ठुकराल लॉन के बाहर पार्किंग मे आया तो माधो उसकी कार को दरवाज़ा खोल खड़ा हो गया.उसकी कार से कुच्छ दूरी पे 1 और कार खड़ी थी जिसका ड्राइवर खड़ा सिगरेट पी रहा था.ठुकराल ने अपनी जेब से पॅकेट निकाल कर 1 सिगरेट निकाली.उसने जेब मे दुबारा हाथ डाला पर लाइटर शायद वो घर भूल आया था,”अरे भाई!ज़रा सुनो.”,
वो ड्राइवर पलटा तो ठुकराल ने उसे सिगरेट दिखा के माचिस माँगी.
ड्राइवर पास आया & ठुकराल की सिगरेट जलाने लगा,”सारी बाते हो चुकी हैं.शुक्रवार की रात को काम ठीक से हो जाना चाहिए.”
“आप बेफ़िक्र रहे,सर.”,टोनी ने सिगरेट जला के माचिस बुझाई & वापस अपने कार की ओर चला गया.ठुकराल सिगरेट पीते हुए अपनी कार मे बैठ गया.अब्दुल पाशा भी पार्किंग ही की तरफ आ रहा था मगर ये कह पाना मुश्किल है की उसने ठुकराल & टोनी को साथ देखा या नही.जो भी हो,शुक्रवार की रात शायद सबकी ज़िंदगी मे उथल-पुथल मचाने वाली थी.
कामिनी करण के बिस्तर मे नंगी पड़ी थी & वो उसकी टाँगो के बीच घुटनो पे बैठा बड़ी तेज़ी से उसकी चूत मे अपना लंड अंदर-बाहर कर रहा था.उसके हाथ कामिनी के घुटनो को मोडे हुए थे & कामिनी के हाथ उसकी जाँघ पे लगे हुए थे & वो बहुत ज़ोर-2 से आहे भर रही थी.
“..ऊऊऊव्व्वव..!”,कामिनी ने बदन कमान की तरह मोड़ कर पीठ बिस्तर से उठा दी &आँखे बंद किए हुए सर पीछे झुका के झाड़ गयी मगर करण अभी नही झाड़ा था.करण थोड़ी देर तक वैसे ही उसकी चूत मे लंड को शांत रखे बस प्यार से उसके बालो को सहलाता रहा.
थोड़ी देर बाद कामिनी ने आँखे खोली तो करण ने उसे घूम कर अपने घुटनो पे होने का इशारा किया.मुस्कुराती हुई कामिनी अपने घुटनो पे आ गयी,सहारे के लिए उसने पलंग के हेअडबोअर को थाम लिया.कारण ने अपना तना लंड पीछे से उसकी चूत मे घुसा दिया & 1 बार फिर उसकी चुदाई मे लग गया.थोड़ी देर मे ही फिर से कमरा कामिनी की मदहोश आहो से गुलज़ार हो गया.
उनके मज़े मे खलल डालता हुआ करण का मोबाइल बज उठा तो करण ने वैसे ही अपनी प्रेमिका को चोद्ते हुए 1 हाथ उसकी कमर से हटाया & फोन उठा लिया मगर नंबर देखते ही जैसे उसका जोश हवा हो गया.उसने झट से लंड बाहर खींचा तो कामिनी थोडा झल्ला के पीछे मूडी तो पाया की करण बात करते हुए बिस्तर से उतर गया था.
कामिनी को बहुत बुरा लगा…माना की उसके पिता का फोन थे मगर इस तरह से बीच मे छ्चोड़ कर जाना…हुंग!…”ओके..ठीक है…हां-2 मैं एरपोर्ट पहुँच जाऊँगा…थर्स्डे मॉर्निंग याद है बाबा!ह्म्म…”,करण वही कमरे के दरवाज़े पे खड़ा बात कर रहा था & कामिनी पलंग पे मुँह फेरे पड़ी थी,तभी करण कमरे के बाहर चला गया & फिर कोई 1 मिनिट बाद वापस आया.
“आइ’एम सॉरी!..रियली सॉरी!”,उसने करवट ले कर लेटी हुई कामिनी को पीछे से बाहो मे भरना चाहा तो कामिनी ने उसे परे धकेल दिया,”प्लीज़ जानेमन!..बुरा मत मानो…मुझे क्या च्छा लगा इस तरह से जाना!..मगर क्या करता..हेड ऑफीस से 1 सीनियर अफ़सर का फोन था..अब उसके चक्कर मे ये वीकेंड बर्बाद होने वाला है…वो यहा आ रहा है & मुझे उसकी खिदमत मे लगा रहना पड़ेगा…अब आ जाओ.”
“..तो अभी भी उसी के पास चले जाओ,उसी के साथ अपनी प्यास बुझा लेना!”,कामिनी ने तुनक के उसका हाथ झटक दिया.मगर वो कब तक कारण के इसरार को ठुकराती.दो नंगे जवान मर्द & औरत चाहे कितना भी खफा हों,उनके जिस्म तो उन्हे सुलह पे मजबूर कर ही देते हैं.कुच्छ करण की मिन्नतो & कुच्छ उसके जिस्म की गर्मी ने कामिनी को 1 बार फिर उसके घुटनो पे खड़ा कर दिया & करण फिर से अपनी प्रेमिका को डॉगी स्टाइल मे चोदने लगा…मगर कामिनी को इस बार उतना मज़ा नही आ रहा था…उसे ऐसा लगा जैसे की उस फोन के चलते कारण थोड़ा परेशान हो गया था & इसका असर उसकी चुदाई मे भी पड़ रहा था.
