कमरे के अंदर गोल्डन पीले रंग की एल ई डी लाइट चारों ओर जल रही थी। पूरा कमरा फूलों से सजा हुआ था। अन्दर कमरे में किंग साइज बिस्तर लगा हुआ था। पूरा बिस्तर गुलाब की पंखुड़ियों से सजा हुआ था। पलंग के हर ओर फूलों का गुलदस्ता लगा हुआ था। कमरे में बेहद आकर्षक सुगंधित इत्र की खुशबू माहौल को बेहद मनमोहक बना रही थी। जय ने देखा कि उसकी माँ ममता और बहन कविता दोनों उसकी दुल्हन बन उस सेज पर उसका बेसब्री से इंतज़ार कर रही हैं। आज इसी सेज पर एक बेटा अपनी माँ और बहन के साथ सुहागरात मनाने वाला था। जय को आता देख ममता और कविता दोनों बिस्तर से उतर गई, और जय की ओर चल दी। दोनों अपना लहँगा उठाये चल रही थी। पैरों में पायल होने की वजह से दोनों के चलने पर छम छम कर आवाज़ आ रही थी। दोनों के पैरों में मेहन्दी लगी हुई थी, और नाखून लाल रंग की नेल पोलिस से रंगे थे। दोनों उसके नज़दीक आई और फिर उसके पैरों में गिर गयी। दोनों ने उसके पैर पकड़ उसके चरणों को चूम लिया। कविता- आज हम दोनों को अपना करके, आपने हमको खूब मान दिया है। और हम चाहते हैं कि, आप हम दोनों को अपने चरणों में स्थान दें, ताकि आपकी खूब सेवा करें तन मन और धन से।
ममता- आपकी अर्धांगिनी हैं हम दोनों। आप ही हमको पूरा करेंगे। हम दोनों आपकी हर छोटी छोटी बात का ख्याल रखेंगी। ताकि आपका ख्याल रखने में हम चूक ना जाएं। ये जीवन हमारा अब आपके इन कदमों में न्योछावर है।
जय- तुम दोनों को क्या हो गया है? हम चाहते हैं कि, हमारे बीच वही रिश्ता रहे, जो शादी के पहले था। तुम दोनों हमारी माँ बहन रह कर हमारा बिस्तर में बीवी की तरह ख्याल रखो। पहले तो ये आप आप बोलना बंद करो। तुम दोनों चाहो तो घर के बाहर हमको आप आप बोल सकती हो। पर घर के अंदर तुम दोनों हमारी दीदी और माँ हो, और बिस्तर पर भी वही बनी रहोगी। तुम दोनों की जगह हमारे पैरों में नहीं हमारे दिल में है।” जय ने ममता और कविता को उठाकर कहा।
ममता- ठीक है, जय हम तुम्हारी माँ ही बनकर तुम्हारे साथ रहेंगे और कविता भी तुम्हारी बहन बनकर ही रहेगी। पर तुम नाराज़ मत हो हमसे।” दोनों कविता और ममता जय को अपने साथ बिस्तर पर ले गयी। जय की ओर गिलास बढ़ाकर कविता बोली,” ये लो जय दूध पी लो। आज की रात पत्नियां अपने पति को दूध पिलाकर करती हैं। तुम्हारे लिए माँ ने स्पेशल केसर का दूध बनाया है।”
जय बिस्तर पर बीच में बैठा था, पीछे मसलन लगी थी। ममता और कविता दोनों उसके आजू बाजू बैठी थी। दोनों माँ बेटी अपने हाथ में दूध का गिलास पकड़े हुए थी। दोनों जय से चिपककर बारी बारी से जय को दूध पिला रही थी। जय कभी ममता के गिलास से तो कभी कविता के हाथ से दूध पी रहा था।
जय दोनों को कमर से पकड़ कर बोला,” अच्छा, ये बताओ तुम दोनों को एक साथ शादी का विचार कैसे आया? और मामा को कैसे पटाया? माया मौसी कैसे और कब यहां आई? वो कैसे मान गयी? ये सब कैसे हुआ?
कविता- शांत हो जाओ, इतने सवाल एक साथ करोगे तो हम जवाब कैसे देंगे।
ममता- ये बताओ हम दोनों कैसी लग रहीं हैं? अपनी बीवियों की कुछ तारीफ भी करो आज की रात।
जय- तुम दोनों तो एक दम लॉलीपाप लग रही हो। एक दम रसगुल्ला। दोनों का आज खूब रस चूसेंगे। ये बताओ कि तुम तो पहले कविता दीदी के सामने नंगी नहीं होना चाहती थी। पर अब उसके साथ सुहागरात मनाओगी। ये कैसे हुआ? जय दूध का एक घूंट लेकर बोला। अब तक वो दूध आधा पी चुका था। ममता और कविता ने गिलास को टेबल पर रख दिया और उसके और नज़दीक आ गयी। दोनों एक साथ बोली,” अभी हम सब बताएंगे, तुम बस मज़े लो।” फिर दोनों माँ बेटी एक दूसरे के होंठों को चूमने लगी। दोनों बहुत ही कामुक अंदाज़ में एक दूसरे को पकड़कर चूम रही थी। कभी जीभ चूसती तो कभी होंठों को। दोनों ने तिरछी नज़रों से जय को देखा, जय उनको देखके आधा हिल गया। क्या सीन था, जो उसने ब्लू फिल्मों में देखा था। सामूहिक चुदाई से पहले लड़कियां एक दूसरे को किस करती हैं। यहां उसकी माँ और बहन एक दूसरे के साथ कर रही थी। जय ने उनको रोका नहीं, बल्कि उनकी चुनरी को उतार दिया और बिस्तर के नीचे फेंक दिया। दोनों अब सिर्फ लहँगा और चोली में थी। दोनों एक दूसरे को कसके पकड़ सहला रही थी। ममता और कविता ने किस करते हुए, एक दूसरे के चोली के धागे खोल दिये। चोली पीछे से पूरी बैकलेस थी, और उन दोनों ने ब्रा नहीं पहनी थी। जय ने उन दोनों के बाल खोल दिये। थोड़ी देर बाद उनकी किस टूटी और जय के गाल पर किस करके बोली,” अच्छा लगा।”
जय- बहुत अच्छा।
कविता- माँ और हम लेस्बियन हो गए हैं। हम दोनों के यहां से जाने के बाद माँ के पीरियड्स, तीसरे दिन रुके। हम दोनों एक साथ सोती थी। और हम सोचे कि ये माँ और हमारे बीच दूरियां मिटाने का एक सुनहरा मौका है। अगर हम दोनों को तुम्हारी बीवी बनना है, तो पहले हम दोनों को एक दूसरे को स्वीकारना पड़ेगा। और उस दिन हम दोनों तुम्हारी बातें कर रहे थे। हम माँ की मालिश कर रहे थे। और फिर…….
