एक तो विक्की की पीठ से घिसाई के बाद उसके निप्पल्स पहले से ही खड़े थे, नेहा की इस हरकत से वो और भी कड़क होने लगे…
उसने बड़ी मुश्किल से , ना चाहते हुए उसके हाथ को अपनी छाती से हटाया और बाकी के रास्ते आराम से बैठकर गयी..नेहा भी खिलखिलाकर हंस दी अपनी सहेली की इस हालत पर..
इन सब बातो को आगे बैठा विक्की बड़ी चालाकी से नोट कर रहा था…
और उसकी कुटिल मुस्कान बता रही थी की उसने अगले कदम की प्लानिंग कर ली है अब.
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अब आगे
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मंजू का घर पहले आता था , इसलिए उसे रास्ते मे उतारने के बाद दोनो भाई बहन अपने घर की तरफ चल दिए…
अब अपने भाई से चिपकने की बारी नेहा की थी…
और शायद इसी बात का विक्की को भी इन्तजार था.
जैसे ही नेहा ने अपनी बाहे विक्की की कमर से बाँधी, उसने बाइक की स्पीड तेज कर दी और नेहा ने गिरने से बचने के लिए विक्की को और ज़ोर से जकड़ लिया…
और इस प्रक्रिया मे उसके नन्हे चूजे विक्की की कमर में धंसते चले गये…
विक्की को लगा जैसे रुई के दो गोले उसके कमर की मसाज कर रहे है.
विक्की को पकड़े-2 नेहा ने उसके कान के पास अपनी गर्म साँसे छोड़ते हुए कहा : “भैय्या , मैं आपसे बहुत नाराज़ हूँ , आपने आज फिर से मंजू को चोकोबार लेकर दी और मुझे वो सड़ी हुई सी बर्फ वाली आइस्क्रीम…”
विक्की जानता था की वो ऐसा बोलने वाली है, इनफॅक्ट हारने के बाद वो हर बार ऐसे ही अपनी शिकायत किया करती थी..शायद हार बर्दाश्त नही थी उसे…
विक्की : “नेहा, तुझे तो पता है ना, मैने पहले ही बोल रखा है की जो जीतेगा उसे ही चोकोबार मिलेगी…अब तू आज हार गयी तो इसमे मैं क्या कर सकता हूँ …”
बेचारी अपने भाई की बात सुनकर मायूस सी हो गयी,
उसकी पकड़ भी ढीली पड़ गयी…
ये देखते ही विक्की ने अपना पासा फेंका
वो बोला : “वैसे तुझे चोकोबार खानी है तो वो मैं तुझे अलग से भी खिला सकता हूँ ….”
ये सुनते ही नेहा के शरीर में जैसे एक बार फिर से जान आ गयी…
उसकी पकड़ भी तेज हो गयी और मुम्मो को और ज़ोर से उसकी कमर में धँसाते हुए वो बोली : “ओ वाउ….तो खिलाओ ना…”
विक्की तो पहले से ही प्लानिंग करके बैठा था..
वो बोला : “ऐसे नही…इसके बदले तुझे भी मेरा एक काम करना होगा..”
नेहा : “वो क्या….? ”
विक्की : “आज रात को जब माँ पिताजी सो जाए तो मेरे रूम में आ जाना, आइस्क्रीम भी मिल जाएगी और काम भी वहीं बता दूँगा…”
उसने बड़ी मासूमियत से पूछा : “आ तो जाउंगी ..पर…माँ पिताजी के सोने के बाद ही क्यूँ ..पहले क्यों नही…”
विक्की ने थोड़े कड़क लहजे में कहा : “आइस्क्रीम खानी है ना….फिर ये बेकार के सवाल क्यों पूछ रही है”
वो सकपका सी गयी….
और एकदम से चुप हो गयी…
शायद इस डर से की कहीं उसके भाई का मन ना बदल जाए आइस्क्रीम खिलाने का..
