कर्ज और फर्ज | एक कश्मकश – Update 45

कर्ज और फर्ज एक कश्मकश - Erotic Family Sex Story
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तलाक का नाम दिमाग में आते ही मेरे तन बदन में एक झुनझुनाहट सी दौड़ गयी ,नहीं मैं कुसुम से दूर नहीं रह सकता था , तो उसका ट्रान्सफर करा लू…ताकि इस संजय से छुटकारा मिल जाय , इसमें भी तो समय लगेगा , मुझे सोचने को समय चाहिए था , ताकि मैं कुछ अच्छा सा फैसला कर पाऊ।

मेरे दिल दिमाग में इतना तनाव था की मैं पागल सा हो रहा था ,तभी मेरे दिमाग में एक नाम गूंजा ,,,,,,,,,,,, ज्ञान प्रकाश मिश्रा … जी हा मेरे कॉलेज का एक्लोता दोस्त जो पेशे से वकील था , वो लोगो की पारिवारिक परेशानियों के हल ढूंढने में माहिर था , उसकी इस समाज सेवा की आदत की वजह से मै उसे गुरु कहने लगा था। कुटुंब न्यायालय में वाद – परिवाद, धाराओ और कानून की उसे गहरी जानकारी थी , इसके साथ ही ना जाने बड़े बड़े अफसर, विधायक और मंत्री के साथ उसकी जान पहचान थी। क्या उसे सब बताना ठीक रहेगा ?????

मेरे दिमाग में एक ही बात आई ,साला दोस्त भी है और वकील भी कही कमीनापण ना कर दे ,लेकिन मैंने उसका सीधा साधा और सबकी मदद करने और सबके दुःख में साथ देने वाला रूप भी देखा था मैंने हिम्मत की और फैसला किया की मैं उसे सब कुछ बताऊंगा और उसे काल किया …

“क्या गुरु कैसे हो ,”

“आप कौन बोल रहे है “

“अबे मैं अरुण , “

“अबे साले तू जिंदा है , मैने सोचा था उस एक जवान बेटी की विधवा माँ के साथ शादी करने के बाद तू तो धर्मात्मा बन कर तूने संयास ले लिया होगा……..ह्म्म्म ह्म्म्म

वैसे इतने दिनों बाद कॉल क्यों किया ,शादी के बाद तो भूल ही गया दोस्त को …और बता भाभी कैसी है ,”मैं थोडा उदास सा हो गया ,

“ठीक है ,”

” तेरी ठीक है…. ठीक जैसी लग नही रही है साले “

” हा गुरु बात कुछ खास है ,क्या तू मुझे मिल सकता है ,यार थोड़ी परेशानी में चल रहा हु “

“क्यों क्या हुआ “

“फोन में नहीं आकर मिलता हु ,तू मुझे अपने वकालत कार्यालय का पता msg कर दे मैं कॉलेज के बाद शाम को मिलता हु “

“हा हा बिलकुल कभी भी आजा “

“अच्छा चल यार रखता हु ,बाय “

“ओके दोस्त बाय “…………..

मेरे पापा रोज की तरह सुबह सुबह की waalk पर गये हुए थे। मानसिक तनाव दूर करने के लिए मैंने आज पापा की अलमारी से एक सिग्रेट ले ली। मैने सिगरेट जलाई और 2 कप चाय तैयार की। चाय बना कर मैने रिंकी को आवाज़ लगाई और बालकॉनी में जाकर चाय के साथ सिगरेट का आनंद लेने लगा।

चाय खत्म कर वापस लौटा तो रिंकी अब तक भी नहीं उठी थी। मैने रिंकी के कमरे का दरवाजा बजाया और रिंकी को उठने को बोल कर नहाने चला गया।

इधर रिंकी उठी उस पर सुबह सुबह जो कांड हुआ था उस की खुमारी अब भी थी। अपने पापा के बारे में सोच कर मुस्कुराई और फिर खराब हो चुकी जमीन पर पड़ी पैंटी को देखा. सबसे पहले उसने कपड़े बदले।

‘आज पापा के लिए कुछ सेक्सी पहनूँगी!’ सोच कर कपड़े चुने और पहन कर बाहर आई चाय पी और नाश्ता बनाने लगी।