उस दिन……( फ्लैशबैक)
ममता- कविता ज़रा कमर पर मालिश कर दो।” ममता बिस्तर पर पेट के बल लेटी हुई थी। और साड़ी जांघों तक उठी हुई थी। कविता उसकी तेल मालिश कर रही थी। कविता लेग्गिंग्स और टॉप में थी। वो मालिश करने लगी।
ममता- कविता, तुम दोनों की शादी कैसे कराएं ये सोच रहे हैं? सत्य को कैसे मनाए कुछ समझ नही आ रहा है? वैसे तुम्हारी और जय की जोड़ी एक दम कमाल लगेगी।
कविता- हहम्मम्म माँ, इस उम्र में भी तुम कितनी जवान दिखती हो। तुम्हारी कमर, अभी भी बहुत सही है। तुम्हारी जवानी अभी भी खिल रही है। इसलिए तो जय तुम पर लट्टू हो गया।” कविता उसके तारीफों के पुल बांध रही थी। फिर बोली,” तुम हमारे और जय के लिए कैसे मान गयी माँ? क्योंकि उसी दिन हम दोनों एक दूसरे से लड़ रही थी और शुरू में इसके लिए तैयार नहीं थी? और कोई भी औरत अपने मर्द के साथ दूसरी औरत नहीं देख सकती चाहे वो कोई भी हो यानी उसकी बेटी ही क्यों ना हो?
ममता लेटे लेटे ही उसकी ओर मुंह घुमाके बोली- तुम और जय हमारी औलाद हो। हमको तुम दोनों की चिंता लगी रहती थी। तेरी शादी की तो सबसे ज्यादा। हम और सत्य एक दो लड़के भी देखने की सोच रहे थे। फिर तुम दोनों का कांड सामने आ गया। उस दिन हम बहुत गुस्सा में थे। लेकिन फिर हम ठंढा दिमाग से सोचे कि, तुम्हारा हमारे बाद अगर कोई सबसे ज्यादा ख्याल रख सकता है, तो वो है जय। और अगर जबरदस्ती तुम्हारी शादी कहीं और कर देते, तो ना तुम खुश रहती, ना जय और हम ही खुश रहते। ऊपर से हमारी जवानी ढलने में समय कहां है। हम अपने हिस्सा का खूब मजा करते, पर जय का प्यास अधूरा रह जाता। उसे तुम जैसी जवान बीवी भी चाहिए जो उम्र भर उसका साथ निभाये और उसको बेइंतेहा प्यार करे। वो प्यार हम तुम्हारे आंख में देखे। इसलिए अपनी बेटी को अपनी सौतन बनाने का फैसला कर लिया।”
कविता कमर पर मालिस करते हुए बोली – माँ, तुम बहुत प्यारी हो। लेकिन ये बात तुमने हमसे क्यों छुपाई कि हम शशिकांत की औलाद हैं?
ममता- ये बात जानकर तुम दोनों को कोई खुशी तो नही हुई आज भी। वैसे भी अब इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता। वो उस वक़्त के हालात ऐसे थे, की ये सब करना पड़ा। हो तो तुम तीनो हमारे बच्चे ना!
कविता ममता की साड़ी उसके जांघों से ऊपर उठायी और चूतड़ों तक ले गयी, पर चूतड़ बाहर नहीं निकले बस जाँघे नंगी हुई। कविता जांघों को छूते हुए बोली,” माँ जांघ पर भी मालिस कर देते हैं।”
ममता- हाँ हाँ कर दो। आज महीना खत्म हुआ है। अच्छा लगेगा।
कविता तेल लगाके मालिश करने लगी। अचानक कविता को ऐसा लगा कि वो ममता की नंगी कमर और जांघ देखकर उत्तेजित हो रही है। उसने अपनी बुर से पानी चूता हुआ महसूस किया। कविता मालिश करते हुए, ममता की ओर देख रही थी। ममता की आँखे बंद थी। कविता ये सोच रही थी, की वो अपनी माँ को भी देखकर उत्तेजित हो रही थी। चुदाई किये हुए चार दिन बीत गए थे। ममता तभी पलटकर पीठ के बल लेट गयी। और अपनी साड़ी उठाकर सामने से जांघों को नंगा कर दिया। उसकी पीली कच्छी नीचे से दिखने लगी। ममता अपने दोनों हाथ ऊपर की ओर मोड़कर लेटी थी। कविता ने देखा कि ममता की पैंटी आगे से गीली थी। इसका मतलब ममता भी उत्तेजित है। कविता ने उसकी जांघों की मालिस चालू रखी। कविता ने देखा कि ये मौका है, अपनी काम पिपासा को शांत करने का। उसने ममता से कहा,” माँ, इस साड़ी और साया को खोल दो, नहीं तो तेल लग जायेगा तो खराब हो जाएगा।”
ममता जैसे इसी का इंतज़ार कर रही हो- ठीक कह रही हो।” और लेटे लेटे ही अपनी साड़ी खोल दी और साया का नारा खोल अलग कर दी। कमर से लेकर नीचे तक ममता अब सिर्फ कच्छी में थी। कविता ने देखा उसकी पूरी कच्छी गीली हो चुकी थी। कविता अब बार बार मालिस के बहाने उसकी बुर पैंटी के ऊपर से ही छू ले रही थी। जब जब वो ऐसा करती, ममता की हल्की सिसकी निकल जाती, और बुर से रस चूने लगता। उधर कविता का भी यही हाल था। उसकी बुर से भी अब रस खूब रिस रहा था। ममता की छाती उत्तेजना से ऊपर नीचे हो रही थी। चूचियाँ लगातार उठक बैठक कर रही थी। काम की आग में दोनों जल रही थी, पर माँ बेटी का रिश्ता उनके बीच झिझक बनके खड़ा था। कविता ने सोचा कि इस झिझक को तोड़ने का इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा। कविता ने ममता की पैंटी पर ऊपर से हाथ रखा और बुर दबाते हुए बोली,” जय की याद आ रही है, माँ।” कविता झुककर ममता के चेहरे के पास आई।
ममता ने उसकी ओर देखा,” हाँ, कविता तेरे भाई ने पता नहीं क्या जादू कर दिया है। ये जिस्म की प्यास बड़ी कमबख्त चीज़ है। देखो तुम्हारी माँ कैसे जल रही है।”
कविता उसकी आँखों मे देखकर बोली,” हम भी उस आग में अभी जल रहे हैं माँ। क्यों ना हम दोनों एक दूसरे के साथ आज की रात…….”
इतना कहना था कि ममता ने कविता को पकड़के होंठो पर चूम लिया। दोनों लंबा चुम्मा लेने लगे।
( आज का दिन) तभी जय बोला,” अरे तुम दोनों चूमती रहोगी एक दूसरे को या आगे भी कुछ बताओगी।” ममता और कविता एक दूसरे के बाल पकड़े, होंठो से होंठो को मिलाए चूम रही थी। उन्होंने किस करते हुए तिरछी नज़रों से जय की ओर देखा। फिर मुस्कुराई। कविता बोली,” सॉरी हम दोनों उस दिन में डूब गए। फिर आगे सुनो…..
