फिर प्रीति बाय कहकर चली गई. पूरे पंद्रह मिनट बाद मैंने भी होटल का बिल अदा किया और वापिस वहीं चला गया जहाँ से आए थे… ….।
करीब आधे घंटे बाद मै भी मैरिज हाल में पहुँच गया, इधर उधर ढूढ़ने के बाद मुझे अपनी बीवी कुसुम शादी के टेंट (शामियाने) की लगी पर्दे के पीछे जाती हुयी दिखाई दी। वहा उसका वही मुझसे शादी के पहले का प्रेमी दिनेश खड़ा उसका इंतज़ार कर रहा था। मै भी उसके पीछे पीछे टेंट के पर्दे के दूसरे तरफ छिप कर खड़ा हो कर उनकी बातें सुनने लगा।
“मुझे यकीन नही था की तुम्हे भी उस रात की बात याद होगी ,तुम्हारे आंखों में आये हुए आंसू ने सब बता दिया ..”
“वो बात अब पुरानी हो चुकी है दिनेश,अब मैं शादी शुदा हु ..”
“हा जानता हु लेकिन तुम्हारे दिल में मेरे लिए प्यार अब भी है …”
कुसुम ने इसका कोई जबाब नही दिया ।
“क्या हुआ ..मैं अब समझ सकता हु की प्यार तो तब भी था लेकिन तुमने कभी उजागर ही होने नही दिया ..”
“ दिनेश ये सब बाते छोड़ो ना अब इन सबसे क्या मिलेगा..”
“अभी तुम्हारे पति अरुण कहा है ..”
“ अपने किसी दोस्त से मिलने गये है ..”
“ कुसुम चलो ऊपर होटल के कमरे में चलते हैं..”
“नही कोई जरूरत नहीं ..”
Pls कुसुम बस एक बार चलो ना मुझे तुमसे बहुत कुछ कहना है….!
“तुम पागल हो गए हो क्या , वैसे भी शादी की भीड़ से बाहर आकर बात करना पड़ रही है ..”
कुसुम की आवाज में चिंता तो थी लेकिन वो थोड़ी रूवासी जरूर थी ,वो हल्के हल्के सिसक रही थी ,
“हा तुम ही कहती हो ना की मैं पागल हु ,इतने दिनों के बाद तुम्हे देखकर कोई पागल नही होगा ..”
दिनेश की आवाज में भारीपन तो था लेकिन बेहद ही गमगीन आवाज थी,
थोड़ी देर तक कोई कुछ नही बोला
“याद है कुसुम वो रात जब हम दोनो एक होते होते अधूरे रह गए थे..”
कुसुम ने कुछ भी नही कहा,
“वही ये बात सुनकर मेरी हालत खराब हो गई थी ,ये बात कुसुम ने मुझसे हमेशा से ही छिपाई थी ,
“ दिनेश प्लीज् वो एक गलती थी ,शायद हम बेहक गये थे ..”
“ बहके तो थे कुसुम लेकिन तुमने सच ही कहा था उस दिन की तुम मुझसे प्यार करती हो ..”
“ दिनेश तुमने आजतक कभी इस बात को नही छेड़ा तो अब क्यो, मैं तो तैयार थी ना तुमसे शादी करने के लिए,लेकिन तुमने क्या कहा था कि हमारा रिश्ता मामा भांजी का है और परिवार, रिश्ते की मर्यादा तो तुम्हे निभानी थी,…….. अब मैं अपने पति से प्यार करती हु,बेहद प्यार …आज तक तुम मेरे जीवन में दखल नही दिया लेकिन आज ….” कुसुम सिसकने लगी।
कुसुम मुझे माफ कर दो ,मैं आज भी तुम्हारे जीवन में दखल नही देना चाहता ..लेकिन मैं बस उस बात से बहक गया था,मैं नही चाहता की अरुण को हमारे बारे में पता चले,लेकिन मैं आज भी तुम्हे बेहद प्यार करता हु कुसुम,और मैं जानता हु की दिल के किसी कोने में तुम भी मुझसे मोहोब्बत करती हो …”
कुसुम थोड़ी देर तक चुप ही रही.
हा दिनेश करती थी तुमसे प्यार और करती भी हु,और प्यार कोई ऐसी चीज तो नही जो मर जाएगी ,लेकिन तुम्हारे अलावा मैं अपने पति से भी बेहद प्यार करती हु,और मुझे आशा है की तुम मेरे शादी शुदा जीवन में अब दखल नही दोगे..”
