” शादी का घर “”
उसने जो लाइन अभी एक सैकेण्ड पहले बोली, मैं मन ही मन उस को समझने की कोशिश करने लगा कि वो मुझे निमंत्रण दे रही थी या चेतावनी। जो भी था, पर मुझे उसका साथ अच्छा लग रहा था और मैं चाह रहा था कि काश समय कुछ वक्त के लिये यहीं रुक जाये।
प्रीति तुम अकेली आई हो डॉक्टर साहब और तेरी बेटी साथ में क्यो नही आये…. मैने अपनी तंद्रा भंग कर उससे पूछा??
जीजू आपको तो पता ही है, जूली का होने वाला पति मेरा कजिन देवर है, जब मैने डॉक्टर साहब को साथ चलने की बात कही तो डॉक्टर साहब बोले तुम अकेली जाओ और अपनी बहन की शादी में घाराती बन मेरा स्वागत करना तुम अपनी बहन होने का फर्ज निभाओ मै अपने भाई होने का फर्ज निभाता हू।
यही सोचते सोचते पता ही नहीं चला कि कब हम घर (ससुराल) पहुँच गये। जूली दरवाजे पर ही खड़ी हम लोगों का इंतजार कर रही थी। जैसे ही मैंने गाड़ी रोकी, प्रीति कूद कर बाइक पर से उतरी और जूली को गले से लगाकर मिली। मैं भी बाइक साइड में लगाकर प्रीति का सामान ई रिक्शा में से लेकर घर के दरवाजे की चोखट पर रख दिया। उस वक्त मेरी माणोशथिथि बदल चुकी थी कि मुझे अपनी साली प्रीति में अपनी पत्नी कुसुम की झलक दिख रही थी मुझे लग रहा था ससुराल में, मै साली के साथ नही पत्नी के साथ आया हू।
“लोकल शहर में ससुराल होने का एक फायदा मुझे अब समझ आया हर बार ससुराल जाने पर मिठाई का डिब्बा लेकर जाने की प्रथा खतम हो जाती है, और दामाद के कुछ पैसे की बचत हो जाती है…. ह्म्म्म।”
मै दरवाजे से ही वापस जाने लगा।
चलो अब मै चलता हूँ…. ये सुनकर जूली तपाक से बोली…. क्या जीजा जी मै आपका इतने दिनों से इंतजार कर रही थी और मुझे सामने देखकर वो सीधी मेरे सीने से चिपक गयी। मै जूली के इस तरह reaction को देखकर हैरान हो गया। मै और जूली आधे मिनिट तक एक दूसरे की बाहों में आलिगंन में जकड़े हुए खड़े रहे।
आचानक से प्रीति हल्की आवाज देकर हमें चोंकाया तब हम अलग अलग होकर मुसुकुराते हुए खड़े गये।
खैर, घर के अंदर सब इंतजार कर ही रहे थे. खास कर जूली की शादी में मेहमानी करने आई वो औरत जिन्हें सब ताईजी कह रह थे, उनकी खुशी देखते नहीं बनती थी. जूली और कुसुम की कजिन भाभी मीनल जो पास ही में रहती है और ताई जी का छोटा बेटा शौर्य भी बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, क्योंकि दरवाजे पर हमारी आवाज सुनते ही वे दौड़ कर बाहर आ गये थे. बस मेरा सगा साला और सास ससुर नहीं थे, शायद किसी काम से या शादी के कार्ड बाँटने बाहर गये थे.
