कुसुम के चहरे में एक व्यंगात्मक मुस्कान थी और व्यंगात्मक मुस्कान देती हुयी वो प्रीति के साथ होटल की लॉबी में चली गयी।
अब उसे क्या हुआ?” थोड़ी दूरी पर खड़ी रिंकी का उदास और चिंतित चेहरा देखकर मैने सोचा. “सच तो ये था कि रिंकी ने अपने पापा को प्रीति मौसी के साथ आपसी व्यवहार को देखकर उसे महसूस हुआ कि प्रीति मौसी उसके पापा के बहुत ही ‘क़रीब’ है.”
“शादी की दावत पूरे शबाब पर चल रही थी, पर हमेशा चहकने वाली रिंकी का मन पार्टी में नहीं लग रहा था. उसे अपने पापा पर बहुत ग़ुस्सा आ रहा था और मम्मी पर दया आ रही थी. कहीं पापा ने आज रात प्रीति मौसी के साथ ……..?”
“”उसने मन ही मन ठान लिया कि अब वो पापा से खुद के बारे में खुल के बात करेगी. लेकिन साथ ही उसे इस बात का भी डर लग रहा था कि मम्मी को पता चलेगा तो? मम्मी की हालत कैसी हो जाएगी? मम्मी-पापा में दूरियां बढ़ जाएंगी. वे लोगों के सामने बेचारे बन जाएंगे. सोचते-सोचते उसे चक्कर-सा आने लगा…..।
शाम हो चुकी थी, बारात आने का समय हो गया और सभी मेहमान लोग अपने अपने कमरे में तैयार होने के लिए चले गए……!
“पापा के पास कोई और शर्ट पैंट नहीं है क्या ? सुबह से देख रही हूं यही एक जोड़ी कपड़े लटकाए दिन भर से फंक्शन में घूम रहे हैं ।” मुझे चेक की शर्ट पहनते हुए देख रिंकी अपनी जुल्फो को सवारते हुए कुसुम को शिकायत सुनाने लगी ।
“क्या हुआ किसी ने पापा पर कमेंट कर दिया क्या ?” अपनी साड़ी का पल्लू में पिन लगाते हुए कुसुम ने कहा ।
“और नहीं तो क्या । पापा का नाम ही चेक शर्ट वाले अंकल रख दिया है सबने । और ना जाने क्या क्या रहे हैं ।” वो एकदम से रुनवासि हो गयी । मानों अभी रो देगी ।
“किसी के बोलने से क्या होता है । बच्चे तो ऐसे ही कहते हैं । तू खुद अपनी सहेलियों के पापा को किस नाम से बुलाती है याद है तुझे ।” वो समझ गयी कि मम्मी को खुद के सजने सवरने में ज्यादा इंट्रेस्ट है और पापा की कोई खास अहमियत नहीं, इसीलिए चुपचाप अपने होंठों पर लिपिस्टक लगा कर फाइनल टच देने लगी ।
मै भले ही रिंकी का सौतेला बाप हू लेकिन
बाप के कानों तक हर बात पहुंच जाती है । मेरा जानना ज़रूरी भी था कि मेरी बेटी मेरी ड्रेसिंग के बारे में क्या सोचती है । मै उसकी हर बात सुनकर बस मुस्कुरा रहा था। इंसान अगर समझदार है तो वो कभी भी छोटी छोटी बातों पर प्रतिक्रिया नहीं देता । ऐसा भी नहीं कि मुझे फर्क नहीं पड़ता । पड़ता भी है मगर मै बता नहीं सकता । ऐसी ही शिकायतों के साथ मै अपनी बीवी कुसुम और रिंकी के साथ नीचे होटल के दरवाजे पर बारात के स्वागत के लिए अपने ससुर, साले और साढ़ू के साथ एक कतार में खड़ा हो गया।
सामने से घोड़ी पर आते हुए दुल्हे को देख कर मुझे अपना अतीत याद आने लगा। मुझे सेहरा बंधा हुआ था, बारात लड़की वालों के दरवाजे पर खड़ी थी, मिलनी हो रही थी, प्रवेश द्वार पर मेरी निगाह गई तो गहरे नीले रंग के स्लीवलेस सूट में शायद गोरा कहना उचित नहीं होगा, इसीलिये दूधिया रंग बोल रहा हूँ, तो बिल्कुल दूधिया रंग के चेहरे वाली सुन्दरी पर मेरी निगाह जाकर टिक गई उसके सूट की किनारी पर सुनहरा गोटा लगा था।