उसने सर घुमा कर उसे देखा तो उसे उसका शक़ यकीन मे बदलता नज़र आया-इस वक़्त चुदाई करते हुए भी करण थोड़ा असहज लग रहा था.उसने अपनी प्रेमिका को यू खुद को घूरते देखा तो झुक कर अपना सीने को उसकी पीठ से लगा दिया,फिर दाए हाथ से उसकी चूत & बाए से उसकी चूचियो को मसल उसके होंठ चूमता हुआ उसे चोदने लगा.
आज शुक्रवार की रात थी & कामिनी अपने बिस्तर मे अकेली पड़ी करवटें ले रही थी.जब से उसके तीनो प्रेमी उसकी ज़िंदगी मे आए थे,शायद ही कोई रात उसने यू तन्हा बिताई हो & वीकेंड या छुट्टी के दिन तो वो जम के चुदाई का लुत्फ़ उठाती थी.मगर आज की रात हालात ही कुच्छ ऐसे बन गये थे.करण अपने अफ़सर के साथ लगा हुआ था & षत्रुजीत सिंग को भी आज कंपनी अकाउन्त के पेपर्स निपटाने थे,अगले हफ्ते से ऑडिटिंग शुरू होने वाली थी…& चंद्रा साहब..वो बेचारे तो बीवी की नज़र बचा के यहा आने से रहे.
रात के 12:30 बज रहे थे & कामिनी अभी भी करवटें बदल रही थी.उसने सोचा की थोडा टीवी देखा जाए.ड्रॉयिंग रूम मे जाके उसने टीवी ओं किया.चॅनेल्स बदलते हुए वो न्यूज़ चॅनेल पे पहुँची..”ब्रेकिंग न्यूज़….बॉर्नीयो मे गोलीबारी..1 शख्स की मौत.”,सभी चॅनेल्स पे यही खबर आ रही थी.बॉर्नीयो पंचमहल का काफ़ी पुराना पब था & शायद उसमे ये पहली ऐसी घटना घटी थी….जयंत पुराणिक तो वाहा लगभग रोज़ ही जाते थे…कामिनी को ख़याल आया.उसने चॅनेल्स बदले…1 फिल्म चॅनेल पे 1 अच्छी फिल्म आ रही थी,कामिनी उसे देखने लगी…कोई 10 मिनिट बाद उसमे ब्रेक हुआ तो कामिनी ने वापस न्यूज़ चॅनेल लगाया.ठीक उसी वक़्त उसका मोबाइल भी बज उठा.
“हेलो,”,कामिनी ने फोन कान से लगाया.
“का-..का..कामिनी..मा..मैं..करण बोल रहा हू…”,वो काफ़ी घबराया हुआ था.
“हां,कारण बोलो..क्या हुआ?ऐसे घबराए क्यू हो?”
“कामिनी..कामिनी..”
“हां,करण बोलो क्या बात है?”,अब कामिनी को भी चिंता होने लगी थी.
“मु-..मुझसे खून हो गया है..”
“क्या?!!”,ठीक उसी वक़्त कामिनी ने टीवी स्क्रीन की ओर देखा,”..त्रिवेणी ग्रूप के वाइस-प्रेसीडेंट जयंत पुराणिक का खून.”
“हां,कामिनी…पता नही कैसे-“
“करण,तुम इस वक़्त कहा हो?”
“पोलीस मुझे थाने ले जा रही है..बड़ी मुश्किल से तुम्हे कॉल करने की इजाज़त मिली है.”
“ठीक है..मैं थोड़ी देर मे वाहा पहुँचती हू.”
कोई 40 मिनिट बाद कामिनी थाने मे थी,”मेडम,इन्होने ही मिस्टर.पुराणिक का खून किया है,मर्डर वेपन भी हुमारे पास है & चश्मदीद गवाह भी.”
“ठीक है,इनस्पेक्टर.क्या मैं 1 बार अपने क्लाइंट से मिल सकती हू?”
“जाइए…हवलदार इन्हे करण मेहरा के पास ले जाओ.”
कामिनी लॉक-अप के पास पहुँची तो देखा की 1 खूबसूरत सी लड़की सलाखो के इस तरफ खड़े उनके पीछे खड़े कारण से बाते कर रही है,दोनो ने 1 दूसरे के हाथ थाम रखे थे.लड़की के बॉल बिल्कुल मॉडर्न अंदाज़ मे कंधो तक कटे हुए थे & उसने जीन्स के साथ 1 ब्राउन जॅकेट पहनी हुई थी,पैरो मे ऊँची हील्स के सॅंडल्ज़ थे.लड़की देखने से ही काफ़ी अमीर घराने की लग रही थी.
