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बस इतना बोलकर कुसुम वँहा से सीधे ही सामने से सोलह श्रृंगार किये हुए आती हुयी  मेरी छोटी साली जूली के पास में चली गई।

दो तीन लड़कियो के साथ साथ धीरे धीरे से किसी नागिन की तरह कमर मटकाती हुयी हाल में एंट्री लेती हुयी अपनी छोटी साली जूली से मेरी नजर मिली तो बेचारी खुद शरमा गई… .. क्या कामुक् पटाखा दिख रही थी।

बालो के बीच सितारो से जड़ा माँग टीका,   गालो को छेड़ती सहलाती लटे, खूब घनी कतर सी तिरछी भौहे, सपनिलि बड़ी आँखो मे हल्की सी काजल की रेखा, पलको पे हल्का सा मास्कारा, प्यारी सी आइ लॅशस, हल्के गुलाबी रूज से हाइ चीक बोन्स, उसकी लंबी सुतवा नाक मे एक छोटी सी नथ, जिसमे एक मोटी और दो छोटे छोटे घुंघरू,, उसके नैचरल गुलाबी होंठो पे हल्की सी वेट लुक वाली गुलाबी लिपस्टिक जो उसके पंखुड़ी जैसे होंठो को और रसीला बना रही थी. गहरी चिबुक के ठीक बीच मे जो ब्यूटी स्पॉट, तिल था उसने उसे और गाढ़ा कर दिया था. और जब मेरी निगाह और नीचे गयी तो उसकी स्लेंडरर लंबी गर्दन के नीचे, उसकी चोली, वो तो कुछ ज़्यादा ही लो कट, और सिर्फ़ एक स्ट्रिंग से पीठ पे बँधी. लेकिन थी बड़ी सुंदर, हल्की, गुलाबी प्याजी, और उस पर खूब खूबसूरत चाँदी का भारी काम, एक दम उभारो से चिपकी, और उनको और उभारती, और उन्ही के शेप के साथ बीच मे सन्करि. बस लग रहा था, दो अध खिले, कमल के फूल हो और उसमे उसके उरोज. मेकप वालीयो ने जूली के क्लीवेज पे भी पूरा मेकप किया था जिससे उसका रंग उसके बाकी मेकप की तरह ही हो जाय और उसे थोड़ा सा और डार्क कर के जिससे क्लीवेज की गहराई और खुल के और उसके कारण उरोजो के उभार भी. उसके अंदर हल्की सी बहुत पतली लेसी पुश अप पिंक ब्रा थी जो उभारो को और उभार रही थी……….हाथो मे पूरी कुहनी तक भर भर के गुलाबी, लाल चूड़िया, हाथी दाँत का चूड़ा और जडाउ कंगन, बाहों मे बाजू बंद और हाथ मे हथ फूल, और हाथो मे लगी मेहंदी को उन्हे फ्रेश मेहंदी लगा के रेफ्रेश कर दिया था जिससे मेहदी की हल्की सी महक भी आ रही थी. लहंगा भी 24 कली का गुलाबी, चाँदी का भारी काम किया हुआ, और इतने नीचा कि बस किसी तरह उसके कुल्हो के सहारे टिका था. और पतली कमर मे सोने के घुंघरू जड़े पतली सी रूपहली करधन.

पालर वालियों ने उसकी गहरी नाभि पे ना सिर्फ़ उन्होने हल्का सा मेकप किया था बल्कि मेहदी से वहाँ भी डिज़ाइन बना दी थी. पैरो मे खूब घुंघरू लगी चाँदी की चौड़ी सी पायल और बिछुए. ब्यूटी पारलर वालीयो ने गुलाबी बड़ी सी चुनर इस तरह ऊढा दिया कि ना सिर्फ़ देह अच्छी तरह से ढँक गयी बल्कि घूँघट भी थोड़ा सा क्लीवेज और चोली का उभार अभी भी दिख रहा था. उन्होने चुनरी को लहँगे और चोली मे ठीक से सेट भी कर दिया था.. .. ..

