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अध्याय ५५: राशि, शिखा और सबीना 

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अगला चरण दुहरी चुदाई का था. सभी रोमियो अब शिखा को भोगने के ही इच्छुक थे. राशि को चोदने में अब उनके लिए कोई नयापन नहीं था, हालाँकि वो चुदवाती पूरे उत्साह से थी. राशि, शिखा, मेहुल तथा अन्य रोमियो आज रात होने वाली घटनाओं को सोचकर उत्तेजित हो रहे थे. एक बार फिर मदिरा सेवन किया गया. अगला चरण और उसके बाद की क्रीड़ा के विषय में सोचकर ही शिखा उत्तेजित हुए जा रही थी. उसने राशि को दो लौडों से चुदते देखा था और अब वो स्वयं इसका सुख लेना चाहती थी.

अब आगे:

मेहुल ने इस बार फिर पीछे रहकर देखने का निर्णय लिया. वो देखना चाहता था कि उसके अफ़्रीकी मित्र किस प्रकार से चुदाई करते हैं. अब तक जो उसने देखा था उससे वो अधिक प्रभावित नहीं था. ऐसा प्रतीत हटा था मानो उनके पास लम्बे काले और मोटे लौड़े तो अवश्य थे परन्तु उनका उपयोग उन्हें उपयुक्त रूप से नहीं आता था. उसे राशि की बात ध्यान में आई जिसमे उसने यही कहा था. पर ये अवश्य था कि उनकी चुदाई में जिस शक्ति का वो प्रयोग करते थे उसके कारण भी स्त्रियों को उनसे सुख प्राप्त होता होगा.

मेहुल क्लब की सदस्याओं की रूचि अरुचि से अभी तक अभ्यस्त नहीं था. उसके क्लब से जुड़े हुए अभी कुछ ही दिन हुए थे. उसे ये भी लग रहा था मानो उसे किसी विशेष प्रयोजन के लिए उपयोग किया जा रहा था. इस समय वो अपने अफ़्रीकी रोमियो के कूल्हों की गतिविधि का अध्ययन करना चाहता था. जो बल वो चुदाई में झोंकते थे वो उनके कूल्हों के माध्यम से ही प्रभावी होता था.

राशि ने सबको अपने अगले कथन से हतप्रभ कर दिया.

“मुझे अब और चुदने का मन नहीं है. मैं थक गई हूँ और शुचि के कमरे में जा रही हूँ. मुझे मत जगाना. मैं जब जागूँगी तब आ जाऊंगी।” ये कहते हुए वो कमरे से निकलने लगी.

मेहुल उसके पीछे गया और कमरे से बाहर निकलते ही उसे रोक लिया.

“मैम क्या हुआ. आप अचानक ही…”

मेहुल रुक गया. राशि की आँखों में आँसू थे.

“मैम?”

“मैंने सबको देखा. सब शिखा को चोदना चाहते हैं. मुझ बुढ़िया को कोई नहीं चाहता.”

“मैम चलिए. आपको छोड़ देता हूँ.”

मेहुल शुचि के कमरे तक गया और उसने राशि को अंदर जाने दिया. राशि कमरा बंद करने के लिए रुकी तो वो भी अंदर आ गया.

“आपको मैं अकेले नहीं रहने दूँगा। शिखा जी के पास पाँच रोमियो हैं. मैं आपके साथ रहूँगा। बस मुझे दो मिनट दीजिये. मैं अभी आया.”

राशि का मुंह खुला रह गया. और जब तक वो समझती मेहुल शिखा को बता कर लौट आया. शिखा उसकी बात पूरी भी नहीं सुन पाई क्योंकि उनके मुँह हाथों में लंड थे. मेहुल राशि के पास पहुँचा तो राशि वहीँ खड़ी थी. उसे बाँहों में लेकर उसे चूमते हुए वो कमरे को बंद करके उसे सोफे पर ले गया.

“यहां कुछ पीने के लिए मिलेगा?”

राशि ने एक अलमारी दिखाई और मेहुल ने दोनों के लिए बड़े पेग बनाये. एक राशि को थमा दिया.

राशि ने दो घूँट लिए फिर मेहुल को देखा.

“क्यों?”

मेहुल को समझ नहीं आया कि प्रश्न क्या है.

“क्यों क्या?”

“तुम मेरे साथ क्यों आये?”

“क्योंकि आप स्वयं को कोसने लगी थीं. मैं देख सकता हूँ. अनुभवी नहीं हूँ पर पीड़ा समझता हूँ.”

“तो मेरे ऊपर तुम्हें दया आ गई?”

मेहुल ने कुछ देर सोचा, “नहीं. दया सही शब्द नहीं है. मुझे उन सब पर क्रोध था, जो हुआ उसमे आपका कोई दोष ही नहीं है. और सच कहें तो उनका भी नहीं?”

“उनका क्यों नहीं?” राशि ने पूछा.

“क्योंकि अब तक आप यही दिखाती आई हैं कि आप मिल बाँट कर सब करती हैं. दूसरी स्त्री शुचि हो या शिखा, उनके लिए इसमें कोई अंतर नहीं दिखा. अगर आप शुचि मैडम के साथ में बूढी नहीं होती हैं तो इनके साथ क्यों होंगी. मेरे विचार में उनके मन में ऐसा कोई भाव नहीं था. ये आपके मन की उपज है.”

राशि सोच में पड़ गई. कहीं उसने ईर्ष्या के कारण चुदाई का अवसर तो नहीं खो दिया?

मेहुल, “हम सुबह चलेंगे तो हम सब आपकी एक साथ चुदाई करेंगे. शिखा में आपके जितना सामर्थ्य नहीं है. वो गाँड मरवाने के बाद ही ध्वस्त होने लगी थीं. हमारे लौड़े झेलना सबके वश में नहीं है. अब तक जिनसे वो चुदवाती आई हैं उनमे सम्भवतः न इतना बल था न लौड़े हमारे जितने थे. आप ये जान लीजिये कि सम्भव है सारे रोमियो एक घंटे बाद इस कमरे में आ जाएँ.”