(फ्लैशबैक)
दोनों एक दूसरे के ऊपर चढ़ गई थी। किस करते हुए कब वो दोनों जंगली बिल्लियां बन गयी, पता ही नहीं चला।दोनों एक दूसरे को बेतहाशा चूमे जा रही थी। ममता ने कविता की टॉप उतार दी। वो उसके चूचियों की क्लीवेज के ऊपर चूम रही थी। कविता ममता की चूचियाँ दबा रही थी। उसने भी ममता के ब्लाउज के बटन खोल दिये। दोनों उठके बैठ गयी। और एक दूसरे की ब्रा उतार दी। दोनों ऊपर से बिल्कुल नंगी हो चली थी।कविता अपनी लेग्गिंग्स और कच्छी उतार फेंकी। और ममता के मुंह मे अपनी चुच्ची दे दी। ममता के जांघों पर वो इस वक़्त बैठी थी। ममता उसकी चुच्चियों को चूमते हुए, उसके चूचक चूस रही थी। कविता ममता के सर को पकड़े उसे अपनी चुच्ची पर दबा रही थी। दोनों की सांसें अब तेज़ चल रही थी। क्या दृश्य था, जिस माँ ने अपनी बेटी को दूध पिलाया था, वो बेटी आज अपनी माँ को अपनी चुच्ची चुसवा रही थी। कविता ममता की बुर को लगातार छेड़ रही थी। ममता ने भी अपनी गीली कच्छी उतार दी। दोनों माँ बेटी अब नंगी थी। ममता को कविता को देखकर उसकी जवानी याद आ गयी। वो बिल्कुल ममता पर जो गयी थी। वही बाल, वैसे ही आंखे, वही चेहरा, वही चुच्चियाँ, वही कमर, वैसे ही चूतड़, वही जाँघे। सच पूछो तो इस वक़्त ममता कविता के साथ नहीं अपने 21 साल पुराने जिस्म के साथ काम क्रीड़ा कर रही थी। ममता बारी बारी से उसकी चुच्चियाँ चूस रही थी।कविता की आँहें तेज हो रही थी। तब ममता ने कविता को लिटा दिया और उसके ऊपर आ गयी। उसके गालों को चूमा, फिर उसके रसीले होंठों को चूमने लगी। कविता अपनी माँ को गालों से पकड़के भरपूर सहयोग दे रही थी। दोनों की चुच्चियाँ एक दूसरे की चुच्चियों से दबी हुई थी।ममता की चूचियाँ कविता के मुकाबले भारी और बड़ी थी। उनके निप्पल आपस में रगड़ खा रहे थे। दोनों जानबूझकर एक दूसरे की चुच्चियों पर दबाव बना रहे थे। जिससे दोनों को असीम आनंद मिल रहा था। ममता उसको चूमते हुए नीचे की ओर बढ़ी, और उसकी चूचियों को दबाते हुए चूसने लगी।कविता के मुंह से सीत्कारें उठने लगी। ऊहहहहह, आआहहहहहहह, ऊऊईई कमरे में चारों ओर आवाज़ें गूंज रही थी। थोड़ी देर उसकी चुच्चियाँ चूसने के बाद, ममता उसके पेट को चूमते हुए, उसकी बुर पर पहुंची, जहाँ उसकी बेटी की बुर हल्की झाँटों से ढकी हुई थी। ममता ने देखा, वहां कविता ने छिदाई करवा रही थी। उसने इशारों से कविता से पूछा,” ये क्या है? कविता बोली,” आपके बेटे ने करवाया है।” और हंस दी। ममता को ये बहुत आकर्षक लगा। वो कविता की बुर को चूसने लगी।उसकी बुर तो पहले से ही काफी गीली थी। ममता की लपलपाती जीभ, उसके बुर पर एहसास होते ही और ज्यादा रस गिराने लगी। ममता ने ये खेल पहले भी माया के साथ खेला था, तो वो इस खेल की पुरानी खिलाड़ी थी। वो कविता की बुर में उंगलियां घुसाकर अंदर बाहर करने लगी। कविता अपने बुर के ऊपरी हिस्से को गोल गोल घुमाते हुए सहला रही थी। दूसरे हाथ से ममता के सर को पकड़े हुए थी। ममता कभी उसके बुर को हाथों से रगड़ती, कभी अपनी जीभ से उसके खट्टे नमकीन बुर के रस को चाटती। उसके बुर में एक एक करके अपनी दो उंगलियां घुसा देती और ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर करते हुए, हिलाती। बुर पर चिकनाई कम होती तो थूक देती थी। कविता तो जैसे सातवें आसमान पर थी।
उसे कुछ अलग आनंद आ रहा था। एक पुरुष और एक स्त्री के हमबिस्तर होने का अपना अलग आनंद है ये उसे आज पता चल गया था। थोड़ी ही देर में वो जोरों से झड़ गयी। उसके बुर से ढेर सारा पानी निकला, जो बिस्तर को गीला कर गया। ममता ने उसकी ओर देखा, तो कविता अपनी पीठ बिस्तर से उचकाए, आहें भर रही थी। ममता का चेहरा उसके बुर के रस से भीग चुका था। वो उसके करीब आई और उसको चूमने लगी। कविता अपने होंठ पर उसके बुर के रस को महसूस कर रही थी। हालांकि, वो बुर के रस के स्वाद से परिचित थी। पर किसी औरत के होंठों से पहली बार चख रही थी। दोनों ने एक लंबा पैशनेट किस किया। कविता और ममता किस करते हुए बिस्तर पर बैठे हुए थे। माम्बत की जाँघे कविता की जांघों के ऊपर थे। दोनों की टांगे एक दूसरे की पीठ की ओर थी। अब कविता की बारी थी। दोनों की चुच्चियाँ आपस में टकरा रही थी। दोनों मुस्कुराते हुए अपनी चुच्चियाँ पकड़के निप्पल से निप्पल लड़ा रही थी। ये एक बेहद काम्यक नज़ारा था। कविता ने फिर ममता के चेहरे को हाथों से सहलाया और उसके मुंह में उंगली घुसा दी। ममता वो कामुक अंदाज़ में चूसने लगी। कविता ने खुद अपनी माँ के चूचियों को हाथों से तौला। उसे वो बेहद आकर्षक लग रहे थे। उससे रहा नही गया, तो बिना देर किए, वो उसको चूसने लगी। ममता अब कामुकता से लबरेज़ भूल गयी थी, की कविता उसकी बेटी है। दोनों अपनी प्यास बुझाने में लीन थी। थोड़ी देर बाद कविता ममता की चुच्चियों को चूसने के बाद, उसको बिस्तर पर लिटा चुकी थी। ममता बिस्तर पर पेट के बल लेटी थी। कविता उसकी पीठ चूमते हुए, उसके कमर की ओर बढ़ी। उसकी कमर को चूमते हुए, कविता ममता की गाँड़ की