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कहने का मतलब जल्द ही मेरा और रिंकी का अब कभी कभार होने वाला मिलन भी पूरी तेरह बंद हो गया था. मैं जैसे खो गया था. जो लड़की मेरी भूल या गलती थी वो अब दूर चली गयी थी, और जो मेरे पास थी वो ही शायद मेरी किस्मत थी…. .. ! 

कुछ दिन बाद…….! 

 रिंकी का कॉलेज शुरू हो गया था. लेकिन न तो रिंकी क्लास में फ़र्स्ट-बेंच पर बैठी दिखायी देती थी और ना ही उसकी पढ़ाई की पर्फ़ॉर्मन्स इतनी अच्छी थी. एक दो बार जब किसी प्रोफ़ेसर ने उसे टोका भी, तो उसने अनसुना कर दिया था. कुछ दिन बाद उसने कॉलेज से बंक मारना भी शुरू कर दिया और अपने कमरे में ही ज़्यादातर वक़्त बिताने लगी. 

लाख कोशिशों के बाद भी रिंकी के मन मे अपने पापा के प्रति प्रेम दिनोदिन बढ़ता ही जा रहा था। उसकी वासना ने उसके दिमाग को पूरी तरह से वश में कर लिया था।

परन्तु उसके मन मे डर था कि

“” कहीं इतने हफ़्तों में पापा सब कुछ भूल तो नही गए? कहीं वो बिल्कुल बदल तो नही गए? क्योंकि अगर वो बदल चुके हैं, और मुझे अब एक बेटी के रूप में देखते है तो मैं किस तरह उनको अपने करीब कर पाऊंगी। कहीं उन्होंने मुझे ठुकरा दिया तो, नहीं नहीं मैं बर्दास्त नही कर पाऊंगी…..मैं किसी भी हाल में अपने पापा को दोबारा पाकर रहूंगी” रिंकी यही सब सोचती रहती।

दिनों दिन रिंकी की वासना बढ़ती जा रही थी। लेकिन उसे मौका ही नही मिल पा रहा था। और ना ही इस दौरान उसकी मुझ से खुल कर बात हो पाई। उसने एक दो बार कोशिश भी की मोबाइल से बात करने की पर मोबाइल में नम्बर डायल करने के बाद भी कभी वो कॉल न कर पाती और तुरन्त काट देती।

कुछ दिनों बाद रिंकी की सबसे खास सहेली श्रुति एक दोपहर उससे मिलने घर पर आई दोनों सहेलिया कमरे में बाते कर रही थी, श्रुति आज ख़ुशियों मैं थी, उसके पापा ने उसको स्कूटी ख़रीद कर दिया था, शायद कॉलेज कि वो अकेली लड़की थी, जिसके पास स्कूटी हो गयी थी, वो बड़े गर्व से अपने पापा की बारे में बता रही थी, की उसके पापा उसको बहुत प्यार करते हैं । वो इसी खुशी में रिंकी  को एक ट्रीट पर साथ लेकर जाने वाली थी। 

ओहो रिंकी कितना लेट हो गया है, रेस्ट्रारेंट में नीलू, शीतल इंतजार कर रहे होंगे…. अब बाते ही करती रहेगी या फिर ड्रेस चेंज कर चलेगी भी..  श्रुति ने रिंकी से कहा। 

रिंकी ने मुस्करा कर कहा- हाँ हाँ क्यों नहीं।

चूंकि उस वक्त कमरे में सिर्फ दोनों लड़किया ही थी, इसलिए रिंकी ने बिना झिझक अपनी टॉप उतार दी, फिर उसने शिमीज भी उतार दी, श्रुति की तो आह निकल गयी और श्रुति एक लड़की हो कर भी रिंकी की सुंदरता पर मुग्ध हो गई । उसकी नजरे रिंकी के बदन से चिपक कर रह गई और आँखें फाड़कर वो एक भरपूर जवान लड़की का नंगा बदन देखने लगी। रिंकी की ब्रा में क़ैद बड़ी बड़ी चूचियाँ बहुत ही मादक लग रही थीं। फिर उसने अपनी ब्रा भी खोल दी, उसकी दूध से भरी छातियाँ बहुत सुंदर लग रही थीं और उसके बड़े बड़े निपल्ज़ भी सेक्सी दिख रहे थे, फिर उसने अपनी कपबोर्ड में से पुशअप ब्रा निकाल कर अपनी चूचियों पर ब्रा का कप रखा और पीछे जाकर उसकी पट्टी लगायी , और अपनी चूचियाँ हिलाकर ऊपर नीचे करके उसको चेक करने लगी।

श्रुति का मुँह खुला रह गया रिंकी की मदमस्त चूचियाँ देखकर, वो हँसकर बोली- रिंकी डार्लिंग तेरे तो मुझसे भी बड़े बड़े हो गये, कौन है वो जादूगर???किसके हाथों के जादू का कमाल है…. श्रुति अचानक से उठ कर रिंकी के बूब्स को दबाते हुए बोली … । 

”प प प …………. पापा……………….. ”

भावनाओ में बहकर रिंकी के मुँह से पापा निकल तो गया…पर अगले ही पल वो यथार्थ के धरातल पर आ गयी…और उसने डरते-डरते श्रुति की तरफ देखा..

