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तीन घंटे बाद हमारा स्टेशन आ गया। सुनीता का भाई उसका प्लेटफॉर्म पर इंतजार कर रहा था, सुनीता को अपने पहने हुए कपड़ो में जिसमें पसीने से भीगे होने की वजह से उसके काले निप्पल साफ साफ नजर आ रहे थे। और उसे अपने भाई के सामने शायद असहज महसूस हो रहा था इसलिए रेलवे स्टेशन के बाथरूम में जाकर उसने कपड़े बदल लिए।

सुनीता जब वापस बाथरूम से आई तो मै और उसका भाई दोनों जाने के लिए तैयार खडे थे, सुनीता ने हरे रंग का ढीला सा पूरी बाँह का कुर्ता सलवार सूट पहना हुआ था जिस पर दुप्पटा डाल रही थी। सुनीता बोली जेठ जी लाओ मुझे बैग दे दो। मैने सुनीता के हाथ में बैग दिया उसके हाथ की मेहंदी चमक रही थी सुनीता ने उंगली में अँगूठी पहनी हुयी थी।

सुनीता का घर और मेरे घर का एक ही रूट है, जिसकी दूरी स्टेशन से लगभग 5-6 किलोमीटर है, (हालांकि सुनीता का घर मेरे घर से एक किलोमीटर पहले ही पड़ता है।) और ऑटो रिक्शा वाले मुह भर के अनाप शनाप किराया मांगते है, मतलब जितने पैसों में एक शहर से दूसरे पहुँच गए, उससे ज्यादा पैसों में रेलवे स्टेशन से अपने घर पहुँचने में खर्चा करना पड़ता है। इस वजह से मैने सुनीता और उसके भाई को रोडवेज (सरकारी) सिटी बस में साथ चलने को कहा… और उन दोनों ने भी सहमति दे दी।

फिर हम सब बस स्टैंड पहुँचकर बस में बैठ गए। बस में पीछे की सीटें से एक आगे वाली सीटें खाली थी, सुनीता मुझसे कहा जेठ जी पीछे नही बैठेगे तो मैने ने कहा बस 25-30 मिनिट का सफर है बैठ लो। तो मै और सुनीता एक साथ और उसका भाई हमारे पीछे वाली सीट पर बैठ गए। 

थोड़ी देर बाद बस चल दी ज्यादा भीड़ नही थी सब सीटें पर सवारी बैठी थी। मै सुनीता को देखकर मुस्करा रहा था, सुनीता ने पूछा क्या हुआ जेठ जी….??? मैने कहा अब तुम एक आदर्श संस्कारी, बहू लग रही हो हाथों में मेहंदी ऊँगली में अंगूठी, सब सादा सिंपल हरा कुर्ता सलवार सूट मजा आ गया।

सुनीता ने कुछ कहा तो नही बस एक कातिल मुस्कान दी। फिर मै अपने मोबाइल पर फेसबुक, WhatsUP ओपन कर मैसेज पोस्ट देखने लगा, सुनीता भी मेरे मोबाइल में देख रही थी ।

सुनीता और मेरे हाथ एक दूसरे से चिपके हुए रगड़ रहे थे, थोड़ी देर बाद सुनीता ने एक हाथ मेरे कंधे पर रख लिया, और मोबाइल में देख रही थी, सुनीता का हाथ मेरा कंधे रखने से मेरी बाहें अब सुनीता के स्तनों से चिपक गयी। बस के हिलने से मेरी बाहें सुनीता के स्तनों से थोड़ी थोड़ी रगड़ रही थी।

मुझे मजा आ रहा था, मैं भी धीरे धीरे जानबूझकर अपनी कोहनी सुनीता के दूध से हल्के से दबाने लगा। सुनीता मोबाइल में ही देख रही थी, 2-3 मिनिट तक मै अपनी कोहनी से सुनीता के दूध दबाता रहा। तभी सुनीता ने मेरे कंधे से हाथ हटा लिया और सीधी बैठ गयी, जिससे मेरी कोहनी अब सुनीता की बाँह से टच होने लगी। मै भी अपने हाथ सीधे करके बैठ गया फिर से मेरे और सुनीता की बांह आपस में चिपक गयी।

