“”सबसे पहले उसकी नौकरी खाऊँगी, उसी दिन उस पर रेप का केस ठोक दूंगी और तुम्हे तो पता है ऐसे केसेज में कोर्ट भी औरत के पक्ष में फैसला सुनाता है,’” अगर मेरा और मेरी बेटी के साथ बन रहे नाजायज रिश्ते की भनक उसे लगी तो मेरा क्या हश्र होगा उसे सिर्फ खुदा जानता है।
क्यों क्या हुआ…… महाराज कहाँ खो गये, क्या सोच रहे हो…???? कुसुम मुझसे वीडियो काल से बात कर रही थी और मेरा शांत चेहरा देख कर बोली।
कुसुम मै तुमसे एक बात कहु उसका जबाब दोगी….. ये सिर्फ बस यू ही पूछ रहा हूँ ज्यादा सीरियस मत लेना।
ह्म्म्म पूछीये….
अभी हम दोनों ही अलग अलग शहरों में रह कर नोकारिया करेंगे…… वैसे अभी तक ऐसा हुआ नही है…… और शायद होगा भी नही…. लेकिन मान लो कल को मेरी जिंदगी में कोई और आ गया, और मै बहक गया तो तुम मेरे साथ क्या शर्मा जैसा सलूक (सबसे पहले उसकी नौकरी खाऊँगी, उसी दिन उस पर रेप का केस ठोक दूंगी)करोगी।
वो थोड़ी गंभीर हो गई थी। लेकिन इस बार वो भी चिंता में पड़ गई थी …
“”अरुण सच तो यह है कि पति और पत्नी का रिश्ता बहुत ही निजी और कोमल होता है. मै तुम्हारे नाजायज संबंधों की हकीकत सड़क पर लाऊँगी तो तमाशा मेरा ही बनेगा. एक सच यह भी है कि एक पति जब पत्नी की कमी दूसरी औरतों से पूरा करने का प्रयास करता है तो दूसरी औरत के साथ बेशर्मी और नंगापन भी विरासत या दहेज़ के रूप में उस के जीवन में प्रवेश करते हैं. जब कोई पुरुष अपनी लक्ष्मण रेखा पार करता है तो एक तूफान आता है और हमेशा के लिए उस की जिंदगी में सन्नाटा पसर जाता है.””
मुझे किसी गैर के साथ तुम्हारे रिश्ते की बात अगर तुम खुद से मुझे बताओगे तो शायद मुझे उतना दुःख नही होगा। और चुपचाप अपनी बेटी रिंकी के साथ तुम्हारी खुशनुमा जिंदगी से कांटे की भाँति निकल जाऊंगी। लेकिन अगर मेने तुम्हे खुद रंगे हाथों पकड़ा, या तुम्हारे अफेयर की बात किसी और के माध्यम से पता चली तो…. तब मै उसी दिन तुमसे तलाक लूंगी ? इसके लिए दोबारा से मुझे लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौर से ही क्यों ना गुजरना पड़े ? लेकिन मै तुम्हारी बेफवाई की सजा जरूर दूँगी….. मै तुम्हे और तुम्हारी प्रेमिका दोनों को बर्बाद दूँगी…. ह्म्म्म……!!
माफी माफी माफी…. कुसुम देवी….“साला ये भी क्या बक दिया मैने मेरी ठरकी बात से मेरी बीबी की पूरी ठरक ही मिट गयी “ ह्म्म्म……… मेने हस्ते हुए कहा।
मेरे बोलने का अंदाज ही ऐसा था की उसके चहरे में एक मुस्कान उभर आयी, और उसने हल्के से मुस्कुरा दिया , उसे भी इस चीज का अहसास था की हम दोनों की नौकरी हमारे बीच के संबंधों पर भी असर डाल रही है और हम दोनों ही ऐसा होने नही देना चाहते थे…।
कुसुम कुछ पल सोचने के बाद मुझसे बोली अरुण हम अपने सोशल मीडिया एकाउंट के पासवर्ड आई डी एक दूसरे को बता दे, जिससे हम दोनों ही एक दूसरे पर नजर रख सके और भस्विश्य में आने वाले तूफान से सर्तरक् रहे……..।
आईडिया बुरा नही है, और हम दोनों ने एक दूसरे के अपने सोशल मीडिया एकाउंट के पासवर्ड आई डी ट्रांसफर कर लिए और व्हाट्स अप का क्लोन बनाकर इंस्टाल कर लिया।
मेने उससे मजाकिया अंदाज में पूछा ये तो भविष्य की तैयारी हो गयी लेकिन जो हो चुका हो उसका क्या…..????
