कमसिन बहन – Update 13 | Incest Sex Story

कमसिन बहन - Incest Seductive Sex Story
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कुछ देर बाद दोनो ने खाना खाया और फिर मंजू के मॉम-डेड के साथ वो लोग वापिस आ गये…
वहां पहुँचने से पहले ही नेहा ने विक्की को फोन कर दिया था ताकि वो उसे घर ले जा सके..

घर जाते हुए वो आज काफ़ी खुश थी,
अपनी लाइफ का ये एडवेंचरस सैक्स एक्सपीरियन्स उसे काफ़ी पसंद आया था…
पर इस अधूरे खेल को अब वो पूरा करना चाहती थी,
उसने सोच लिया था की आज किसी भी हालत में वो विक्की के लंड को अपनी चूत में लेकर रहेगी…
इसलिए घर जाते हुए वो उसे कस कर पकड़े बैठी थी,
और रह रहकर उसका हाथ उसके कड़क होते लंड पर जा रहा था…
आज वो अपने भाई का शिकार करने के पूरे मूड में थी.

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अब आगे
*************

विक्की भी इस एडवेंचर भरे सफ़र में काफ़ी खुश लग रहा था…
आज से पहले उसने जब भी नेहा या पिंकी को किस्स किया था, ऐसा रोमांच उसे आज तक नही मिला था….
वो अंजान बनकर अपनी ही बहन से लंड चुसवाना,
उसके बूब्स चूसना
और
उसके होंठो का रस पीना…
उफ़फ्फ़,
कयामत था वो सब…
मन तो उसका कर रहा था की इसी सुनसान रास्ते में बाइक को किनारे लगाकर वो उसकी चूत मार ले,
एक के बाद दूसरा रोमांचक एनकाउंटर हो जाता वहाँ,
ऐसी चुदाई में मज़ा भी बहुत मिलता,
पर पहली चुदाई का सवाल था, जिसे वो ढंग से ही करना चाहता था…
मन तो उसका बहुत कर रहा था आज ही नेहा को चोदने का पर उसे डर था की पता नही वो मानेगी या नही..

काश वो दोनो भाई बहन इस वक़्त खुल कर अपने दिल की बातें बयां कर लेते तो उन्हे पता चल जाता की चुदाई का आज से अच्छा मौका हो ही नही सकता..

खैर, एक दूसरे को अपने शरीर की गर्मी प्रदान करते-2 वो दोनो घर पहुँच गये,
रात काफ़ी हो चुकी थी, माँ ने ऊंघते हुए दरवाजा खोला और बंद आँखो से ही ऊँघते हुए अपने कमरे में वापिस चली गयी…

जैसे ही विक्की उपर अपने रूम में जाने लगा, नेहा ने बड़ी ही शराबी आवाज़ में कहा : “रूको ना भाई, मैं कपड़े बदल लूँ , फिर एकसाथ ही उपर चलते है…”

उसका कहने का अंदाज ही इतना नशीला था की विक्की को बिना पिए ही शराब सी चढ़ गयी.

वो सम्मोहन में बँधा हुआ सा उसके पीछे-2 उसके रूम तक आ गया,
नेहा ने उसका हाथ पकड़ कर बेड पर बिठाया और खुद अपनी अलमारी से कपड़े निकालने लगी..

फिर मुस्कुराते हुए वो उसकी तरफ पलटी और बिल्कुल उसके करीब आकर खड़ी हो गयी…
इतना करीब की उन दोनो के घुटने आपस में टकरा रहे थे..

फिर उसने अपनी कुरती को नीचे से पकड़ा और उसे धीरे-2 उपर करके अपने गले से निकाल फेंका…
नीचे कसी हुई ब्रा में उसके नन्हे बूब्स दिल की धड़कन के साथ-2 उपर नीचे हो रहे थे…
फिर उसने विक्की के हाथ को पकड़कर अपनी पायजामी के नाड़े पर रखा और उसे खोलने के लिए कहा,
विक्की ने एक झटका दिया और वो दोहरी गाँठ वाला नाड़ा खुलते ही उसकी कमर से पायज़ामी की पकड़ भी ढीली पड़ गयी और वो नीचे सरकने लगी, नेहा ने उसे भी पकड़कर नीचे किया और उसे अपनी टाँगो से निकाल फेंका..

