कुछ देर तक और फोटो खिंचवाने के बाद वो तीनो वापिस घर की तरफ चल दिए…
आज वो जिस तरफ निकल कर आए थे, वाहा से वापिस जाते हुए पहले विक्की का ही घर आता था, इसलिए नेहा को घर पर छोड़कर वो मंजू को उसके घर छोड़ने के लिए निकल पड़ा..
और आज उसके घर पर उसके मा बाप तो थे नही, इसलिए इस गोलडेन पल को वो अपने हाथो से जाने नही दे सकता था…आज के दिन मंजू ने जो उसके लॅंड का बुरा हाल किया था, उसे शांत करना तो बनता ही था
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अब आगे
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नेहा के बाइक से उतरते ही मंजू ने विक्की को अपनी बाहों में जकड़ लिया और अपना सिर उसके कंधे पर रखकर सामने देखने लगी…
दोनो के गाल आपस में रगड़ खा रहे थे..
बात करते हुए विक्की जान बूझकर उसकी तरफ घूम रहा था ताकि उसके नर्म गालों पर अपने होंठ लगा सके..
मंजू भी मंद-2 मुस्कुरा कर उसका साथ दे रही थी…
एक दो बार तो उसने भी उसके चेहरे की तरफ देखते हुए कुछ बोला और अपने होंठो से उसके गालो को छू लिया…
विक्की का लंड किसी दोनाली बंदूक की तरह उसकी पेंट में खड़ा था, कोई सामने से देख ले तो सॉफ पता चल जाए की तमंचा पूरी तरह से लोडेड था उसका..
कुछ देर आगे जाने के बाद विक्की ने कुछ पूछा मंजू से…..
और जैसे ही उसने विक्की की तरफ मुँह करके कुछ बोलते हुए उसके गालों से अपने होंठ लगाए, विक्की ने भी अपना सिर घुमा कर उसकी तरफ कर लिया….
बिजली सी कड़क गयी जब विक्की के होंठो से मंजू के नर्म होंठ छुए तो…
विक्की ने भी अपनी हरामीपंति दिखाते हुए उसके होंठो को धीरे से चूस लिया, मंजू की आँखों में शर्म के भाव तैर गये और उसने नज़रें झुका ली…पर उसने अपनी किस्स नहीं तोड़ी
बाइक चल रही थी इसलिए उसपर ज़्यादा देर तक ये चुम्मेबाजी वाला करतब हो नही सकता था, वरना विक्की उस नन्ही सी किस्स को एक लंबे स्मूच में बदलने में कोई कसर ना छोड़ता…
कुछ देर में ही उसका घर आ गया…
मंजू नज़रें झुका कर उसकी बाइक से उतरी और अपने बेग से चाबी निकाल कर ताला खोलने लगी…
अंदर जाकर वो धीरे से पलटी और बोली : “अंदर आ जाओ ना विक्की भैय्या …चाय पीकर चले जाना…”
विक्की तो इसी पल की प्रतीक्षा कर रहा था…
उसने तुरंत बाइक को साइड में खड़ा किया और लगभग उछलता हुआ सा उसके घर के अंदर आ गया, मंजू ने पीछे से दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और अपनी नशीली आँखो से मुस्कुराते हुए वो अंदर की तरफ आ गयी.
विक्की सोफे पर जाकर बैठ गया और मंजू उसके लिए किचन से पानी लेकर आई, जैसे ही वो जाने लगी तो विक्की ने उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच लिया और वो लड़खड़ा कर उसकी गोद में आ गिरी.
विक्की का लंड तो पहले से ही खड़ा था, उसके खड़े लंड पर उसके नर्म कूल्हे जब टकराए तो उसके मुँह से मज़े के साथ-2 एक दर्द भरी आह भी निकल गयी, पीछे से जवानी थोड़ी भारी थी उसकी..
मंजू : “ओह्ह्ह ….सॉरी विक्की भैय्या ….आपको लगी तो नही ना…”
विक्की ने बड़ी मुश्किल से अपने लंड से निकल रही दर्द की लहर पर काबू पाया और बोला : “इतना भार जब एक ही झटके से मेरे उपर गिरेगा तो दर्द तो होगा ही ना…”
मंजू ने नकली गुस्सा दिखाते हुए कहा : “ओोहो …तो अब मैं मोटी हो गयी हूँ …अभी कुछ देर पहले तो मुझे बोल रहे थे की अच्छी मॉडेल बन सकती हूँ …और अब एकदम से मोटी बोल दिया….जाओ मैं आपसे बात नही करती…”
वो झूठमूठ का मुँह फूला कर दूसरी तरफ सिर घुमा कर बैठ गयी…
पर उसकी गोद से उतरने की जहमत नही उठाई उसने.