कुसुम — मतलब
एकाएक मैंने उससे पूछा- अच्छा कुसुम सच सच बताना, तुम शादी से पहले कभी किसी को प्यार करती थीं?
मेरे सवाल पर वो एकाएक चौंकी और बोली- ये आप कैसा सवाल पूछ रहे हैं?
मैंने प्यार से बोला- तुम्हारे पूर्व के रिश्ते से मुझे कोई प्रोब्लम नहीं है, मैं सिर्फ जानना चाहता हूँ.
वो मेरे प्यार और विश्वास देखकर बड़ी मासूमियत से बोली- हां एक था, जिसे मैं पसंद करती थी और वो भी मुझे पसंद करते थे.
ये बोलकर वो थोड़ा शर्मा गई.
ओह माई गॉड तुमने भी किसी से प्यार किया है। मुझे विश्वास नही हो रहा है, मेने आश्चर्य से उससे पूछा….???
ओफ़ ओ तुम मर्दो की हमेशा से यही परेशानी रही है.. लड़की किसी को पसंद करती हैं उसका मतलब ये नही होता कि वो उससे प्यार करती है….. पसंद करना और प्यार करना दोनों में ही जमीं आसमा का अंतर होता है। पसंद बदलती रहती है, लेकिन प्यार हमेशा याद रहता है। कुसुम मुझे ज्ञान का पाठ पढ़ाते हुए बोली।
मैंने उससे प्यार से पूछा- अरे अपनी पसंद के बारे में ही बता दो…….कौन था?
वो बोली- छोड़िये ना, वो शादी के पहले की बात थी … अभी क्यों जानना है?
मैंने कहा- प्लीज बताओ ना … हम तुम जब जासूसी कर रहे है तो तुम्हारा कोई भी राज मुझे किसी गैर से पता चले उससे तो अच्छा तुम ही बता दो और छिपा कर रखने से क्या फायदा होना !
वो थोड़ा सकुचाती हुई बोली- वो मेरे चाचा का साला है, जिसका नाम दिनेश है.
ये बोल कर वो चुप हो गई.
मैंने कहा- अरे वही दिनेश ना … जिसे तुम मामा बोलती हो?
उसने हां में सर हिला दिया.
((यहां मैं थोड़ा दिनेश के बारे में बता देता हूँ. दिनेश मेरी बीवी के चाचा का साला है, उसकी उम्र लगभग मेरे ही जितनी है. उसकी कद-काठी भी मेरे जितनी ही है तथा गोरा चिट्टा 80 किलो वजन का युवक है.
उसकी भी शादी हो चुकी है तथा उसे बेटा भी है.))
मैंने कुसुम से पूछा- अरे ये तो बताओ कि वो तुम्हारी पसंद कैसे बन गया ?
वो बोली- वो मेरे यहां हमेशा आते थे. उस समय पर मुझ पर दुखो का पहाड़ टूटा हुआ था। घर में नमक तेल का हिसाब रखते रखते मै अपनी जिंदगी में नमक डालना लगभग भूल सी गयी थी। उन्होंने ने अपनी बातों से, मेरी स्वाद हीन जिंदगी में एक चुटकी नमक डाल कर हिम्मत दी। वो मुझे समझाते, होंसला देते,उन्ही ने मुझे दुखो के घर से बाहर निकल कर, सुखों की दुनिया दाखिल होने के लिए प्रेरित किया। उनकी नगर पालिका और सरकारी दफ्तरों में जान पहचान थी। जिसकी वजह से मेरी विधवा पेंशन् मिलनी शुरु हो गयी। मुझे उनसे बातें करना अच्छा लगता था, फिर धीरे धीरे हमारे बीच नैन मटक्का, होते होते हम एक दूसरे को लाईक करने लगे. उस समय मैं 19 साल की थी और वो 26 साल के थे.
