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मैं कुसुम को आजादी तो देना चाहता था और मेरी तमन्ना भी थी की उसके पीछे लड़के आशिकों की तरह घूमे लेकिन मैं उससे इस वफ़ा की आशा जरूर करता था की वो मेरे प्रति पारदर्शी रहे ….

धड़ाम ….. छन…… शिट ……. रसोई में से तेज बर्तन की गिरने की आवाज से मेरी तंद्रा भंग हुयी। और मेरी नजर लबरेज यौवन से भरपूर हाथों में सने विम बार से अपनी चेहरों पर बार बार तंग करती हुयी एक हाथ से  लट को कान में लपेटते हुए बर्तन धोती हुयी अपनी बेटी रिंकी पर पड़ी।

रिंकी के मादक जिस्म को देखकर मेरे मन में ख्याल आया जिन्दगी में आप कितनी भी चाहत कर ले मिलता वो है जो मिलना है.लेकिन जीवन का हिसाब ये है की जो मिले उसका मजा लो, जिसने ये सिख लिया उसकी जिन्दगी जन्नत हो जाती है वरना यहाँ दुखो का अंबार ही है. इसलिए गलतफहमी जिनसे है उन्ही से बात करो, जिस पर शक है उससे बातें करोगे तो बातें बेवजह बढ़ सकती हैँ….

तभी मेरे पापा किचिन में रिंकी के पास जाकर खड़े हो गये। मैं अंदर न जाकर बाहर से ही उनकी बाते सुनने लगा,”” क्या करू वो तो पागल ही है, रिंकी की आवाज गूंजी,ये उसने लगभग खिलखिलाते हुए कहा था लेकिन रिंकी बेटा लगता नही की तेरे पापा तुझे ज्यादा प्यार करते है, तुम तो उन्हें कितना चाहती हो,

मैं सकते में आ चूका था,आखिर ये हो क्या रहा है,

नहीं दादाजी वो मुझ पर अपनी जान लुटाते है,उनकी आँखों में मैंने हमेशा अपने लिए सिर्फ प्यार ही देखा है,प्यार को देखने के लिए भी आँखे चाहिए……. मेरे पापा और रिंकी के बातो में एक गंभीरता थी,

रिंकी ने थोड़ी देर कुछ न कहा फिर अच्छा दादाजी चाय पियेंगे,आपके लिए क़ाली चाय बनाऊ ऐसे भी आपको नींद तो आएगी नहीं,

हा रिंकी बेटा बना दो ना,क्या करू बुढापे की बीमारी है, रात भर नींद नहीं आती,और खामखाह मेरी वजह से सभी को परेशान होना पड़ता है,

आप भी कैसी बाते कर रहे है दादाजी…??

रिंकी बेटा तू और बहु कुसुम जब से आई है मुझे भी लगता है इस दुनिया में मेरा कोई अपना है,वरना….मेरे पापा की बातो में एक दर्द था।

आप भी ना, बस हो गया आज से आप ऐसी बाते नही करेंगे, मेरे हिस्से की आप मुझसे दो बाते कर लिया करो…. मैं हु ना,आपके दर्द बाटने के लिए, मैं आपकी हर सेवा करुँगी, रिंकी फिर हस पड़ी और मेरे पापा भी।

सच कहु तो रिंकी बेटा ऐसे मुझे तेरे पापा की किस्मत पर जलन होती है,असल में हर इन्सान को हो………., कुसुम जैसी होनहार पत्नी, तुझ जैसी फूल सी कोमल प्यार करने वाली बेटी हर किसी के नसीब में नहीं होती :

मैं वहा खड़ा हुआ खुद अपने नसीब पर फक्र करने लगा,की ऐसी होनहार बीबी और प्यारी बेटी है मेरी जो मेरे पापा तक का दिल जीत ली है,

“”कुसुम का व्हाट्स अप चैट मैसेज वैसे तो शक पैदा करता है पर मेरा शक चला गया, मैं सामान्य हो गया और वहा से अपने कमरे में चला गया।””