कामिनी को देखते ही करण ने लड़की का हाथ छ्चोड़ दिया,”आओ..कामिनी..मुझे यहा से निकालो..प्ल..प्लीज़..”,उसके चेहरे का रंग बिल्कुल उड़ा हुआ था & इस हल्की ठंड के मौसम मे भी माथा पसीने से भीगा हुआ था.कामिनी ने लड़की की तरफ देखा,”हाई!कामिनी,आइ’एम शीना मित्तल.मैं करण की मंगेतर हू.”
कामिनी चौंक पड़ी,करण ने आजतक उसे इस बारे मे नही बताया था,उसने करण की ओर देखा तो करण ने नज़रे चुरा ली,”हेलो,शीना.मैने तुम्हे पहले कभी करण के साथ नही देखा?”
“मैं कल ही लंडन से यहा आई हू.”
“ओह्ह..अच्छा हवलदार,ज़रा लॉक-अप खोलो.”
“जी,मेडम.”,कामिनी के अंदर जाते ही उसने लॉक-अप को वापस बंद कर दिया,”शीना,प्लीज़ ज़रा पानी की 1बॉटल ले आओगी.”
“हां-2 क्यू नही.”,शीना वाहा से चली गयी.
“कामिनी..वो मैं..मुझे…शीना…के..आइ मीन-..”
“देखो,करण मैने पहली रात ही तुम्हे कह दिया था की मैं हुमारे रिश्ते को कोई नाम नही देना चाहती थी.अगर तुमने मुझे शीना के बारे मे नही भी बताया तो मुझे कोई फ़र्क नही पड़ता,लेकिन अब तुम मेरे क्लाइंट हो & मुझे बाते छुपाने वाले क्लाइंट्स बिल्कुल पसंद नही.मैने इनस्पेक्टर से जो भी बात की है उस से 1 बात तो तय है की तुम्हारे खिलाफ बहुत मज़बूत केस है,इसीलिए,अगर तुम चाहते हो कि मैं तुम्हारी ठीक तरीके से मदद करू तो मुझे 1-1 बात बताओ.”,तब तक शीना पानी ले आई थी.कामिनी ने करण को बॉटल थमायी जिसे उसने 1 ही घूँट मे खाली कर दिया,”..हां,अब बताओ,करण.”,फिर वो शीना की तरफ घूमी,”शीना,अगर करण कोई बात मिस कर जाए तो तुम ध्यान रखना प्लीज़.”
“ओके,कामिनी.”
“शीना & मैं आज रात कोई 11 बजे बॉर्नीयो पहुँचे.मैं वाहा कभी-कभार जाता हू & वाहा का बारटेंडर भी मुझे पहचान गया है…मैं शीना को घुमाने के लिए ले गया था.हम बार के सामने स्टूल्स पे बैठे अपने ड्रिंक्स ले रहे थे.हुमारे स्टूल्स के 2 स्टूल्स बाद शीना की बाई तरफ 1 बूढ़े के साथ 2-3 लोग बैठे थे.बूढ़ा तो काफ़ी शरीफ लग रहा था मगर बाकियो को थोड़ी चढ़ गयी थी,उनमे से 1 उठ कर बाथरूम की तरफ गया & जाते हुए शीना की पीठ से जान बुझ कर सटा.मैने उसकी खबर उसी वतक़ लेता मगर इसने मुझे रोक दिया..”,उसने बाहर खड़ी शीना की ओर इशारा किया,”..उस कमिने ने बाथरूम से लौटते हुए फिर वही हरकत दोहराई तो इस बार मुझ से रहा नही गया.मैं उठा & उसका कॉलर पकड़ लिया..हम दोनो मे हाथापाई होने लगी तो उसके साथ आए लोग बीच-बचाव करने लगे & शीना भी मुझे खींचने लगी..”
“..पब मे आकर मैने अपनी जॅकेट उतार दी थी..शीना मुझे मेरी जॅकेट पहनने लगी की तभी मेरे हाथ मे उसकी पॉकेट मे कुच्छ सख़्त चीज़ महसूस हुई…मैने उस से झगड़ते हुए उस चीज़ को निकाला,वो मेरी लाइसेन्स्ड पिस्टल थी…पता नही मुझे इतना नशा कैसे हो गया था..मैने पिस्टल उस पे तान दी..तो वो भी ताव मे आ गया..अब वो बूढ़ा शख्स हम दोनो के बिल्कुल बीच मे आ गया था & शीना भी मेरा हाथ खींचने लगी..& पता नही कब…& कैसे-कैसे गोली चल गयी & उस बूढ़े को लग गयी.”,करण काँपने लगा.
कामिनी ने उसकी पीठ सहलाई,”करण..तुमने कितनी शराब पी थी?”
“वही अपनी रेग्युलर 2 पेग विस्की मगर मुझे नशा कुच्छ ज़्यादा हो गया था.”,कामिनी सारी बाते नोट करती जा रही थी.
“कामिनी..मैं उसे मारना नही चाहता था..पता-“
“कोई बात नही,करण.सब ठीक हो जाएगा..1 बात बताओ.आख़िर तुमने अपनी जेब मे पिस्टल रखी ही क्यू?”
“पता नही,कामिनी.घर से निकालने से पहले मैने शीना को वो पिस्टल दिखाई थी मगर जहा तक मुझे याद है,उसे मैने वापस अपनी सेफ मे रख दिया था.”
“शीना,तुमने माँगी थी गन?”