दरार तक जा पहुंची। कविता ने फिर महसूस किया कि क्यों मर्द औरतों की गाँड़ के पीछे पड़े रहते हैं। औरतों की गाँड़ दर असल मर्दों को न्योता देती है। जिसकी गाँड़ जितनी सुडौल उतना बढ़िया आमंत्रण। ममता की गाँड़ इसका उत्कृष्ट उदाहरण थी। कविता ममता के चूतड़ों को चूम रही थी। वो उनको हटाकर अंदर के हिस्से को भी जीभ से चाट रही थी। कविता थूक कर उसकी गाँड़ को गीला कर दिया। और अपने हाथों से मल दी। वो गाँड़ चाटने लगी। तभी उसके नथुनों में बुर की रस की सौंधी सी कामुक खुश्बू टकराई। वो ममता के बुर से चूते रस की थी। कविता खुद को रोक ना सकी। वो ममता के बुर को चाटने लगी। वो किसी कुत्ती की तरह, जो बहते पानी को चाटती रहती है, बिल्कुल वैसे ही चाट रही थी। ममता उसके सर को पकड़के अपनी बुर पर दबा रही थी। इस तरह कुछ देर बुर चटवाने के बाद, ममता पलटी और कविता को बुर की ओर फिर ले आई। कविता अब अपनी जन्मस्थली को पहली बार सामने से देख रही थी। ममता की बुर आज भी गुलाब की पंखुड़ियों सी थी। बेहद आकर्षक और लज़ीज़। उसकी बुर से चूता रस थूक समान लसलसा था। और कविता के थूक की वजह से और चमकदार हो उठा था। कविता उसकी बुर को फैलाई और अपनी जीभ उसमें घुसा दी। ममता चिहुंक उठी। कविता के इस हमले से उसकी सीत्कारें गले से फुट पड़ी। बुर में कई दिनों बाद कोई दूसरा उसके बुर से छेड़खानी जो कर रहा था। कविता लगातार बुर की चुदाई कर रही थी अपनी जीभ से। ये कविता के लिए बिल्कुल नया अनुभव था। अपना बुर का रस तो सब खूब चख था, पर किसी और औरत का वो पहली बार चख रही थी। दोनों माँ बेटी काम के सागर में गोते लगा रहे थे। कविता की नाक से लेकर ठुड्ढी तक सब भीग चुके थे। कविता जब जीभ से थक गई तब उसने ममता की छितराई बुर में दो उंगलियां घुसा दी, और अंदर बाहर करने लगी। दूसरे से वो ममता के बुर को सहला रही थी। ममता बीच बीच मे उत्तेजना से अपनी बुर पर थपकियाँ मार रही थी। काफी देर ऐसा ही चलता रहा। पर ममता अभी झड़ी नही थी। कविता फिर उसकी टांगों के बीच आ गयी और अपना बुर और ममता का बुर आपस में चिपका दी। और कमर की ज़ोर से बुर को बुर पर रगड़ने लगी। ममता की दांयी टांग कविता के बाएं कंधे पर था। दोनों को इसमें आनंद मिल रहा था। दोनों ज़ोर लगाकर बुर को रगड़ रही थी। ममता अपनी चुच्ची खुद ही दबा रही थी, और खुले मुंह से आँहें भर रही थी। कविता भी सीत्कारें मार रही थी। बहुत उत्तेजक और कामोत्सर्जक दृश्य था। कविता के बाल खुले थे और उसकी नंगी चुच्चियाँ कमर की धुन पर हिल रही थी। अब ममता के लिए खुद को रोक पाना मुश्किल हो रहा था। कविता भी चरम सुख के निकट थी। दोनों माँ बेटी एक साथ झड़ गयी। और चीखें मारते हुए एक दूसरे पर निढाल हो गयी। दोनों को थोड़ी देर बाद होश आया। पर उनके बीच कोई ग्लानि नही लग रही थी।
दोनों एक दूसरे की बांहों में बाँहे डाले थी। और एक दूसरे को चूम रही थी।
कविता- माँ आज एक अलग ही आनंद आया।
ममता- हाँ कविता, एक औरत का औरत के साथ बिल्कुल अलग अनुभव होता है। तुम आज पहली बार औरत के साथ ये की हो ना, इसलिए बहुत मज़ा आया होगा।
कविता- तुम कहना क्या चाहती हो, ये तुम्हारा पहला बार नही था। मतलब तुम किसी और औरत के साथ भी ये सब की हो माँ?
ममता- हाँ, कविता हम और तुम्हारी मौसी माया पहले भी ऐसा कर चुके हैं।
कविता- तुम तो बहुत पहुंची हुई खिलाड़ी हो। सच सच बताओ तुम दोनों शशि के साथ भी एक साथ चुदी हो ना? है ना… है ना….
ममता- हां हम दोनों एक साथ बहुत बार शशीजी से चुदी हैं। एक ही बिस्तर पर, एक ही मर्द से।
कविता- हमको लग ही रहा था, तुम बहुत बड़ी छिनार हो माँ।
ममता हंसी तब तो तुझ जैसी छिनार बेटी हुई है, जो अपने भाई से चुदवाती है। अब अपनी माँ के साथ भी खुल गयी हो।
कविता- सच कहा माँ, छिनार ही है हम दोनों। अब जब कि जय के साथ हम दोनों बीवी बनके रहेंगे, तो हमारे बीच ये खुलापन होना जरूरी था। जय बहुत देर इंतज़ार नहीं करनेवाला है। एक ना एक दिन हम दोनों को एक साथ बिस्तर पर चोदेगा ही चोदेगा। इसलिए हम दोनों का आपस में खुलना जरूरी था।
ममता- सच कहा, कविता। ये हुआ तो ठीक ही हुआ। हम दोनों भी अब माँ बेटी के साथ साथ पक्की सहेलियां बन गयी हैं।
कविता- माँ, एक बात पूछूँ, बुरा तो नहीं मानोगी?
ममता- पूछ ना।
कविता- तुम, शशि से खुश थी, ये रिश्ता जोड़कर? और जहां तक अब तुमको जान गए हैं, हमको लगता है, तुमको एक नए मर्द की तलाश थी। हमको लगता है उसका अब खड़ा भी नहीं होता होगा। वो पहले से ही बहुत नशेबाज था।
ममता- ये रिश्ता हम मजबूरी में जोड़े थे, पर बाद में मज़ा आने लगा था। हर औरत की शारीरिक ज़रूरत होती है। वो तेरे बाबूजी पूरा नहीं कर पाते थे। हाँ ये सच है कि अब शशिकांतजी का क्षमता कम हो गयी है। और जैसा कि तुमको पता है कि, घर की बात घर में रहे तो ठीक है। पहले शशिकांत थे और अब जय होगा।
कविता- वाह माँ, तुमसे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। पर हम भी तुमको बहुत कुछ सीखा सकते हैं।
ममता- क्या?