हुआ यह कि खाना से पहले सबने कहा कि एक ग्रुप फोटो हो जाए. सब लोग ग्रुप फोटो के लिए फोटोग्राफर की सुझाई हुई जगह पर इकट्ठे होने लगे. बच्चे लोग बैठ गए. उनके पीछे बुज़ुर्ग लोग कुर्सियों पर बिठा दिए गए. उनके पीछे बचे हुए लोग खड़े हो गए. तीनों बहने (कुसुम, जूली,प्रीति) साथ साथ खड़ी थीं लेकिन मैं अपनी सालियों जूली और प्रीति दोनों के बीच घुस गया. मेरा साढू भी मेरी देखा देखी कुसुम की दूसरी तरफ खड़ा हो गया. फोटोग्राफर ने सबको दाएं बाएं सरका कर एडजस्ट किया ताकि सबकी फोटो आ जाए.

जब तक वो यह सेटिंग जमा रहा था, मैंने एक हाथ प्रीति के नितम्बों पर फेरना शुरू किया और दूसरे हाथ से जूली के नितम्ब सहलाने लगा. प्रीति ने ज़ोर से मेरी बांह पर नोचा. मैंने और ज़ोर से उसके चूतड़ दबाये. प्रीति ने दो तीन बार नोच कर हथियार डाल दिए. वह जानती थी कि मैं रुकने वाला नहीं तो मज़े से चूतड़ दबवाने का मज़ा क्यों न लिया जाए. वैसे भी उसको मेरी छेड़ छाड़ में, चूतड़ या चुची या जांघें सहलवाने में बड़ा आनन्द आ रहा था, जबकि सब लड़कियों की तरह ऊपर से नक़ली गुस्सा दिखा रही थी.

जूली ने कुछ नहीं कहा, न ही मेरा हाथ हटाने की कोशिश की, वो चुपचाप नितम्ब पर हाथ फिरवाती रही. ह्म्म ह्म्म….. मैं उसके मुलायम नितम्ब सहला रहा था और उसके शरीर में बार बार एक तेज़ झुरझुरी आ रही थी. मैं समझ गया था कि शायद उसकी चूत बुरी तरह से सुलगने लगी है. परन्तु चुदाई के लिए तो अभी प्रबंध करना बाकी था. मैं दिमाग दौड़ा रहा था कि क्या किया जाए.

खैर फोटो सेशन पूरा हुआ और सब लोग डिनर के लिए चल दिए. डिनर बाहर लॉन में लगाया गया था. वहां जाते हुए प्रीति ने फिर से मेरी बांह पर चुटकी काट कर फुसफुसाते हुए कहा- ये क्या बदमाशी कर रहे थे तुम जीजू … हैं?  आराम से फोटो नहीं खिंचवा सकते थे……?

मैंने कहा- साली साहिबा, तेरे साथ तो हर वक़्त ऐसी बदमाशी करने का मन करता रहता है, तो बोल क्या करूँ?

“चुप रह कमीने जीजू… लोग देख लेते तो क्या सोचते… कुछ तो ध्यान रखा कर कि कहाँ है, किसके सामने है!”

साली के मुह से प्यार से कमीना सुन

मैंने कहा- हाय मेरी …. प्रीति जिंटा… कौन देखता… या तो शादीशुदा मर्द देखते तो उनको भी अकल आ जाती कि अपनी सालियों को कैसे प्यार करना चाहिए…???अगर शादीशुदा लड़कियां देखती तो वो अपने पतियों को डांटती कि कमीने ऐसे अपनी सालियों को प्यार किया जाता है…??? और अगर कुंवारे लड़के या लड़कियां देख लेती तो उनको पता चल जाता कि कैसे इश्क़ लड़ाना चाहिए… इसमें प्रॉब्लम क्या है सबके फायदे का दृश्य होता न……… ह्म्म ह्म्म…….!!!

प्रीति ने नक़ली गुस्से से कहा- और बुड्ढे लोग देखते तो…..????

मैंने हँसते हुए कहा- बहनचोद अगर बुड्ढे लोग देखते तो साले अफ़सोस करते कि क्यों ज़िन्दगी में अच्छे से सालियों से प्यार नहीं किया… कसमें खाते कि अगले जनम में सालियों तो छोड़ो सालों से भी बेहिसाब प्यार करेंगे. ससुराल में किसी की भी जवानी बर्बाद नहीं होने देंगे…… ह्म्म ह्म्म

प्रीति ने आँखें तरेर के कहा- हरामी ठरकी जीजा, तुझ से बातों में आज तक कोई जीता है जो मैं अपना दिमाग ख़राब करूँ… मैं जा रही हूँ कुसुम दीदी से बातें करने… तू चुपचाप अच्छा बच्चे की तरह यहाँ बैठ… मैं थोड़ी देर में आती हूँ फिर खाना साथ खाएंगे… और हाँ फिर कोई बदमाशी नहीं करियो…समझ गया न?