कुसुम का स्वर और भाव दोनो ही स्पष्ट थे ..वो दृढ़ थी ..कही ना कही मुझे उसपर गर्व हो रहा था और खुद पर घमंड ..
“नही दखल दूंगा,शायद इसीलिए आज तक तुमसे दूर ही रहा क्योकि अगर तुम्हारे पास आता तो फिर से बहक जाता,सोचा था की अब सब कुछ ठीक हो गया होगा,फिर से हम पहले की तरह रहने लगेंगे.. लेकिन … मुझे माफ कर दो कुसुम शायद मुझे यंहा से चले जाना चाहिए तुम्हारे जीवन से दूर हमेशा के लिए..”
दिनेश रो पड़ा था ..
“दिनेश ..”इस बार कुसुम चिल्लाई थी ..
“तुम फिर से मुझसे दूर जाना चाहते हो …???अच्छा चले जाओ,लेकिन मेरी खुसी इसी में है की तुम मेरे पास रहो,मेरे सबसे अच्छे दोस्त बनकर ..”
दोनो ही कुछ नही बोले..
“दोस्त..हा वो तो जीवन भर रहूंगा लेकिन ….लेकिन अगर मैं बहक गया तो ,अगर हम दोनो ही बहक गए तो ..”
कुसुम हल्के से हँसी
“मुझे तुमपर और खुद पर पूरा भरोसा है दिनेश,मैं तुम्हे और खुद को रोक सकती हु,ताकि हमारी मर्यादाओं का उल्लंघन ना हो..”
फिर से एक खामोशी सी छा गई..
“सच में तुम बड़ी बड़ी बाते करने लगी हो कुसुम,”इस बार दिनेश हंसा और साथ ही कुसुम भी
“अगर कुछ हुआ ना तो तुम जानो ,मैं यही रुक रहा हु ..” दिनेश की आवाज में एक चहक थी,
“थैंक्स मेरे कमीने..लेकिन एक बात बता,तू ने मुझे यहाँ टेंट के पीछे बस ये ही बातें करने के लिए बुलाया था..”
दिनेश हंसा
“सोचा था तू मान जाएगी तो तेरी किस ले के जाऊंगा “
“बहुत कमीना है तू ,अभी तो प्यार की बात कर रहा था ..”
फिर से दोनो ही हंसे
“ओके चल मै अब चलती हू ये (अरुण) भी वापस आ गये होंगे और मुझे औरतो के झुंड में ढूढ़ रहे होंगे..”
“बाय लव यू ऊऊमाआआ “ दिनेश की बात से कुसुम जोरो से हँसी
“बाय लव यू कमीने और वरमाला देखकर ही घर जाना ” कुसुम ने हल्के से कहा …… और वो वापस औरतो के झुंड में शामिल हो गयी।
दोनो की बात सुनकर मेरे दिल में कुसुम और दिनेश के लिए इज्जत और भी बढ़ गई थी ,सच में मैं कुसुम और दिनेश के बारे में ऐसा नही सोच पा रहा था जैसा की मैं किसी दूसरे मर्द के साथ कुसुम के बारे में सोचता,उन दोनो में एक प्यार था अपनत्व था,दोस्ती थी जो बेहद ही गहरी थी ,साथ पाने की चाह थी लेकिन हवस नही ,मैं कुछ डिसाइड नही कर पा रहा था की क्या करू,मैंने एक गहरी सांस छोड़ी और अब मै अपना अगला शिकार अपनी छोटी साली जूली को ढूढने लगा।
नोवेम्बर की गुलाबी सर्दी का मौसम वैसे ही खुशगवार होता है, पर आज मुझे ज्यादा ही खुशगवार लग रहा था, मैं जूली से ढेर सारी बातें करना चाहता था। मुझे पता था कि समय बहुत कम है कुछ घंटो बाद या यू कहे आज शादी होने के जाने के बाद जूली ससुराल चली जायेगी। और मै अपनी साली जूली की चूत पर अपने लंड का ठप्पा लगाने से चूक जाऊंगा।
साली को ढूँढते ढूढते मेरी नजर मेरी प्यारी बेटी रिंकी पर पड़ी, रिंकी दो तीन लड़कियों के साथ खड़ी गप्पे लगा रही थी। जब उसकी नजर मुझ पर पड़ी तो उसके चेहरे पर नूर आ गया। वो खुशी से खिल गयी लेकिन मेरे पास नही आई। मै उससे ज्यादा खुश था।
मेरी लड़की (बेटी) सच में सुंदर है. माथे पर चमकती हुई लाल रंग की बिंदी…… छरहरा नाजुक बदन था, लाल रंग की हल्की कढ़ाई वाली साड़ी पहनी थी। पतली स्टैप वाला और स्लीवलेस ब्लाउज़ पहने थी. हाथों में एक एक फ़ैशन वाला कॉपर का कंगन था और एक स्लिम गोल्ड वाच थी. गोरे पैरों में ऊंची ऐड़ी के सैंडल थे. छरहरा बदन था, एकदम स्लिम, ऊंचाई कुसुम (उसकी मम्मी) से तीन चार इंच कम थी. चेहरा काफ़ी कुछ कुसुम (उसकी मम्मी) जैसा था, काफ़ी कुछ क्या, बहुत कुछ.. …!
