” स्त्री शृंगार “”
मैने रिंकी के सीने पर हाथ रखे हुए ही बोला, तुम्हारा दिल तो बड़ा मुलायम है रिंकी…..???
तभी पीछे से कुसुम की तेज गुस्से भरी आवाज आई, प्रोफेसर साहब हाथ हटाइये वहा से वो मुलायम चीज दिल नही है उसका…. … ….!!!!!!!
मै… मै… मै तो बस…मै दरवाजे पर खड़ी कुसुम की आवाज सुनकर हकलाते हुए बोला..!
मै तो बस क्या… ??? तुम्हे जरा सी भी लाज शर्म तो रही नही.. सब बेंच खाई ?? कुसुम कमर में साड़ी का पल्ला घूसते हुए बोली।

कुसुम के ये तेवर देखकर मेरी गांड फट गई, और मै कमरे से दुम दबा कर भाग खड़ा हुआ।
मेरे जाने के बाद कुसुम रिंकी से : और तुम महारानी क्या हो रहा था ये…??
मेरे पेट में दर्द हो रहा था, वो ही पापा को बता रही थी…. रिंकी सेहमते हुए बोली।
“मैने गिनती सिखाई थी जिसको, वो पहाड़ाँ पढ़ा रही है मुझे ” कुसुम रिंकी को ताना देते हुए बोली।
रिंकी : मम्मी कसम से मेरे पेडू में दर्द है,
कुसुम : महीना (mc) से हो……!
रिंकी : हा, दूसरा दिन है।
कुसुम : कितनी बार बोला है हेमपुष्पा की शीशी रखी हैं उसे पी लिया कर….. लेकिन मेरी हर बात तुझे बुरी लगती है। ठीक है फिर आराम कर , ब्यूटी पालर जाना था, मै इनके साथ चली जाती हूँ। लेकिन तब तक तू तैयार हो जाना, संगीत में साथ चलना।
कुसुम रिंकी को ममतामयी डाँट के साथ समझाते हुए वापस बेडरूम में आकर कप बोर्ड (कपाट) खोलते हुए मुझसे बोली…. “सुनिये’
कान में जब ये शब्द पड़े तो ऐसा लगा जैसे मिश्री सी घुल गयी हो….. मै बेड पर उकडू बैठक में बैठा हुआ सोच में था कि अरुण बेटा आज तो कुसुम तेरी गांड फाड़ेगी… लेकिन हुआ सोच के उलट… इसके शायद दो कारण हो सकते थे एक या तो कुसुम ने मुझे रिंकी के साथ जिस तरह देखा तो उसे सिर्फ मेरी बाप की बेटी के लिए ” बापता ” लगी हो, दूसरा उसके पास मेरी गांड फाड़ने के लिए कोई ठोस सबूत ना हो। खैर इन सब बातों को भूल कर मै भी उससे बड़े प्यार से बोला
“सुनाइये जी”
आज शाम को महिला संगीत में जाना है…जरा मेरे साथ ब्यूटी पार्लर तक चलिए…! कुसुम बेचारी बहुत बहुत प्यार से बोली।
‘यार! एक बात बताओ यह किस पुराण या संविधान में लिखा है कि कोई महिला किसी शादी-विवाह में बिना ब्यूटी पार्लर में हाथ फिराए मुंह दिखाने लायक नहीं होती है?’ ब्यूटी पालर का नाम सुनते ही मेरे मुह से अनायास से ये बात निकल गयी।
हे प्रभू… इस आदमी से बात करना ही बेकार है, हमेशा सीधी बात का उल्टा जबाब देता है…..। इस बार कुसुम गुस्से से बोली।
मै : हस्ते हुए ऐसा क्या बुरा बोल दिया मैने जो तुम्हे प्रभु याद आ गये…???
