सबसे ज्यादा सूचक कुसुम ने यह इशारा किया की वह किसी साधारण व्यक्ति को अपना सर्वस्व समर्पण नहीं करेगी।
कुसुम के मुह से गैर मर्द के साथ संबंध वाली बात सोचकर मेरे अंतर्मन में संवाद शुरु हो गया, दिल और दिमाग आपस में बातें करने लगे……..
दिल कह रहा था…. …….हवस की भट्टी, ज्यादा दिन तक गर्म नहीं रहती……अच्छी बात है। इसमें बुरा क्या मानना….????
प्यार करना कोई बुरी बात थोड़ी है, नफरत करना बुरी बात है, कर लेने दो पत्नी को
अपनी मनमर्जी वो भी तो अनुभव लेकर “अच्छा या बुरा”
एक दिन शांति के साथ बैठ जाएगी, समाज को वो खुद ही जवाब दे देगी
पत्नी के लिए तुम बुरे क्यों बनते हो. . ???
वो गाना नहीं सुना (प्यार बांटते चलो)
एक फूल के कई माली हो, तो वह जल्दी से मुरझाता नही, तुम भी किसी से प्यार कर लो, प्यार जिंदगी है, प्यार बंदगी है
किसी को किसी कुत्ते से प्यार हो जाये तो कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता…… मगर किसी दूसरे इंसान से हो जाये, तो सहन नहीं होता ?????? वाह प्रोफेसर साहब वाह…….
तभी गाने की आवाज आने लगी…
चूम लू होंठ तेरे दिल की ये ख्वाइश है…….!
ये मेरे मोबाइल की रिंगटोन अचानक से बज उठी, मैने फोन देखा मेरी मम्मी का फोन था। हैलो अरुण बेटा क्या कर रहे हो, मम्मी सामने से बोली…???
“कभी कभी झूठ बोलना जरूरत बन जाती है “
मै : कुछ नहीं मम्मी आराम कर रहा हूँ… क्यो क्या हुआ कोई काम था..????
मम्मी : अरुण तेरी मामी तुझे और बहू को बुला रही है हवन शुरु होने वाला है..!
मै : लेकिन मेरी ट्रेन है सात बजे की.. मै कैसे आ सकता हू, पैकिंग भी करनी है..!
मम्मी : वो ही तो बताने के लिए तुझे फोन किया सुनीता बहू ने मोबाइल में ट्रेन की लाइव लोकेशन देखकर बताई है कि ट्रेन चार घंटे देरी से चल रही है। मतलब रात 11 बजे तक आयेगी। इसलिए तू और कुसुम अब यहाँ आ जा, तेरी मामी जिद कर रही है अगर तुम दोनों यहाँ हवन में बैठोगे तो उन्हे भी अच्छा लगेगा…!!