राशि अपनी प्रशंसा सुनकर फूल गई.

“और अगर आपको लगता है कि उनके आने तक मैं आपको छोड़ने वाला हूँ तो आप गलत सोच रही हैं. इसीलिए, अपनी ड्रिंक समाप्त कीजिये, मेरा लौड़ा आपकी चूत और गाँड में तहलका मचाने के लिए खड़ा हुआ है.” मेहुल मुस्कुराया और अपने लंड को हिलाया. राशि की आँखों में वासना के डेरे तैर गए. उसने एक घूँट में अपनी ड्रिंक समाप्त की और मेहुल के सामने घुटने के बल आ गई.

“गुड़ गर्ल. आओ अब इसे चूसो. बहुत देर से तुम्हारी चुदाई के लिए उत्सुक है. बस थोड़ा ही चूसना है. ओके, स्वीटहार्ट?” मेहुल उसे प्रेम के साथ नियंत्रण के लिए जाँच रहा था. वो जानता था कि एक बार उससे अकेले में चुदने के बाद वो उसे भी सुजाता के समान ही अपने वश में कर सकता है. अन्य स्त्रियों की तो बात और थी.

राशि उसके लंड को मुँह में लेकर चाटने लगी. फिर लंड निकाल कर बोली, “तुम मुझ पर अधिकार जमाना चाहते हो, है न?”

मेहुल ने कुछ न कहा.

“पर ऐसा सम्भव नहीं. मैं ऐसे किसी संबंध को आज्ञा नहीं दूंगी. जैसा कि हमारे क्लब में चलन है. ठीक है?”

मेहुल समझ गया कि रूचि की बुद्धि का श्रोत क्या था. उसने कहा, “ठीक है.”

सबीना:

सचिन ने सबीना को देखते हुए कहा.

“इस बार की पार्टी तीन सप्ताह बाद आयोजित है. और मैं आपको आधी पार्टी के बाद उस टब में मूत्र स्नान करते हुए देखना चाहूँगा। क्या आप ऐसा करेंगी?”

“तीन सप्ताह? तब तो अम्मी और निगार भी होंगी.”

“तो क्या हुआ? यही तो क्लब का मंत्र है. अपनी इच्छाओं को पूरा करना. उन्हें संतुष्ट होने के अपने ढ़ंग मिल जायेंगे.”

सबीना सोच में पड़ गई. अपने ग्लास से व्हिस्की पीती हुई वो कुछ न बोली. फिर उठी और बाथरूम जाने लगी और सचिन को संकेत से बुलाया. सचिन उसके पीछे गया और सबीना की प्यास मिटाकर लौटा. सबीना मुँह धोकर आई.

सबीना ने सचिन की ओर देखा और अपना निर्णय सुना दिया.

अब आगे:

“मुझे पता नहीं कि मैं ये कर भी पाऊँगी या नहीं, पर तुम्हारे लिए प्रयास अवश्य करुँगी. सच में सचिन तुमने आकर मेरे जीवन में रंग भर दिया है. मैं तुम्हारी किसी बात से मना नहीं कर पाऊँगी.”

सचिन ने कुछ देर सोचा, “आप अपनी अम्मी और भाभी से सलाह कर लीजियेगा. ऐसा न हो वो वहाँ पर तमाशा कर दें. ऐसा हुआ तो आप तीनों को निकाल दिया जायेगा. मुझे नहीं लगता कि निगार भाभी कुछ समस्या करेंगी, क्योंकि वो इस क्रीड़ा में लिप्त हैं. पर आपको अपनी अम्मी को संभालना होगा.”

“तुम चिंता न करो. अम्मी और निगार दोनों को मैं संभाल सकती हूँ. वो कुछ नहीं करेंगी, पर मैं उन्हें समझाकर ही लाऊँगी।”

“बहुत अच्छा, तो आओ एक पेग और पियो फिर मैं तुम्हें अपने वीडियो दिखाता हूँ.”

सचिन ने सबीना के लिए फिर एक पेग बनाया और उसे अपने सामने नीचे बैठा दिया. सबीना समझ गई.

“यहाँ नहीं. पोंछना कठिन होगा. अंदर चलो.”

सबीना सचिन के सामने जा बैठी. अचानक सचिन ने उसके चेहरे पर धार छोड़ दी. सबीना अपना पेग पी रही थी और सचिन अपना. सबीना अपना पेग पीती रही मानो ये सामान्य घटना हो. सचिन ने उसे उठाया और नहाने भेज दिया. वो कमरे में आकर उन डिस्क को देखने लगा. नूतन ने सबके ऊपर एक पर्ची चिपकाई हुई थी. उन पर अंक लिखे थे कि किसके बाद क्या चलना है. सचिन ने पहली डिस्क टीवी पर लगाई और सबीना की राह देखने लगा.

सबीना आई और सचिन के साथ आकर लेट गई.

सचिन ने उसे बताया, “कई वीडियो हैं, पर मैं आपको उनके कुछ अंश ही दिखाऊँगा। ये वीडियो क्लब के नहीं हैं. क्लब में भी ये सब क्रीड़ाएं होती हैं और उनके भी वीडियो हैं, परन्तु आप अभी क्लब की सदस्या नहीं हैं, इसीलिए आपको वो वीडियो नहीं दिखाए जा सकते.”

“तो क्या मेरा भी वीडियो बनेगा?”

“हाँ, इसका मुख्य कारण है कि कोई बाद में क्लब को दोष न दे. और वो कभी भी क्लब के बाहर वालों को नहीं दिखाए जाते. जब तक आप क्लब से नहीं जुड़ते आपको पता नहीं चलेगा कि कौन उसमें है.”

