“ज़रूर.टेक युवर टाइम…तो हम चले?आप फ़ैसला लेके मुझे खबर कर दीजिएगा.” “ओके,मिस्टर.सिंग & आइ मस्ट से आइ’एम होनोरेड बाइ युवर ऑफर.” “थॅंक यू,कामिनी.”,शत्रुजीत ने अपना हाथ आगे किया तो कामिनी ने उसे थाम लिया.1 बार फिर उस बड़े से हाथ मे उसका कोमल हाथ खो गया & उसके बदन मे झुरजुरी सी दौड़ गयी. “खुश रहो,बेटी.आओ बैठो”,कामिनी ने आड्वोकेट संतोष चंद्रा के पाँव च्छुए.षत्रुजीत के जाने के बाद ही उसने फ़ैसला कर लिया था कि आज वो चंद्रा साहब से मिलने उनके घर ज़रूर जाएगी. “आंटी कहा हैं,सर?”,कामिनी सोफे पे बैठ गयी. “मैं यहा हूँ,आज याद आई हमारी !”,चंद्रा साहब की पत्नी ड्रॉयिंग हॉल मे दाखिल हुई तो कामिनी ने उठ कर उनके भी पाँव च्छुए. “जीती रहो.”,उसका हाथ पकड़ उन्होने बड़े सोफे पे उसे अपने साथ बिठा लिया. “सॉरी,आंटी.सोच तो बहुत दीनो से रही थी पर हुमेशा कुच्छ ना कुच्छ काम बीच मे आ जाता था.मुझे भी बहुत बुरा लग रहा था कि मैं अभी तक सर का हाल पुच्छने नही आ सकी.” “मेरा हाल क्या पूच्छना,बेटी.बुढ़ापे मे ये सब तो लगा ही रहता है.और अपनी आंटी की बातो पे ज़्यादा ध्यान मत दो,मैं समझता हूँ तुम्हारी परेशानी.” “हां भाई.अपनी आंटी की बात पे नही केवल अपने सर की बात पे ध्यान देना!”चंद्रा साहब & कामिनी हँसने लगे.
“कामिनी,आज का खाना तुम यही खओगि.”,नौकर शरबत & कुच्छ नाश्ता रखा गया था.म्र्स.चंद्रा ने कामिनी लो शरबत का ग्लास बढ़ाया. “नही,आंटी.आप बेकार मे परेशान होंगी.” “चुप चाप से बैठी रह!इतने दिन बाद आई है & बस 5 मिनिट मे भागना चाहती है.ज़्यादा नखरे करेगी तो फिर सवेरे के नाश्ते के बाद ही जाने दूँगी.”,1 बार फिर ड्रॉयिंग हॉल मे हँसी का शोर गूँज उठा. “तो शत्रुजीत ने तुम्हे ऑफर दे ही दिया?”,चंद्रा साहब दोनो औरतो के साथ खाने की मेज़ पे बैठे थे & नौकर सबको खाना परोस रहा था. “..उसने ठीक कहा कामिनी,मैने ही उसे तुम्हारा नाम सुझाया था.” “सर,मैने इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी आज तक नही उठाई है.1 पूरे बिज़्नेस हाउस को क़ानूनी मशविरे देना..मुझे नही लगता मैं ये कर पाऊँगी.”,रीमा ने 1 नीवाला मुँह मे डाला. “हर बड़े काम के पहले ऐसा ही लगता है,बेटी.पर ये इस बात का इशारा होता है कि हम उस काम को करते वक़्त पूरी तरह से मुस्तैद रहेंगे कि कही हमसे कोई ग़लती ना हो जाए.कुच्छ लोग इस घबराहट के मारे काम को हाथ नही लगाते पर वो चंद लोग जो इस घबराहट के बावजूद काम करने का बीड़ा उठाते हैं,वो ज़रूर कामयाब होते हैं.” “सर,मैं आपकी बात मान कर शत्रुजीत सिंग को हाँ तो कर दू,लेकिन मैं उसके बारे मे बिल्कुल नही जानती कि आख़िर वो किस तरह का इंसान है & उसके काम करने का ढंग कैसा है.” “मुझे तो वो 1 नंबर का अय्याश लगता है,इतने शरीफ बाप का ऐसा बिगड़ा बेटा!”,म्र्स.चंद्रा कामिनी के प्लेट मे थोड़ी सब्ज़ी डालते हुए बोली. “वो उसकी ज़ाति ज़िंदगी है,उस से उसके वकील का क्या लेना-देना,भाई!”,चंद्रा साहब ने पानी का घूँट भरा,”..कामिनी,मैं अमरजीत सिंग को काफ़ी करीब से जानता था,वो 1 बहुत शरीफ & सच्चे इंसान थे.देखो,इतना बड़ा बिज़्नेस चलाने मे 1 इंसान को नियमो को तोड़ना नही मरोड़ना पड़ता है,वो भी करते थे
मगर फिर भी मैं यही कहूँगा की वो 1 ईमानदार & सच्चे इंसान थे.” “मैं आपका मतलब नही समझी.” “बेटी,अगर नियमो को तोड़ेंगे तो आज नही तो कल सज़ा भी भुगतनी पड़ेगी,है ना?” कामिनी ने हां मे सर हिलाया. “
