपनी जाँघो को भीच भीच कर पैरो को बिस्तेर पर रगड़ते हुए हाथ पैर फेंक रही थी. दोनो चुचिया ऐसे मसले जाने और चूसे जाने के कारण लाल हो गई थी. चुचि चूस्ते-चूस्ते राजू नीचे बढ़ गया था और मामी के गुदाज पेट पर अपने प्यार का इज़हार करते हुए पुच्चिया काट रहा था. उर्मिला देवी की चूत एक दम गीली हो कर चुहने लगी. भगनासा खड़ा होकर लाल हो गया था. इतनी देर से munna के साथ खिलवाड़ करने के कारण धीरे-धीरे जो उत्तेजना का तूफान उसके अंदर जमा हुआ था वो अब बाहर निकलने के लिए बेताब हो उठा था. एकद्ूम से बेचैन होकर सीस्याते हुए बोली “कितना दूध पिएगा मुए, उई…सीईई…..साले, चुचि देख के चुचि में ही खो गया, इसी में छोड़ेगा क्या भोसड़ी के”. munna मामी के होंठो को चूम कर बोला “ओह मामी बहुत मज़ा आ रहा है सच में, मैने कभी सोचा भी नही था, , मामी आपकी चूची को चोद दू……” उर्मिला देवी ने एक झापड़ उसके चूतर पर मारा और उसके गाल पर दाँत गढ़ाते हुए बोली “साले अबी तक चुचि पर ही अटका हुआ है”. munna बिस्तर पर उठ कर बैठ गया और एक हाथ में अपने तमतमाए हुए लंड को पकड़ उसकी चमड़ी को खींच कर पहाड़ी आलू के जैसे लाल-लाल सुपरे को मामी की चुचियों पर रगड़ने लगा. उत्तेजना के मारे munna का बुरा हाल हो चुक्का था, उसे कुच्छ भी समझ में नही लग रहा था. खेलने के लिए मिले इस नये खिलौने के साथ वो जी भर के खेल लेना चाहता था. लंड का सुपरा रगड़ते हुए उसके मुँह से मज़े की सिसकारिया फुट रही थी “ओह मामी, सस्स्स्स्स्सीईई मज़ा आ गया मामी, सस्स्स्सीईई और लो मामी.

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उर्मिला देवी की चूत में तो आग लगी हुई थी उन्होने झट से munna को धकेलते हुए बिस्तर पर पटक दिया और उसके उपर चढ़ कर अपने पेटिकोट को उपर किया एक हाथ से लंड को पकड़ा और अपनी पनियाई हुई चूत के गुलाबी छेद पर लगा कर बैठ गई. गीली चूत ने सटाक से munna के पहाड़ी आलू जैसे सुपरे को निगल लिया. munna का क्यों की ये पहली बार था इसलिए जैसे ही सुपरे पर से चमड़ी खिसक कर नीचे गई munna थोड़ा सा चिहुनक गया.

“ओह मामी,”

“पहली बार है ना, सुपरे की चमड़ी नीचे जाने से………” और अपनी गांद उठा कर कचक से एक जोरदार धक्का मारा. गीली चूत ने झट से पूरे लंड को निगल लिया. पूरा लंड अपनी चूत में लेकर, पेटिकोट को कमर के पास समेट कर खोस लिया और चूतर उठा कर दो तीन और धक्के लगा दिए. munna की समझ में खुच्छ नही आ रहा था. बस इतना लग रहा था जैसे उसके लंड को किसी ने गरम भट्टी में डाल दिया है. गर्दन उठा कर उसने देखने की कोशिश की. मामी ने अपने चूतर को पूरा उपर उठाया, चूत के रस से चमचमता हुआ लंड बाहर निकला, फिर तेज़ी के साथ मामी के गांद नीचे करते ही fhuli hui chut में समा गया.

“सीईए मामी आप ने तो अपनी नीचे वाली ठीक से देखने भी नही……….”

“बाद में……अभी तो नीचे आग लगी है”

“हाई मामी…………दिखा देती तूऊऊऊऊ”

“अभी मज़ा आ रहा है……”

“हाँ, हा आ रहा हाईईईईईईईई…….”