सबीना ने समझ कर सिर हिलाया.

“आप चाहोगी तो क्लब में आने के बाद आप कुछ वीडियो देख सकती हैं. वहीँ, वहाँ से बाहर उन्हें नहीं लाया जाता, न दिखाया ही जाता है.” सचिन ने ये नहीं बताया कि नूतन और मंजुल के घर में भी संग्रह है. उनका उद्देश्य रोमियो के शिक्षण था न कि सदस्याओं के लिए.

“तो ये वीडियो कैसे हैं?”

“ये इंटरनेट से लिए गए हैं. इनमें से कुछ या कई का क्लब में प्रयोग किया जा चुका है. आपको पता चल जायेगा कि किस वीडियो को क्लब में भी अभिनीत किया जा चुका है. किसके साथ नहीं बताया गया है.”

“ये वीडियो बनाये क्यों हैं?”

“ये नया प्रयोग है. इनका उपयोग अब तक क्लब में प्रवेश के बाद ही किया जाता था. परन्तु अब इन्हें क्लब में प्रविष्टि के पूर्व भी दिखाया जा सकता है अगर लगता हो कि संभावित सदस्या की रूचि पता होने से उसे संतुष्ट करने में सरलता होगी.”

“वेरी एक्ससाइटिंग.” सबीना बोली, “अब दिखाओ भी.”

सचिन ने वीडियो आरम्भ की. शीर्षक में “Type 1 Videos” लिखा था. ये सामान्य चुदाई के ही वीडियो थे. जिसमें महिलाओं के मुँह, चूत और गाँड की चुदाई की गई थी. कुछ में थोड़ा बल प्रयोग भी था, परन्तु हिंसा के स्तर का नहीं था. मोटे लम्बे लौडों से चुदती हुई महिलाएँ कितना आनंदित थीं ये देखने योग्य था. कुछ में नीचे लिखा था “Acted”. सबीना समझ गई कि ये खेल क्लब में हो चुके हैं. इसके बाद के कई इसी प्रकार के छोटे वीडियो का संकलन चलता रहा. सबीना सब कुछ देखकर उत्तेजित होती रही और सचिन के लंड से खेलती रही.

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फिर शीर्षक में “Type 2 Videos” लिखा हुआ आया. इस बार की चुदाई में दो पुरुष थे. मुँह और चूत, मुँह और गाँड में चुदाई के अनेक दृश्य थे. महिलाएँ चूत और गाँड से निकले लौडों को चाटने में संकोच नहीं कर रही थीं. न ही उन्हें वीर्य पीने में कोई हिचक थी. पिछली शृंखला से ये केवल दो पुरुष होने तक ही भिन्न थे.

अब अगली शृंखला आई जिसमें शीर्षक में “Type 3 Videos” लिखा था. सबीना और सचिन समझ गए कि इस प्रकार से चुदाई के बढ़ते और अधिक विकृत होने की श्रेणी के अनुसार ये संकलन किया गया है. इस बार की शृंखला में भी दो ही पुरुष थे, पर इस बार दुहरी चुदाई के दृश्य थे. इस बार दुहरी चुदाई में चूत और गाँड एक साथ मारी जा रही थी. इसमें भी चूत और गाँड से निकले लौड़े चाटने और उनका रस पीने के दृश्य थे.

चौथी शृंखला में पिछली शृंखला के ही समान दृश्य थे, अपितु इसमें दो से अधिक पुरुष थे. इस बार मुँह, चूत और गाँड में एक साथ चुदाई के दृश्य थे. तीनों में एक साथ लौड़े लिए हुए महिलाएं बहुत उत्साहित प्रतीत हो रही थीं. इस शृंखला के बाद ये डिस्क समाप्त हो गई. सबीना और सचिन बहुत उत्तेजित हो चुके थे और सचिन सबीना पर चढ़ गया और उसकी पूरे बल से चुदाई करने लगा. सबीना उसका भरपूर सहयोग कर रही थी. दोनों इस बार शीघ्र ही झड़ गए और हाँफते हुए एक दूसरे से लिपटे रहे.

सचिन उठा और उसने नूतन द्वारा दी हुई अगली डिस्क लगाई. अब तक की चारों श्रंखलाओं को क्लब में अभिनीत किया जा चुका था. सचिन डिस्क लगाकर हटा तो सबीना ने एक पेग और बनाने की माँग रख दी. सचिन ने सबीना का पेग बनाया और उसमें अपना वीर्य मिश्रित मूत्र डाला और सबीना को थमा दिया.

“लगता है तुम आज मुझे सामान्य व्हिस्की पीने ही नहीं दोगे।” सबीना ने मुस्कुराते हुए कहा.

सचिन ने अपना पेग लिया और उत्तर दिया, “आप चाहेंगी तो वो भी पी सकती हैं. परन्तु ये आपकी इच्छा पर है.”

“नहीं, ये ठीक है. नया स्वाद है.” सबीना ने इठलाते हुए उत्तर दिया.

सचिन और सबीना को ये भली भांति समझ आ चुका था कि अगले दृश्य और अधिक विकृत और अप्राकृतिक होने वाले हैं. मुख्य बिंदु ये था कि इनमें सी कितने प्रकरण क्लब में उपयोग किये जा चुके थे. सचिन को कई प्रकरण पता थे क्योंकि वो लगभग आरम्भ से ही क्लब में था, परन्तु सारे पता नहीं थे. कई समारोहों में वो उपस्थित नहीं रहता था. हालाँकि क्या कुछ घटा था ये अवश्य ही साझा किया जाता था, परन्तु सम्मिलित होने और सुनने में बहुत अंतर होता है. अब देखना था कि इस दूसरी डिस्क में क्या था. तीसरी सबसे अधिक विकृत होने वाली थी.