वैसे एक बात बताओ ब्यूटी पालर के नाम तुम पतियों को इतनी चिढ़ क्यों होती हैं ….?? कुसुम मेरी ओर देखती हुयी बोली।
क्योकि हम पतियों को डर लगता है कि कहीं हमारी पत्नी कटरीना में कन्वर्ट होकर हमारी राजा मुराद वाली पर्सनाल्टी को ठुकरा कर सलमान की मुराद न जगा ले, क्यों सही कहा ना। मै मजाकिया लहजे में बोला…. ह्म्म्म ह्म्म्म
अरुण कुमार जी एक बात अच्छे से जान लीजिये आजकल के युग में ब्यूटी पार्लर और आईसीयू में आक्सीजन दोनों एक समान ही हो लिए हैं। दोनों के बिना जीना लगभग असम्भव सा है।’ कुसुम मेरी बात का जबाब देते हुए बोली।
हमारी बहस जारी थी, मैने कहा मत करो बहस मुझसे हार जाओगी, हुस्न इतनी बड़ी दलील नहीं………. उसने हाथ एकदम बालों के पीछे किया रबर बैंड निकाला, सर नीचे को किया, और एक झटके में उठा दिया…. उसकी जुल्फे बिखर गयी, उसने मेरी आँखों में झांक कर पूछा ” हा तो तुम कुछ कह रहे थे….????
मुझ जैसे घनघोर प्रकृतिवादी के लिए किसी अप्राकृतिक कार्य के लिए इतनी संजीदा धमकी असहनीय थी। स्त्री से ना कोई मोहब्बत में जीत सकता है, ना नफरत मे, ना जिद में, और ना ही बहस में…. इसलिए मैंने कुसुम की बात का जबाब ना देकर भी उसे एक जबाब दे दिया। और कमरे से निकल कर बाहर अपनी बाइक निकालने लगा।
पांच मिनिट बाद कुसुम भी बाहर आ गयी और हम पास के सीक्रेट ब्यूटी पार्लर में पहुँच गए। जैसे ही मैंने पार्लर का दरवाज़ा खोला, सब औरतो की निगाह एक साथ मेरी तरफ उठी. मुझे लगा जैसे कोई ज़रूरी मीटिंग चल रही थी और मैंने उन लोगों को डिस्टर्ब कर दिया.

थोड़ा सहजता का भाव चेहरे पर लाने की कोशिश कर ही रहा था कि पार्लर वाली भाभी बोल पड़ी, आओ कुसुम, आओ यहाँ इस कुर्सी पर बैठ जाओ। और पार्लर वाली भाभी मुझसे बोली बस दस मिनट इंतज़ार करना पड़ेगा, तब तक भाई साहब तुम यह मैगज़ीन देखो.
कॉर्नर टेबल पर पड़ी मैगज़ीन उठाकर पास ही लगे सोफे पर मैं बैठ गया. अब बारी मेरी थी, जैसे बोर्ड मीटिंग में बॉस का इंतज़ार हो रहा हो और बॉस आते ही इशारे से कहे, यस…. प्रोसीड, वैसा ही कुछ भाव मेरे चहरे पर आया. मैंने उन सबकी तरफ एक बार देखा तो वे सब वापस अपनी बातों में लग गईं.
((इस देश में मध्यम वर्गीय पति के लिए पत्नी हमेशा ही घोषित रूप में चश्मे बद्दूर होती है। इस सफेद झूठ को बोलने के पीछे संभवत: दो कारण होते हैं या तो पति के पास सच बोलने का साहस नहीं होता है या फिर सच बोलने के बाद उसे पत्नी की ओवर हालिंग करवाने के लिए ब्यूटी पार्लर ले जाने का बजट नहीं होता है। दोनों ही परिस्थितियों में पति रुपी निरीह प्राणी के पास संतोष रुपी घुट्टी पीने के अलावा कोई और विकल्प नहीं होता है।))
दो हमउम्र औरतें सोफे पर मेरे ही बगल में बैठी थीं उनकी बातें तो मैं सुन पा रहा था लेकिन नज़रें मैगज़ीन में गड़ाए होने के कारण उनके चेहरों पर आ रहे भावों को नहीं देख पा रहा था.