बस बदन कुसुम (उसकी मम्मी) के मुकाबले एकदम स्लिम था, कुसुम (उसकी मम्मी) अच्छी खासी मांसल है, मोटी नहीं पर जहां मांस होना चाहिये वहां उसका एवरेज से ज्यादा ही मांस है. वजन थोड़ा ज्यादा होता और ऊंची होती तो एकदम कुसुम (उसकी मम्मी) की जुड़वां लगती. हल्का मेकप किया था और होंठों पर हल्की गुलाबी लिपस्टिक थी. आंचल में से छोटे छोटे पर तन कर खड़े उरोजों का उभार अंदर से झांकता दूधिया नव यौवन जैसे मुझे पुकार रहा था।
मैं खुद बहुत अधीर था। पर खुद पर काबू रखना बहुत जरूरी था। मैं कुसुम (उसकी मम्मी) से बहुत प्यार करता था। उसकी निगाह में गुनाहगार नहीं बनना चाहता था। और मैं यह भी नहीं चाहता था कि कहीं से भी रिंकी को ये महसूस हो कि मैं सिर्फ उसके यौवन का दीवाना हूँ इस सबके बावजूद भी मैं दिल के हाथों मजबूर था। दिमाग तो से बस बेटी को भोगने का एक ही काम कर रहा था।
पर मेरे साथ एक समस्या यह भी थी कि मेरी इमेज अपनी बेटी की नजरों में पत्नी-भक्त (जोरू का गुलाम) की थी और मैं उस के सामने अपनी छवि खराब नहीं करना चाहता था, और वास्तव में मुझे शायद कुसुम से अधिक प्यार किसी से नहीं था। पर यह भी सत्य है कि रिंकी को सामने पाकर मैं उसकी अद्वीतीय सुन्दरता पर आसक्त था। इसी अंर्तद्वन्द्व में मैं हल्के हल्के रिंकी की ओर कदम बढा रहा था।
आखिर में मै रिंकी के पास पहुँच ही गया, वो अब उन लड़कियों से थोड़ी दूर हट कर खड़ी हो गयी, मैने उससे कहा बहुत सुंदर लग रही हो। ये सुनकर वो शर्मा गयी। डीजे पर गाना बज रहा था “” हवा हवा ऐ हवा, एक बार मिला दे…. आज किसी के चेहरे का नूर खिल गया, बिछड़ा हुआ आज कोई उसको मिल गया “” ……… ह्म्म ह्म्म
“थोड़ी देर मेरे पास बैठो ना रिंकी मैं तुमको साड़ी में देखना चाहता था।” मैंने तुमको आज तक साड़ी में नहीं देखा है,
“तो देख तो लिया, दोपहर से साड़ी में ही तो हूँ।”
अब मैं तो कोई जवाब ही नहीं दे पाया उसको, मैंने कहा- “पर तब सिर्फ तुम पर ध्यान नहीं था ना, अगर बुरा ना मानो तो थोड़ी देर मेरे पास ऐसे ही रहो, साड़ी में।”
मेरे इतना बोलते ही वो मेरे एकदम सामने आकर खड़ी हो गई और बोली, “लो जी भर कर देख लो।”
उसके दोनों गुब्बारे एकदम तने हुए थे ऐसा लग रहा था जैसे मुझे ही पुकार रहे थे कि मेरे पापा आकर हमसे खेलो।
मैं भी खड़ा हुआ और उसके बिल्कुल सामने पहुँच गया। मैंने कहा, “रिंकी तू तो मम्मी से भी ज्यादा खुबसूरत हो?”