विक्की ने उसकी कमर को पकड़ कर उसके चूतड़ों को अपने लंड के चारों तरफ एडजुस्ट किया, अब उसका खड़ा हुआ लंड उसके चूतड़ों की दरार में फंसकर आगे की तरफ मुँह निकाल कर मंजू की चूत को टच कर रहा था..
विक्की ने उसकी कमर मे हाथ डालकर उसकी पीठ को अपनी छाती से सटा लिया और उसके गुदाज और नर्म पेट को सहलाते हुए बोला : “अर्रे…मैं तुझे उस तरह से मोटी थोड़े ही बोल रहा हूँ , वो तो बस कुछ-2 जगह ऐसी होती है ना लड़कियों के शरीर की, जहाँ चर्बी थोड़ी ज़्यादा होती है, वो हिस्सा जब हमारे अंग पर तरबूज की तरह से गिरे तो दर्द तो होगा ही ना….”
विक्की की सफाई सुनकर मंजू अपनी हँसी ना रोक पाई और ज़ोर-2 से हँसने लगी…
हंसते हुए उसकी नर्म गांड विक्की के लंड पर किसी वाईब्रेटर की तरह घिसाई कर रही थी जिसकी वजह से उसका लंड और भी ज़्यादा कड़क होने लगा..
पर उस बुद्धू मंजू को शायद अभी तक उस चीज़ का एहसास नही हो पाया था.
कुछ देर बाद जब उसकी मैराथॉन वाली हँसी रुकी तो वो बोली : “अच्छा …तो आप मुझे बताओ, इस तरबूज के अलावा और कौन सी जगह पर एक्सट्रा चर्बी है मेरे….”
बेचारी भोलेपन में वो बात बोल गयी जिसका शायद विक्की भी इंतजार कर रहा था.
उसने तुरंत अपने हाथो में उसके मोटे मुम्मे थाम लिए और बोला : ”ये है ना…तुम्हारे बूब्स…”
एक ही पल में मंजू के चेहरे के एक्शप्रेशन चेंज हो गये….
हँसी गायब हो गयी और एक उत्तेजना का संचार उसके चेहरे पर होने लगा…
विक्की ने उसके वक्षस्थल को अपने हाथो से थाम रखा था पर वो उसे मना भी नही कर पा रही थी…
शायद अंदर से वो भी यही चाहती थी की वो उन्हें थामे…
क्योंकि ऐसा करवाके उसके अंदर कुछ-2 हो रहा था, जो आज से पहले कभी फील नही हुआ था उसे.
एक कमसिन लड़की के स्तनों पर किसी मर्द का पहला टच था, जो उसे बहुत भा रहा था.
विक्की ने उसके मुम्मों को पकड़ कर ज़ोर से दबा दिया, और उन्हे दबाते हुए अपनी तरफ खींच लिया..
”आअहह विक्की भय्या….धीरे…दर्द होता है….”
यानी वो विक्की को वैसा करने से मना नही कर रही थी, बस धीरे से करे यही गुज़ारिश थी उसकी..
पर विक्की तो एक नंबर का हरामी लौंडा था,
उसने नेट पर कहानियों में अच्छे से पड़ रखा था की जब ऐसा वक़्त अकेली लड़की के साथ मिले तो क्या-2 करना चाहिए…
इसलिए उसने तुरंत अपने दोनो हाथो की उंगलियो से उसके बूब्स को सहलाया और फिर बीचो बीच जाकर उसके उभर रहे निप्पल्स को अपनी उंगली और अंगूठे की गिरफ़्त में लेकर उन्हे होले से भींच डाला..
”आआआआआआआआआआआहह…..सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स……. उम्म्म्मममममममममम भेयययययाआआआआअ….”
इस वक़्त तो उसके मुँह से सिसकारी के साथ भैय्या शब्द बड़ा ही सैक्सी लग रहा था जैसे उसकी चूत की चाशनी में डुबोकर उसे निकाला हो….
विक्की ने अपने उंगली और अंगूठे से उसके निप्पल्स को उमेठना जारी रखा, मंजू किसी साँप काटी लड़की की तरह उसकी गोद में बैठी तड़प रही थी, और अपनी गद्देदार गांड से उसके नाग को कुचल भी रही थी..
शायद अब उसे नीचे भी कुछ-2 होने लगा था क्योंकि विक्की के लंबे लंड को वो अपनी चूत पर जोरों से रगड़ कर एक लय बना रही थी जैसे नाव में बैठने से हिचकोले आते है, ठीक वैसे ही वो अपनी गांड की नाव को विक्की के लंडसागर पर हिचकोले खिला रही थी और उपर तो विक्की ने उसके निप्पल्स को पतवार बना कर उसकी नाव को और तेज़ी से चलने पर विवश सा कर रखा था..