कविता- हम दोनों को फिट होना पड़ेगा। अब चुकी हम दोनों जय से चुदवा चुके हैं, तो जानते हैं कि जय को अलग अलग तरीके से चोदना पसंद है।तुमको मैनीक्योर, पेडीक्योर सब करवाना होगा। फेसिअल वैगरह सब। अब लड़कों को खुद को फुल मेन्टेन करनेवाली औरतें चाहिए। हम लोग कल से वी * * सी जॉइन करेंगे। वहां फिटनेस के साथ साथ ब्यूटी का भी पूरा ध्यान रखा जाता है।
ममता- ठीक है। हमको भी जमाने के साथ चलना होगा। लेकिन जय को अभी कुछ नहीं बताएंगे। उसको चौंका देंगे।
कविता- हाँ, हम दोनों को देख उसके होश उड़ जाएंगे।
(आज का दिन)
उन दोनों के मुंह से ये बातें सुन जय का मुंह खुला था। ममता और कविता हसने लगी। दोनों ने उसका मुंह बंद कर दिया। एक साथ उसके होठों को चुम्मा लेकर।
ममता- अब हम दोनों, में कोई शर्म लाज़ नहीं है। आज हम माँ बेटी अपनी सुहागरात एक साथ मनाएंगे। हम दोनों को एक ही बिस्तर पर चोदोगे जय।
जय ममता और कविता को बारी बारी से चूमा और बोला,” आज की रात, बहुत मजेदार होगी। आज तुम दोनों खूब चुदोगी, एक दूसरे के सामने, इसी बिस्तर पर।
कविता- उससे पहले हम दोनों ने तुम्हारे लिए, कुछ प्लान कर रखा है। उसका मज़ा लूटो।
जय- क्या?
ममता और कविता मुस्कुराई और बिस्तर से उतर गई। फिर म्यूजिक सिस्टम पर गाना लगाया,” ये मेरा दिल प्यार का दीवाना…”
और नाचने लगी। दोनों बेहद कामुक तरीके से नाच रही थी। फिर दोनों ने एक एक करके अपने कपड़े गानों की धुन पर उतारने लगी। पहले चोली उतरी, फिर लहँगा सडकते हुए फर्श पर गिर गया, लाल पैंटी में दोनों कमर मटकाते हुए नाच रही थी। कभी गाँड़ पीछे से दिखाते हुए जोरों से हिलाती, तो कभी चुच्चियाँ। दोनों ने कोई आभूषण नहीं उतारे। दोनों एक दूसरे को चूम भी लेती। और एक दूसरे की चूचियाँ और गाँड़ दबा देती। खुद को सहलाती और कभी एक दूसरे को। उनके पैरों में जांघों तक मेहन्दी लगी थी, और हाथों में बांहों तक। चुच्चियों के निप्पल पर चारों ओर मेहन्दी से गोल गोल डिज़ाइन बने थे। दोनों नाचते हुए जय के करीब आयी, और उसको अपने साथ खींच लिया। जय उन दोनों को पकड़के नाचने लगा। दोनों फिर जय के कपड़े उतारने लगे। ममता उसका कुर्ता और कविता उसका पायजामा उताड़ दी। जय का कच्छा और बनियान भी उतरने में देर नहीं लगी। जय नंगा हो चुका था। उधर ममता की पैंटी में हाथ घुसाकर वो उसकी गाँड़ टटोल रहा था। कविता नीचे उसका लण्ड हाथों में पकड़े चूम रही थी। जय,” माँ दीदी तुम दोनों अपनी कच्छी उताड़ दो। हम नंगे है, तो तुम दोनों भी पूरी नंगी हो जाओ। इतना सुनना था, की ममता ने अपनी कच्छी उताड़ दी, और कविता ने भी बिना देर किए उसको उताड़ दिया। दोनों की बुर एक दम चिकनी थी। एक बाल भी नहीं था, जैसे उसपर कभी बाल ही ना उगे हो। और बुर के ऊपर जहां झांट होती हैं वहां भी मेहन्दी लगी थी। जय का लण्ड ये सब देखकर कड़क हो चुका था। आज की रात शायद ममता और कविता पूरा प्लान बना कर आआई थी। आज उन दोनों की खैर नहीं थी। जय खड़ा था, और ममता और कविता नीचे घुटनों पर बैठकर उसका लंबा लण्ड चूस रही थी। जय को वो दोनों भूखी शेरनी की तरह लग रही थी। जैसे भूखे को बहुत दिन बाद खाना मिलता है ठीक उसी तरह दोनों लण्ड पर टूट पड़ी थी। दोनों उसकी ओर देखकर लण्ड चाट रही थी।
जय- तो उस रात तुम दोनों ने कितनी बार सेक्स किया?
कविता- तीन बार। लण्ड का सुपाड़ा चूसकर बोली।
जय- तुम दोनों बहुत चुद्दक्कड़ लग रही हो। आज बहुत चुदासी भी हो।तुम दोनों की खूब चुदाई करेंगे।
ममता- हमलोग कब मना किये। तुम्हारे चुदाई का तरीका तो हम दोनों को पता है।एक दम गंदी और घिनौनी चुदाई करते हो। हम दोनों उसके लिए तैयार हैं।
कविता- हम माँ को बहुत ब्लू फिल्म दिखाए हैं, ताकि उन सब चीजों से परिचित हो सके। आजकल हर मर्द चाहता है कि उसकी बीवी बिस्तर में ब्लू फिल्म की हीरोइन के तरह चुदवाये।
दोनों आंड़ और लण्ड चूसते हुए बोली।
जय अपना लण्ड चुसवा रहा था। उसका लण्ड पूरी तरह तन गया था। उसकी माँ ममता और दीदी कविता अपने मुंह से उसके लण्ड की सर्विसिंग कर रही थी। उसके लण्ड को दोनों बारी बारी से मुंह मे घुसाकर चूस रही थी। कभी कविता चूसती तो कभी ममता। दोनों अपने थूक से उसके लण्ड को नहला चुकी थी। ममता और कविता लण्ड चूसते हुए एक दूसरे को बीच बीच में चुम्मा भी ले लेती। चुम्मा लेते हुए दोनों एक दूसरे के होंठ जीभ सब चूसती। एक दूसरे के मुंह से लेर के धागे भी बन जाते थे। फिर दोनों बारी बारी से लण्ड और आंड़ चूसने लगती। दोनों लण्ड के आजु बाजू बैठी थी। और लण्ड को साइड से आधा होंठों के बीच दबाए सुपाडे से लेकर लण्ड के जड़ तक हिलाती। इस कामुक दृश्य को शायद ही कोई मर्द नहीं चाहेगा। जय ने उसी समय लण्ड पर थूका, और वो ममता के होंठों और कविता के नाक पर गिरा। दोनों उसकी ओर ही देख रही थी। उन्होंने अपने होंठ और नाक लण्ड पर रगड़ें, और सारा थूक लण्ड पर मल दिया। जय ने ऐसा तीन चार बार किया, और उनकी हरकतों को देखकर बोला,” दीदी तुम दोनों तो बिल्कुल पोर्नस्टार्स की तरह लण्ड चूस रही हो और उनके जितनी घिनौनी हरक़तें भी कर रही हो। हम कितना लकी हैं कि तुम दोनों हमारी बीवी बनी और सेक्स का असली आनंद दे रही हो।”
ममता लण्ड चूसना छोड़ बोली,” औरत का काम यही है, बाहर जितनी शरीफ बिस्तर में उतनी ही बड़ी रंडी। तुमको क्या लगता है कि, बस तुम मर्दों को मज़ा आता है, गंदी सेक्स में, जिसमें गालियां होती हैं, घिनौनी और गंदी चुदाई होती है। नहीं, हम औरतें भी इसको बहुत मज़े लेकर करती हैं।आज की रात तुमको सब बताएंगे।
कविता- हां, जय हम दोनों आज तुम्हारे होश उड़ा देंगे।” कविता लण्ड पर थूकते हुए बोली। ममता और कविता अपने हाथों से लण्ड को थूक से मल रही थी।
जय ने ममता को बोला,” अरे रंडी साली ये लण्ड को पूरा मुंह में घुसा ले, और अपनी बेटी को हरा। और तुम कविता रंडी तुमको इस कुतिया को हराना है। दोनों में से जो लण्ड का ठीक से सेवा करेगी वही पहले अपना बुर आज की रात चुदवायेगी।
कविता,” ये कैसे पता चलेगा, कि किसने अच्छी सेवा की?