तभी बस रुकी और एक दो सवारी उतर गयी। 

बस फिर चलने लगी, पांच मिनिट बाद मोबाइल की बैटरी बीस परसेंट बची तो मैने मोबाइल अपनी जेब में रख लिया। सुनीता बार बार अपना दुपट्टा से मुह पोछ रही थी उसे गर्मी लग रही थी, थोड़ी देर तक सुनीता सीधी बैठी रही, फिर उसने अपने हाथ आगे वाली सीट के ऊपर रख दिया। और खिड़की के बाहर देख रही थी, मै भी खिड़की से बाहर देख रहा था, तभी एक साइड से मेरी नजर सुनीता के कुर्ती में हिलते हुए  स्तनों पर पड़ी।

मेरे अंदर कामुत्तेजना होने लगी तो मैने फिर से कोहनी से हल्के से दबाना शुरु कर दिया, दो मिनिट तक में सुनीता के दूध कोहनी से दबाता रहा। तभी सुनीता फिर से हिली और फिर से अपने दुपट्टे से मुह पोंछ कर दुपट्टा से अपने दूधों को ढक लिया और सीधी बैठ गयी।

एक दो मिनट बाद सुनीता फिर हिली और  धीरे से बड़बड़ाती हुयी बोली बहुत गर्मी हो रही है, और अपना दुपट्टा adjust करते हुए अपने हाथ फिर से आँगे वाली सीट के ऊपर रख लिए और बस की खिड़की की तरफ देखने लगी, खिड़की में से हवा जोर से आ रही थी जिससे सुनीता का दुप्पटा उड़ रहा था। मुझे फिर से सुनीता के कुर्ते में हिलते हुए दूध दिखने लगे, मैने सुनीता की तरफ देखा वो बाहर खिड़की में देख रही थी, मैने अपने हाथों को मोड़ लिया और सुनीता के दूध पर उंगली से छूने लगा, धीरे धीरे मै उंगली को सुनीता के दूध में हल्के से दबाने लगा,

 दो मिनिट तक मै सुनीता के दूध को उंगली से दबाता रहा। तभी सुनीता फिर से हिली, मैने अपनी उंगली वापस हटा ली। पर इस बार सुनीता ने अपने हाथ आँगे वाली सीट से नही हटाये, मैने फिर से सुनीता के दूध को उंगली से दबाना शुरु कर दिया, मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, तो मैने हिम्मत करके अपने पूरे हाथ के पंजे को सुनीता के दूधों पर रख दिया, थोड़ी देर तक मैने हाथ को ऐसे ही रखा रहने दिया, बस के हिलने की वजह से सुनीता के दूध हिल रहे थे, मेरा लंड मेरे जीन्स में एकदम टाइट हो गया था, और निकलने को बेचैन हो रहा था।

दो मिनिट बाद मैने हल्के से सुनीता के दूध को दबाना शुरु कर दिया सुनीता के दूध एकदम tight थे, मैने सुनीता के दूध को आज पहली बार छुआ था, मैं मन ही मन सोचने लगा की सुनीता के सीने से लग कर दूध पी लू। सुनीता के दूध को दबाते हुए मेरे हाथ सुनीता के निप्पल पर पहुँच गए, सुनीता के निप्पल एक दम कड़क और खड़े हुए थे। मैने सुनीता के निप्पल को जैसे ही दबाया तो तो अचानक से सुनीता ने आगे वाली सीट के ऊपर से हाथ हटा लिए और सीधी बैठ गयी।