अचानक विक्की ने उसे अपनी तरफ पलटाया और उसके दहकते हुए होंठो पर अपने होंठ रख कर उन्हे चूसने लगा..

मंजू भी शायद इसी पल की प्रतीक्षा कर रही थी…
दोनो की लाइफ का ये पहला चुंबन था पर वो दोनो ही उसे ऐसे परफॉर्म कर रहे थे जैसे बरसों से करते आए हो…
दोनो ही बोर्न किस्सर थे…
एक दूसरे के होंठो और जीभ को मुँह में लेकर ऐसे चूस रहे थे जैसे सारी चाशनी आज ही ख़त्म कर देनी है एक दूसरे के मुँह की.
विक्की के हाथ अभी भी मंजू की ब्रेस्ट पर ही थे, जिन्हे वो धीरे-2 मसल रहा था, उन्हे दबाने में एक अजीब सा आनंद प्राप्त हो रहा था विक्की को, मन तो कर रहा था की उन गुब्बारों को उम्र भर हाथों में लेकर दबाता रहे…
पर मंजू शायद कुछ और चाहती थी,
उसने किस्स तोड़ी और विक्की के मुँह को पकड़ कर नीचे अपनी छाती की तरफ करने लगी…
विक्की समझ गया की वो क्या चाहती है..
वो उसकी नर्म गर्दन को चूमता हुआ नीचे की तरफ जाने लगा, और ठीक उसके बूब्स के उपर पहुँचकर उसने शर्ट के उपर से ही उसके मुम्मे को अपने मुँह में भरकर ज़ोर से काट लिया…
एक बार फिर से आनंद से भरी एक किलकारी मंजू के मुँह से निकल गयी
”आआआआआआआआआआआआआहह उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़…… काटो मत ना भैय्या …….बस प्यार करो इन्हे…….”
मंजू की प्यार भरी रिक्वेस्ट को उसने मान लिया और उन्हे चूसने लगा…
तब तक मंजू ने अपनी शर्ट के बटन खुद ही खोलने शुरू कर दिए….
और जैसे ही आख़िरी बटन खोलकर उसने अपनी शर्ट के कपाट खोले, अंदर से दूधिया प्रकाश में नहाए हुए 2 कलश विक्की के सामने प्रकट हो गये..
हालाँकि कुछ देर पहले भी उसने इन मुम्मो को देखा था, पर इस वक़्त वो उन्हे और करीब से और अपने हाथो और होंठो की पहुँच के अंदर देख पा रहा था,
विक्की ने उसकी शर्ट को निकाल फेंका और मंजू के नंगे बूब्स को जी भरकर देखने लगा..

पर देखते रहने से उसका पेट भरने वाला नही था, उसने उन दोनो मुम्मो को अपने हाथो में पकड़ा और अपना मुँह खोलकर उनपर टूट पड़ा…
उफफफफफफफफफफ्फ़ क्या स्वाद था उनका….
एकदम ककचे आम जैसी चिकनाहट और कठोरपन था उनमे पर साथ ही साथ पके हुए आम जैसी मिठास भी थी…
वो चपर -2 करके उन्हे चूसने लगा….
निप्पलों को मुँह में लेकर उसका दूध दोहने लगा, इतनी ज़ोर से सक करने लगा जैसे आज तो वो उसकी कच्ची छातियों से दूध निकाल कर ही रहेगा..
उधर दूसरी तरफ मंजू का तो बुरा हाल था, जिस पल को सपना बनाकर वो पिछले 2 दिनों से देख रही थी वो उसके साथ सच में हो रहा था….
इसलिए उसका उत्साह देखते ही बनता था….
