थोड़ी देर शांति के बाद अब रिंकी अपना तुरुप का पत्ता फेंकने वाली थी,
“पापाआआआ…..” रिंकी ने कहा
“हां, रिंकी” मैने थोड़े दुलार से कहा
“पापा मुझे आपसे एक बात कहनी है” . ……
“अरे पापा, वो मैं छत पर से कपड़े लाना तो भूल ही गयी, अब तो बारिश भी कम हो गयी है, मैं अभी जाकर कपड़े लाती हूं” रिंकी ने थोड़ा चिंतित होने का नाटक करते हुए कहा
“पर रिंकी, तुम भीग जाओगी, अभी भी हल्की हल्की बारिश हो रही है, सीढियां भी गीली हो रखी है, अगर कहीं पैर फिसल गया तो, तुम रुको मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूँ” मैने जवाब दिया।
मेरा जवाब सुनकर रिंकी के चेहरे पर कुटिल मुस्कान उभर आई, उसे अपने मकसद में कामयाबी मिलते दिख रही थी।
पर अचानक बारिश का जोर दोबारा बढ़ता ही जा रहा था, रिंकी जानती थी की छत पर जाकर कपड़े समेटने का कोई मतलब नहीं था क्योंकि सारे के सारे कपड़े गीले हो चुके ही होंगे, पर उसका मकसद तो कुछ और ही था, इसलिए वो छत की तरफ जाने लगी, मै भी उसके पीछे पीछे सीढ़ियों पर चढ़ने लगा, इस तरह सीढ़ियों पर चढ़ते हुए अपनी बेटी को देखकर मेरा मन डोलने लगा था, क्योंकि मेरी प्यासी आँखे अपनी बेटी की गोल गोल बड़ी गांड पर ही टीकी हुई थी,
“वैसे भी मन जब चुदवासा हुआ होता है तब औरत का हर एक अंग मादक लगने लगता है “
लेकिन यहां तो रिंकी सर से लेकर पांव तक मादकता का खजाना थी, सीढ़ियों पर चढ़ते समय जब वो एक कदम ऊपर की तरफ रखती, तब उसकी भरावदार गांड और भी ज्यादा उभरकर बाहर की तरफ निकल जाती, जिसे देखकर मेरे लंड में एेंठन होना शुरू हो गई थी, बस यह नजारा दो-तीन सेकंड का ही था और रिंकी आगे की तरफ बढ़ गई लेकिन यह दो-तीन सेकेंड के नजारे ने ही मेरे बदन को कामुकता से भर दिया।
मै भी अपनी बेटी के पीछे पीछे सीढ़ियों से धीरे धीरे ऊपर चढ़ा जा रहा था, बारिश तेज हो रही थी, रिंकी जानती थी की छत पर जाने पर वो भी भीग जाएगी लेकिन ना जाने क्यों आज उसका मन भीगने को ही कर रहा था, वो छत पर पहुंच चुकी थी, और बारिश की बूंदे उसके बदन को भिगोते हुए ठंडक पहुंचाने लगी , बारिश की बूंदे जब उसके बदन पर पड़ती तो रिंकी के पूरे बदन में सिरहन सी दौड़ने लगती, और ऊपर से यह बारिश का पानी उसे और ज्यादा चुदवासा बना रहा था, रिंकी की पीठ मेरी तरफ थी, रिंकी पूरी तरह से भीग गयी थी और उसके बाल खुले हुए थे, जो कि पानी में भीगते हुए बिखर कर एक दूसरे में उलझ गए थे, रिंकी के कपड़े पूरी तरह से गीले हो कर बदन से ऐसे चिपके थे कि बदन का हर भाग हर कटाव और उसका उभार साफ साफ नजर आ रहा था, मै तो यह देख कर एकदम दीवाना हो गया , मेरी टॉवल भी तंबू की वजह से उठने लगी थी, मुझे अपनी बेटी के खूबसूरत बदन का आकर्षण इस कदर बढ़ गया था कि मेरे बदन में मदहोशी सी छाने लगी थी ।
मुझे अब यह डर भी नहीं था कि कहीं मेरी बेटी मेरी जांघों के बीच बने हुए तंबू को ना देख ले, और शायद मै भी अब यही चाहता था कि मेरी बेटी की नजर मेरे खड़े लंड पर जाए।
मै भी बारिश के पानी का मजा ले रहा था लेकिन बारिश का यह ठंडा पानी मेरे बदन की तपन को बुझाने की बजाय और भी ज्यादा भड़का रहीे थी, रिंकी अब कपड़े समेटने की बजाय भीगने का मजा ले रही थी ,पहली बार यूँ शायद बारिश के ठंडे पानी से अपने बदन की तपन को बुझाना चाहतीे थी लेकिन इस बारिश के पानी से उसके मन की प्यास और भी ज्यादा भड़क रही थी, उसे पता था कि उसके पापा उसके भीगे बदन को देखकर उत्तेजित हो रहे होंगे और शायद वो भी यही चाहती थी, उत्तेजना के मारे भीगती बारिश में उसके दोनों हाथ खुद-ब-खुद उसकी चूचियों पर चले गए। और किसी फिल्मी हीरोइन की तरह नाचने लगी…..
