उसने जल्दी जल्दी गहरी गहरी साँसें लीं और फिर बोली- यहाँ बातचीत करने बुलाया था या मेरा दम घोंटने को… और यह क्या हरकत की? कैसा मजाक है ये? अगर किसी को भनक भी पड़ गई तो क्या हशर होगा कुछ ध्यान भी है आपको… मेरी तो इज़्ज़त का जनाज़ा निकल जायगा… बताइये क्यों बुलाया था… और हाँ ज़रा दूर से…… ?? ?
मैंने हँसते हुए कहा- प्रीति तू इतनी भोली तो न बन… तू दूध पीती बच्ची नहीं है… यहाँ होटल में बुलाया था तो इतनी तुझ में भी समझ तो है कि होटल में बराखडी का पाठ तो नहीं करेंगे… पाठ तो होगा ज़रूर लेकिन काम शात्र का…… लेकिन उससे पहले तुम ये बताओ क्या खाओगी…..? कुछ खाने के लिए ऑर्डर कर देते है… ??
और उसने मुस्कुरा कर मेन्चुरियां ग्रेवी और कोल्ड ड्रिंक की फरमाइश कर दी….. मैने जल्दी से रिसेप्शन पर फोन से ऑर्डर लगा कर फिर से उसको दबोच लिया और होंठ चूसने लगा.
उसको बाँहों में बांधे बांधे सरकता हुआ मैं बिस्तर तक जा पहुंचा और उसको लिए लिए बेड पर आ गया. अब तक उसने भी प्रतिरोध करने का नाटक बंद कर दिया था और अपनी सुलगती हुई चूत की बात मान कर मज़े से होंठ चुसवाने लगी. अपनी टांग उसने मेरी टांग के ऊपर लपेट ली और उसके नाख़ून मेरी पीठ में चुभने लगे. अब वो भी मुझे कस के लिपटी हुई थी.
थोड़ी देर चुम्बन के बाद अचानक प्रीति ने अलग किया और खड़ी होकर बोली- रुकिए ज़रा… सारी कुर्ती मुस मुसा जायेगी… थोड़ी सी तो मुस भी गयी.. . .. उसने अपने कपड़ों को हाथ से तह करके ठीक करना शुरू किया. मैंने उसके कन्धों पर हाथ रख कर उसको बिस्तर पर बिठा दिया और नीचे बैठ कर उसकी जयपुरी जूतियां उतार दीं.
जूतियों की गिरफ्त से आज़ाद होते ही उसके खूबसूरत पैरों ने मेरा मन मोह लिया. पहले मैंने जूतियां सूंघी जिनमें उसके पांवों की नशीली महक आ रही थी. आआ आआआह!
प्रीति बोली- यह क्या कर रहे हैं जीजाजी आप… छोड़िये इन जूतियों को.
मैं बोला- आपके इन हद से ज़्यादह सुन्दर पैरों की खुशबू ले रहा हूँ इन जूतियों में… काश मैं ये जूती होता तो आपके इन मादक चरणों से लिपटा तो रहता हर समय!
प्रीति ख़ुशी से झूम उठी और बोली- अच्छा महाराज… डायलॉग बहुत हो गए अब बताइये कौनसा पाठ पढ़वाने को बुलाया था?
उसकी शराबी सी आँखों में हवस के लाल लाल डोरे तैर रहे थे. जो मैंने उसकी जूतियां सूंघ कर उसके पांवों की प्रशंसा की उससे उसकी कामेच्छा और भी अधिक भड़क उठी थी.
लौड़े ने पूरी तरह अकड़ के चार पांच तुनके मार कर सूचना दी कि हाँ उसको भी जूतियों से आयी हुई प्रीति के पैरों की सुगंध से मज़ा आया. लेकिन प्रीति की बात से और उसकी आँखों से यह साफ़ लग रहा था कि वो चुदने के लिए ज़्यादा इंतज़ार नहीं करना चाहती. तभी तो पाठ पढ़ने की बात शुरू की थी कमीनी ने. माँ की लौड़ी को अभी अच्छे से पढ़ाऊंगा कामदेवता का मस्त पाठ. जिससे बाकी के सब पाठ भूल जायगी.