कुछ ही देर में, मै नहाकर सिर्फ तौलिये में अपने रूम से निकला। गीले चड्डी बनियान हाथ मे थे जिन्हें बालकनी में सूखने डालने जा रहा था।

किचन में नाश्ता बना रही रिंकी पर जैसे ही मेरी नज़र पड़ी, मै ठिठक सा गया। रिंकी ने सफेद रंग की पारदर्शी ड्रेस पहनी थी जिसमें उसके चूचे साफ साफ नजर आ रहे थे।

50 प्रतिशत नंगी बेटी को देख कर सुबह का पूरा वाकिया मेरे जेहन में दौड़ गया। मै चुपचाप बालकनी में गया और कपड़े फैला कर वापस लौटा तो रिंकी की नज़र मुझ पर पड़ी।

“पापा, गुड मॉर्निंग!” चहकते हुए रिंकी मेरी तरफ बढ़ गयी। अपनी तरफ बढ़ती रिंकी मुझ को स्लो मोशन में दिख रही थी।

जब रिंकी बिल्कुल करीब आ गयी तब मुझ को होश आया। “गुड़…गुड़ मॉर्निंग बेटा!” कहकर मैने रिंकी की तरफ हाथ फैलाये और सुबह की किस के लिए थोड़ा झुक गया।

रिंकी ने भी रोज़ की तरह अपने प्यारे पापा के गले मे बांहें डाली और पंजों पर उठ कर होंठों से होंठ मिला दिए। रोज़ाना का गाल पर किस का नियम था … लेकिन आज नियम टूट कर होंठों के किस का बन चुका था। आज रिंकी रोज़ की तरह आधे सेकंड में अलग नहीं हुई।

न ही मैने खुद को पीछे खींचा।

सुबह की यादों से निकलने की कोशिश करते करते मेरे हाथ जब रिंकी की कमर पर पड़े तो मै जैसे सब कुछ भूल ही गया। मै मूर्ति की तरह जम गया था।

उधर रिंकी अपने प्यारे पापा को आराम पहुंचाने के लिए ज्यादा करीब आ रही थी। उसने पापा के बालों में उंगलिया कसीं और अपने होंठ खोल दिये। रिंकी के होंठ खुलते ही मेरे होंठ भी अपने आप खुल गए।

यह गुड़ मॉर्निंग किस अपनी हदें पार कर चुकी थी।

अनजाने में ही मेरा लंड उठने लगा था। बेटी बाप के होंठ चूस रही थी। जल्दी ही मेरा लंड पूरे शवाब पर खड़ा था और रिंकी के पेट पर ठोकरें मार रहा था।

पापा का लौड़ा पेट पर महसूस करते ही बिटिया ने अपनी जीभ पापा के मुँह में सरकाई और आगे बढ़ कर अपने चूचे बाप की छाती से सटा दिए।

रिंकी के जीभ सरेंडर करते ही मैने उसे अपने कब्जे में लिया और पूरी तन्मयता से चूसने लगा। मेरी जीभ भी अब अपनी बेटी के पूरे दांत गिन रही थी।

जोश इतना बढ़ चुका था कि मैने रिंकी की   कमर पर हाथ फिराते हुए उसके जिस्म को कस के अपने से चिपका लिया।

पेड़ू पर पापा के फौलादी लंड का दबाव महसूस करते हुए रिंकी उचकने लगी।

वो लंड का दबाव अपनी चूत पर महसूस करना चाहती थी।

बाप के गले से लटक के खुद को ऊपर खींचने की कोशिश करती रिंकी मेरे पैरों पर चढ़ गई और जितना हो सका लंड के करीब चूत लगाकर कमर हिलाने लगी।

मैने हाथ बढ़ा कर अपनी बेटी के चूतड़ों पर रखे और उस को गोद में उठा लिया। अब रिंकी मेरे लेवल पर थी।

पूरे जोश में पापा के होंठ चूसती हुई बेटी ने पैर पापा की कमर पर लपेट लिए और लंड पे चूत टिका कर कमर चलाने लगी।

मैने भी रिंकी के दोनों चूतड़ हथेलियों में भरे और उन्हें भींचते हुए अपनी बेटी के होंठ चूसते रहा। रिंकी की लय में लय मिला कर मैने भी कमर हिलाना चालू कर दिया था।

