” कलेश का गृह प्रवेश “”
अब हम बाप बेटी का प्यारा सा नाजायज रिश्ता बुरी तरह प्रभावित होकर अपनी आखिरी साँसे भर रहा था।
एक हफ्ते बाद……!
बस से बाहर आते ही नागालेण्ड की ठंडी हवा ने जैसे ही कुसुम के शरीर का स्पर्श किया, एक सिहरन सी उस के बदन में दौड़ गई. उसका यहाँ पहली बार आना नही हो रहा था। लेकिन आज वह एक अजीब एहसास से भरी हुई थी. और बस स्टैंड से बाहर ऑटो रिक्शा का इंतजार कर रही थी.
“कहां हो कुसुम ??? तेरा मोबाइल औफ आ रहा था, ” मैने चिंतित स्वर में उससे फोन पर पूछा.
“ फोन की बैटरी कम थी,तो ऑफ कर दिया था,” धीमे स्वर में कुसुम बोली.
“मै तुझे लेने बस स्टैंड पर आ रहा हूँ.”
“प्लीज, परेशान होने की जरूरत नहीं है. मैं खुद ही आ आऊंगी,” यह कह कुसुम ने फोन कट कर दिया.
लगभग दस मिनिट में कुसुम घर पहुंच गयी. घर पहुँचते ही उसने सास ससुर के पाँव छुये, सास से इधर उधर की बाते करते हुए वही सोफे पर बैठ गयी। मै आज कुसुम के स्वागत के लिए सैंडविच, जूस, पहले ही ले आया था।
जूस पीते पीते कुसुम ने एक नजर रिंकी पर डाली. वह चुपचाप सैंडविच खा रही थी और जूस पी रही थी. कुसुम का मन ममत्व के साथ एक दया से भी भर आया. वो उठ कर रिंकी के पास बैठ गयी उसके सिर पर हाथ रख कर उस के बालों को सहलाने लगी.
रिंकी कठोर बनी रही, जूस के ग्लास को दांतों में भींच कर, सुटुक् सुटुक् करते हुए जूस पीती रही।
रिंकी बेटा कैसी हो…?? अपनी बेटी के मुह से प्यारे शब्दो को सुनने को बेताब, उसे अपनी बांहों में कसमताते हुए कुसुम उससे पूछ रही थी.
मै अच्छी हू….! इतना कह रिंकी अपने कमरे में चली गई।
“क्या दोष था कुसुम का? मै कितने भी अपने दिल और दिमाग के दरवाजे बंद करू, वे बातें पीछा छोड़ती ही नहीं हैं. दबेपांव चली आती हैं जख्मों को कुरेदने के लिए.”
सफर की थकान दूर करने वो नहाने चली गयी। नहाने के बाद कुसुम थोड़ी ताजगी महसूस कर रही थी. फिर लैपटॉप खोल कर ईमेल चैक करने लगी. बहुत सारी बातें थी, जिन के विषय में नए सिरे से सोचना था. जिंदगी एक नए सिरे से शुरू करनी थी. पता नहीं क्यों बहुत सारी चुनौतियों के बाद भी कुसुम कहीं न कहीं एक हलकापन महसूस कर रही थी.
लैपटौप पर चलती उंगलियों को रोक कर उसने मुझे देखा,
“कितना याद आया आपका ..”
“क्या याद आया काल का तो जवाब ही नही दे रही थी ,”
“ ऑफ ओ बताया तो था फोन की बैटरी कम थी”
मैं मुस्कुरा उठा,
वो बेहद ही प्यार से मुझे देखने लगी और मेरे गाल को चूम लिया..
“मुझे आपसे यही उम्मीद थी …“आई लव यू जान ..”
वो फिर से मेरे गले से लग गई ,मैं भी उसके कोमल बालो को सहलाने लगा…
“तो शर्मा के साथ कुछ किया की नही ..”