अंदर जाकर हम बैठे, ताईजी ने चाय बनाई. शुरुआत जरा फ़ॉर्मल बातों से हुई. आखिर मैं भले ही आठ दस दिन बाद आया था लेकिन ताईजी के लिए तो पहली बार आया था. मैं नजर बचाकर जितना हो सकता है, जूली और प्रीति के उन घरवालों को देख रहा था. “” मेरी कुसुम के साथ दूसरी शादी काफी अधिक उम्र में बिना किसी शोर शराबे, मेहमानों की उपस्थिति और तैयारियों से हुई थी इसलिये हम दोनों के ही रिश्तेदार ना के बराबर आये थे यहाँ तक ताई जी भी नही आई थी और मीनल भाभी थी जरूर पर तब किसी से ज्यादा मिलने जुलने का मौका नहीं मिला था.. . . . . .. “”
मीनल दिखने में बड़ी आकर्षक थी, याने कोई ब्यूटी क्वीन नहीं थी जूली, प्रीति और कुसुम की तरह, पर फिर भी उसको देखते ही मन में और दूसरे अंगों में भी गुदगुदी सी हो रही थी. इस समय सलवार कमीज पहने थी, बिना ओढनी, के जिसमें से उसका सुडौल मांसल बदन खिल कर दिख रहा था. टाइट कमीज में उसके जवान उरोज मचल मचल कर बाहर आने को कर रहे थे. फिर याद आया कि अभी एक साल पहले ही वो मां बनी थी तो उसका भी एफ़ेक्ट पड़ा होगा उसकी ब्रा साइज़ पर……… वो थी भी अच्छी, भरी पूरी, मेरी सालियों और कुसुम से एकाध इंच लंबी ही होगी, कम नहीं…..
ताईजी ने तो मुझे मंत्रमुग्ध कर डाला. वैसे भी मुझे उमर में बड़ी औरतों से खास लगाव है, ज्यादा पके फ़लों जैसी वे ज्यादा ही मीठी लगती हैं. और ताईजी तो एकदम माल थीं. जूली और कुसुम की ताई – मेरी सास के बारे में वैसे मुझे ऐसा सोचना नहीं चाहिये ऐसा मेरे मन में आया पर मन पर काबू करना बड़ा मुश्किल था. चेहरा बड़ा खूबसूरत था,
मेरी सगी सास से थोड़ा अलग था पर एकदम स्वीट. बदन भरा पूरा था, मोटा नहीं था, पर कद में छोटी थीं, करीब पांच फुट की होंगी और इस वजह से बदन थोड़ा खाया पिया दिखता था पर उनके बदन में मांसलपन भले हो, सिठानी जैसा मुटापा नहीं था. और एकदम गोरी चिट्टी थीं, उनका पेट और बाहें जो दिख रही थीं, उससे उनकी स्किन कितनी चिकनी है ये दिख रहा था. बाकी तो ज्यादा कुछ दिखा नहीं क्योंकि वे अपना आंचल अपने बदन में लपेटी हुई थीं. मेरे मन में आया कि इनको सिर और पैरों से पकड़कर छह इंच खींच दिया जाये और कमर के नीचे के याने चौड़े भरे हुए भारी भरकम कूल्हों को दो हाथों के बीच रखकर थोड़ा पिचका दिया जाये तो एकदम मॉडल लगेंगी.
उनके छोटे बेटे शौर्य को देखते ही कोई भी कह देता है कि वो उन पर ही गया है, एकदम हू बहू वही चेहरा है उसका. लेकिन अब तक दाढ़ी मूंछे आने के भी कोई निशान नहीं है इसीलिये जूनियर कॉलेज में होने के बावजूद किसी सातवीं आठवीं के लड़के जैसा चिकना दिखता है. लगता है मेरी तैया सास के ज्यादा अंश आये होंगे उसके जीन में. शौर्य जरा शर्मीला सा है. मेरी ओर देख रहा था पर कुछ बोल नहीं रहा था.
शायद मीनल भाभी का मूड था गप्पों का पर चाय खतम होते ही ताईजी ने सब को जबरदस्ती उठा दिया “चलो सब, अब खाना बना दो, . बाकी गप्पें अब खाना खाने के बाद”
मीनल भाभी मुस्करा कर बोली “जीजाजी, सिर्फ़ गप्पों से मन नहीं भरेगा हमारा. दो दिन को तो आये है हम, अब आप पूरे जूली की शादी बाद ही जायेंगे। हमने तो घंटे घंटे का टाइम टेबल बनाया है आप के लिये, और वो तो असल में अभी से बनाया था, आपके यहां पहुंचने के टाइम से, है ना ताईजी” फिर वो जूली और कुसुम की ताई की ओर देखकर मुंह छुपा कर हंसने लगी. मीनल भाभी के चेहरे पर भी बड़ी शैतानी झलक रही थी, जैसे उसे सब मालूम हो कि क्या प्लान बन रहे हैं.
