दोनों बाप बेटी अपने आप को संभाल पाने में असमर्थ साबित हो रहे थे, दोनों तैयार थे लेकिन दोनों अपनी अपनी तरफ से यह देख रहे थे कि पहल कौन करता है……????
रिंकी अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए सब कुछ कर रही थी लेकिन वो भी असली पहल करने में थोड़ी शर्मा रही थी ,
“ऐसे क्या देख रही हो रिंकी? ” मैने अंजान बनते हुए रिंकी की तरफ देखकर बोला
“कुछ नहीं पापा, मैं बस यह देख रही हूं कि मेरा साथ देने के लिए आप इतनी बारिश में दोबारा से छत पर भीगने चले आए , आप कितने अच्छे है पापा” रिंकी चहकते हुए बोली
“अरे बेटी ये तो मेरा फ़र्ज़ है कि मेरी सबसे प्यारी बेटी की हमेशा देखभाल करूँ” मेरी नजरें अब भी रिंकी की भीगी हुई चुचियों पर गड़ी थी………!


मै भी एक मर्द था. इस समय, इस लम्हे ने मेरी सोच को एक दोराहे पर लाकर खड़ा कर दिया था. मुझे असमंजस और दुविधा ने ऐसा जकड़ लिया था कि मुझको कोई रास्ता दिखाई ही नहीं दे रहा था. मुझको समझ नहीं आ रहा था कि आखिर करू तो क्या करू ????.
मै जानता था कि इस तरह की बातें सोचना मेरे लिये पाप था लेकिन दिल पर भला किसका जोर चलता है. आखिर में….. मै अपने आप से ही हार गया. जब से मुझको रिंकी की चूची का दर्शन हुआ था तब से ही मै अपनी बेटी की चुदाई के लिये बेताब था.
मुझ को ये भी मालूम था कि इस उम्र में, खासकर कि बरसात के दिनों में लड़कियां सेक्स के लिए काफी एक्साइटेड हो जाती हैं. ऐसे में अगर मै रिंकी की सेक्स की ख्वाहिश को अंजाम देने में कामयाब हो जाता हू तो मेरी पांचों उंगली घी में होंगी.
मेरे कदम बहकते हुए अपनी जवान लड़की के नजदीक जाने के लिए खुद ब खुद चल पड़े……. और इससे पहले हमारी बारिश के ठंडे पानी में जिस्म में लगी आग शांत हो… मैने आसपास की छतो पर नजर दौड़ाई तब मुझे पिता होने की अहमियत समझ आई… जब मैने अपने पड़ोस की छतो पर लौंडो को बारिश में मस्ती से भीगते हुए और …. मेरी बेटी रिंकी के अर्ध नग्न बदन को गिद्ध की तरह घूरते और ताड़ते हुए चच्छु चोदन करते हुए देखा…!


उन लौंडो की कमीनी नजरों से बचाने के लिए मैने रिंकी से कहा…. बेटी चल अब नीचे बहुत भीग लिया, खतम कर अब नाचना. …. नही तो सर्दी झुखाम हो जायेगा।
मेरे इस तरह अचानक से बदले हुए स्वर को सुनकर रिंकी को जैसे बारिश की बूंदों से जोरदार करंट सा लगा… और उसने गुस्से में अपनी नजरे इधर उधर की तो पड़ोस की छतो पर उसका अर्ध नग्न जिस्म घूरते हुए लौंडो को देखा। जिस कारण उसे पापा के कहे शब्दों की अहमियत समझ आ गयी और उसने मन ही मन पापा के प्यार और समर्पण की भावना ने रिंकी के दिल में एक अलग ही जगह बना ली. वो भी मेरी आंखों में अपने लिये प्यार और चाहत के भावों को साफ साफ देख सकती थी.
“”एक पिता, भाई, पति, प्रेमी, के देखने के तरीके और एक भूखे जानवर जैसे मर्द के देखने के तरीके में बहुत ज्यादा फर्क होता है. औरतों को कुदरत ने एक कमाल की चीज दी है जिसको छठी इंद्री कहा जाता है.