“हां.वो हुआ ये था कि कामिनी हम बाते कर रहे थे की आजकल रहजनी,लूट.मर्डर…क्राइम कितना बढ़ गया है & 1 आम आदमी इस से कैसे बच सकता है..1 बात से दूसरी बात निकली & करण ने मुझे अपनी पिस्टल के बारे मे बताया..तो मैने उस से दिखाने को कहा.”
“तो तुमने उसे गन वापस सेफ मे रखते हुए देखा था?”
“पता नही,कामिनी.गन देखने के बाद मैं बाथरूम चली गयी थी.उसके बाद हम दोनो ही घर से निकल गये थे.”
“ह्म्म..”,कामिनी लॉक-अप से बाहर निकल आई,करण ने अंजाने मे जयंत पुराणिक का खून कर दिया था.उसने करण को दिलासा दिया & 1 बार फिर इनस्पेक्टर के पास चली गयी.
“मेडम,इसका ब्रहलाइसर टेस्ट दिखाता है की इसने काफ़ी शराब पी थी,फिर हमने इसका गन लाइसेन्स मगाया है.उस से मर्डर वेपन को मॅच करेंगे..वैसे वो तो बस 1 फॉरमॅलिटी ही है..जब इसने गोली चलाई उस वक़्त बारटेंडर मिस्टर.पुराणिक & उनके तीनो गेस्ट्स & इसकी मंगेतर के अलावा 5 और लोग थे.ऐसा हमे पब के स्टाफ ने बताया है.उन 5 मे से 3 लोगो से हमने कॉंटॅक्ट किया है,उनमे से 2 ने इसे गोली चलाते देखा था & 1 का कहना है उस वक़्त उसकी पीठ थी इसकी तरफ इसी लिए नही देख पाया लेकिन जब वो घुमा तो उसने इसे गन पकड़े खड़ा देखा था…अब बताइए…ऐसे मे ये क्या बच सकता है?”
“देखती हू,इनस्पेक्टर..”,कामिनी खड़ी हो गयी,”..अगर भगवान ने चाहा तो बच भी सकता है.थॅंक्स.अब मैं चलती हू.”,कामिनी थाने से निकलते हुए सोच रही थी की पुराणिक के खून के बाद भी शत्रुजीत यहा कैसे नही पहुँचा.
“..क्या?!षत्रुजीत सिंग के यहा….व्हाट?!”,कामिनी ठिठक गयी.उसने घूम कर देखा.इनस्पेक्टर अपने फोन पे बात करते हुए चौंक कर खड़ा हो गया था,उसी वक़्त 1 हवलदार उसके पास आया,”सर,अभी-2 वाइर्ले पे कंट्रोल रूम से मेसेज आया हैकि-..”
“..कि शत्रुजीत सिंग की बीवी नंदिता का खून हो गया.”,इनस्पेक्टर ने अपनी कॅप लगाई,”..पाठक को बुलाओ…पहले ये बॉर्नीयो का केस & अब ये..आज की रात की नींद तो गयी!”
“यह सब कैसे हुआ,जीत?”,लॉक-अप मे बैठे षत्रुजीत सिंग का हाथ कामिनी ने अपने हाथ मे ले लिए,”..मुझे सब कुच्छ बिल्कुल शुरू से बताओ.”,पोलीस ने शत्रुजीत को शक़ की बिना पे हिरासत मे ले लिया था.
“मैं अपने घर पे ही अपने स्टाफ के साथ काम कर रहा था.11 बजे तक सारे लोग चले गये बस मैं & अब्दुल काम कर रहे थे.”
“सिर्फ़ तुम दोनो,क्यू?बाकी स्टाफ क्यू नही था तुम्हारे साथ?”
“क्यूकी वो बहुत सेन्सिटिव फाइल्स थी ,कामिनी जिनके बारे मे मेरे & अब्दुल के सिवा बस अंकल जे ही जानते थे.”
“हूँ,फिर?”
“रात के 12 बजे मैं कुच्छ काग़ज़ लेने नीचे हाल से उपर अपने बेडरूम को गया.पहली मंज़िल पे बिल्कुल अंधेरा था,सारे नौकर भी अपने कमरो मे जा चुके थे.मेरा बेडरूम लॉक था…नंदिता अक्सर ऐसा करती थी.हम दोनो के पास अपनी-2 चाभीया थी.मैने अपनी जेब से चाभी निकाल कर दरवाज़ा खोला & जैसे ही अंदर कदम रखा,मेरा पैर किसी चीज़ से टकराया.”
“..कमरे मे भी अंधेरा था.मैने वो चीज़ उठाई & फ़ौरन लाइट का स्विच ऑन किया.मैने देखा की वो चीज़ मेरी पिस्टल थी & सामने कुर्सी पे नंदिता पड़ी थी.उसकी बाई कनपटी से खून बह रहा था & उसका सर भी उसी तरफ झुका हुआ था.मैने फ़ौरन अब्दुल को आवाज़ दी & आंब्युलेन्स & पोलीस को बुलाने को कहा..साथ ही उसे सभी गार्ड्स को सारी लाइट ऑन कर बंगल का चप्पा-2 छानने को कहा.”
