कर्ज और फर्ज | एक कश्मकश – Update 41

कर्ज और फर्ज एक कश्मकश - Erotic Family Sex Story
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तेरी बीवी कुसुम और मेरी बहू बहुत होनहार है उसकी तरक्की में कभी रोड़ा या टांग मत अड़ाना। उसे अपने सपने पूरे कर लेने दो।

पापा की अतीत की कहानी और नसीहतो के साथ साथ हमारा खाना भी खतम हो गया और मै पापा की नसीहत को शायद ठीक से समझ नही पाया, और नजर अंदाज कर अपने रूम में चला गया। उस वक्त दोपहर के 2 बज रहे थे, रिंकी को स्कूल से वापस आने में एक घंटा बाकी था। पापा बिजली घर के लिए निकल गये, घर में सिर्फ में ही अकेला था, मैने सोचा नहा धोकर फिर आराम से बाहर मॉल घूम कर आता हूँ। और जब तक वो स्कूल से आयेगी तब तक अपनी बेटी के लिए उसके पंसदीदा पनीर पिज़्ज़ा लाया जाये। मै सारे कपड़े उतार कर शावर खोल कर मजे से नहाने लगा।

थोड़ी देर बाद मै नहा कर वापस अपने कपाट (कपबोर्ड) में पेहनने के लिए चड्डी देखी तो अलमारी में नही थी, मै शोकड हो गया मेरे पास आधा दर्जन चड्डिया है लेकिन अभी एक भी नही मिल रही है, आखिर मेरी सारी चड्डिया गायब कहाँ हो गयी…..????

मै बिना कपड़ो के नँगा ही बिस्तर पर बैठ गया…… मेरे नजरिये से घर में नँगा होकर, रहना, घरेलू कार्य करना कोई शर्मिंदगी की बात नही है, हमारे पूर्वज जंगलो में ही नंगे घूमा करते थे, आज विकसित पशिचिम देशों  में अक्सर घर के अंदर सभी सदस्य नंगे ही रहते है।

“”क्योकि जिस उम्र में गुप्तांगो में कोई समस्या नही होती उस उम्र में हम मां, बहनो, और अन्य सदस्यों के सामने नंगे घूमते, खेलते रहते है और जब गुप्तांगो से जुड़ी समस्याओं की उम्र आती है तो हम उन्हें मां, बहनो, और अन्य सदस्यों के सामने अंडरवेयर से छुपाना शुरू कर देते हैं।””

तभी मुझे अपनी बेटी रिंकी के मैसेज का ध्यान आया उसने लिखा था …………

(अब मेरी वासना भी चरम पर थी.. पलंग पर पापा का लाल रंग का अंडरवियर था जिस पर हल्के सफेद रंग का चमकीला सा पदार्थ लगा हुआ था.. ..मैंने अंडरवियर को उल्टा किया और मेरी वासना उस अंडरवियर को मेरे होठों तक ले गई और मूतने वाले कट के पास लगे सफेद सूख चुके पदार्थ को मैंने जीभ से चाट लिया..आह ..क्या स्वाद था उसका.. हल्का नमकीन.. और उसमें से आ रही पापा के लंड की खुशबू.. आह.. नाक में लगाकर सूघती रही और चाटती रही..)

मै समझ गया रिंकी मेरे अंडरवियर को चूम कर अपनी प्यासे होंठो की प्यास बुझाती है। रिकी और मेरी मम्मी का एक ही कमरा है, मेरी मम्मी की अनुपस्थि में रिंकी ही पूरे कमरे की मालकिन है। मै कमरे के अंदर दाखिल हुआ और कपबोर्ड को खोल कर देखा तो मेरी सारी चड्डिया मेरी बेटी ने बहुत प्यार से सहेज कर रखी थी।

हाय मेरी बेटी रिंकी तू अपने पापा से इतना प्यार करती हैं…. मै मन ही मन बोला, मुझे अपनी बेटी पर बहुत प्यार आ रहा था। मैने सारी चड्डिया ना उठाते हुए सिर्फ अभी पहनने के लिए एक चड्डी कपबोर्ड में से ले ली। और वापस अपने कमरे में कपड़े पहनकर तैयार होकर मॉल घूमने चला गया।