लेटे लेटे यही सोचता रहा की रिंकी इतना प्यार करने वाली है,सबको सम्मान देती है,अपने नानी के घर में भी सबकी लाडली है, यहाँ भी, पूरी तरह अपनी मम्मी कुसुम की कॉपी है, किस तरह घर की जिम्मेदारियों को उठाने के लिए खुशी खुशी पढ़ाई के साथ साथ घर के सारे काम कर रही है। इतनी समझदार बेटी है कि अपने दादाजी के साथ चाय पी रही है,सिर्फ इसलिए की वो अकेले है, उनका दुख दर्द बाँट रही है, लगभग आधे घंटे की बेचैनी ने मुझे सोने न दिया ओर नींद भी नहीं आयी मैंने सोचा क्यों न मै भी रिंकी के हाथ से बनी चाय मैं भी पी लू, मैं बहार जाने लगा बेड से उठा एक उत्सुकता लिए, पर जैसे ही कानो में रिंकी की आवाज गूंजी मेरे पैरो की जमीन ही खिसक गयी….. पापा मुझे आपका मोबाइल देना……. । उसके हाथ में दूध का ग्लास था.  वो रूम में अंदर मेरे पास आ गयी। .

“पापा मैं आपके मोबाइल में अपनी फेवरेट मूवी देखूँगी?” मुझे दूध का ग्लास देते हुए बोली….. और छोटे सोफे पर बैठ गयी जो बेड से नब्बे डिग्री के कोने पर था जिस पे मैं बैठा हुआ था. उसने पारदर्शी नाइट सूट पहनी हुई थी जिसका मतलब था वो सोने गयी थी मगर मुझे दूध पिलाने के ख्याल से सोई नही थी. और उठ कर मेरे रूम में आई थी।

“नींद नही आ रही” मैने पूछा. मेरे दिमाग़ में उसकी मैसेज वाली बात गूँज उठी जिसमे उसने लिखा था कि कभी कभी उसे चुदवाने की इतनी जबरदस्त इच्छा होती थी कि उसे नींद नही आती. मैं सोचने लगा क्या उस समय भी उसकी वो ही हालत है, कि शायद वो काम की आग यानी कामाग्नी में जल रही है और उसे नींद नही आ रही है, इसीलिए वो मोबाइल के बहाने से मुझे देखने आई है. इस बात का एहसास होने पर कि मैं अती कामोत्तेजित नवयोवना के साथ हूँ मेरा बदन सिहर उठा.

वो वहाँ बैठकर आराम से मेरा मोबाइल देखने लगी , उसे देखकर लगता था जैसे उसे कोई जल्दबाज़ी नही थी,  वापस अपने बेडरूम में जाने की. जब उसका ध्यान मोबाइल में था तो मेरी नज़रें चोरी चोरी उसके बदन का मुआइना कर रही थी. उसके स्तन् कुसुम से छोटे जरूर लेकिन ठोस मम्मों की ओर मेरा ध्यान पहले ही जा चुका था मगर इस बार मैने गौर किया उसकी टाँगे भी बेहद खूबसूरत थी. और उसके घुटनो से थोड़ा उपर तक उसकी जाँघो को चमका रही थी.

शायद रात बहुत गुज़र चुकी थी, या आधी रात को अपनी जवान बेटी के दिलकश जलवे देखने का असर था, मगर मुझे रिंकी की जांघे बहुत प्यारी लग रहीं थी. बल्कि सही लफ़्ज़ों में बहुत सेक्सी लग रही थी. सेक्सी, यही वो लफ़्ज था जो मेरे दिमाग़ में गूंजा था जब हम दोनो सुबह नाश्ता कर रहे थे या मेरे केस में मैं, नाश्ता करने का नाटक कर रहा था. असलियत में अगर मुझे कुछ दिखाई दे रहा था तो वो उसकी सेक्सी जांघे थी और यह ख़याल मेरे दिमाग़ में घूम रहा था कि वो इस समय शायद वो बहुत कामोत्तेजित है.

वो काफ़ी समय वहाँ बैठी रही, अंत में बोलते हुए उठ खड़ी हुई “ओफफ्फ़! रात बहुत गुज़र गयी है. लगता है पापा आपको नींद आ रही है, मैं आपका मोबाइल लेकर अपने कमरे में जा रही हूँ”

मैं कुछ नही बोला. वो उठ कर मेरे पास बिस्तर पर रखे मोबाइल चार्जर को उठाते हुए गुडनाइट बोलने को आई.  मगर आज रात इस गुड नाईट के अर्थ बदल गये थे, क्योंकि मेरे दिमाग़ में उसके कामुक अंगो की धुंधली सी तस्वीरें उभर रही थीं. वो एक हल्का सा अच्छी महक वाला पर्फ्यूम लगाए हुए थी जिसने मेरी दशा और दिशा भी खराब कर दी. मैं उत्तेजित होने लगा था.