.तो 1 अच्छा बिज़्नेसमॅन वो है जोकि नियमो को तोड़े नही बस उन्हे मोड अपने फ़ायदे के लिए.इस बात को इस तरह से समझो-अगर रास्ते मे ट्रॅफिक जाम है तो तुम क्या करोगी उस रास्ते को छ्चोड़ किसी & रास्ते को पाक्ड़ोगी & जाम से बचकर अपनी मंज़िल की ओर बढ़ोगी.” अब कामिनी की समझ मे उसके गुरु की बात आ गयी. “..तो अमरजीत सिंग 1 बहुत अच्छे बिज़्नेसमॅन थे पर उन्होने आज तक ना कभी झूठ बोला ना कभी किसी को धोखा दिया.हम वकील क्या चाहते हैं?यही ना की हुमारा मुवक्किल हमे पूरी सच्चाई बताए ताकि हम उसकी पूरी तरह से मदद कर सके तो कामिनी,अमरजीत सिंग ऐसे ही मुवक्किल थे.” “..अब उनके बेटे के बारे मे मैं भी सुनता रहता हू कि वो अय्याश है,मगर जब से उसने त्रिवेणी ग्रूप जाय्न किया है,तब से मैने उसे भी करीब से देखा है & ये जाना है कि उसने अपने बाप के सारे गुण विरासत मे पाए हैं.उन्ही की तरह उसकी भी सबसे बड़ी ख़ासियत है उसकी सच्चाई.” “बेटी,वो अपनी ज़ाति ज़िंदगी मे क्या करता है,उस से तुम्हे क्या लेना है?तुम्हे उसके बिज़्नेस से जुड़े क़ानूनी केसस मे उसकी मदद करनी है.अगर तुम उसका ऑफर कबूल करती हो,मैं यकीन से कहता हू जैसे उसके पिता मेरे लिए 1 आदर्श मुवक्किल थे वो भी तुम्हारे लिए वोही साबित होगा.” “..& हां,1 बात और.अमरजीत सिंग संसद मे पंचमहल के एंपी थे.मैने कुच्छ उड़ती हुई ख़बरे सुनी है कि उनकी पार्टी चाहती है कि उनकी जगह उनके बेटे शत्रुजीत को एंपी का चुनाव लड़ने का टिकेट दिया जाय…& जहा तक मैं समझता हू,शत्रुजीत भी ऐसा चाहता है,आख़िर ये उसके बिज़्नेस के लिए भी फयदेमंद होगा.अगर ऐसा होता है,तब तुम्हारा काम थोड़ा पेचीदा हो सकता है.” “वो कैसे,सर?”,खाना ख़त्म हो चुका था & अब म्र्स.चंद्रा उसे खीर परोस रही थी. “बिज़्नेस मे शत्रुजीत को उसके बिज़्नेस रिवल्स से परेशानियो का सामना करना पड़ सकता है.पर ये आसान बात है,वो जानता है की उसके रिवल्स कौन हैं तो तुम्हारे लिए भी उनके खड़े किए हुए क़ानूनी रुकावतो को दूर करना आसान होगा.” “..लेकिन बेटा अगर शत्रुजीत चुनाव लड़ने को तैय्यार हो जाता है,तो केवल विरोधी पार्टी वाले उसके लिए रुकावते नही खड़ी करेंगे बल्कि ऐसा भी हो सकता है कि कुच्छ उसकी अपनी पार्टी के लोग भी उसकी परेशानियो का सबब बने.आख़िर पॉलिटिक्स मे तो ये आम बात है-पता नही कौन आपसे कब नाराज़ हो जाए & फिर आपकी जड़े काटने की कोशिश करने लगे.” चंद्रा साहब ने बिल्कुल सही कहा था.1 ऐसा शख्स था जोकि शत्रुजीत सिंग से बहुत नाराज़ था.
वो इंसान इस वक़्त देल्ही के 1 फार्महाउस के स्विम्मिंग पूल की दीवार से लग कर कमर तक पानी मे बैठा था.वो सिर्फ़ अंडरवेर मे था & इस कारण ये सॉफ ज़ाहिर हो रहा था की 55 बरस की उम्र होने के बावजूद उसका 6 फ्ट लंबा सांवला बदन अभी भी गथीला था.उसके चेहरे पे 1 काली मून्छ थी & सर पे काले-सफेद खिचड़ी बॉल,जिन्हे उसने दाई तरफ से माँग कर 1 खास अंदाज़ मे सेट करवाया था. उसकी दाई बाँह के घेरे मे,2 पीस सफेद बिकिनी पहने एक 20 साल की खूबसूरत लड़की बैठी थी जिसे वो अपने से चिपका कर चूम रहा था.चूमते हुए उसने अपनी जीभ उसके मुँह के अंदर डालने की कोशिश की तो उस लड़की ने किस तोड़ दी & अपना चेहरा घुमा लिया.उसके चेहरे पे घबराहट,झिझक & शर्म की परच्छाइयाँ सॉफ झलक रही थी. उस इंसान के चेहरे पे 1 वासना से भरी च्छिच्चोरी मुस्कान खेलने लगी.उसने लड़की के चेहरे को वापस अपनी ओर घुमाया & फिर से उसके गुलाबी होंठो को चूमने लगा. “एक्सक्यूस मी,सर.आपका फोन”,उसने लड़की के होंठो को छ्चोड़ कर गर्दन घुमाई,1 दूसरी लड़की हाथ मे कॉर्डलेस फोन लिए खड़ी थी.ये लड़की पहली वाली की हमउम्र थी & उसी की तरह खूबसूरत भी,उसने भी 2 पीस बिकिनी ही पहनी थी.फ़र्क ये था की इसकी बिकिनी का रंग क़ाला था & चेहरे पे घबराहट के बजाय शरारत भरी मुस्कान खेल रही थी. वो इंसान पूल से बाहर आया &