इस बार श्रृंखला सामान्य रूप के दो पुरुष और एक महिला के साथ ही आरम्भ हुई थीं. परन्तु बाद में एक चूत में दो लौड़े का दृश्य आया तो सबीना की आह निकल गई. सचिन ने उसे देखा.

“ऐसा भी होता है?” सबीना ने पूछा.

“मैंने आपको बताया था न? अभी तो ये नेट की वीडियो है पर ये सभी क्लब में हो चुका है. हालाँकि सारी महिलाओं ने नहीं उठाया है.”

“फिर भी ये बहुत कठिन लग रहा है?”

“कुछ कठिन नहीं है. महिलाओं को तो दोगुना या उससे भी अधिक आनंद आता है. हाँ, हमें सम्भल कर संयम के साथ चुदाई करनी होती है.”

चूत में दो लंड की शृंखला के बाद स्वाभाविक रूप से गाँड में दो लौंड़ों की शृंखला ही अपेक्षित थी. श्रृंखला सामान्य रूप के दो पुरुष और एक महिला के साथ ही आरम्भ हुई थीं.

कुछ देर तक सामान्य चुदाई चलती रही, फिर गाँड मारने के दृश्य आये और फिर एक गाँड में दो दो लौड़े जाने लगे. महिला के चेहरे पर कुछ पीड़ा और आनंद के भाव थे. कुछ ही देर में उसके आनंद के भावों ने पीड़ा को दबा दिया। इस पहले वीडियो के बाद कुछ और वीडियो चले जिनमें केवल गाँड मारने और दो दो लौंड़ों से गाँड मारने के ही दृश्य चलते रहे. सबीना को अब विश्वास हो गया था कि ऐसे भी गाँड मारना सम्भव है. परन्तु क्या वो स्वयं इस प्रकार के आक्रमण को सह पायेगी? उसके मन में दुविधा थी. उसे आभास हुआ कि वो चूत और गाँड में दो दो लंड लेने के विषय में सोचने लगी थी. सोचने और करने में बहुत अंतर होता है,

इस शृंखला के समाप्त होते होते उसकी गाँड में खुजली होने लगी. उसने सचिन को बताया तो सचिन ने उसे घोड़ी बनने का आदेश दिया. बिना किसी पूर्व उपक्रम के उसने अपने लौड़े को गाँड में डाला और सबीना की गाँड पूरी शक्ति से मारने लगा. सबीना भी बहुत उत्तेजित थी और उसने भी इसका पूर्ण आनंद उठाया. गाँड मारने के बाद सचिन ने जब रस उसकी गाँड में छोड़ दिया तो उठकर सबीना का ग्लास उठाया और उसकी गाँड के नीचे लगाकर बाहर बहते हुए वीर्य को एकत्रित किया. उसने सबीना को दिखाकर उसमे व्हिस्की डाली और फिर ग्लास को अपने मूत्र से भर दिया.

“लीजिये, एक और नए स्वाद का आनंद उठाइये.”

सबीना बैठ गई और अपनी गाँड में ऊँगली के माध्यम से कुछ और रस निकाला और ग्लास में गिरा दिया. फिर ऊँगली को ग्लास में घुमाया तो तीनों पदार्थ घुल गए. सचिन की ओर ग्लास उठाते हुए उसने अपने होंठों से लगाया और चुस्कियाँ लेने लगी.

“नाइस टेस्ट. आई एम लविंग योर आइडियास. तुम बहुत ही विकृत मानसिकता रखते हो.”

“आपके मन के भीतर दबी छुपी भावनाओं को बाहर निकालना और उन्हें संतुष्ट करना ही हमारा उद्देश्य है. और हम यही ढूँढ रहे हैं.” सचिन ने अपने ग्लास में व्हिस्की लेकर चुस्की लेते हुए कहा.

“और जिस प्रकार से तुम इसमें सफल हो रहे हो वो बहुत प्रभावशाली है. क्या इस प्रकार से सभी महिलाओं के साथ करते हो?”

“नहीं, हम उन्हें संकेत देते हैं. परन्तु अगर वो स्वयं नहीं आगे आती तो हम कुछ नहीं करते. उनकी संतुष्टि ही हमारा ध्येय है.”

“तो अब क्या दिखाओगे?”

सचिन ने देखा कि दूसरी डिस्क अभी समाप्त नहीं हुई थी. उसे तीसरी डिस्क में क्या है इसका कुछ अनुमान होने लगा था.

“पता नहीं. मैंने ये संकलन पहली बार देखा है.” सचिन ने अपना पेग समाप्त किया और लंड को सबीना के सामने कर दिया जिसे सबीना ने चाटकर साफ किया

“चलो आगे भी देखते हैं क्या क्या करते हो तुम क्लब में.” सबीना ने सचिन को अपने साथ बैठते हुए देखा तो बोली.

सचिन ने रिमोट से अगली शृंखला आरम्भ कर दी. जैसा उसे अनुमान था इस शृंखला में कई पुरुष थे, अर्थात ये गैंगबैंग की शृंखला थी. हाँ, इसमें एक या दो महिलाएँ थीं. जैसे जैसे शृंखला आगे बढ़ी, पुरुषों की संख्या और चुदाई की भीषणता भी बढ़ती गई. इनमें का प्रकार के जोड़ रहे. एक महिला के साथ चार या पाँच पुरुष एक साथ चुदाई कर रहे थे. मुँह, चूत, गाँड और हाथ सबमें लौड़े थे. चूत में दो लौड़े थे, फिर गाँड में दो लौड़े, फिर दो चूत में और एक गाँड में, दो गाँड में और एक चूत में. भीषण व्यग्र चुदाई. देखने में ही रोंगटे खड़े कर देने वाली चुदाई. और लौड़ा खड़ा और चूत गीली करने वाली चुदाई. गाँड की खुजली बढ़ाने वाली चुदाई.