मैं उसे मूड कर रूम से बाहर की ओर जाते देखता रहा. उसका सिल्की, सॉफ्ट नाइट ड्रेस उसके बदन के हर कटाव हर मोड़ हर गोलाई का अनुसरण कर रहा था. वो उसकी गान्ड के उभार और ढलान से चिपका हुआ उसके चुतड़ों के बीच की खाई में हल्का सा धंसा हुआ था. उस दृश्य से अपनी बेटी को एक सुंदर, कामनीय नवयोवना के रूप में देखने के मेरे बदलाव को पूर्ण कर दिया था.” रिंकी कितनी सुंदर है, कितनी सेक्सी है” मैं खुद से दोहराता जा रहा था.

बेटी के कमरे से जाते ही मैंने झटपट अपना लोअर नीचे खींच कर लंड बाहर निकाला और खाल पीछे खींच कर टोपे को हवा खिलाई (लगाई) । मै हाथ फैला कर लंड को मुट्ठी में भर कर धीरे धीरे सहलाने लगा। अपनी आंख बंद कर ली और अपनी फेवरिट कहानी की नायिका के रूप में रिंकी को सोच कर मुझे इस बात पर भी ताज्जुब हो रहा था कि मेरी बेटी अचानक से मुझे इतनी सुंदर और आकर्षक क्यों लगने लगी थी.

वैसे ये इतना भी अचानक से नही था मगर यकायक रिंकी मेरे लिए इतनी खूबसूरत, इतनी कामनीय हो गयी थी इस बात का कुछ मतलब तो निकलता था. क्यों मुझे वो इतनी आकर्षक और सेक्सी लगने लगी थी? मुझे एहसास था कि इस सबकी शुरुआत मुझे उसकी जिस्मानी ख्वाहिशों की जानकारी होने के बाद हुई थी, लेकिन फिर भी वो मेरी बेटी थी और मैं उसका पिता और एक पिता होने के नाते मेरे लिए उन बातों का ज़्यादा मतलब नही होना चाहिए था.

“मेरी हसरतें अपनी पत्नी यानी कि उसकी मम्मी कुसुम के लिए होनी चाहिए थीं, रिंकी लिए नही, रिंकी लिए बिल्कुल भी नही. “

उस रात अपने अपने बिस्तर पर लेट कर    हम दोनों बाप बेटी एक दूसरे का ख्याल अपने दिल से निकालने की ना काम कोशिश कर रहे थे। मगर हक़ीकत ये थी। कि कल से लेकर आज तक होने वाले सारे वक्त ने हम दोनों बाप बेटी के जिस्मो में एक दूसरे के लिए वो आग भड़का दी थी। जिस को ठंडा किये बगैर अब दोनो का गुज़ारा बहुत मुश्किल होने लगा था। इस के बावजूद हम दोनों बाप बेटी के जिस्म अब एक दूसरे को हासिल करने के लिए मचलने लग गये थे।

लेकिन हम दोनों बाप बेटी के रिश्ते के दरमियाँ होने वाली क़ुदरती शर्मो-हया की वजह से दोनो को ही ये समझ नही आ रही थी। कि हम कैसे और किस तरह एक दूसरे को अपने दिल का हाल बताएँ और अपने अपने प्यासे जिस्मो की प्यास को एक दूसरे से बुझाएँ ।

मेरी ख्वाइश थी कि जिस तरह मैंने खुद पहल करते हुए अपनी साली जूली के साथ अपने जिस्म में भड़कती कामवासना का आगाज़ किया था। इसी तरह अब मुझे ही आगे बढ़ कर अपनी बेटी के प्यासे जिस्म को अपनी बाहों में भर कर रिंकी की प्यासी चूत को अपने मोटे लंड के पानी से शांत करना चाहिए।