 मेरा हाथ सुनीता के दूध पर और मेरी उंगली में दूध के निप्पल थे। सुनीता ने अपने बांह से मेरे हाथ को दूध पर दबा लिया, और अपने हाथ मेरी जांघ पर रख दिया। ये देखकर मुझे अंदर से और उत्तेजना आने लगी, मै सुनीता के दूध और निप्पल को सेहलाता हुआ दबाने लगा, हालांकि मै सुनीता के दूध कुर्ती के कपड़े के ऊपर से ही दबा रहा था, पर मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे सुनीता के नंगे दूध और निप्पल मेरे हाथ में हो। तभी सुनीता ने मेरी जांघो से हाथ हटाया और अपने दुपटे से मुह पोछने लगी, और मुह पोछकर दुपट्टा ऊंचा कर स्तनों पर ढक लिया और वापस हाथ मेरे जांघ पर रख लिया।

 मै सुनीता के दूध और निप्पल दबा दबा कर सहलाने लगा, तभी मुझे अपनी जांघो पर सुनीता की उंगलियाँ मेरे लंड पर छूती हुयी महसूस होने लगी, मुझे मन ही मन खुशी होने लगी सुनीता को भी मजा आ रहा है। सुनीता भी उत्तेजित हो गयी है। मै सुनीता के दूध और निप्पल अब बिना डरे हुए बड़े प्यार से हरे कुर्ती में सेहलाते हुए दबाने लगा और सुनीता अपने हाथ की मेहंदी लगी हुयी उँगलियों से मेरे लंड को जीन्स के ऊपर से सेहलाते हुए दबा रही थी।

सुनीता जीन्स के ऊपर से ही मेरे लंड के सिरे को पकड़ रही थी, बार बार ऐसा करने से मेरा लंड जीन्स में अकड़ने लगा। मैने सुनीता की तरफ देखा वो इधर उधर देख रही थी, मेरे लंड को कभी वो नोचती तो कभी जोर से मसकने लगती। मेरे हाथ भी सुनीता के वक्षों पर जोर जोर से चल रहे थे, मै सुनीता के दूध के निप्पल को जैसे ही दबाता तो सुनीता मेरे लंड के सिरे को नोच ने लगती। तभी सुनीता ने मेरा हाथ पकड़ लिया, तो मै चोंक गया पर सुनीता अपने दूसरे दूध पर रख दिया और धीरे से बोली इसे भी और अपने दुपट्टे से ढक दिया।

मुझे बहुत आनंद आ रहा था, मेरा लंड जीन्स में खड़ा होकर अलग से चमक रहा था, सुनीता की मेहंदी लगी उंगलियाँ मेरे जीन्स के ऊपर से ही लंड पकड़ने को ऐसे चल रही थी मानो वो लंड पर भी मेहंदी का रंग लगाना चाह रही हो। तभी सुनीता की उंगलियाँ ने मेरे जीन्स की जिप खोलने की कोशिश करने लगी।

“”आप लोगो को पता ही होगा जीन्स की जिप थोड़ी छोटी होती है, उसमे बैठ कर खड़ा हुआ मोटा लंड निकालना मुश्किल है।””

 सुनीता ने काफी कोशिश की पर जिप नही खुली, तो सुनीता बड़बड़ाते हुए धीरे से बोली ये जिप क्यो नही खुल रही है। मै चुप रहा, मुझे सुनीता की आँखों में कामवासना साफ साफ दिख रही थी, तभी सुनीता ने मेरे लंड को एक चांटा सा मारा मगर प्यार से, सुनीता की नजर बस में सब जगह घूम रही थी वो ये देखने की कोशिश कर रही थी कही कोई देख ना रहा हो। पर बस वैसे भी खाली थी और हम लोग पीछे से एक आगे की सीट पर थे।

5-6 मिनिट तक मै और सुनीता एक दूसरे के अंगों को दबाते हुए, सेहलाते हुए कामक्रीड़ा करते रहे, जैसे सुनीता का मन मेरा लंड जीन्स में से बाहर निकालने को बेचैन हो रहा था, वैसे मेरा मन भी सुनीता के दूध को हरे कुर्ते में से निकालने को तड़प रहा था। मैने सुनीता के कुर्ता के ऊपरी साइड से अंदर हाथ डालने की कोशिश की तो सुनीता ने मेरा हाथ पकड़ लिया और धीरे से फुसफुसाइ इधर हाथ मत डालो कुर्ता फट सकता है।

