“मिस्टर.मुकुल?”
“जी,हां.कहिए?”
“मैं संजीव मेहरा बोल रहा हू.”
“हां,मेहरा साहब,कहिए.”
“मैने कामिनी जी का फोन ट्राइ किया था मगर उनसे बात नही हो सकी.उन्होने मुझसे कहा था कि शायद वीकेंड पे उनसे बात ना हो पाए & इसलिए उन्होने मुझे आपका नंबर दिया था.”
“जी,मेहरा साहब,मुझे पता है.मेडम आज शहर से बाहर हैं इसलिए आपसे बात नही हो पाई.कहिए क्या कहना था आपको?”
“उन्होने मुझे 1 काम दिया था,वो हो गया है.”
“यानी की सर,आपको कॉल डीटेल्स मिल गयी हैं?”
“जी,अब ये बताइए कि उन्हे आप तक कैसे पहुचाऊं?”
“सर,आप हमारे ऑफीस क्यू नही आ जाते?”
“अभी आ जाऊं?”
“ज़रूर,सर.”
“ठीक है.मैं थोड़ी देर मे पहुँचता हू.”
“मेहरा साहब,थोड़ी मेरी मदद कीजिए.”,ऑफीस मे संजीव मेहरा के लाए काग़ज़ो को मुकुल पलट रहा था.
“हां,बोलिए.”
“आप इनमे से जिन फोन नंबर्स के बारे मे जानते हैं उनके बारे मे इस पॅड पे लिख दीजिए.”
“ओके.”,5 मिनिट के अंदर ही मेहरा साहब ने ये काम कर दिया.
“थॅंक्स,सर..”,मुकुल पॅड को & कॉल डीटेल्स को मिलाने लगा,”..ये आपका नंबर है,ये करण जी का..ये आवंतिपुर मे शीना जी के पापा का है..ये उनकी बुआ का..ह्म्म….सर,ये नंबर भी इंडिया का ही लगता है,है ना?”,उसने कॉल डीटेल्स मे से 1 नंबर के नीचे पेन से लाइन खींची.
“हां,लगता तो है..& इस्पे शीना लगभग रोज़ बात भी करती रही है.”
“जी,सर & या तो वो फोने करती थी या इस नंबर से फोन उन्हे किया जाता था मगर लंडन से यहा आने से 10 दिन पहले से इस नंबर पे कोई फोन नही किया गया ना ही नंबर से कोई फोन हुआ.”
“इसका क्या मतलब है,मुकुल जी?”
“सर,असली मतलब तो थोड़ी और छानबीन के बाद पता चलेगा,मैं अभी आपको केवल इतना बता सकता हू कि बहुत जल्द करण जी लॉक-अप के बाहर आपके साथ होंगे.”
“सच?”
“हाँ,सर.मगर प्लीज़ भूल कर भी आप उनसे या शीना जी से या फिर किसी और से इस बात का ज़िक्र मत कीजिएगा.केस जीतने के लिए ये बहुत ज़रूरी है.”
“आप बेफ़िक्र रहें मुकुल जी,मेरे होठ सिले हुए हैं..अच्छा अब मैं चलु.”
“ओके,सर.”
उनके निकलते ही मुकुल ने मोहसिन जमाल को फोन मिलाया,”मोहसिन भाई!मुकुल बोल रहा हू,1 काम है..आपके दफ़्तर आ जाऊं?”
“ऊहह..क्या कर रहे हो?!..ये लो.”,कामिनी बार पे खड़ी ठुकराल की ड्रिंक बना रही थी जब उसने उसे पीछे से बाहो मे कस लिया.उसकी कमर को बाए हाथ मे थामे उसने दाए से ग्लास लेके पहले 1 घूँट भरा फिर कामिनी के होंठो से सटा दिया,”ना..!मैं विस्की नही पीती..बस वाइन पीती हू.”,ठुकराल का लंड उसकी गंद की दरार मे अटक गया था.दोनो अभी कोई 3 घंटे बाद सोके उठे थे & ठुकराल के लंड के एहसास ने कामिनी की चूत मे फिर से खाल बली मचा दी थी.
“..तो ठीक है..आज मैं भी इसे नही पियुंगा.”,ठुकराल ने ग्लास किनारे रख दिया & पीछे से ही उसकी चूचिया दबाते हुए उसके चेहरे & गर्दन को चूमने लगा,”ऑफ..ओह्ह…बस..हो गया..!”,कामिनी शोखी से मचलने लगी.
