नेहा की आँखे चमक उठी उस नौजवान को देखकर…उसकी हाइट और बॉडी दूर से देखकर ही उसकी चूत में पानी आ गया…..अब ऐसा भी नही था की उसे चूत मरवाने की आग लगी हुई थी…वो तो वैसे भी उसने अपने भाई के लिए ही रख छोड़ी थी, पर आज के माहौल में जिस तरह से उसके जिस्म को रगड़ा गया था, कम से कम उस खुजली को शांत करना तो बनता ही था,और वो खुजली तो स्मूच और मुम्मे चुसवाने से ही दूर हो सकती थी…
एक अलग ही रोमांच का अनुभव कर रही थी नेहा…इन्फेक्ट पिंकी भी काफ़ी रोमांचित हो रही थी ऐसी स्थिति में नेहा और विक्की को मिलवाकर…अब जो भी होने वाला था उसमे उन दोनो भाई बहन को तो मज़ा आने ही वाला था, साथ ही साथ वो भी जानती थी की उसे बीच में कैसे मज़े लेने है…
अपनी प्लानिंग और अक्लमंदी पर मुस्कुराते हुए उसने नेहा से कहा : “देख….ये लड़का हमे दूर से देख रहा था, हमारी तरफ का ही है…इसलिए शरमा रहा है, वो सिर्फ़ एक ही शर्त पर यहां पीछे आने को तैयार हुआ है की जो भी होगा, अंधेरे में ही होगा…ताकि बाद में उसके लिए कोई प्राब्लम ना हो…”
नेहा : “अरे साला …ये तो लड़कियो से भी ज़्यादा शरमाता है….जब इतना शरमा रहा है तो करेगा कैसे…हे हे”
पर नेहा को इस वक़्त उसके इस अनोखे व्यवहार से ज़्यादा अपने बदन की गर्मी की पड़ी थी….इसलिए मंजू की बात में हाँ मिलाकर वो उसकी तरफ चल दी…अब असली खेल शुरू होने वाला था….जिसका विक्की धड़कते दिल से इंतजार कर रहा था.
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अब आगे
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विक्की तक जाते हुए नेहा के दिल की धड़कन तेज होने लगी….
उसके निप्पल कड़क होकर अलग से चमकने लगे…
उसकी जाँघो के बीच गीलापन आ गया.
मन ही मन वो सोच रही थी की आज उसकी जवानी को उसके भाई के अलावा कोई दूसरा हाथ लगाएगा…
विक्की भी धड़कते दिल और खड़े लंड के साथ अपनी बहन को अपनी तरफ आते देखकर कुलबुला रहा था…
हालाँकि वो अच्छी तरह जानता था की घर में वो नेहा से ज़्यादा अच्छी तरह से मज़े ले सकता है
पर इस स्थिति में एक अलग ही तरह का रोमांच था..
साथ ही उसने आज सोच लिया था की वो एक साथ दोनो से मज़े लेगा..
वो उसके करीब पहुँची तो चाहकर भी विक्की का चेहरा ठीक से देख नही पाई,
घुप्प अंधेरा था वहाँ, उपर से वो जिस पेड़ के नीचे खड़ा था वो भी काफ़ी घना था, इसलिए सिर्फ़ नेहा उसके शरीर को महसूस कर सकती थी, देख नही पा रही थी..
वैसे भी इस वक़्त नेहा के अंदर इतनी चुदासी भरी पड़ी थी की उसे उसकी शक्ल से ज़्यादा उसका लंड देखने की पड़ी थी…
एक अजीब सी शांति छा गयी जब तीनो एक दूसरे के सामने पहुँचे तो…
मंजू ने विक्की को कुछ भी बोलने से मना किया था क्योंकि उसकी आवाज़ से उनका भांडा फूट जाता..
चुप्पी को तोड़ते हुए मंजू ने कहा : “अर्रे यार, ऐसे ही खड़े रहना है तो अंदर ही चलते है ना…जल्दी करो जो भी करना है, ऐसा ना हो की कोई आ जाए…”
ये सुनते ही विक्की के हाथ हरकत में आ गये, वो हाथ बढ़ाकर नेहा के मुम्मे पकड़ने ही वाला था की उससे पहले ही नेहा के हाथ सीधा उसके लंड पर पहुँच गये…
विक्की ने तो सोचा भी नही था की उसकी शरीफ सी दिखने वाली बहन ऐसी हरकत या पहल कर सकती है…
वो जीन्स में फँसे उसके लंड को अच्छे से सहला रही थी,
एक अलग ही टीला सा बना हुआ था विक्की की पेंट में,
नेहा ने सिसकारी मारते हुए अपने शरीर को विक्की से सटाया और अपनी नन्ही बूबियां उसकी छाती पर रखकर ज़ोर से मसल डाली….