इतना ही नहीं. लड़कियों/ महिलाओं को लड़को/ पुरूषों के देखने के नजरिये से भी पता लग जाता है कि सामने वाला उसके बारे में क्या सोच रहा है या उसके मन में किस तरह के विचार चल रहे हैं. जिस तरह से मै…. अपनी बेटी के बदन को देख रहा था तो मेरी नजर सीधे रिंकी के जिस्म में अंदर तक उतर रही थी.
इस समय रिंकी भी अपने पापा की आंखों में एक बाप को नहीं बल्कि एक प्रेमी को ही देख रही थी. वह जानती थी कि पापा के मन में उसके लिए प्यार और गैरो के देखने और घूरने पर जलन की भावना काफी बढ़ चुकी है…..
“ठीक है पापा,अगर आप यही चाहते है तो फिर चलिए नीचे चलते हैं ” रिंकी ने मुस्कुरा कर कहा।
रिंकी की चेहरे की कामुक् मुस्कान देखते हुए मैने नीचे की ओर जाती हुयी सीढ़ियों पर कदम बढ़ा दिये…… अभी आखिरी सीढ़ी उतरना बांकी ही था कि रिंकी भागकर अपने पापा की बाहों में समा गई, हम दोनों बाप बेटी काफी देर तक एक दूसरे की बाहों में बाहें डाले चिपके रहे, दोनों के मन का अंतर्द्वंद बारिश में पसीने के रूप में बाहर निकल रहा था।
इसी तरह खड़े जब काफी देर हो गई तो मैने रिंकी को अपनी बाहों में से निकालने की कोशिश की, पर रिंकी तो जैसे बेल की तरह मेरे अधनंगे शरीर से लिपटी हुई थी, वो तो जैसे कभी मुझ से दूर ही नही होना चाहती थी , उसने तुरंत दोबारा मुझ को खींचकर अपने से जोर से चिपक लिया, इसका सीधा असर ये हुआ कि रिंकी के गोल गोल संतरो जैसे खूबसूरत मम्मे मेरी छाती में धंसते चले गए, रिंकी के नरम मखमली मम्मों के स्पर्श से ही मेरे बदन में एक लहर सी दौड़ गयी,
मै रिंकी के नुकीले हो चुके निप्पल्स को अपनी नंगी छाती में साफ साफ महसूस कर पा रहा था, मेरी सांसे अब भारी होने लगी, और लंड दोबारा औकात में आने लगा, मैने लाख कोशिश की मेरा ध्यान भटक जाए पर लंड तो पूरी बगावत पर उतर आया, और लंड तोलिये की दरारों से होता हुआ सीधा रिंकी की स्कर्ट से जा टकराया, मैने अपनी कमर को थोड़ा पीछे करने की कोशिश की ताकि खड़ा लंड रिंकी की नज़रों से बच सके, पर तभी अचानक रिंकी और ज्यादा आगे होकर मुझ से चिपट गयी , इस तरह अचानक आगे बढ़ने से लंड सीधा रिंकी की छोटी सी स्कर्ट के अंदर घुसकर इसकी सुडौल जांघो से जा टकराया, रिंकी तो इस आभास से रोमांचित हो उठी, अपनी नंगी जांघो पर अपने पापा के नंगे लंड का स्पर्श पाकर उसकी मदमस्त चुत से पानी की एक बूंद टपक कर बह निकली, हम दोनों के जिस्म भट्टी की तरह सुलग रहे थे, अब मुझ से बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था, इससे पहले की कुछ और अनहोनी होती , मै तुरंत पीछे हट गया,
“क्या हुआ पापाआआआ…..” रिंकी ने मेरे इस तरह पीछे हटने की वजह से हैरान होकर पूछा
“वो ….रिंकी… वो ….मैं….अब मैं क्या कहूँ तुमसे” मुझ से बोलते नही बन रहा था, मुझे ये तो पक्का भरोसा हो गया था कि रिंकी ने मेरे लंड को अपनी जांघो पर महसूस कर लिया है