मैंने बोला- क्या तुम दोनों ने सेक्स भी किया था?
इस सवाल पर वो काफी गम्भीर हो गई और लगभग गिड़गिड़ाती हुई बोलने लगी- देखिए मैंने आपको बाल की खाल निकालने की नियत से नही ये सब बता रही हूँ … लेकिन मैं सच कहती हूँ मैंने उसके साथ तो छोड़ो कभी भी अपने पहले पति के अलावा किसी के साथ कुछ भी नहीं किया .
इधर मेरे मन में तो सब जानने का कीड़ा कुलबुलाने लगा था तो मैंने उसे अपनी कसम देते हुए सब कुछ सच सच बताने का बोला.
वो सोच में पड़ गई और बोली- देखिए मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ एवं आपके सिवाय और किसी के बारे में सोचती भी नहीं हूँ.
मैंने उससे कहा- मैं भी तुमसे बहुत प्यार करता हूँ, इससे हमारे बीच कोई दूरी नहीं होगी. मैं सिर्फ सब जानना चाहता हूँ.
वो बोली- आपने अपनी कसम दे दी है और आप मेरे लिए जिंदगी में सबसे बढ़ कर हैं. मैं अपने मम्मी-पापा की कसम खाकर बोलती हूँ कि मैंने उनके साथ सेक्स नहीं किया है.
“कोई भी स्त्री अपनी माँ बाप की कभी भी झूठी कसम नहीं खाती है.”
वो फिर आगे थोड़ा शर्मा कर बोली- दिनेश मामा ने एक बार मेरे साथ सेक्स करने का प्रयास किया था और मैं भी तैयार थी. उस समय मेरी उम्र 20 वर्ष थी अर्थात पहले पति के मौत के दो वर्ष बाद. उस दिन वो मेरे घर आए थे और घर के सभी लोग बाहर गए थे. उन्होंने मुझे अपनी बांहों में भर लिया था और मेरे गाल पर किस किया था. मुझे बहुत अच्छा लगा था इसलिए मैंने उन्हें मना नहीं किया. फिर उन्होंने मेरे होंठों पर अपने होंठ रखकर मुझे किस करने लगे. मेरे तो पूरे तन बदन में आग लग गई थी. मुझे बहुत मजा आ रहा था, मैं भी उन्हें बेतहाशा चूम रही थी. अभी हम लोगों को पांच मिनट ही हुए होंगे कि घर पर मम्मी और पापा आ गए. उसके बाद हम दोनों अलग हो गए. इसके बाद हमें कभी भी मौका नहीं मिला और हमने सेक्स तो दूर की बात, किस भी नहीं किया.
मैंने उससे पूछा- क्या तुम उसे अब भी पसंद करती हो?
वो बोली- तुमसे शादी के पहले करती थी परंतु मैं कसम खाकर बोलती हूँ कि मैं अभी सिर्फ आपसे प्यार करती हूँ. हां वो मुझे पागलों की तरह प्यार करते थे और मुझसे शादी भी करना चाहते थे पर हमारे बीच मामा भांजी का रिश्ता होने के कारण बात आगे नहीं बढ़ पाई.
यह सब बातें सुन कर मेरा दिमाग अस्थिर हो गया और मुझे समझ आया कि कई सारे मजाक सिर्फ मजाक नही होते बल्कि चतुराई से कहे गये सच होते है। तभी मेरे दिमाग में एक बहुत ही खुराफाती आईडिया ने जन्म ले लिया जो कोई भी आम पति नहीं सोच सकता है. उस रात में चैन से सो ना सका।
उधर दूसरे कमरे में बिस्तर पर करवटे बदलती हुयी रिंकी रात भर कल्पना करती रही कैसे मेरी मम्मी मेरे पापा के नीचे उनके लंड को अपनी चूत में लेती होगी। जो उसने अभी तक अपनी कमसिन् जवानी से भरे जिस्म में महसूस भी नही किया था. उसने यह सब फितूर अपने दिमाग़ से निकालने की बहुत कोशिश की मगर घूम फिर कर वो बातें फिर से उसके दिमाग़ में आ जाती. रिंकी का ध्यान मेरी चड्डी के मूतने वाले उस कट वाले हिस्से की ओर चला जाता और वो कल्पना में अपने पापा के लंड को उस गॅप में से बाहर निकलता हुआ देखती.