मैंने उठकर रूम की बत्तियां बुझा दीं, केवल बेड की साइड में रखा हुआ टेबल लैंप जलने दिया. टेबल लैंप की रोशनी वासना को बहुत तीव्र करने वाली होती है इसलिए होटलों में बेड की दोनों तरफ टेबल लैंप रखे जाते हैं. यह मद्धम रोशनी वासना तो भड़काती ही है, आँखों को भी सुहाती है.
मैं फिर फर्श पर लगे गलीचे पर बैठ गया और प्रीति की पटियाला सलवार का कमरबंद खोल दिया. प्रीति अपनी कुहनियों के बल अधलेटी सी थी. आराम से उसने सलवार खोल लेने दीं. कुछ देर तक मैं स्तब्ध सा उसकी रेशम जैसी चिकनी मुलायम टांगों की सुंदरता आँखों में बसाता रहा, फिर प्रीति को हौले से उठाकर उसकी शमीज़ भी उतार डाली. प्रीति ने शर्म से आँखें बंद कर रखी थीं परन्तु ज़रा सा भी प्रतिरोध नहीं कर रही थी. उसके बदन में कंपकंपी छूट रही थी. अब वह सिर्फ ब्रा और चड्डी में थी.
वाह! वाह! वाह! माशाअल्लाह… क्या बदन था मेरी साली का. एकदम परफेक्ट! उसकी नाभि अधिकतर नाभियों के भांति भीतर घुसी हुई नहीं थी बल्कि बाहर उभरी हुई थी. ऐसा लगता था किसी नवजात शिशु की नन्ही सी लुल्ली हो.
मेरे मुंह से खुद ब खुद इस गीत की कुछ पंक्तियाँ गुनगुनाते हुए निकल गयीं. यह गाना लड़की की कामुक सौंदर्य का बखान करने के लिए सबसे उत्तम है. पाठकों को सलाह है कि यह पूरा गीत यू ट्यूब पर ज़रूर देखें अपनी पत्नी/ माशूका के साथ नंगे लेट कर और उसे कहें कि यह गाना मैं तेरे लिए गाना चाहता था लेकिन मेरी आवाज़ इतनी अच्छी नहीं है, इसलिए मोहम्मद रफ़ी की मस्त आवाज़ में यह तेरी नज़र करता हूँ. फिर देखिये क्या ज़बरदस्त, भेजा उड़ा देने वाला मज़ा वो आपकी लौंडिया चुदाई में देगी.
चेहरा है जैसे झील में हँसता हुआ कमल.
या ज़िन्दगी के साज़ पे छेड़ी हुई ग़ज़ल.
जान ए बहार तुम किसी शायर का ख्वाब हो
चौदहवीं का चाँद हो, या आफताब हो
जो भी हो तुम खुदा की कसम लाजवाब हो!
प्रीति मुनमुनाई- झूठे कहीं के. शायरी के साथ झूठ बोल रहे हैं.
किन्तु उसके चेहरे की मुस्कान बता रही थी कि वो ख़ुशी से फूली नहीं समां रही थी. ये बात तो वो पहले से ही जानती तो थी ही कि वह एक बहुत सुन्दर हसीना है.
मैं बोला- ना ना प्रीति, झूठ ज़रा भी नहीं. सच तो यह है कि मैंने तेरी पूरी जनम कुंडली जान ली है और इसी लिए वह गाना तेरे लिए एकदम सही बैठता है.
प्रीति ने आँखें खोल लीं, और उचक के बैठ गयी. ‘अच्छा जी… आप क्या ज्योतिषी भी हैं? अभी परखती हूँ आपको… बताइये क्या हैं मेरी जनम कुंडली?