“क्या हुआ पापा, आप पीछे क्यों हट गए, क्या मैं इतनी बुरी हूँ कि आप मुझे गले से भी नही लगा सकते” रिंकी ने कहा
“नही रिंकी, वो बात नही है, वो मैं…अब मैं तुम्हे कैसे बताऊ” मै थोड़ा सा परेशान होकर बोला।
“आप मुझे क्या बताना चाहते है वो मैं जानती हूं” रिंकी ने कहा। और छत की सीढ़ियों के नीचे लगे वाश वेशिन पर वो मुँह पर पानी मार कर मुँह धोने लगी और मैं उसके चेहरे पर पड़ने के बाद गिरने वाली पानी की बूंदों को देख रहा था एक एक बूंद मोती की तरह चमक रही थी मुँह और हाथ धोने के बाद तौलिये से पोंछकर वो वहा से हट गई और मैं वहा जाकर हाथ मुँह धोने लगा। मुह धोने के बाद मैंने भी उसी तौलिये से मुँह पौंछा जिससे रिंकी की खुशबू उस तौलिये पर मैं महसूस कर रहा था।
“आप थोड़ी देर बैठो पापा जब तक मैं आपके नहाने के लिए पानी गर्म कर देती हूं”
ये कहकर रिंकी किचन में चली गयी और गैस पर एक बर्तन पे पानी चढ़ा दिया क्योंकि बिजली न होने की वजह से गीजर नही चला सकते थे।
रिंकी अभी पानी का बर्तन गैस पर रखकर खड़ी हुई ही थी। और पानी गरम करने पर अपना ध्यान लगाने लगी बाहर मै अभी हुई घटना के बारे में सोच सोच कर परेशान हो रहा था , समझ ही नही आ रहा था मै इस पर कैसे रियेक्ट करू,
“रिंकी का इस तरह मुझसे बेबाकी से चिपट जाना, बिना ब्रा के ही टीशर्ट पहन लेना, मुझे पड़ोस की छतो पर उसे घूरते हुए लड़को से जलन या बुरा महसूस होना। और तो और मेरे लंड के उससे टच होने पर भी गुस्सा न होना” मै इन्ही बातो को समझने की कोशिश कर रहा था, पर साथ ही साथ ये आनंद भी आ रहा था कि आज अपनी बेटी के मुलायम मम्मों को महसूस किया, उसकी गोरी चिट्टी भरावदर जांघो से अपने लंड को रगड़ा,ये सोच सोच कर ही मेरा लंड फूलकर कुप्पा हुआ जा रहा था, ऐसा लग रहा कि लंड में खून दुगुनी गति से दौड़ रहा हो, मैने जब काफी देर मशक्कत की तो मुझे भी अब हल्का हल्का शक से होने लगा कि
“शायद रिंकी का कोई आशिक या बॉय फ्रेंड है…… हो सकता है वो सेक्स के बारे में सिख गयी हो…….हो सकता है कि उसकी दोस्तो ने उसे चुदाई के बारे में बता दिया हो और शायद उनकी बातों से गरम होकर ये खुद भी सेक्स की आग में जल रही हो…..वैसे भी इसकी उम्र की लड़कियां तो चुदाई में पारंगत हो जाती है….. लगता है इसके मन मे भी चुदाई की जिज्ञासा जाग गयी और शायद बाहर किसी अंजान के डर से ये मेरे साथ ही……..नहीं नहीं ये मैं क्या सोच रहा हूँ……वो मेरी बेटी है……पर वो तो खुद ही मुझे ढील दिए जा रही है……पर ये मेरी गलतवहमी भी तो हो सकती है……।
शायद वो बस मुझसे अपनी मम्मी के सारे गिले शिकवे दूर कर दोबारा बाप बेटी के रिश्ते को पति पत्नी के रूप में परिवर्तित करना चाह रही हो….पर अगर उसे करना होता तो …..क्यों वो मेरे लंड के टच होने पे भी बिल्कुल शांत रही…..इन सब बातों का कुछ न कुछ मतलब तो जरूर होगा”