“” हाय हाय ये मजबूरी,मौसम और ये दूरी “”

मै साफ साफ तो देख पा रहा था , बीच बीच मे बिजलियाँ चमकने से मेरी नज़र अपनी बेटी की इस हरकत पर इशारे दे रही थी, उत्तेजना के मारे मेरे लंड में अब मीठा मीठा दर्द होने लगा था, लंड की ऐंठन और दर्द और भी ज्यादा बढ़ गया जब मैने देखा कि रिंकी की दोनों हथेलियां चूचियों पर से हटकर बारिश के पानी के साथ सरकते सरकते उसकी भारी भरकम भरावदार गांड पर चली गई और गांड पर हथेली रखते ही वो उसे जोर जोर से दबाने लगी।
अपनी बेटी की पानी में भीगी हुई मदमस्त भरावदार गांड को दबाते हुए देखकर मुझसे से रहा नहीं गया , मै मदहोश होने लगा मेरी आंखों में खुमारी सी छाने लगी, एक बार तो मेरे जी में आया कि पीछे से जाकर अपनी बेटी के बदन से लिपट जाए और तने हुए लंड कोें उसकी बड़ी बड़ी गांड की फांकों के बीच धंसा दे, लेकिन बड़ी मुश्किल से अपने आपको रोके रखा, अपनी बेटी की कामुक अदा को देखकर मेरी बर्दाश्त करने की शक्ति क्षीण होती जा रही थी, लंड में इतनी ज्यादा ऐठन होने लगी थी कि किसी भी वक्त उसका लावा फूट सकता था, अभी भी मेरी बेटी के दोनों हाथ उसकी भरावदार नितंबों पर ही टिके हुए थे।
मै वहीं उसके सामने खड़े खड़े अपनी बेटी की इस हरकत को देख देख कर पागल हुए जा रहा था , रिंकी की हर एक अदा पर मेरा लंड तुनकी मारने लगा था, मेरी कामुक नजरें अपनी बेटी के मदमस्त बदन, चिकनी पीठ, गहरी कमर और उभरे हुए नितम्ब पर टिकी हुई थी, पर मुझे हल्का हल्का डर भी लग रहा था कि कहीं वो कहीं गुस्सा ना हो जाए।
मेरी नजर अपनी बेटी के बदन के हर एक कोने तक पहुंच रही थी, पानी में भीगकर रिंकी की टीशर्ट उसकी चूचियों से इस कदर चिपक गई थी कि उसके बिना ब्रा के मम्मे अब साफ साफ दिखाई पड़ रहे थे, मै ललचाई आंखों से पानी में भीगी हुई अपनी बेटी की चुचियों को देख रहा था ,तभी अचानक रिंकी पलट गई, और उसने तुरंत अपने पापा की नजरों को भांप लिया, अपने पापा की कामुक नजरो को अपनी चूची पर घूमती हुई देखकर उसकी बुर में सुरसुराहट होने लगी, उसे मदहोशी सी छाने लगी, रिंकी की नजरें एकाएक उसके पापा की नंगी छातियों पर पड़ी, जो कि अच्छी खासी चौड़ी और गठीली थी , अल्हड़ मस्त जवानी में ऐसे गठीले बदन को देखकर रिंकी बुरी तरह उत्तेजित होने लगी ।
“बारिश का जोर अब और ज्यादा बढ़ने लगा था, बिजली की चमक और बादलों की गड़गड़ाहट बढ़ने लगी थी, एक तरफ यह तूफानी बारिश थी, और दूसरी तरफ इतनी तूफानी बारिश में भी दोनों बाप बेटी एक दूसरे को अपनी ओर आकर्षित करने में लगे हुए थे”
तेज बारिश में अपनी बेटी की ऊपर नीचे हो रही छातियों को मै साफ-साफ देख पा रहा था, रिंकी की छोटी सी टीशर्ट में से उसका गोरा चिकना पेट और पेट पर नीचे की तरफ उसकी मदमस्त गहरी नाभि एकदम साफ दिखाई दे रही थी, जिस पर रह रहकर मेरी नजरे चली जाती, रिंकी ने जब अपने पापा की नजरों को अपने बदन पर नीचे की तरफ जाता देखा तो उसकी नजर भी अपने पापा की कमर से नीचे चली गई, पर जैसे ही उसने वहां का नज़ारा देखा उसका दिल धक्क से रह गया, उसकी भीगी बुर मे से भी मदन रस चू गया,
रिंकी और कर भी क्या सकती थी, उसके पापा के कमर के नीचे का नजारा ही कुछ ऐसा था कि उसकी बुर पर उसका कंट्रोल ही नहीं रहा, रिंकी आंख फाड़े अपने पापा को देख रही थी, बारिश के पानी मे मेरा टॉवल एकदम गीला हो चुका था, टॉवल का कपड़ा भीगने की वजह से गीला होकर और ज्यादा वजनदार हो गया, लेकिन टॉवल के अंदर मेरा लंड एकदम टाइट हो कर आसमान की तरफ देख रहा था, जिससे टॉवल में एक बड़ा सा तंबू बन गया था, इस नजारे को देखकर रिंकी समझ गई थी कि उसके पापा का लंड उसकी अदाओं से ही खड़ा हुआ है, ये सोचकर ही उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गई,
वो अच्छी तरह से जान गई थी की उसके कामुक भीगे हुए बदन को देखकर ही उसके पापा का लंड खड़ा हो गया है, ऐसी तूफानी बारिश में भी रिंकी अब पुरी तरह से गर्म हो चुकी थी।
इधर अब मै भी जान गया था कि मेरी बेटी की नजर मेरे खड़े हुए लंड पर पड़ चुकी है, इस पल एक दूसरे को देख कर दोनों बाप बेटी बिल्कुल चुदवासे हो चुके थे, बादलों की गड़गड़ाहट की आवाज माहौल को और गर्म कर रही थी, अब ना तो रिंकी से रहा जा रहा था और ना ही मुझ से , दोनों बाप बेटी अपने आप को संभाल पाने में असमर्थ साबित हो रहे थे, दोनों तैयार थे लेकिन दोनों अपनी अपनी तरफ से यह देख रहे थे कि पहल कौन करता है……????
जारी है……..

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