“अभी-2 1 बात पता चली है.”,ठुकराल ने उसकी दाए घुटने को उठा के बार पे रख दिया तो कामिनी आगे को झुक गयी.
“क्या,जगबीर?..ऊओह..!”,ठुकराल अब बाए हाथ से उसकी मखमली पीठ सहला रहा था & दाए की उंगलिया उसकी चूत मे अंदर-बाहर कर रहा था.
“तुम्हारा आशिक़ तो बहुत मायूस हो गया है तुम्हारे जाने के बाद..”,वो बहुत तेज़ी से उंगली से उसकी चूत मार रहा था & कामिनी अब पूरी तरह से बार पे अपनी छातिया दबाए झुकी हुई आहे भर रही थी.उसकी चूत ने पानी छ्चोड़ना शुरू कर दिया था.
“होने दो…आआन्न्न्नह….!”,ठुकराल ने उसके रस से भीगी उंगलिया बाहर निकाली & उसके गंद के छेद मे घुसा दी,”..ऊऊव्व्वव..!”….वाहा नही,जगबीर..प्लीज़..!”,उसे मज़ा तो बहुत आ रहा था मगर फिर भी उसने डरने का नाटक किया.
“घबराओ मत,जानेमन!..कुछ नही होगा..मैं बहुत प्यार से करूँगा..ये देखो.”,ठुकराल ने अपने लंड पे ठुका & उसके सूपदे को कामिनी की गंद के छेद पे रख के धक्का दिया,”..हााईयईईईईई….राआअम्म्म्म्म…..!”,कामिनी चीखी & उसने बार को कस के जाकड़ लिया.
ठुकराल ने बहुत धीरे-2 उसकी गंद की फांको को फैला कर लंड को थूक से गीला कर-2 के अंदर घुसाना जारी रखा.थोड़ी ही देर मे लंड तीन चौथाई अंदर था,”..ऊओह….हाईईईई….बस जगबीर अब और अंदर नही जाएगा….आअनन्नह….!”,कामिनी ने सच कहा था,ठुकराल का लंड कुछ ज़्यादा ही मोटा था,अगर वो उसे और अंदर पेलने की कोशिश करता तो थोड़े दर्द & बहुत से मज़े के बजाय केवल दर्द ही दर्द रह जाता.
“ठुकराल अब उसकी पीठ से सॅट गया & उसकी चूचिया मसलने लगा,”..बस हो गया,जानेमन.”,उसके बाद वो हल्के-2 धक्को से उसकी गंद मारने लगा.गंद मारते हुए उसने बाए हाथ से उसकी चूचियो को दबाना जारी रखा मगर दाया उनसे हटा के उसकी चूत के दाने पे ले आया.कामिनी का दर्द भी अब कम हो गया था & मस्ती का नशा उसके दिलोदिमाग पे छाने लगा था,”..आआहह….हाऐईइ…1 बात बताओ..जाग..बीर..ऊओ..!”
“बोलो,मेरी रानी.”,उसकी कसी गंद ने ठुकराल के लंड को ऐसे जाकड़ रखा था की पुछो मत.उसके अंडे बिल्कुल कस गये थे & उसे 1 बहुत मीठे दर्द का एहसास हो रहा था.
“तुम्हे शत्रु…..जीत सिंग के बा..रे मे…ऊहह…..1-1 बात कई…से माल…उम हैई….पद जाती है?कोई जा..सूस रखा है क्या?”
“हां,मेरी जान.वो भी उसके घर के अंदर.”
“ऊहह…माआ…!आराम से करो…ना..!कौन है वो?”
“है कोई.”,ठुकराल उसके दाने को तेज़ी से रगड़ रहा था & अब कामिनी भी मस्ती मे कमर हिला रही थी.
“नही..बताओगे…आअहह…मत बताओ…मैं जान..ती…उउउहह…हू कौन है!”
“अच्छा,बताओ कौन है?”,ठुकराल ने ज़िंदगी मे ऐसी चौड़ी,मस्त & कसी गंद नही मारी थी & वो भी अब अपनी मंज़िल की ओर बढ़ रहा था.
“टोनी.”,ठुकराल रुक गया,”तुम्हे कैसे पता?”