अब विक्की के लिए भी रुकना मुश्किल था…
उसने अपने दोनो हाथो मे उसकी चुचियों को पकड़ा और अपना मुँह नीचे करते हुए उसके लरजते हुए होंठों पर अपने होंठ रखकर उन्हे चूस डाला…
एक बिजली सी कड़क गयी जब दोनो के गीले होंठ मिले तो….
हालाँकि ये पहली बार नही था जब दोनो भाई बहन एक दूसरे को चूम रहे थे, विक्की को तो पता था की वो नेहा को ही चूम रहा है, पर नेहा को दूर – 2 तक अंदाज़ा भी नही था की वो उसका खुद का भाई है जिसके साथ वो इस रोमांचक पल में मज़े ले रही है…
नेहा ने फड़फड़ाते हाथों से विक्की की जीन्स खोल डाली और उसके कबूतर को बाहर निकाल लिया….
लंड के बाहर आते ही एक अजीब सा नशा फैल गया हवा में….
नेहा की बेसब्री का आलम ये था की उसने अपनी स्मूच तोड़ते हुए नीचे फिसलना शुरू कर दिया और अपने पंजो पर बैठकर अपने भाई के लंड को एक ही बार में निगल गयी….
विक्की ने बड़ी मुश्किल से अपने मुँह से आआआआआहह की आवाज़ को निकलने से बचाया..
बाकी का काम मंजू ने आसान कर दिया,
वो लपक कर आगे आई और उसने अपने होंठ विक्की के होंठो पर रखकर उन्हे चूसने लगी…
उपर के होंठो पर मंजू के होंठ, नीचे लंड पर नेहा के होंठ, दो लड़कियो को ऐसे चूसने का मौका मिल जाए तो दुनिया के किसी भी मर्द को अपने आप पर गर्व होने लगेगा…
मंजू ने अपने सूट को उपर करके उसे उतार कर साइड के बेंच पर रख दिया,
ब्रा भी उसने एक ही झटके में खिसका कर अपने स्तनो से ऊपर खींच दी,
अब वो विक्की के सामने टॉपलेस होकर खड़ी थी,
विक्की ने भी देर नही लगाई और उसके मदमस्त मुम्मो को एक-2 करके चूसने लगा…
नीचे नेहा ने भी कोहराम मचा रखा था,
उसे ये तो एहसास हो चुका था की इस लड़के का लंड भी उसके भाई जितना ही है,
पर अभी भी दूर -2 तक उसके अलावा उसे कुछ और पता नही चल पा रहा था,
वो तो बस मस्त होकर विक्की के लंड की बिन बजाने में लगी हुई थी…
कुछ देर बाद दोनो ने अपनी जगह चेंज कर ली, नेहा उपर आ गयी और मंजू नीचे चली गयी…
विक्की के होंठो को चूसते हुए कुछ देर के लिए तो उसे लगा की ये होंठ वो पहले भी चूस चुकी है,
पर सैक्स की ठरक इतनी चढ़ी हुई थी उसपर की उसका दिमाग़ काम ही नही कर रहा था….
विक्की ने उसके सूट की कमीज़ भी उतार डाली, अब वो भी मंजू की तरह उपर से नंगी थी…
मंजू भी उसका लंड चूसने के बाद उपर आई और फिर वो दोनो मिलकर विक्की को बारी-2 से स्मूच करने लगी…
विक्की के दोनो हाथ में उन दोनों की रेशमी गांड थी जिसे वो जी भरकर दबा रहा था…
नेहा के मन में अंतर्द्वंद चल रहा था….
काश वो अपने भाई से पहले चुदवा चुकी होती तो आज ऐसे सुनहेरे मौके को हाथ से ना जाने देती….
वो अभी के अभी अपनी सलवार नीचे करती और घोड़ी बनकर उसके लंड को अपनी चूत में ले लेती…
पर अपना कुँवारापन उसे अपने भाई के नाम करना था, इसलिए उसने बड़ी मुश्किल से अपने जज्बातों पर काबू पाया…
वहीं दूसरी तरफ मंजू की चूत भी बुरी तरह से पनिया चुकी थी….