ताईजी ने मीठी फटकार लगाई “अब वो सब रहने दो, देखा नहीं कितने भूखे हैं , उनको खाना खाने दो पहले, नहीं तो सब गप्पों का मजा ही किरकिरा कर दोगी तुम लोग. और मीनल, जीजाजी जीजाजी क्या कर रही है तू, अरुण तुझसे बड़े हैं, तेरी ननद के पति हैं, तेरे ननदोई हुए ना!”
“ताईजी, मैं तो जीजाजी ही कहूंगी. अच्छा लगता है, साली जीजा का रिश्ता आखिर कौन निभायेगा.” मीनल भाभी ने शैतानी भरी नजरों से मेरी ओर देखते हुए कहा. “या फिर सीधे ” अरुण ” कहूंगी”
ताईजी बोलीं “तू मानेगी थोड़े! जूली बेटी जा, जीजा जी के हाथ पैर धुलवा दे, और छत पर ले जा मैं खाना वहीं भिजवाती हूं”
मै बोला ” ताईजी, अब खाना वाना रहने दो, भूख नहीं है, बस अब घर निकलता हूं सुबह आ जाऊंगा”
ताईजी बोली नही अरुण बेटा अब तुम कही नही जा रहे हो आज यहाँ ही रुको वरना तेरी सगी सास, जूली और कुसुम की मम्मी मुझे ताने मारेगी मेरे दामाद की खातिर नही की और भूखा ही भगा दिया।
मीनल भाभी बीच में ही बोली ” खाना खाने के बाद दूध कैसा पियेगे जीजाजी गरम या ठंडा ?”
मीनल भाभी जूली की ओर देखकर मुस्कराने लगी. ताईजी थोड़ी चिढ़ सी गयीं “तुम दोनों नहीं मानोगी. मीनल तू भी जा, दूध मैं गरम कर लूंगी”
मै जूली के साथ हाथ पैर धोने के लिए छत पर चला गया…..
मैने जूली से पूछा कैसी हो??
ये सुनकर उसकी आँखों में पानी भर आया और मेरा हाथ पकड़कर जूली एक लंबी सांस लेते हुए बोली जीजू मुझे ये शादी नही करनी है,
क्यो??? परसो शादी है, और अब तुम मना कर रही हो?? हुआ क्या है?? लड़का तो तुम्हे पसंद था?? तुम्हारे बीच काफी फोन पर बातें भी हो रही थी?? लेकिन अब ऐसा क्या हुआ कि तुम उससे शादी करने को मना कर रही हो?? मैने एक सांस में ही जूली से सवालों की लाइन लगा दी।
जूली बोली जीजू अब मै आपको कैसे और क्या बोलू मुझे तो बोलने में भी शर्म आ रही है।
मै— अरे पागल बोलेगी नही तो मुझे पता कैसे चलेगा जो भी तुम दोनों के बीच हुआ है वो मुझे सच सच बताओ???
जूली— जीजू मै उससे फोन पर कुछ ज्यादा बात करने लगी थी और मिड नाइट को कुछ ज्यादा ही हम ओपन होकर वीडियो काल पर बात करते हुए फोन सेक्स करने लगे। ऐसे ही कुछ दिन तक चलता रहा पर मुझे ऐसा लगता है कि उसका वो ठीक नही है और छोटे बच्चो की नुनिया की तरह दिखता है।
मै समझ तो गया था जूली क्या बोल रही है पर मै उसके मजे लेना चाहता था आखिर साली है मेरी, मजाक का हक तो बनता है। मै बोला “वो” क्या जूली???