“ऊहह..रुक क्यू गये..”,कामिनी ने बनावटी गुस्से से गर्दन घुमा के उसे देखा & अपने दाए हाथ को उसकी गंद पे रख के अपनी ओर खींचा,”चिंता मत करो.शत्रुजीत के यहा किसी को उसपे शक़ नही है,उल्टा सब उसे बहुत शरीफ समझते हैं मगर उसकी यही शराफ़त मेरी नज़रो मे खटक गयी.”
“कैसे?”
“ऑफ..ओह!जगबीर..तुम्ही बताओ आज के ज़माने मे कोई ऐसा नेक्दिल इंसान हो सकता है जो 2 दिन से भूखा हो फिर भी नोटोसे भरा पर्स ठुकरा दे..फिर आम नौकरो की तरह कोई छुट्टी नही लेता..अरे कितना भी तन्हा इंसान क्यू ना हो..खुद के लिए तो वक़्त चाहिए ना उसे!तुम मत घबराओ मुझे तो केवल शक़ था तुमने अभी यकीन दिला दिया.मैने किसी को नही बाते है उसके बारे मे & अब तो बताने का सवाल भी नही उठता….अब करो ना..प्लीज़!”
ठुकराल ने फिर से उसकी चूत से खलेते हुए उसकी गंद मारना शुरू कर दिया & 1 बार फिर कामिनी की आहो से हॉल गूँज उठा,”मान गये आपको,आड्वोकेट कामिनी शरण.सचमुच आपके पैने दिमाग़ का जवाब नही!”,ठुकराल बहुत ज़ोरदार धक्के लगा रहा था.
“आअनह…तुम्हारे सामने कुच्छ भी नही जानेमन..मैं तो बस सोचती & बोलती हू….ऊउउईईई..हान्न्न्न्न…तुम तो कर..के दिख..आते हो……मेरी जाआआअन्न्न्न..!”,कामिनी को बहुत मज़ा आ रहा था..ठुकराल आदमी जितना भी कमीना हो चुदाई मे महारथी था.कामिनी का रोम-2 खिल गया था इस आदमी की चुदाई से & 1 बार फिर वो अपनी मंज़िल की ओर उड़ी चली जा रही थी,”जान..तुम्हे..ये..आदमी..मी…ला का..इसे?”
“उसकी बीवी के ज़रिए.”,ठुकराल की उंगली & कमर-दोनो की रफ़्तार बढ़ गयी थी.
“क्या उसे भी…हाईईईईई…तुमने अपन दी..वाना..बना..लिया..मे..री तरह…?”
“हां,जानेमन.”
“ऊहह…ऊउईईइ….चलो झू..ठे..!”,ठुकराल की उंगली ने उसके दाने को ऐसे रगड़ा की कामिनी की चूत ने बस पानी की धार पे धार छ्चोड़ना शुरू कर दिया,”ऊहह…हाईईईई…..!”,वो झाड़ रही थी & उसके पीछे उसकी कमर थामे ठुकराल भी अब बड़े गहरे धक्के लगा रहा था,”तुम्हे यकीन नही आता?”
“उउन्ण..उउन्न्ह..ना!”,कामिनी बार पे सर झुकाए पड़ी थी & उसके धक्के झेल रही थी.
“ठीक है.मेरी रानी.कल अपनी आँखो से देखना.”,ठुकराल ने उसकी कमर को थाम 1 ज़ोरदार धक्का लगाया & उसकी गंद को अपने गाढ़े पानी से भर दिया.
“हेलो.”
“हां,मुकुल.मोहसिन बोल रहा हू.”
“बोलिए मोहसिन भाई.”
“तुम्हारे दिए नंबर के बारे मे पता चल गया.”
“हैं!इतनी जल्दी!”,मुकुल ने अभी 3 घंटे पहले ही तो उसके दफ़्तर मे उसे नंबर के बारे मे बताया था.पता नही मोहसिन ऐसे काम करता था! या नही
“हाँ,भाई.कोई शक़ है क्या?”
“नही-2,मोहसिन भाई.आप ग़लत समझ रहे हैं.अब आपके लिए ये सब बाए हाथ का खेल है मेरे जैसा इंसान तो हैरान ही होगा ना!”
मोहसिन हंसा,”मेरे भाई,अपनी हैरानी को नंबर के मालिक का नाम सुनने के लिए बचा के रखो.”