मै कुसुम की आँखों के इशारे की सहमति लेकर मम्मी हम आते है, और बिना चुदाई किये फ्रेश होकर वापस मामी के घर चले गये।
मामी के घर शाम की पूजा पाठ, खाना पीना खतम होते होते 9 बज गये। एक बार फिर मैने ट्रेन की लाइव लोकेशन चेक की तो ट्रेन और चार घंटे लेट दिख रही थी। मैने स्टेशन मास्टर को फोन किया तो पता चला कि रास्ते में मालगाड़ी के दो पहिये उतर गये थे ट्रैक की मरम्मत होते होते रात के दो तीन बजेंगे और ट्रेन सुबह पांच बजे तक आयेगी।
मैने सारी बात मम्मी और कुसुम को बताई तो मम्मी बोली चलो फिर रात अपने घर ही सोते है और मामी से विदा लेकर हम तीनों अपने घर आ गये।
किराये के घर में कमरा बहुत छोटा सा है, अब हम सोने के लिए गद्दे adjust करके
मम्मी ने कुसुम को अपने साथ गद्दे पर सोने का निमंत्रण देते हुए बोली आजा बहू हम दोनों एक साथ सोते है।
दोपहर का आधा अधूरा काम पूरा करने की नियत से मैने मम्मी की नजर बचा कर आँख से इशारा करते हुए हुए कुसुम को ना कहने को कहा। कुसुम भी मुझे आँखों के इशारे से कामुक भरी मुस्काते हुयी बोली मै आपकी बात क्यों मानु? मैं वही करुँगी जो मैं चाहती हूँ। मैं कुसुम का इशारा समझ तो रहा था वो शायद मम्मी से कहना चाहती थी मेरी इच्छा आपके साथ सोने की नहीं बल्कि अपने पति के साथ है।
मै एक कोने में लेट गया और मम्मी और कुसुम एक गद्दे पर लेट गयी।
फिलहाल कुसुम ने मना कर दिया, पता नही मुझे वो भी शायद यही चाहती थी।
वो और मम्मी अब आपस में कुछ बातें कर रहे थे। और हंस रहे थे। मैं मन ही मन कुढ़ रहा था इसको तो जैसे कोई फ़र्क़ ही नहीं पड़ रहा था।
मैं चुपचाप अपनी किस्मत को कोस रहा था।
मुझे उसके मजाक अब सजा लग रहे थे।
मै सोचने लगा क्या में फिर आज होटल चला जाऊ, अब यहाँ रुकने का क्या फायदा। थोड़ी देर के बाद उन दोनों की बातें शांत हो गयी थी। कुसुम भी अब पलट कर सो गयी और मेरी आँख लग गयी।
अचानक कुसुम की आँखें खुली, मै उसके गद्दे पर था और पीछे से चिपक कर सोया था। मेरे हाथ उसके वक्षो के ऊपर थे।
उसने थोड़ा पलटकर देखा मै था। वो तुरंत उठ बैठी और एक निगाह मम्मी पर पर डाली, मम्मी गहरी नींद में थी। ना चाहते हुये भी कुसुम ने मुझे इशारों में समझाया कि वहाँ मम्मी हैं और मुझे वापिस अपनी बिस्तर पर जाना चाहिए।
वो एक शरारती मुस्कान के साथ मुझे नज़रअंदाज़ कर रही थी। मैने उसे फिर से लेटा दिया और धीमे से कहने लगा मम्मी अब इतनी जल्दी नहीं उठेगी।
मैं बोला वैसे भी अगले 3-5 घंटे तक का ही समय है, सुबह पांच बजे जाना है मुझे। क्या तेरे लिए इतना वक़्त काफी हैं। कुसुम ने शरमाते हुए कहाँ ये आपकी इच्छा और कैपेसिटी पर निर्भर करता है, आप में दम हो तो सुबह तक भी कर सकते हैं। इतना सुनते ही मैने उसके वक्षो को फिर से भींच लिया।
अब मुझे कही न कही यकीन हो गया कि मेरी आज की रात फ़ालतू नहीं जाएगी। मैने उसकी साड़ी ऊपर से हटा दी, और एक हाथ से ब्लाउज के हुक खोलने लगा। फिर ब्लाउज निकाल कर रख दिया। अब मै उसके डिज़ाइनर ब्रा पर हाथ फिराते हुए मजे ले रहा था।