– नहीं यार, अब इस उम्र में दुबला होकर करना भी क्या है? जब दुबली पतली थी तब भी पतिदेव कौन सा आगे पीछे मंडराते ही रहते थे. वो तो शाम को उनके बॉस की पार्टी में जाना है तो कह रहे थे, थोडा थोबड़ा ही ठीक ठाक करवा लो, दोस्तों की बीवियां बड़े घरों से हैं, पढ़ी लिखी हैं तो उन्हें उठने बैठने का सलीका है.
– सुना है मिसेस अग्रवाल भी आने वाली है उस पार्टी में?
– कौन, वो परकटी? जो सब मरदों से हाथ मिलकर हाय हल्लो करती है?
– हाँ, वही.
– पता नहीं आजकल की औरतों को क्या हो गया है, उनको लगने लगा है, मर्दों से हाथ मिलाकर मिलने से उनके बराबरी की हो गई हैं.
– पर सुना है बहुत बड़ी समाज सेविका है?
– घर में झांकने जाओगी तो पता चलेगा, घर को भी ऑफिस बना रखा है. ऐसी औरतें कहीं घर संभाल पाती है?
दोनों की बातें सुनकर मैं मन ही मन मुस्कुरा दिया. लगा, घर में रहने वाली औरतों की दुनिया कितनी सीमित होती है. सिर्फ घर के काम को अपना कर्तव्य समझती है और बाहर काम करने वाली औरतें उनके पैमाने पर बिलकुल फिट नहीं बैठती. सुशील गृहणी की परिभाषा से परे होती हैं, इसलिए थोड़ी सी बदनाम भी होती है. हर पड़ोसियों की नजर में वो औरत बुरी होती हैं, जो रोज उनकी नजरों के सामने से खुद कमा कर खा रही है।
फैशन मैगज़ीन देखने में मेरा मन नहीं लग रहा था तो मैंने एक बार पूरे कमरे में नज़र दौडाई. साइड वाली कुर्सियों पर बैठी तीन औरतें ज़ोर ज़ोर से हंस रही थी. उनको देखकर लगा चलो कोई तो है जो घर गृहस्थी के भार से मुक्त है और खिलखिलाना भी जानती है.
तभी उनमें से एक की आवाज़ मेरे कानों में पड़ी – अरे क्या करोगी जल्दी जाकर, ऑफिस की पार्टीज़ में फीमेल स्टाफ को बुलाना उनकी मजबूरी होती है.
इस पर दूसरी बोल पड़ी – और वैसे भी पति के साथ ऑफिस की पार्टी में जाना यानी अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना है. घर लौट कर पच्चीसों सवाल – उसने तुमसे हाथ क्यों मिलाया, और किसी से तो नहीं मिलाया? मिस्टर वर्मा से ज़रा दूर ही रहा करो, वो आदमी मुझे ठीक नज़र नहीं आता. वैसे तुम्हारे कलीग्स है तुम जानो मैं तो सिर्फ इसलिए कहता हूँ. क्योंकि इन मर्दों की ज़ात को मैं बहुत अच्छे से जानता हूँ. मुंह पर कुछ और, दिल में कुछ और ही होता है.
– यह तो ठीक कहती हो यार पिछली बार वाली पार्टी के बाद तो मेरे घर में ऐसा हंगामा हुआ था कि नौकरी छोड़ने तक की नौबत आ गयी थी. वो तो भला हो सासुमाँ का जिन्होंने पतिदेव को समझा दिया कि गाड़ी की किश्ते चुक जाने दो उसके बाद ही बहू का काम बंद करवाना. सोच रही हूँ कि गाड़ी की किश्तें ख़त्म होने से पहले प्लाज़्मा टीवी उठा लूं तो नौकरी बची रहेगी. वरना घर में सास को कौन झेलेगा दिन भर!