“कौन है वो?”,नाम सुन के सचमुच मुकुल की हैरानी की सीमा नही रही,”..& सुनो मुकुल,मैने उस नंबर के भी कॉल डीटेल्स निकलवा लिए हैं.सब तुम्हे कल दे दूँगा.देख लेना,हो सकता है उसमे से भी कुच्छ काम की बात पता चल जाए.”
“ओके,मोहसिन भाई.”
“..उउन्न्ह….ऊओह…..!”,कामिनी बिस्तर पे पड़ी हुई थी & उसकी फैली टांगो के बीच लेटा ठुकराल उसकी चूत चाट रहा था.कामिनी का दाया हाथ उसके सर पे उसके बालो से खेल रहा था & बाए से वो अपनी चूचिया दबा रही थी.उसने सर घुमा के दीवार घड़ी की ओर देखा,शाम के 4 बज रहे थे.कल दोपहर 12 बजे से वो नगी इस आदमी के साथ इस हॉल मे बंद थी,दोनो जम के 1 दूसरे के जिस्मो का लुत्फ़ उठाया था मगर इस आदमी के जोश मे कोई कमी नही आई थी.कामिनी को इंतेज़ार था अब शॅरन का.ठुकराल ने कल रात ही उसे बताया था की वो टोनी की बीवी थी & कैसे उसने उसे अपने जाल मे फांसा था.
तभी ठुकराल का इंटरकम बजा मगर ठुकराल ने उसपे कोई ध्यान नही दिया मगर खुमारी के उस आलम मे भी कामिनी को होश था,”जगबीर..”
“हूँ.”,ठुकराल वैसे ही उसकी गंद की फांको को सहलाता हुआ उसकी चूत मे जीभ चला रहा था.
“इंटरकम बज रहा है.”
“बजने दो.”,कहके वो फिर चूत पे जुट गया.
“उउन्न्ह..कुच्छ ज़रूरी भी तो हो सकता है..जाओ देखो.”कामिनी ने उसके बाल पकड़ के सर चूत पे से उठाया.
ठुकराल ने मुस्कुरा के उसे देखा & बिस्तर से उतर के मेज़ पे रखे इंटरकम के रिसीवर को उठाया,”बोलो,माधो.”
कामिनी भी बिस्तर से उतर कर उसके पीछे से उसे अपनी बाहो मे घेर कर उसके कंधे से सर लगाके खड़ी हो गयी,”अच्छा ठीक है..उसे आने दो.”
उसने रिसीवर रखा & दाया हाथ पीछे ले जाके कामिनी को अपने सामने किया,”वो आ गयी है..अब तुम खुद ही देख लेना.”
“ठीक है मगर कैसे?कहा से देखु?”
ठुकराल ने चारो तरफ नज़र दौड़ाई,”हां..बार के पीछे चुप जाओ..वाहा से बिस्तर साफ दिखेगा..देखना कैसे वो खुद मेरी बाहो मे आती है.”
“ठीक है.”,कामिनी ने अपना बुर्क़ा,ड्रेस,पॅंटी,बूट्स & पर्स समेटा & जल्दी से बार के पीछे छुप गयी.
“आओ,जान..कब से तुम्हारा इंतेज़ार कर रहा हू!कितनी देर कर दी तुमने!”,ठुकराल बिस्तर पे नंगा लेटा हुआ था.कामिनी ने अपने पर्स से अपना मोबाइल निकाला & उसका कॅमरा ऑन कर दिया.उसने देखा कि वही लड़की जिसका & टोनी का वीडियो उसे मोहसिन ने दिया था,आ के ठुकराल से लिपट गयी.
“ओह्ह..जगबीर..”,उस लड़की ने गुलाबी कलर की घुटनो तक की स्लीवेलेस ड्रेस पहनी हुई थी जिसके उपर से ठुकराल उसकी पीठ पे अपने हाथ चला रहा था.
अचानक वो लड़की उसकी बाँहो से निकली & बिस्तर के किनारे पे बैठ गयी.अब उसका चेहरा छिपि हुई कामिनी की ओर ही था,”मुझ से अब और नही होता,जगबीर.”
“क्या मेरी जान?”,ठुकराल ने उसके पीछे से आकर उसके दोनो तरफ अपनी टाँगे बिस्तर से लटका दी & उसके कंधो को दबाने लगा.