बाप बेटी आनंद की लहरों में ऐसा खोये कि उन्हें पता ही नहीं चला कि कब बाप की तौलिया खुल कर गिर गयी। बिटिया नंगे बाप से किसी बेल की भांति लिपटी थी।

बाप के नंगे चूतड़ों पर बेटी एड़ियों का फंदा बना कर खुद को लन्ड पर संभाले हुए थी।

हम दोनों की कमर का कोई हिस्सा नहीं बचा था जो एक दूसरे ने न सहलाया हो।

आंखें बंद कर के एक दूसरे के होंठो में ऐसे खोये थे दोनों जैसे चाहते हो समय यहीं रुक जाए।

“टिंग टिंग” दरवाजे की घंटी से हम बाप बेटी की काम तपस्या भंग हुई। हमें अपनी अपनी अवस्था का अहसास हुआ।

मैने झट से रिंकी को नीचे उतारा। ज़मीन पर पैर पड़ते ही रिंकी चार कदम पीछे हट गई।

हम बाप बेटी दोनों ही समझ नहीं पा रहे थे आखिर हमारे साथ ये हुआ क्या? रिंकी ज़मीन में नज़रें गड़ाए खड़ी थी, पापा की तरफ देखने की हिम्मत नहीं थी।

मै भी अपनी बेटी से नज़र मिलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। ‘ बहनचोद … ये क्या हो गया! अभी तो सब ठीक था, अचानक ये क्या हुआ? अब क्या बोलूं … क्या कहूँ? क्या करूँ?’

रिंकी की नज़र पापा की तौलिया पर पड़ी जो नीचे ज़मीन पर पड़ी थी। उसने कुछ ऊपर नज़र उठायी तो पाया कि पापा बिल्कुल नंगे खड़े है। उनका 8 इंच का लन्ड एकदम कड़क उसकी की तरफ मुह कर सावधान मुद्रा में सलामी दे रहा था।

मैने रिंकी की नज़रों का पीछा किया तो उछल पड़ा, झटपट तौलिया उठाया और अपने कमरे की तरफ भाग गया। 15-20 मिनट कोई हिम्मत नहीं जुटा पाया उस के सामने जाने की।

रिंकी ने तुरंत जाकर घर का दरवाजा खोला, अपने दादाजी को गुड मॉर्निंग बोल कर वापस किचिन में नाश्ता बनाने चली गई।

रिंकी के सेक्सी कपड़ो को देख कर उसके दादाजी से रहा नही गया और….उसके पास किचिन में जाकर बोले बेटा रिंकी ये कैसे बेहूदा कपड़े पहने हुए हैं, जाओ पहले ये कपड़े बदल कर कोई बदन ढके ऐसे पूरे कपड़े पहनकर आओ….. फिर आकर नाश्ता बनाना।

लेकिन दादाजी इन कपड़ो में क्या खराबी है, ये ही तो आजकल का style है, सब लड़किया ऐसे ही कपड़े तो पहनती है, वैसे भी मै घर में ही हू, इन कपड़ो में घर से बाहर तो नही जा रही ना। रिंकी अपने दादाजी से कुतर्क करते हुए बोली…..

रिंकी बेटा सभी लड़कियों के ऐसे छोटे कपड़ो से दिक्कत उन्हे होती है, जो उन लड़कियों को अपना मानते है, वरना दुनिया की हसरत तो लड़कियों को बिना कपड़ो के देखने की है। तुम मुझसे ज्यादा बहस मत करो….? मै तुम्हारे बाप का बाप हू….  तुम मेरी पोती हो, मैने जो कहा वो करो…… जाओ ड्रेस बदल कर आओ।

मै भी आनन फानन में नाश्ता कर जल्दी से अपने कॉलेज के लिए निकल गया… वैसे तो मैं सुबह घर से निकलते ही सारी बातें भूल जाता हूँ पर उस समय ऐसा नहीं हुआ … रिंकी के उन्नत उरोज … उनके बीच की मादक दरार … उसके भरे-भरे नितंब … उसके रसीले और तराशे हुये होंठ … उसकी कमनीय आँखे (जो तकरीबन सभी ईस्ट इंडियन लड़कियों की होती हैं) … मेरे जेहन में घूम रहे थे।