पूरे सूट पर रंगबिरंगे फूलों का डिजाइन, कानों में मैचिंग बड़े-बड़े झुमके, बहुत खूबसूरत लहराते हुए बाल, और इन सबसे अलग उसके बिल्कुल गुलाबी होंठ, जैसे खुद गुलाब की पंखुडि़याँ ही वहाँ आकर बैठ गई हों, कहर ढा रही थीं। वहाँ बहुत सारी लड़कियों का झुंड था, सभी दरवाजे पर मेरा वैलकम करने के लिये खड़ी थी परन्तु मेरी निगाह रह-रह कर उस एक अप्सरा के चेहरे पर ही जा रही थी वो पास खड़ी लड़कियों से बीच-बीच में बात करके मुस्कुरा रही थी। मैं तल्लीनता से सिर्फ उसी के खूबसूरत चेहरे को निहार रहा था और उसके चेहरे में बची उस खूबसूरती को ढूंढने की कोशिश कर रहा था।’
तभी अचानक मुझे ऐसा लगा जैसे मुझे किसी ने धक्का दिया हो। मैं अपने अतीत के स्वप्न से जागा तो मेरी पत्नी कुसुम के हाथ में सफेद मोतियों की माला थी और मुझे जोर जोर से हिलाकर बता रही थी कि आने वाले सब बारातियों का मोतियों की माला पहना के स्वागत करना है , अब मैं उसको क्या बताता कि जो बीते हुए अतीत का दिव्य-स्वप्न मैं देख रहा था वो मेरे कितने करीब आने वाला था !
मैने कुसुम के हाथों से माला ले ली और उससे मजाकिया लहजे में पूछा कि , सिर्फ आदमियों को पहनानी है .. या औरतों को भी ?
पांच सेकंड खामोशी के बाद कुसुम घूरते हुए बोली ” , पूरी शादी बिना क्लेश के निपटी है , 4 घंटे बचे है, कोई कांड मत कर देना ! सीधे सीधे आदमियों को माला पेहनाओ और औरतों को नमस्ते करो !! “
मैंने मोतियों की माला हाथ में ली और एक एक करके बारातियों को पेहनाना शुरू किया। अब मैं बारातियों के साथ इधर उधर की बातें करके खुद को सामान्य करने की कोशिश कर रहा था।
जब बारात आ गई और जय माला का कार्यक्रम हो गया तो हम सब लोग खाना की प्लेट हाथों में लेने लगे, मेरी बेटी ने रिंकी मेरे हाथ से प्लेट ले कर बोली आप बैठिये पापा मै परोस कर लाती हू….. मैने उससे सख्ती से कहा था कि दो रोटिया ही लाना!
जब वो खाने की प्लेट सजा कर लायी तो तीन रोटिया थी… दो रोटिया मेरी भूख थी, तीसरी उसका “प्यार” था या ” अतिक्रमण” पता नही….????
खाना खाने के बाद सभी सिर्फ फैमिली के लोग दूल्हा दुल्हन (जूली और नया साढू) डी जे स्टेज पर डांस करने लगे. मेरी साली जूली जो कि लहँगा चोली में थीं और वो बहुत हॉट लग रही थीं. जूली की चूचियां और कूल्हे उछल उछल कर सबके दिलों पर, क्या बूढ़े क्या जवान, कहर ढा रहे थे.
माहौल बेहद रोमांटिक था। DJ फ्लोर में मंद रोशनी थी और हम डांस फ्लोर पर डांस कर रहे थे। मैंने शराब् का प्याला लेकर एक रोमांटिक गाने ” छलकाए जाम, आपके होंठो के नाम “” पर कुसुम के साथ डांस भी किया था। डांस के बाद वह बहुत अच्छा महसूस कर रही थी। चूंकि डांस फ्लोर पर इस गाने पर डांस के दौरान मेरे साढ़ू (प्रीति के पति) भी थे, मेरे साढ़ू (प्रीति के पति) ने कुसुम के कूल्हे और स्तन पर छुआ था लेकिन उसने इसे नजरअंदाज कर दिया।
मेरी बीवी कुसुम वो काले रंग की साड़ी, सेक्सी ब्लाउज पहने हुई थी और उसने बहुत अच्छा मेकअप किया हुआ था.