“तुम जानते हो मैं क्या कह रही हू.मैं अब टोनी के साथ ये नाटक और नही कर सकती.”
“बस कुछ ही दीनो की बात है,शॅरन.”ठुकराल ने उसकी ड्रेस के स्ट्रॅप्स को नीचे कर दिया & उसके नंगे कंधो को सहलाने लगा,”..1 बार शत्रुजीत सिंग मेरे रास्ते से हट जाए बस!उसके बाद सिर्फ़ तुम और मैं & तुम्हारा बेटा.”,ठुकराल ने उसके ब्रा स्ट्रॅप्स को भी नीचे कर के उसकी चूचियो को नुमाया कर दिया.
“फिर भी..-“
“देखो,शेरन तुम टोनी की बीवी हो..”,ठुकराल उसकी चूचियो से खेल रहा था & शॅरन ने भी थोडा घूमते हुए हाथ पीछे ले जाके उसके लंड को थाम लिया था,”..अगर उस से नही मिलॉगी तो उसे शक़ होगा & वो सारा प्लान चौपट कर सकता है फिर हम कभी 1 नही हो पाएँगे.”
“जगबीर,मैं उसे अब अपना पति नही मानती..मैं तुम्हे अपना सब कुछ मानती हो..उस आदमी के साथ सोना…”,शॅरन के चेहरे पे बहुत दर्द का भाव था,”..& वो तो कुच्छ और ही कहता है..कहता है की प्लान ख़त्म होने के बाद वो मुझे लेके यहा से दूर चला जाएगा!”
“रहने दो उस बेवकूफ़ को इस ग़लतफहमी मे!तुम्हे क्या जाता है,शॅरन मुझे अच्छा लगता है तुम्हारा उसके पास जाना.”,ठुकराल उसकी चूचियो से खेलता हुआ उसकी आँखो मे झाँक रहा था.कामिनी उसकी आक्टिंग की दाद दिए बिना नही रह सकी,”..मेरी जान,बस कुच्छ दिन और प्लीज़..मेरी खातिर.”,ठुकराल ने उसकी ड्रेस मे नीचे से हाथ घुसा दिया.
“नही,जगबीर..अभी नही..उस..उस नीच का मैल अभी भी वाहा है..मैं इसे सॉफ करके अभी आती हू.”,शॅरन उठी & ऐषगाह से बाहर चली गयी.
“मान गये उस्ताद आपको!”,तालिया बजाती कामिनी की आवाज़ सुनके ठुकराल अपने पीछे देखा की कामिनी अपनी ड्रेस का ज़िप उपर कर रही है.
“ये क्या जान!कपड़े क्यू पहन लिए?”
“कामिनी नेबोत्स के ज़िप्स को लगाया & अपने बुर्क़े मे बाँहे डाली,”वक़्त हो गया है,जानम.अब तुम्हारी उस छम्मक छल्लो जिसे तुमने इतना बड़ा झांसा दिया हुआ है देखा लिया तो सारा खेल बिगड़ नही जाएगा!”
“ये तो है.”,करीब आके उसने कामिनी को बाहो मे भर लिया.
“इसलिए हुज़ूर अभी मेरा जाना ही ठीक होगा..& फिर ये तो शुरुआत है..अभी तो हमे पता नही ऐसे ही कितने और सुहाने पल 1 साथ बिताने हैं.”
“उउंम्म…बस..आज के लिए इतना काफ़ी है.”,ठुकराल ने जब उसे कोई 5 मिनिट तक बाँहो मे भर के चूम लिया उसके बाद कामिनी ने उसे परे धकेल दिया.थोड़ी ही देर मे वो जैसे आई थी वैसे हीमाधो के साथ ठुकराल की कार मे वाहा से निकल गयी.देर शाम घर पहुँच के कामिनी के मन मे दोनो केसस को सुलझा लेने की खुशी थी मगर साथ ही अब 1 और बात थी जिसके लिए उसे विकास & जड्ज रस्टों कवास की मदद लेनी थी.
उसने कपड़े उतारे & अपने बाथटब के गुनगुने,खुशाबूदार पानी मे बैठ गयी..वो काम कल होना था,आज तो उसे बस आराम करना था ..आख़िर उसने इतनी मेहनत जो की थी 2 दिन!