वो हल्के गुस्से से मुझे देखने लगी..फिर शरारती मुस्कान लाकर बोली
“किया ना बहुत कुछ ..”
“अच्छा क्या ..”
“वो नही बताऊंगी मेरी जानकारी के बगैर कैमरे लगा कर जासूसी करने का चस्का था तो अब खुद पता कर लो ..”
“अच्छा ..’
“हा”…..! वो खिलखिलाने लगी मैंने उसे अपनी बांहो में भर लिया और उसे सीधे बिस्तर में ले जाकर पटक दिया ,
वो मुझे बड़े ही बेकरारी से देख रही थी …
मैं हँस पड़ा .. एक हफ्ते से तड़फ रहा हु मेरी जान ..”
उसने कुछ नही कहा बस मुस्कुराते हुए मेरे बालो को सहलाने लगी फिर मेरे कानो में हल्के से फूक मारने लगी..मुझे एक गुदगुदी का अहसास हुआ,मैंने उसे अपने ऊपर ले लिया,और उसके बालो को अपनी उंगली में फंसा कर उसके होठो को चूमने लगा,दोनो के होठ एक दूजे में मिल चुके थे और सांसे तेज हो चुकी थी ,धड़कने बढ़ रही थी…
मैंने उसके आंखों को हल्का गीला देखा ..
“क्या हुआ जान ..”
“ शर्मा ने रिटेरेमेंट वाले दिन तक मुझसे कोई बात तक नही की ..”
“तुमने इतना लंबा चौड़ा भाषण जो उसको पेल दिया था..” मै हँस पड़ा।
वो मेरे चहरे को देखने लगी ..
“मैंने बस उसे मना किया था ,वो बेकाबू हो रहा था ..”
मेरे होठो पर एक मुस्कान आ गई
“नही करना था ना, उस बेचारे की भी कई तमन्नाएं रही होंगी की प्रेमिका का पति बाहर गया है तो कुछ फायदा मिल जाए लेकिन तुमने तो ..बेचारे की हर तमन्ना को ही फेल कर दिया अब वो गुस्सा तो होगा ही ना “
कुसुम गुस्से से मुझे मारने लगी ..
“आपको हर वक्त मजाक ही सुझा रहता है ,भूल गए क्या ?? उस दिन क्या हालत हो गई थी आपकी ..” वो खिलखिलाने लगी
‘वो तो ..”
“क्या वो तो..?? अब अगर फिर से कहे ना तो सच में शर्मा के साथ …” वो रहस्यमयी मुस्कान से मुकुस्कुराने लगी …
“क्या करेगी ..”
उसकी मुस्कान और भी खिल गई ..
“जलने का बहुत ही शौक है ना आपको ..”
“हा वो तो है ..”
मैं भी मुस्कुराने लगा ..और उसके सीने में पके एक ताजा गोल आम को दबाने लगा,मेरा लिंग जीन्स में ही अकड़ रहा था मैंने जीन्स निकाल देने में हि अपनी भलाई समझी ..उसने भी अपनी नाइटी के अंदर हाथ डाला और अपनी ब्रा और पेंटी निकाल फेंकी.. अब मेरे जिस्म में बस एक अंडरवियर थी वही कुसुम के जिस्म में वो नाइटी जो एक पतले कपड़े का गाउन था जो उसके एड़ी से थोड़ा ऊपर तक था..
मेरे हाथ उसके जिस्म में फिसलते हुए उसके चहरे तक गए,मैंने उसके स्ट्राबेरी की तरह लाल होठो में अपने जलते हुए होठो को रख दिया,दोनो ही एक दूसरे के होठो से रस पीने लगे , मेरा लिंग तनकर मेरी अंडरवियर से बाहर आ रहा था,जिसे मैं गाउन के ऊपर से ही कुसुम के योनि में रगड़ रहा था ..वो भी गर्म हो रही थी ,उसकी भी सांसे तेज हो रही थी ..