जय- जो ज्यादा देर मुंह को लण्ड में पूरा घुसाके रखेगी, वही जीतेगी। उसकी बुर को हम सबसे पहले चोदेंगे। देखते हैं कि माँ जीतती है या तुम दीदी।
ये बोलना था कि ममता ने बिना देर किए, लण्ड मुंह में घुसा लिया। वो लण्ड के जड़ तक जा पहुंची। उसके ऊपरी होंठ जय के झांट से लड़ रहे थे, और निचला उसके आंड़ से। जय के मुंह से बस,” उफ़्फ़फ़फ़फ़” निकला। कविता ममता का सर पीछे से दबा रही थी। जय उसकी नाक दबाए था। फिर भी वो बेचारी लण्ड से मुंह नहीं हटाई। उसके मुंह से लेर लगातार चू रहा था। ममता की आंखें जय की आंखों में लगातार देख रही थी। उसकी सांसें धीरे धीरे उखड़ने लगी। पर जय उसको और लंबा खींचने की प्रेरणा दे रहा था। आखिरकार 35 सेकंड तक रोकने के बाद वो स्वतः हट गई। वो जोर जोर से सांसें ले रही थी। आंख में लाल धागे खींच गए थे। जय ममता के बाल सहला रहा था। इस उम्र में ये बहुत बड़ी हिम्मत की बात थी। कविता अगले ही पल जय के तने हुए लौड़े को गले की गहराइयों में उतार गयी। लण्ड कविता के कंठ को छू रहा था। अबकी ममता कविता के सर को पकड़कर जय के लण्ड पर जोर लगा रही थी। उसने बोला,” हां, सोचो कि तुम इसी पल के लिए जन्मी हो। अपने भाई का लण्ड मुंह में जितनी देर घुसओगी उतनी देर ये तुमको चोदेगा। तुम हमारी बेटी हो, ये साबित करो। हर माँ चाहती है कि उसकी बेटी, उससे भी आगे निकले। तुम कर सकती हो।”
कविता अपनी माँ का प्रोत्साहन पाकर,बड़ी देर तक जूझी, पर आखिरकार अपनी माँ के बराबर देर ही कर पाई।
कविता खौ खौ कर खांस रही थी। ममता फिर आंड़ सहलाते हुए अपनी जीभ से पूरा लण्ड चाट रही थी। जय तो सातवें आसमान पर था। दोनों के ठुड्ढी, और चुच्चियों पर अत्यधिक थूक से चमक रहे थे, जो मुख चुदाई के बाद गिरे थे। जय उन दोनों के साथ बड़ी देर तक मुख मैथुन करने के बाद, उनको उठाया और बिस्तर पर चलने के लिए बोला। ममता और कविता बिना कपड़ों के और पूरे गहनों में थी। दोनों के मांग में टीका, कानों में झुमका, नाक में नथ, गले में हार, हाथों में लाल चूड़ियां, कमर में कमरबंद, पैरों में पायल, हाथों की उंगलियों में अंगूठियां, पैरों में बिछियां। कपड़ों के नाम पर बदन पर एक चिन्दी टुकड़ा भी नहीं था। दोनों बहुत ही कामुक अंदाज़ से गाँड़ मटकाते हुए चल रही थी। जांघों और बांहों तक लगी मेहन्दी भी किसी गहने से कम नहीं थी। जय उन दोनों के चूतड़ सहलाते हुए आगे बढ़ रहा था।
जय- तुम लोगों ने मेहन्दी बहुत सेक्सी लगाई हुई है। बहुत मस्त लग रही हो दोनों।
ममता- कविता ने ब्राइडल मेकअप के लिए बुलवाया था। हम दोनों ने एक साथ करवाया।
तीनो बिस्तर पर पहुंच गए। कविता और ममता दोनों बिस्तर पर पहुंच कर घुटनो के बल बैठ गयी। जय उन दोनों के बीच आ गया और अपना चेहरा दोनों की चुच्चियों के सामने रख बोला,” अरे हमारी रंडियों अपना चुच्ची हमारे मुंह पर रगड़ो।
कविता और ममता खिलखिलाकर हंस पड़ी, और अपनी चूचियों को दोनों हाथों से पकड़ उसके मुंह पर रगड़ने लगी। जय का चेहरा चार चूचियों के बीच चहक रहा था। वो उन दोनों की बुर को सहला रहा था। जय बुर को जैसे मुट्ठी में बंद कर भींच लेता। दोनों सिसक उठती और आहें भरती। जय कभी ममता की चुच्ची चूसता तो कभी कविता की। वो बड़े जोरों से चूस रहा था। उसके दांत चूचियों के आस पास अपने निशान छोड़ रहे थे। दर्द होते हुए भी ममता ने कुछ नहीं कहा और नाहीं कविता ने। दोनों बस इस कामोन्माद में बहकर खुदको और जय को सम्पूर्ण सुख देना चाहती थी। कुछ देर ऐसे अपनी चुच्चियाँ चुस्वाकर दोनों उत्तेजित हो गयी। दोनों जय से लण्ड की भीख मांगने लगी। कविता बोली,” जय अब अपनी दीदी की बुर को चोदो, अब बुर से बर्दाश्त नहीं हो रहा। तुम्हारे लौड़े के लिए, देखो कितना पानी चुआ रही है। ये तुम्हारे लण्ड का स्वागत करने को बेताब है।”
ममता,” हाँ, बेटा सैयांजी अपनी मैय्या की बुर को ज़रा देखो, कैसे तड़प रही है, तुम्हारे जवान लण्ड के लिए। तुम्हारे जैसे मन चाहे वैसे पेलो। लिटाके, कुत्ती बना के, खड़ा करके, गोदी में लेकर।
जय- अभी नहीं, तुम दोनों का बुर अभी कहां चाटे हैं। इतना बढ़िया बुर का रस निकलता है। पहले तुम दोनों का बुर का रस पीकर, अपनी प्यास और बढ़ाएंगे, फिर तुम दोनों की ठुकाई शुरू करेंगे।