“..मैं जानता था की नंदिता मर चुकी है.”,शत्रुजीत चुप होकर दूसरी तरफ देखने लगा.कामिनी ने उसके कंधे पे अपना हाथ रखा,”..वो पिस्टल लगातार मेरे हाथ मे थी.सारे नौकरो ने भी मुझे उसे पकड़े देखा.पोलीस को शक़ हुआ & मैं यहा हू.”
“जीत,तुम्हारी & नंदिता की शादी के बारे मे तुम मुझे पहले भी बता चुके हो..पर कुछ ऐसी बात जो तुमने मुझे ना बताई हो?”
“मैं उसे तलाक़ देना चाहता था.अभी कुच्छ ही दिन पहले मैने उसे ये बात बताई.शुरू मे तो उसने कुच्छ नही कहा..मगर बाद मे उसने सॉफ मना कर दिया.”
“तुम दोनो का इस बात पे झगड़ा हुआ?”
“हुन्ह..”,शत्रुजीत 1 फीकी हँसी हंसा,”..झगड़े के लिए भी दिल मे कुच्छ भावनाए होनी चाहिए..हम दोनो के बीच तो इतना सा भी लगाव नही था,लेकिन हुमारी बहस ज़रूर हुई थी.”
“किसी ने सुनी थी ये बहस?”
शत्रुजीत थोड़ी देर सोचता रहा,”..शायद 1 बार नंदिता की नौकरानी ने सुना हो.”
“ओके.”
“कामिनी,मैने सुना है कि अंकल जे के क़ातिल का केस भी तुम ही लड़ रही हो?”
“हां.”
“कामिनी,तुम जानती हो अंकल जे मेरे लिए क्या थे,फिर भी?”
“जीत,करण भी मेरा क्लाइंट है,फिर अगर उसने गुनाह किया है तो उसे सज़ा ज़रूर मिलेगी,लेकिन उसे भी तो 1 बार अपना बचाव करने का हक़ है ना!”
“पता नही.मुझे ये ठीक नही लगा.”
“प्लीज़ जीत,मेरी हालत को समझो.”
“हूँ.”
कामिनी कोर्टरूम मे जड्ज & सरकारी वकील के आने का इंतेज़ार कर रही थी,”मॅ’म,मुझे नही लगता करण मेहरा की ज़मानत होगी?”,मुकुल ने सारे पेपर्स सॅंजो कर उसके सामने रख दिए.
“हां,मुकुल.बहुत बुरा फँसा है..पर हमे कोशिश तो करनी ही है.”,तभी कुच्छ शोर सा हुआ तो कामिनी ने देखा की सरकारी वकील अपनी असिस्टेंट के साथ चला आ रहा था.वो दोनो और कोई नही उसका पूर्व पति विकास & उसकी प्रेमिका सीमी थे.कामिनी चौंक गयी पर उसने अपने चेहरे पे कोई भाव नही आने दिया.उसने देखा की उसे देख सीमी ने नज़रे झुका ली थी & अपने हाथ मे पकड़ी फाइल देखने का नाटक कर रही थी.कामिनी मन ही मन उस पे हँसी.विकास को देख वो थोड़ा असहज तो हुई थी मगर फिर उसे ख़याल आया कि उस से रिश्ता टूटने के बाद उसकी ज़िंदगी कितनी रोमांचकारी हो गयी.उसके तीनो प्रेमियो से उसे जो खुशी,जो सुकून मिला वो शायद विकास के साथ भी कभी नही मिला था.
“हेलो,विकास.”,विकास भी थोड़ा सकपका रहा था मगर कामिनी की पहल ने उसे भी सहज कर दिया,”हाई!कामिनी.कैसी हो?”,उसने मुकुल को भी सर हिला के उसकी हाई का जवाब दिया.
“हाई!सीमी”,कामिनी सीमी से मुखातिब हुई तो उसने भी सर झुकाए जल्दी से हेलो कहा.ठीक उसी वक़्त जड्ज के आने का एलान हुआ & सीमी ने चैन की सांस ली.जड्ज रस्टों कवास अपनी कुर्सी पे बैठे & कोर्ट की करवाई शुरू करने का हुक्म दिया.रस्टों कवास की ईमानदारी & क़ानून की समझ की सभी मिसाले देते थे,”मॅ’म,ये तो कभी ज़मानत नही देगा.”,मुकुल कामिनी के पीछे फुसफुसाया.
और हुआ भी यही.सारे सबूत-करण की लाइसेन्स्ड गुण की बेलिस्टिक रिपोर्ट,चस्मडीद गवाहॉ के बयान & सीक्ट्व कॅमरा की फुटेज,सभी करण को ही दोषी करार दे रहे थे.जड्ज कवास ने उसकी पुलिस रेमांड और 15 दीनो के लिए बढ़ा दी.
“करण,तुम फ़िक्र मत करना.मुझपे भरोसा रखो.ओके.”,मायूस करण सर झुकाए हवलदरो के साथ पोलीस वन मे बैठ गया.
कामिनी वापस कोर्टरूम मे आई.जड्ज भी वही था & सरकारी वकील भी मगर इस बार केस था नंदिता सिंग के क़त्ल का.
“षत्रुजीत सिंग जी,आपकी अपनी बीवी से कैसी नीभती थी?”,शत्रुजीत कटघरे मे खड़ा था & विकास उस से सवाल कर रहा था.