उसने गहरे रंग का चेरी रेड लिपस्टिक लगाई हुई थी. वो किसी अप्सरा से कम नहीं दिख रही थी.
अचानक मैंने देखा कि कि DJ वाले ने म्यूजिक चेंज किया और एक बेहद सेक्सी गाना
“एक तो कम ज़िन्दगानी”
डीजे पर बजने लगा और मेरी बेटी रिंकी उस गाने की बीट पकड़ कर नाचने लगी। रिंकी को अपनी मम्मी से नाचने की कला विरासत में मिली थी। अब तो मेरा बुरा हाल होने लगा।
इस गाने पर नाचते हुए रिंकी बेहद कामुक मूव्स कर रही थी जो कि उस भद्दे गाने की बोल से मिल रहे थे- जैसे अपने चूतड़ों को ज़ोर ज़ोर से हिलाना। चूचियों को उठा उठा कर हिलाना। होंठों को रगड़ना, आंखे मारना।
मै खुश भी था और हैरान भी अपनी प्यारी रिंकी बेटी का ये रूप देखकर।
थोड़ी देर बाद गाना बंद हो गया और मैने ताली बजाई। रिंकी ने हंसकर हाथ के इशारे से धन्यवाद किया। काफी देर के बाद वो भी डांस करने आई, अर्थात मेरी बड़ी साली प्रीति देवी क्या क़यामत लग रही थी, वो नीले रंग की साड़ी में और ब्लाउज तो काफी खुला था जिस कारण उसके मम्मों की गहराई बिल्कुल साफ दिखाई दे रही थी. प्रीति के मम्मों को देख कर तो मुझे पता नहीं क्या हुआ जो मैं उन्हें ही ललचाई नजरों से देख रहा था.
प्रीति मुस्कुराते हुए बोली- जीजू, क्या हुआ? एकदम से मैं चरित्रहीन मर्द बोला की कुछ नहीं कुछ नहीं. सब नाच रहे थे, मैं भी नाच रहा था लेकिन मेरा पूरा ध्यान बेटी और सालियों पर था. मैं नाचते हुए उन्हें देख रहा था और वो दोनों मेरी पत्नी के साथ नाचने में मगन थी.
आधे घंटे के बाद मेरी सेक्सी धर्म पत्नी मेरे पास आई और साइड में ले गई जहाँ रिंकी उल्टियाँ कर रही थी. मैंने भी पूछा- क्या हुआ? वो बोली की घबराहट के कारण ऐसा हुआ है पापा.
रिंकी ने कहा- पापा मुझे तो आप कमरे में छोड़ आओ, मेरी तबियत बिगड़ रही है. उसकी समस्या का समाधान करने के लिए मुझे 15 मिनट के लिए अपने कमरे में जाना पड़ा। इसलिए मैंने कुसुम को नृत्य का आनंद लेने के लिए कहा और कहा कि मैं कुछ समय में वहां वापस आ जाऊंगा।
मेरी पत्नी ने कहा- आप इसे हॉस्पिटल दिखा कर इसे कमरे पर छोड़ आओ. मैंने कहा- ठीक है. फिर वो वहाँ से चली गई.
उसके जाने के बाद मेरी सेक्सी माल मेरी बेटी रिंकी ने कहा- पापा, मुझे हॉस्पिटल नहीं जाना, आप मुझे सीधा होटल के रूम पर छोड़ दो. मैंने कहा- ठीक है, चलो मै उसको लेकर रूम में पहुँचा. उसको पानी पिला कर लिटाया मेरी जवान और सेक्सी बेटी के पास आकर बैठा और बोला- अब कैसा फील हो रहा है? वो बोली- अब ठीक है.
मैंने उस से पूछा- क्या हुआ था जो तुम उलटियाँ कर रही थी कहीं पेट में कुछ गड़बड़ तो नहीं है?