हाथ बढ़ा कर पहली लड़की की पूल से बाहर निकलने मे मदद की.कुच्छ घबराहट & कुच्छ गीले पैरों की वजह से वो लड़की लड़खड़ा गयी तो उस इंसान ने उसे अपनी बाहों मे थाम अपने सीने से चिपका लिया.उसने लड़की को इतनी ज़ोर से पकड़ा हुआ था की लड़की की बड़ी-2 चूचिया उसके बालो भरे चौड़े सीने से बिल्कुल दब गयी & उसके बिकिनी के ब्रा के गले से झँकता क्लीवेज कुच्छ ज़्यादा ही उभर आया.उसने उसकी गंद दबाते हुए उसे फिर से चूम लिया,ऐसा लग रहा था मानो 1 मेमना किसी भेड़िए के पंजो मे फँसा हो. “जाओ,ज़रा अंदर से ड्रिंक ले आओ”,उसकी भारी,रोबदार आवाज़ गूँजी & उसने लड़की के जवान,नशीले जिस्म को आज़ाद कर दिया & उसकी गंद पे 1 हल्की चपत लगाई.लड़की अंदर चली गयी तो उसने उसकी मटकती गंद को घूरते हुए दूसरी लड़की के हाथ से फोन लिया & अपनी बाई बाँह उसकी गर्दन मे डाल दी & दोनो साथ-2 चलने लगे,”जगबीर ठुकराल स्पीकिंग.” “क्या?!ऐसा कैसे हो सकता है मिश्रा जी?!आप उस कल के छ्होकरे को केवल इस वजह से चुनाव का टिकेट दे रहे हैं क्यूकी उसके बाप की मौत के कारण उसे लोगो के सिंपती वोट्स मिलेंगे & मेरे इतने बरसो के तजुर्बे का कोई मोल नही है?”,उसके माथे पे शिकन पड़ गयी थी.पूल से थोड़ा हट कर 1 दीवार से लगा कर 2 बड़े,मोटे गद्दो बिच्छा कर 1 बिस्तर बनाया गया था.दोनो चलते हुए उसी बिस्तर तक आ गये थे. “..ठीक है,मिश्रा जी.जो आप लोगो की मर्ज़ी.”,उसने लड़की को आँखो से इशारा किया तो लड़की ने बिस्तर पे पड़े ट्वेल को उठा लिया & अपने घुटनो पे बैठ कर उसके कमर से नीचे के गीले बदन को पोंच्छने लगी,”..मैं तो पार्टी का पुराना वफ़ादार हू,साहब..इतने सालो तक आप लोगो ने जो भी फ़ैसला लिया है,मैने उसे माना है,आज भी मानूँगा…नही,नही,घबराईए नही मैं पार्टी नही छ्चोड़ूँगा…”,लड़की ने उसकी टाँगे पोंच्छने के बाद उसका गीला अंडरवेर निकाल दिया & काले,सफेद झांतो से घिरे उसके लंड & अंदो को सुखाने लगी,ठुकराल का 1 हाथ उसके सर पे आ गया & उसके बालो से खेलने लगा,”…हां,ठीक है.नमस्कार.”,उसने फोन बंद कर लड़की को थमाया तो उसने उसे बिस्तर के बगल मे रखी तिपाई पे रख दिया. ठुकराल बिस्तर पे टांगे पसार कर बैठ गया तो वो लड़की भी उसके पहलू मे आ गयी,”हुज़ूर का मूड खराब लगता है?”,उसने अपने जवान जिस्म को ठुकराल के बदन से चिपका लिया & अपनी दाई टांग उसकी टांगो पे चढ़ा अपने पैर से सहलाने लगी. ठुकराल ने अपनी दाई बाँह उसके कंधे पे लपेट दी,”जानेमन!मूड ठीक करने के लिए ही तो तुम्हे & तुम्हारी सहेली को बुलाया है.क्या नाम है तुम्हारा?” “सोना.”,उस लड़की ने अपने नखुनो से ठुकराल के निपल्स को खरोंचा. “वाह!जैसा नाम वैसा ही चमकता जिस्म!”,ठुकराल उसे चूमने लगा,उसका दूसरा हाथ सोना की कमर को मसल्ने लगा.सोना ने अपनी जीभ उसके मुँह मे डाल दी & ठुकराल की जीभ से खेलने लगी.ठुकराल का हाथ उसके कंधे से उतार उसकी पीठ पे फिसलता हुआ उसकी बिकिनी के ब्रा को खोलने की कोशिश कर रहा था पर इसमे उसे कामयाबी नही मिल रही थी. सोना ने हंसते हुए अपने होंठो को उसके होंठो से अलग किया & हाथ पीछे ले जा के ब्रा के हुक्स खोल दिए & बड़ी अदा से धीरे-2 उसे अपने सीने से ढालका दिया.ब्रा जैसे ही चूचियो से नीचे हुआ उसने अपनी दोनो बाहे सीने पे रख अपनी चूचियाँ ढँक ली.ठुकराल ने मुस्कुराते हुए उसके दोनो जिस्मो के बीच गिरे ब्रा को उठा कर फेंक दिया & झुक कर अपने होंठ सोना की बाँहो के उपर से झँकते हुए छातियो के हिस्से पे रख ज़ोर से चूसने लगा. “ऊऊहह……”,सोना की आह निकल गयी & उसने अपनी बाहें सीने पे से हटा ठुकराल के सर को पकड़ कर अपने सीने पे भींच दिया.ठुकराल किसी भूखे कुत्ते- जिसे की अचानक बोटी मिल गयी हो-की तरह उसकी चूचियो पे टूट पड़ा.जैसे-2 उसकी ज़ुबान की हरकते तेज़ होती गयी,वैसे-2 सोना की आहें भी तेज़ होती गयी