विक्की उसकी हालत देखकर बोला : “अर्रे पगली, डरती क्यों है…वो मैं इसलिए बोल रहा हूँ की माँ पिताजी हमेशा गुस्सा करते है ना रात को आइस्क्रीम खाने के लिए…की दाँत खराब हो जाएगे…ये हो जाएगा…वो हो जाएगा…इसलिए बोल रहा हूँ …वरना मुझे क्या, उनकी डांट खानी है तो पहले ही आ जाइयो…”
नेहा :”ओह्ह …..इसलिए आप बाद में आने के लिए कह रहे थे….मुझे डांट से बचाने के लिए…थॅंक्स भैय्या ….उम्म्म्मममाआअ”
इतना कहते हुए उसने बाइक पर बैठे-2 ही उसके गालो के पास एक गीला सा चुंबन दे दिया…
उसके नर्म होंठो की किस्स वो कई बार महसूस कर चुका था…
पर आजकल वो थोड़ा और सेनुसुअल फील करवाती थी.
घर पहुँचकर वो सीधा बाथरूम में घुस गयी और विक्की अपने रूम में , जो फर्स्ट फ्लोर पर था….
वहां पहुँचते ही उसने अपने सारे कपड़े निकाल फेंके और अपने 7 इंच के लंड को पकड़कर उपर नीचे करने लगा…
ऐसा करते हुए उसकी आँखे बंद थी और बंद आँखो से वो उन्ही पलों को फिर से याद कर रहा था जो कुछ देर पहले घटे थे…
मंजू के नर्म मुम्मे और उसकी पकड़ को महसूस करके उसने 8-10 घिस्से ज़ोर से मारे…
और फिर जब नेहा के बारे में सोचना शुरू किया तो उसके हाथों की गति बढ़ती चली गयी…
उसके नर्म मुम्मे के स्पर्श से लेकर उसकी किस्स तक और घर पहुँचने के बाद उसका बाथरूम में जाकर कपड़े उतारकर नंगे होने तक को भी उसने इमेजीन कर लिया
और जब उसे बंद आँखो मे अपनी नंगी बहन दिखाई दी तो उसके लंड की पिचकारियां पूरे कमरे में तितर बितर होकर फैल गयी
”आआआआआआआआआआाअगगगगगगगगगगगगघह….. साली हरामजादीया………..”
अपने लॅंड की आख़िरी बूँद तक को अपनी बहन और उसकी सहेली के नाम कुर्बान करने के बाद वो उठा और अपनी टी शर्ट से नीचे के फर्श को सॉफ किया और उसे बास्केट में डाल दिया धोने के लिए…
और कपड़े पहन कर वो बाहर निकल गया अपने दोस्त से मिलने.
रात को घर आते हुए वो चोकोबार लेकर ही आया, और वो उसने सबकी नज़रों से छुपाकर फ्रीजेर में पीछे की तरफ रख दी.
खाना खाते हुए हमेशा की तरह माँ पिताजी ने उन दोनो से दिन भर का हिसाब किताब लिया…
विक्की का तो कॉलेज ख़त्म हो चुका था और वो MBA के एंट्रेन्स की तैयारी कर रहा था,
इसलिए उसके पास तो बताने लायक कुछ था नही, पर नेहा तो एक बार शुरू हुई तो उसने सुबह 7 बजे से लेकर 1 बजे तक की सारी बाते अपने पिताजी को बोल डाली….
खाना खाने के बाद माँ पिताजी उन्हे सोने को कहकर अपने कमरे में चले गये…
नेहा का अलग से कोई कमरा नही था, वो बाहर के ड्रॉयिंग रूम में पड़े एक बड़े से तख्त पर ही सोती थी, जो माँ पिताजी के रूम के बाहर ही था….
विक्की बड़ा था तो उसके लिए उपर वाला कमरा दिया हुआ था उसको..
रात के करीब 11 बज चुके थे, नेहा ने जब देखा की अंदर से माँ पिताजी के ख़र्राटों की आवाज़ें आ रही है तो वो चुपके से उठी और नंगे पैर उपर अपने भाई के कमरे की तरफ चल दी, उसने इस वक़्त एक टी शर्ट और स्कर्ट पहनी हुई थी, जिसके अंदर ब्रा और पेंटी थी.

विक्की तो कब से उसके आने का इंतजार कर रहा था, जैसे ही वो आई उसने उसे गले से लगा लिया.
नेहा के लिए ये थोड़ा अजीब था, क्योंकि आज से पहले उसके भाई ने ऐसा कभी नही किया था.
पर आज पहली बार अपने भाई के चौड़े सीने से लगकर उसे काफ़ी अच्छा लगा….
ख़ासकर उसकी चुचियो को जो छाती से रगड़ खाकर अकड़ सी गयी थी…
एहसास तो काफ़ी सुखद था पर बेचारी को पता नही था की ऐसे एहसास का करना क्या है….