वो हंसने लगी और बोली- पापा ऐसा कुछ नहीं है सब आपकी आंखों का धोखा है।
तब तक मैं उसके एकदम सामने खड़ा था, एकदम नजदीक ! मैने उसकी गोरी गोरी बाजुओं पर अपनी उंगलियाँ फेरी।
“उईईई…” वो एकदम सिहर उठी।
मैं बोला “क्या हुआ?”
रिंकी ने कहा, “मीठी मीठी गुदगुदी होती है।”
मैंने पूछा- अच्छी नहीं लगी क्या? तो उसने एकदम मेरी ओर मुस्कुरा कर देखा पर मुझे अपनी ओर देखकर आँखें लज्जा से नीची कर ली।
‘हाय रे…’ उसकी यह कातिल अदा ही मेरी जान निकालने के लिये काफी थी। आज पहली बार मुझे लगा कि शायद मैं ही बुद्धू था, जो “जूली की मूली” खाने के चक्कर में अपनी हसीं बेटी को छोड़ भटक रहा हूँ और सोचा कि कोशिश करके देखते हैं क्या पता आज रात रिंकी के साथ ही बात बन ही जाये। मैंने फैसला किया कि कुछ सधे हुए तरीके से प्रयास करूँगा ताकि यदि बात ना भी बने तो बिगड़े तो बिल्कुल भी नहीं।
और मै उस को कुछ कदम की दूरी पर ले जा कर बोला।
रिंकी अभी यहाँ कुछ काम है क्या…??
काम तो कुछ नही है…” उसने जबाब दिया।
तो चलो ना ऊपर होटल के रूम में चलते हैं, मैने फिर अगली चाल चली।
क्यो..?? यही रहो ना सभी लोग तो है यहाँ, रूम में क्या करेगे….वैसे भी अभी बारात आने वाली है, मम्मी बेवजह हंगामा करेगी… उसने जबाब दिया।
मेरे को गुस्सा आ रहा था मैने उससे मुहं मोड़ लिया मेरा दिमाग़ ख़राब हो रहा था। मैं उसके पास से दूर चला गया और दुखी आत्मा जैसी शक्ल बनाकर उसे देखने लगा दूर से। वो मुझे देख रही थी. मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था. सोचने लगा साली किस्मत ही ख़राब है।
तभी किसी ने मेरी पीठ पर हाथ मारा, मैंने मुड़ कर देखा तो चुस्त पंजाबी सूट में मेरे पीछे प्रीति खड़ी मुस्कुरा रही थी। मैं उसके गुलाब की पंखुड़ी जैसे होंठों को देखकर वहीं जड़वत हो गया।
तभी प्रीति बोली, “जीजा जी, आपके साथ खड़ी लड़की (रिंकी) आपकी बिटिया है, ऐसे मत घूरो, घर जा कर घूर लेना, आसपास खड़े लोग आप दोनों को लैला मजनू समझ कर घूर रहे है ”
मैंने एक बार फिर से खुद को नियंत्रित करने की कोशिश की और बिना कुछ भी बोले अपनी बीवी कुसुम की तरफ चल दिया।
प्रीति भी मेरे पीछे-पीछे चलती हुई बोली, “लगता है जीजाजी नाराज हैं मुझसे कोई बात भी नहीं कर रहे।”
अब मैं उस को क्या बताता कि दोपहर में होटल की चुदाई के बाद उसको दोबारा देखकर मैं अपने होशोहवास खो चुका हूँ, हम इसे एक बुरा हादसा मान कर भूल सकते थे और अपनी असल ज़िंदगी की ओर लौट सकते थे, मगर असलियत में यह कोई हादशा नही था. हम ने इसे स्वैच्छा से किया था इसमे कोई शक नही था. मगर प्रीति ने इस समस्या से निजात पाने का आसान तरीका चुना. वो ऐसे दिखावा कर रही है जैसे कुछ हुआ ही नही था. जो भी पछतावा था जो शरम थी वो सिर्फ़ और सिर्फ मेरी चंचलता और शरारत की वेजह से मुझे लग रही थी.