कॉलेज में आज सुबह से मेरा प्रोजेक्ट गाइड वाले  काम में मन नहीं लग रहा था .. मैं रह-रह के अपनी घड़ी की तरफ़ देख रहा था। दोपहर में जब मैं लंच के बाद आकर कंप्यूटर लैब में बैठा तो मेरे सामने लगे पारदर्शी काँच में तीन लड़कियों की लैब में अंदर आती हुयी धुधली आक्रति नजर आ रही थी………. परंतु तब तक भी मैंने यह नहीं सोचा था कि ये वही लड़कियाँ होंगी जिन्हें मैने कल कैन्टीन में देखा था।

वो इतना ज़्यादा सज सँवरकर, कमनीय बन के और हाई-हील के सैंडिल पहन के आईं थी ताकि उनके नितंब और उभरे हुए दिखें … शायद उन्हें यह एहसास हो गया था कि मैं उनके पुष्ट नितंबों को निहार रहा था.. क्योंकि उनका प्रोजेक्ट गाइड यानि मैं, एक जवान लड़का था।

बहरहाल वो तीनों मेरे पास आईं, हैण्ड-शेक किया, अपने लो कट टी-शर्ट्स में से अपना यौवन दिखा-दिखा कर अपना इन्ट्रोडक्शन दिया, कुछ प्रोजेक्ट की बातें की, कुछ मुझे पटाने के लिये अदायें फेकीं (ताकि उनका प्रोजेक्ट ज़ल्दी और आसानी से हो जाये) और “थैन्क् यू सर” बोल के … अपने सुगठित, उन्नत … गोल-गोल … लुभावने … पिछवाड़े मटकाते हुये कुर्सियों पर बैठ गईं।

पहली बार … जी हाँ पहली बार मुझे अपनी कॉलेज की छात्राओ ने इतना हिला कर रख दिया था।

“मर्द की कोई पसन्दीदा लड़की नही होती, वो सब लड़कियों को पसंद करता है..” तीनों एक से बढ़कर एक लग रही थीं पर मेरी नज़र तो उस बड़े उरोजों वाली … ‘शशि’ पर थी, जो उन तीनों में सबसे खूबसूरत भी थी। बहरहाल मैं यह दिखा रहा था कि मैं बहुत नॉर्मल हूँ और तीनों को बराबर ट्रीट कर रहा हूँ। मैं उनको कम्प्यूटर पर कोड लिखने को कहता और पीछे बैठकर उनके सुडौल अंगों को देखता। उफ़ क्या ग़ज़ब का सम्मोहन था … जो मुझे उन अंगो को छूकर देखने को उत्तेजित करता था।

जब वो मेरे बगल में बैठती और मैं की-बोर्ड में टाइप करता था तो कोहनी से जानबूझकर उनके उभारों को छूकर ’सॉरी’ बोल देता था … वो भी ’इट्स ओके’ कह देती थीं और उन्हें लगता था कि सर कितने शरीफ़ हैं। और आपको बता दूँ कि अच्छी और कुँवारी लड़कियाँ शरीफ़ और लल्लू से दिखने वाले लड़के पसंद करती हैं जिन्हें वो आसानी से अपने काबू में कर सकें।

पर उनको पता नहीं था कि मैं कितना बड़ा ठरकी हू। पर समस्या यह थी कि तीनों अच्छी दोस्त थीं और उनमें से किसी एक को अलग करके कुछ करना मुश्किल काम था। आखिर एक आइडिया मेरे खुरापाती दिमाग में आ ही गया। मैंने यह दिखाना शुरू किया कि मुझे स्मिता और नेहा में ज़्यादा रुचि है … उनसे हँस-हँस के बातें करता … कभी कंधे पे हाथ रख देता … कुछ पूछती तो काफ़ी देर तक समझाता … उनके बहुत करीब रहता और ऐसी हरकतें करता कि शशि को जलन हो गई।

कुछ देर ये रूटीन दोहराता रहा … और शशि का रुपगौरव और आत्मसम्मान कुचला जाता रहा। आखिर मेरी स्कीम ने काम किया … उस शाम सेशन खत्म होने से पहले शशि ने मुझसे पूछा,”सर ! आप मुझे मेरे घर छोड़ देंगे क्या?”

मैंने कहा,”व्हाइ नॉट !”