“बोलो ना जान क्या करोगी शर्मा के साथ ..”
उसकी एक बेहद ही शरारती मुस्कान उसके चहरे में आ गई ..
“आप नही सुधरोगे ना .”
“नही तुम ही बिगड़ जाओ ..”
मैं बेचैन सा बोला ..
वो भी उत्तेजित होकर मेरे बालो को पकड़ कर मेरे होठो को चूसने लगी …
“आप सब जब अब बाहर कही जाओगे तो मैं फिर से शर्मा को यहाँ बुलाऊंगी ..”
उसने अपनी कमर मेरे लिंग के ऊपर जोरो से रगड़ दी ..
“आह फिर ..”मुझे उसके योनि से रसते हुए रस का आभस होने लगा था..
“फिर उसे सोफे में बैठने को कहूंगी ,वो भी मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपनी गोद में बिठा लेगा ..”
उसने फिर से जोरो से अपनी योनि को मेरे लिंग में रगड़ा जो की अंडरवियर में होने के कारण अकड़ कर लेटा हुआ था और उसके इलास्टिक से बाहर झांक रहा था कुसुम उसके मोटे तने में अपनी योनि को रगड़ रही थी ,
“वो मेरे चहरे को पकड़ कर अपने होठो को मेरे होठो से मिलने की कोशिस करेगा,मैं पहले तो उसे हटा दूंगी लेकिन मुझे याद आएगा की अपने क्या कहा था और आपको तो जलने में मजा आता है ,मैं आपको फोन लगाउंगी ताकि आप मेरी आवाज सुन सको लेकिन ये बात शर्मा को पता नही होगी …”
मैं बुरी तरह से उत्तेजित हो गया था,मेरी बीवी मुझसे ही मुझे चीटिंग करने की बात कर रही थी..मैंने उसे अपने नीचे कर दिया और उसके ऊपर छा गया ..उसके गले को चूमने लगा,अब मैंने अपने अंडरवियर को निकाल दिया मेरा लिंग अब कुसुम के गाउन के ऊपर से ही उसके नंगे योनि पर रगड़ खा रहा था … “आह जान …”वो सिसकी । वो भी बेहद ही उत्तेजित हो गई थी ..
‘आप फोन में होंगे और मैं उसके होठो को अपने होठो में ले लुंगी ,मेरी सिसकियां आपको सुनाई देगी और मैं उसे खिंचते हुए अपने बेडरूम में ले जाऊंगी ,वँहा मैं अपने मोबाइल फोन का speaker को भी आन कर दूंगी ताकि आप और भी क्लियर मेरी आवाज सुन सको ..वो मुझे बिस्तर में पटक देगा और मेरे ऊपर चढ़ जाएगा ,मैं सिसकियां लुंगी जब वो आपकी तरह मेरे ऊपर छा जाएगा ,और फिर इसी गाउन को उतारेगा …”
वो तड़फ रही थी उसके मुह से शब्द निकलना भी मुश्किल हो रहा था..
मैंने तुरंत ही उसके गाउन को निकाल फेका .. मेरा लिंग आसानी से उसके योनि में चला गया ..उसने मेरे बालो को जकड़ लिया।
“आह शर्मा मेरी जान “
शर्मा का नाम सुनकर मेरा लिंग और भी कड़ा हो गया था ,मैंने तेजी से एक धक्का उसके योनि में दिया ..