जूली ऑफ ओ. … वो….वो… डिक यार।
मै हँस पड़ा। हाहाहा हाहाहा
और हस्ते हुए बोला रिमोट के साइज से कोई फर्क नही पड़ता बस tv सही से चलानी आनी चाहिए……. साली जी।
जूली बोली डियर जीजू अगर रिमोट के सेल ही खराब हो तो tv on ही नही होगी। चैनेल तो बदलना दूर की बात है।
मै— मतलब???
जूली— जब मै उसके साथ फोन सेक्स पर बात करते हुए अपना ऊपर का टॉप भी नही निकाल पाती इतने में उसका छोटा सा डिक पानी छोड़ देता है, और वो फोन कट कर सो जाता। अब आप ही बताओ अगर अभी फोन पर ये हाल है तो बिस्तर पर क्या होगा??? मुझे उसके साथ शादी कर के अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती नही करनी है। मै ये बात प्रीति दीदी और कुसुम दी को भी बताई वो दोनों उल्टा मुझे ही सुनाने लगे कि शादी से पहले ही रंग रेलिया चालू हो गयी तेरी। उन दोनों को अभी तक मेरा होटल वाला कांड को लेकर कही ना कही नाराजगी है।
आखिर में दोनों दिदियो ने हमारी गरीबी का वास्ता देकर और एक melo ड्रामा के साथ
ऑर्डर सा दिया है, कि अगर मैने शादी के लिए मना किया तो मेरी शामत आ जायेगी। अब आप ही बताओ मै क्या करू????
जीजू आपको तो पता ही समाज वाले कभी लड़को की कमी पर कुछ नही बोलते और लड़की का ढिंढोरा पीट पीट कर उसे बदनाम कर देते है।
मै— जूली कि बात सुनकर चिंतिंत हो गया पर मन ही मन सोचने लगा समस्या गंभीर जो थी। मै भी कुछ समझ नही पा रहा था क्योकि शादी के दो दिन पहले शादी तोड़ने की बात करना वो भी ये बोलकर कि लड़के का लंड छोटा या जल्दी पानी छोड़ देता है, बड़ी शर्मनाक बात होगी।
और इसका उल्टा असर जूली की लाइफ पर ही पड़ेगा क्योकि वो सच कह रही है समाज के लोग उसे ही बुरा भला कहेंगे, यहाँ तक ये बोलेंगे की लड़की क्या अब लड़को का लंड देखकर, हिलाकर, नाप तौल कर, और तो और चुदवा कर चेक करने के बाद शादी करेगी।
“” मुझे समझ आने लगा था आजकल अक्सर बहुत सारे शादी के रिश्ते ठीक शादी के पहले क्यो टूट जाते है, क्योकि जूली की तराह वो लड़किया जो ज्यादातर वर्जिन, बिना आशिक और affair, और arrange marrige करने वाली लड़किया शादी से पहले होने वाले पति के साथ रात रात भर नंगी होकर मिड नाइट शो चलाती है और पसंद ना आने पर शादी तोड़ देती है “”
“”मेरे हिसाब से लड़को की भी गलती होती है जो गिफ्ट शादी के बाद surprise के साथ first नाइट को दिया जाता है वो गिफ्ट लड़के शादी से पहले ही खोल कर दिखा देते है और फिर जब लड़की को गिफ्ट पसंद नहीं आता है या उसकी फैंटेसी के हिसाब से मैच नही खाता है तो फिर रिजेक्ट कर देती है “””
मुझे सोचते हुए देख जूली बोली अब आप ऐसे क्यो चुप हो कुछ तो बोलो??