रिंकी बोली- प्लीज पापा मम्मी को मत बताना वो कुछ सहेलियों के साथ मैने थोड़ी सी बियर पी ली थी। ऐसा कह कर मेरी सेक्सी माल लड़की जोर जोर से रोने लगी. मैंने खेद जताते हुए उसे चुप कराया और अपना सांस संभालते हुए बोला- तुम तो छोटी हो, तुम्हे तो कंट्रोल करना चाहिए था।
“नहीं पापा, मैं छोटी नहीं हूँ। 19 साल ही हो चुकी हूँ और सब समझती हूँ।” बाप को समझाते हुए बिटिया (पापा की परी ) बोली- ह्म्म ह्म्म
रिंकी के मुँह से ऐसी बातें सुन के मुझ को थोड़ा अचम्भा हुआ। और गालिब का एक शेर याद आ गया…
“दिल ऐसे मुल्तला हुआ तेरे मलाल मे
जुल्फे सफेद हो गयी बस 19 साल में”
फिर अपने आंसू पोंछते हुए रिंकी उठी और बेड पर चढ़कर मेरी गोद में बैठ गयी। रिंकी आँखें बंद किये इंतेज़ार कर रही थी बाप के होंठ चूसने का! लेकिन जल्दी ही रिंकी समझ गयी कि पापा को तड़प बढ़ाने में ज्यादा आनंद आता है।
रिंकी ने मेरे बालों में हाथ फिराया और अपने होंठों को पापा के हवाले कर दिया।
अपनी बेटी रिंकी के होंठों का रस चूसते हुए मैने बीच बीच में उसके चूचे दबाने चालू कर दिए।
बेटी को कुछ जल्दी थी या फिर बाप की इच्छा का सम्मान करते हुए रिंकी ने हाथ बढ़ा कर अपनी टॉप निकाल दी और अपने 34 के सुडौल चूचे आज़ाद कर दिये।
मैने भी झटपट अपनी शर्ट उतार फेंकी और खुश होता हुआ बोला- बेटा तेरी मम्मी के चूचे भी बिल्कुल ऐसे ही है। मैने अपनी बेटी के कड़क स्तनों को दबाया, सूंघा, चाटा, फिर बोला- और खुशबू भी तेरी मम्मी जैसी ही है।
“हा हा हा … हाँ पापा मालूम है। मैं बिल्कुल मम्मी जैसी हूँ इसीलिए नीचे से मुझे कुछ चुभ भी रहा है।” इतना कहकर रिंकी ने हँसते हुए मेरा सिर अपने चूचों में छुपा लिया।
मैने रिंकी को अपनी गोद में उठाया और बेड पर पटक दिया, उसके सामने घुटनों पर खड़ा हो गया।
“रुक तुझे दिखाता हूँ क्या चुभ रहा है। तेरी मम्मी को भी बहुत चुभता है ये!” इतना कहते हुए मैने पेंट और कच्छा एक साथ ही खोल कर निकाल फेंके।
पैंट उतरते ही मेरे नंगे जिस्म के साथ लोहे जैसा फौलादी लंड सलामी देने लगा।
रिंकी ने इतने करीब से पापा का लौड़ा पहली बार देखा था। अब कोई डर या शर्म जैसी बात भी नहीं थी इसलिए रिंकी उठ कर बैठ गयी और लन्ड को नजदीक से निहारने लगी।
“ऐसे क्या देख रही है रिंकी, हाथ में पकड़। अब तेरा गुलाम है ये!” कहकर मैने रिंकी का हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया।
पापा के लंड की तनी हुई नसों पर हाथ फिरा कर रिंकी बहुत खुश थी। उसने दूसरा हाथ भी इस्तेमाल किया और मेरी गोटिया पकड़ ली।
मै एक लंबी आह भरता हुआ बोला- बिल्कुल अपनी मम्मी की तरह लंड से पहले गोटियां कब्ज़े में करती है … ओऊऊऊ!