मैंने हँसते हुए कहा- बात यह है प्रीति कि तुझे दूसरों की तरह विधाता ने नहीं गढ़ा… उसने जब तुझे बनाने का टाइम आया तो जनाब ने कामदेव को यह कार्य सौंप दिया… कामदेव ने अपनी पूरी कलाकारी तेरे में भर डाली… हुस्न और सेक्स से भरपूर एक कन्या का निर्माण किया जो बड़ी होकर प्रीति देवी कहलायी… यह है तेरी जनम की दास्तान.’
शर्म से प्रीति का गोरा बदन सुर्ख हो गया, वो भर्रायी सी आवाज़ में बोली- आप बड़े वो हैं… जाइए मैं नहीं आपसे बात करती.
कह के उसने पलटी खायी और दोनों बाँहों के बीच में सिर घुसा कर उलटी होकर लेट गई.
मेरी ऊपर की साँस ऊपर और नीचे की नीचे रह गई. उसकी मलाई जैसी पीठ, मस्त गोल गोल चूतड़ और सांचे में ढली हुई टाँगें. सुन्दर सी एड़ियां और गुलाबी मुलायम तलवे. ऐसा लगा कि दिल की धड़कन रुक गयी हो. लौड़ा उछल उछल के अलग से पागल किये दे रहा था. उसकी चड्डी के पीछे का भाग इकठ्ठा सा होकर दोनों नितम्बों के बीच आ गया था जिसके कारण दोनों चूतड़ पूरे के पूरे अच्छे से दिख रहे थे.
उस मोहक, मादक दृश्य को निहारते हुए मैंने जल्दी जल्दी अपने कपडे उतार दिए. लौड़ा हरामी पूरे ज़ोरों से तन्नाया हुआ था, काफी देर से पैंट की क़ैद में फंसकर अकड़ा हुआ था और काफी परेशान था. बिस्तर पर चढ़ कर मैंने धीमे से अपनी जीभ प्रीति की पीठ पर फिराई, और मेरा एक हाथ उसके चूतड़ों पर जाकर उनको सहलाने लगा. जब पिछली शाम यह चूतड़ फोटो सेशन में सहलाए थे तो यह नहीं मालूम था कि ये इतने नायाब निकलेंगे. सचमुच यह जवानी किसी शायर का ख्वाब का सत्य हो जाने समान थी.
मैं उसकी ब्रा का हुक खोल दिया, कि तभी दरवाजे की डोर बैल बजी…. प्रीति एकदम से उचक कर सीधी बैठ गयी और बोली कौन है दरवाजे पर….. ???? मैने कहा अरे टेंशन मत लो वो डिलीवरी बॉय होगा…. खाने का सामान जो ऑर्डर किया था वो पार्सल लेकर आया होगा…. जाओ दरवाजा खोल कर ले आओ।
धत…. पूरे पागल तो नही हो गये जीजा जी आप, ऐसे सिर्फ चड्डी में नंगी पुंगी दरवाजा खोलू…. ना, मै को शर्म आयेगी….!