जय ने दोनों को एक दूसरे के ऊपर लेटने को कहा। ममता नीचे पीठ के बल लेट गयी और कविता उसके ऊपर लेट गयी। दोनों एक दूसरे की ओर देख रही थी।उनकी चुच्चियाँ आपस में दबी हुई थी। दोनों अपनी टांगे फैलाये थी ताकि बुर बाहर की ओर निकली हो। ममता और कविता की बुर बाहर की ओर निकल देख, जय उनकी टांगों के बीच आ गया। और जैसे कोई कुत्ता जूठा पत्तल चाटता है ठीक वैसे ही बुर को चाटने लगा। कविता की गाँड़, भी पहाड़ की तरह उठी हुई थी। जय उसको मसलते हुए बुर से रिसते हुए रस को चाटे जा रहा था। ममता और कविता उधर आपस में चुच्चियाँ रगड़ते हुए, एक दूसरे के मुँह में जीभ घुसाके उसका स्वाद चख रही थी। अपनी बुर में कभी जय के जीभ का एहसास होता, तो कमर खुद ही हिलने लगती थी। जय, ममता और कविता दोनों के बुर में दो दो उंगलियां घुसाके अंदर बाहर कर रहा था। उस घर की हर दीवार और छत से माँ और बेटी की आवाज़ गूंज कर वापिस लौट रही थी। दोनों की काम वासना, अद्भुत कामुक आहें और सीत्कारों के माध्यम से बाहर आ रही थी। कभी जय उनकी बुर की फांकों को अलग कर बुर का रसास्वादन करता, कभी बुर के ऊपरी हिस्से जहां क्लाइटोरिस होता है उसको चाभता। ऐसा बहुत देर तक चला। जब जय ने मन भर उनके बुर का रस पी लिया, तब उसने सबसे पहले, कविता को ममता से अलग किया, और ममता की बुर पर थूक दिया। अपने तगड़े लण्ड से उसे बुर पर मलने लगा। ममता की बुर से छेड़खानी कर रहा था। ममता अब लण्ड के लिए लगभग तड़प रही थी। उसने जय की ओर कामुक नज़रों से देखते हुए कहा,” इस अभागन को और मत तड़पा, हम चुदाई के आग में जल रहे हैं, जिसका केंद्र ये बुर है। अपना लण्ड घुसा दो और पापिन को अपने लण्ड के एहसास से पवित्र होने दो।
जय- क्या बोलती हो कविता?
कविता- जय ये सच कह रही है, अपना लण्ड घुसाकर, तुम मादरचोदों के इतिहास को गौरव प्रदान करोगे। तुम्हारा लण्ड उस जगह घुस रहा है जहां से तुम इस दुनिया मे पैदा हुए हो। माँ को चोदो, और अब अपना बच्चा इसके पेट मे आने दो।” कविता ममता का पेट सहलाते हुए बोली।
ममता और कविता बहुत कामुक स्वर में ये बात बोली। जय कविता के गाल सहलाते हुए बोला,” तुम दोनों को चोदकर माँ बनाएँगे। दोनों के गोद में बच्चे खेलेंगे। पर हम इतनी जल्दी बच्चा नहीं चाहते। तुमलोगों को पहले ठीक से भोगेंगे। वैसे इस रंडी को जल्द ही बच्चा देना होगा, क्योंकि इसके पास टाइम कम है।”
जय अपना लण्ड ये बोलते हुए ममता की बुर की गहराइयों में उतार दिया। कविता ममता के पास जाकर उसको किस कर रही थी। कविता इस समय अपने घुटनों पर थी और ममता नंगी लेटी थी। ये ममता की तीसरी सुहागरात थी, जिसमे तीसरा दूल्हा उसकी बुर की चुदाई शुरू कर चुका था। जय एक हाथ से ममता की दांयी चुच्ची, और कविता की गाँड़ सहला रहा था। कविता अपनी गाँड़ के छेद पर, जय की उंगलियां महसूस कर मुस्कुराई और उसकी ओर देखकर बोली,” गाँड़ तो तुम्हारा सबसे पसंदीदा हिस्सा है, इसलिए हमने, अपनी गाँड़ की सफाई और ट्रेनिंग की है। आज की रात हर छेद तुम्हारे लण्ड को स्वीकार करेगी।”
ममता उधर खूब चुच्चियाँ दबाकर, चुदवाने में मशगूल थी। लण्ड का एहसास बड़े दिनों बाद मिला था। उसके होंठ दांतो तले आ गए। वो पूरी तरह सेक्स की चाह में, चुदवा रही थी। जय उसे चोदे जा रहा था।जय की कमर लगातार ममता की बुर में धक्कों के साथ, हिल रही थी। ममता की भी कमर हिल रही थी। कविता उससे लिपटी हुई थी। कविता ममता के बाल सहलाते हुए पूछी,” माँ, बेटे का लण्ड लेकर कैसा लग रहा है। बेटा ठीक से चोद रहा है ना?
ममता जय के धक्कों की वजह से ऊपर नीचे हो रही थी, कविता के गाल सहलाते हुए कांपती आवाज़ में बोली,” बहुत अच्छा लग रहा है, जब बेटे का लण्ड माँ की बुर में घुसा हुआ है। जो बागबान फल उगाता है, उसे तो उसे चखना चाहिए।”
जय- माँ ये बात तो शाहजहाँ ने अपनी सगी बेटी के लिए कहा था। और तुम अपने बेटे के लिए कह रही हो।”
कविता- तुम्हारा इतिहास का रिवीजन हो रहा है। IAS बनोगे ना।
तीनों हंसे और फिर चुदाई के खेल में लग गए। एक माँ अपने बेटे से अपनी बेटी के सामने निश्चिन्त और निश्फिकर हो चुदवा रही थी। जय को ममता के चेहरे का भाव, उसकी हिलती चूचियाँ बार बार और जोर लगाने को प्रेरित कर रही थी। ममता के कांख के बाल साफ थे, जो हाथ उठाने की वजह से साफ दिख रहे थे। चूचियों पर निप्पल के आसपास गोलाकार डिज़ाइन में लगी मेहन्दी, मस्त लग रही थी। ममता की चुच्चियों को हाथों में दबाकर, पकड़ बनाये हुए थे। ममता, किसी नवयुवती की तरह चुदवाते हुए, जय के लण्ड के एहसास को महसूस कर रही थी। वो उस एहसास से मचल रही थी।
ममता- बेटा, चोद और चोद अपनी,रंडी माँ को, जो अब तेरी दुल्हन भी है। इस दुल्हन का हर अरमान अपने बेटे से पति हुए, यानी तुझसे ही पूरा होगा। हम इस दुनिया का सबसे बड़ा सुख भोग रहे हैं। एक भूखी शेरनी, अपने बच्चे को खा जाती है और एक चुदाई की प्यासी औरत, अपने बेटे का लण्ड लेकर उस प्यास को बुझा सकती है। यही इस दुनिया की रीत है, आखिकार सही आदमी सही जगह पहुंच ही जाता है।
कविता- माँ, ये तुम्हारा बेटा, तुम्हारा खूब ख्याल रखेगा। तुम अब प्यासी नही रहोगी। तुमने जो इतने साल बगैर ठीक से चुदे गुजारे हैं, उसकी कमी पूरी कर लो। इस चुदाई का पूरा आनंद लो। ये तुम्हारा अधिकार है।”
ममता- हाँ बेटी, अब तो हमको कोई डर नहीं है। सब कुछ हमलोगों के सामने ही हो रहा है। आआहह…… लण्ड की प्यास तो अब तुम भी समझ गयी हो। एक औरत को अगर ठीक से चोदने वाला मिल जाये ऊऊईईईई….., तो वो आधी खुशी वैसे ही पा लेती है। ये अब तुम भी समझ जाओगी। ऊहहहहहह…..
