विक्की के लिए भी अब सब्र करना मुश्किल हो रहा था….उसने अपने होंठ जैसे ही आगे किए, नेहा उसपर किसी भूखी बिल्ली की तरहा टूट पड़ी और अपना शरीर उसपर रगड़ते हुए उसे बुरी तरह से स्मूच करने लगी…एक के बाद अब दूसरी स्मूच सच में विक्की के कॉन्फिडेंस को बड़ा रही थी…
इन कमसिन जवानियों को अपनी बाहों में भरकर चूमने का आनंद वो सच में एंजाय कर रहा था..
ख़ासकर अब…अपनी बहन के साथ…शायद आज शर्म की एक और दीवार टूटने के कगार पर थी उन दोनो भाई बहनो के बीच..
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अब आगे
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विक्की के होंठो को चूमते-2 वो उसकी गर्दन पर भी किस्स करने लगी, और धीरे-2 नीचे जाकर टी शर्ट नीचे खिसकाते हुए उसकी छातियों पर भी…
ये एहसास कुछ इस तरह का था की विक्की का शरीर उपर की तरफ उठ सा रहा था…
नेहा के गीले होंठ, जिनमें से लार निकलकर उसकी गर्दन और छाती को गीला कर रही थी, उसके शरीर को एक अलग ही तरह का एहसास दे रहे थे..
नेहा ने उसकी टी शर्ट को नीचे से उठाकर उपर किया और उसे निकाल फेंका…
अब वो खुल कर उसकी छाती पर चुम्मियों की बारिश कर पा रही थी..
अचानक नेहा ने विक्की के दाँये निप्पल को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया…
विक्की तो उछल ही पड़ा उसकी इस हरकत से…
उसे पीछे धकेलना चाहा पर वो हटी ही नही, किसी भूखी बिल्ली की तरह वो अपना मुँह उसकी छाती से लगाए पता नही क्या चूसने में लगी हुई थी….
विक्की को बड़ी जबरदस्त गुदगुदी सी हो रही थी और साथ ही उसके शरीर मे एक कसावट भी आ रही थी और एक तरंग सीधा उसके लंड तक जा कर उसे और भी कड़क बना रही थी…
शायद यही एहसास लड़कियों को भी होता होगा तभी उनके स्तनो को चूसने से उन्हें अपने आप पर काबू नही रहता.
पीछे तो वो हो नही रही थी, इसलिए उसने उसके रेशमी बालो में हाथ डाल कर उसे सहलाना शुरू कर दिया और उसे और जोर से दबा कर अपनी छाती में घुसा लिया…
उसकी लार से विक्की की छाती पूरी तरह से गीली हो चुकी थी….
फिर वो खिसक कर दूसरे निप्पल तक गयी और उसे भी चूसने लगी..
विक्की ये समझने की कोशिश कर रहा था की ये उसने सीखा कहा से, शायद जो एहसास उसे अपनी छातियो पर चाहिए था वो पहले विक्की को देना चाहती थी…
यानी वो भी चाहती थी की विक्की उसकी छातियो को चूसे , उन्हे चुभलाए, उन्हे मुँह में लेकर उसका दूध पी जाए..
इस बात का एहसास होते ही उसके हाथ धीरे से उसके बूब्स की तरफ बढ़ने लगे और उन्हे छूते ही उसने धीरे-2 दबाना शुरू कर दिया…
नेहा को जब लगा की विक्की उसकी छातियो को दबा रहा है तो वो सीधा हुई और उसने खुद ही अपनी टी शर्ट को उतार फेंका, अब वो उसके खड़े लंड पर अपनी गद्देदार गांड लेकर टॉपलेस बैठी थी…
और बीच के अवरोध यानी टी शर्ट को हटाने के बाद उसने खुद ही उसके हाथ को अपनी छाती से लगाया ताकि वो खुल कर अब उसके नंगे बूब को मसल सके
फिर वो धीरे से नीचे झुकी और अपनी दाँयी चुचि को पकड़कर सीधा विक्की के मुँह में डाल दिया, जैसे एक माँ अपने बेटे को दूध पिलाते हुए करती है ठीक वैसे ही…
विक्की के मुँह में जैसे ही उसके बेर जैसे कड़क निप्पल्स आए वो उन्हे जोरों से चूसने लगा,
पहले एक को और फिर दूसरे को…
फिर तो उसने दोनो हाथो से उसकी नन्ही बूबियों को पकड़ा और बारी-2 से उन्हे चूसने लगा…
नीचे से उसका लंड नेहा की चूत पर सिर मारकर उसे और भी ज़्यादा गीला कर रहा था…
और वो भी अपनी चूत को खड़े लंड पर ऐसे घिस रही थी जैसे कपड़े समेत ही उसे अंदर ले जाएगी..
विक्की ने हाथ नीचे करके उसकी स्कर्ट को उपर करना शुरू कर दिया…
आज शायद वो हर हद को पार कर लेना चाहता था..
नेहा ने भी धड़कते दिल से अपनी गांड उठा कर उसे ऐसा करने में मदद की, कुछ ही देर मे उसकी नंगी गांड विक्की के कड़क लंड के उपर रगड़ खा रही थी…
अब सिर्फ़ विक्की के पायजामे का कपड़ा ही था उनके बीच की दीवार, वरना दोनो के मिलन में एक मिनट भी नही लगना था क्योंकि जितना कड़क विक्की का लंड इस वक़्त था उसे नेहा की गीली चूत में उतरने में कोई भी परेशानी नही होने वाली थी.
