“ये सोचना गलत है कि तुम पर नजर नहीं, मसरूफ मै बहुत हूं मगर बेखबर नहीं. ..?????
रात गहरी हो गयी थी, हम दोनों ने वीडियो काल disconnet करने की जेहमत नही की, कुसुम एक सिराने तकिये से टिकाए अपना फोन चालू किये नींद की आगोश में चली गई….. मैं विडिओ काल में मोबाइल की बैटरी खतम होने तक उसे देखना चाहता था……. ‘ मैं पागल हु या उसका दीवाना या महा बेवकूफ, उसकी वही प्यार भरी बाते वही प्यार वही चहरा,इतना प्यार लुटाना की लगे किस्मत ने सब दे दिया है,पर कुसुम के प्यार में झूट नहीं था जो मुझे अंदर से झकझोर रही थी मैं मान ही नहीं पा रहा था की वो मुझे प्यार नही करती है, पर क्या करू कितना भी बुरा सोच कर भी मैं कुसुम के प्यार को झुठला नहीं पा रहा था,वो प्यार तो असली ही था,पूरा खालिस असली मन की गहराई से निकला हुआ, फिर क्यों ये धोखा…वही उसका सज धज के ऑफिस जाना, मेरे अरमानो को उजाड़ कर वापस आना, रात रात भर गैरो से बतियाना. ……. अपने पति की मोहबत भरी शायरियों, गजलो, बातों को गैरो की गंदी बातों के बीच बेआबरू करना। उसका सोते हुए भी मुस्कुराहट बिखेरता हसता चहरा देखकर दिल से आह एक निकली “क्या बेवफा भी इतनी प्यारी, इतनी निर्भीक इतनी मासूम होती है……””. ?????
सुबह जब मेरी नींद खुली तब मैं ये सोचकर खुश तो था, कि कुसुम ने मुझसे अब किसी गैर से रातों को बात ना करने का वादा किया था लेकिन मन में एक कोने में कश्मकश तो था। मैं फ्रेश वगेरा होकर बाथरूम से बाहर आया देखा तो मेरा मोबाइल पूरा चार्ज हो चुका था ,मुझे बहुत ही खुशी हुई और मैं जल्दी से उसे उठा लिया,
आज रविवार का दिन कॉलेज की छुट्टी और मुझे घर में कुछ काम तो वैसे भी नही था सबसे पहले मैने अपने मोबाइल स्क्रीन पर चमक रहे कुसुम के मेसेज को पढ़ा……
कुसुम जी का गुड मॉर्निंग मेसेज मेरे लिए ग्लूकोन डी से कम नही था। फिर अपने मोबाइल में उस एप्प को खोलकर देखने लगा और उसके वाट्सअप मेसेज पड़ने की सोची……..!
शर्मा जी के कुछ मेसेज थे , शर्मा जी से तो पता नही क्यो मुझे चिड़ सी होने लगी थी पर साले की किश्मत बहुत ही बुलंद थी कि कुसुम जैसी हसीन परी उसे लाइन दे चुकी थी।
शर्मा कुसुम को मनाने की कोसिस कर रहा था पर कुसुम कोई भी जवाब उसे नही दे रही थी,आख़िरकार उसने अपना ऑफिस के काम का दुखड़ा रोना सुरु कर दिया और कुसुम भी थोड़ी पिघल गयी । कुसुम आज दूसरी तहसील में अन्य कर्मचारियों के साथ पर्यवेछ्न के लिए जाने वाली थी, इसकी मा का साली कुसुम भी क्या चुतिया वाले काम कर रही है, इसे आज संडे को भी शर्मा की ड्यूटी बजानी है, मेरे दिमाग ने कहा…!!