और सबसे बड़ी बात ये थी की उन दोनो की लाइफ का ये पहला सैक्सुअल एक्सपीरियेन्स था
विक्की ने उसकी शर्ट को पूरी तरह से निकाल कर फेंक दिया और फिर उसने खुद ही अपनी शर्ट भी उतार दी,
हालाँकि उसके दिमाग़ में अभी तक चुदाई करने की कोई बात नही आई थी पर वो उसकी नंगी छातियो को अपने नंगे सीने से लगा कर उस आनंद को प्राप्त करना चाहता था जिसके लिए वो बरसो से तरसता आया था…
और जब उन दोनो के आधे नंगे बदन एक दूसरे से लिपटे तो दोनो के मुँह से एक आह सी निकल गयी,
बड़ा ही सुखद सा एहसास था वो,
एकदम नर्म सा,
और साथ ही दोनो ने जब स्मूच करनी शुरू की तो सोने पर सुहागा सा हो गया…
वो दोनो ना जाने कितनी देर तक एक दूसरे के होंठो , गर्दन और छाती पर किस्स करते रहे उन्हे भी पता नही चला…
और अचानक मंजू का हाथ उसके खड़े हुए लंड से जा टकराया…
एक पल में ही उसके चेहरे पर हैरानी के भाव आ गये, जैसे उसे पता ही नही था की वो क्या है…
पर वो हैरानी शायद इस बात की थी की इतना बड़ा भी लंड होता है क्या…
शायद आज तक उसने गली के छोटे बच्चों की लुल्लिया ही देखी थी,
आज पहली बार वो ऐसा कुछ फील कर रही थी जो शायद उसकी समझ से परे था
और विक्की का ये फ़र्ज़ बनता था की वो उसे इस जादुई दुनिया के जिन्न से मिलवाए…
इसलिए उसने उसके हाथ पर हाथ रखकर अपने लंड पर दबाव और तेज कर दिया….
मंजू की साँसे तेज हो गयी, क्योंकि उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसने किसी साँप की गर्दन पर हाथ रखकर उसे दबोच रखा हो और वो छटपटा कर उसकी गिरफ़्त से निकलना चाहता हो..
साँप का मालिक, विक्की भी शायद यही चाहता था….
इसलिए उसने उसका हाथ हटा कर अपनी जीन्स के बटन खोने शुरू कर दिए….
और सब कुछ खोलने के बाद जब वो लहराता हुआ नाग मंजू की आँखो के सामने आया तो उसकी चीख निकलते हुए बची…
क्योंकि स्कूल में मेडम ने उसे किताबो में जिस शिश्न के बारे में पढ़ाया था ये तो उस से कही ज़्यादा बड़ा था….
उसकी आँखो का कोतूहूल देखते ही बनता था,
वो दम साधे विक्की के लंड को एकटक देखे जा रही थी,
पर एक डर भी था शायद उसके चेहरे पर जिसे विक्की ने समझा और बोला
विक्की : “डरो मत…..पास आओ और छूकर देखो इसको…..काटेगा नही ये…”
वो बिना पलके झपकाए उसके करीब आई और घुटनो के बल उसके सामने बैठ गयी…
विक्की ने उसके चेहरे पर आए बालो को पीछे किया और उसके चेहरे के बिल्कुल करीब अपने लंड को लाकर एक जोरदार तरीके से झटका दिया
आँखों में लाल डोरे चमक गए मंजू के, जब विक्की के लहराते हुए नाग ने उसके चेहरे पर दस्तक दी….
एक अजीब सा आकर्षण था विक्की के लंड में , जिसे वो नजरअंदाज नही कर पा रही थी…
धीरे-2 उसके हाथ उपर आए और उसने विक्की के लंड को अपने कोमल हाथो में जकड़ लिया….
विक्की के मुँह से एक तेज सिसकारी निकल गयी
”आआआआआआआआआआआआआअहह………. मंजूऊुुुुुुुुुुउउ…. म्म्म्मममममममममम………. चूसो इसको……….. तो…….चाटो मेरी जाआंन ”
मंजू के चेहरे के भाव एकदम से बदल से गये…
चुसू इसको…..चाटू …..और वो भी इस सूसू करने वाली जगह को…..भला क्यूँ ….
वो अपने चेहरे पर आए इन सवालो के साथ विक्की को देख रही थी…
पर वो तो अपनी आँखे भींचे उस पल में डूबा सा हुआ था…
फिर मंजू को पिछले सारे दिनों की बाते एक झटके में याद आ गयी….
की कैसे उसका खुद का दिल विक्की के लिए धड़कता था…
कैसे उसे देखकर उसके निप्पल टाइट से हो जाते थे….
कैसे बाइक के पीछे बैठकर वो अपने मुम्मे उसकी पीठ से रगड़ती थी….
और उसके बारे में सोचकर अपनी चूत को रगड़ने में कितना मज़ा आता था….
और विक्की ने कितनी बार उसे चोकोबार खिलाई थी…
आज उन सभी कोकोबार्स का बदला उतारने का वक़्त आ गया था….
वैसे भी विक्की के लंड से निकल रही भीनी गंध उसे अपनी तरफ खींच रही थी…
उसने धीरे से अपना मुँह खोला और अपनी जीभ बाहर निकाल कर विक्की के लंड को नीचे से उपर तक चाट लिया और फिर उपर जाते ही उसके लंड को मुँह में लेकर अंदर निगल गयी.
आज शायद विक्की को भी नही पता था की उसके साथ क्या-2 होने वाला है.