मैंने उसको अपनी डिस्कवर् बाइक में लिफ़्ट दिया। रास्ते भर वो अपने बड़े-बड़े चूचे से मेरी पीठ खुजाती (छुलाती) रही। मेरे अंगों में सिहरन सी दौड़ जाती और मेरे लंड में इतनी ज़्यादा कठोरता आ जाती जिसको पैंट में सम्हालना मुश्किल हो जाता।

अब धीरे धीरे उसकी हरकतें बढ़ने लगीं … पहले बाइक में मेरे कमर को पकड़कर बैठी थी, लेकिन उसने अब उसने मेरी जांघो पर हाथ रख दिया … तभी अचानक से स्पीड ब्रेकर में उसका हाथ जांघ से फ़िसलकर मेरे पूरी तरह खड़े लंड पे पहुंच गया जिसको उसने, धोखे से या जानबूझकर पता नहीं, पर जोर से पकड़ लिया। बाद में उसने सॉरी बोला और मैंने कहा- कोई बात नहीं ! बात आई गई हो गई।

मै उसके बताये हुए पते पर पहुँच गया, उसके घर के दीवाल पर लगे बोर्ड पर जब मेरी नजर गयी तो मै आश्चर्य चकित हो गया…. ” ज्ञान प्रकाश मिश्रा जी” वकालत कार्यालय… इन शब्दों को पढ़कर मैंने शशि से पूछा तुम ज्ञान प्रकाश मिश्रा की कौन लगती…??? वो बोली मेरे भैया है…!! सर आप जानते हो उनको…???

मैंने कहा हाँ…. वो मेरा अजीज दोस्त है, लेकिन घर में आना जाना कभी नही हुआ, इसलिए तुमसे पूछा….??

“मै मन ही मन सोचने लगा साले अरुण अजीज दोस्त की बहन भी बहन जैसी होती है, लेकिन अभी कॉलेज और बाइक पर जो हुआ उससे ऐसा लगता है कि तेरी किस्मत मे रिश्तों को कलंकित करने और माँ, बहन, बेटी को भोगने की जैसी नियति ही बन गयी है “

सर आप खड़े खड़े क्या सोच रहे हो…??? अंदर आइये ना भैया भी ऑफिस में ही है, उनसे भी मुलाकात हो जायेगी… शशि मुस्कुराते हुए बोली….! वैसे भी मुझे “ज्ञान प्रकाश” से अपनी पत्नी कुसुम के बदले रैविया, और ट्रांस्फर के बारे में ज्ञान चर्चा करनी थी इसलिए मै शशि के साथ अंदर आ गया।

शशि मुझे मेरे वकील दोस्त के ऑफिस के दरवाजे पर छोड़ कर घर के अंदर चली गई…मै अपने वकील दोस्त गुरु के ऑफिस में पंहुचा वहा कोई भी दिखाई नहीं दे रहा था , मैं केबिन के अंदर झाका गुरु मुझे अपने कुर्सी पर बैठा कुछ पढ़ता हुआ दिखाई दिया , मुझे देखते ही वो खड़ा हुआ और मेरे पास आकर मेरे गले से लग गया , मैं भी बड़ी ही आत्मीयता से उससे मिला , हम बैठे इधर उधर की बाते होने लगी फिर मैंने मुद्दे की बात करने की सोची मैंने गंभीरता से उसे सभी मामला बताया और वो बड़ी ही गंभीरता से उसे सुनने लगा,…मुझे आश्चर्य हुआ की उसे मेरी बातो से ज्यादा आश्चर्य नहीं हुआ वो बड़े ही आराम से मेरी बात सुन रहा था जैसे मैं उसका दोस्त नहीं कोई क्लाईंट हु…

“हम्म्म्म तो ऐसी बात है ,कोई बात नहीं भाई ,मैंने जब पहली बार तेरी शादी में कुसुम को देखा था तभी मुझे लगा की कुछ तो गड़बड़ है पर क्या है ये मुझे अब समझ आ रहा है ,”

मैं उसे आँखे फाडे देखने लगा ,क्या गड़बड़ है ……….?? ?

“पूरी बात तो मैं उससे मिल कर ही बता पाउँगा पर अभी जितना तुमने मुझे बताया , मुझे वो एक छिनार टाइप औरत लग रही है ,”

उस की बात सुनकर मेरा माथा घूम गया , “छिनार” मेरी बीवी …….????