दूसरा msg था संजय भाईसाहब का जो कल रात तक unread दिख रहे थे, उसे कुसुम ने आज सुबह ही पढ़ा था । संजय ने पर ये msg उसने रात में और आज सुबह किये थे ,कोई प्रॉब्लम वाली बात तो कही दिखाई नही दी पर कुसुम की तारीफों के पुल उसने बांधे थे, जैसे आप बहुत सुंदर हो, आपका काम करने का तरीका बहुत अच्छा है वगैरह , मतलब साफ था उसने कुसुम को लाइन मारना शुरू कर दिया है बस बात थी कुसुम के हा की , कुसुम रिप्लाई में बस ऑफिस में मिलते है और कुछ स्माइल लिखकर भेज दिया था,,….
आखिर कार मुझे समझ आ गया एक पत्नी कभी उस पति की कद्र नही करती जो पति उसके सामने हर बात पर झुक जाता हो ?????? अब आगे क्या होगा ये तो मुझे नही पता था बस आज रात का इंतजार जरूर था….
माथा तो खनक गया था पर शायद कुसुम इतनी भी जल्दी पटने वाली लड़की नही थी, शायद वो कुसुम को तब से पटा रहा हो जब से मैं उसे नही जानता……ह्म्म्म हो तो सकता है ,या नही भी चलो जो भी हो मेरी बीवी ने तो अपने कारनामे दिखा ही दिए और अब डर काहे का, साला अब काहे की शर्म हाय ,वो मस्ती करे तो मैं पीछे क्यो रहू, तो क्या उसे दुसरो से चुदते हुए देखना ही मेरी नियति है,…………..? ?? मेरे दिमाग में एक लहर सी उठी नही यार क्यो न मैं भी किसी को ट्राय करू.पर किसे…. ????
मैं जिनको जानता था उनमे से कोई भी ऐसा नही था जिसे मैं ट्राय कर सकू… और आसानी से हासिल कर सकूँ। सभी शादीशुदा औरते (प्रीति, सुनीता) थी या तो बहुत ही छोटी (शशि कॉलेज की छात्रा) थी जिन्हें पटाना मेरे दिल को गवाही नही दे रहा था, तो फिर किसे मैंने अपना मीटर घुमाया, एक लड़की ही मेरे लायक थी, और जिसे मैं आसानी से हासिल कर सकता था..
मेरी बेटी रिंकी …………..
नही यार……….
हा ना यार…………
अरे नही यार इतना भी चरित्र मत गिरा………..
अबे मादरचोद जब तेरी बीवी गैर मर्दों के साथ मस्ती कर सकती है तो तू अपने बीवी की बेटी को क्यो नही चोद सकता..
हम्म्म्म……..
मैं मन ही मन अपने अवचेतन मन से बातें करने लगा……….!
तो क्या मैं सच में ऐसा कर सकता हु……..
क्यो नही…….
लेकिन मैं तो कुसुम से प्यार करता हु ना……..
पर साले रिंकी भी तो तुझसे प्यार करती है, कल रात को ही उसने साफ साफ बोल तो दिया वो तेरी मम्मी की कमी दूर करने को तैयार है….! कोनसी वो तेरी सगी बेटी है,
न पर वो पापा को पता चला तो …………..
देख भाई हम सब इन्सान है और इन्सान होने की सबसे बड़ी जो खासियत है वो है हमारी भावनाए ,पर ये समाज,धर्म , रिश्ते और नैतिक बन्धनों से भी हम बंधे हुए है।जो हमें सिखलाते है की ये करो ये मत करो , हम है तो मूलतः जानवर ही ना ,पर यही बंधन हमें जानवरों से अलग करते है ,लेकिन इन्ही बन्धनों के कारन हम अपनी भावनाओ को दबाते है ,और उसका परिणाम होता है,विकृति …..हमारी असली भावना कही छुप जाती है और वो विकृत होकर प्रगट होती है ,इसलिए लोग हत्या करते है चोरी करते है ,और सबसे बड़ी और मूल भावना है सेक्स की भावना लेकिन हमें बचपन से ही इसे दबाना सिखाया जाता है ,इसका परिणाम होता है की हम ना तो प्यार कर पाते है और ना ही इससे पूरी तरह से छुट पाते है ।
मुझे मन ही मन कुछ कुछ चीजे समझ आने लगी थी।
तेरी बीवी बेवफ़ाई पर उतारू है और तू यहां शराफत दिखा रहा है, रिश्तों की बात कर रहा है, रिंकी खुद सामने से बोल चुकी हैं, देने के लिए तैयार है,सोच साले साली के क्या बड़े बड़े चूची है……….सोच….