थोड़ी देर बाद उसने अपना सर उसके सीने से उठाया & फिर दीवार से टेक लगा के बैठ गया. सोना को उसने अपने साथ अपनी दाई बाँह के घेरे मे बैठा लिया & फिर उसका बाया हाथ पकड़ कर अपने लंड पे रख दिया,”तुम तो इस खेल मे माहिर लगती हो,जानेमन!पर तुम्हारी सहेली इतना क्यू घबरा रही है?”उसने अपना दाया हाथ उसके कंधे के उपर से ला उसकी दाई चूची को दबोच लिया. “ह्म्म्म्म…आप ही को तो बिल्कुल आनच्छुई कली चाहिए थी.आप ही ने तो हमारी मेडम से कुँवारी लड़की माँगी थी उसकी नथ उतारने के लिए.” “..तो ये सचमुच कुँवारी है?” “हाँ.”,उसने उसकी झांतो को हल्के से खींचा,”..तभी तो मेडम ने इसकी दोगुनी कीमत ली है आपसे & मुझे साथ भेजा ताकि ये ज़्यादा घबराए तो इसे संभाल लू.बेचारी आई तो अपनी मर्ज़ी से है..पर पहली बार तो हर लड़की डरती है ना!” “अच्छा!और तुम्हे कितने दिन हो गये नाथ उतरवाए हुए?”,उसने सोना के निपल को खींच दिया. “आईईईईई…आप बहुत बदमाश हैं!”,उसने उसका हाथ अपनी चूची से हटा दिया,”..1 साल ही हुआ है अभी मुझे.” “पर बदन देख कर तो लगता नही,जानेमन!मुझे तो तुम भी कुँवारी ही लगती हो!”,ठुकराल ने उसकी चूचियो पे चपत मारी तो दोनो हँसने लगे. तभी वो पहले लड़की 1 ट्रे मे ग्लास,स्कॉच,सोडे & कोल्ड ड्रिंक की बॉटल & आइस-पेल लिए आ गयी. “आ गयी.आओ बैठो.”,वो लड़की उसके पैरो के पास बिस्तर पे घुटने के बल बैठ गयी.ठुकराल की भूखी आँखे उसके जिस्म की सभी गोलैईयों को जैसे चबाए जा रही थी,”ड्रिंक बनाओ.” लड़की ने ग्लास मे स्कॉच,सोडा & बर्फ डाल कर उसकी ओर बढ़ाया तो ठुकराल ने 1 हाथ से ग्लास & दूसरे से उसकी कलाई थम ली,”इधर हमारे पास आकर बैठो.नाम क्या है तुम्हारा.” “जी..रा-रानी.”,वो लड़की उसकी बगल मे वैसे ही घुटनो पे बैठ गयी. “वाह!कितना सुंदर नाम है!&
आज की रात तो तुम मेरी रानी ही हो.”,ठुकराल ने ठहाका लगे तो सोना भी उसके साथ हँसने लगी. “इतनी घबराई हुई क्यू हो?चलो..पैर पसार कर आराम से बैठो.”,ठुकराल ने उसे अपपनी बाई बाँह के घेरे मे ले लिया,”आख़िर तुम्हे किस चीज़ से डर लग रहा है?इस से?”,उसने अपने लंड की ओर इशारा किया,”..पर तुम्हारी सहेली तो इस से कितने मज़े से खेल रही है!” “तुम भी इस से दोस्ती कर लो,फिर ये तुम्हे जन्नत की सैर कराएगा!..चलो,सोना अपना हाथ हटाओ..आज रानी इस से खेलेगी.”,सोना ने हाथ हटाया तो ठुकराल का लंबा,मोटा लंड रानी की नज़रो के सामने आ गया.लंड करीब 8 इंच लंबा था & मोटाई तो उफ़फ्फ़.रानी ने थूक निगला,उसे बहुत डर लग रहा था.आज पहली बार वो चुदने वाली थी & ये इतना बड़ा जनवरो सा लंड,पता नही उसका क्या हाल करेगा! “जानेमन!दूर से देखने & ज़्यादा सोचने से डर तो लगेगा ही,तुम इस खेल का पूरा मज़ा भी नही उठा पओगि.”,ठुकराल ने जैसे उसका दिमाग़ पढ़ लिया,”चलो इसे अपने हाथ मे लो & सोचना छ्चोड़ो,भरोसा रखो मैने अब तक तुम्हारी जैसी कयि कलियो को फूल बनाया है & आज तक किसी को भी मुझसे शिकायत नही हुई बल्कि सब इसकी दीवानी बन गयी हैं.”,गुरूर से भरे ठुकराल ने उसका हाथ अपने लंड पे रख दिया. रानी ने जीवन मे पहली बार लंड को च्छुआ था.उसकी मेडम ने उसे चुदाई के बारे मे सब बताया था,उसे दूसरो की चुदाई दिखाई भी थी पर आज पहला मौका था जब वो खुद ये सब करने जा रही थी. “घबराओ मत.लो ये पियो,तुम्हे अच्छा लगेगा.”,उसने शराब का ग्लास सोना के होंठो से लगाया तो उसने घूँट भर कर बुरा सा मुँह बनाया. “क्या हुआ?नही पसंद आया?कोई बात नही!सोना,चलो रानी को कोल्ड ड्रिंक पिलाओ.”,उसने सोना को आँख मारी & फिर लंड हिलाती रानी को बाहो मे भर उसके चेहरे को चूमने लगा,”तुम कितनी खूबसूरत हो रानी.मैने आज तक तुम्हारे जैसी लड़की नही देखी.मैं तो तुम्हे अपने दिल की रानी बनाऊंगा.” रानी ये नही देख पाई कि सोना ने कोल्ड ड्रिंक मे स्कॉच मिला कर ड्रिंक बनाया,”लीजिए सर,ड्रिंक तैय्यार है.” “गुड!लाओ.”,ठुकराल ने ग्लास लिया & रानी को पिलाया.थोड़ी देर मे रानी ने ग्लास खाली कर दिया.उसे कोल्ड ड्रिंक का स्वाद थोडा अजीब तो लगा पर उसे ये शक़ बिल्कुल नही हुआ कि उसमे शराब मिली थी.उसे अब थोडा हल्का महसूस हो रहा था & उतना डर भी नही लग रहा था. ठुकराल पुराना खिलाड़ी था & वो समझ गया था कि अब उसका डर दूर हो गया है.