हाथों से पिज़्ज़ा के डिब्बे को पकड़े हुए मै कब लेडीज अंडरगारमेंट के सेक्शन में पहुँच गया, मुझे पता ही नहीं चला। मैने सोचा मेरी बेटी मेरी चड्डियो को इतना सहेज कर रखे हुए है तो मै भी उसके लिए नई चडी बनियां खरीद कर उसको बिना बताये कपबोर्ड में रख दूंगा, और जब वो उन्हें देखेगी तो उसके लिए इससे भला सरप्राइज गिफ्ट क्या होगा।

सामने काउंटर पर सेल्स गर्ल बोली “” मे आई हेल्प यू सर”……. मै घबराता हुआ जी मुझे चड्डी बनियां लेना है….????

कितना नम्बर सर….????

मै सोचते हुए नम्बर का तो पता नही…..!

वो थोड़ी हँसी…… सौरी सर आपको अपनी चड्डी बनियां का नम्बर नहीं पता…..!

मुझे अपने लिए नही लेना है…!

ओह्ह तो फिर किसके लिए… लेना है..???

मै झिझकता हुआ अपनी बेटी के लिए…..।

बुरा मत मानिये सर लेडी अंडर गारमेंट को ब्रा और पैंटी कहते है….. वैसे आपकी बेटी का ब्रा साइज क्या है ????

मुझे ठीक से नही पता….!

कोई बात नही सर……. उसकी उम्र क्या है, मतलब टीनेजर है अभी, शरीर में कैसी है स्लिम या हेल्थी शरीर की है…..??

मै चुपचाप इधर उधर रिंकी की तरह दिखने जैसी लड़की को अपनी नजर घुमा कर ढूँढने लगा ।

सेल्स गर्ल मन ही मन मुझे शायद चूतिया समझ कर दूसरे ग्राहक के साथ बात करने लगी।

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था सामने की रैक में ब्रा के डिब्बे पर छपी सेक्सी टीन गर्ल के उठे हुए चूचों पर मेरी नज़र जैसे चिपक सी गयी। मैने हाथ बढ़ा कर 2 डिब्बे उठा लिए और आंखों से मॉडल की खूबसूरती का शर्बत पीने लगा।

डिब्बे पर छपी मॉडल का फिगर लगभग मेरी बेटी रिंकी जैसा था । लाल जालीदार ब्रा में सफेद खूबसूरत चूचे तो मॉडल के थे लेकिन मुझ को वहाँ चेहरा रिंकी का दिख रहा था।

पैंट में कड़कपन का अहसास होते ही मैने एक हाथ से लौड़ा एडजस्ट किया और दूसरे हाथ से डिब्बों का सीधा प्रसारण जारी रखा।

अपने ख्यालों में मै इतना खोया था कि कब वहाँ 4 औरतें आ गई मुझे पता ही न चला।

पतली और मधुर आवाज़ में ‘एक्सक्यूज़ मी’ सुनते ही मै हडबड़ा गया और हाथ के डिब्बों को सीने से छिपाते हुए आगे बढ़ गया।

“जाने क्या सोच रही होंगी वो औरत मेरे बारे में?” जैसे खयाल मन में लेकर मै कैश काउंटर पर पहुँच गया। वहाँ भी औरतों की भारी भीड़ होने के कारण मै ब्रा के डिब्बे बाहर निकाल नहीं पाया और न चाहते हुए भी उनका बिल कटवा कर मॉल से बाहर आकर अपनी डिस्कवर बाइक पर बैठ गया।

बाइक पर बैठ कर वापस मैने वो डिब्बे हाथ मे लिए और पैंट के ऊपर से लौड़ा सहलाते हुए उन्हें देखने लगा। ख्यालों में रिंकी को इस ब्रा में सोचते हुए मैने जब अपनी कलाई पर बधी घडी पर नजर डाली तो ब्रा पैंटी के डिब्बे को डिक्की में रख जल्द से जल्द घर जाने का फैसला लिया।