मेरे ख़याल रिंकी को बैचैन कर रहे थे और मैं ठीक से लिख नही सकता कि उसे किस बात से ज़यादा परेशानी हो रही थी, इस बात से कि उसकी की प्यासी चूत बार बार उसकी आँखो के सामने गीली हो रही थी या फिर इस ख़याल से कि मेरे पापा उसे कब चोद रहे होंगे???
अगले दिन सुबह मेरा मूड बहुत उखड़ा हुया था. मेरे हाव भाव मेरी हालत बता रहे थे, खुद रिंकी ने भी पूछा कि मैं ठीक तो हूँ. वो अभी स्कूल की ड्रेस में थी, और मेहरून शॉर्ट स्कर्ट पहने हुए थी मगर उसके साथ आज एक फॉर्म फिटिंग टी-शर्ट डाली हुई थी. आज जिंदगी में पहली बार उसके खूबसूरत चेहरे से हट कर मेरा ध्यान रिंकी के मम्मों की ओर गया. एक बारगी तो मुझे यकीन ही नही हुआ कि उसके मम्मे इतने बड़े और इतने सुंदर थे. उसके भारी मम्मो के एहसास ने मेरी हालत और भी पतली कर दी थी.
मैने उसके व्यवहार मे कोई तब्दीली कोई बदलाव ढूँढने की कोशिस की. मगर उसका आचरण वो ही पहले वाला था अगर कोई बदलाव था तो वो उसे बड़े अच्छे से छुपा रही थी. मगर मैं जानता था कि वो जानती है कि अब हम दोनो बाप बेटी के बीच एक सूक्षम, एक रहस्यमयी राज का पर्दाफ़ाश हो चुका था। अब इसका मतलब क्या था ये मेरी समझ से बाहर था और ये हमे किस दिशा मे ले जा रहा था ये भी मेरी समझ से बाहर था.
मेरे अंदर आगे बढ़ कर अपनी बेटी के जिस्म को छू लेने की ख्वाइश भी ज़ोर पकड़ रही थी. मैं अपनी बेटी के जिस्म के कुछ खास अंगो को छू कर उस एहसास को महसूस करना चाहता था ताकि उसी एहसास को उसके सपनो में इस्तेमाल कर उनमे थोड़ी वास्तविकता डाल सकूँ.
उधर रिंकी भी अब अपने पापा को अलग नज़रों से देखने लगी थी। बाप से सेक्स करने की चाहत शायद थी, नहीं थी लेकिन ये बात उसे बहुत रोमांचित कर रही थी कि उसका बाप उसके साथ सेक्स करना चाहता था। रिंकी इस ख्याल से घृणित नहीं थी, न ही डर रही थी। वो इस सब के बारे और जानना चाहती थी। आज सुबह के नाश्ते के समय एक अजीब सी शांति थी, कोई किसी से बात नहीं कर रहा था।
मै चोरी छुपे रिंकी की छाती पर नज़र फिरा कर टी शर्ट के अंदर तक झांक लेना चाहता था। वहीं रिंकी भी जानती थी कि पापा क्या देख रहे हैं। आज वो ज्यादा तन कर बैठी थी। पापा देख रहे हैं इसलिए वो शेप खराब नही होने देना चाहती।
जब मैने अपनी बेटी को अपनी कामाग्नी में जलती आँखो से देखा तो मैने पाया मेरे सामने यौवन से लबरेज एक ऐसी कमसिन् जवान लड़की बैठी है जिसका हर अंग बड़ी शिद्दत से तराषा गया था, जिसके हुश्न को पाने के कोई भी लड़ाई लड़ी जा सकती थी, जिसके लिए मरा और मारा जा सकता था. मैं उसे छूना चाहता था, उसे चूमना चाहता था, उसके अंग अंग को मसलना चाहता था और उसे चोदना चाहता था, उसके दहकते जिसम की आग में खुद को जलाकर उसे भोगना चाहता था.