“जी,ठीक-ठाक.”
“ज़रा इस ठीक-ठाक पे रोशनी डालेंगे.”
“जी हम 1 दूसरे को चाहते नही थे मगर हुमारे दिलो मे 1 दूसरे के लिए बहुत इज़्ज़त थी.”
“तो फिर आपने उनका खून क्यू किया?”
“ऑब्जेक्षन,मिलर्ड!”,कामिनी की आवाज़ खचाखच भरे कोर्टरूम मे गूँजी,”अभी तक जुर्म साबित नही हुआ है,युवर ऑनर & उसके पहले मेरे मुवक्किल से ऐसे सवाल नही किए जा सकते.”
“ऑब्जेक्षन सस्टेंड.”
“मिलर्ड,”.विकास ने जड्ज कवास को देख के सर झुकाया,”..तो आपकी अपनी पत्नी के साथ नही बनती थी?”
“जी.”
“उसकी कोई खास वजह.”
“जी नही.बस यू समझिए की हम 2 बिल्कुल अलग सोच के लोग थे जो हालत की वजह से शादी के बंधन मे बँध गये.”
“मिस्टर.सिंग,आपके अपनी बीवी के अलावा भी और किसी औरत से संबंध रहे हैं?”
“जी.”
“आपकी बीवी का आपकी इस हरकत पे क्या कहना था?”
“उसे कोई फ़र्क नही पड़ता था.”
“मुलज़िम झूठ बोल रहा है,मिलर्ड!दुनिया की कोई भी औरत अपने पति की बेवफ़ाई नही बर्दाश्त कर सकती.युवर ऑनर,मुलज़िम का अपनी बीवी से झगड़ा हुआ & उसे इतना गुस्सा आया की उसने अपनी बीवी पे गोली चला दी.ये खून जज़्बाती होकर किया गया था,इसीलिए उसे सबूत मिटाने या च्छुपाने का वक़्त नही मिला & वो पकड़ा गया.मिलर्ड मेरी आपसे इल्तिजा है कि मुलज़िम की ज़मानत की अर्ज़ी खारिज कर उसे पोलीस हिरासत मे ही रहने दिया जाए.”
“मिलर्ड,सरकारी वकील ने दलील तो अच्छी दी है मगर इनके पास कोई गवाह है जो ये साबित करे की उस रात शत्रुजीत & नंदिता सिंग मे कोई झगड़ा हुआ था.”
“उस रात तो नही मगर मेरे पास 1 गवाह है जो ये बताएगा कि इनके & इनकी पत्नी के बीच मे किस बात को लेके मनमुटाव चल रहा था.मैं गवाह को पेश करने की इजाज़त चाहता हू.”
“इजाज़त है.”
“शांति,अपना परिचय दो?”
“मैं नंदिता मेडम की मैड थी.”
“तुमने उनकी मौत से कुच्छ दिन पहले उन्हे शत्रुजीत जी से क्या बात करते सुना था?”
“जी..साहब कुच्छ कह रहे थे जो शायद मेडम नही मान रही थी.मैने बस इतना सुना की तो तुम नही मनोगी & मेडम ने कहा नही..इसके बाद साहब कमरे से बाहर चले गये.”
“आप क्या माँग रहे थे,मिस्टर.सिंग?”
“तलाक़.”,कोर्ट मे ख़ुसर-पुसर होने लगी.
“ऑर्डर!ऑर्डर!”
“अब तो केस आईने की तरह सॉफ हो गया मिलर्ड.क़त्ल की 1 जायज़ वजह भी मिल गयी.दट’स ऑल.”
विकास के बैठते ही कामिनी खड़ी हुई,”मिलर्ड.मुझे मिस्टर.सिंग से कुच्छ नही पुच्छना है बल्कि मैं 1 दूसरा गवाह पेश करूँगी.आपकी इजाज़त चाहिए.”
“गो अहेड.”
“मिस्टर.सिंग,आप नंदिता जी के पिता हैं?”
“जी.”
“आपको अपने बेटी & दामाद के बीच के रिश्ते की असलियत मालूम थी.”
“जी,हां.नंदिता या शत्रु ने हमसे कभी कुच्छ नही च्छुपाया था.”
“मिस्टर.सिंग,आपकी बेटी से आपका रिश्ता कैसा था?”
“जैसा 1 बाप & बेटी का होना चाहिए.लगभग हर दूसरे तीसरे दिन हम फोन के ज़रिए 1 दूसरे का हाल तो लेते ही थे,मौका मिलने पे मुलाकात भी होती थी.”
“तो कभी आपको आपकी बेटी ने शत्रुजीत जी के तलाक़ माँगने की बात बताई थी.”
“नही.”
“पॉइंट टू बी नोटेड मिलर्ड,सरकारी वकील साहब के मुताबिक जिस बात के चलते नंदिता जी का खून हो गया,वो उतनी ज़रूरी बात उन्होने अपने पिता तक को नही बताई..उस पिता को जिनसे वो हुमेशा बात करती थी या फिर मिलती थी.”
“मिस्टर.सिंग,आप अपने दामाद के बारे मे तो अख़बारो मे पढ़ते ही रहते होंगे?”
“जी.”