मैंने हस्ते हुए कहा- जी हाँ मेरी साली साहिबा, अच्छा बच्चा बन के बैठा रहूंगा आपके आने तक. और कोई हुकुम डॉक्टरनी जी का?

लॉन में पहुँच कर प्रीति अपनी कुसुम दीदी से बातचीत में लग गयी. इधर जूली मेरे पास आयी और बोली- वहां क्या गड़बड़ कर रहे थे आप… कितने सारे लोग थे… देख लेते तो कितनी बदनामी होती न!

मैं बोला- मैंने कुछ नहीं किया… आपके दूसरे डॉक्टर जीजा ने किया होगा…..??

जूली की हंसी छूट गई, बोली- वो तो अकेले में भी ऐसा नहीं करते तो सबके सामने क्या करेंगे… दूसरे आप यह बताइये कि अगर अपने कुछ नहीं किया तो आपको क्या पता कि मैं किस गड़बड़ की बात कर रही हूँ….??

मैंने कहा- जूली जी, कान पकड़ता हूँ कि आगे से ऐसी गड़बड़ किसी के सामने नहीं करूँगा.

जूली – अच्छा जी… मतलब यह कि गड़बड़ करनी ज़रूर है… यही हुआ न आपकी बात का मतलब?

मैं- अच्छा अब खाना खा लें या गड़बड़ पुराण ही चलता रहेगा… जूली जी आपसे बहुत सी बातें करनी हैं… यहाँ इतनी भीड़ भाड़ में तो हो नहीं पायँगी… कल दिन में तो कुछ काम है नहीं… क्यों न किसी होटल में मिल लें और तसल्ली से बातें करें.

जूली ने इठलाते हुए कहा- जीजा जी, कल की कल देखी जायगी.

इतना बोल के वह भी प्रीति की तरह इधर उधर सरक ली किसी से गप्पें चोदने…. बहनचोद इन लड़कियों को गपास्टिक चोदने में कितना आनन्द आता है. घंटों बिना थके गप्पें लगा सकती हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि उसने यह नहीं कहा कि होटल में क्यों जाना है… यहीं बात क्यों नहीं हो सकती… ऐसी क्या बातें हैं जिसके लिए होटल में जाना ज़रूरी है… वग़ैरा, वग़ैरा.

मेरा पहला क़दम बिल्कुल सही था, तीर निशाने पर लगा था. वो तैयार थी होटल में चलने के लिए. तैयार न होती तो यह न कहती कि कल की कल देखेंगे बल्कि साफ़ साफ़ मना कर देती…. .. अब मुझे होटल का इंतज़ाम करना था. सुबह सबसे पहले यही करने का फैसला कर लिया. मैंने तीन चार घंटों से अकड़े लौड़े की वजह से टट्टों में होते हुए दर्द से विचलित होकर अभी शादी ब्याह में संस्कारी औरतों का मुजरा  (लेडी डांस) का कार्यक्रम में मजे लेकर काम चलाने का फैसला किया….. ।

खैर … दस पंद्रह मिनिट बाद रिंकी भी दादी के साथ आ जाती है। मेरी सास उनका वेलकम करती है । सब बात करते है। हालचाल पूछते है । डिटेल्स काफी है पर अभी हम सिर्फ अपने ठरकी जीजा और सालियों पर ही फोकस करेंगे की इतने लोगो के बीच उनकी लव स्टोरी कैसे आगे बढ़ती है शादी वाले माहौल में।

किस्मत से यह मौका जल्दी ही मिल गया. हुआ यह कि नाचने गाने का हॉल मे इन्तेजाम था, म्यूज़िक सिस्टम, गाने के कॅसेट सब कुछ. थीम थी 70-80 के दशक का बॉलीवुड, मेरी तैया सास, जानी मेरा नाम की हेमा की तरह, आई थी, और थी भी वो खूब गोरी, मस्त बड़े बड़े चूचे, भारी भारी नितंब और मेरी बुआ सास मुमताज  बन के, रेशमी सलवार जालीदार कुर्ता, जिससे उनकी ब्लैक व्हाइट जवानी रंगीन होकर छितकी पड़ रही थी. और तो और मेरी सगी सास ख़ास तौर से, एक खूब टाइट टॉप और हिप हगिंग जिस मे ज़ीनत अमान की तरह दम मारो दम गर्ल बन के…..