नाश्ते के पूरे वक़्त मेरा लंड तना रहा। मगर अत्यधिक इच्छा होने पर भी मैं हस्तमैथुन से बच रहा था, मैं अपने अंदर दहक रही उस आग को, उस जोश को हस्तमैथुन से कम नही करना चाहता था.
नाश्ता खाकर दोनों उठे और हमेशा की तरह रिंकी ने मुझ को किस (छोटी किस, माँ बाप वाली किस) करके गुड बाय बोला। और घर से बाहर अपने स्कूल के लिए चली गई। आज किस करते वक़्त रिंकी ने मेरे गाल पर हाथ भी फिरा दिया। किस करने के लिए नजदीक आते समय रिंकी ने मेरे पैंट का उभार भांप लिया था। रिंकी नादान नहीं वह सेक्सी टीन गर्ल थी, जवानी में कदम रख चुकी थी और सेक्स के बारे में भी जानती थी।
उसके जाने के बाद मै भी एक लंबी छुट्टी के बाद अपने कॉलेज में अपनी ड्यूटी जॉइन करने के लिए समय से दस मिनिट पहले कॉलेज पहुँच गया। चूंकि अभी क्लास में पढ़ाना शुरु तो नही कर सकता था इसलिए कॉलेज कैंपस में कॉलेज में पढ़ने वाले लड़के लड़कियों का खूबसूरत नजारा देख कर अपनी आँखे सेंकने लगा।
यहाँ मैं आप सभी को बता दूँ कि पूर्वी भारत की लड़कियाँ बहुत ही आज़ाद ख्यालों वाली होती हैं। उनके कपड़े काफ़ी भड़कीले होते हैं … टाइट जींस … जिसमें उनका सुडौल पिछवाड़ा बहुत ही आकर्षक दिखाई देता है। लो कट टी-शर्ट जिसमें से उनके वक्ष का आधा भाग और उनके बीच का दरार काफ़ी उत्तेजक लगता है। ऊपर से वो कुछ ऐसा पर्फ़्यूम छिड़क के आती थीं जो मदमस्त कर देने वाला होता था।
मैं एक अच्छा लेखक हु इसका तो मुझे पता नही….. लेकिन मै एक अच्छा ओरेटर (वक्ता) हूँ इसलिये मेरे बात करने का अन्दाज़ लड़कियों को बहुत भाता है इसलिये मेरी क्लास की बहुत सी लड़कियाँ (छात्राएं) किसी ना किसी तरह से मुझे लाइन मारने की कोशिश करती रहती थीं। मैं उनका लाइन मारना, क्लास में द्विअर्थी भाषा के मस्ती में पूछे गए सवाल जबाब, कैंटीन में घूमना, कॉलेज टूर में झरनो में उनके भीगे बदन में, उन्हें देखना इत्यादि तो इन्जॉय करता था पर उससे आगे बढ़ने की ना तो मेरी हिम्मत थी ना ही इच्छा।
मगर आज किस्मत को तो कुछ और ही मंज़ूर था। पांच मिनिट के बाद कॉलेज का चपरासी मेरी तंद्रा को भंग करते हुए बोला अरुण सर आपको प्रिंसिपल सर अपने कैबिन में बुला रहे है। मै थोड़ा सा डर गया और चपरासी के साथ कदम से कदम मिलाते हुए प्रिंसिपल के कैबिन में दाखिल हो गया।
अहो भाग्य हमारे…….. जो आप पधारे..! प्रिंसिपल मुझे देखते हुए व्यंग भरा शब्दो का बाण मुझ पर चलाते हुए बोले।
मै — क्या हुआ सर….???