खैर, उसे अंदर बिठाकर उसने जल्दी से दरवाजा बंद कर दिया.
नेहा : “भाई….अब तो दे दो ना आइस्क्रीम…इतनी देर से मेरा मन ललचा रहा है उसे खाने को…”
विक्की ने उसके नन्हे मुम्मो को देखकर सोचा ‘मन तो मेरा भी ललचा रहा है छुटकी , तेरे इन कबूतरों को पकड़कर निचोड़ डालने का…’ पर बेचारा ये बोल नही पाया..
विक्की : “अच्छा , तुझे अपनी आइस्क्रीम की चिंता है, पर मेरे काम की नही…”
नेहा : “ओोह …मैं तो भूल ही गयी थी…..बोलो ना भाई….क्या काम करना है आपका…”
विक्की उसके घुटनो के पास बैठा और उसकी आँखों में देखते हुए बोला : ‘देख नेहा, ये बात सिर्फ़ हमारे बीच ही रहनी चाहिए, माँ पिताजी को ज़रा भी भनक लगी तो मेरी बहुत मार पड़ने वाली है…”
नेहा ने विक्की के हाथ पर हाथ रखा और बोली : “तुम फ़िक्र ना करो भाई, आई प्रॉमिस, ये बात हम दोनो के बीच ही रहेगी”
विक्की को जब लगा की उसने नेहा को अपने कॉन्फिडेंस में ले लिया है तो उसने अपनी अलमारी से एक DSLR कैमरा निकाला….
इतना महँगा कैमरा देखते ही नेहा की आँखे फटी की फटी रह गयी…
विक्की : “आँखे फाड़ कर मत देख, ये मेरा नही है, मेरे एक दोस्त का है, बस कुछ दिनों के लिए लाया हूँ उस से…..”
नेहा : “पर किसलिए भाई…?”
विक्की : “क्योंकि मुझे अपना पोर्टफोलियो बनवाना है मॉडलिंग के लिए ….”
विक्की की इस धमाकेदार बात सुनकर उसकी आँखे फिर से फैल गयी…
”मॉडलिंग ???? पर क्यों ”
विक्की : “क्योंकि मुझे टीवी या मूवीज लाइन में जाना है…..मैने अपने एक दोस्त से बात भी कर ली है…बस एक अच्छा सा पोर्टफोलीयो बना कर देना है उसे…बाकी का काम वो संभाल लेगा..”
नेहा (आशचर्यचकित होकर बोली) ” मूवीज में ….यानी बॉलीवुड में ….वॉव ”
और ये था विक्की का प्लान…नेहा को अपनी इन बातों में फंसाकर उस से मजे लेने का.
पर यहाँ विक्की झूठ भी नही बोल रहा था,
उसका रुझान सच में बॉलीवुड की तरफ था…
स्मार्ट तो वो था ही, कद काठी भी अच्छी थी, हेयर स्टाइल भी बड़िया था, स्कूल कॉलेज की ड्रामा टीम में उसने कई नाटकों में हिस्सा भी लिया था..
इसलिए उसके दोस्त हमेशा उसे मूवीज में जाने के लिए प्रेरित करते रहते थे..
पर ये बात उसने अपने तक ही रखी हुई थी, घर में इस बारे मे किसी को नही पता था…
क्योंकि उसके पिताजी चाहते थे की वो MBA करके एक अच्छी सी कंपनी में जॉब करे जो उसके बस की बात थी नही.
नेहा तो शुरू से ही मूवीस की फैन थी, अक्सर घर में तेज गाने चलाकर वो नाचती गाती रहती थी, पूरे घर की लाडली थी इसलिए उसे कोई कुछ कहता भी नही था….
नेहा के इसी रुझान का फायदा विक्की उठा लेना चाहता था…
वो एक तीर से दो शिकार कर रहा था, जिससे उसका काम भी बन जाए और नेहा भी उसे मिल जाए..
नेहा का उत्साह देखकर विक्की समझ गया की उसे बोतल में उतारने में ज़्यादा परेशानी नही आएगी…
पर वो हर काम बड़े प्यार और आराम से करना चाहता था…
आख़िर उसकी बहन थी वो, उसकी खिल रही जवानी को वो अपने हिसाब से इस्तेमाल करना चाहता था.
अब तो खेल शुरू करने का इंतजार था बस.