मेरी अंदर की एक शैतानी सी आवाज ने मुझे झकझोर सा दिया और जब मुझे होश आया तो मैंने अपने नीचे के भाग में गौर किया वहाँ एक बड़ा सा तंबू बना था…..मैंने अपने तंबू को मसला और मेरे मुह से अनायास ही निकल गया…
“हाय रे रिंकी …….”
पर साला चड्डी के नीचे से कुछ और ही आवाज आई एक जोरदार झटका मेरे लिंग ने मारा और मेरे होठो में एक मुस्कुराहट सी आ गयी…
अब मेरी बेटी के लिए भी मेरी फीलिंग्स अब बदल चुकी थी अगर उस समय मैं कुछ सोच सकता था तो सिर्फ़ अपनी जवान बेटी की हसरतों के बारे में, और उस के लिए मेरे दिल में पैदा हो रही हसरतें. क्या वाकाई वो मेरी खावहिश बन गयी थी? मेरे पास किसी सवाल का जवाब नही था.
सुबह के आठ बज चुके थे।
उधर रिंकी उठी ब्रश किया और सबको गुड मोर्निंग कहा और मुझे भी हमेशा की तरह गले लगा के विश किया आज उस के गले लगने पर मुझे एक अजीब सा एहसास हुआ उसकी कोमल स्किन उसके बालो की खुशबु उसके बदन के स्पर्श से आज मुझे बहुत मजा आ रहा था मैं डाइनिंग टेबल पे बैठा था जब रिंकी ने मुझे झुक के गुड मोर्निंग विश किया.
जेसे ही रिंकी झुकी तो मेरी नजरे रिंकी के कुर्ते के अंदर गयी क्या नजारा था रिंकी ने कुर्ते के अंदर ब्लैक शमीज पेहेन रखी थी और शमीज के अंदर ब्रा पेहेन रखी थी उसकी ब्रा का शेप तो मुझे दिखा लेकिन कलर नही दिखा क्योंकि उसकी शमीज का कलर ब्लैक था लेकिन अंदर क्या शेप बन रहा था उसके झुकने के कारन उसके चूचे थोड़े से लटक भी गए थे आह क्या चूचे थे।
मुझे हग करके वो भी टेबल पर बैठ गयी नाश्ता करने के लिए । उसके दादाजी (मेरे पिता श्री) न्यूज़ पेपर पढ़ रहे थे। मेरी नजर तो बार बार रिंकी ही जा रही थी वो कुछ भी लेने के लिए हाथ इधर उधर करती तो उसके कुर्ते के गैप मे से मुझे उसकी शमीज और ब्रा की स्ट्रैप्स दिखाई देती जिसे देखने मे मुझे बहुत मजा आ रहा था।
मैं बार बार उस की शमीज और ब्रा के स्ट्रैप्स उसके कुर्ते की साइड के गले मे से देख रहा था अंदर के शरीर की गोरी गोरी कोमल skin देखने मे मुझे बड़ा मजा आ रहा था नाश्ता करते हुए मै किसी न किसी बहाने से रिंकी का हाथ टच कर रहा था। मैंने सोचा की अब और कैसे रिझाउ तभी मै “अरे रिंकी sandwitch तो अच्छे बने है, सॉस की बोतल किचन मे से लाके उसे देते हुए बोला……… “क्या हुआ अरुण आज बड़ा प्यार आ रहा है तुजे अपनी बेटी पे ” मेरे पापा अखबार को लपेटते हुए बीच में बोल पड़े….