महिलाएं हर छेद में लौड़े ले रही थीं. हर लौड़े का रस उनके मुँह और चेहरे पर बरसता था. उन्हें उस रस को पीने और चाटने में कोई संकोच न था, चाहे लौड़ा किसी भी छेद से निकला हुआ क्यों न हो. और देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था की मानो वो महिलाएँ भी इसका आनंद ले रही थीं. जहाँ भी दो महिलाओं का दृश्य आता था उसमें दोनों एक दूसरे के शरीर पर बहते हुए वीर्य को चाटने में देर नहीं करती थीं. कई दृश्यों में वीर्य को चेहरे पर लेप दिया जाता था और फिर उसे चाट कर हटाया जाता था. सबीना ये सब देख कर अचरज में थी. वो समझती थी कि केवल उसका परिवार ही अनूठा है. परन्तु जो इन महिलाओं ने दर्शाया था वो उनकी चुदाई से कई मीलों आगे थे.

ये सत्य था कि ये फिल्म थी इसी कारण इसमें अभिनय का पुट अधिक मात्रा में था. पर फिर भी जितने आनंद का वो अभिनय कर रही वो सम्पूर्ण अभिनय नहीं हो सकता था.

“हम ऐसा कर चुके हैं.” सचिन ने बताया. “एक से अधिक बार, कई सदस्याओं के साथ ऐसी चुदाई की जा चुकी है.”

इसके बाद के दृश्य देखकर सबीना का ह्रदय काँप उठा. इस वीडियो में एक चूत में तीन लंड थे. और इसके बाद के वीडियो में गाँड में तीन लौड़े थे. सबीना ने सचिन की ओर देखा.

“ये भी.”

सबीना देखकर ही विस्मृत थी. अब उसे लगा कि चूत या गाँड में दो लौड़े लेना सम्भव है. कुछ ही क्षणों में ये शृंखला भी समाप्त हो गई. सबीना की श्वास फूल रही थी. वो क्लब में शीघ्रतिशीघ्र समीलित होकर अनेकों प्रकार की चुदाई का अनुभव लेना चाहती थी. सचिन को पता था कि सबीना अब जिस मोड़ पर खड़ी है वहाँ से अब लौटना सम्भव न था. और वो उस विशिष्ट सदस्याओं में जुड़ेगी जो हर प्रकार की विकृत चुदाई में सुख पाती थीं.

ये डिस्क भी अब समाप्त हो चुकी थी. सबीना ने अंतिम डिस्क की ओर देखा. अगर इतनी वीभस्तता अब तक देखी है तो आगे क्या होगा? सचिन का अनुमान था कि आगे जो है वो सबीना को या तो पूर्णतया प्रतिबद्ध कर देगा या उसे क्लब से जुड़ने से रोक देगा. उसके मन में दूसरी घटना के होने का संशय था. इसीलिए उसने सबीना से कुछ समय माँगकर बाहर जाकर पार्थ से बात की. पार्थ ने उसे समझाया कि हमारा केवल सदस्याओं की इच्छापूर्ति है. अगर वो नहीं चाहेगी तो कुछ भी नहीं होगा. फिर उसने एक सरल उपाय बताया और सचिन संतुष्ट होकर सबीना के पास लौट आया.

“क्या हुआ?” सबीना ने पूछा.

“सर से बात कर रहा था. अंतिम डिस्क के बारे में.”

फिर उसे याद आया कि पार्थ ने उसे क्या निर्देश दिया था.

“क्या कहा उन्होंने?” सबीना ने पूछा.

“बताता हूँ, पर मुझे बाथरूम जाना है. आप चलोगी?”

सबीना बिना कुछ बोले सहर्ष उसके साथ चल पड़ी.

“मुझे लगता है कि मुझे सादा पानी अब अच्छा ही नहीं लगेगा.” सबीना ने कहा तो सचिन समझ गया कि वो उसे लेकर जाने का आशय समझ गई थी.

“अब तो आप व्हिस्की में भी मिलाकर पी चुकी हो. लगता है मुझे आपके लिए बोतल में रखकर जाना होगा जब तक आपके परिवार वाले लौटें. क्लब में जुड़ने के बाद तो मैं आ नहीं पाउँगा.”

“हाँ ये ठीक रहेगा.” सबीना ने कहा.

सचिन समझ नहीं पा रहा था कि सबीना इतना शीघ्र हर बार के लिए मान क्यों जा रही थी. क्या उसके परिवार की दूरी उसके इस व्यवहार के लिए उत्तरदाई थी?

बाथरूम में हर बार के समान सबीना नीचे बैठी और सचिन ने उसके मुँह और चेहरे पर अपनी धार छोड़ दी. परन्तु इस बार सबीना ने कुछ ऐसा किया जिससे कि सचिन अचम्भित हो गया. उसने अपना सिर नीचे कर दिया और धार उसके बालों में गिरने लगी. सबीना ने उसे अपने बालों में यूँ लगाया मानो शैम्पू हो. फिर उसने सचिन के लंड को चूमा.

“अगर आज के बाद नहीं आओगे तो मैं कुछ यादें रखना चाहूँगी। तुम पहले हो जिसको मैंने अपने शरीर को इस प्रकार से उपयोग करने दिया है. अब मैं अन्य लोगों के साथ भी ये करने वाली हूँ. पर तुम सदा पहले रहोगे. ये कहना अनुचित अवश्य है, पर मैं तुम्हें चाहने लगी हूँ. तुमसे दूरी मुझे व्यथित करेगी.”

सचिन ने उसकी ओर देखा.

“यही कारण है कि क्लब का दूरी का नियम है. हम सेवा के लिए हैं, संबंध के लिए नहीं. मैं भी आपको भूलने वाला नहीं हूँ. परन्तु सम्भवतः आज की रात हमारी अंतिम रात है. हाँ, आप मुझे महीने में दो बार बुला सकती हैं. और अगर बुलाया तो आऊंगा भी. सना के लिया अगर आया भी तो आपको नहीं चोद सकता. इसीलिए कई रूप में हमारी इस प्रकार से अंतिम रात है. तो इसका पूरा लाभ उठाना चाहता हूँ.”