विक्की ने दोनो हाथो से उसकी मोटी गांड को मसलना शुरू कर दिया, नीचे से वो उन्हे मसल रहा था और उपर से उसके होंठो को चूस रहा था…
घाघरे की खिड़की खुल जाने से उसकी चूत की गहरी सुगंध अब खुलकर बाहर आ पा रही थी…
और जैसे वो खुश्बू विक्की के नथुनों में पहुँची वो पागल सा हो गया…
ऐसा लगा जैसे हवा में तैरता कोई नशा सूंघ लिया हो उसने,
ऐसी शराब जैसी गंध थी की उसे सूंघते ही वो मदहोश सा हो गया और उसने अपनी पूरी ताक़त लगाकर उसकी गांड पर धक्का देकर उसे अपने चेहरे के उपर लाकर बिठा दिया…
नेहा भी समझ गयी की विक्की क्या करना चाहता है, वो तो बदहवास सी हो गयी इस एहसास से की आज उसका भाई उसकी चूत चूसेगा..
वो बेड पर खड़ी हुई और उसने अपने घाघरे को उपर उठाया और सिर से निकालकर बाहर फेंक डाला..
अब वो पूरी तरहा से नंगी थी…
इस वक़्त नेहा रति की मूरत लग रही थी विक्की को, उसका अंग-२ जवानी की देहलीज पर था, जवान जिस्म की सिसकारियां हर अंग से फूटने को बेताब थी
फिर वो वापिस विक्की के चेहरे के ऊपर आकर खड़ी हो गयी, अब जहाँ से विक्की देख पा रहा था इसे नेहा की मांसल टांगो के बीच उसकी रसीली चूत दिख रही थी, जहाँ से उसकी चूत का पानी टपक कर उसकी जांघो को भिगो रहा था, उसके ऊपर उसका सपाट पेट और उसके ऊपर उसकी नन्ही और सुडोल छातियां थी, और सबसे ऊपर उसकी हवस से भरी निगाहें जो सीधा विक्की के होंठो को देख रही थी, क्योंकि उन्ही होंठो पर कुछ ही देर में उसकी चूत का विमान उतरने वाला था
वो धीरे – 2 नीचे आयी और उसने अपनी चूत विक्की के मुँह में फँसाई और खुद ही जाल में फंसी चिड़िया की तरह छटपटाने लगी…
ये एहसास ही ऐसा था …
एक तो उसके जिस्म का सबसे सेंसेटिव पार्ट और वो भी उसके खुद के भाई के मुँह में फँसा हुआ…
विक्की तो उसकी चूत के होंठो को अपने मुँह में दबा कर ऐसे उन्हें ऐसे स्मूच कर रहा था जैसे वो चेहरे के होंठ हो…
उसकी चूत के कसे हुए लिप्स को एक ही बार में पूरा मुँह में भर कर जब उसने निचोड़ा तो नेहा की चूत का सारा रस नीचूड़ कर उसके मुँह में भरता चला गया…
जैसे कोई रसीला फल मुँह में लेकर दबा दिया हो उसने.
”आआआआआआआआआआआआअहह म्म्म्ममममममममममममम भाईईईईईईईईईईईईईईईई…… मज़ाआआआअ आआआआआआआ गयाआआआआअ”
अपनी सैक्सी बहन के मुँह से इस वक़्त भाई शब्द उतना ही सैक्सी लग रहा था उसे जितना उसका नशीला बदन..
विक्की की जीभ ने उसकी चूत की परतों में जगह बनाते हुए जब अंदर प्रवेश किया तो नेहा का पूरा शरीर काँपने लगा, जैसे कोई बिजली की नंगी तार से उसकी छूट को झटका दे रहा हो…
और उसी कंपकपाहट में उसने तेज़ी से झड़ना शुरू कर दिया..
”उहह ..म्म्म्ममममममममममममम…………मैं तो गयी भाई……..मैं तो गयी…………..”
और फिर उसका शरीर किसी बेजान पत्ते की तरह लहरा कर पीछे गिरने लगा…
विक्की ने अपने घुटने उपर करके उसके शरीर को पीछे की तरफ से सहारा दिया वरना उसका सिर सीधा जाकर विक्की के खड़े लंड से टकरा जाता..
नेहा की गर्म चूत अभी भी विक्की के होंठो से सटी हुई थी,
जिसमें से बूँद-2 करके मीठा पानी बाहर निकल रहा था…
उसके नन्हे बूब्स हर गहरी साँस के साथ-2 उपर नीचे हो रहे थे और अपनी बंद आँखे किए वो अपने ऑर्गॅज़म से उभरने की कोशिश कर रही थी..
वो जिस पोज़ में उसके चेहरे पर अपनी चूत लगाए बैठी थी, विक्की का खड़ा लंड इस वक़्त उसकी कमर पर दस्तक दे रहा था…
विक्की के हाथ उपर जाकर उसके बूब्स को मसल रहे थे और बीच-2 में वो अपनी जीभ से उसकी चूत से निकल रहे पानी को भी सॉफ किए जा रहा था..
इशारा सॉफ था उसका,अब विक्की की बारी थी अपने लंड को शांत करने की…
और ये नेहा भी जानती थी की विक्की को खुश करना कितना ज़रूरी है उसके लिए…
और आज तो वो किसी भी हद तक जाने को तैयार थी अपने भाई के लंड को शांत करने के लिए..

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