चाह तो वो भी रही थी की उसकी चूत का उद्घाटन आज ही हो जाए पर इस तरह से जल्दबाज़ी वाली चुदाई करवाना उसे भी पसंद नही आ रहा था…
अपनी पहली चूत चुदाई के लिए उसने काई सपने संजो रखे थे, जहाँ वो और विक्की हो होंगे, रोमांटिक सा माहौल होगा, गद्देदार बिस्तर होगा जिसपर बिछकर वो चुदाई के भरपूर मज़े ले सकेगी…
पर अभी के लिए तो कुछ ना कुछ करना ही था, और उसके लिए उन दोनो को ही अपने नाड़े खोलने की ज़रूरत थी….
मंजू ने पहले खुद का और फिर नेहा की पायजामी का भी नाड़ा खोलकर उसे घुटनो तक खिसका दिया और फिर दोनो ने एक-2 करके अपनी नंगी चूत और गांड को अच्छी तरह विक्की के खड़े लंड पर रगड़ा…
और फिर विक्की की जाँघो पर अपनी-2 गांड टीका कर उन दोनो ने विक्की के हाथो को अपनी चुतों पर रख लिया, विक्की का लंड इस वक़्त उन दोनो की कमर के बीचो बीच फँसा हुआ था, जिसपर दोनो की गांड का साइड वाला हिस्सा दबाव बनाकर उसे अलग सा एहसास दे रहा था….
इधर विक्की के हाथ हरकत में आए और उधर उसका लंड ….
वो अपनी कमर आगे पीछे करके अपने फँसे हुए लंड से उनकी कमर की चुदाई करने लगा…
और खुद उनकी चुतों में उंगली डालकर उनके दाने को रगड़कर उन्हे रोमांच के आख़िरी पड़ाव तक ले जाने लगा…
बीच-2 में वो अपने हाथ उपर करके उनकी चुचियों से भी खेलता और फिर से हाथ नीचे करके उनकी रसीली चूत में उंगली डालकर उसे चोदने लगता…
तीनो एक ही लय में आहें भरते हुए अपने-2 ऑर्गॅज़म के करीब पहुँचने लगे और अंत में एक साथ ही उन सबके अंदर का रस निकलकर बाहर आ गया….
विक्की के दोनो हाथ खीर से भर गये…
और उन दोनो की कमर पर ढेर सारी मायोनिज़ फैल गयी…
विक्की ने हाथ उपर किए और अपने गीले हाथ उनके चेहरो के करीब लाया, नेहा की चूत की मलाई उसने मंजू को खिलाई और मंजू की चूत का रस उसने नेहा के मुँह में डाल दिया, फिर दोनो ने मिलकर अपनी कमर पर फैली रसमलाई इकट्ठा की और उसे उंगलियों से चाट-चाटकार खाया….
अब विक्की का काम ख़त्म हो चुका था,
उसे तो अब भी विश्वास नही हो रहा था की नेहा ने उसे अभी तक नही पहचाना,
और वो आगे भी ना पहचाने इसलिए उसने जल्दी-2 अपने कपड़े पहने और उनके होश में आने से पहले ही वहां से रफू चक्कर हो गया..
कुछ देर बाद जब दोनो ने अपनी बोझिल आँखो से आस पास देखा तो विक्की वहाँ नही था,
मंजू ने जल्दी-2 अपने कपड़े पहने, नेहा को भी पहनाए और फिर जिस रास्ते से वो दोनो आए थे, वहीं से होते हुए वापिस अंदर पांडाल की तरफ़ चल दिए,
पहले बाहर बने लेडीज़ बाथरूम में उन्होने अपना हुलिया ठीक किया और फिर चुपके से अंदर जाकर बारात की भीड़ में मिल गये…
किसी को कुछ भी पता नही चला.
कुछ देर बाद दोनो ने खाना खाया और फिर मंजू के मॉम-डेड के साथ वो लोग वापिस आ गये…
वहां पहुँचने से पहले ही नेहा ने विक्की को फोन कर दिया था ताकि वो उसे घर ले जा सके..
घर जाते हुए वो आज काफ़ी खुश थी,
अपनी लाइफ का ये एडवेंचरस सैक्स एक्सपीरियन्स उसे काफ़ी पसंद आया था…
पर इस अधूरे खेल को अब वो पूरा करना चाहती थी,
उसने सोच लिया था की आज किसी भी हालत में वो विक्की के लंड को अपनी चूत में लेकर रहेगी…
इसलिए घर जाते हुए वो उसे कस कर पकड़े बैठी थी,
और रह रहकर उसका हाथ उसके कड़क होते लंड पर जा रहा था…
आज वो अपने भाई का शिकार करने के पूरे मूड में थी.