अरुण जी पिछले एक महीने में चार इतवार हटा दिये जाये तो बचे 26 दिन और इन 26 दिनों में आपकी उपस्थिति केवल छे दिन की है बांकी बीस दिन तो आप छुट्टी मना रहे थे। प्रिंसिपल गुर्रता हुआ मुझसे बोला।
सर मैने आपको लीव एप्लिकेशन दी थी, उसमे लिखा भी था मेरी वाइफ की तबियत ठीक नही है। मै अपनी सफाई देते हुए बोला।
अरुण जी मेरे माथे पर क्या ” सी ” लिखा है……. कितना झूठ बोलोगे मुझसे…. तुम्हारी वाइफ दिमापुर में मजे से क्लर्क की नौकरी कर रही है और ये बात खुद मुझे तुम्हारे पिता ने बताई हैं।
मेरा झूठ पकड़ा गया था….. मै नजरे झुका कर शांत खड़े होकर प्रिंसिपल की गालियों को सुनने का इंतजार करने लगा।
देखो अरुण तुम्हारे पिता मेरे एक अच्छे मित्र है, इसलिए मै तुम्हे इतने दिनों से झेल रहा हूँ। लेकिन अब नही…. तुम्हारी गैर मौजूदगी मैने एक नयी प्रोफेसर रख ली है….. ये कोई बनिया की दुकान तो है नही, ये प्राइवेट कॉलेज है, स्टूडेंट क्लास में प्रोफेसर नही आने पर कंप्लेंट कर हंगामा करते है। अच्छा होगा तुम कोई और जॉब कर लो, जिसमें तुम मनचाहा अवकाश ले सकते हो।
लेकिन सर ……….. एक मौका दे देते। मुझे कोई और काम नही आता है, मै क्या करूँगा……???? आप मुझे यही कोई और डिपार्टमेंट में शिफ्ट कर दे प्लीज…. Its humble request.
प्रिंसिपल कुछ देर सोचने के बाद….. ठीक है ये लास्ट चांस है…… तुम्हे कंप्यूटर आता है….????
हा सर,
ठीक है फिर अभी कॉलेज में प्रोजेक्ट चल रहे है और तुम प्रोजेक्ट गाइड बन कर स्टूडेंट की प्रोजेक्ट बनाने में मदद करो…..!!
थैंक्स यू वेरी मच सर….!
मै कंप्यूटर लैब में स्टूडेंट को प्रोजेक्ट बनाने में मदद करने लगा मेरे पास कॉलेज के बहुत सारे स्टूडेंट प्रोजेक्ट करने के लिये बैठे थे और मैं बहुत सिंसियरली उनको प्रोजेक्ट करा रहा था। जिसमें ज्यादातर लड़कियाँ थीं।
लंच टाइम में मैं अपने सहयोगियों के साथ कैन्टीन में लन्च कर रहा था, कि अचानक एक कलिग ने कहा “अबे देख … कितने बड़े-बड़े हैं इसके …”
मैंने सर उठाकर देखा … एक बीस-इक्कीस साल की लड़की अपनी दो सहेलियों के साथ लंच लेने आई थी, और जिसके बारे में कलिग ने कमेंट किया था उसके स्तन वाकई बहुत बड़े थे … आम लड़कियों से काफ़ी बड़े … उसकी दोनों सहिलियाँ भी ठीक ठाक थीं।
मैंने कहा,”देखते हैं किसकी झोली में गिरती हैं … !”
कलिग ने कहा,”तू ही तो है प्रोजेक्ट गाइड सभी लड़कियों का … तेरे पास ही आयेंगी … और कहाँ जायेंगी..”
मैंने कहा,”काश …!” ह्म्म्म ह्म्म्म
दोपहर में जब मैं लंच के बाद जाकर वापस कंप्यूटर लैब में बैठा, यह एक प्रोजेक्ट गाइड बनना मेरे लिए नया काम था. मैं लैब में स्टूडेंट के साथ ज़यादा समय तक ना रह सका, इसलिए जल्दी जल्दी काम ख़तम करके मैं घर लौट आया. घर पहुँचते पहुँचते मैं पसीने से तर बतर हो चुका था. मैं जल्दी से नाहया और घर के उस एकलौते कोने में चला गया जहाँ पर बड़ा वाला कूलर लगा था.
मेरी बेटी रिंकी वहाँ पर पहले से ही मोजूद थी, नंगे फर्श पर टाँगे घुटनो से मोड़ कर एक दूसरे के उपर रख वो पालती मार कर बैठी थी. गर्मी की वजह से वो सिर्फ़ टॉप और स्कर्ट में थी. उसका टॉप पतला और झीना सा था. उसने अपनी स्कर्ट घुटनो के उपर तक खींची हुई थी ताकि उसके बदन के ज़्यादा से ज़्यादा हिस्से को हवा लग सके.