एक अजीब सी खामोशी थी कमरे में …
बगल के कमरे में दोनो के माँ -बाप सो रहे थे और यहाँ इन दोनो के जवान जिस्म एक अलग ही आग में जल रहे थे..

नेहा ने हाथ पीछे करते हुए अपनी ब्रा के हुक्स खोले और वो भी एक झटके से छिटककर आगे की तरफ़ लटक गयी…
नेहा ने उसे निकाल कर विक्की के गले से लटका दिया…
अब वो टॉपलेस होकर अपने भाई के सामने खड़ी थी…

उसके नन्हे बूब्स अलग ही चमक रहे थे…
उनपर लगे लाल निशान थोड़ी देर पहले हुई गुत्थम गुत्था को बयान कर रहे थे,
विक्की ने उसके बारे मे कुछ नही पूछा, बस उन्हे निहारता रहा..
पर जैसे ही वो उन्हे पकड़ने लगा तो नेहा ने उसका हाथ हवा में ही रोक दिया और बोली : “अभी नही….उपर जाकर …”

 

फिर मुस्कुराते हुए उसने अपनी कच्छी भी उतार दी…
अब वो उपर से नीचे तक पूरी नंगी उसके सामने थी.

फिर उसने एक शॉर्ट्स और टी शर्ट पहनी और अपने कपड़े उठा कर अलमारी में रख दिए…
और विक्की को उपर चलने का बोलकर खुद आगे चल दी…

विक्की से आगे चलते हुए वो कुछ ज़्यादा ही अपने चूतड़ मटका कर चल रही थी और बेचारा विक्की उसके पीछे-2 अपना खड़ा लंड एडजस्ट करता हुआ चला आ रहा था..

उपर जाते ही नेहा ने सबसे पहले दरवाजा बंद किया और बिना कुछ कहे वो विक्की पर टूट पड़ी…

विक्की बेचारा तो सोच रहा था की पहले वो भी नेहा की तरह अपने कपड़े चेंज कर ले पर उसने इसका मौका ही नही दिया..

नेहा ने ताबड़ तोड़ अंदाज में उसके सारे कपड़े निकालने शुरू कर दिए और कुछ ही पल में उसे पूरा नंगा करके ही दम लिया उसने…
उसके खुद के कपड़े तो वैसे भी नाम मात्र के थे, उन्हे भी उसने एक पल में निकाल फेंका…
आज दोनो भाई बहन पूरी तरह से जोश में थे…
विक्की का खड़ा हुआ लंड उसके हुस्न की तारीफ़ों में सलामी ठोंक रहा था उपर नीचे होकर.



फिर एक झटके से दोनो आगे आए और एक दूसरे को बाहों में भरकर अपने-2 होंठ आपस में सटा दिए…

”ओह भाई…..मुउउउउउउउचचह…..आज सब्र नही हो रहा मुझसे….आग सी लगी है मेरे अंदर …प्लीज़ भाई….आज मना मत करना…..बुझा दो ये आग अपने इस मोटे लंड से…..बना दो मुझे कली से फूल….डाल दो इसे मेरी चूत में भाई……चोद डालो मुझे….”

जो उसके मुँह में आया वो बकती चली गयी और अनगिनत चुम्मिया उसने अपने भाई के चेहरे और होंठो पर दे डाली…..