“भाई तू क्या बोल रहा है , वो बहुत अच्छे और गरीब घर की बेटी है, पढ़ी लिखी भी है, जिम्मेदारियों और कठिनाइयों से भरा हुआ उसका जीवन रहा है यार ,,,,

“मैं लगभग रुवासु हो चूका था , ऐसा लग रहा था जैसे अभी जोर जोर से रो पडूंगा “”

पर मैंने अपने को सम्हाला , मुझे देखकर वो   हसने लगा , मुझे लगा की वो साला मेरा मजाक उड़ा रहा है ?????

“नाम मेरा गुरु है लेकिन साले तेरी बीबी तो मुझसे बड़ी गुरु घंटाल है , हा हा हा

 “उस के ये वचन मेरे दिल को झल्ली झल्ली और छलनी छलनी कर रहे थे ,मैं उसे मारना चाहता था ,मेरा ही दोस्त ,इतना बड़ा वकील होकर भी वो ऐसी बाते कर सकता है मुझे यकीं नहीं आ रहा था , मुझे अपने पर ही गुस्सा आया की मैं यहाँ क्यों आ गया , मैं वहा से उठकर जाने लगा , उसने मुझे रोका भी नहीं , मैं और भी गुस्से में आ चूका था।

मै अपनी बाइक पर बैठ कर गुस्से से बाइक की किक लगाने लगा, लेकिन वो भी मादरचोद स्टार्ट नही हो रही थी…….. तभी उसने ने मेरी बाइक की चाबी बाइक में से खीच ली , मैं उसे ऐसा करते देखकर और भी गुस्से में आ चूका था,…………

“चल तुझे कुछ और भी बताना है ” गुरु के चहरे पर अब भी एक मुस्कुराहट थी ,मैंने अपना हाथ छुड़ाया ,

“मुझे कुछ नहीं जानना “

“सोच ले ,अबे चल सॉरी अब तो आजा ,यु ऑफिस के सामने क्यों तमाशा कर रहा है ,ये हम दोस्तों की आपस की बात है ,चल ना यार ,”

मैं  सच मे कोई भी तमाशा नहीं करना चाहता था , मैं चुपचाप अंदर चला गया , फिर उसी केबिन में

“क्या हुआ ,जल्दी बता “

“भाई मुझे माफ़ कर दे की मैंने ये सब किया , पर ये जरुरी था , तेरे प्रश्न का उत्तर है ये , कि कुसुम क्यों छिनार हो गयी ,और क्यों कोई औरत इस तरह छिनार बन जाती है….???, कोई तीसरा अचानक से बीच में नही आता दोस्त…. वो पहले से ही होता है, बस तुम जैसे चूतिया उसे पहचान नही पाते हो। ह्म्म्म ह्म्म्म

“मुझे उसकी बाते कुछ भी समझ नहीं आ रही थी ,मैंने उसे बड़े ही आश्चर्य से देखा ,वो मुझे आराम से रहने और बैठने को कहा ,

“देख तुझे रोना आया पर तू मेरे सामने नहीं रो पाया ठीक ,”

“हा तो उससे क्या “

“बताता हु ,फिर तुझे मुझ पर गुस्सा आया पर तूने गुस्सा दबा लिया , और वो गुस्सा किस पर निकला तेरे बाइक की मासूम किक पर , है ना “

“हा तो “

मैं उसकी बातो को समझने का प्रयास कर रहा था ,

“तूने मुझ पर गुस्सा नहीं करके और अपने रोने और गुस्से को दबाकर गलती कर दी , दबा हुआ गुस्सा बाइक पर फूटा वहा नहीं फूटता तो कही और ही फूटता शायद और भी ज्यादा बढ़कर “

“तू कहना क्या चाह रहा है “

उसने ने एक गहरी साँस भरी।

थोड़ी देर चुप्पी छाई रही जिससे मुझे कुछ कुछ चीजे समझ आने लगी थी , उसने फिर से बोलना शुरू किया

” कुसुम के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ होगा ,वो बहुत ही अच्छे, गरीब और कुलीन घर की लड़की है ,और कम उम्र में शादी के एक महीने के बाद विधवा हो जाने पर उसे अपनी सेक्स की भावना को दबाना पड़ा होगा ।