शायद उसको यह बहुत पसंद आया था। आता भी क्यों नहीं, उसकी डिज़ाइन और रंग ही इतना कामुक था किसी को भी ललचाने के लिए। मुझे वो इतना पसंद आया कि उसे खोलने की कोशिश भी नहीं की।
अब मेरे हाथ नीचे की और गए और साड़ी को पेटीकोट से अलग कर दिया। अब तो जैसे मुझे इसमें महारत हासिल हो गयी थी। अब बारी उसके पेटीकोट की थी।
उसने नाड़ा खोल कर पेटीकोट निचे खिसकाते हुए पैरो से निकाल दिया। अब मै कुसुम नीचे के डिज़ाइनर अंतवस्त्र को घूर रहा था। मेरा पैतरा काम कर रहा था। शायद ऐसे अंतवस्त्र पहले कभी नहीं देखे थे। मै उनपर हाथ फिराने लगा।
कुसुम को लगा मै उन वस्त्रो को लेटने की वजह से सही ढंग से नहीं देख पा रहा हू। वो उठी और मूर्ति की तरह अलग अलग मुद्राये बनाती गयी और अपने बदन को उन अंतवस्त्रों के साथ नुमाइश करके मुझे उत्तेजित करने लगी।
मेरी हंसी अब और चौड़ी हो गयी और जैसे लार टपकाने लगा। मै तुरंत उसके समीप आया और घुटनो के बल बैठ गया। उसके वेक्स किये हुए टांगो पर अपने हाथ फिराने लगा। चिकनी टांगो पर मेरे हाथ फिसलते जा रहे थे। इन चिकने टांगो के स्पर्श से मुझे मजा आने लगा।
मेरी नजर पास में सो रही मम्मी पर पड़ी और अगर मम्मी ने कुछ देख लिया तो मेरा क्या होगा।
इस बार उसने अपने पैर को मेरे सैनिक के सामने भेजा और मेरे लोवर के अंदर डाल के धीरे धीरे सहलाना शुरू किया फिर अपने पैर उंगलियों के बीच रखकर फिर से अपना पसंदीदा खेल शुरू किया अब मेरा लॅंड कड़क हो चुका था पर अब उसे अगले दौर का खेल खेलना था तो मैने कुसुम को आँखों से छत पर चलने का इशारा किया उसने कोई जवाब नही दिया तो मैने अपने लोवर उपर किया और उठ कर छत पर आ गया और उसका इंतेज़ार करने लगा करीब पाँच मिनट इंतेज़ार करने तक जब वो नही आई तो मुझे लगा की शायद वो अभी उसके लिए तय्यार नही यही सोचकर मैं मुड़कर वापस जाने को ही था की दरवाज़ा खुला सामने कुसुम थी और थी उसकी वो कातिल मुस्कान। हाथ में चटाई और तकिया पकड़े।
वो मुड़कर छत से नीचे की ओर झांकने लगी तभी मैने जाकर उसे पीछे से ही दबोच लिया और उसके चूचों को पूरी ताक़त से दबाने लगा मेरा लॅंड उसके नितंबों की दरार मे घुसने की नापाक कोशिश कर रहा था और मैने उसकी गर्दन पे हल्के से चूमा और फिर कान के पीछे चूमा और उसके बाद उसकी गर्दन पे अपने होठों से चुंबनों की बरसात कर दी, वो मूडी मेरी आँखों मे देखा हल्के से मुस्कराई और फिर अपने गुलाबी होठों को मेरे होठों पे रख दिया हम दोनो एक दूसरे से लिपटकर किस करने लगे ।
मैने अपनी ज़बान उसके मुख की गहराइयों मे अंदर डाल दी और उसकी ज़ुबान भी मेरा होठों के भीतर आ गयी मैने पाँच मिनट तक उसके गुलाबी होठों का अमृत पिया इस बीच मेरे हाथ उसके शरीर के उतार चढ़ावों मे बेतहाशा सैर करते रहे कभी उसकी पीठ पर और कभी उसके नितंबों पे,