“ये क्या कह रही हो,कामिनी!”,विकास हैरत से उसे देख रहा था.
“प्लीज़ विकास..मेरी बात समझ..अगर ऐसा नही किया तो असली मुजरिम क़ानून की पकड़ से भाग सकता है.”,कामिनी उसके ऑफीस मे बैठी थी.
“विकास,हम दोनो की राहे अलग हो गयी हैं मगर दोनो अभी भी क़ानून की रखवाली को अपना फ़र्ज़ ही नही धर्म भी मानते हैं & क़ानून क्या ये नही कहता की 1 मासूम को हमेशा इंसाफ़ मिलना चाहिए.”
“क्या जड्ज कवास इस बात के लिए तैय्यार होंगे?”
“अगर दोनो मिलके उनसे बात करे तो शायद मान जाएँ.”
“ठीक है,चलो उनसे मिलते हैं.”
“आप समझ रही हैं,कामिनी आप क्या कह रही हैं?ऐसा पहले कभी नही हुआ है & अगर कुच्छ गड़बड़ हुई तो मेरी ज़िंदगी भर की कमाई हुई इज़्ज़त सब मिट्टी मे मिल जाएगी.”
“मुझपे भरोसा रखिए,सर.अगर ज़रूरी नही होता तो क्या मैं कभी ऐसी अजीब बात करती.”
“ओके,पर्मिशन ग्रॅंटेड.”
“थॅंक यू सो मच,सर.”
आख़िर कामिनी ने दोनो को मना ही लिया था दोनो केसस की सुनवाई 1 साथ करने के लिए.यही 1 तरीका था जिस से वो असली मुजरिम को पकड़े जाने की भनक भी नही लगने दे सकती थी.शायद ही कभी पहले ऐसा हुआ हो-2 केसस की सुनवाई 1 साथ 1 ही कोर्टरूम मे!
अब उसे जगबीर ठुकराल को अदालत मे बुलाने के लिए मनाना था,तभी उसका मोबाइल बजा,देखा तो ठुकराल का ही नंबर था..शैतान का नाम लो & शैतान हाज़िर!
“कहिए जनाब.”,कामिनी ने बड़ी अदा से कहा.
“क्या कहें!हम तो आपकी जुदाई मे पागल हो रहे हैं.”
“अब क्या कर सकते हैं!”,कामिनी ने आह भारी,”..हमारी तक़दीर ही ऐसी है.”,इतने नाटकिया ढंग से बात कही गयी की दोनो हंस पड़े.
“वैसे तुम्हारा क्लाइंट तो अब खुद अपने केस की पैरवी करने की सोच रहा है.अब क्या होगा?”
“कुच्छ नही होगा,जगबीर डार्लिंग.मैं उसे किसी ना किसी तरह मना लूँगी.देखो कल ही उसके केस की पेशी है & इतनी जल्दी वो कुच्छ तैय्यारि भी नही कर पाया होगा..अगर बुरा ना मानो तो 1 बात कहु.”
“क्या मेरी जान?”
“तुम कल कोर्ट आ सकते हो?”
“मैं!क्यू?”
“देखो,मैने सोचा है कि शत्रुजीत को अपना गुनाह मानने के लिए तैय्यार कर लू & फिर उसे थोड़ी हल्की सज़ा देने के लिए जड्ज से कहु.मैं चाहती हू क़ी तुम उसकी अच्छाई के बारे मे कहो..लोग तुम्हे उसका दुश्मन समझते हैं,ऐसे मे तुम्हारा उसके साथ खड़ा होने से उसकी सज़ा तो कम होगी ही तुम्हारी भी इज़्ज़त लोगो की नज़रो मे बढ़ जाएगी.”
“मान गये,वकील साहिबा!अब तो तुम्हे किसी एलेक्षन का टिकेट देना ही पड़ेगा.”
“ओह्ह..थॅंक्स जगबीर!तो तुम आओगे ना!”
“हां,जानेमन.”
“आइ लव यू,जगबीर डार्लिंग..”,कामिनी ने थोड़ी देर उस से और उस से प्यार भरी बातो का नाटक किया & फिर फोन रख दिया.अब बस 1 ही काम बाकी था-आंतनी डाइयास को अपनी तरफ करने का.
“टोनी.”
“ह्म्म.”,सिगरेट जलते टोनी ने पलट के देखा तो मुकुल को खड़ा पाया.