मैंने कहा नहीं पापा वो तो एसे ही” और पापा के बाहर जाते ही रिंकी के पीछे से उसके गले मै हाथ डाल के खड़ा हो गया और उसके कुर्ते के गले मे झाँकने लगा । और उसकी ब्रा स्ट्रैप्स को महसुस करने लगा । मेरे साथ एसा कुछ होगा मैंने कभी नहीं सोचा था। यह बिल्कुल बेतुकी बात थी. शायद अब मेरी नजरे भी रिंकी को कुछ कहना चाहती थी या उसे कुछ समझाना चाहती थी.
रिंकी की मदमस्त जवानी इस वक्त मेरे दिल पर छुरी चला रही थी. मै भला खुद को काबू में रखने की कोशिश भी करता तो कब तक? रिंकी की जवानी मेरे धैर्य और संयम की परीक्षा ले रही थी. मै पूरी कोशिश कर रहा था कि इन सब बातों को इगनोर कर दू लेकिन मेरा मन बार बार विचलित हो रहा था.
मै इस बात से बिल्कुल अन्जान नही था कि रिंकी भी कुछ इसी तरह के ख्यालों से घिरी हुई थी. उसके मन में भी वही हालात चल रहे थे जिनसे मै गुजर रहा था. ये लड़कियों की 18-19 की उम्र होती ही ऐसी है कि सब संयम हाथों से छूटता सा नजर आता है. कई बार कदम लडखड़ा जाते हैं.
वहाँ उस समय उस नास्ते की टेबल पर हम दोनों के बीच जो कुछ घटित हो रहा था, इतना मैं ज़रूर जानता था. मगर हमारे बीच रिश्ते का अवरोध था, एक बहुत बड़ी बाधा थी जो किसी असाधारण अनोखे तरीके से ही दूर हो सकती थी. मगर वो अवरोध वो बाधा जितनी बड़ी थी उतनी ही आसानी से दूर नही हो सकती थी.
इतने में ही मेरे फोन का रिंगटोन बजने लगा- “दूरी ना रहे बाकी, तुम इतने करीब आओ कि तुम मुझ में समा जाओ, मैं तुम में समा जाऊं.” मोबाइल की स्क्रीन पर जब मैने कुसुम का फोटो के साथ नाम देखा…
तो मन ही बोला अब इसकी सेजवानी में क्या परेशानी हो गयी……
हैलो — जी कहिये, सुबह सुबह इतनी जोर से याद आ गयी मैडम जी को कि फोन लगाना पड़ा …??? ह्म्म्म
पत्नी हू तुम्हारी जब जी चाहेगा तब फोन लगा सकती हु….. ह्म्म्म…. अब ये सब बातें छोड़ो मै जो कह रही हूँ वो सुनो।
जी फरमाइये क्या आदेश है…???
जूली की शादी है….परसो ..! कल महिला संगीत है, उसमें शामिल होने के लिए प्रीति दीदी रेलवे स्टेशन पर आने वाली है, उनको जरा पिक कर घर पर छोड़ सकते हो….? उनके साथ बहुत ज्यादा सामान है, रिंकू और पापा बाहर गये है…..???
मै क्या ऑटो रिक्शा वाला हू… ह्म्म्म जो मुझसे कह रही हो।
एक ही शहर (लोकल) में शादी करी है तो इतना तो करना पड़ेगा, दोनों घरों के फर्ज निभाने होंगे।
कुसुम के मुह से फर्ज की बात सुनकर मेरे पिछवाडे में सी आग लग गयी।
कभी अपना फर्ज भी याद कर लिया करो, कुसुम मैडम….
ओफ्फो तुमसे बात करना ही बेकार है।
तो ठीक है ना, मत करो बात…… खुद आ जाओ और ले आओ अपनी बहन को…..