मैने उसके चूचे दबाते हुए कहा अरे मेरी जान its जस्ट फन बहुत मजा आयेगा तुम दरवाजा खोलो और मै बाथरूम में से छिप कर मोबाइल से शूट करता हूँ और उस डिलीवरी बॉय की जो हालत होगी जब तुम देखोगी तो मुझे शाबाशी दोगी….. अगर तेरी बहन कुसुम, मेरी बीवी होती तो वो तो नंगी ही चली जाती…. और उसे देख कर सामने वाले का लंड पेंट के अंदर ही पानी छोड़ देता…… ये व्योरिसम् है इसका अलग ही मजा है, और हाँ जितना ज्यादा हो सके उतना ज्यादा वक्त लगाना, इधर उधर की बातें बना कर…. मैने अपनी साली को आँख मारते हुए कहा… प्यारी समझ गयी।
” ” जूली, प्रीति और कुसुम तीनों सगी बहन है, प्रीति और कुसुम हम उम्र है और उन का चेहरा, मोहरा, नैन नकश् शारीरिक रंग रूप, बनावट, चाल, ढाल, अदाये लगभग एक दूसरे से हु ब हु मिलता है, जबकि जूली और मेरी बेटी रिंकी इन दोनों के सिर्फ नैन नकश् काफी हद तक समान है, शायद यही वजह थी कि मुझे इस वक्त अपनी शादी शुदा साली प्रीति में अपनी पत्नी कुसुम नजर आ रही थी और मेरे अंदर की ककोल्ड पति वाली फैंटेसी बाहर निकल रही थी “”
मेरी बात सुनकर प्रीति में थोड़ी थोड़ी हिम्मत आने लगी पर संकोच कर रही थी। मैने उसे तोलिया देते हुए कहा एक काम कर ये तोलिया लपेट कर दरवाजा खोल दो और मौका मिलते ही धीरे धीरे खिसका देना….. मेरा ये सुझाव प्रीति को पसंद आया। और फिर तभी दोबारा से डोर बैल बजी।
Coming… Wait ! “.
दरवाजे का बेल बजा तो प्रीति ने तुरंत मुड़कर बाथरूम कि ओर देखा. बाथरूम का दरवाजा थोड़ा सा खुला हुआ था. प्रीति ने जो तौलिया अपने बदन पर लपेट रखा था, उसकी गाँठ उसने अपनी चूचियों पर थोड़ी सी ढीली कर दी, फिर से एक दफा बाथरूम के दरवाजे कि ओर देखा, तौलिये कि गाँठ एक बार और चेक कि, और फिर दरवाजे कि ओर चल पड़ी.

बेल फिर एक बार बजा ही था कि प्रीति ने दरवाजा खोल दिया.
” मैडम आपका आर्डर… “. दरवाजे के बाहर खड़े डिलीवरी बॉय ने पार्सल आगे बढ़ाते हुये कहा.
” एक्स्ट्रा कैरीबैग नहीं था क्या भैया ??? कैसे पैकिंग करते हो आपलोग… ये देखो, पूरा ग्रेवी गिर गया है ! “. प्रीति ने पार्सल डिलीवरी बॉय के हाथों से लेते हुये कहा.

” सॉरी मैडम जी… एक साथ कई सारे कस्टमर्स के पैकेट थें ना तो वो नीचे दब कर हो गया होगा ! “. डिलीवरी बॉय किसी भी प्रकार के इमोशन के बगैर रोबोट कि तरह बोला.
” किस कस्टमर का पैकेट था, क्या था, कितना था, उससे मुझे कोई मतलब नहीं … “. दाएँ तरफ से बाए तरफ अपने बालों को अपने दूसरे हाथ से धीरे धीरे झाड़कर लहराते हुये प्रीति गुस्से से, मगर नम्र होकर बोली. ” मुझे सिर्फ अपने पार्सल से मतलब होगा ना भैया ! ऐसे कोई पार्सल डिलीवर करता है क्या ? “
” सॉरी मैडम जी… “. डिलीवरी बॉय ने टालने कि खातिर बेमन से कहा.
” ऐसे कैसे चलेगा भैया… आप अभी सॉरी बोल रहे हो ! आपके रेस्टोरेंट से ही ऐसा हर बार होता है… “.
ये तो प्राय: हर ग्राहक का रोज़ का खिचखिच था उस डिलीवरी बॉय के लिए. किसी तरह फिलहाल अभी यहाँ से अपना पीछा छुड़ाने के लिए वो ज़रूर फिर से अपने बने बनाये वाक्यों में से कुछ बोलता, उसने अपना मुँह खोला भी, लेकिन अचानक से रुक गया.
ढीले गाँठ कि वजह से प्रीति के शरीर से बंधा तौलिया उसके सीने के उभारों से अपने आप खुल गया, और सरसराकर सीधे नीचे ज़मीन पर उसके पैरों पर आ गिरा. प्रीति दरवाजे पर अब नंगी खड़ी थी !!!