– क्यूं घर में तो बड़ी मम्मीजी मम्मीजी कहती फिरती हो, मुझे तो देख देख कर जलन होती है कि वाह क्या आदर्श जोड़ी है सास बहू की.
– अरे भई, पति की नज़रों में अच्छी बीवी, अच्छी बहू और अच्छी माँ बने रहना हो तो यह सब चोंचले करने पड़ते है. तुम भी सीख लो यह सब अगले महीने तुम्हारी भी शादी होने वाली है.
इसके बाद तीनों खिलखिलाकर हंस पड़ीं.
इस बार मेरे चहरे पर मुस्कराहट नहीं थी और उनकी बातों का विश्लेषण करने का मन भी नहीं हुआ. एक अजीब सी घुटन ने पूरे कमरे को घेर लिया था. जब बेचैनी बढ़ने लगी तो मैं उठकर खिड़की के पास जा खड़ी हुआ. पार्लर दूसरी मंजिल पर था इसलिए खिड़की से आने वाली हवा थोड़ी ठंडी थी.
मैं अपनी बेचैनी को शब्दों की नाव पर बैठाकर विचारों की नदियाँ में छोड़ता, इससे पहले ही एक 20-22 साल की लड़की अन्दर आई. स्किन टाईट जींस और शॉर्ट टी-शर्ट पहने हुए थी. गॉगल्स आँखों से उतारकर सिर पर चढ़ाए हुए थे. उसके उभारो के ऊपर और ठीक उसके चूतड़ों के ऊपर एक बड़ा सा टैटू बना हुआ था। पूरी कमर पर और उस टैटू की एक पूंछ सी उस लड़की के दोनों चूतड़ों के बीच में जाकर खत्म होती थी।

इस बार उन सारी नज़रों मे मेरी नज़र भी शामिल थी जो दरवाज़े पर आई लड़की की तरफ उठी थी. लेकिन मेरी आँखों के सामने अब तीन दृश्य थे- एक, लड़की का, दूसरा, उन दो औरतों का, जो अपनी साड़ी में से लटकती कमर और थुलथुले पेट को छुपाती हुई, लड़की के शॉर्ट टी-शर्ट से झांकती पतली कमर, उसके उभारो के ऊपर और कमर के नीचे बटर फ्लाई टैटू, को देखकर नाक भौं सिकोड़ रही थी.
और तीसरा दृश्य उन ऑफिस गोइंग औरतों का, जो एक दूसरे को कोहनी से उस लड़की को देखने का इशारा कर रही थी.
कोई चौथा दृश्य मेरे मानस पटल पर उभरता इससे पहले ही उस लड़की की आवाज़ ने पूरे कमरे को घेर लिया – आंटी आई गॉट द जॉब. ये कहते हुए उसने अपनी बाहें पार्लर वाली भाभी की कमर में डाल दी – और मज़े की बात यह है कि कल से ही ऑफिस जॉइन करना है और आज ऑफिस की पार्टी में बॉस ने मुझे इनवाइट किया है. आज ऐसा मेकओवर कर दो कि पार्टी में सबकी नज़रे सिर्फ मुझ पर हो. यू नो फर्स्ट इम्प्रैशन इज़ द लास्ट इम्प्रैशन. एक बार सबकी नज़रों में आ गयी तो 6 महीने बाद ही प्रमोशन पक्का.