मै और मम्मी आज दोपहर तक आ चुकी होती, लेकिन आज सन्डे को भी उस शर्मा ने तेहसिल में पर्यवछ्न करने के लिए बुला लिया है।
क्या चूतिया आदमी है…. शर्मा
मुझे पता है…. यार…. लेकिन ये इंपोर्टेंट नही है कि वो चूतिया है, ये इंपोर्टेंट है, वो शर्मा ऑफिस का हेड है…… मै इसलिए आज देर रात तक आ जाऊंगी। pls आप अभी चले जाओ आपकी चहेती साली ने खुद बोला था, इसलिए मै बोल रही हूँ। अब ज्यादा टाइम बर्बाद ना करो, और जाओ।
ठीक है…. और कोई सेवा…. ह्म्म्म
एक बात बताओ रिंकी का फोन क्यों नही लग रहा है, दो तीन दिन से, वो ठीक तो है……??
उसका फोन ठीक होने गया है, अपनी बेटी से बात करनी है क्या अभी….????
मै बस ऑफिस पहुँचने वाली हू, रात को घर आ कर फेस टू फेस बात करती हूँ, ओके बाय…..
मैंने घड़ी देखी ट्रेन के आने का समय 10 बजे का था और साढ़े 9 बज चुके थे, मैंने समय ना गंवाते हुए गाड़ी की चाबी उठाई और मोबाइल उठा कर 139 डायल किया ताकि गाड़ी की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया जा सके। इंक्वायरी से पता चला कि ट्रेन आधे घंटे में पहुँचने वाली है।
कुछ समझ में नहीं आ रहा था। मैंने मोबाइल से प्रीति का नम्बर डायल किया तो उधर से प्रीति की मीठी चाशनी जैसी आवाज आई, “हैल्लो जीजाजी, मेरी गाड़ी बस 15-20 मिनट में स्टेशन पहुँचने वाली है, बताओ कहाँ मिलोगे?”
“तुम जहाँ बोलो, वहाँ मिल लेंगे !” दिल तो बहुत कुछ कहना चाह रहा था पर मैंने खुद पर काबू करने की कोशिश की और प्रीति से कोच नम्बर और सीट नम्बर पूछ कर उसको बता दिया कि मैं उसके कोच पर ही उसको लेने आ रहा हूँ। इतनी बात करके मैंने फोन काट दिया। मेरी तो जैसे लाटरी ही लग गई। आज बहुत दिनों के बाद मैं प्रीति को देखने वाला था और 4 किलोमीटर का सफर मुझे उसके साथ अकेले तय करना था बाइक पर।
यही सोचते सोचते मैं बाहर आ गया बाइक निकाली और स्टेशन की ओर चल दिया।
जब तक मैं स्टेशन पर पहुँचा तो उसकी गाड़ी के पहुंचने की घोषणा हो चुकी थी। मेरे प्लेटफार्म पर पहुँचने से पहले प्रीति की गाड़ी वहाँ खड़ी थी। मैंने तेजी से कोच नम्बर बी-2 के दरवाजे की तरफ अपने कदम बढ़ाये और अन्दर जाकर उसकी सीट नम्बर 16 को प्यार से निहारा।
प्रीति वहाँ नहीं थी, मुझे उस सीट से जलन हो रही थी जिस पर 7 घंटे का सफर तय करके प्रीति आ रही थी, सोचा कि काश इस सीट की जगह मेरी गोदी होती तो कितना अच्छा होता। सोचते सोचते मैं गाड़ी से बाहर आया और प्रीति को फोन मिलाया।
तभी किसी ने मेरी पीठ पर हाथ मारा, मैंने मुड़ कर देखा तो चुस्त पंजाबी सूट में मेरे पीछे प्रीति खड़ी मुस्कुरा रही थी। मैं उसके गुलाब की पंखुड़ी जैसे होंठों को देखकर वहीं जड़वत हो गया।