मै इसी उधेड़बुन में लगा था पर कुछ नही सूझ रहा था,पर साथ ही साथ अभी रिंकी के संग गुजारे गए पल को याद करके मस्त हुआ जा रहा था, और जब भी रिंकी की भरावदार गांड के बारे में ख्याल आता तो उत्तेजना दुगनी हो जाती, अपने बदन की गर्मी को कैसे शांत करें इसका कोई जुगाड मुझे समझ नही आ रहा था, बार बार आंखों के सामने रिंकी की कसी हुई चुंचिया और भरावदार गांड की तस्वीर नाच पड़ती, हारकर मैने सोचा कि चलकर एक गिलास ठंडा पानी ही पी लिया जाए ताकि मन कुछ हद तक शांत हो।
मै पानी पीने के लिए किचन की तरफ जा रहा था और जैसे ही किचन के दरवाजे पर पहुंचा तो सामने अपनी बेटी को झुकी हुई अवस्था में देखकर लंड एक बार फिर से टनटना कर खड़ा हो गया, झुकने की वजह से उसकी छोटी सी स्कर्ट में से उसकी गुलाबी कच्छी की हल्की सी झलक उस गैस की जलने वाली आग में धुँधली सी दिखाई पड़ रही थी…… ..

जिसे देखते ही अब मुझ से और बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया था, रिंकी अब दोबारा खड़ी हो चुकी थी, उसे बिल्कुल भी आभास नही था कि उसके पापा उसके पीछे आकर उसका चक्षुचोदन करने में लगे हुए है, इधर मैने अपने होठों पर जुबान फेरी और प्यासे होठो पर जीभ फेरते बिना पानी पिये किचन से बाहर निकल पड़ा।
दूसरी तरफ रिंकी अपने मन ही मन कुछ सोच रही थी तभी उसके दिमाग मे एक ख्याल आया और वो गैस को कम करके बाहर हॉल की तरफ चल पड़ी, जहां उसके पापा बैठे हुए थे।
बारिश अपने जोरों पर थी दूसरी ओर वासना भरे घर के माहौल से अंजान मेरे पापा हाईवे के किनारे की घनी झाड़ियों के बीच अपनी स्कूटी को खड़ी कर घने पेड़ के नीचे,,,, वह बारिश थमने तक आसरा लिए हुए वहीं रूके थे। अपने पापा का ख्याल आते ही मैने उन्हें फोन लगाया…… और उन्होंने पूरी स्थिति से मुझे अवगत कराते हुए कहा कि बारिश के रुकते ही वह रेलवे स्टेशन मेरी मम्मी और कुसुम को लेने चले जायेंगे लेकिन बारिश का मिजाज देखते हुए ट्रेन का सही समय पर आ पाना मुश्किल ही लग रहा था। फिर भी पापा ने मुझे आश्वाशन दिया कि वो बारिश रुकते ही कुसुम और मम्मी के साथ ही रात 8-9 बजे तक वापस आयेंगे और मै घर पर रहकर अपना और अपनी बेटी रिंकी का ख्याल रखू।
शाम के सात बज कर सात मिनिट हो चुके थे बरसात की वजह से मौसम में ठंडक का अनुभव होने लगा था। मैने हाल फिलहाल नहाने का प्लान कैंसल कर पापा के रखे हुए पेंट शर्ट पहन लिए…… रिंकी ठीक मुझसे 90 डिग्री पर सोफे पर बैठ कर मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी। मै भी अपनी बेटी को बड़े गौर से देखने लगा जो कि इस समय मुस्कुराते हुए और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी।
कुछ पलो बाद…… ऐसे क्या देख रही हैं रिंकी…..?