पार्लर वाली भाभी ने उसे बधाई दी और मेरी तरफ सिर घुमाकर कहा, आप चाय पियोगे न, मैं अपने लिए मंगवा रही हूँ. मुझे भी एक ब्रेक चाहिए. मैंने पार्लर वाली भाभी पर एक सुकून भरी मुस्कान लिए नज़र डाली और No Thanks. – ,
कुसुम का makeover हो चुका था… जिस मकसद से मैं यहाँ आया था वो भी पूरा हो गया. अब मैं चलता हूँ. थैंक यू वैरी मच भाभी.जी।
मैने जैसे ही पार्लर का दरवाजे को हाथ लगाया तो पीछे से मुझे कुसुम की आवाज सुनाई दी…. अरे रुकिए दो मिनिट मै वाश रूम होकर आती हु।
(छोटे छोटे शहरों की छोटी छोटी कोमर्शियल् बिल्डिंग में अक्सर वाशरूम होते ही नही फिर यहाँ तो लेडी के लिए सेप्रेट वाशरूम होने की कल्पना करना भी ब्वाकूफी है।)
ब्यूटी पालर वाली भाभी ने कुसुम को छत पर मूतने जाने की ओर इशारा किया, तभी वो नवयोवना मेरे कुछ बोलने से पहले ही कुसुम से बोली… चलिए भाभी मै भी साथ चलती हू।
कुसुम और नवयोवना छत पर कुछ दरख्तों की आड़ में गईं। एक बड़ी पानी की टंकी के पीछे कुसुम बैठी तो उसके पास ही नवयोवना। पहले तो कुसुम ने आस पास अच्छी तरह से देखा कोई देख तो नहीं रहा, जब सब तरफ से आश्वस्त हो गई, तो उसने अपनी सलवार का नाड़ा खोला और सलवार उतार कर बैठ गई। बस बैठने की देर थी, 1 मिनट में ही पेट खाली (पेशाब) हो गया। क्या आनन्द आया… खुली,जगह, साफ हवा, हल्का सा सूर्य प्रकाश (धूप) और खुली छत पर दो नंगी लड़कियां।
कुसुम ने उस लड़की से पूछा- यहाँ कोई डर तो नहीं अगर कोई आ जाए, तो?
वो बोली- अरे भाभी, यहाँ कोई नहीं आता। सिर्फ बिल्डिंग की दुकान वाले, दुकानों पर काम करने वाले नौकर, और अपने जैसे काम करवाने वाले ग्राहक ही आते हैं।
वैसे तो कुसुम फ्री हो गई थी, मगर फिर भी बैठी रही, उसने उस लड़की की तरफ ध्यान दिया, तो देख कर हैरान रह गई, उस लड़की की चूत पर एक भी बाल नहीं था।
कुसुम ने उससे पूछा- क्या लगाती है, वीट या रेज़र?
वो हस्ती हुई बोली- भाभी, यहाँ तो रेज़र ही चलता है। फिर बड़ी खुश हो कर बोली- एक और चीज़ दिखाऊँ?
कुसुम ने कहा- क्या?
वो उठी और उठ कर कुसुम की तरफ पीठ करके बैठ गई।

कुसुम उसे आँख मार कर कहा- किसको दिखाती है ये अपनी गांड पर बने टैटू को ?
वो शर्मा सी गई और हंस कर बोली- अपने बॉयफ्रेंड को।
कुसुम ने कहा- सिर्फ दिखाती भी है या कुछ और भी?
वो बोली- अरे लो भाभी, जब अगला इसे देखने तक पहुँच गया, तो क्या खाली हाथ वापिस जाएगा। कुछ न कुछ तो करके ही जाएगा! ह्म्म्म ह्म्म्म
उस लड़की ने कुसुम से पूछा- कैसा लगा टैटू भाभी?
मुझे बड़ा अच्छा लगा कि एक यंग लड़की टैटू बनवाए फिरती है, और वो भी पीछे अपनी गांड पर, और मैं गवर्मेंट जॉब वाली मॉडर्न लेडी और मेरे हाथ पर भी टैटू नहीं।
कुसुम ने उसे पूछा- कहाँ बनवाया?