उसने उसे बाहो मे भरा & उसके होठ चूमने लगा.इस बार जब उसने अपनी जीभ से उसके होंठो पे दस्तक दी तो रानी ने होठ थोड़े से खोल दिए.ठुकराल के लिए इतना काफ़ी था,उसने अपनी जीभ झट से अंदर घुसा & रानी की जीभ से लड़ा दी.रानी के बदन मे तो बिजली सी दौड़ गयी,उसने ठुकराल से अलग होना चाहा पर वो उसे बहुत मज़बूती से थामे था.थोड़ी देर बाद उसे भी अच्छा लगने लगा & वो भी अपनी जीभ से उसे जवाब देने लगी.ठुकराल ने पहली सीढ़ी पार कर ली थी. उसने रानी को लिटा दिया & उसके उपर झुक कर उसे चूमने लगा.फिर वो उसके चेहरे से नीचे उसकी गर्दन पे आया & वाहा से उसके क्लीवेज पे.रानी अब मस्त होने लगी थी & उसके मुँह से आहे निकलने लगी थी.उनका खेल देख सोना भी गरम हो गयी थी & उनकी बगल मे बैठ उसने अपने होठ ठुकराल के लंड पे कस दिए थे.उसके ऐसा करते ही ठुकराल ने चौंक कर नीचे देखा & फिर मुस्कुरा दिया. उसने रानी को करवट से लिटाते हुए अपने सीने से चिपका लिया & उसके होठ चूमते हुए अपने हाथ पीछे ले जा कर उसके ब्रा के हुक्स खोल दिए.उसने ब्रा को उसकी बाहो से अलग कर उच्छाल दिया & फिर उसे पीठ के बल लिटा दिया,”वाह!कितनी मस्त हैं तुम्हारी चूचिया!”,उसने उसकी बड़ी-2 चूचियो को अपने हाथो मे भर लिया & हल्के से दबाया. “उम्म्म….”,रानी कराही तो उसने उसके काले निपल्स को अपनी उंगलियो की चुटकी मे ले लिया & मसल्ने लगा.रानी के बदन मे जैसे बिजली के झटके लग गये.वो अपना सीना उचकती हुई तड़पने लगी.ठुकराल ने उसका लंड चूस रही सोना को आँखो से उपर आने का इशारा किया.सोना आई तो उसने उसे रानी को चूमने को कहा.रानी का हाल इस दोहरे हमले से और बुरा हो गया.वो मचलती हुई ऊन्ह-आँह करने लगी तो सोना ने उसके होठ छ्चोड़ दिए.तभी ठुकराल ने अपने होठ उसके आनच्छुए उरोजो पे रख दिए.रानी के होठ “ओ” के आकर मे गोल हो गये पर उनसे कोई आवाज़ ना निकली,ये पहला मौका था जब किसी मर्द ने उसकी चूचियो को अपने मुँह मे लिया था.
ठुकराल उसकी गोलैईयों को चाटने,चूमने लगा.कोई5-6 मिनिट तक जम के चूसने के बाद उसने अपना सर उठाया,”सोना.अपनी छातियो का स्वाद तो चखाओ अपनी सहेली को.” सोना ने रानी के खुले मुँह मे अपनी 1 चूची घुसा दी तो रानी उसे चूसने लगी.अब मस्ती उस पे पूरी तरह हावी थी.ठुकराल अब उसके गोल पेट को चूम रहा था.चूमते हुए उसने अपनी जीभ रानी की नाभि मे उतार दी तो रानी चिहुनक गयी & हाथो से ठुकराल का सर भींच लिया.ठुकराल अब आख़िरी हमले की तैय्यारि कर रहा था.उसने नज़रे उपर की तो देखा की सोना अब अपनी चूचिया चुसवाने के बाद रानी को चूम रही है. ठुकराल ने रानी को उसकी पॅंटी के उपर से चूमना शुरू किया तो रानी ने सोना को धक्का दे कर अलग कर दिया & करवट लेकर अपने घुटनो को मोड़ सुबकने लगी.ठुकराल समझ गया कि ये अन्छुइ कली उनकी कामुक हर्कतो को नही झेल पाई & झाड़ गयी है.वो प्यार से उसकी पीठ से लग कर लेट गया & उसके बाल सहलाने लगा.थोड़ी देर बाद उसने उसे घुमाया & फिर से चूमने लगा. थोड़ी देर मे रानी को भी मज़ा आने लगा & वो भी उस से लिपट गयी & किस का जवाब देने लगी.ठुकराल ने हाथ उसकी पीठ पे घूमते हुए उसकी पॅंटी के अंदर घुसा दिया.रानी फिर छटपटाने लगी.पर ठुकराल उसकी भारी गंद की फांको को मसलता रहा,
“सोना.ज़रा खुद को & अपनी सहेली को पूरा नंगा कर हमे दोनो के हुस्न का दीदार तो कराओ.” “ज़रूर.”,कह के उसने रानी की पॅंटी निकाल दी,फिर खड़ी हुई & अपनी भी पॅंटी उतार दी.ठुकराल की आँखो के सामने दोनो की नाज़ुक,गुलाबी,चिकनी चूत चमक उठी,”ये लीजिए…1 बार इसे भी तो प्यार कीजिए..”,सोना ने अपनी चूत ठुकराल के चेहरे के सामने कर दी. “सोना,पहले तुम्हारी सहेली की चूत को प्यार कर लू.फिर इस से खेलूँगा.”,ठुकराल ने उसकी चूत को थपथापया,”ऊन्नह…ठीक है..”