बालों मैं धीरे धीरे कंघी करते वो अपना समय बिता रही थी. वो उन्हे संवारने के लिए कंघी नही कर रही थी बल्कि सिर्फ़ समय बिताने के लिए खुद को व्यस्त रखे हुए थी. कंघी चलाते हुए जब उसकी बाहें उपर उठती या सर के पीछे जाती तो उसकी छाती आगे को हो जाती जैसे सीना ताने कोई सिपाही सावधान मुद्रा मे खड़ा हो.
मैने महसूस किया कि उसने टॉप के नीचे कोई ब्रा नही पहनी है शायद इतनी गर्मी में ब्रा जैसे संकीर्ण कपड़े से बचने के लिए. उसके निपल टॉप के उपर से बाहर को निकले हुए थे और उसके मम्मे झीने कपड़े में हल्के हल्के से दूधिया रंगत लिए झाँक रहे थे. पंखे की हवा में टॉप हिल डुल कर उसके भारी मम्मों का साइज़ बता रहा था साथ ही साथ पतली कमर के पास थोड़ी सी नंगी पीठ भी दिखा रहा था. मुझे नही मालूम मुझे अचानक क्या हो गया या किस कारणवश मैने यह किया.
मैने एक कुर्सी उठाई और बिल्कुल उसके पीछे रख दी. कुर्सी पर बैठ मैने उसके हाथों से कंघी ले ली. पंखे की हवा लेते हुए मैं उसके बालों में कंघी करने लगा. मैं उसके बालों में कंघी कर रहा था और वो मुझे एसा करने दे रही थी.
जब मैं उसके बालों में कंघी फेर रहा था तो मुझे अपने घुटनो पर उसकी पीठ का दवाब महसूस हुआ. यह स्पर्श रोमांचित कर देने वाला था. जब मैने उसके बालों को कंघी करने की सोची थी तो यह बात मेरे दिल में नही आई थी मगर मुझे उसका स्पर्श अत्यंत सुखद लग रहा था. थोड़े समय बाद उसने अपना बदन ढीला छोड़ दिया, आँखे बंद कर ली और मैं इतमीनान से उसके बालों में कंघी करने लगा. ऐसे ही टाँगे पसार कर और बदन पीछे की ओर झुका कर मेरी टाँगो से टेक लगाए वो आराम से बैठी थी और मैं उसकी ज़ुल्फो से खेल रहा था, कुछ समय बीता होगा जब अचानक हम ने मेरे पापा (उसके दादा जी) के घर आने की आवाज़ सुनी. वो एकदम से उछल पड़ी जैसे कोई अपराध करते हुए अपराधी रंगे हाथों पकड़ा जाए, मेरे हाथों से कंघी छीन वो दूसरे कमरे में भाग गयी इससे पहले कि पापा (उसके दादा जी) वहाँ आकर हम दोनो को देख लेते.
मुझे नही लगता था कि उसे इस तरह वहाँ से भागने की कोई ज़रूरत थी. चाहे मेरे पापा (उसके दादा जी) मुझे उसके बालों में कंघी करते देख भी लेते , क्योकि इसमे कोई ग़लत बात या बुराई नही थी. मेरे द्वारा अपनी बेटी के बालों में कंघी करना नादानी या मूर्खता कहा जा सकता था मगर एसा करना वर्जित या निषिद्ध हरगिज़ नही था. जिस तरह वो उछली थी, जिस तरह उसे अपराध बोध हुआ था और जिस तरह वो वहाँ से दूसरे रूम में भागी थी इससे मुझे एहसास हो गया था कि उसके दिमाग़ में क्या चल रहा है.