मै भी कुछ समझ नही पा रहा था क्या बोलू मैने जूली के चेहरे की तरफ देखा उसकी आँखों में एक आस, उम्मीद, आशा, बेचैनी थी जैसे कोई बीच रास्ते में भीख मांगने वाला आदमी हर आने जाने वाले को शक्स देखता है कि ये कुछ मदद करेगा।
जूली को भी अपनी जिंदगी के सफर की शुरुआत से पहले ही बीच रास्ते पर ठीक मंजिल के करीब खड़ी थी। और तो और जूली अपनी जिंदगी के इस फैसले सबसे बड़ी उम्मीद मुझसे इसलिए भी लगाए बैठी थी। होटल के कांड के बाद मैने ही उसे हिम्मत देकर नयी जिंदगी थी।
मै जूली से बोला तुम शादी कैंसल करने की अब सोचो भी मत। ना ही तुमहारे परिवार और उसके परिवार के लिए, ये अच्छा dicision नही होगा, ऊपर से सामाजिक तौर पर भी बड़ी बदनामी होगी। उल्टा लोग तुम्हे ही दोष देंगे।
मेरा जबाब सुनकर जूली की आँखों में आँसू भर आये, उसका चेहरा एक दम से उदास हो गया। मुझसे उसकी उदासी देखी नही जा रही थी।
मैने जूली के हाथ पर हाथ रखकर कहा
जूली तुम शादी कर लो लड़को को अक्सर ज्यादा exitment के करना जल्दी स्खलन हो जाता है, शादी के बाद जब एक दो बार तुम लोगो के बीच शारीरिक संबद्ध बनने लगेगे तो सब ठीक हो जायेगा, और नही तो उसका खुद का मेडिकल स्टोर है दवाई खा कर कर लेगा पर तुम्हे खुश रखेगा। Infact तुम्हे तो खुश होना चाहिए तुम्हे आज के जमाने में एक वर्जिन लड़का पति के रूप में मिल रहा है। क्योकि ऐसा अक्सर वर्जिन लड़को के साथ समस्या होती है, जिनका कभी कोई affair या लड़की के साथ सेक्स नही हुआ होता है।
जूली अभी भी खामोश थी और मेरी बात बड़े ही ध्यान से सुन रही थी। मैने माहौल को मजाकिया बनाते हुए कहा!!!!
फिर भी मन ना भरे या मजा कम लगे तो शादी के बाद की बात तो किसी के साथ affiar कर लेना… मैने ये बात उसे आँख मारते हुई बोला। हाहा हाहा
जूली थोड़ी भड़क गई और बोली जीजू मै आपको ऐसी लड़की लगती हू।
मै जूली का reaction देख कर डर गया और बोला वो वो जूली मेरा मतलब वो नही था।
जूली– मेरी फटी हुई गांड देख कर जोर से हँसी हाहाहा हाहाहा
और बोलि किसी और के साथ affair करने की तो मै सोच ही नही सकती, अगर affair करना ही पड़ा तो आपसे बेहतर मेरे लिए कोई चॉइस नहीं है। हाहाहा हाहाहा
मै ये सुनकर ख़ुशी से फूल कर कुपा हो गया और सोचने लगा मेरी प्यारी साली साहिबा तुम तो बस लाइसेंस ले लो, गाड़ी में चला दूंगा।
हम दोनों ही हँसने लगे तभी मेरे फोन की रिंग बजने लगी मेरे पापा का फोन था। वो किसी काम से हायवे के पास खाली हमारे प्लॉट के मुआयाने के लिए जा रहे थे और मुझसे वापस कब तक आओगे….. ये जानना चाहता थे ।
मैने वास्तविक स्थिति के बारे में बता कर एक घंटे में वापस घर आने की कह कर फोन काट दिया।
फिर मैंने जूली का हाथ पकड़कर कहा “अब तो खुश हैं ना साली साहिबा?”
जूली मुस्कराई “हां मेरे प्यारे जीजू. और अब देखना कल महिला संगीत में आप कितने खुश हो जाओगे. पता है, यहां अपने दामाद के स्वागत की, खातिरदारी की जम के तैयारी की गयी होगी”
“देखते हैं. वैसे तुम्हारे मम्मी पापा ने पहले ही मुझे जन्नत की परी जैसी तुम्हारी दीदी कुसुम और साथ ही तुम्हारी जैसी प्यारी साली …” उसकी कमर में चूंटी काट कर मैं बोला. ” … गिफ़्ट में दी है, अब उससे अच्छी और क्या खातिर करेंगे मेरी?”