कुछ नहीं पापा मैं तो यह देख रही हूं कि आप दादाजी के कपड़ो मे भी आप मुस्कुराते हुए कितने खूबसूरत लग रहे है।
अच्छा मैं तुझे खूबसूरत लगता हूं,,,, मै अपनी बेटी की बात पर मुस्कुराते हुए बोला।
हां पापा आप मुझे बहुत खूबसूरत लगते हो।
अब बे वजह तू बातें मत बना,,,,,
नहीं पापा सच में अपनी कसम आप मुझे बहुत खूबसूरत लगते हो खूबसूरत लगते क्या हो,,,, आप हो ही बहुत खूबसूरत।
मुझ को अपनी बेटी के मुंह से अपनी तारीफ सुन कर बहुत अच्छा लग रहा था मै मन ही मन मुस्कुरा भीे रहा था। मै अपनी बेटी की नजर को अच्छे से पहचान रहा था खूबसूरती के पीछे वासना का आकर्षण भी था जो कि मुझे अपनी बेटी की आंखों में साफ नजर आ रहा था।
( ये बात भी सही है कि मै भी उसके बदन के प्रति आकर्षित हू। लेकिन अभी भी मेरे अंदर झिझक भरी हुई थी।)
मुझ को तभी कुछ याद आया हो इस तरह से बोला….?
अच्छा मैंने तुझसे एक सवाल पूछा था लेकिन तूने उसका जवाब नहीं दिया,,,,,
कैसा सवाल पापा ?
यही कि तेरी सहेलिया भी तो बॉय फ्रेंड और लड़को की बातें करती होगी तुझसे उन लोगों ने तो तुझे कुछ बताया ही होगा कि प्यार व्यार क्या होता है।
नहीं पापा ऐसा कुछ भी नहीं है मेरी सहेलिया मुझसे ऐसी बातें नहीं करती।
नहीं तू झूठ बोल रही है ऐसा हो ही नहीं सकता लड़किया अक्सर आपस में सहेलियों से यह सब बातें जरूर शेयर करती हैं।
( मै अपनी बात पर जोर देते हुए बोला मै अपनी बेटी के मुंह से जानना चाहता था कि प्यार व्यार और चूत चुदाई के बारे में उसकी सहेलिया क्या बोलती हैं।)
नहीं पापा सच कह रही हूं ऐसी कोई बात नहीं है।
नहीं तू जरुर झूठ बोल रही है। देख बारिश को देखते हुए मुझ को लगता है कि तेरी मम्मी, दादा दादी को आने में दो तीन घंटे लगेगे और हम दोनों एक दूसरे से बातें किए बिना ये वक्त कटने वाला नहीं है। इसलिए हम दोनों को टाइम पास के लिए बातचीत तो करनी ही होगी अब मैं तुझ से पढाई के बारे में बातचीत तो कर नहीं रहा हूँ इसलिए ऐसे टॉपिक पर बात करना चाहता हूं जिसमे तुझे भी इंटरेस्ट हो क्योंकि तेरी उम्र भी अब जवान हो रही है ऐसे में तेरा आकर्षण लड़को के प्रति जरूर होता होगा।
अपने पापा की बात सुनकर रिंकी हैरान होते हुए मुझ को ही देखे जा रही थी और मै उस के चेहरे के भाव को पढ़ते हुए बड़े प्यार से बोला।…….