“ शर्मा तुम्हारा कितना बड़ा है मेरी जान , मेरे पति से ज्यादा बड़ा है और गहरा उतारो ना इसे “
उसकी बात सुनकर मैं एक बार कांप गया , कुसुम की आंखे पूरी तरह बंद थी क्या वो अभी शर्मा को ही अपने साथ महसूस करने की कोशिस कर रही थी …??? मैंने फिर से एक जोर का धक्का दिया और उसके होठो से अपने होठो को मिला दिया,
हम दोनो ही इस खेल में पूरी तरह से रम चुके थे,पहले तो कुसुम भी शर्मा शर्मा ही कह रही थी लेकिन जब खेल अपने तेजी में पहुचता गया वो जान जान कहने लगी ,अब वो जान मेरे लिए था या शर्मा के लिए ये कहना बेहद ही मुश्किल काम था ………
सुबह आंखे खुली तो रात की बाते याद आयी,मेरे अधरों में एक मुस्कान आ गई ,तभी कुसुम बाथरूम से बाहर आयी,और मुझे देखकर मुस्कुराने लगी ,
“कल आपको बहुत मजा आ रहा था,..”
“हा आ तो रहा था,सोच रहा हु तुम्हे आगे बढ़ने ही दु ..”
सुनते ही वो शर्मा गई और इठलाते हुए मेरे ऊपर आकर लेट गई,उसने अभी एक तोलिया ही लपेटा हुआ था,अभी अभी नहाकर निकल रही थी बालो में हल्की सी नमी भी बरकरार थी ,साबुन की खुशबू मेरे नथुने में समा रही थी…
“आप ऐसा मत बोला करो ,उत्तेजित करके ही छोड़ देते हो ,मुझे भी पता है की ये नही हो सकता ….”
मेरी आंखे चौड़ी हो गई ..
“यानी तुम उत्तेजित होती हो ..”
वो हल्के से मुस्कुराई
“इतना बोलेंगे बार बार तो उत्तेजित तो हो ही जाएगा कोई भी ,और इमेजिनेशन भी करने लगेगा,मानसिक रूप से आपने मुझे उसके साथ सुला ही दिया है ..तो…..”
वो थोड़ी गंभीर भी थी तो थोड़ी उत्तेजित भी ,और साथ थी शरमाई भी ,और साथ ही घबराई भी और साथ ही थोड़ी दुखी भी और साथ ही थोड़े गुस्से में और साथ ही थोड़े जज़बातों में …उसकी आंखों से एक साथ कई भाव टपक जा रहे थे,जिसे मैं निचोड़ने की कोशिस कर रहा था,
“तो तुम उसके साथ सोना चाहती हो
…”उसने ना में सर हिलाया..
“मैं कुछ नही चाहती,मैं बस जानती हु…ये की मैं आपसे बेहद ही प्यार करती हु और मैं ये भी जानती हु की आप मुझसे बेहद प्यार करते है और किसी दूसरे के साथ सोचने तक तो ठीक है लेकिन सच में किसी के साथ सोने पर आप उसे और मुझे दोनो को मार डालेंगे..”
मेरे होठो की मुस्कान खिल गई ..
“तुम्हे नही जान बस उसे …”मैने बेहद ही आराम से कहा इतने आरम से की कोई सुने तो ख़ौफ़ खा जाए लेकिन वो कुसुम थी ,मेरी कुसुम जो मेरे फितरत से वाकिफ थी ,मेरी एक एक नश से वाकिफ थी…
वो भी मुस्कराई …
“इसीलिए तो कहती हु की आप अब ऐसी बाते मत किया करो ,मैं भी इंसान ही तो हु,दिल में अरमान तो मेरे भी जाग जाते है जबकि आप उसे बार बार घी डालकर और भड़कते हो,लकड़ी भी आपकी,घी भी आप ही डाल रहे हो ,हवा भी आप ही दे रहे हो और फिर आग भी जलाने पर तुले हो फिर अगर ये आग भड़क कर कुछ जला दे तो फिर कहोगे की गलती किसी दूसरे की है …”
कुसुम ने बेहद ही मतलब की बात कर दी थी,सच में ये एक ही समस्या थी की मैं अपनी गलती को स्वीकार ही नही कर रहा था इसलिये शायद मुझे इतना गुस्सा था की मैं सामने वाले को मार दूंगा…या कुसुम को ही मार दु…
मैं थोड़ी देर तक चुप ही रहा…वो मेरे बालो से खेल रही थी जितना द्वंद मेरे अंदर था वो उतनी ही शांत थी ..