लगभग नंगी – पैंटी तो उसने पहन रखी थी, लेकिन ब्रा नदारद थी !
” छोड़ो भैया… आपलोग का तो हर बार का यही है ! “. प्रीति ने अपने बालों कि लट को अपने कान के पीछे खोसते हुये ऐसे कहा जैसे कि कुछ हुआ ही ना हो. ” मैं पैसे लेकर आती हूँ… “.
उसने एक बार डिलीवरी बॉय को चोर नज़रों से देखा, और फिर अपना गिरा हुआ तौलिया बिना उठाये या फिर खुद का नंगा बदन ढंकने कि कोई कोशिश तक किये बिना ही कैरीबैग हाथ में झुलाते हुये वापस कमरे में आ गई. उसने पार्सल टेबल पर रखा, बाथरूम कि ओर फिर से देखा, कुछ सोचा, और फिर से दरवाजे पर जाकर डिलीवरी बॉय से पूछा.
” अच्छा आप कार्ड पर पेमेंट लेते हो क्या ? “.
” अभी कैसे मैडम जी… मशीन लेकर हम लोग तो नहीं आते ना… कैश… “. डिलीवरी बॉय बोला.
” अरे हाँ भैया… True ! कितना हुआ है ? “. प्रीति ने उसे बीच में ही टोका.
” कैरीबैग में बिल है मैडम जी… “.
” ओह अच्छा… “.
ओह अच्छा… “.
डिलीवरी बॉय को बेवकूफ़ कि तरह वहीँ दरवाजे पर खड़ा छोड़ प्रीति फिर से कमरे में आई, कैरीबैग से बिल कि पर्ची निकाल कर चेक किया, बिस्तर पर पड़े तकिये के नीचे से मेरे पर्स में से कुछ नोट निकालें, बाथरूम कि ओर देखा, हल्की सी मुस्कुराई, और वापस से दरवाजे पर जाकर डिलीवरी बॉय को पैसे दे दियें.
” थैंक यू मैडम जी… “. कहते हुये डिलीवरी बॉय चलता बना.
प्रीति ने दरवाज़ा बंद कर दिया, अपना तौलिया उठाया, कमरे में वापस आई, एक लंबी गहरी साँस ली, बेड पर धम्म से बैठते हुये तौलिया वहीँ पर फेंक दिया, और खिलखिलाकर हँस पड़ी.
बाथरूम का थोड़ा सा खुला हुआ दरवाज़ा अंदर से अब पूरा खुल गया और बाथरूम से मै नंग धन्ग अपने हाथ में मोबाइल लिए हँसते हँसते बाहर निकला.

” Too good साली साहिबा… “.
मुझ को आते देख प्रीति ने अपना तौलिया उठाकर मेरे ऊपर फेंक मारा. अपने हाथ से तौलिये को वहीँ ज़मीन पर झटक कर गिराते हुये मै बेड तक आया और प्रीति को गले से लगाकर उसे चूमते हुये बोला.
” लव यू यार ! “.
झूठा गुस्से वाला मुँह बनाते हुये प्रीति ने मुझ को धकेल कर खुद से अलग कर दिया और शर्माते हुये मुस्कुराकर बोली.
” धत्त… कितना Embarrassing था !!! “.
मैने जैसे प्रीति कि ये बात सुनी ही नहीं.
मैने वहीँ बिस्तर पर उसके बगल में बैठते हुये उसकी कमर से कसी हुई उसकी पैंटी के इलास्टिक को खींचते हुये पूछा.
” और ये पैंटी क्यूँ नहीं उतारकर गई थी ??? “.
” पैंटी खोलने कि बात नहीं हुई थी जीजू… कुछ भी ना ??? “.
” What do you mean पैंटी खोलने कि बात नहीं हुई थी ??? “. मैने चौंकने वाला मुँह बनाते हुये कहा. ” Full naked का क्या मस्त मजा आता ??? “.