रानी ठुकराल की ऐसी बातो & हर्कतो से शर्मा कर अपने हाथो से अपनी चूत को ढँके हुए,अपनी आँखे मीन्चे पड़ी ज़ोर-2 से साँसे ले रही थी.ठुकराल ने उसकी चूचियो को मुँह मे भर लिया & अपने हाथो को उसकी गोरी जाँघो पे फिराने लगा.वो कसमसने लगी पर अपने हाथ चूत से नही हटाए.थोड़ी देर तक चूचियो से खेलने के बाद ठुकराल उसकी बाहो को चूमता चूत के उपर रखे उसके हाथो तक पहुँच गया & उन्हे ऐसे चूमने लगा जैसे वो उसकी चूत हो. वो उसकी उंगलियो मे लंबाई मे अपनी जीभ फिराने लगा,रानी का बुरा हाल हो गया & उसने उसे रोकने के लिए अपने हाथ उठा कर उसका सर पकड़ने की कोशिश की.ठुकराल के लिए इतना ही काफ़ी था.हाथ चूत से ज़रा सा उठे & उसने झट से अपने होठ उसकी आनच्छुई चूत की दरार से चिपका दिए. “आआहह…….!”,रानी तो अब बस पागल हो गयी.वो छटपटाते हुए छूटने की कोशिश करने लगी पर उसके हाथ तो जैसे उसके थे ही नही-वो तो ठुकराल का सर पकड़ कर उसे अपनी चूत पे और दबा रहे थे.ठुकराल की जीभ उसकी गीली चूत की गहराइयों मे उतर कर चाते जा रही थी & जैसे ही वो उसके दाने से लगी रानी ने बदन मोडते हुए अपनी जाँघो मे ठुकराल के सर को दफ़न कर लिया. ठुकराल समझ गया कि अब थोड़ी देर मे वो फिर से झाड़ जाएगी & यही उसके लिए सही मौका है पहली बार उसकी चूत को 1 लंड का स्वाद चखाने का.वो उठा & उसके घुटने मोड़ उसकी जाँघो के बीच घुटनो पे बैठ गया & अपना लंड उसकी चूत पे लगा के 1 धक्का दिया पर लंड ज़रा भी अंदर नही गया. ठुकराल अब तक ना जाने कितनी कुँवारी चूत चोद चुका था फिर ये चूत क्या थी!उसने अपनी उंगली घुसाकर उसे थोड़ा सा फैलाया & इस बार लंड को पेला & सूपदे को पूरा अंदर घुसा दिया,”ओह…..”,रानी ने कराह के ठुकराल की कलाइयाँ पकड़ ली. कुँवारी चूत ने जैसे उसके सूपदे को भींच लिया.ठुकराल ने मज़े से आह भरी & ज़ोर के धक्के लगाने शुरू कर दिए.रानी की चीखो से फार्महाउस का लॉन गूँज उठा.ठुकराल ने लंड चूत मे जड़ तक धंसा कर ही दम लिया.रानी दर्द से छटपटाई हुई अपना सर हिला रही थी,ठुकराल झुक कर उसे चूमने लगा,”..घबराव मत मेरी जान.” “बहुत दर्द हो रहा है..निकाल लीजिए ना…” “हां-हां…अभी निकलता हू…बस अभी निकालता हू..”,कह के वो बैसे ही लंड डाले उसे चूमने लगा.थोड़ी देर मे रानी की सिसकिया रुकी तो उसने फिर से बहुत हल्के-2 धक्के लगाना शुरू किए.रानी ने सिसकना छ्चोड़ हौले से आहे भरना शुरू किया तो ठुकराल समझ गया कि अब उसे मज़ा आने लगा है.उसने अपना लंड पूरा निकाल कर ज़ोर से वापस अंदर पेल दिया.
“आईइय्य्यीए…….!”, ठुकराल के धक्के तेज़ होते गये & साथ ही रानी की आहें भी.वो बस उसके बदन पे झुका उसकी चूचिया चूस्ते हुए धक्के पे धक्के लगाए जा रहा था.अचानक रानी के बदन मे अजीब सी हुलचूल होने लगी…उसकी चूत अपनेआप ठुकराल के लंड पे कस गयी..उसे वाहा बहुत तनाव सा महसूस हो रहा था & उसने बेचैन होकर अपनी टांगे मोड़ कर ठुकराल की कमर पे लपेट दी & उस से चिपत गयी.उसे होश भी नही था कि वो पागलो की तरह आहे भरती हुई अपने नाख़ून उसकी पीठ मे धंसा रही है & नीचे से ज़ोर-2 से अपनी कमर हिला रही है. ठुकराल इसीलिए तो कुँवारी चुतो का दीवाना था,उसका भी मज़ा दोगुना हो गया था & धक्के और तेज़.तभी रानी का सर पीछे झुक गया & उसका बदन कमान की तरह मूड गया.ठुकराल को अपने लंड पे उसकी चूत की कसावट & तेज़ होती महसूस हुई,वो समझ गया कि रानी झाड़ गयी है.उसी वक़्त उसने अपना गरम विर्य भी उसकी कुँवारी चूत मे छ्चोड़ उसके कुँवारापन का अंत कर दिया.
जगबीर ठुकराल भी उसी पार्टी का मेंबर था जिसके टिकेट पे अमरजीत सिंग चुनाव लड़ते थे.शुरू मे उसने बहुत कोशिश की,कि उनकी जगह उसे लोक सभा चुनाव का टिकेट मिले पर अमरजीत सिंग के होते ये नामुमकिन था.अमरजीत सिंग 1 शरीफ इंसान थे & उन्होने राजनीति मे कदम रखने से पहले 1 समाज सेवक के तौर पे काफ़ी नाम कमाया था,दूसरे वो 1 कामयाब बिज़्नेसमॅन थे & उनके पास पैसे की कमी नही थी.अब 1 ऐसा इंसान जिसे आवाम पसंद करती हो & जिसके पास पैसे भी हो-उसे कौन सी पार्टी एलेक्षन का टिकेट नही देती. ठुकराल चाहता तो वो कोई दूसरी पार्टी भी जाय्न कर सकता था-पर उसने ऐसा नही किया क्यूकी वो जानता था कि अमरजीत सिंग के रहते वो कभी भी कोई चुनाव नही जीत सकता.उसने बड़ी चालाकी से राज्य की असेंब्ली के एमलए का चुनाव लड़ा & जीत गया,फिर तो उसने कभी वो सीट नही हारी.