“उनमे उनकी दूसरी लड़कियो के साथ संबंध होने की भी बाते छपती रहती हैं.”
“जी,और वो सच्ची हैं..मैने पहले ही कहा मेरे बेटी-दामाद कभी भी कुच्छ नही छिपाते थे.मुझे शत्रु की ऐसी बाते अच्छी तो नही लगती थी मगर मेरी बेटी को ही जब इस बात से कोई फ़र्क नही पड़ता था तो फिर मेरी नाराज़गी भी मुझे जायज़ नही लगी.”
“अनदर पॉइंट,मिलर्ड.नंदिता जी को शत्रुजीत सिंग के दूसरी औरतो से ताल्लुक़ात से कोई ऐतराज़ नही था.”,वो फिर नंदिता के पिता से मुखातिब हुई,”फिर उन्होने तलाक़ वाली बात आपको क्यू नही बताई?”
“ये तो मैं नही जानता.”
“वैसे आपको क्या लगता है,क्या दोनो को तलाक़ ले लेना चाहिए था.”
“जी,बिल्कुल.ऐसी शादी का कोई मतलब ही नही था.”
“तो आपकी बेटी के ना करने की वजह आपको क्या लगती है?”
“मुझे कोई अंदाज़ा नही.”
“आपको लगता है की आपका दामाद आपकी बेटी का खून कर सकता है?”
“जी नही,शत्रु को अपने पिता से सच्चाई & ईमानदारी विरासत मे मिली है.इसमे किसी और का हाथ है & मेरे दामाद को फँसाया गया है.”
“थॅंक यू,मिस्टर.सिंग.”,वो विकास की ओर मूडी,”युवर विटनेस.”
“नो क्वेस्चन्स.”,नंदिता के पिता के बयान ने पलड़ा शत्रुजीत की तरफ झुका दिया था.
“अब मैं शांति जी से कुच्छ सवालात करना चाहूँगी,मिलर्ड.”
“प्लीज़ प्रोसीड.”
“शांति जी,आप कब से नंदिता जी के साथ थी?”
“जी,जबसे वो शादी करके साहब के घर आई.”
“इतने सालो मे कभी आपके साहब ने आपके साथ कोई बुरा बर्ताव या छेड़खानी की?”
“जी नही.”
“क़त्ल वाली रात को आप क़त्ल की जगह पहुँची तो आपने क्या देखा?”
“पूरे घर मे हड़कंप मचा था.गार्ड्स सारे कॉंपाउंड की लाइट्स जला के चप्पा-2 छान रहे थे.मैं भागती हुई नीचे अपने कमरे से उपर साहब-मेडम के कमरे तक पहुँची तो देखा की मेडम की लाश कुर्सी पे पड़ी है & साहब & पाशा साहब खड़े बाते कर रहे हैं.”
“क्या बाते कर रहे थे दोनो?”
“पाशा साहब कह रहे थे की भाई आपने ज़मीन से गन क्यू उठाई तो साहब ने बोला की मुझे क्या पता था की वो गन है..अंधेरे मे मुझे कुच्छ दिखा ही नही..फिर पाशा साहब बोले की गन को वापस फर्श पे उसी जगह रख दो पर साहब नही माने.”
“शत्रुजीत जी ने आपसे कुच्छ कहा?”
“हां,उन्होने मुझसे पुचछा की मैने मेडम को आख़िरी बार कब देखा था तो मैने बताया की 11 बजे उनका सारा काम करके मैं अपने कमरे मे चली गयी थी..”
“और?”
“..फिर हम सब नौकरो को इकट्ठा करके साहब ने कहा कि हम सब पोलीस को सारी सच बात बताएँगे.ऐसा करने से ही मेडम के खूनी का पता चलेगा.”
“थॅंक यू,शांति जी.”
“मिलर्ड!किस पति-पत्नी के बीच अनबन नही होती”,उसने विकास पे 1 नज़र डाली तो उसने मुँह घुमा लिया,”..हां मेरे क्लाइंट & उनकी बीवी के बीच बहुत ज़्यादा थी मगर मेरे गवाहॉ के बयान ने साबित कर दिया है की मेरे क्लाइंट ने उस अनबन की वजह से अपनी बीवी का क़त्ल नही किया है..पिच्छले 2 दीनो से मेरे मुवक्किल पोलीस की हिरासत मे है.उन्होने अपनी मर्ज़ी से पोलीस को सारी जानकारी दी है.मुझे नही लगता कि उनकी पोलीस रेमांड बढ़ाने की कोई ज़रूरत है.मेरी आपसे गुज़ारिशा है की उनकी ज़मानत की अर्ज़ी मंज़ूर कर ली जाए.”
जड्ज कवास थोड़ी अर तक कुच्छ पेपर्स देखते रहे,”अदालत इस नतीजे पे पहुँची है कि मुलज़िम ने पोलीस & क़ानून की 1 अच्छे शहरी की तरह मदद ही की है लेकिन वो अभी भी शक़ के दायरे से बाहर नही हुआ है.साथ ही अदालत को ये भी लगता है की पोलीस के पास अब उसे हिरासत मे रखने की कोई ठोस वजह नही है लिहाज़ा अदालत उसकी ज़मानत की अर्ज़ी मंज़ूर करती है.मुलज़िम को ज़मानत के तौर पे 25000 रुपये अदालत के पास जमा करने होंगे & वो केस की सुनवाई पूरी होने तक बिना अदालत की इजाज़त के शहर या मुल्क के बाहर नही जा सकता.”