खड़ी दोपहरी का समय था और पार्किंग लॉट खाली था। गाड़ी स्टार्ट कर हॉर्न बजाते हुए जैसे ही मैने बाइक घुमाई, मेरी नजर सीधी सामने वाली कार के आधे खुले शीशे पर पड़ी। अंदर एक लड़का और लड़की एक दूसरे के होंठों को चूसने में लगे थे. लड़की की गुलाबी टॉप छाती से ऊपर थी जिससे लड़की के दोनों चूचे लड़के के हाथों में थे। हॉर्न की आवाज सुनते ही दोनों हड़बड़ाए और लड़की तुरंत नीचे लेट गयी।

उस लड़की को मै जानता था वो मेरी बेटी रिंकी की सहेली रितु (इस कहानी की एक विलेन) थी वो अक्सर रिंकी के साथ कभी कभी घर आया जाया करती थी। सेक्सी टीन गर्ल रितु अभी जवानी में कदम रख रही है। मॉडर्न है, तो वैसा ही पहनावा है। मिनी स्कर्ट और शॉर्ट्स में आधे झांकते चूतड़ हर किसी का ध्यान खींच ही लेते हैं।

उसके जिस्म की बनावट मेरी बेटी रिंकी से इतनी मेल खाती है कि मै भी तिरछी नज़रों से रितु के जिस्म की बारीकियों को हमेशा नाप लेता हूँ।

इसलिए ये नज़ारा देख कर भी मै वहा रुका नहीं, आराम से गाड़ी निकाल कर वहाँ से निकल गया।

घर के बाहर खड़ी स्कूटी देख मै समझ गया मेरी बेटी रिंकी स्कूल से वापस आ गयी है, मै दबे पाँव उसको सरप्राइज करने के लिए धीरे धीरे से उसके कमरे की तरफ जाने लगा……. जैसे जैसे मै दरवाजे के करीब जा रहा था कमरे में से गाने की तेज आवाज आ रही थी……

उठती है कसक आजा,

दिल करे धक धक आजा,

कब होगा मिलन आजा,

आजा सजन आजा….. आजा सजन आजा

मेरे प्यारे सजन, मेरे भोले सजन, अच्छे सजन आजा…………

गाने के बोल सुनकर मेरे अंदर संजय दत्त घुस गया…..😂 मै मुंडी (सिर) हिलाते हुए जल्दी से दरवाजे पर पहुँच गया।

दरवाजे के पास पहुँच कर मैने अंदर झाँका तो मेरी आँखे फटी रह गयी…!

रिंकी स्कूल की ड्रेस को धीरे धीरे उतारते हुए बदन को हिला कर निचे ऊपर से हिलाते हुए इंस्टा पर डांस वीडियो बना रही रही थी।  उसने शर्ट के ऊपर बंधी टाई खोल दी।

फिर उसने शर्ट के बटन खोल दिये एक अंदर बनियान/समीज जो कंधे के ऊपर डोरी वाला था वही पहनी थी, चूचियां उसमे बड़ी बड़ी और आधा बाहर की तरफ आती हुई दिखाई दे रही थी। और शर्ट निकाल दी मैं चुपचाप खड़ा रहा कुछ ना बोल सका फिर उसने शर्ट को दूधों पर से हटाया और अपने हाथों से अपने सीने को ढक लिया अब वो सिर्फ स्कूल ड्रेस की स्कर्ट और रेड ब्रा में थी

अपनी बेटी का गोरा जिश्म और सीना देख कर मेरी नजरों में चमक सी आ गयी उसके स्तन किसी गोल बॉल की तरह थे उसने ब्रा को थोड़ा सा खिंच दिया जिससे उसके दूध थोड़े दिखने लगे और वह फिर रील बनाने लगी।

रिंकी लाल कलर के ब्रा और स्कूल ड्रेस की स्कर्ट में बहुत ही ज्यादा हॉट लग रही थी ऊपर से अपने बाल खुले रखे थे और होंठ को लाल लिपिस्टक से रंग लिया था जिससे और भी ज्यादा सेक्सी लग रही थी।