पूरे पंचमहल मे अमरजीत सिंग के नाम से उनकी पार्टी को जाना जाता था-पार्टी के नाम से अमरजीत सिंग को नही.इसी बात का फ़ायदा पंचमहल के उनकी पार्टी के सारे एलएलए को होता था.वो सारे अच्छे काम करते थे & ये एमएलए चुपचाप उनका साथ देते थे & हर बार चुनाव जीत जाते थे. अमरजीत सिंग की मौत के बाद ठुकराल को उम्मीद की 1 किरण दिखाई दी थी पर षत्रुजीत सिंग ने उस किरण को भी बुझा दिया था.पर ठुकराल इतनी आसानी से हार मानने वाले मे से नही था.उसने उपरी तौर पे तो पार्टी हाइ कमॅंड की बात मान ली थी पर उसका शैतानी दिमाग़ शत्रुजीत को रास्ते से हटाने की तरकीब सोच रहा था. पिच्छली रात से ले के आज सवेरे पंचमहल की फ्लाइट पकड़ने से पहले तक उसने दोनो कल्लगिर्ल्स-रानी & सोना को 3-3 बार चोद कर अपना मूड ठीक कर लिया था.औरत का जवान,खूबसूरत जिस्म उसकी कमज़ोरी या कह लीजिए की उसका शौक था.शायद ही कोई ऐसी रात जाती हो जब उसका तगड़ा लंड किसी चूत मे घुस उसकी जम कर चुदाई ना करता हो.पर आज तक किसी को उसके इस रूप की झलक भी नही दिखी थी.सब जानते थे कि वो पैसे कमाने के लिए उल्टे-सीधे हथकंडे अपनाता रहता है,पर किसी को भी ये नही पता था कि वो औरतो का इतना बड़ा रसिया है. प्लेन पे बैठे-2 ठुकराल के खुरापाति दिमाग़ ने अपना एंपी बनाने का सपना पूरा करने का 1 प्लान तैय्यार कर लिया था.बेख़बर शत्रुजीत को पता नही था की उसका 1 दुश्मन खड़ा हो गया है.1 ऐसा दुश्मन जो शातिर,चालक,मतलबी & वासना & हवस का पुजारी है & जो शायद उसकी जान लेने मे भी नही हिचकिचायगा. सवेरे दफ़्तर के लिए तैय्यार होते वक़्त कामिनी के ज़हन कल रात चंद्रा साहब & उनकी बीवी से हुई बाते घूम रही थी.चंद्रा साहब से बात करने के बाद भी कामिनी को यकीन नही हो रहा था कि शत्रुजीत केवल उसकी काबिलियत के चलते उसे अपना लीगल आड्वाइज़र बनाना चाहता था.उसके मन के किसी कोने मे ये शुभा था कि वो ऐसा उसके नज़दीक आने के लिए कर रहा है…आख़िर उसकी अय्याशि के किस्से पूरे शहर मे माशूर थे!पर चंद्रा सर ने तो कहा था कि वो अपनी ज़ाति ज़िंदगी को अपने काम से बिल्कुल अलग रखता है & आम लोगो की नज़रो मे चाहे उसकी जो भी तस्वीर हो,उसके रिवल्स & दोस्त अच्छी तरह जानते थे कि वो कितना समझदार & सुलझा हुआ बिज़्नेसमॅन है.उसका सबूत थी आज के अख़बार मे छपी उसके ग्रूप की क्वॉर्टर्ली रिपोर्ट जिसमे सॉफ लिखा था कि इस बार ग्रूप का मुनाफ़ा पिच्छली बार के मुक़ाबले 5% ज़्यादा था. फिर भी कामिनी को यकीन नही हो रहा था,वो केवल 1 वकील ही नही 1 जवान लड़की भी थी & हर लड़की के पास वो ताक़त होती थी जिस से वो मर्दो के पाक-नापाक इरादे भाँप लेती है.और यही ताक़त उसके मन मे ये शुभा पैदा कर रही थी…पर अगर वो उसके जिस्म को पाने के लिए ऐसा कर रहा है तो इसमे बुराई क्या है?शत्रुजीत के छुने भर से ही उसके बदन मे बिजली दौड़ जाती है….अगर वो उसके साथ हुमबईस्तर होगी तो कैसा लगेगा? ये शरारती ख़याल आते ही उसकी चूत मे कसक सी उठी & उसने ड्रेसिंग टेबल सामने बैठे-2 अपनी जाँघो को भींच लिया…अगर शत्रुजीत ये खेल खेलना चाहता है तो वो भी तैय्यार है…उसने फोन उठाया & उसका नंबर डाइयल किया,”हेलो..मिस्टर.सिंग?..गुड मॉर्निंग!मैं कामिनी बोल रही हू…मुझे आपका ऑफर मंज़ूर है…थॅंक यू…ठीक है,मैं आज शाम अपने असिस्टेंट के साथ आपके दफ़्तर आऊँगी.ओके.सी यू.”
– थोड़ी देर बाद ड्राइवर ने कामिनी की कार उसके दफ़्तर के बाहर रोकी,”मेडम.मैं पेट्रोल डलवा कर अभी आता हू.” “ठीक है.”,कामिनी अपने दफ़्तर मे दाखिल हुई.उसके दफ़्तर मे घुसते ही 1 हॉल था जिसमे 1 तरफ उसकी सेक्रेटरी रश्मि का डेस्क था & दूसरी तरफ लोगो के बैठने के लिए सोफे & कुर्सिया लगे हुए थे.उसी हॉल के 1 कोने को शीशे के पारटिशन लगा कर उसके असिस्टेंट मुकुल का कॅबिन बनाया गया था.और सामने 1 दरवाज़ा दिख रहा था जिसके उस तरफ कामिनी का कॅबिन था. कामिनी ने देखा कि हॉल मे ना उसकी सेक्रेटरी मौजूद थी ना ही उसका असिस्टेंट.इतनी देर तो दोनो कभी नही करते थे,लेकिन ऑफीस तो खुला हुआ है & यहा की चाभी तो इन दोनो के सिवाय बस उसी के पास थी,फिर है कहा ये दोनो?…सोचती हुई वो अपने कॅबिन की तरफ बढ़ी कि तभी रश्मि की आवाज़ उसके कानो मे पड़ी,”…उउफफफ्फ़..