“तो फिर मज़ा लूट ना भोसड़ी के, देख के अचार डालेगा…………”

“उफ्फ मामी…………..सीईई ओह आपकी नीचे वाली तो एकद्ूम गरम……….”

“हा………बहुत गर्मी है इसमे, अभी इसकी सारी गर्मी निकाल दे फिर बाद में……भट्टी देखना…….अभी बहुत खुजली हो रही थी, ऐसे ही चुदाई होती है समझा, पूरा मज़ा इसी को सीईए……….जब चूत में लंड अंदर बाहर होता है तभी……….हाई पहली चुदाई है ना तेरीईईईईई”

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“हा मामी………ही सीईईईई”
“क्यों क्या हुआ……….सस्स्स्सीईईई”

“ऐसा लग रहा है जैसे उफफफफफफ्फ़………जैसे ही आप नीचे आती है एकद्ूम से मेरे लंड की चमड़ी नीचे उतर जाती है…………..उफफफफफफफ्फ़ माआआमीईईईई बहुत गुदगुदी हो रही है”

“तेरा बहुत मोटा है ना………इसलिए मेरी में एकदम चिपक कर जा रहा है……”

इतना कह कर उर्मिला देवी ने कचक-कचक धक्के लगाना शुरू कर दिया. चूत में लंड ऐसे फिट हो गया था जैसे बॉटल में कॉर्क. उर्मिला देवी की चूत जो की चुद चुद के भोसड़ी हो गई थी, आज 10 इंच मोटे लंड को खा कर अन्चुदी चूत बनी हुई थी और इठला कर, इतरा कर पानी छोड़ रही थी. लंड चूत की दीवारो से एकद्ूम चिपक कर रगड़ता हुआ पूरा अंदर तक घुस जाता था और फिर उसी तरह से चूत की दीवारो को रगड़ते हुए सुपरे तक सटाक से निकल कर फिर से घुसने के लिए तैय्यार हो जाता था. चूत के पानी छोड़ने के कारण लंड अब सटा-सॅट अंदर बाहर हो रहा था. munna ने गर्दन उठा कर अपनेलंड देखने की कोशिश की मगर उर्मिला देवी के धक्को की रफ़्तार इतनी तेज और झटकेदार थी की उसकी गर्दन फिर से तकिये पर गिर गई. उर्मिला देवी के मुँह से तेज तेज सिसकारियाँ निकल रही थी और वो गांद उठा उठा के तेज-तेज झटके मार रही थी. लंड सीधा उसकी बछेदानि पर ठोकर मार रहा था और बार बार बस उसके मुँह से चीख निकल जाती थी. आज उसको बहुत दीनो के बाद ऐसा अनोखा मज़ा आ रहा था. दोनो मामी भांजा कुतिया कुत्ते की तरह से हाँफ रहे थे और कमरे में गछ-गछ, फॅक-फॅक की आवाज़ गूँज रही थी.

“ऑश……सस्स्स्सीईई……munna बहुत मस्त लंड है तेरा तो हाई…….उफफफफफफफफफ्फ़”

“हा……..मामी…….बहुत मज़ा आ रहा है……….चुचीईईईई”

“हा, हा दबा ना, चुचि दबा…………बहुत दीनो के बाद ऐसा मज़ा आ रहा है…”

“सच माआमी……आअज तो आपने स्वर्ग में पहुचा दिया………”

“हाई तेरे इस घोड़े जैसे लंड ने तो…….आआअजजजज मेरी बार्षो की प्यास भुजाआअ…”

कच-कच, करता हुआ लंड, चूत में तेज़ी से अंदर बाहर हो रहा था. उर्मिला देवी की मोटी-मोटी गांद राजू के लंड पर तेज़ी से उच्छल कूद कर रही थी. मस्तानी मामी की दोनो चुचिया राजू के हाथो में थी, और उनको अपने दोनो हाथो के बीच दबा कर मठ रहा था.