“तुम..यहा..क्या काम है?”,टोनी ने सुनसान सड़क की ओर इशारा किया,शाम के 8 बजे शत्रुजीत के बंगल के पीछे के रास्ते पे शायद ही कोई आता था.
“मुझे नही मेडम को काम है.”,मुकुल ने पीछे खड़ी कामिनी की कार की ओर इशारा किया.
“जी,कहिए.”,कामिनी ने कार का शीशा नीचे किया तो टोनी ने पुचछा.
“अंदर बैठो टोनी,तुम्हे कुच्छ दिखाना है.”,कामिनी ड्राइविंग सीट पे बैठी थी & उसने बगल की सीट का दरवाजा खोल दिया.टोनी 1 बार तो हिचकिचाया मगर फिर बैठ गया,”दिखाइए.”
“यह देखो..”,कामिनी ने अपने फोन को ऑन कर ठुकराल & शॅरन की बातचीत की रेकॉर्डिंग प्ले कर दी.जैसे-2 क्लिप आगे बढ़ती गयी टोनी के चेहरे पे गुस्से,शर्म & दुख के मिले-जुले भाव गहरे होते गये.उसने कामिनी का फोन छीनना चाहा मगर कामिनी फुर्ती से उसे किनारे कर दिया.
“ये क्या बकवास है!”,वो चिल्लाया,”..तुम मुझे बेवकूफ़ बना रही हो..ये सब झूठ है..हां!तुमने कंप्यूटर से ये नकली क्लिप बनाई है.”
“अच्छा.”,उसने टोनी के दरवाज़े के बाहर खड़े मुकुल को इशारा किया तो उसने पिच्छली सीट से लॅपटॉप उठाया & उसे ऑन करके टोनी & शॅरन के होटेल रूम की रेकॉर्डिंग दिखा दी,”अब इसे भी झूठ कह दो,टोनी.”
“मुझे कुच्छ समझ मे नही आ रहा.”,टोनी अपने हाथो मे अपना चेहरा च्छूपा के झुक गया.उसके हिलते बदन को देख कामिनी समझ गयी को वो रो रहा था.
“टोनी..”,उसने उसकी पीठ पे हाथ रखा,”..मैं समझती हू तुम्हारे उपर क्या बीत रही है..यकीन मानो मुझे पता है बेवफ़ाई का दर्द क्या होता है..मगर शॅरन क्या करती?तुम्ही बताओ..”
“..1 औरत को अपने पति से क्या चाहिए होता है,टोनी..प्यार,इज़्ज़त?..हां..मगर इन सब से भी ज़्यादा ज़रूरी चीज़ है सुरक्षा..सेफ्टी..उसके आने वाले कल की उसके बच्चे की..तुमने उसे ये सुरक्षा दी थी ..कभी नही..क्या तुम 1 अच्छे बाप हो टोनी..नही..जब कमाया तो राजा की तरह जीने लगे नही तो फकीर से भी बदतर ज़िंदगी..ऐसे मे अगर शॅरन को उसके & तुम्हारे बेटे के लिए ठुकराल मे वो सेफ्टी नज़र आई तो इसमे उसकी क्या ग़लती है?”
“..मगर मैं भी तो ये सब उसी के लिए कर रहा हू..”,टोनी ने अपने हाथ हटाए तो उसका आसुओं से भीगा चेज़रा नज़र आया.
“हां..मैं जानती हू मगर शॅरन को तुमपे भरोसा नही रह गया था & फिर तुम ठुकराल को नही जानते..वो बहुत चालक & शातिर इंसान है..तुम दोनो के भरोसे के साथ खेल अकर वो अपना मतलब निकाल रहा है.”
“मैं क्या करू अब?..मेरी तो दुनिया लूट गयी.”
“नही,अभी भी वक़्त है..मैं जैसा कहती हू वैसा करो..मैं शॅरन & ठुकराल के रिश्ते की बात किसी के सामने नही आने दूँगी..भरोसा रखो टोनी,ये राज़ सिर्फ़ हम तीनो के बीच ही रहेगा..केस ख़त्म होने के बाद मैं तुम दोनो & तुम्हारे बच्चे का सही बंदोबस्त कर दूँगी..तुम मुझे सब कुच्छ शुरू से बताओ.”
“ठीक है.”