इसमें कोई भी दो राय तो नहीं है , पर जब उसे मौका मिला होगा , तो उसने इसे या तो खुलकर एन्जॉय किया होगा , या फिर ग्लानी के भाव से भर गयी होगी , यार ये ग्लानी बहुत ही ख़राब चीज है जो इन्सान के भावनाओ को कुरूप कर देती है ,कुरूप होना कितना शांतिपूर्ण होता है, कोई भी मैसेज नही करता, कोई भी प्यार नही करता, कोई भी परवाह नहीं करता कि आप जिंदा हो या मर गये…. कोई भी घूरता नही, कुरूप भावनाओ से ग्रसित बस अकेले में ही खुश रहता है।

शायद उसके साथ भी ऐसा ही हुआ होगा…….. अगर ऐसा हुआ होगा तो जो वो आज कर रही है वो, वो नहीं कर सकती थी इसके लिए उसने जरुर अपने आगनबॉडी केंद्र में किसी छिनार टाइप औरत से सलाह ली होगी जिसने उसे समझाया होगा की ग्लानी से बचो और जिंदगी में एन्जॉय करो ….

हो सकता है ऐसा कुछ भी नहीं हुआ हो और वो एक छिनार बीबी नहीं हो तो ,,,,,,,,???

हा ये भी हो सकता है तो बस एक ही चीज हुई होगी और वो ये है की वो जब सरकारी नौकरी करने के लिए दिमापुर गयी तो उसने पहली बार आजादी देखी, और उसे ये सब करने में मजा आने लगा वो अपनी जिंदगी खुलकर जीने लगी ,और अब भी वो ये सब बस मजे के लिए करती होगी ,”

मुझे ऐसे तो सब कुछ समझ आ रहा था पर ……..

“यार लेकिन क्या सच मे वो मुझसे प्यार करती है या सिर्फ दिखावा “मेरी आँखे फिर से गीली हो गयी…….. .. ???

“इतना तो पक्का है मेरे दोस्त की वो तुझसे बहुत ही ज्यादा प्यार करती है ,”

“तो भाई ये सब ,…………अब मैं क्या करू “

गुरु भी थोड़ी देर तक चुप रहता है ….

“कुछ भी मत कर ,अभी तो उसे दिमापुर में ही रहने दे और उसका ट्रांसफर करा लेने से मामला नहीं बदलेगा बस शर्मा जी, संजय और अन्य कलिग की जगह कोई और आ जायेगा , अभी कम से कम कुसुम तेरी बातों, तेरे हाथो में और तेरे कंट्रोल मे तो है , इसी वजह से तो उसने अपनी फेस बुक, व्हाट्स अप, ईमेल और अन्य सोशल मीडिया अकाउंट का पासवर्ड तुझे बताया है।

और कोसिस यही करना की कभी भी कुसुम या किसी भी और को ये ना पता चले की तू ये सब जानता है , अगर कुसुम या किसी को भी ये पता चला कि तू उसकी निगरानी कर रहा है, और कुसुम ने तेरा  साथ नही दिया तो तेरे लिए उसकी इज्जत जाती रहेगी फिर वो कभी भी तुझे और तू कभी भी उसे वो प्यार नहीं दे पाओगे जो वो अभी तुझसे करती है …..”

मैं जोरो से रोने लगा गुरु आकर मेरे कंधे पर अपना हाथ रखता है,

“तू फिकर मत कर मेरे दोस्त सब ठीक हो जाएगा ,मैं खुद दिमापुर जाकर उसके बारे में पता करूँगा “

“लेकिन यार तब तक मैं क्या करू ,कब तक उसे दिमापुर में रखूँगा और कब तक मैं उसे बचा पाउँगा वो फिर ,,,,,,,,और मैं कैसे ये सब सहूंगा “

साले कमीने गुरु के चहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान आ गयी जिसे देख मुझे फिर से गुस्सा आ गया , वो इसे समझ गया और

“भाई मेरे मुस्कान पर गुस्सा मत हो शांति से अपने घर जाओ।

मै रास्ते भर सोचता रहा कि मुझे और कुसुम हम दोनों के हिस्से में वफा के नाम पर शादी के सिर्फ सात फेरे आये है।

जारी है…..

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