सबसे पहले मेरी तैया सास ने शुरू किया “ओ बाबुल प्यारे”, और ” मेरी सास ने सावन भादों का ‘कान मे झुमका, चाल मे ठुमका, बदन मे चोटी लटके वाले गाने पे खूब चूतरो को हिलाया। सब लोग खूब झूम के नाचे लेकिन सालियाँ बोली अब पुराने गाने नही होंगे सिर्फ़ नये और रिमिक्स ..और उस के बाद तो एक से एक, कुसुम ने तो मेरी बेरी के बेर मत तोडो, काँटा लगा ऐसे अपने उभारो को उभार कर डांस किया कि आज की रीमिक्स गर्ल्स भी मात हो जाए.

और फिर मेरी प्यारी बेटी रिंकी कैसे बचती, उसे भी सभी ने मिल के खींच लिया और फिर रिंकी ने भी, मेरे हाथों मे नई नई चूड़िया है गाने पे नाचना शुरू कर दिया, और जब उसने ” मेरे दर्जी से आज मेरी जंग हो गयी, मेने चोली सिलवाई थी, तंग हो गई पे “” अपने चोली मे कसे उभारो को अपनी मम्मी कुसुम की तरह मस्ती से उभारा तो चारों ओर मस्ती छा गई. उसकी जूली मौसी की एक सहेली बोली, उसे पकड़ के, “उसके उभारो को दबा के कहा, “अर्रे बहुत उभर रहे है , लगता है तूने दब्वाना शुरू कर दिया है, इसीलिए इन जोबनों पे इतने कस के उभर आ रहे है.” एकदम खुल के मौज मस्ती छाइ थी, क्योंकि सिर्फ़ ज्यादतर औरते और लड़किया ही नाच रही थी.

 तभी प्रीति और जूली ने कान मे कुछ कहा, और वो दोनो मुस्कराते हुए दबे पाँव बढ़ गई. नाचते हुए मुझ को चॅलेंज किया, थोड़ी देर तक तो मैं शरमाता रहा पर सालियों के उकसाने पे मै भी मैदान मे आ गया. फिर तो सालियों को पकड़ के जो नाचा. उसके बाद तो मुझ ठरकी जीजा की चाँदी हो गयी. मैने तो जोड़े बना के खूब खुल के जूली के साथ ” तेरी पतली कमरिया, जीजा की तिरछी नजरिया…. बलम करे नोकरिया… जीजा पकड़े कमरिया ” फिर प्रीति भी अपने शबाब पर आ गयी “” आलम बलाम साजना, मै कुछ भी कर जाऊंगी… बाजरे के खेत में तुझको ले जाऊंगी “” गाने पे सालियों को खूब नचाया

और साथ साथ कुसुम को भी “रफ़्ता रफ़्ता आँख मेरी लड़ी है” साथ मे रिंकी ने भी मुझ को ” मार गयी मुझे तेरी जुदाई, डस गयी ये तन्हाई. .. रात जो तेरी याद आई तो नींद नही आई ” के साथ और सिर्फ़ इतना ही नही, थोड़ी ही देर मे शादी के गाने, सीधे गालियो पे पहुँच गये और वो भी पूरी तरह नोन-वेज और सिर्फ़ गालियाँ ही नही नाच भी……. मेरी सास की नन्द मेरी बुआ सास ने साड़ी उठा उठा कर नाच गाना शुरू किया।

” भौजी पे पीपल वालों भूत… भौजी पे पीपल वालों भूत… दिन में मांगे सेव, संतरा रात में मांगे चूत…… “” और जो संगीत समारोह शाम को 8-9 बजे तक ख़तम होने वाली थी वो 10 बजे के बाद ख़तम हुई……..

मेरी सास ने मेरी मम्मी से कहा आप लोग रात मे होटल में रुक जाओ. मम्मी बोली, अरुण के पापा घर पे परेशान होंगे सास ने

मेरे साले रिंकू को मेरी मम्मी को घर छोड़ने साथ भेज दिया…… और हमें होटल के कमरो में आराम करने, सोने के लिए कहने लगी….!

मै अपनी बीवी और बेटी के साथ अपने कमरे की तरफ चल दिया मेरे दिमाग में अपनी सालियों के साथ अगले दिन क्या और कैसे करना प्लानिग के घोड़े दौड़ रहे थे…….!

जारी…….!

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