कविता ममता की बुर के ऊपर हिस्से को मसल रही थी। दोनों बीच बीच में आपस मे किस भी कर रही थी। जय उन दोनों की कामुक बातें सुन रहा था, और माँ बेटी से सौतन बनी, दोनों औरतें, अपने पति के सामने आपस में प्यार भी कर रही थी। दोनों एक दूसरे को सहलाते हुए, ऐसी ही बातें कर रही थी। तभी ममता के अंदर का लावा फूट पड़ा। वो शायद पहली बार इस तरह इतनी जल्दी झड़ी थी। शायद ये अपनी बेटी के सामने, बेशर्मों की तरह बेटे से चुदने का असर था। वो लंबी चीख और आह भरते हुए, झड़ी। कविता उसे सहला रही थी। जय ने अपना लण्ड निकाला और कविता को कुत्ती बनाकर उसके बुर में लण्ड उतार दिया। कविता इस एहसास से अभिभूत हो उठी। पिछले 10 दिनों से बुर में बिना लण्ड लिए, वो जल बिन मछली की तरह तड़प रही थी। जय का लण्ड घुसते ही वो पागल हो उठी। जैसे किसी प्यासे को रेगिस्तान में पानी का दरिया मिल गया होगा। जय उसके कमरबंद को पकड़े हुए, उसकी चुदाई कर रहा था। ममता जय के पास आकर उसे चूम रही थी। दोनों की जीभ आपस में टकड़ा रहे थे।
ममता- अब हम समझ गए हैं, तुम हम दोनों के लिए ही जन्मे हो। तुमको हम इसी लिए जन्म दिए, ताकि तुम बड़े होकर हमको और हमारी बेटी को अपनी रखैल बनाकर चोदोगे। ये तो विधि का विधान है, की सौभाग्य से तुम हमारे कोख से पैदा हुए, नहीं तो तुमको हम दोनों कहाँ खोजते।
जय- हाँ, माँ तेरी बुर से पैदा हुआ हैं, ताकि इसी बुर को एक दिन चोदे। अपनी सगी बहन को तुम्हारे ही सामने, चोदे और तुमको दादी और नानी एक साथ बनाये।
कविता- आआहह, ओह्ह अपनी दीदी को अपनी रांड बना लो। छिनार हैं हम दोनों। हमारे घर की सब औरतें छिनार है। हम, माँ, मौसी, नानी सब वैसे ही हैं।
जय- तुम सबको हम अपने बिस्तर की रानी बनाएंगे। तुमलोगों को कभी भी सेक्स की भूख नहीं सताएगी।
ममता- जिस घर में तुम जैसा मर्द हो, उस घर में औरतें कभी प्यासी नहीं रह सकती। ये तो हमारा नसीब है कि, तुम हमको मिले हो।अब तो इस घर में माँ बेटी तुम्हारी दासी बनके रहेंगी। तुम जैसे चाहोगे, जब चाहोगे हम हाज़िर हो जाएंगी।
जय- माँ, तेरी बेटी और तुम हमेशा खुद को तैयार रखना। ये सेक्स की जो आंधी शुरू हुई है, ये कब रुकेगी ये अभी कहना मुश्किल है।
ममता जय के लण्ड पर थूक लगाकर कविता के बुर से अंदर बाहर होते लण्ड को जीभ लगाकर चाटने लगती है। वो जय के आंड़ को भी चाट रही थी। कविता लगातार हो रही चुदाई से खुद को संभाल ना पाई और कांपते हुए झड़ गयी। वो करीब दो बार झड़ी। पर जय का लण्ड अभी भी खड़ा था, और अभी तक गिरने का नाम भी नहीं ले रहा था। दोनों माँ बेटी ने एक दूसरे को खूब किस कर रही थी। जय बिस्तर पर लेट गया और ममता, उसके ऊपर चढ़ गई। वो जय के लण्ड को अपने बुर में घुसा ली, और खुद उछल उछल कर चुदवाने लगी। ममता अपने खुले बाल अपने हाथों से पकड़े हुए, जय की ओर घूमकर चुदवा रही थी। जय उसकी कमर पकडे हुए था। तब कविता उसके मुंह पर आकर अपना बुर उसके होंठों से छुवाने लगी। जय अपनी लपलपाती जीभ से उसकी बुर चाटने लगा। कविता की कमरबंद के आगे का छोटा झूमर उसके बुर तक लटका था, ठीक वैसे ही ममता के बुर पर भी एक झूमर लटका था। उसके हिलने से हल्की रुनझुन जैसी आवाज़ें आ रही थी। कविता के बुर का एहसास होते ही जय ने कविता को अपने मुंह पर बैठा लिया। कविता अपना बुर उसके मुंह पर रगड़ने लगी। दोनों माँ बेटी आमने सामने बेटे के लण्ड और भाई के मुंह से चुदाई का अनोखा आनंद उठा रहे थे। कविता की भी कमर हिलने लगी थी। और ममता तो अब आहें भर भरकर उछल रही थी। धीरे धीरे उत्तेजना फिर बढ़ रही थी। ममता के चूतड़ों पर जय ने कसके सात आठ चाटें मारे। पर ये उसके लिए और उत्साहवर्धक थे। ममता खुद ही, अपने चुच्चियों को मसल रही थी। कविता अपने चूतड़ों पर खुद ही थप्पड़ मार रही थी। वो ममता के कंधों पर हाथ रखे हुए थी। और फिर अचानक दोनों आपस मे किस करने लगी कामोन्माद में आकर। दोनों जैसे एक दूसरे को नोचना चाहती हो। दोनों खूब उछल उछल रही थी। तभी दोनों एक साथ झड़ी। जय के मुंह में कविता का बुर का रस बह गया। और उसका लण्ड ममता के बुर के रस से। पर जय इस बात से हैरान था कि वो अब तक कैसे नहीं झड़ा।
दोनों माँ बेटी, जय के आजु बाजू लेट गए। जय कविता से कुछ पूछने ही वाला था, की तभी कविता बोली,” हम बाथरूम से आते हैं। हमको पेसाब लगा हुआ है।”
जय ममता की ओर घुमा,और पूछा,” हम अभी तक नहीं झड़े हैं।और सेक्स की भूख बढ़ ही रही है, ऐसा क्यों?
ममता- दूध में हमने कुछ आयुर्वेदिक औषधि मिलाई थी। इसलिए आज तुम्हारा बहुत देर बाद निकलेगा। आज पूरी रात कोई नहीं सोएगा। ना तुम ना हम और ना कविता।