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“ओह हो ऱजुउउउउउउउउ बेटॅयायेयीययाया…….मेरा निकलेगा अब सस्स्स्स्स्स्सीईई ही निकल जाएगा…………ऊऊऊऊगगगगगगगगगग………(फॅक-फॅक-फॅक) …….सीईई ही रीईईईईई कहा था त्त्त्त्त्त्त्त्तुउउउउउउ……मज़ा आआआअ गयाआआआ रीईई, गई मैं ……हाई आआआआअज तो चूत फाड़ के पानी निकल दियाआआआ तुनीई…उफफफफ्फ़”

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“हाई मामी और तेज मारो….मारो और तेज……और ज़ोर सीईई, उफफफफफ्फ़ बतूत गुद्गुदीईइ हूऊऊओ…….”

तभी उर्मिला देवी एक ज़ोर की चीख मारते हुए……सीईईई करते हुए munna के उपर ढेर हो गई. उसकी चूत ने फॉल्फला कर पानी छोड़ दिया. चूत की छेद पकड़ते हुए लंड को कभी अपनी गिरफ़्त में कस रही थी कभी छोड़ रही थी. munna भी सयद झरने के करीब था मगर उर्मिला देवी के रुकने के कारण चुदाई रुक गई थी और वो बस कसमसा कर रह गया. उर्मिला देवी के भारी शरीर को अपनी बाँहो में जकड़े हुए नीचे से हल्के हल्के गांद उठा उठा कर अपने आप को संतुष्ट करने की कोशिश कर रहा था. मगर कहते है की थूक चाटने से प्यास नही भुजती. munna का लंड ऐसे तो झरने वाला नही था. हा अगर वो खुद उपर चढ़ कर चार पाँच धक्के भी ज़ोर से लगा देता तो सयद उसका पानी भी निकल जाता. पर ये तो उसकी पहली चुदाई थी, उसे ना तो इस बात का पता था ना ही उर्मिला देवी ने ऐसा किया. लंड चूत के अंदर ही फूल कर और मोटा हो गया था. दीवारो से और ज़यादा कस गया था. धीरे धीरे जब मामी की साँसे स्थिर हुई तब वो फिर से उठ कर बैठ गई और munna के बालो में हाथ फेरते हुए उसके होंठो से अपने होंठो को सटा कर एक गहरा चुंबन लिया.

“हाई,………..मामी रुक क्यों गई……..और धक्का लगाओ ना……..”

“मुझे पता है…….तेरा अभी निकला नही………..मेरी तो इतने दीनो से पयासी थी…….ठहर ही नही पाई………….” कहते हुए उर्मिला देवी थोड़ा सा उपर उठ गई. पक की आवाज़ करते हुए munna का मोटा लंड उर्मिला देवी की बित्ते भर की चूत से बाहर निकल गया. उर्मिला देवी जो की अभी भी पेटिकोट पहने हुई थी ने पेटिकोट को चूत के उपर दबा दिया. उसकी चूत पानी छोड़ रही थी और पेटिकोट को चूत के उपर दबाते हुए उसके उपर कपड़े को हल्के से रगड़ते हुए पानी पोछ रही थी. अपनी दाहिनी जाँघ को उठाते हुए munna की कमर के उपर से वो उतर गई और धडाम से बिस्तर पर अपनी दोनो जाँघो को फैला कर तकिये पर सर रख कर लेट गई. पेटिकोट तो पूरी तरह से उपर था ही, उसका बस तोड़ा सा भाग उसकी fhuli hui चूत को ढके हुए था. वो अब झड़ने के बाद सुस्त हो गई थी. आँखे बंद थी और साँसे अब धीरे धीरे स्थिर हो रही थी.

munna अपनी मामी के बगल में लेटा हुआ उसको देख रहा था. उसका लंड एक दम सीधा तना हुआ छत की ओर देख रहा था. लंड की नसे फूल गई थी और सुपरा एक दम लाल हो गया था. munna बस दो चार धक्को का ही मेमहमान था लेकिन ठीक उसी समय मामी ने उसके लंड को अपनी चूत से बेदखल कर दिया था. झरने की कगार पर होने के कारण लंड फुफ्कार रहा था मगर मामी तो अपना झाड़ कर उसकी बगल में लेटी थी.

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