“ठीक है तो मैं खुद की गलती मानता हु ,और आज से तुम्हे पूरी छूट देता हु ,मैं किसी को नही मारूंगा ,जो आग तुम्हारे अंदर लगी है उसे जिससे चाहे बुझाओ ..वो तुम्हारी गलती नही होगी ..”
वो मेरे आंखों में देखने लगी ..
“आप तो सच में सीरियस हो गए ..”
“हा कुसुम मैं सीरियस ही हु,तुमने सही कहा ,पत्थर को भी बार बार घिसने से निशान बन जाता है वो तो तुम्हारा दिल ही है ,तुम्हारा मन है ,उसमे अगर बार बार ये बाद डाली जाए की तुम किसी गैर मर्द के साथ भी मजे ले रही हो और इस बात से मैं भी खुस हु तो ये सच है की कभी ना कभी तुम्हारे दिल में भी ये ख्याल आएगा ,और ख्याल ही क्यो ये चाहत भी होगी…और उस चाहत को पूरा करने का तुम्हे अधिकार होना चाहिए,मेरी तरफ से तुम फ्री हो …”
उसने मेरा सपाट चहरा देखा..और मेरे होठो में अपने होठो को घुसा दिया ..
“मैं अपनी चाहत पूरी करने के चक्कर में आपका प्यार नही खोना चाहती जान ..”वो और भी जोरो से मेरे होठो को चूस रही थी …
“फिक्र मत करो जान मेरा प्यार बस तुम्हारे लिए ही है और हमेशा ही रहेगा..”मेरे आंखों में एक मोती चमका जिसे देखकर कुसुम थोड़ी डर गई लेकिन मेरे दिल में क्या हो रहा था ये मैं ही जानता था,और मैं कम से कम इस समय तो कुसुम को नही बताना चाहता था,क्योकि हर चीज का एक समय होता है …।
“आप ऐसे ही रहोगे तो आपको क्या लगता है की मैं कुछ करूंगी ..”
मैंने अपने होठो में एक मुस्कान ला ली ..
“सच बताऊँ मुझे भी बहुत मजा आएगा , तुम करो तो सही “मैंने शरारत से कहा और उसने झूठे गुस्से से मुझे मारा लेकिन फिर हम दोनो ही हँस पड़े,हमारे बीच बात साफ हो चुकी थी ,अब देखना था की कुसुम कितना बढ़ती है…?? ?
कुसुम को आज डी एम ऑफिस में जॉइन करना था तो उसे मैंने ऑफिस टमिंग् से थोड़ा जल्दी जाने को कहा ।
वो बहुत एक्साइटेड थी , उसने एक नीले रंग की साड़ी पहनी ,उसकी जवानी उसके ब्लाउज से बाहर आने को बेकरार लग रही थी और नीला रंग उसके गोरी त्वचा पर बेहद फब रहा था,माथे में लगा गहरा सिंदूर उसके सुहाग की निशानी थी और हाथो की घनी चूड़ियां उसे और भी प्यारा बना रहे थे,,उसने अपने घने वालो को खुला ही रखा और जो उसके कमर को छू रहे थे,जो की उसके गदराये और साड़ी से झांकते पेट को और भी मादक बना रहे थे,..
कुल मिलाकर वो किसी भी मर्द को आकर्षित कर देने को तैयार थी,हल्की गंध वाली परफ्यूम से महकती हुई वो मेरे पास आयी …
“किस पर जादू चलाने वाली हो “तुम्हारे आशिकों की कोई कमी तो है नही ..” उसने मुझे गुस्से से देखा और हम दोनो ही खिलखिला उठे ………
उसकी आंखे चंचलता में मचली ..