वो बोली- एक बार मैं बैंक का पेपर देने दिमापुर गई थी, तभी बॉय फ्रेंड भी मेरे साथ था, सुबह पेपर दिया, दोपहर के बाद एक जगह जा कर मैं ये बनवाया।
कुसुम ने पूछा- किसी लड़की से बनवाया?
वो बोली- अरे भाभी लड़की कहाँ, ये तो सब लड़के ही बनाते हैं।
कुसुम ने फिर पूछा- और तू उसके सामने नंगी लेट गई?
वो बोली- तो क्या हुआ, बॉयफ्रेंड मेरे साथ था, उसने खास खयाल रखा कि टैटू वाला मेरे साथ कोई गलत हरकत न करे। मेरा बॉयफ्रेंड मुझे बहुत प्यार करता है, कहता है, कहीं नौकरी लग जाए, फिर हमारे घर रिश्ता ले कर आएगा।
कुसुम : पर सच कहती हूँ, तेरा टैटू देख कर मेरी गांड जल गई, नई नई लड़किया अपनी गांड पर टैटू बनवा के घूम रही है, और मैं जॉब वाली कुछ भी नहीं कर पा रही हूँ।
फिर कुसुम उठी और सलवार का नाड़ा बांध लिया, वो लड़की भी उठ खड़ी हुई, सामने ही टंकी के पास नल लगा था, वो दोनों वहाँ गई और नल से पानी लेकर अपने अपने चूतड़ और चूत धो लिए।
मगर जब चूतड़ धोने के लिए उस लड़की ने अपनी सलवार खोली तो कुसुम को दोबारा उसकी गांड पर बना टैटू दिख गया और उसकी झांट जल गई कि जो भी हो मुझे भी अपने बदन पर टैटू बनवाना है, इसने गांड पे बनवाया है, तो मैं तो हर हाल में अपने चूचे पे टैटू बनवाऊँगी।
चलो जी… मूत कर वो दोनों वापिस आ गयी।
मूत के वापस आते ही सबसे पहले जो बात कुसुम ने मेरे (अपने पति) के कान में डाली वो यही थी कि मुझे टैटू बनवाना है।
मै बोला- तो बनवा लो, किसी दिन किसी टैटू स्टूडियो में चलते हैं और बनवा लेते हैं।
कुसुम ने कहा- जी नहीं, किसी भी स्टूडियो में नहीं, कोई ऐसा स्टूडियो देखो जहां लड़की टैटू आर्टिस्ट हो, मैं किसी लड़की से ही टैटू बनवाऊँगी।
मैने आँख मार कर पूछा- कहाँ टैटू बनवाने का इरादा है?
कुसुम ने साफ कहा- यहाँ पे!
और कुर्ते के ऊपर से अपने चूचे पे अपनी उंगली लगा के दिखाई।
मै एकदम चौन्का – अरे पागल हो क्या, यहाँ टैटू बनवाना है तुम्हें?
उसने कहा- यहाँ, और सिर्फ यहीं बनवाना है। वो लड़की थी ना, उसके देखो, उसने अपनी गांड पे टैटू बनवाया है।
मै बोला – कम ऑन यार, तुम उस लड़की की उम्र देखो और तुम अपनी उम्र तो देखो…??
कुसुम ने कहा- बात वो नहीं है, पर बात यह है कि आजकल तो गाँव की मुझसे ज्यादा उम्र की लुगाईया भी गांड पे टैटू लिए घूमती है, और मैं मॉडर्न होकर शहर में रह कर भी टैटू नहीं बनवा सकती।
वो झूठ इतनी मासूमियत से बोलती है कि सच जानते हुए भी, झूठ को सच मानकर उसके झूठ पर मर जाने को जी चाहता है।खैर बड़ी मशक्कत और बहस के बाद मै मान गया। फिर मैने गूगल पर एक टैटू स्टूडियो ढूंढ निकाला।
जारी है……

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