” अच्छा जीजू ??? तो किसी एरे गैरे मर्द को अपनी चूत भी दिखा दूँ ??? “. प्रीति ने पहले गुस्से से कहा, फिर अपनी बात पर खुद ही हँस पड़ी, और बोली. ” वो भी एक डिलीवरी बॉय को ??? “.
” Come on साली साहिबा … चूत ही तो… बॉडी का एक पार्ट ! It’s not a big deal बेबी ! चूत… Pussy… चूत… Pussy… तुम लड़कियां कुछ ज़्यादा नहीं करती ??? “.
” कहा ना No !!! अपनी फिलोज़फी अपने पास ही रखो… ओके ! मेरी चूत बस मेरा हस्बैंड और आज मेरा प्यारा जीजा देखेगा ! “.
प्रीति कि बात पर मै हँस पड़ा, फिर उसकी बांह चूमते हुये बोला.
” देखो… एक पैंटी कि वजह से पूरी वीडियो ख़राब हो गई !!! “.
वीडियो का नाम सुनते ही प्रीति कि सारी नाराज़गी जाती रही और वो खिसक कर मुझ से सट कर बैठ गई, और चहकते हुये उतावली होकर बोली.
” अरे हाँ… जीजू दिखाओ वीडियो ! कैसा हुआ ? “.
ख़ुशी ख़ुशी मैने अपने मोबइल पर एक वीडियो चला दिया, और बहुत ही उत्साहित होकर प्रीति को दिखाने लगा.
वीडियो भले ही बाथरूम के थोड़े से खुले हुये दरवाजे कि फांक से चोरी छुपे बनाया गया था, पर उसमें अभी अभी कमरे में हुई सारी गतिविधि बिल्कुल साफ साफ कैद हो गई थी, यहाँ तक कि प्रीति और डिलीवरी बॉय के बीच हुई छोटी सी अनबन तक भी.
हम दोनों बड़े ही चाव से पास पास बैठे वो वीडियो देखते देखते उसके बारे में बातें करने लगें.
” मैं मोटी लग रही हूँ ना ??? “.
” नही साली साहिबा… “.
” हाँ… मेरी Thighs देखो ना ! और कमर ??? कैसे बोल रहे हो नही साली साहिबा ? “.
” हॉट लग रही हो साली साहिबा … मोटी नहीं !… हॉट !! हॉट समझती हो ??? “.
” बेचारे का मुँह तो देखो जब मेरा तौलिया गिरा… “.
” कैसा बेचारा ??? एक चीज़ देखोगी ? ये देखो… पहले जब तुम्हारा टॉवल खुला तो उसने तुम्हें ठीक से नहीं देखा… पर जब तुम वापस रूम में आने के लिए मुड़ रही हो तो वो तुम्हें पीछे से घूर रहा है… See !!! “.
” अरे हाँ… वाकई तो ! “.
Look… देख रही हो इसकी नज़र… लो Pause कर देता हूँ… अब देखो… तुम्हारा ये बेचारा बंदा तुम्हारी गांड़ देख रहा है… देखो देखो !!! “.
” कमीना उतना शरीफ नहीं है ! जब सामने आ रही हूँ तो कैसे आँखें नीचे कर ले रहा है ! God !!! कैसे कैसे ठरकी लोग होते हैं ना ??? “.
” चूतिया है… इतनी सेक्सी औरत को सामने से एक बार भी ठीक से नहीं देखा…लानत है यार ! पीछे से देखकर क्या करेगा इडियट ? “.
” काम चलाने भर का नज़ारा तो देख ही लिया है हरामी ने…समझ नहीं रहे हो ? ये वाला फिर से दिखाना… “.
” अभी रेस्टोरेंट वापस पहुँचते ही बाथरूम में जाकर हिलायेगा… नहीं तो रात को घर में तुम्हारे नाम पर पक्का मूठ मारेगा साला !!! “.
मेरी साली और मै ठहाके मारकर हँसने लगें………!
जारी है…… ![]()

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