जब कि दूसरी तरफ ये भी ख्याल मुझे बार बार परेशान कर रहा था एक तो अपनी  बीवी कुसुम से किए हुए शादी के फेरो के समय पतिधर्म के वादे को तोड़ना नही चाहता था। अपनी पत्नी  की सगी बेटी को ही उसकी सौतन नही बनाना चाहता था। और कुसुम के साथ बेवफ़ाई कर खुद रुस्वाइयो की आग में जलना नही चाहता था।

दूसरा मुझ को ये भी डर था कि कहीं मै अपनी बेटी के जज़्बात को सही तरह से समझने में ग़लती तो नही कर रहा।

और अगर अपने जज़्बात में आ कर मैंने अंजाने में अपनी बेटी से कोई ग़लत हरकत कर दी। जिस को मेरी बेटी रिंकी ने पसंद नही किया। तो फिर मेरे लिए अपनी बेटी और पत्नी कुसुम का सामना करने की हिम्मत नही रहेगी। इसीलिए एक ही छत के नीचे रहने के बावजूद अब ना चाहते हुए भी दो प्यासे बदन एक दूसरे से अलग रहने पर मजबूर हो रहे थे।

रात भर अपनी बेटी के जिस्म को भोगने की लालसा में अपना लंड का माल निकालकर मै कब सो गया पता नहीं चला। अगली सुबह मेरी जल्दी आँख खुल गई। रात भर मेरी बेटी ने मोबाइल कौन कौन सी फिल्म देखी होगी ये जानने की लालसा से अपने मोबाइल को रिंकी के पास से वापस लेने के उद्देश्य से मैंने अपनी सांसें काबू की और कमरे से निकल कर हॉल में आ गया।

धीरे धीरे मेरे कदम रिंकी के कमरे की तरफ बढ़े। दरवाज़े को हौले से धकेलते हुए जैसे ही मेरी नज़र पड़ी कि रिंकी के बेड के नीचे कोई कपड़ा गिरा है। मैंने हाथ बढ़ा कर खींचा तो पाया ये रिंकी की पैंटी थी।

मै सोच पड़ गया कि आखिर पैंटी यहाँ क्यों पड़ी है. तभी मैंने महसूस किया कि पैंटी में नमी थी।

“हो सकता है मेरे मोबाइल में गंदी फिल्म देखने के बाद रिंकी ने अपने हाथों से अपनी प्यास बुझाई हो !” ऐसा सोचते हुए मैंने हाथ बढ़ा कर पैंटी अपनी नाक पर रख दी।

एक लंबा सांस खींचते ही मेरे फेफड़े अपनी बेटी की चूत की महक से भर गए।

“क्या रिंकी चुदने के काबिल हो गयी है?”

“नहीं अरुण … यार अभी तो वो छोटी है!

मैंने हर सांस के साथ पैंटी को सूंघते हुए पैंटी को वापस उसी जगह डालते हुए मैंने कमरे के अंदर दो कदम और आगे उसके बेड की तरफ बढ़ा दिए.

जब मेरी नज़र रिंकी पर पड़ी मेरे होश उड़ गए। मेरी बेटी का टॉप के ऊपर का हुक खुला हुआ था जिसमें से एक चूचा पूरी तरह बाहर था।

यह नज़ारा देख मुझ को जैसे सांप सूंघ गया। मै बुत बना खड़ा एकटक सो रही अपनी बेटी के अधनंगे बदन को निहारे जा रहा था।

मेरा ध्यान जब टूटा जब लंड ने अकड़ कर लोअर का टेंट बना दिया। ध्यान टूटते ही तुरंत मैंने यू टर्न लिया और कमरे से बाहर आ गया।

मै वहीं दीवार से लगा सोचने लगा कि आखिर करू तो क्या करू। इस हालत में बेटी को देखना भी गलत लग रहा था और साथ ही अपने कमरे में लौट जाने को भी कदम नहीं पड़ रहे थे।

रिंकी के अर्ध नग्न जिस्म ने मेरे अंदर कुछ एहसास जगा दिए थे. मेरे दिमाग़ में यह विचार आने लगा कि शायद इस हालात में मै उसकी कुछ मदद कर सकता था. मगर हमारा रिश्ता रास्ते में एक बहुत बड़ी बाधा थी, इसलिए वास्तव या हकीकत में जागते हुए उसके साथ कुछ कर पाने की संभावना मेरे लिए ना के बराबर ही थी. मगर मेरे दिमाग़ के किसी कोने में यह विचार ज़रूर जनम ले चुका था कि कोशिस करने में कोई हर्ज नही है. उस संभावना ने एक मर्द होने के नाते अपनी बेटी रिंकी के लिए मेरे जज़्बातों को और भी मज़बूत कर दिया था चाहे वो संभावना ना के बराबर थी.