पर शायद उसे ठीक से समझ नही आया था….! वो मुस्कुराती हुई बोली…

” अच्छा ….तो अपने पापा के उपर नज़र है तेरी…. तू तो बड़ी चालू निकली रिंकी….”

उसकी ये बात सुनकर रिंकी का शरीर सुन्न होता चला गया। 

पर श्रुति के होंठों पर अलग ही तरह की मुस्कान आ चुकी थी अब.

जिसे देखकर रिंकी समझ नही पा रही थी की उसके दिमाग़ में आख़िर चल क्या रहा है..

पर उसके बाद जो हुआ, उसे देखकर तो रिंकी के भी होश उड़ गये..उसने तो सोचा भी नही था की इस चुहिया के दिमाग़ में इतना गंद भरा पड़ा है

रिंकी से कुछ बोलते नही बन रहा था…रंगे हाथो पकड़ी गयी थी वो .

अपनी खास सहेली के सामने ही उसके और पापा के बीच का परदा उठ गया था… अब उसे उस हद तक तो नही मालूम था पर जिस अंदाज में वो पकड़ी गयी थी.. यानी  जिस अंदाज में उसने अपने पापा को पुकारा था, उसे देखकर तो कोई बेवकूफ़ भी बता देगा की रिंकी के मन में उसके पापा के लिए क्या चल रहा है.

रिंकी ने अपना चेहरा शर्म से नीचे कर लिया.

“ओहो  रिंकी…  प्लीज़ ऐसे एम्बेरेस मत हो… इनफेक्ट मुझे तो इस बात की खुशी है की तू अंकल को उस नज़र से देखती हो,जिस नज़र से उन्हे मैं देखकर अपने अरमानो को दबाया करती हू ..”

श्रुति के मुँह से सीधी बात सुनकर रिंकी भी चोंक गयी…पर उसने कुछ ज़्यादा रिएक्ट नही किया..आख़िर श्रुति की भी क्या ग़लती है इसमे…एक तो उसके पापा इतने चार्मिंग है,वो खुद उनसे चुदाई करती है , ऐसे में श्रुति को किसी भी बात का दोष देना सही नही था.

श्रुति ने भी अब रिंकी को कुछ महीने पहले माल की पार्किंग के बारे में उसे बता देना उचित समझा, और फिर उसने कहा

सुन रिंकी, वो मैं तुझे तेरे पापा के बारे में कुछ बताना चाहती हूं। कुछ महीने पहले माल की पार्किंग में तेरे पापा ने मुझे बॉय फ्रेंड का लंड चूसते हुए देख लिया था,

रिंकी के चेहरे की हवाइयां उड़ चुकी थी, रिंकी तो श्रुति की बात सुनकर दंग रह गयी, उसे तो अब सूझ ही नही रहा था कि वो क्या बोले। रिंकी के ऊपर तो जैसे एक के बाद एक बम फूट रहे थे, वो पूछना चाहती थी कि ये सब हुआ कैसे ??? पर उसके पूछने से पहले ही श्रुति ने उस पर एक और बम फोड़ दिया

अच्छा रिंकी, प्लीज़ अब मुझसे शर्माओ मत, हम दोनों पक्की और खास सहेलिया है तो हमे एक दूसरे से कुछ नही छुपाना चाहिए, अच्छा अब प्लीज़ बताओ ना अंकल और तेरे बीच ये सब कैसे शुरू हुआ ??? 