मैं उसकी तरफ बढ़ा और उसको चटाई पर लिटा कर उसकी चूचियों पर टूट पड़ा, मैने दोनो हाथों मे एक-एक चूची पकड़ कर पहले कसकर दबाया और फिर बाएँ निप्पल को अपने मुँह मे लेकर चूसने लगा और बीच बीच मे दाँत से काट लेता था जिससे उसकी सिसकारी निकल जाती थी और दाएँ निप्पल को अपनी उंगलियों और अंगूठे से नोचने लगा।
उसके शरीर मे करंट दौड़ गया उसने मेरे बाल पकड़ कर मेरे सिर को अपनी चूचियों पे दबाना शुरू कर दिया और अपने दोनो पैरों से मुझे जकड़ लिया फिर मैने दाएँ स्तन को चूसना और बाएँ को मसलना शुरू किया ये सिलसिला कुछ 15 मिनट तक चला उसके गोरे स्तन सुर्ख लाल हो गये और उसके स्तनों पर मेरे दाँतों के निशान बन गये थे, ।
इसी बीच मैने उसकी जांघों को चूमना शुरू किया मैने उसकी चूत को इतने करीब से देखा उसमे से एक उत्तेजक सी महक आ रही थी जिसकी वजह से मै अनायास ही उसकी तरफ खिचा चला गया और जीभ डालकर कर उसके काम रस को उसकी चूत से चाटने लगा इसकी वजह से कुसुम मदमस्त हो उठी और उस का शरीर हल्का सा काँप गया मैं अपनी ज़बान और गहराइयों तक ले जा कर उसके कसैले मादक चूत रस का पान कर रहा था और और वो इससे मस्त हो कर सिसकारियाँ ले रही थी ।
थोड़ी देर बाद उसका शरीर अकड़ गया और वो मेरे मुँह पर ही झड़ गयी मैने भी पूरी मस्ती से उसका कामरस पिया, और उसके उपर आकर किस करने लगा और उसके चूचे हाथों से मसलने लगा, वो भी मुझे मेरे कमर से पकड़कर अपनी ओर खींचने लगी, मैं समझ गया वो अब तय्यार है, ।
मैने उसे दोनों हाथ के पंजो और घुटनो के बल बैठने को कहा डॉगी स्टाइल में। उसके डॉगी बनते ही मै घुटनो के बल उसके पीछे आया और एक झटके में अपना लिंग अंदर उतार दिया। तेजी से अंदर बाहर झटके मारता हुआ मै आवाज़े निकाल रहा था। लिंग इतना अंदर घुस गया की कुसुम की भी सिसकिया निकलने लगी।
थोड़ी ही देर में हमको वही चिर परिचित पानी के छपकने की आवाज़े आने लगी। मेरी अब अपनी एक टांग को फोल्ड करके पंजो के बल आ गया और दूसरी अभी भी घुटनो के बल थी।
इससे मेरी झटको की ताकत दुगुनी हो गयी थी जिससे मेरी योनी के अंदर की पहुंच और गहरी हो गयी। थोड़ी ही देर में मेरा योनी के अंदर घमासान शुरू हो चूका था। झील के पानी में जैसे तेजी से बार बार डंडा मारने पर जो आवाज़े आती हैं वैसी आवाज़े योनि में अंदर से आ रही थी।
अब कुसुम अपने चरम तक पहुंच रही थी, कुसुम मेरा नाम बड़ी कामुकता से लिए जा रही थी हाय हाय अ अ अ अरुण हम यह भी भूल चुके थे की मेरी सगी मम्मी और उसकी सास नीचे कमरे में सोई हुई थी।
हाय हाय अ अ अ अरुण नाम लेने से मेरा जोश ओर बढ़ गया था। झटके मारना जारी रखते हुए मैने एक हाथ से उसका वक्ष दबोच लिया। कुसुम पूरा छूटने ही वाली थी की मैने फिर लिंग बाहर निकाल दिया। उसे थोड़ा बुरा लगा।
मैने उसे अब बिस्तर पर सीधा लेटाया और दोनों पाँव चौड़े कर दिए। उसके ऊपर लेट गया। कुसुम ने अपना हाथ नीचे किया और मेरा लिंग पकड़ कर अपने योनी के अंदर कर दिया। हमारी मशीन एक बार फिर शुरू हो गयी। हम दोनों चरम प्राप्ति की तरफ तेजी से बढ़ रहे थे। मैंने अपनी दोनों टांगो को उठाते हुए उसकी कमर पर लपेट दिया।