बहुत देर सोच विचार करने के बाद मेरे विवेक और मर्यादा ने लंड के कड़कपन के आगे घुटने टेक दिए।

मै वापस कमरे में घुसा और रिंकी के नज़दीक जाकर खड़ा हो गया। मैंने हौले से रिंकी को पुकारा। बहुत धीरे … सिर्फ इतना तेज की अगर सो रही हो तो नींद न टूटे और जग रही हो तो पता चल जाये।

लगातार 3 आवाज़ देते हुए मै बेड पर बैठ गया। चौथी बार आवाज़ देने के साथ मैंने रिंकी के सिर पर हाथ फिरा दिया। इतने पर भी रिंकी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया न देखकर मेरी हिम्मत बढ़ गयी।

खुली हथेली से उंगलियां फिराकर पूरा पेट नापते हुए मेरा हाथ ऊपर बढ़ने लगा।

अपनी कामवासना की आग में आगे बढ़ते हुए रिंकी के पेट पर हाथ रखते हुए उसकी टॉप के बटन ठीक से बंद करने लगा ।

गर्म मखमली नर्म चूचे को छूते ही मेरे जिस्म में जैसे करंट दौड़ गया। धड़कन जैसे रुक सी गयी।

मेरा पूरा ध्यान रिंकी की छाती पर था।

मै इस पल को कभी भूलना नहीं चाहता था। ऐसा मौका कभी दोबारा मिले या न मिले इसलिए मै इस हर पल को अपने ज़ेहन में कैद कर लेना चाहता था। कपड़े ठीक करना तो शायद बहाना था, मै तो पूरा हाथ भर के अपनी बेटी का जिस्म सहलाना चाहता था।

दोनों हाथ बढ़ा कर रिंकी के एक चूचे को बहुत हल्के से पकड़ा, अंगूठे से उसके निप्पल को सहलाया। दूसरे हाथ से उसका टॉप का दूसरा सिरा हल्का सा उठाया तो उसके दूसरे चूचे की झलक देख कर घबराहट में टॉप का दूसरा हुक भी खुल गया और दूसरा चूचा भी बाहर निकल आया।

मैंने दोनों हाथों में एक एक चूचे को पकड़ कर आंखें बंद कर ली। मुझे अहसास हुआ जैसे रिंकी की मम्मी कुसुम के चूचे पकड़े हों। रिंकी के चूचे उसकी उम्र से बड़े थे। पतली कमर पर 34 इंची चूचे पाकर मै जैसे पागल हो गया था। शरीर का भराव उसकी मम्मी कुसुम पर गया था। ऐसा लग रहा था जैसे कुसुम लौट आयी हो और आँख बंद किये हुए सो रही हो।

एक पल के लिए  मै भूल गया और झुक कर मैंने अपना मुंह दोनों चूचों के बीच रख दिया। कभी दरार के बीच नाक फंसा कर उसके जिस्म की खुशबू लेता तो कभी दोनों निप्पल को सहलाता।

मै बाप बेटी की रिश्तों की मर्यादा को पूरी तरह से भूल चुका था और आज अपनी सारी हसरतें पूरी कर लेना चाहता हो।

उस के निप्पल थूक में भीग जाने के बाद कूलर की हवा से सिकुड़ कर तन गए थे

चूचों पर लगा थूक और कूलर की हवा की वजह से रिंकी को ठंड लगने लगी थी और उधर मै दीवानों की तरह रिंकी को खा जाना चाहता था।

मैंने एक लंबी सांस खींची और बड़े ही आनंद भरी आवाज़ में बोला- कुसुम मेरी जान, आई लव यू। तेरी बेटी में तेरी हर खूबी भरी हुई है। वही चूचे, वही खशबू … आह!