देख रिंकी मैं जानता हूं कि ऐसी बातें करना ठीक नहीं है लेकिन मैं तेरा पापा हूं और तुझे सही उम्र में सही बातों की जानकारी देना मेरा फर्ज बनता है और साथ ही में तो एक टीचर भी हूं इसके लिए तेरे हर सवालों का सही जवाब देना मेरा फर्ज बनता है और मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि तेरी उम्र के लड़की अक्सर अपनी सहेलियों से लड़कों के बारे में अपने बॉयफ्रेंड के बारे में जरूर बात करती हैं इसलिए मुझसे तू झूठ मत बोल,,,,।
देख तू घबरा मत आज तू दिल खोल कर जो तेरे मन में है सब कुछ मुझे बोल डाल क्योंकि जिस माहौल में हम दोनों हैं ऐसे माहौल में अगर एक प्रेमी और प्रेमिका होते हैं और उन्हें इस तरह का एकांत मिल जाता है तो उनके लिए तो यह जन्नत के बराबर हो जाता है। और वह अक्सर ऐसे ही एकांत माहौल को ढूंढते रहते हैं।
अच्छा तो मुझे एक बात सच सच बताना क्या तूने कभी किसी लड़के से प्यार किया है या तुझे किसी से प्यार हुआ है।
नहीं पापा ऐसा कुछ भी नहीं है।
देख तू सच सच बताओ झूठ मत बोल पूरे स्कूल में तुझे कौन लड़का सबसे अच्छा लगता है …..?????
नहीं पापा इन सब बातों पर मेरा कभी ध्यान ही नहीं गया।
( रिंकी को अपने पापा की बातें और बात करने का अंदाज कुछ अलग लग रहा था लेकिन तभी उसे अपनी सहेली ऋतु की बात याद आ गई उसे भी लगने लगा कि आज उसके पापा उसकी सहेली के जीजा की तरह ही बात कर रहे है । जब ऐसी बातें करते हुए उसकी सहेली के जीजा ने अपनी ही साली को ऊकसा कर उसके साथ चुदाई का सुख प्राप्त किया था।)
रिंकी के लिए ये मौका बड़ा खास था वह मन ही मन सोचने लगी कि जिस तरह से पापा पूछ रहे हैं, शायद वो जानना चाहते है कि उनकी बेटी की चूत कुंवारी है कि नही, उनकी बेटी की सील किसी मादरजात ने तोड़ तो नही दी…… या फिर उनकी बेटी खेली खायी छिनार तो नही है। हो सकता है पापा मम्मी की फटी हुई या खुली हुयी चूत मिलने से खुश नही हो…. और अभी भी एक कुंवारी चूत की तलाश में हो,, वरना इस तरह की बातें ना करते।
शायद पापा पुरानी फिल्म डॉन के हीरो अमिताभ बच्चन के उस डाइलोग दिल से लगाए बैठे हैं…. जो अमिताभ बच्चन ने बोला था ” उन्हें दो टाइप की लड़किया बिल्कुल भी पसंद नहीं है… एक जो बिस्तर पर आसानी से आ जाये, और दूसरी जो बिस्तर पर आने में ज्यादा देर लगाए “
इसलिए आज पापा अपनी बातों से मुझे उकसा रहे है हो सकता है कि आज पापा का भी मन मेरी लेने को कर रहा है लेकिन लेने से पहले बातें बनाकर मेरी चूत का कोमार्य परीक्षण करना चाहते है…… यही सब सोचकर रिंकी इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी वह अपने पापा की बातों का मतलब धीरे-धीरे समझ रही थी वरना अपनी बेटी से ऐसी बातें करते हुए किसी भी बाप के चेहरे पर मुस्कुराहट नहीं आती लेकिन जिस तरह से पापा मुस्कुरा रहे है रिंकी को अब लगने लगा था कि इस मुस्कुराहट के पीछे कोई वजह जरुर है। ओर यह वजह शारीरिक सुख से ही संबंधित है। इस बात की शंका रिंकी के मन में होते ही उसके बदन में गुदगुदी सी होने लगी और उसकी चूत रिसने लगी। अब वह भी अपने पापा से दूसरी तरह से ही बातें करना चाहती थी क्योंकि उसके पापा ने ही बोला है कि आज जो भी उसके मन में हो सब बोल डाले,,,,
हे भगवान…… तेरे जैसी लड़की तो मैंने आज तक नहीं देखी…… क्या हुआ क्या सोच रही है बता ना तुझे कौन अच्छा लगता है ।
(अपने पापा की बात सुनते ही जैसे उसकी तंद्रा भंग हुई हो इस तरह सेकपकाते हुए बोली)
कककक,,, कुछ तो नही,,,,
अच्छा ठीक है कुछ मत बताओ मैं तुझसे अब कुछ पूछूँगा भी नहीं,,,( मै बनावटी गुस्सा बताते हुए बोला।)
लो अब आप नाराज हो गये पापा मैं कह रही हूं फिर….. बताने जैसा नहीं है क्योंकि हम लोग प्यार व्यार की बातें नहीं करते हम लोग कुछ और ही बतियाते है।
क्या बतियाते हो तुम लोग कैसी बातें करते हो ?