((“” आजकल इन्ही इंस्टा वीडियो बना कर फेमस होने और पैसा कमाने के लिए अपने हाथों से दबा दबा कर वैसे भी छोटी छोटी लड़कियों की चूचियां उम्र से पहले ही बड़ी बड़ी हो गई है, कमर हिला हिला कर उन की गांड का उभार बाहर की तरफ निकल आता है इस वजह से उनके भाई, बाप मर्यादा में बंधे होने के कारण ज्यादा कुछ कह तो नही पाते लेकिन मन ही मन मजे लेते रहते है, ये ही वजह आज के दौर में इंसेक्ट् सेक्स रिलेशन मध्यम वर्गीय हर दूसरे घर में कुछ ज्यादा ही पनप रहे है ।””) ) 

जैसे ही मेरी बेटी ने स्कूल ड्रेस की स्कर्ट उतारी अब उसकी गोल गोल गांड और गोरी गोरी जांघें दिखाई दे रही थी ऊपर से गोल गोल बड़ी बड़ी चूचियां बाहर की तरफ आती हुई और सेक्सी कमर कोई भी पागल हो जाये। ऐसा लग रहा था मेरे मुँह से लार टपक रहा था अपनी बेटी के जिस्म को देखकर।

अगले गाने पर शुरुआत हो गयी डांस की।

आयेगा मजा अब बरसात का,

तेरी मेरी दिलकश मुलाकात का,

मैने तो संभाले रखा है,

सब्र का बांध दिल का टूट गया,

यो अँखियाँ मिला के अखियों से………..

वो सेक्सी अंदाज में डांस करने लगी कभी चूचियां हिलाती तो कभी गांड, कभी गांड गोल गोल घुमाती तो झुक कर चूचियां हिलाती। उसके बाद तो मै पूरा पागल हो गया रिंकी जवानी को देखकर। मै चुपचाप खड़ा रहा और मेरी साँसे तेज तेज चलने लगी। अचानक से डांस करते करते जब वो घूमी तो मुझे अपने अर्ध नग्न जिस्म को देखते हुए रूक गयी। और जल्दी जल्दी में घबराहट से उसका मोबाइल हाथ से छूट कर जमीन पर गिर गया।

मुझे समझ नहीं आया उसे हो क्या गया। और मै वापस उल्टे पाँव अपने कमरे में आकर बेड पर बैठ गया……. रिंकी के ब्रा मे कैद चूचे मैने पहली बार देखे थे वो भी सेकंड के सौ वे हिस्से के बराबर समय के लिये। और शायद देखने की ललक ही मुझ को ब्रा के डिब्बों तक ले गयी थी, मॉडल के चूचों में मै अपनी बेटी के चूचे ढूंढ रहा था।

उधर मेरे कमरे से निकलते ही हड़बड़ाई हुई रिंकी अपनी रेगुलर ड्रेस (जीन्स टी शर्ट) हाथो में लेकर सीधा बाथरूम में घुस गई।

घबराहट में वह सोच रही थी कि ‘पापा ने देख लिया होगा या नहीं। देखा भी है तो बोला तो कुछ नहीं है। नहीं बोला तो क्या सोच रहे होंगे।’ शायद कुछ देखा ही न हो। इतनी जल्दी नज़र कहाँ ही पड़ी होगी।’ ऐसा सोच कर रिंकी ने राहत की सांस ली ।

रिंकी अपने कपड़े पहनते हुयी ख्यालों में खोई हुई थी ……… ओह्ह पापा अचानक से मेरे कमरे में आएँगे. मुझे तो अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा है. आज तक वो मेरे कमरे में, कभी अकेले में आए भी तो नहीं थे हमेशा मम्मी/दादी के साथ ही आये है। मुझे तो अब तक कि जिंदगी का एक दिन भी या यह कहूं कि एक लमहा भी याद नहीं, जब उन्होंने मुझे इस तरह देखा भी हो. आंखों ही आंखों में उन्होंने बहुत कुछ कह दिया और बहुत कुछ मैंने सुन लिया.