नही कुर्ते के अंदर नही..” कामिनी ने हल्के से अपने कॅबिन का दरवाज़ा खोला,सामने दीवार से लगी रश्मि को बाहो मे भरे मुकुल चूम रहा था & अपना हाथ उसके कुर्ते मे घुसाने की नाकाम कोशिश कर रहा था. “..बस 1 बार दिखा दो…बस 1 बार 1!”,मुकुल मिन्नते कर रहा था. “नही!पागल हो गये हो क्या?!मॅ’म अभी आती ही होंगी.” “अभी बहुत वक़्त है उनके आने मे..प्लीज़ रश्मि बस 1 बार अपनी चूचिया दिखा दो ना..तुम्हे मेरी कसम!”,दीवार से लगी रश्मि को मुकुल ने अपने जिस्म से पूरा दबा रखा था & रश्मि की भी आखें थोड़ी मदहोश होने लगी थी.आख़िर 1 जवान लड़की अपनी चूत पे दबे 1 जवान लंड के असर से कब तक सायंत रह सकती है. “तुम बड़े बदमाश हो!हर बार अपनी कसम खिलके अपनी मनमानी करते हो!”,उसने उसके गाल पे 1 चपत लगाई. “क्या मनमानी की है भाई!आज तक तुमने चूमने से आगे बढ़ने ही कहा दिया है..प्लीज़ अब ज़्यादा देर ना करो..मॅ’म आ जाएँगी..बस 1 बार दर्शन तो करवा दो इनके..”,उसने 1 हाथ से कुर्ते के उपर से ही उसकी छाती दबा दी. “औउ..!”,तब तक 1 हाथ पीछे ले जा कर मुकुल ने उसके कुर्ते का ज़िप खोल दिया था & उसे कंधे से नीचे ढलकने की कोशिश कर रहा था. “नही!ऐसे नही!पागल कहीं के!”,रश्मि ने उसके हाथ अपने कुर्ते से अलग किए & धीरे से कुर्ते को नीचे कर उसके गले को खोल दिया,”लो देखो!”,उसका दिल बहुत ज़ोरो से धड़क रहा था. “वाउ!”,मुकुल ने कुर्ते के गले मे हाथ डाल उसके ब्रा मे से उसकी 1 चूची को निकाल लिया.रश्मि की चूचिया बहुत बड़ी तो नही थी मगर बहुत छ्होटी भी नही थी,उसकी नुमाया हुई चूची पे सज़ा भूरा निपल बड़ा प्यारा लग रहा था.मुकुल झुका & उस चूची को अपने मुँह मे भर लिया & तो रश्मि छटपटाते हुए आहें भरने लगी.ये सब देख कर कामिनी भी गरम होने लगी थी पर आज बहुत काम था & उसने सोचा कि अगर अभी ना रोका गया तो मुकुल तो आज रश्मि को चोदे बिना नही छ्चोड़ेगा. उसने दरवाज़ा बंद किया & वापस ऑफीस के मैं दरवाज़े पे आई & इस बार थोड़ी आवाज़ के साथ दरवाज़े को खोला,”अरे कहा हो भाई?मुकुल?रश्मि?” तुरंत उसका कॅबिन खुला & मुकुल बाहर आया,”गू-गुड मॉर्निंग,मॅ’म.” “गुड मॉर्निंग.कॅबिन मे क्या कर रहे थे?” “वो केस फाइल पड़ी थी ना वही लेने गया था.” “तो नही मिली क्या?”,कामिनी ने उसके खाली हाथो की तरफ देखा. “जी..!ना-नही..वो रश्मि ढूँदने मे मेरी मदद कर रही है.रश्मि तुम्हे मिली फाइल?”,उसने गर्दन घुमा कर कॅबिन की तरफ देखते हुए पूचछा. “हां..हां..ये लो..”,रश्मि के चेहरे पे घबराहट सॉफ नज़र आ रही थी.कामिनी चुपचाप बिना कुच्छ बोले अपने कॅबिन मे दाखिल हो गयी.थोड़ी देर बाद उसने इंटरकम से रश्मि को अंदर बुलाया. “रश्मि,ये क्या है?”,उसने अपने कॅबिन की ओर इशारा किया. “जी!मॅ’म?” “ये क्या है,रश्मि?”,उसने सवाल दोहराया. “आपका ऑफीस,मॅ’म.” “तो थोड़ी देर पहले तुम दोनो इसे अपना बेडरूम क्यू समझ रहे थे?”,कामिनी अपनी कुर्सी से उठ खिड़की के पास खड़ी हो बाहर देख रही थी,उसकी पीठ रश्मि की तरफ थी.रश्मि को तो काटो तो खून नही!वो भागती हुई कामिनी के पास आ गयी,”आइ’एम सॉरी,मॅ’म.मुझसे बहुत बड़ी ग़लती हो गयी.प्लीज़ मॅ’म..मुझे निकालिएगा नही…प्लीज़…आइन्दा ये सब नही होगा.प्ल-..” कामिनी हंसते हुए घूमी तो रश्मि का मुँह आश्चर्या से खुल गया,”अरे पगली!मैने तुमसे 1 सवाल पुचछा & तुम तो पूरी रामायण पढ़ने लगी!मैने कब की तुम्हे निकालने की बात?”,रश्मि की जान मे जान आई,”..वो..मॅ’म..”,जल्दी मे कपड़े ठीक करने के कारण उसके कुर्ते के गले मे से उसके कंधे पे ब्रा स्ट्रॅप नज़र आ रहा था. “रश्मि,ये मर्द बड़े बेसबरे होते हैं..”,कामिनी ने उसके ब्रा स्टरापको कुर्ते के नीचे कर उसके कुर्ते को सही किया,”..इन्हे हर वक़्त बस 1 ही बात सूझती है..पर हमे होश से काम लेना होता है..अगर मेरी जगह पीयान या कोई और तुम दोनो को देख लेता तो?” “..आगे से ध्यान रखना…& अपने दीवाने को मत बताना कि मुझे तुम दोनो के बारे मे पता चल गया है वरना मुझ से नज़रे नही मिला पाएगा & फिर काम भी ढंग से नही करेगा.चलो जाओ.” “थॅंक यू,मॅ’म.”,रश्मि घूम के जाने लगी. “और सुनो रश्मि,सॉरी.” “जी,मॅ’म?” “आज शाम तुम्हे टॅक्सी से घर जाना पड़ेगा क्यूकी तुम्हारे ड्राइवर को मेरे साथ 1 मीटिंग मे जाना है.”,मुकुल रोज़रशमी को अपनी बाइक से छ्चोड़ता था,कामिनी का इशारा उसी ओर था. “आप भी ना,मॅ’म.”,रश्मि शरमाते हुए बाहर चली गयी.

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