“..ऐसा करने पे उसकी ज़मानत अपनेआप रद्द हो जाएगी & उसे फ़ौरन हिरासत मे लिया जाएगा.केस की अगली सुनवाई 3 हफ़्तो के बाद होगी.”
कामिनी मुकुल के साथ अपने ऑफीस मे बैठी थी.षत्रुजीत सिंग को ज़मानत मिलने से वो उसकी तरफ से तो थोड़ी बेफ़िक्र हो गयी थी मगर करण की चिंता उसे लगातार खाए जा रही थी…आख़िर उसने ऐसी ग़लती कैसे कर दी?!
उसके लॅपटॉप पे पोलीस से ली हुई बॉर्नीयो के सीक्ट्व कमेरे की फुटेज चल रही थी.बार के सामने की दीवार पे लगे कमेरे की ब्लॅक & वाइट तस्वीर मे सॉफ नज़र आ रहा था कि करण 1 आदमी से उलझा हुआ था & जयंत पुराणिक दोनो को अलग करने की कोशिश कर रहे थे.उसी बीच शीना ने उसकी जॅकेट उसे थमाते हुए पीछे खींचना चाहा तो करण का हाथ जेब पे लगा & उसने अपनी पिस्टल निकाल के तान दी & फिर गोली चली जो सीधा पुराणिक के सीने मे लगी & वो वही ढेर हो गये.
कामिनी का दिमाग़ लगातार चल रहा था…गन…जब करण ने कहा की उसे अच्छी तरह से याद था की उसने गन वापस सेफ मे रखी थी तो फिर वो उसकी जॅकेट मे कैसे आ गयी?..कही शीना का तो इसमे कोई हाथ नही?..मगर वो बेचारी तो लगातार करण के साथ बनी हुई है..कल कोर्ट मे भी उसका काला चश्मा बड़ी मुश्किल से उसके आँसुओ को छुपा पा रहा था..लेकिन फिर गन जॅकेट मे आई कैसे?..या फिर करण को ही कुच्छ याद नही..
कामिनी ने सर झटक के नंदिता के केस की तरफ ध्यान लगाया.ये भी कम पेचीदा मामला नही था.1 किले जैसे घर मे दरवाज़ा खोल कर कोई किसी को गोली मार देता है,जिसकी आवाज़ भी किसी को सुनाई नही देती.ये तो ज़रूर किसी अंदर के आदमी का काम है!…मगर कौन?पाशा & जीत तो 1 साथ थे..फिर और कौन?
उसने मुकुल को शत्रुजीत के घर मे मौजूद सभी लोगो की लिस्ट बनाने को कहा,”मुकुल,सबके नाम के साथ ये भी पता करो की वो कब से वाहा काम कर रहे हैं?”
“ओके,मॅ’म.”
कोई 2 घंटे बाद मुकुल लिस्ट लेकर उसके सामने हाज़िर था,”वाह,मुकुल बड़ी जल्दी कर लिया.”
कामिनी गौर से लिस्ट पढ़ रही थी की उसकी नज़र आंतनी डाइयास के नाम पे अटक गयी…सिर्फ़ 2 महीने हुए इसे काम करते हुए…आख़िर ये जीत को मिला कैसे..उसने घड़ी देखी 11 बज रहे थे,इस वक़्त बॉर्नीयो खाली होगा..वाहा तो रात को रौनक होती है..उसने वाहा जाके 1 नज़र वारदात की जगह पे डालने की सोची.
अपनी कार मे बैठते हुए उसने शत्रुजीत को फोन मिलाया,”हाई!जीत.”
“..हां..मैं अभी बॉर्नीयो जा रही हू.शाम को मिलते हैं.”,थोड़ी देर की बात चीत के बाद उसने फोन रख दिया.आज उसका ड्राइवर नही आया था तो वो अकेली ही ड्राइवर कर पब पहुँची.वाहा पहुँच कर उसने 1 बार बार का जायज़ा लिया.इस वक़्त वाहा सॉफ-सफाई का काम चल रहा था.कामिनी ने 1 बार उस सीक्ट्व कमेरे की पोज़िशन देखी & फिर उस जगह खड़ी हो गयी जहा हाथापाई हुई थी,सिर उसने सामने बार के पीछे की दीवार पे देखा.उसे लगा की वाहा पे भी 1 कॅमरा है.
थोड़ी देर बाद कामिनी पब के मॅनेजर के ऑफीस मे बैठी थी,”..क्या बार के पीछे की दीवार पे भी कॅमरा लगा है?”
“जी..ना-..मेरा मतलब है हां,मगर वो तो खराब पड़ा है.”
“तो आपने उसे ठीक क्यू नही करवाया?”
“दूसरे कमेरे से काम चल ही रहा था..आपने भी तो फुटेज देखी होगी..वो कॅमरा पूरा बार कवर कर लेता है.”
“ह्म्म…एनीवे थॅंक्स,अगर ज़रूरत पड़ी तो फिर आऊँगी.”
“यू’आर ऑल्वेज़ वेलकम.”