इधर मम्मी की नींद टूटी, उन्हे चिंता थी कि उनका बेटा यानी कि मुझे सुबह चार बजे जाना है और वो जल्दी उठ कर खाने के लिए कुछ बनाना चाहती थी।
“” दुनिया में सबसे प्यार भरा रिश्ता माँ और बेटे का होता है, बेटे के exam हो तो माँ खुद जल्दी उठ कर उसे पढ़ने के लिए जगाती है, बेटा अगर देर रात तक घर आये तो खुद जागती है, और आज उनका बेटा सुबह जल्दी जा रहा है तो मम्मी की आँख अपने आप ही खुल गयी “”
जैसे ही मम्मी ने करवट बदल कर देखा तो कि उनका बेटा और बहू अपने बिस्तर पर नही है। आखिर वो मेरी मम्मी थी वो समझ गयी थी उनका बेटा और बहू रात्रि के दो बजे क्या कर रहे होंगे। पर उनके मन में सवाल ये था कि कहाँ कर रहे होंगे???
मम्मी पेशाब करने के बाद अपने साड़ी ब्लाउस ठीक कर छत की सीढ़ी की तरफ आई, छत से आती आवाजो पर ध्यान दिया, वो आवाजे उन्हे जानी पहचानी लगी। लेकिन जब मम्मी के कानो में कामुक सिसकारियों की आवाज पड़ी तो कदम ठिठक गए |
“”जो गलतिया अक्सर मिडिल क्लास फैमिली के छोटे से एक कमरे के घर में रहने वाले बच्चे अपनी मम्मी पापा को संभोग करते हुए देखकर करते है, वो ही गलती मेरी मम्मी अपने सगे बेटे और बहू को संभोग करते हुए देखने की ललक से करते हुए बढ़ती चली जा रही थी। “”
“” मम्मी जानती है ये पाप है, उन्हे ऐसा नही करना चाहिए लेकिन अपनी जिस्म में भरी वासना, प्यास और हसरते जो बांकी थी उस वजह से वो अपने दिल, दिमाग और पैरों पर काबू नही कर पायी। “”
भले ही मम्मी को सेक्स किये सालो गुजर गए हो लेकिन सेक्स की मादकता से भरी सिसकारियां जैसे ही उसके कानो में पड़ी वो समझ गयी, छत पर जरुर कुछ चल रहा है | आश्चर्य और सतर्कता से वो छत की तरफ बढ़ने लगी, जैसे जैसे वो छत की तरफ बढती जाती, सिसकारियो की आवाज तेज होती जाती ।
जब वो छत की अंतिम सीढ़ी के पास पंहुची, तो मम्मी ने जो भी आँखों से देखा उस पर उन्हे यकीन नहीं हुआ |
मै कुसुम की योनी के अंदर की गहराइयों में डूबता हुआ कही खो गया था पर मेरी गति लगातार बढ़ती जा रही थी। यह संकेत था मेरे और कुसुम की चरम के नजदीक पहुंचने का। मैने अपना लॅंड उसकी चूत की दरार पर रखा और उस पर हल्का सा भर दिया तो उसका सिर अंदर समा गया,
अब मैने थोड़ा सा धक्का दिया तो लॅंड करीब 2 इंच से ज़्यादा अंदर चला गया मैने, अगला धक्का मैने पूरी ताक़त से दिया तो लॅंड लगभग पूरा ही अंदर चला गया वो दर्द से कराह उठी, मैने उसको किस करना जारी रखा ताकि उसकी चीख ना निकल जाए उसके आँखों से आसू निकल आए, मैं थोड़ी देर के लिए स्थिर हो कर उसे होठों पर किस करता रहा थोड़ी देर बाद उसने अपनी कमर हिलाकर इशारा किया की वो तय्यार है मैने धीरे धीरे धक्के देने शुरू किए वो भी कूल्हे उठा उठाकर मेरा साथ देने लगी फिर मैने धक्के तेज कर दिए, करीब 10 मिनट के बाद वो मेरे ऊपर आ गयी और मेरे लॅंड की सवारी करने लगी, 15 मिनट इस पोज़ीशन मे चदाई करने के बाद चरम प्राप्ति पर कुसुम मुँह से कुछ ज्यादा ही जोर से निकल गया- ओ अ अ अरुण !