जूली बस मुस्करा दी जैसे कह रही हो कि देखते जाओ अभी तो! इतना कह कर वो नीचे सीढ़ियों की तरफ जाने लगी।
“मेरी ठरक भरी जिंदगी की सबसे बड़ी बीमारी ये है कि जब कोई लड़की मेरे इतने करीब होती है तो उसके चूचे बिना दबाये या बिना सेहलाये मेरे हाथों की खुजली नहीं मिटती है! ” तो मैं जब मेरी दिल की रानी मेरी साली साहिबा जूली को पास खींचने लगा तो उसने कस के मुझे चूंटी काटी और धकेल दिया “अब मुझे तंग मत करो, अब जो करना है वो कल” फिर मेरे मुंह को देखकर तरस खाकर बोली “कल से आपका एकदम टाइट प्रोग्राम है, उसके लिये जरा तैयार रहना, आज सब्र कर लो, मैने कहा तो कल कुछ अच्छा होने वाला है क्या!”
वो हस्ती हुई नीचे चली गई, उसके पीछे पीछे मै भी नीचे पहुँच गया।
खाना खाकर मै बैठ गया, वाह ताई जी मजा आ गया। बहुत स्वादिष्ट भोजन था…. पता ही नही चला कितनी रोटी खा गया मै।
इतना सुनते ही मीनल भाभी बोली सालियों के हाथ से खिलायी गयी रोटी और दिये गये चुंबन कभी गिने नही जाते…. ये बात सुनकर पूरा हाल हँसी से गूँज उठा।
इधर शाम के 5:00 बजने वाले थे पर मै अभी भी अपने ससुराल में सालियों के साथ बिज़ी था, आखिर एक लंबी हँसी ठिठोली और स्वादिष्ट भोजन के बाद मै फ्री हुआ, मै उनके साथ अब छत पर जा बैठा था कि अचानक आसमान में काले बादल छा गए, ओर बदलो की गड़गड़ाहट के साथ ही हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई, पर मौसम को देखकर लग रहा था कि आज तो पूरी रात ही बारिश होने वाली है। मैने मौसम के बिगड़ते हालातों को देखते हुए अपनी ससुराल से विदा लेना ही मुनासिब समझा।
मै तुरंत बाइक पर बैठा और फर्राटे से गाड़ी को दौड़ाने लगा, घर तक पहुंचने में मुझे एक लंबा सफर तय करना था, मैने सोचा कि रात का खाना बाहर से ही खरीद कर ले चलते है ताकि रिंकी को इस मौसम में परेशानी न उठानी पड़ी, यही सोचकर मैने पिज़्ज़ा हट के सामने अपनी गाड़ी रोकी और जल्दी ही 3 पिज़्ज़ा और ठेले से कुछ गरमा गरम भुने भुट्टे पैक करवा लिया, मैने रिंकी को फ़ोन करके भी बता दिया कि वो आज खाना ना बनाये।
मै सारा सामान पैक करके निकला ही था कि अब मूसलाधार बरसात शुरू हो गई, देखते ही देखते पुरी सड़के पानी से तरबदतर हो गई, और तुरंत गाड़ी को घर की तरफ दौड़ा दिया, रास्ते भर में चारो तरफ पानी ही पानी था, आषाढ के मौसम में कभी कभी जो बारिश होती है उसमें तेज तेज ठंडी हवा भी चलती है, थोड़ा भीगने की वजह से मुझ को हल्की हल्की ठंड भी लग रही थी, पर मै लगातार गाड़ी चलाते हुए घर पहुंचने की जल्दी में था।