“सभी पर “वो खिलखिलाई और मैंने उसे जोरो से जकड़ लिया उसके होठो को चूसने लगा,थोड़ी देर के बाद ही उसने मुझे झूठे गुस्से से देखा
“पूरी लिपिस्टिक ही खराब कर दी “
वो फिर से टचअप करने लगी,मैं भी अपनी तैयारी करने लगा, उसने अपनी फाइल उठा ली और एक बार फिर से उसे सरसरी निगाहों से पढ़ा..और फिर अपने बेग में डालकर चलने लगी..“बस थोड़ी देर बाद मै उसे उसके ऑफिस में छोड़ कर अपनी ड्यूटी पर निकल गया।
इधर रिंकी का कॉलेज शुरू होने में कुछ ही दिन बचे थे, वह एडमिशन की फ़ीस वगरह जमा करवाने के बाद ज़्यादातर वक़्त अपने कमरे में ही बिताने लगी थी। कुसुम के डर से अब मै और रिंकी वो सब कुछ एक दूसरे को कह नही सकते थे जो हम कहना चाहते थे, हम वो सब एक दूसरे के साथ कर नही सकते थे जो हम करना चाहते थे.
हमारी कामक्रीड़ा एक दूसरे के अंगो को चूमने, चूसने, सहलाने जैसी गतिविधियाँ दिन ब दिन कम होती जा रही थी जिसकी वजह से प्यार भी कम होता जा रहा था. हमारे अंदर एक दूसरे के लिए प्यार पहले जैसा ही मौजूद था मगर यह कम होता इसलिए महसूस हो रहा था क्योंकि हम एक दूसरे को पहले जैसे प्यार नही कर पा रहे थे.
मैं उसकी आँखो में उसके स्वाभाव मे उस निराशा को बल्कि उस गुस्से को भी देख सकता था अब, क्योंकि इसमे मेरा कोई दोष नही था, इसलिए मुझे उसका इस तरह निराश होना या गुस्सा करना जायज़ नही लगा. हम पहले जितना या पहले जैसा समय एक साथ नही बिता सकते थे इसलिए नही कि चाहत में कोई कमी आ गयी थी बल्कि असलियत में अब भी मैं उसे पहले जैसा ही चाहता था. समस्या सिर्फ़ यही थी कि कुसुम के आ जाने से मेरे पास उसके हिस्से का समय ही नही बचता था कि मैं उसे दिखा सकता, मैं उसे कितना प्यार करता हूँ.
मुझे यह बात भी अच्छी नही लगती कि उसकी मम्मी कुसुम पूरा दिन डी एम ऑफिस में पूरी ईमानदारी और मेहनत से
काम करती है ताकि परिवार का भविष्य उज्ज्वल बन सके और रिंकी हमारे मिलन के समय की कमी को हमारे बीच एक दरार का रूप दे रही थी. और यह दरार आने वाले हर दिन के साथ गहरी होती जा रही थी।
कुछ और हफ्ते बीतने के बाद मुझे अहसास हुआ कि कुसुम के साथ बढ़ती दूरी के कारण जो स्थान मेरे दिल मे खाली हो गया था उसे मैने कुसुम से नज़दीकियाँ बढ़ा कर पूरा भर लिया था. अगर एक लड़की मेरी ज़िंदगी से दूर होती जा रही थी तो दूसरी उतनी ही पास आती जा रही थी. मैं रिंकी के साथ बहुत कम समय बिता रहा था मगर मैं तन्हा नही था. मेरी कुसुम हर रात मेरे साथ थी.
कहने का मतलब जल्द ही मेरा और रिंकी का अब कभी कभार होने वाला मिलन भी पूरी तेरह बंद हो गया था. मैं जैसे खो गया था. जो लड़की मेरी भूल या गलती थी वो अब दूर चली गयी थी, और जो मेरे पास थी वो ही शायद मेरी किस्मत थी…. .. !
जारी है….. ![]()