मै भी तेज आहें निकलते हुआ छूट गया, हम दोनों ने एक दूसरे को कस कर झकड़ लिया। हम दोनों ऐसे ही निश्चेत पड़े रहे।
अब मैंने उठने की कोशिश की तो उसने फिर मुझे झकड़ लिया। मुझे भी यह पसंद आया। अब हम दोनों एक दूसरे से अलग नहीं होना चाहते थे। अभी तीन घंटो में कुछ समय बाकी था। मेरा लिंग अब नरम पड़ कर अपने आप प्रवेश द्वार से बाहर आ गया था।
अब कुसुम उठी और अपने बिखरे हुए कपडे सँभालने लगी। अपने नीचे के अंतवस्त्र को पहने लगी, मैने तुरंत कुसुम से छीन कर उसे एक तरफ रख दिया और उसे पीठ के बल लेटा कर अपने मुँह से उसके निप्पल को चूसने लगा। उसे मजा आने लगा।
मै अपना एक हाथ बराबर उसके शरीर पर घुमा रहा था। बारी बारी से अब मै उसे होठों पर चुम रहा था कभी निप्पल पर। कुसुम भी मेरी पीठ और पुठ्ठो पर अपने हाथों का प्यारा स्पर्श कर फिरा रही थी। हम कुछ देर तक ऐसे ही एक दूसरे के शरीर का आनद लेते रहे।
उसने मेरे कान के पास आकर धीरे से कहा ‘आइ लव यू अरुण’ मैने भी उसके माथे पे चूमते हुए कहा ‘आइ लव यू टू कुसुम’
उधर मम्मी अपने सगे बेटे और बहू की कामलीला अपनी नंगी आँखों से बुत बनकर खड़ी खड़ी देख रही थी, जो शायद उन्हे नही देखनी चाहिए थी वो पुराने ख्यालों कि वो अच्छी तरह से जानती है कि —
“” किसी भी इंसान को स्नान, भोजन और चोदन हमेशा परदे की आड़ में करना चाहिए “”
लेकिन मम्मी अपने अंदर भरी हुई कामवासना की आग में सब भूल गयी और इस मर्यादा के परदे को हटाकर सब मौन रहकर देख रही थी। मम्मी के मन में अंर्तनवंद् का जोर से तूफान उठ रहा था।
ये द्रश्य देखकर मम्मी को अपनी आँखों पर यकीन ही नहीं हो रहा था | मेरा बेटा और बहू इस तरह भी संभोग करके इतनी आनंद की अनुभूति करते है। मेरे बेटे को संभोग के बारे में इतना सब कुछ कैसे पता है ??
ये मेरा बेटा जिसकी उमर 36 के पार होने वाली है इतनी देर तक इतनी जोर से, जोश से, इस उम्र में यह सब कैसे करता है ?
मेरा बेटा तो एकदम जवान 18-20 की उम्र के लड़के की तरह खड़ा हो कर, बैठे हुए, इतने जोश से नये आसन के साथ संभोग कैसे कर सकता है ?