इस सब जद्दोजहद के बीच रिंकी की गहरी नींद टूट गयी। अपने ऊपर अचानक से किसी को इस तरह से झुका देख वो बहुत डर गई और अचानक से पलटी।

साथ ही उसे अहसास हुआ कि ये कोई और नहीं उसके पापा हैं। उसे समझ नहीं आ रहा था वो कैसे रियेक्ट करे। रिंकी को जैसे सांप सूंघ गया; वो लाश की तरह ऐसे ही पड़ी रही। वो अब तक भी फैसला नहीं कर पाई थी कि इस परिस्तिथि में कैसे पेश आया जाए।

जब उसे कुछ नहीं सूझा तो उसने अचानक खांसने की एक्टिंग चालू कर दी जैसे सोते सोते खांसी उठी हो।

रिंकी की इस हरकत से मुझ को होश आया। उसे लगातार खांसती देख कर मुझे लगा अब पकड़ा गया तो बहुत गड़बड़ हो जाएगी। और सारा भंडा फूट जाएगा। रिंकी के अचानक इस तरह खासने से मै बहुत डर गया था, माथे पर पसीना साफ नजर आ रहा था। मैंने अपने माथे से पसीना पोंछा

अपना मोबाइल उठाया और  कमरे से बाहर निकल गया।

मुझे भागता देख रिंकी को पता चल चुका था कि पापा ही थे ! रिंकी जानती थी कि उसका बाप उसके जिस्म के उभारों को कपड़ों के ऊपर से निहारता है। लेकिन आज वही बाप कपड़ों की दीवार हटा कर उसके उभारों से खेल रहा था।

यह ख्याल रिंकी के जिस्म को रोमांच से भर गया, उसके चूचे तन गए और निप्पल कड़क हो गए। यह ख्याल उसको पागल कर रहा था। अपने पापा की ये हरकतें रिंकी को पागल कर रही थी साथ ही कहीं न कहीं सामाजिक बंदिशें उसे याद भी दिला रहीं थी कि कोई बाप अपनी बेटी का सोते हुए फायदा कैसे उठा सकता है ????

साथ ही उसके मन में कौतूहल चल रहा था  ‘पापा मेरी चूची सहलाते समय मम्मी का नाम ले रहे थे। ’‘पापा मम्मी से बहुत प्यार करते हैं। ’‘मम्मी के बिना पापा अकेले हो गए हैं। शायद ’‘मैं मम्मी जैसी लगती हूँ । क्या इसीलिए पापा मेरे करीब आये थे????

अब उस को अपने बाप पर दया आने लगी थी। उसकी नज़र में जो 2 – 4% गलत था अब उसकी कोई गुंजाइश नहीं थी। वो दांत भींचे चुपचाप अपने पापा के हाथो से, की गयी हरकतों का मजा लेती हुई पड़ी रही जैसे अभी अभी कोई खूबसूरत खब्वाब देखा हो । इन्ही सब ख्यालों में रिंकी को दोबारा नींद आ गयी।

उधर मै भी अपने तने लन्ड को ठंडा कर ओर अपनी आज सुबह की बेवकूफी के लिए खुद को कोस कर अपने मोबाइल में रात भर रिंकी ने क्या क्या सर्च किया था उसको खोजने में लग गया।

गूगल क्रोमो, ओपेरा मिनी, यू शी ब्रवस्वेर, सारे सर्च इंजन की हिस्टरी खंगाल डाली लेकिन कुछ हाथ ना लगा। काफी मशक्कत के बाद थक हार कर वापस मै अपने व्हाट्स अप के मैसेज बॉक्स में अपनी पत्नी कुसुम का रात 11 बजे का प्यार भरा हार्ट शेप गुड नाईट मैसेज पढ़कर सुकून महसूस कर मुस्कुरा गया।

तभी मुझे ख्याल आया कि क्यो ना एक बार अपने मोबाइल में कुसुम का व्हाट्स अप क्लोन खोल कर देखू किस किस ने उसको क्या क्या भेजा होगा। मैंने डरते हुए कुसुम का व्हाट्स अप क्लोन खोला तो मेरी आँखे फटी रह गयी जितने wishes मैसेज मुझे एक साल में कभी नहीं आये थे। उससे ज्यादा मैसेज उसके एक रात में आये हुए थे। लेकिन ज्यादा चिंता की बात नही थी कुसुम ने किसी भी मैसेज पर जबाब नही दिया था। सिवाय एक शक्स के मैसेज पर उसके सवाल जबाब से भरी ग्रीन टिक नजर आ रही थी।