लगभग 1 घण्टे के सफर के बाद मै घर पहुंच गया, मैने तुरंत गाड़ी साइड में खड़ी की और भागकर दरवाज़े की बेल बजाई, जल्दी ही रिंकी ने दरवाज़ा खोला तो देखा पापा हाथ मे कुछ पैकेट लिए भीग रहे है, उसने तुरन्त मुझ से अंदर आने को कहा
मैने अंदर आकर पैकेट रिंकी को पकड़ाया ही था की रिंकी की ड्रेस देखकर मै लगभग गिरते गिरते बचा था , रिंकी ने आज एक छोटी सी ब्लू कलर की स्कर्ट पहनी थी जो उसके घुटने से भी काफी ऊपर थी, उसकी सुडौल गदरायी जाँघे बिल्कुल नंगी मेरी आंखों के सामने चमक रही थी, ऊपर जो उसने टॉप पहना था वो बमुश्किल उसके खूबसूरत मम्मों को छिपाए था, उसके कसे हुए मम्मे उसकी टीशर्ट में कैद होकर भी अपनी शेप को बखूबी बता रहे थे, मेरी पारखी नज़रों ने तुरंत ताड लिया क़ि आज रिंकी ने अंदर ब्रा नही पहनी है,

ये सोचकर तो मेरा दिमाग भन्ना ही गया, जहाँ खड़ा था वही जड़वत खड़ा रह गया, मेरे माथे पर पसीने की कुछ बूंदे उभर आई जो बारिश के पानी मे मिलकर मुझे गर्म और ठंडे दोनों का अहसास एक साथ दे रही थी, मेरी उत्तेजना धीरे धीरे बढ़ने लगी, शरीर गरम होने लगा, आंखे एकटक रिंकी के अधखुले बदन को निहारे जा रही थी, मेरे लिए तो मानो दुनिया ठहर सी गयी, मै तो इस पल को सदा सदा के लिए अपनी आंखों में कैद कर लेना चाहता था, मेरे होठ सूखने लगे, बड़ी मुश्किल से थूक निगलते बना, सांसे भारी भारी सी होने लगी, ऐसा लग रहा था कि अगर मै थोड़ी देर और इस नवयौवन को निहारता रहा तो कहीं अपना आपा न खो बैठू, कहीं कोई भूल न हो जाये।
इसलिए उसने अपनी पूरी हिम्मत समिति और लगभग भागते हुए अपने रूम में घुस गया, भीगे कपड़े पर गरम शरीर , मेरे मन मे अजीब से ख्याल आया रहे थे, मैने तुरन्त अपने भीगे कपड़े निकाले और अपनी बेकाबू सांसो को समेटकर टॉवल से अपने शरीर को पोंछने लगा, बिल्कुल नंगा अपने कमरे के बीचों बीच खड़ा खुद को सुखा रहा था, मेरा लोडा अभी के नजारे को देखकर बुरी तरह फनफना रहा था, लंड की नसें तनकर बिल्कुल चमक रही थी
इधर रिंकी की आंखों से मेरी ये हालत छुप नही पायी, दरअसल ये उसी की खुराफात थी , उसने पहले से ही मुझ पर कहर ढाने की तैयारी कर ली थी,
मैने अपने शरीर को अच्छे तरह से पोंछने के बाद एक पतले कपड़े का वाइट टॉवल लिया, और उसे अपनी कमर के इर्द गिर्द लपेट लिया, मेरी वासना अभी भी शांत नही हुई थी, रिंकी की कातिल अदाओं को देखकर मै इतना ज्यादा उत्तेजित हो चुका था कि डर था कि कहीं लंड का लावा फूट ना पड़े। लंड की नसों में खून का दौरा दुगनी गति से दौड़ रहा था। लंड इतना ज्यादा टाइट हो चुका था कि टॉवल के दोनों छोर को जहां से बांधा हुआ था, लंड के तगड़ेपन की वजह से टॉवल का वह छोर हट गया था या युं कह सकते हैं कि लंड टॉवल फाड़कर बाहर आ गया था,