रिंकी भी अब थोड़ी नार्मल हो चुकी थी, फिर उसने श्रुति को अपने और अपने पापा के बीच हुए पूरे वाकये को शुरू से लेकर अंत तक मिर्च मसाला लगाकर सुना दिया, कैसे पहली बार दिमापुर में ये सब शुरू हुआ था, कैसे उसने नई नई चालें चल कर अपने पापा को फँसाने की कोशिस की थी। कैसे फिर वो उनसे नाराज़ हुई, कैसे धीरे धीरे वो उन्हें चाहने लगी, और कैसे उस रात वो सब कुछ हुआ। 

श्रुति तो बड़ी तल्लीनता से रिंकी की कहानी सुन रही थी, 

 “देखो  रिंकी …

मेरा भी बॉय फ्रेंड है, हमने एक दूसरे के साथ सेक्स किया है.. लेकिन हम सेक्स सिर्फ़ मौका मिलने पर चोरी छिपे कभी कभार ही कर सकते है… हर रोज सेक्स के असली मज़े के लिए तो हमे किसी घर के  मर्द की ही ज़रूरत पड़ेगी ना..और तेरे पापा के होते हुए तेरे लिए तो ये गॉड गिफ्ट (सोने पे सुहागा) हो गया है! तुम जो भी कर रही हो, सही कर रही हो, किसी प्रकार की गिल्ट और एंब्रेस् होने की जरूरत नहीं है…ठीक है ना…”

श्रुति अपने हिसाब से तर्क दे रही थी…जो अभी के लिए रिंकी को भी सही लग रहा था..! 

श्रुति शायद तुम सही बोलती हो…. और रिंकी ने उसके गाल में चिकोटि काट दी। फिर वो कप बोर्ड खोल कर एक ड्रेस श्रुति को दिखाते हुए ये ड्रेस ली थी मैंने…मतलब और भी हैं, पहन के दिखाती हूँ अभी… पहले ये बताओ कैसी है?’ रिंकी ने चहक कर पूछा.

मस्त है, अब जल्दी से पहनो हमें चलना चाहिए…. श्रुति ने जबाब दिया।

रिंकी ने एक काली पार्टी-ड्रेस पहन ली श्रुति उसे देख सीटी बजाते हुए बोली ओह बेबी यू आर सो सेक्सी…..! दोनों सहेलिया मस्ती के मूड में आ चुकी थी, और फिर वो दोनों ट्रीट एंजॉय करने बाहर चले गए।

“दोनों सहेलिया एक दूसरे के सीक्रेट शेयर कर बड़ी खुश थी, पर अभी दोनों ही भविष्य में आने वाले भयानक परिणाम से बेखबर थी”

ऐसे ही कुछ दिन निकल गये, अब रिंकी को कॉलेज लाइफ रास आने लगी थी। उसके नये दोस्त भी बन गए थे। दूसरी तरफ हर रात कुसुम से समागम के बाद मै अपने बिस्तर पर करवट बदलते हुए सोचता कि रिंकी की खुशी के लिए लिये ऐसा क्या करू जिससे उसे अपने पापा पर गर्व हो।

फिर करीब एक महीना बाद एक इतवार की दोपहर कुसुम फोन पर किसी से बातें कर रही थी, बातें करते हुए कुसुम का फोन कट गया। कुसुम को याद आया उसके फोन का बैलेंस खत्म हो गया था और उसे किसी को अर्जेंट काल करनी थी. मेरे अलावा घर पर कोई था नहीं, तो उस ने मेरा फोन मांगा और मुझ से कहा कि काल करने के बाद फोन मुझे लौटा देगी.

कुसुम को पता नहीं क्या सूझा कि फोन कर के जब वह फ्री हुई तो फोन की फोटो गैलरी खोल कर देखने लगी. उस में रिंकी की विविध मुद्राओं में खींची गई अनेक तसवीरें कैद थीं.

उन्हीं तसवीरों में कुछ ऐसी भी तसवीरें सामने आईं जिसे देख कर वह चौंक गई.

बाप और बेटी के फोटो ऐसी पोजीशन में खींचे गए थे जिसमे दोनों बाप बेटी लिपटे हुए थे. जब उस ने उस फोन के वीडियो देखे तो उस के पैरों तले से जमीन ही खिसक गई. वीडियो में रिंकी अपने पापा के साथ प्यार करती हुई दिख रही थी.

कुसुम ने कभी ध्यान नहीं दिया था कि उसकी कोख से जन्मी उसकी बेटी उसके ही संसार को उजाड़ रही है । वह तो नौकरी में और अपने सास-ससुर में व्यस्त रहती । एक बार कुसुम को शक भी हुआ था लेकिन यह सोच कर अपने आप को सांत्वना देने लगी थी, कि रिंकी मेरी बेटी तो अभी छोटी है और एक अच्छी मां की तरह उसने रिंकी की परवरिश की थी। यह हो ही नहीं सकता कि कोई बच्चा अपनी मां को धोखा दे । पर कुसुम गलत थी उसे पता ही नहीं था कि उसकी बेटी उसकी सौतन बनने का ख्वाब सजाये थी. यह सब देख कुसुम आगबबूला हो गई…..! 

जारी है…… ✍🏻

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