अभी मै अपनी बात खत्म भी नहीं कर पाया था कि रिंकी ने पापा के सुपारे पर जीभ फिरा दी।
मेरी जान गोटियों में आ गयी जो मेरी बेटी के नाज़ुक हाथों में थी। रिंकी ने गोटियों को सहलाते हुए लंड चूसने की कोशिश की।
लेकिन मेरा लन्ड ज्यादा बड़ा होने की वजह से वो पूरा मुँह में नहीं ले पा रही थी।
उसने लंड छोड़ गोटियों को मुँह में लिया और चूसने लगी, लंड को हाथों से लगातार सहलाती जा रही थी। रिंकी कभी गोटियों को चूसती तो कभी लंड का टोपा गालों में दबा लेती। मेरे लौड़े की सर्विस लगातार हो रही थी।
वैसे भी मै अपनी बेटी का इस कदर दीवाना था कि रिंकी के गुलाबी होंठों पर लंड छुआने के ख्याल भर से झड़ जाता।
यहाँ भी मै “टीन पोर्न ” को ज़्यादा देर संभाल नहीं पाया। बेटी के होंठों ने बाप के जिस्म में इस कदर गर्मी बढ़ाई की मै अपना आपा खो कर रिंकी के मुँह में धक्के मारने लगा।
मैने दोनों हाथों से रिंकी के बाल पकड़ लिए और पूरी ताकत से उसके गले तक लंड पेलने लगा। 8-10 तगड़े झटके देने के बाद मैने पूरी ताकत से लंड गले में उतार दिया।
मेरे लंड से निकली गर्म मलाई सीधा रिंकी के पेट में जा रही थी। रिंकी की आँखें चढ़ चुकी थी, सांस रुक गयी थी.
लेकिन मुझ को कोई होश नहीं था; मै आँखें बंद कर के रुक रुक के तब तक धक्के देता रहा जब तक आखिरी बूंद तक माल रिंकी के पेट में नहीं पहुँच गया।
झड़ने के बाद जैसे ही मैने अपनी पकड़ ढीली की, रिंकी ने पूरी ताकत से मुझे पीछे धकेला और खांसते हुए बेड पर गिर गयी।
मैने देखा कि उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे, वो लंबे लंबे सांस लेने की कोशिश कर रही थी साथ ही खांस भी रही थी। अब मुझ को अहसास हुआ कि अपने मज़े के चक्कर में मैने रिंकी को बहुत दर्द दिया है।
मै रिंकी के सामने बैठ कर उसे समझने लगा और माफी मांगने लगा। मैने उसके आंसू पोंछे और पीठ सहलाई। करीब 5 मिनट में जाकर रिंकी की हालत नार्मल हुई।
अब रिंकी मुझ पर गुस्सा करने लगी। मै रिंकी को मनाने के चक्कर में हाथ बढ़ाता और रिंकी मेरा हाथ झटक देती।
रिंकी मुझे छूने ही नहीं दे रही थी, खूब गुस्सा कर रही थी- अपने मज़े के चक्कर में किसी की जान निकल दोगे क्या पापा आप? अरे आपकी बेटी हूँ, कोई बाज़ारू रंडी नहीं। इतनी बुरी तरह कोई करता है क्या? मम्मी के साथ भी ऐसे ही करते है क्या आप?
मैने समझाया- बेटा तेरी मम्मी का मुंह बड़ा है और वो पूरा लंड अंदर तक आसानी से ले लेती है। इसलिए कभी दिक्कत नहीं हुई। तू तो जानती है कि तुझे सामने देख के मुझे तेरी मम्मी याद आ जाती है। बस उसी के ख्यालों में खो गया और भूल गया कि तुझे परेशानी हो रही है। मुझे माफ़ कर दे बेटी!
रिंकी कुछ नहीं बोली बस मुँह बनाये बैठी रही।
और तभी दरवाजे की घंटी बजी. हम दोनों के दिल की धडकन भी बढ़ गई. इस वक्त कौन आ गया. रिंकी जल्दी से डर के कारण अपनी नंगी छातियो को अपने हाथों से छिपाये वाश रूम में घुस गयी…. मै कुसुम से तो कह कर आया था दस पंद्रह मिनिट में वापस आता हू वो आराम से डांस करे…. मैने जल्दी जल्दी जल्दी बिना चड्डी के पेंट पेहनते हुए बड़बड़ाया ।
लगातार चार पांच बार डोर बैल बजने के करीब दो मिनिट के बाद मैने दरवाजा खोला तो वहां पर मेरी सास खड़ी हुई थी.
कैसी तबियत है रिंकी की?? क्या हुआ उसे??