 फिर मैने सुनीता के दूध दबाते हुए उसके कुर्ता को ऊपर खींचने लगा, पर कुर्ता उसके नितंबो और चूतड़ के नीचे दबा होने से ऊपर नही हो रहा था। मैने सोचा ये भी मुश्किल है तो मैने सुनीता की सलवार के ऊपर से सुनीता की चूत पर हाथ ले जाकर दबाने लगा तो सुनीता ने अपनी जांघो मे मेरे हाथ को दबा लिया, मुझे और मजा आने लगा फिर मैने सुनीता की चूत में उंगली डालने की कोशिश की तो सुनीता ने मेरा हाथ पकड़ लिया और वापस अपने दूध पर रख दिया। मैं सुनीता के दूध दबाने लगा, थोड़ी देर दूध दबाने के बाद मैने सुनीता के कुर्ता को फिर से ऊपर खीचा तो सुनीता धीरे से बोली क्या कर रहे कुर्ता फट जायेगा।

सुनीता बोली ऐसे ही कर लो तो मैने कहा प्लिज़ सुनीता एक बार दूध दिखा  दो ना, सुनीता बोली नही ऐसे ही कर लो पर मै नही माना और सुनीता से फिर बोला बस एक बार दिखा दो अच्छी सुनीता। तो सुनीता कुछ सोचने के बाद इधर उधर देखा और मेरे हाथ अपने वक्ष स्थल से हटा दिये। मैने सोचा इसे क्या हो गया। तभी सुनीता धीरे से खड़ी हुयी और अपने कुर्ता को ऊपर कमर तक उठा कर बैठ गयी जिससे कुर्ता उसके नितंबो के नीचे से हट गया। मैने तुरंत ही सुनीता के कुर्ता को नीचे की साइड से ऊपर उठा दिया मेरी आँखों के सामने सुनीता का एक बड़ा सा मम्मा दूध का आ गया। सुनीता ने कुर्ता के नीचे ब्रा नही पहनी थी। मैने एक बच्चे की तरह सुनीता के दूध को दबाने लगा।

सुनीता का दूध का निप्पल एक दम सीधा खड़ा हुआ था जो की एक मोटी और बड़ी  सी बेर की गुठली की तरह कड़क और तनी हुयी थी। सुनीता के हाथ मेरे जीन्स के ऊपर से लंड को दबा रहे थे, 5-6 मिनिट तक मै सुनीता के दूध और निप्पल को रगड़ रगड़ कर दबाता हुआ सेहला रहा था। और सुनीता मेरे लंड के सिरे को मुट्ठी में भर कर मसीज रही थी।

सुनीता बस की खिड़की से बाहर देख रही थी, तभी मैने सुनीता के कुर्ता के अंदर हाथ डालकर सुनीता के दूसरे दूध को कुर्ता में से बाहर निकालने के लिए अपना हाथ आगे किया। अचानक से सुनीता ने मेरा हाथ पकड़ कर नीचे कर दिया और अपना कुर्ता भी खिसका कर नीचे कर लिया। और मेरे जीन्स के ऊपर से लंड पर से भी हाथ हटा लिया। मै सोचने लगा क्या हो गया सुनीता को, तभी पीछे से सुनीता के भाई की आवाज आई चलो उठो स्टॉप आ गया।

 मैने खिड़की में बाहर देखा तो सच में सुनीता का घर आ गया था। मै मन ही मन सोचने लगा मै कितना बड़ा चूतिया हू सिर्फ सुनीता के दूध दबाने में ही पूरा दिमाग लगा रहा था जबकि सुनीता कितनी इंटेलिजेंट है पूरी बस में इधर उधर देखते हुए कितनी सफ़ाई से अपने कपड़े ठीक कर के बैठी है। कोई सपने में भी नही सोच सकता है की मेरे और सुनीता के बीच इस आधे घण्टे के सफर में क्या हुआ।

जारी है……..

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