क्लब के नियम का कारण सचिन को आज विदित हो रहा था. उसने कभी सोचा भी न था कि वो किसी से प्रेम करने योग्य है. वो मात्र एक चुदाई की मशीन था. उसकी माँ और फिर क्लब ने उसे स्त्री के उन रूपों को दिखाया था जिसे देखकर वो प्रेम से दूर भागता था. सबीना के विरह की पीड़ा को देखकर उसे मन से कष्ट हुआ था. वो उससे प्रेम करने लगा था, परन्तु वो विवाहित थी. भले ही उसका विवाहित जीवन कैसा भी हो, पर वो उसमें कोई गतिरोध नहीं डाल सकता था. वो उसके जीवन की कमी में प्रेम की कमी भले ही पूरी करने में असमर्थ हो पर उसकी वासना को पूरी करने में समर्थ था.

कल सुबह के बाद वो सबीना से कभी कभार ही मिल पायेगा. पार्थ ने फोन पर कुछ संकेत दिया था कि सम्भवतः सबीना का क्लब में प्रवेश दो तीन आगे टल जायेगा, क्योंकि कुछ परिवर्तन होने वाले थे. सचिन ने नीचे सबीना के चेहरे और बालों से अपने मूत्र को टपकते देखा. न जाने क्यों पर सचिन को उसके चेहरे के स्थान पर अमीना बेगम का चेहरा दिखाई देने लगा. कैसी लगेंगी अमीना बी इस प्रकार से भीगी हुई? जीभ से अपने होंठों को चटकारती हुई? फिर यही उसके मन में निगार के लिए आये. उसका लौड़ा टनटना गया. सबीना भी उसे ही देख रही थी. वो भी उसी प्रकार के विचारों में खोई थी और और सचिन के स्थान पर नूर और समीर की कल्पना कर रही थी. स्वयं को धोने के लिए भी नहीं उठी थी.

“फ्रिज से बोतलें निकाल लाओ. अब मुझे पिलाने के स्थान पर उसमें भरते रहो. अब न जाने कब मिलोगे।”

“अगर ऐसा है तो मैं आपको हर दो तीन दिन में नई माल दे जाया करूँगा.” सचिन ने हँसते हुए उत्तर दिया. “पर तब तक आपको पिलाने वाले भी अनेक हो जाएँगे। आपका बेटा और भतीजा भी आ ही रहे हैं. फिर आपकी भाभी और अम्मी भी आएंगी ही. फिर क्लब के रोमियो. आपको कमी नहीं होगी.”

“हाँ ये तो है. नूर और समीर तो रहेंगे ही.” सबीना ने निगार और अमीना का नाम नहीं लिया. “चलो तुम, मैं नहा कर आती हूँ.”

सचिन ने तीसरी डिस्क लगाई और दो पेग बनाये. सबीना का विशेष पेग उसकी ओर की छोटी टेबल पर रखा और अपना पेग लेकर बिस्तर पर जा बैठा. कुछ ही देर में सबीना आ गई. उसने अपना पेग उठाया और एक घूँट भरा फिर बिस्तर पर सचिन से आ चिपकी. सचिन ने प्ले का बटन दबा दिया.

सामने चेतावनी लिखी हुई थी. और लिखा था कि ये “गोल्डन शावर” इत्यादि से संबंधित है और अगर इसमें रूचि न हो तो न देखें.

सचिन ने सबीना को देखा और पूछा.

“चलने दो.” सबीना ने कहा. मानो इतने समय का अंतर वीडियो में इसी कारण रखा हुआ था. सबीना के कहने के कुछ ही क्षणों में पहला वीडियो प्रदर्शित होने लगा.

और पहले ही दृश्य में ये स्पष्ट हो गया कि इस शृंखला का उद्देश्य क्या है. पहले ही दृश्य में एक महिला बैठी हुई थी और उसके मुँह में एक पुरुष मूत्र त्याग कर रहा था. ये दृश्य समाप्त होते ही वो चेतावनी फिर आई. सबीना सचिन से लिपट गई और आगे चलने देने के लिए स्वीकृति दे दी.

इसके बाद के दृश्य किसी भी साधारण पुरुष और स्त्री को घृणा से भर सकते थे. सचिन क्योंकि ऐसे कई आयोजनों में भाग ले चुका था तो उसे इससे कोई कुंठा नहीं हुई. उसे सबीना की चिंता थी, कहीं वो व्यथित न हो जाये।

“क्या क्या करते है लोग, है न?” सबीना फुसफुसाकर बोली और उसका शरीर अकड़ गया.

सचिन ने उसे देखा तो वो बिना कुछ किये ही झड़ गई थी. सचिन मन ही मन मुस्कुराया. उसे विश्वास हो गया कि आगे की शृंखला देखने के बाद वो अवश्य क्लब की विशिष्ट सदस्याओं की श्रेणी में जुड़ जाएगी. इसके आगे शृंखला इसी प्रकार से आगे बढ़ती गई.

कई दृश्यों में महिलाएँ एक या अधिक पुरुषों के मूत्र का सेवन करती रहीं. कुछ ने तो ग्लास और बड़े काँच के कटोरों में भी भर कर पिया। उनके चेहरे के भाव उनके आनंद का दर्शन कर रहे थे. सबीना अपनी चूत रगड़ रही थी.

अगली शृंखला में चुदाई हुई और फिर उसी प्रकार से उन्हें मूत्र पिलाया गया और उसमें स्नान कराया गया. चुदाई के दृश्य पिछली शृंखला के समान ही थे. कई लौंड़ों से चुदने के बाद उनका मूत्र पीना ये उनका भावार्थ था. इसमें से बहुत कुछ उनके शरीर पर भी गिरता था. सबीना से रहा नहीं गया.