क्या बताऊं पापा बताने लायक नहीं है।
( रिंकी की यह बात सुनकर मेरे मन में उत्सुकता जागने लगी मुझे लगने लगा कि रिंकी कुछ गंदी बातें छुपा रही है और यही मौका भी अच्छा है उसके मुंह से गंदी बातें उगलवा कर आज की शाम हसीन करने का,, मेरे मन में ढेर सारी भावनाएं उमड़ने लगी मै रिंकी से बोला।)
देख तू मुझसे शर्मा मत सब कुछ बोल डाल,,,,,
पापा मुझे बहुत शर्म आती है मैं कैसे बोलूं,,,,,,,
,,,,,, देख शर्मा मत,,,,
( अपने पापा की ऐसी बातें सुनकर रिंकी को लगने लगा कि अब जरुर उसके साथ कुछ ना कुछ अच्छा होने वाला है,,, वह भी मन ही मन सोचने लगी की जब पापा खुद ही सब कुछ सुनने के लिए तैयार है तो उसे बोलने में क्या हर्ज है इसलिए वह बोली।)
पापा हम लोग गंदी बातें करते है।,,,,
कैसी गंदी बातें किसके बारे में,,,,( इतना कहने के साथ ही मै हाथ हटाकर एक हाथ को पीछे की सोफे पर रखकर आराम से बैठ गया ,,,,)
सससस,,, सेक्स के बारे में,,,,,,( मुझ को भी अपनी बेटी के मुंह से सेक्स शब्द सुनकर गर्माहट सी होने लगी। )
सेक्स के बारे में किस तरह के कैसी बातें जरा खुलकर तो बता मैं पहले ही तुझे बता चुका हूं कि तू आज मत शर्मा,,,
( रिंकी के मन में पूरी तरह से वासना सवार हो चुकी थी उसे अपनी सहेली ऋतु वाली बात उसे अच्छी तरह से याद थी,,,, और ऐसे माहौल में तो उसके बदन में एक अजीब सी उत्सुकता सीे फैलती जा रही थी। )
चचचच,, चुदाई,,,,, वाली बातें,,,,( रिंकी फिर से शर्माते हुए बोली।,, अपनी बेटी से इस तरह की बातें करने में मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था जिसे मै बार-बार पैंट के ऊपर से एडजस्ट कर रहा था और रिंकी की नजर मेरी इस हरकत को ध्यान से देख रही थी। )
चुदाई वाली बातें तेरी सहेली यह सब बातें करती है लेकिन किस की चुदाई के बारे में बातें करती हैं…….. मैं तो यह बातें सुनकर ही हैरान था कि आखिर स्कूल में पढ़ने वाली छोटी छोटी लड़किया चुदाई वाली इस तरह की बातें कर कैसे लेती हैं।
मेरे बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी अपनी बेटी के मुंह से यह सब सुनकर मेरा अंग अंग उन्माद से भरने लगा था। बाहर बारिश अपने जोरों पर अपना जलवा बिखेर रहीेे थी साथ ही बादलों की गड़गड़ाहट मौसम को और भी ज्यादा भयानक बना रहीे थी,,, लेकिन यह बारिश यह एकांत और बादलों की गड़गड़ाहट घर के अंदर के माहौल को गर्मी प्रदान कर रही थी,,,,)
जारी है…….

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