तभी प्रीति बोली, “जीजा जी, आपके साथ घर ही जाऊँगी स्टेशन पर ऐसे मत घूरो, घर जा कर घूर लेना।”
मैंने एक बार फिर से खुद को नियंत्रित करने की कोशिश की और बिना कुछ भी बोले उसके हाथ से अटैचीकेस लिया और वापस बाहर की तरफ चल दिया।
प्रीति भी मेरे पीछे-पीछे चलती हुई बोली, “लगता है जीजाजी नाराज हैं मुझसे कोई बात भी नहीं कर रहे।”
अब मैं उस को क्या बताता कि इतने दिनों बाद उसको दोबारा देखकर मैं अपने होशोहवास खो चुका हूँ, फिर भी मैंने बात को सम्भालने की कोशिश करते हुए बोला, “ऐसा नहीं है यार, दरअसल कुसुम ने अचानक से फोन कर बताया, तुम आने वाली हो तो सरप्राइज सा हो गया।
प्रीति बोली, “जीजाजी, इसीलिये तो मैं आपकी फैन हूँ क्योंकि आप कुसुम का बहुत ध्यान रखते हैं, उसकी हर बात मानते है…….मेरे हिसाब से आप नम्बर 1 पति हो इस दुनिया के।” मैं उसकी तरफ देखकर मुस्कुराया और बाहर खड़े ई रिक्शा वाले के साथ मिलकर सारा सामान जमा दिया और उसको पता बता कर चलने को कहा।
मैंने बाइक के हैंडल को संभाला और उसको बैठाया। अब मेरी खूबसूरत साली मुझसे बस कुछ इन्च की दूरी पर बैठी थी और मैं उसकी खुशबू को अपने नथुनों में महसूस कर पा रहा था। मैंने धीरे धीरे बाइक को आगे बढ़ाना शुरू किया। कोशिश कर रहा था कि ई रिक्शा वाला ज्यादा आगे ना निकल जाये, सामान लेकर।
तभी प्रीति सीट पर मेरी तरफ तिरछी हो गई और अपना दांया पांव बाये पाव पर रखके बैठ गई जिससे उसके उन्नत सुडॉल् चूचे मेरी पीठ में धस् गये अब मैं थोड़ी सी नजर घुमाकर उसको बाइक के साइड ग्लास में देख रहा था, मेरी निगाह उसके गले में पड़ी गोल्डन चेन पर गई। उसके गले के नीचे दूधिया बदन पर वो गोल्डन चेन चमक रही थी। मेरी निगाह उस चैन के साथ सरकती हुई उसके लॉकेट पर गई। लाकेट का ऊपरी हिस्सा जो चेन में फंसा हुआ था वो ही दिखाई दे रहा था बाकी का लॉकेट नीचे उसकी दोनों पहाडि़यों के बीच की दूधिया घाटी में कहीं खो गया था। मेरी निगाहें उस लाकेट के बहाने उस दूधिया घाटी का निरीक्षण करने लगी।
तभी शायद उसने मेरी निगाहों को पकड़ लिया और बोली, “जीजाजी, काबू में रहिये, सीधे घर ही चल रहे हो ! ऐसा ना हो कि ये बाइक बेहक जाये और कुसुम आपकी क्लास लगा दे।”
इतना बोलकर वो हंसने लगी। मैं एकदम सकपका गया और निगाह सीधी करके गाड़ी चलाने लगा। उसने जो लाइन अभी एक सैकेण्ड पहले बोली, मैं मन ही मन उस को समझने की कोशिश करने लगा कि वो मुझे निमंत्रण दे रही थी या चेतावनी। जो भी था, पर मुझे उसका साथ अच्छा लग रहा था और मैं चाह रहा था कि काश समय कुछ वक्त के लिये यहीं रुक जाये।
जारी है…….