“मुझे चोदो प्लीज़. मुझे चोदो।” सबीना घोड़ी बन गई और उसका चेहरा टीवी की ओर था. सचिन उसके पीछे गया और उसकी चूत में लौड़ा पेलकर उसे चोदने लगा. सबीना की चूत इतनी गीली थी कि सचिन का मोटा लौड़ा भी सरलता से अंदर बाहर हो रहा था. सामने टीवी पर चुदाई और सिँचाई के दृश्य चल रहे थे. जिस शक्ति के साथ टीवी पर चुदाई चल रही थी उसी गति की सचिन भी अनुशरण कर रहा था. अब टीवी पर दर्शाये दृश्यों में कलाकारों को बीच में विश्राम भी मिलता है, और वो हट कर दूसरे को अवसर देते हैं. सचिन के पास ये लाभ नहीं था. और वो कुछ ही दृश्यों के बाद झड़ गया.

वहाँ टीवी पर खेल और अधिक विकृत होते जा रहा था. अब स्त्रियों को चुदाई के साथ ही मूत्र पिलाया जा रहा था. अधिकतर दृश्यों में महिला घोड़ी बनकर गाँड मरवाते हुए मूत्र सेवन का रही थी, पर कुछ दृश्यों में चूत और गाँड में लौड़े लेते हुए भी ऐसा करते हुए दर्शाया गया था. सबीना उसी स्थिति में ये सब देख रही थी और सचिन का लंड अब फिर तना तो उसने इस बार सबीना की गाँड की गहराई नापने के निर्णय लिया. सबीना ने गाँड हिलाकर उसका स्वागत किया. सचिन फिर गाँड मारने लगा और सबीना उसका साथ देती रही.

टीवी पर फिर एक चेतावनी झलकी कि अगले दृश्य अत्यधिक विकृत हैं. एक महिला पर कई सारे पुरुष मूत्र त्याग कर रहे थे और वो अपने सिर पेट बाल हर एक पर उनके मूत्र से स्नान कर रही थी मानो साबुन लगा रही हो. ये देखकर सचिन को सबीना के साथ हुई कुछ देर पहले की घटना स्मरण हो आई. ऐसे एक दो दृश्य और चले फिर दोबारा चेतावनी आई.

उसके बाद एक महिला जिसके शरीर पर मूत्र विसर्जन किया जा रहा था वो गाँड भी मरवा रही थी. अचानक गाँड मारने वाला लंड बाहर निकला और महिला की गाँड से एक तेज धार निकली. उस पुरुष ने उसकी गाँड को मूत्र से भर दिया था. ऐसा एक दो दृश्यों में हुआ फिर एक में उस धार को एकत्रित किया गया और एक ग्लास से उस महिला ने उसे पी भी लिया. और जैसे ही उसने अपना रिक्त ग्लास दिखाया वीडियो समाप्त हो गया. सचिन बिना रुके सबीना की गाँड मारता जा रहा था.

“बाथरूम में चलकर मारो, मुझे वो लास्ट वाला सीन ट्राई करना है.” सबीना बोली तो सचिन अचम्भित हो गया.

“आप होश में तो हो?”

“हाँ. मैंने कहा न, मैं हर क्रीड़ा तुम्हारे साथ पहले करना चाहती हूँ. क्या पता ये आगे करुँगी भी या नहीं, पर तुम केवल आज ही मेरे पास हो, तो अधिक चिंतन का समय भी नहीं है मेरे पास.”

सचिन ने अपना लौड़ा बाहर खींचा और दोनों बाथरूम में चले गए. सबीना ने वहां से एक मग उठाया और सचिन को थमा दिया.

“वीडियो केवल मूत्र ही निकला था, पर मैं चाहती हूँ कि उसमें तुम्हारा वीर्य भी मिला हो. न जाने मुझे क्यों लग रहा है कि मुझे उसमें अधिक स्वाद आएगा.”

सचिन कुछ कहने की स्थिति में नहीं था. गाँड मारने से रोकने के कारण उसकी नसें फट रही थीं. उसने मग को निकट में रखा जिससे कि सरलता से हाथ में आ पाए. सबीना घोड़ी बन गई और सचिन ने उसकी गांड फिर से मारनी आरम्भ कर दी. सबीना आने वाली घटना से इतनी उत्तेजित थी कि लगातार उसकी चूत पानी छोड़ रही थी. सचिन भी आगे के लिए उत्सुक था और पूरी शक्ति से सबीना की गाँड खोल रहा था. कई मिनट गाँड मारने के बाद सचिन झड़ने लगा. सबीना के घुटने अब दर्द करने लगे थे. जब सचिन की वीर्य की बौछार ने उसकी गाँड को सींचा तो उसे कुछ विश्राम मिला.

सचिन ने अपना लंड जड़ तक पेल दिया और अपना पूरा रस सबीना की गाँड में भर दिया. फिर उसने मग उठाकर सबीना की कमर पर रखा और अपने लंड को उसी प्रकार से डाले हुए उसकी गाँड में मूतने लगा. उसे शीघ्र ही ये पता चल गया कि किसी भी स्थिति में सबीना की गाँड में वो अपना पूरा मूत्र त्याग नहीं पायेगा. उसने कुछ अंकुश लगाया और किसी प्रकार से स्वयं को रोका. ये सम्भवतः उसके जीवन का सबसे कठिन कार्य था.

“ओके, अब मैं लंड निकाल रहा हूँ. आप ध्यान रखना.” सचिन ने चेतावनी दी.