फिर भी मैंने बात को सम्भालने की कोशिश करते हुए बोला, “ऐसा नहीं है साली जी, दरअसल कुसुम मेरा बेसब्री से इंतजार कर रही है ।
”प्रीति बोली, “जीजाजी, इसीलिये तो मैं आपकी फैन हूँ क्योंकि आप बीवी और बेटी दोनों का ही बहुत ध्यान रखते हैं मेरे हिसाब से आप नम्बर 1 पति हो इस दुनिया के।”आप किस तरह मेरी बहन कुसुम का पूरा पूरा ख्याल रखते हो, उनकी हर विश पूरी करते हो, उन्हें किसी तरह की कोई कमी महसूस होने देते. वो बहुत खुश है आपके साथ. परिवार में सब आपकी तारीफ करते नहीं थकते..
मैं चरित्रहीन मर्द बोला की साली साहिबा जी, वो तो हर पति का कर्तव्य है और वैसे भी सेक्सी धर्म पत्नी की सेवा नहीं करेंगे तो मेवा कैसे मिलेगा. मेरे इस जवाब से वो थोड़ी शरमा गई.
“हाँ तो आज रात में साली साहिबा का क्या क्या प्रोग्राम है?”
“हम तो आपके डिस्पोजल पर हैं जो प्रोग्राम आप बना देंगे, वही हमारा प्रोग्राम होगा।”
“पक्का?”
“हाँ जी !”
“देख लो बाद में कहीं मुकर मत जाना अपनी बात से?”
“अरे जीजाजी, मुझे पता है आप कभी मेरा बुरा नहीं करेंगे और आप तो मेरे ड्रीम ब्वा्य हो, मैं आपकी हर बात मानती हूँ।”
मैंने सोचा कि लगे हाथ मैं भी कुछ अरमान निकाल लूँ, मैंने कहा, “यार तुम भी मेरी ड्रीम गर्ल हो ! पर पहले क्यों नहीं मिली। नहीं तो आज कुसुम की जगह तुम ही मेरे साथ होती मेरी ड्रीम गर्ल !”
‘हा..हा..हा..हा..’ वो हंसने लगी और मुस्कुराते हुए बोली, “लगता है आज आपकी सारी हरकतें कुसुम को बतानी पड़ेंगी, और मेरी बेटी रिंकी की तरफ आँखों से इशारा करते हुए बोली वैसे भी आप इधर उधर बहुत ताकते हो।”
प्रीति की आँखों के इशारे का अर्थ मुझे समझ आ रहा था….!
“हर इंसान अपनी जरूरत को ताकता है साली जी, मैं अपनी जरूरत को ताकता हूँ और आप अपनी।” यह बोलकर मैं मुस्कुराते हुए रिंकी ओर देखने लगा।
इसी तरह हंसते, बात करते हम लोग कुसुम के पास आ गये।
तभी कुसुम बोली- क्या बात बहुत खुश लग रहे हो दोनों, क्या हुआ?
प्रीति ने कहा, “ये जीजा जी मुझे आधी से पूरी घरवाली बनाने के मूड़ में है….???
मैं भी कुसुम को छेड़ने के मूड में था, मैंने कहा “देख लो, तुमको पता है मुझे हमेशा ही तुम्हारी जरूरत पड़ती है , ऐसा ना हो कहीं गलती से मेरा हाथ तुम्हारी जगह तुम्हारी बहन पर चला जाये।” और वैसे भी साली तो आधी घरवाली होती है।”
कुसुम भी नेहले पर देहला देते हुए बोली
“यह बात तो सही है।” लेकिन प्रोफेसर अरुण कुमार …..” कहीं आधी के चक्कर में से पूरी भी हाथ से ना निकल जाये।”
कुसुम का जवाब मेरे लिए मुश्किल पैदा करने वाला था ।
“मतलब क्या तुम्हारा “
मैंने अपना पल्ला झड़ते हुए कहा.
“क्यो?? मर्द साली को घरवाली बनाये तो चलता है और अगर औरत देवर को दूसरा वर बनाये तो बर्दाश्त नही होता है,
अब मैं बुरी तरह से झेंप गया था।
कुसुम के चहरे में एक व्यंगात्मक मुस्कान थी और व्यंगात्मक मुस्कान देती हुयी वो प्रीति के साथ होटल की लॉबी में चली गयी।
जारी है……

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