नेहा को किस्स करते -2 विक्की ने उसकी गर्दन को चूमा, नीचे आते हुए उसके दोनो बूब्स को एक-2 करके निचोड़कर अच्छे से पिया और फिर उसे अपनी बाहों में गुड़िया की तरह उठा कर उसकी नाभि को अपनी जीभ से चाटा …

 

ये एक ऐसा पल था जिसमें नेहा की चूत से निकलकर ढेर सारी मलाई विक्की के पैरों पर जा गिरी,
और वो मलाई और निकलकर ऐसे व्यर्थ ना जाए, इससे पहले ही विक्की ने उसे अपने बेड पर पटका और सीधा अपनी जीभ निकाल कर उसकी चूत पर कूद पड़ा और उसे जोरों से चाटने लगा..

अपनी करामाती जीभ से वो उसकी चूत की परतों की गहराइयाँ नाप रहा था..
शायद आज का ये आख़िरी दिन था जब वो इस कुँवारी चूत का स्वाद ले पा रहा था,
आज के बाद तो इसका स्वाद भी बदलने वाला था.
इसलिए वो जितना ज़्यादा हो सकता था उतना अंदर तक अपनी जीभ को पेलकर उसका रस पीने में लगा था..

नेहा पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी, अब वो पल आ भी चुका था जिसका दोनो भाई बहन को बेसब्री से इंतजार था….
वो उसकी आँखो मे देखता हुआ उपर उठा और अपने लंड को मसलने लगा…
नेहा ने भी मुस्कुराते हुए उसके लंड को अपने मुँह में लेकर कुछ देर तक चूसा और उसे अच्छी तरह से गीला करके चूत में भेजने लायक बना दिया…



फिर वो उसी अवस्था में पीछे होकर बेड पर टांगे फेला कर लेट गयी, और अपनी बाहें उपर करके विक्की को अपने अंदर आने का न्योता दिया…



विक्की ने अपने खड़े लंड को उसकी रसीली चूत के होंठो पर रखकर होले से दबाया तो उसके लंड का टोपा अंदर खिसक गया..थोड़ा और ज़ोर लगाया तो वो लंड अंदर सरकने लगा…
धीरे-2 उसने करीब आधा लंड नेहा की चूत में उतार दिया और अंत में उसकी सील पर जाकर वो अटक गया…
आगे जाने के दो ही रास्ते थे, झटका और हलाल,
झटका वो देना नही चाहता था, इसलिए उसने धीरे-2 उसे हलाल करना शुरू किया..

अपने लंड को उसने धीरे से पीछे किया और फिर पिछली बार से ज़्यादा आगे की तरफ खिसका दिया, ऐसा करते-2 वो इंच इंच करके उसकी सुरंग में दाखिल हो रहा था….एक पल वो भी आया जब नेहा की सील पर वो फिर से टकराया, इस बार वो रुका नहीं और धीरे से दबाव बनाकर उसे अंदर धकेलता रहा और विक्की का लंड नेहा की चूत के किले को भेदता हुआ अंदर तक जा बैठा…

”आआआआआआआअहह……उम्म्म्ममममममममममममममममममम…… मजाआाअ आआआआआआआ गय्ाआआआअ भाई…………….उफफफफफफफफफफफफ्फ़…… दर्द भी हो रहा है…….मीठा सा एहसास भी…….अहह….मन तो कर रहा है इस लॅंड को पूरी जिंदगी अपने अंदर लेकर लेटि रहूं …….अहह…….. सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…. भाई……….. अब तोड़ा ज़ोर से करो ना…….अहह…. मुझे झटके मारो……जैसा ब्लू फ़िल्मो मे होता है………….”

उसका इतना कहना था की उसने अपनी स्पीड बड़ा दी…
अब वो हुमच-2 कर अपनी प्यारी बहन को चोदने लगा..

 

और ज़ोर-2 से झटके देकर चुदाई करते हुए बड़बड़ाने की बारी इस बार विक्की की थी..

”आआअहह….. ले साली…भेंन की लोड़ी …….ले मेरा लंड …..बड़ी गर्मी भरी है ने तेरे अंदर…..अब रोज रात को पेला करूँगा तुझे…इसी कमरे में ……अहह…… मेरे लंड की गुलाम बनकर रहेगी अब तू साली…..रोज मेरे लंड को चूसेगी…..इसे अपनी चूत में लेकर मज़े लेगी……बोल….लेगी ना…..”