सबीना ने सिर हिलाकर उसे निकलने का संकेत किया. सचिन ने मग को सबीना की गाँड के निकट किया और अपना लंड एक झटके से बाहर खींच लिया. वीडियो के ही समान सबीना की गाँड से एक तीव्र धारा निकली जिसने मग को भर दिया. धीरे धीरे उस धारा की गति धीमी हुई और फिर ठहर गई. सचिन ने मग में देखा तो उसका मन मचल गया. उसने मग को एक ओर रखा और हट गया. सवीना वहीं लेट गई. उसके घुटने दर्द कर रहे थे. कुछ पल यूँ ही ऑंखें बंद किये हुए लेटने के बाद आँखें खोलीं. सचिन उसके पास बैठकर उसके घुटनों की मालिश कर रहा था. सबीना उसे देखकर मुस्कुराई.

“ये आज की अंतिम इस प्रकार की चुदाई है. इसके बाद सामान्य चुदाई ही करना, प्लीज़. और बोतलों में छोड़ना अपने दोनों पानी.”

“ठीक है.” ये कहकर सबीना का हाथ पकड़कर उसे उठाया. सबीना ने मग लिया और दोनों कमरे में चले गए.

सोफे पर बैठकर सबीना ने अपने ग्लास में मिश्रण डाला और एक घूँट लिया. सचिन ने ये देखा पर कुछ कहा नहीं. उसके पेट में कुछ हलचल अवश्य हुई.

“स्वाद भिन्न है, पर बहुत अच्छा तो नहीं है.” सबीना ने कहा और ग्लास को मग में डालकर बाथरूम चली गई. लौटी तो उसका मुँह गीला था. उसने सचिन को देखकर एक अशक्त सी मुस्कान दी. फिर अपने लिए सामान्य पेग बनाया. सचिन की ओर देखा और फिर उसके लिए भी एक बना दिया.

“मेरे विचार से मैंने ये वीडियो देखकर अपनी सीमा निर्धारित कर ली है. समय आने पर उस पर निर्णय लूँगी। मैं तुम्हारी आभारी हूँ जो तुमने मुझे कुछ कृत्य करने दिया. विशेषकर अंतिम. मैं अगर किसी और के साथ ये करती तो घृणा से भर जाती. अब शेष रात्रि में सामान्य प्रेम और चुदाई ही करेंगे.”

“जैसी आपकी इच्छा. मुझे भी अच्छा लगा कि अपने अंतिम कृत्य को रुचिकर नहीं पाया. अन्यथा मेरे प्रेम में कमी आ सकती थी.”

सबीना: “अम्मी और निगार के आने के बाद देखेंगे, क्या कुछ घटित होता है. न जाने वो सब इस समय क्या कर रहे होंगे?”

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लगभग दो हज़ार किलोमीटर दूर दुबई में सलीम खान और अमीना बी एक सोफे पर नंग धड़ंग बैठे बात कर रहे थे.

अमीना बी: “मुझे सबीना की अब चिंता होने लगी है. निगार की भी है. पर सबीना की अधिक है.”

सलीम: “क्यों? क्योंकि सबीना अपनी बेटी है?”

अमीना कुछ न बोलीं पर उनका तात्पर्य यही था.

सलीम ने पूछा, “क्या करना चाहती हो?”

अमीना: “आप नदीम और नासिर से बात कीजिये. मुझे लगता है कि अब समीर और नूर को भारत का व्यवसाय संभालने दीजिये. दोनों भाई साथ काम भी करेंगे और यहाँ आने के लिए भी समय निकालेंगे. इतने अधिक समय तक अपना काम नौकरों के भरोसे छोड़ना ठीक नहीं है. मैं और निगार सारी बातें भी नहीं समझती हूँ.”

सलीम सोच में पड़ गए.

“पर मुझे यहाँ भी मार्केटिंग के लिए सहायता चाहिए.”

“उसके लिए आप अर्शी और सना को बुला लीजिये अपने पास. दोनों कुछ काम करेंगी तभी सीखेंगी. नहीं तो चौबीस घण्टे लौंड़ों के सपने देखती रहती हैं. यहाँ आप तीनों संभाल सकते हो.”

“बात में तो दम है, बेगम. अब आपके जाने में भी बस छः दिन शेष हैं. सोच रहा हूँ इस बार मैं भी आप चारों के साथ चलूँ.”

“ये तो बहुत अच्छा रहेगा.”

सलीम का मुख्य उद्देश्य उस क्लब के विषय में जानने का था जिसमें उसकी बेटी, पत्नी और बहू चुदाई के लिए सम्मिलित होना चाहती थीं. उसने सबीना और नासिर के विश्वास पर उसे स्वीकृति दे दी थी. परन्तु वो इसके विषय में जानने का इच्छुक था.

“और अगर सब मान गए तो सना और अर्शी को साथ ले आऊंगा.” सलीम ने मुस्कुराते हुए कहा. अपनी पोती और नातिन का ध्यान आते ही उसका मन हर्षित हो गया और लौड़ा फ़नफ़ना उठा. अमीना ने ये देखा और हंसने लगी. उसने सामने पलंग पर चल रहे द्वन्द की ओर संकेत करते हुए कहा.

“जाइये, आप भी अपनी निगार की चुदाई में जुड़ जाइये.”

पलंग पर निगार की चूत और गाँड में लौड़े पिले हुए थे. और उसके मुँह में एक एक करके दो लौड़े आ जा रहे थे. अपने पति, पुत्र, नन्दोई और उसके पुत्र से चुद रही थी.

सलीम ने अमीना का हाथ पकड़ा और उठ खड़े हुए.

“आपको कैसे अकेले छोड़ दे बेगम, आइये आप भी जुड़िये.”

सलीम और अमीना पलंग के पास पहुंचे और सलीम ने कहा.

“बच्चों, अपनी अम्मी का भी कुछ ध्यान करो.”

सबने हटकर अमीना बी को स्थान दिया और कुछ ही पलों में नए मिश्रण में चुदाई आरम्भ हो गई.

रात अभी शेष थी.

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