बड़ी मुश्किल से मैने अपने लंड को थोड़ा शांत किया, और फिर अपना पजामा और टीशर्ट पहनने के लिए अलमारी खोली,
अलमारी खोलते ही मेरे आश्चर्य का ठिकाना ही ना रहा, अलमारी में कपड़े का नामो निशान ही नहीं था, वो इस तरह खाली थी जैसे उसमे कभी कपड़े थे ही नही, मुझे समझ नही आ रहा था कि मेरे सारे कपड़े गए कहाँ, अब मुझे लगा कि शायद मुझे रिंकी से ही पूछ लेना चाहिए, पर समस्या ये थी कि इस हालत में मै उसके सामने कैसे जाऊ।
थोड़ी देर इसी उलझन में रहने के बाद मेरी ये समस्या अपने आप ही सुलझ गयी, दरअसल भारी बारिश के चलते पूरे कस्बे की बत्ती गुल हो गयी थी, चारों तरफ घुप्प अंधेरा छा चुका था, बारिश के बाद का ये अंधेरा इतना गहरा था कि मेरी आंखे अपने हाथों को भी नही देख पा रही थी, पर मुझे इस बात की खुशी थी कि मै अब आसानी से रिंकी के सामने जा सकता था,
मै दबे पांव अपने कमरे से बाहर निकला, पर अंधेरे में मुझे रिंकी कहीं नज़र नहीं आ रही थी, हारकर मैने रिंकी को आवाज़ लगाई
” रिंकी… बेटी, कहाँ हो तुम?” मैने हल्की आवाज़ में उसे पुकारा
“मैं यही हूँ पापा, सोफे पे बैठी हूँ” रिंकी ने जवाब दिया
” रिंकी, वो….वो…मैं पूछ रहा था कि मेरे कपड़े कहा गए अलमारी से , वहां पर एक भी कपड़ा नही है” मैने पूछा
“सॉरी पापा, मैन सुबह सारे कपड़े धोने को डाल दिए थे, मैन सोच आपके आने तक सभी कपड़े धोकर सूखा दूंगी, पर मुझे क्या पता था कि इतनी जोर की बारिश आ जायेगी, इसीलिए कपड़े नही सुख पाये, और कुछ कपड़े तो अभी भी छत पर ही है क्योंकि बारिश इतनी तेज हो गई थी कि मुझे उन्हें उतारने का मौका ही नही मिला, एम रियली सॉरी पापा” रिंकी ने शातिर तरीके से जवाब दिया
“पर अब मैं पहनूं क्या, मेरे कपड़े तो बरिस में आते टाइम गीले हो गए” मैने परेशान होकर कहा
“अरे पापा, अब आप कोनसा बाहर जा रहे है, कोई तौलिया लपेट लीजिये न” रिंकी बोली
“अरे वो तो अभी लपेट ही है मैंने वरना कोई नंगा….मेरा मतलब ऐसे ही थोड़े खड़ा हूँ” मै बोला
“वैसे बिना कपड़े के होंगे तो भी मुझे दिखाई नही देगा, अंधेरा कितना है” रिंकी ने अब अपने पूरे हथियार इस्तेमाल करने का फैसला कर लिया था
“क्या……..” मै, रिंकी के इस बेबाक अंदाज़ से थोड़ा ठिठक गया पर मेरे लंड ने एक जोरदार तुनकी ली
“कुछ नही पापा, वो मैं कह रही थी कि मैं पानी गर्म कर देती हूं, आप थोड़ी देर बाद नह लीजिये , वरना बारिश के पानी से सर्दी लग जायेगी” रिंकी ने बात बदलते हुए कहा।
थोड़ी देर शांति के बाद अब रिंकी अपना तुरुप का पत्ता फेंकने वाली थी,
“पापाआआआ…..” रिंकी ने कहा
“हां, रिंकी” मैने थोड़े दुलार से कहा
“पापा मुझे आपसे एक बात कहनी है” . ……
जारी है. ….

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