कपड़े पहनकर सोचती हुयी पापा कहाँ गए हैं…….??? मुझे ढूँढती हुयी मेरे कमरे में आ गयी। और खामोशी से मेरे बेड पर बैठ गयी…… रिंकी के अंतर्मन में सवालातो का द्वंद चल रहा था जिसकी चमक उसकी आँखों में, आवाज उसके कपकपाते हुए होंठो से बाहर आने को बेचैन हो रही थी।

आज वो मेरे करीब, बिलकुल मेरे करीब. मेरे बैड पर बैठी थी. मैंने उस की तरफ देखा. वो उदासी भरी, दर्दभरी, आंसुओं भरी आंखों से मुझे देख रही थी. मैं भी देखता ही रहा उन्हें… अपने बेटी को.

 उसे लगा कि अगर एक शब्द भी उसने जबानी बोला तो अपने आंसुओं के वेग को न मैं थाम सकूंगी और शायद न पापा.

भरभरा कर बस गिर ही पड़ूंगी अपने पापा की गोद में, जिस के लिए मैं अतृप्त सी न जाने कब से तरस रही थी.

फड़फड़ाए ही थे मेरे होंठ कुछ कहने को कि तड़प कर मेरे हाथ पर उसने अपना हाथ रख दिया और. बोली ‘‘न पापा न, कुछ मत कहना. मैं ने कोई गलत काम नहीं किया है. बस अपने पापा के लिए अपना छोटा सा फर्ज निभाया है.’’

अंतत: रोक ही नहीं सकी खुद को, रो ही पड़ी फूटफूट कर. मै भी रो पड़ा जोर से. मैने उसे अपने से लिपटा लिया, ‘‘मुझे माफ कर दे मेरी बेटी… माफ कर दे रिंकी अपने इस बुरे से पापा को… जो अपनी बेटी के जज्बातो को ना समझ सका, बेटी है मेरी तू तो, दुनिया की सब से अच्छी बेटी है तू तो.’’

कुछ पल कि खामोशी के बाद मैंने पूछा अब क्या हुआ ? वो फिर से कुछ नहीं बोली। मैं बोला बताओ तो सही क्या बात है ? पापा अब मुझे अकेला छोड़ कर फिर मत जाना…….।

नही जाऊंगा कभी नहीं जाऊंगा….. बस अब एक बार मुस्कुरा दे।

मुस्कुराहट के साथ कमरे का माहौल सामान्य हो गया….. तेरे मोबाइल फोन का क्या हुआ…???? ठीक है या खराब हो गया?? मैने मुस्करा कर पूछा..??

पता नही पापा शायद खराब हो गया होगा, स्मार्ट फोन जरा सा गिरने पर तुरंत डैमेज हो जाते है…. रिंकी प्यार से मुझसे शिकायती भाव से बोली।

 कोई नहीं रिंकी बेटी मै तेरा पंसदीदा पिज़्ज़ा पनीर लाया हू ठंडा हो जाये इससे पहले तू खा ले। और जब तक मै तेरा मोबाइल repair करवा कर लाता हूँ।

ठीक है पापा.. हम दोनों बातें करते हुए कमरे में से बाहर निकल आये…. रिंकी ने पिज़्ज़ा बॉक्स खोल कर खाना शुरु कर दिया । रिंकी तेरा फोन मै ठीक करा कर लाता हूँ….. कहते हुए मै रिंकी के कमरे में से फोन लेकर बाहर जाने वाला ही था कि वो पिज़्ज़ा छोड़ एकदम से मेरे हाथ से मोबाइल लेकर बोली…….. कोई नही पापा मै खुद अपना मोबाइल ठीक करवा लूंगी…! आप परेशां मत होइये।

अरे बेटी परेशानी कैसी मेरा एक दोस्त है जो मोबाइल रिपेयर का अच्छा काम करता है, वो अच्छे से ठीक कर देगा।

लेकिन पापा……

लेकिन… वेकिन कुछ नही मै अभी गया और अभि आया…..!

रिंकी मुझे जाते हुए देख रही थी, लेकिन उसकी नजर मोबाइल पर थी….. उसकी नजरे बता रही थी…… कि उसके मोबाइल फोन में कोई गहरा राज छिपा हुआ है…???

जारी है………….

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