इसके पापा तो इस उमर पर ठंडे पड़ गये थे, दो मिनिट से ज्यादा तो कभीभी टिक नही पाये?? उनका गुप्तांग भी ठीक से उठता नही था, उनके अंग में ढीला पन अपनी जगह बना चुका था, और तो और मेरे हाथ लगाने पर ही पानी छोड़ देता था और मुरझा कर शांत हो जाता था।
मेरे बेटे अरुण को ये सब करने के बारे में कैसे पता चला ? वो एक स्त्री को काम सुख देने की हर कला में कितना निपुण है, मेरी बहू कुसुम के चेहरे को देखकर लगता है वो पूरी तरह संतुष्ट होकर थक गयी है जबकि अरुण अभी भी रुकने का नाम नही ले रहा है आखिर कैसे????
ऐसे कई सवाल मम्मी के दिमाग में बिजली की तरह कौंध गए | वो सदमे में थी और उसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा था जो वो देख रही है वो सच है |
अब काफी समय हो चूका था और हम सोती हुई मम्मी की नींद के साथ और रिस्क नहीं लेना चाहते थे। कुसुम ने लेटे हुए पास पड़े अपने दोनों अंतवस्त्र डिजाइन वाले ब्रा और पैंटी हाथो में ले लिए। और मै फिर से उसकी ओर घूरने लगा। कुसुम ने मुझसे smile देते हुए पूछा क्या करू, ऐसे ही रहु,। मैने भी शरारत से सर हां में हिला लिया।
और मैने कुसुम की चूची में दांत गडा दिये | कुसुम के मुहँ से दर्द भरी सिसकारी निकल गयी – आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् |
इस बार ये नजारा देख मम्मी भी गरम हो चली, उनका शरीर भी उत्तेजना के आवेश में आने लगा, लेकिन तभी उन्होंने खुद को सयम करते हुए, बच्चो को रोकने की ठानी |
“”मम्मी के लिए मै और कुसुम उनके बच्चे ही तो है””
तभी मैंने एक साये को अपने चेहरे की तरफ आते महसूस किया और तुरंत अपनी आँखें बंद कर ली।
मम्मी ने तेज आवाज में खाँसा और वापस सीढ़ियों से कमरे की तरफ तेजी से चली गयी | मम्मी के खांसने की आवाज सुनते ही!!!
हम दोनो उठे कपड़े पहने मैने समय देखा रात के 3 बज रहे थे.
कुसुम ने अपना ब्लाउस तेजी से नीचे किया और झट से चटाई से उठकर बैठ गयी और मुझ को दूर ठेल दिया | हम दोनों चटाई पर इधर उधर लुढ़क गए और जब तक मम्मी नीचे जा चुकी थी, कुसुम बाल सही करके खड़ी हो गयी | मै चटाई पर इधर उधर लुढकने के बाद उठकर खड़ा हो गया |
मै और कुसुम सर झुकाकर जमींन की तरफ देखने लगे | ये सब मेरे और कुसुम के लिए बहुत ही शर्मनाक था |
कुसुम खड़ी खड़ी हल्की हल्की शर्म महसूस कर रही थी, | लेकिन मन में संतोष भी था, की मम्मी ने बिना कुछ कहे वापस नीचे जाकर अपनी एक अच्छी संस्कारी मम्मी और सास होने का अपना फर्ज निभाया |
मैने कहा लग गए लोडे हो गया काम??? माँ चुद गयी??? ये सुनकर कुसुम की हंसी निकल गयी। और हस्ती हुयी बोली माँ नही बहू चुद गयी, उसने मुझे शर्ट की गले से पकड़ा और अपनी और खिंच कर मेरे होठों पर चुम्बन कर दिया।
हम कुछ सेकंड तक एक दूसरे के होठों का रस लेते रहे। अब कुसुम पूरी थक चुकी थी, उसकी उबासी निकली और इसी विचार के साथ जो हो गया सो गया।
पहले वो नीचे गयी फिर उसके थोड़ी देर बाद मैं नीचे गया,
नीचे पहुँच कर मैने कमरे के दरवाजे की तरफ देखा तो दंग रह गया, पूरे कमरे में धुँआ भरा हुआ था।
जारी है।