मेरे अवचेतन ने मुझे जगा दिया क्योकि मैं जानता था कुछ ठीक नहीं हुआ है,लगभग रात के 1 बजे का वक्त मैसेज सीन हो रहा था, कुसुम जैसे पूरी रात तक जग ही रही थी उसके msg पढ़े मैं हैरान था की वो दो घंटे से ज्यादा समय से जग रही थी……. जबकि उसने मुझे रात 11 बजे ही गुड नाईट मैसेज किया था।

मैंने msg चेक किये, प्यारे संजय जी का msg था,

संजय  -‘कितना तड़पायेगी जबाब दो न,’

कुसुम -‘आज से आपके पास मेरे कोई जबाब नहीं आ पाएंगे , मैंने इन्हें वचन दिया है,आप भी मैसेज करना बंद कर दो,’

संजय  — क्या ??? अब ये नया चूतियापा क्या है, छोड़ भी दो उस ढीले बलम को…. 😜 और भूल जाओ बेफिजूल के वचन को 😂

कुसुम –  मैं जान दे सकती हु पर इनसे किया कोई वचन नहीं तोड़ सकती जानते हो न, अपनी औकात में रहो वरना मैं दिखा दूंगी,

“”‘मैं और भी सदमे में था की ये क्या है,जो औरत किसी दुसरे मर्द को रात के 1 बजे मैसेज करती है वो पति की इतनी इज्जत कर रही है की अपने यार को धमका रही है,””

संजय –‘अरे कुसुम जी आप तो गुस्सा हो गयी मुझे माफ़ कर दीजिये ।

कुसुम – ‘पहली गलती है संजय माफ़ करती हु,लेकिन आज के बाद इनके बारे में कुछ कहा तो सोच लेना अंजाम क्या होगा,

मैं भी दबंगो के खानदान की बहू हु।

संजय — माफ़ी कुसुम जी

कुसुम ने जवाब में स्माइल भेजा

संजय – – तो अब आगे क्या करना है

कुसुम – पता नहीं क्या…?? क्या करना है, आप सो जाइये। ऑफिस में, मैं आपसे बात करती हु, लेकिन अब ज्यादा नहीं बस कुछ कुछ… .. ..

इसके बाद कोई बात नहीं हुई …….. पर मेरे मन में विचारो की रेल चल पड़ी ये क्या है ?????? वो मुझसे प्यार करती है तो उसके साथ क्यों है ?????? और नहीं करती तो इतना प्यार मेरे लिए क्यों है ?????? और अब क्या वो मेरे सामने ही मेरे मोबाइल के अंदर ये सब करेंगे, मैं क्या करु मुझे समझ नहीं आ रहा था, और मैं चाह कर भी कुछ कर नही पा रहा था या शायद कुछ करना भी नहीं चाहता था न जाने कौन सी शक्ति ने मुझे रोका हुआ था ??????

मैं बेचैन था ,पर बेकाबू नहीं मैं कुछ करना तो चाहता था पर क्या करू ये मुझे भी पता नहीं था, अब तो कॉलेज भी जाने का मन नहीं कर रहा था ,साला मैं यहाँ होऊंगा और वहा पर मेरी बीवी ,……………मैं जलकर भूंज गया ,  मैं कब तक अपनी पत्नी की रखवाली करता रहूँगा ,जब उसने ही मन बना लिया है और वो भी इसका मजा ले रही है तो मैं कब तक उसे रोक पाऊंगा,…….मैं क्या करू तलाक ……

तलाक का नाम दिमाग में आते ही मेरे तन बदन में एक झुनझुनाहट सी दौड़ गयी ,नहीं मैं कुसुम से दूर नहीं रह सकता था , तो उसका ट्रान्सफर करा लू…ताकि इस संजय से छुटकारा मिल जाय , इसमें भी तो समय लगेगा , मुझे सोचने को समय चाहिए था , ताकि मैं कुछ अच्छा सा फैसला कर पाऊ,

जारी है…………

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