पिछले एक घंटे से मै पूरी तरह से खाली था, खाली बैठे बैठे मेरा घर में रहना मुश्किल हो रहा था, बैठे बैठे मैं अपना फोन देख रहा था,जो फेंटेसी मेरी बेटी के साथ शुरु होने वाली थी वो दब कर रह गई थी रिंकी किचिन मै खाना बना रही थी।
मैं अपने मोबाइल में कुसुम का व्हाट्स अप क्लोन देख रहा था, कुसुम अभी ऑनलाइन नही थी और मैने वाट्सप के मेसेज से ही शुरू किया उसके पुराने मैसेज वो सब डिलीट हो चुके थे लेकिन आज के ही मेसेज बचे थे, मुझे ये बात थोड़ी खटक गई….???
मैं आज के ही मेसेज को देखने लगा …
अचानक ही वाट्सप के मेसेज में मेरा ध्यान खिंचा , संजय के नाम से मेसेज आया था,उसकी dp में वो खुले बदन अपने 6 पैक दिखाते हुए फ़ोटो डाल कर रखा था,मैंने देखा की उन दोनो में बहुत सारी बाते हुई है ,सुबह 11 से साढ़े 11 का मेसेज था..
‘आज तुम गुलाबी सूट में कमाल की लग रही हो …’
कुसुम — ‘थैंक्स ..’और एक स्माइली
‘आजकल ज्यादा बात क्यो नही करती कटी कटी सी रहती हो ‘
कुसुम — ‘नही ऐसी कोई बात नही है ‘
‘ऐसे तुम्हारे पति की क्या किस्मत है, तुम्हारी जैसी हसीं खूबसूरत बीबी मिली.. मुझे जलन होती है उनसे’
कुसुम — ने बस एक स्माइली ही भेजी ,
मुझे लग रहा था की उसे तुम में उतना मजा नही आ आता है.. नही भला इतनी खूबसूरत बीबी को कोई अकेला छोड़ता है क्या……??????
कुसुम — एक स्माइल के साथ गलतफेहमी है तुम्हारी…
‘वो अगर ये जानेगा की मैं तुमसे बात करता हु तो गुस्सा हो जाएगा है ना,ऐसे भी दूसरे की बीबी से मुझे बात करते डर लगने लगा है ..’
उसकी ये बात पढ़कर कुसुम ने एक खिलखिलाने वाली स्माइल डाल दी .. और अगला मैसेज
कुसुम — ‘सिर्फ बात से क्यो गुस्सा होंगे ,वो बहुत ही अंडरस्टैंडिंग है ..’
‘ओह तो क्या हम सिर्फ बात बस करेंगे ..’ ???
कुसुम — ‘तो और क्या चाहते हो तुम ,आगे बढ़ने की उम्मीद भी मत रखना..’
‘ओके सॉरी ,आज लंच साथ में करे,या फिर शर्मा के साथ ही जाने वाली हो ..’
इस बार फिर से कुसुम ने एक हँसने वाली स्माइल डाली
कुसुम — ‘ओके साथ चलेंगे ‘
चैट खतम…..
मेरा मूड थोड़ा खराब हो गया इसलिए मैंने चुपचाप ही मोबाइल रख दिया और बाकी के मेसेज को पढ़ने की भी जहमत नही उठाई, इतना तो पता चल चुका था की इन मैसेज में वो दोनो काफी पास आ चुके थे,उनके बीच रोज बात भी होती थी लेकिन वो कहा तक पहुचे थे ये मुझे नही पता था ना ही जानने का ही मन हुआ,
लेकिन फिर भी कुसुम के व्यव्हार मुझे थोड़ा बदला हुआ लगा वरना वो फ्लर्ट करना पसंद करती है , तो उसने खुद मुझे क्यो बोला था कि हम एक दूसरे के सोशल मीडिया एकाउंट आई डी, पासवर्ड, व्हाट्स अप क्लोन इंस्टाल कर ताकि अपने मोबाइल में उस मोबाइल की गतिविधियों को देख सकू, अब मैं समझ नहीं पा रहा था की मेरी बीवी इतनी शरीफ क्यो बन रही है ,
मैं कुसुम को आजादी तो देना चाहता था और मेरी तमन्ना भी थी की उसके पीछे लड़के आशिकों की तरह घूमे लेकिन मैं उससे इस वफ़ा की आशा जरूर करता था की वो मेरे प्रति पारदर्शी रहे ….
जारी है…….