इससे पहले मै कुछ जबाब दे पाता सासु ने अन्दर आ के मुझे देखा. मेरा लंड पेंट में से साफ़ दिख रहा था अन्दर अंडरवेर ना होने की वजाह से. वो मुझे अजीब नजरो से देख रही थी. जिसकी वजह से मैं उनका अभिवादन करते हुए मैं उन्हें बातचीत में शामिल करने की कोशिश कर रहा था।
मैने सासु को बताया कि रिंकी का पेट खराब है और वॉशरूम का इस्तेमाल करने के लिए गयी। उनकी नजरे बिस्तर पर पड़ी सिलवटों, तकिये के ऊपर रखी ब्रा और जमीन पर पड़ी मेरी चड्डी पर टिकी थी। मै जानबूजकर वाश रूम के दरवाजे पर चला गया और रिंकी का नाम लेते हुए बोला बेटा कितना वक्त लागेगा, तेरी नानी आई है तेरी तबियत खराब की खबर सुनकर….!
मैने दोबारा से नजर घुमा कर सासु की तरफ देखा मैं एकदम से डर गया मैंने देखा उनके हाथ में रिंकी का ब्रा था। वह मुझे लगातार घूरे जा रही थी। यह सब देखकर मैं चौंक गया। मै मन ही मन रिंकी को कोसने लगा कि वो इतनी बड़ी गलती कैसे कर सकती है, ब्रा हाथ में लेकर वाश रूम के अंदर नही जा सकती थी।
और फिर वाश रूम का दरवाजा खुला और रिंकी अपने बड़े बड़े चूचे को अपने छोटे छोटे हाथों से ढक कर बाहर आई……
सासु की जगह कोई और औरत होती तो क्रोध का ज्वालामुखी बन जाती. अपनी सगी बेटी की, जवान बेटी की नंगी छातिया देख कर कर कलेजा फट जाता उस का. लेकिन सासु के साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ. वह पत्थर का बुत बनी सामने नजरें झुकाए शांत खड़ी नातिनि को टुकुरटुकुर निहारती रही. उन की सांसों में तेजी और गरमी जरूर आई. आंखें भी क्रोध से चहकीं, लेकिन क्रोध होंठों के रास्ते लावा बन कर निकलने के बजाय आंखों के रास्ते आंसू बन कर बहा.
सासु और रिंकी के बीच सन्नाटा छाया था. आंसू दोनों की आंखों में थे. फर्क था तो सिर्फ इतना कि रिंकी के आंसुओं में दर्द था, दयनीयता थी, मजबूरी थी, जबकि सासु के आंसुओं में क्रोध और घृणा के मिलेजुले भाव थे.
पलभर की चुप्पी के बाद खामोशी सासु ने ही तोड़ी. वह साड़ी के पल्लू से आंसू पोंछ कर गहरी सांस लेते हुए गंभीर स्वर में बोली, ‘’ शाबाश बिटिया तू तो अपनी सगी मम्मी की ही सौत बन गई. मुझे शक तो था, पर मैं यह सोचने की हिम्मत नहीं जुटा सकी कि ऐसा भी हो सकता है.’’
नानी की बात सुन कर रिंकी खुद पर काबू नहीं रख सकी. आंसुओं के साथ उस का गला भी रुंध गया. फफक कर रोते हुए
सासु का सिर चकरा रहा था. पैरों पर खड़े रहना मुश्किल हो गया तो वह दीवार का सहारा ले कर वहीं बैठ गई.
शादी वाले होटल के कमरे में मरघट सा सन्नाटा छाया रहा. सासु मुझे लगातार घूरे जा रही थी। मुझे इतना डर लग रहा था कि वह मेरे साथ या रिंकी के साथ कुछ न कुछ जरूर करेगी। लेकिन इसका उलट हुआ। उन्होंने मुझसे शांति से पूछा, ‘इस बारे में कौन जानता है? मैंने कहा कोई नहीं। उन्होंने ब्रा को जमीन पर फेंक दिया।
अपने गुस्से को काबू कर मुझे धमकी (चेतावनी) देते हुए उन्होंने अपनी उंगलियों को दिखाते हुए कहा ‘मैं नहीं चाहती कि मेरी बेटी जूली की शादी इन सब चीजों से प्रभावित हो। किसी को भी इस बारे में पता नहीं चलना चाहिए। मुझे परवाह नहीं है कि आप किस के साथ क्या कर रहे हो, लेकिन एक परिवार के रूप में हमारी प्रतिष्ठा दांव पर नहीं लगनी चाहिए। वरना, इसका अंजाम बहुत बुरा होगा।’
जारी है…… ![]()

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