वो चिहुंक कर बोली : “हाँ भाई….लूँगी…..दिन रात लूँगी….जब भी मौका मिलेगा, इस मोटे लंड से चुदवाउंगी ……आहहह….इतने सालो बाद पहली बार अपनी जिंदगी का असली मज़ा मिल रहा है…आआआअहह….मैं पहले ही जवान क्यों नही हो गयी रे……….जल्दी से चोद मुझे…..”

फिर तो दोनो एक अलग ही फॉर्म में आ गये…..
विक्की ने उसके दोनो हाथ दबोच कर उसकी चूत में अपने लंड की रेल दौड़ा दी….
हर झटके से उसके नन्हे बूब्स उछलकर उपर तक जाते और नीचे आते,
विक्की उन्हे अपने मुँह से पकड़कर चूस भी रहा था बीच-2 में

और जल्द ही उन दोनो के अंदर चरम सुख का निर्माण होने लगा और वो ओर्गास्म उनके विशेष अंगो के मध्यम से बाहर आने को आतुर हो गया..

विक्की : “आआआआअहह नेहा………..मैं झड़ने वाला हूँ बस……अहह……”

नेहा ने चिल्लाते हुए अपनी टांगे उसके इर्द गिर्द बाँध दी और बोली : “मेरे अंदर भाई….मेरे अंदर निकालो अपना रस…..मैं तुम्हे अंदर तक महसूस करना चाहती हूँ ……”

विक्की : “पर ???”

नेहा : “पर वर कुछ नही…तुम करो…मैं गोली ले लूँगी….पर पहली बार मैं इसे महसूस करना चाहती हूँ ……डालो मेरे अंदर ही सारा रस भाई……”

विक्की के पास भी कुछ सोचने समझने का वक़्त नही था,
उसने एक लंबी साँस ली और अपनी गति बड़ा दी,
कुछ ही पलों में उसके लंड का गाड़ा रस निकलकर उसकी बहन की चूत में जाने लगा….

”आआआआआआआआआआआअहह…….सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स……. मैं तो गया रे……..मैं तो गया…………..”

नेहा भी अपने भाई के गर्म वीर्य को महसूस करके तुरंत झड़ गयी…..
दोनो एक दूसरे के जिस्मों को रगड़ते हुए और एक दूसरे के चेहरों को चूमते हुए अंत तक हल्के-2 झटके देते रहे…

फिर जैसे ही विक्की ने अपना लंड बाहर खींचा, गुलाबी रंग लिए ढेर सारा वीर्य चूत के रास्ते बाहर आ गया….
दोनो ने मुस्कुराते हुए एक दूसरे की तरफ देखा और फिर से एक बार एक दूसरे के होंठों को चूम लिया.

उसके बाद दोनो ने रूम की हालत ठीक की और बेड पर गिरे माल को सॉफ किया…
फिर फ्रेश होकर दोनो फिर से एक बार बेड पर आकर नंगे लेटे और काफ़ी देर तक एक दूसरे की बाहों में लिपटकर लेटे रहे…
नींद दोनो की आँखो में नही थी, मन तो और भी चुदाई करने का कर रहा था पर पहली चुदाई से नेहा की चूत सूज गयी थी, इसलिए सिर्फ़ मुम्मा चुसाई और होंठो की क़िस्सियो से काम चलाया उन्होने…

सुबह होने से पहले नेहा अपने कपड़े पहन कर नीचे अपने रूम में चली गयी और विक्की अपना अंडरवेयर पहन कर आराम से लंबी तानकर सो गया….
आज काफ़ी थक गया था वो , उसे जबरदस्त नींद आने वाली थी.

पर अगले दिन उसकी डबल शिफ्ट होने वाली थी, ये वो नहीं जानता था

 

 

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