अपडेट 49
आपने अभी तक पढ़ा..
रश्मि अन्दर आई तो बोली- हैलो गाइस.. कोई मिल्क शेक लेना चाहेगा कि नहीं.. मैं बनाने जा रही हूँ..?
मैंने कहा- हाँ.. बना लो सबके लिए लेकिन तुम्हारे भैया तो शायद आज की रात ‘दूध’ ही पीना पसंद करेंगे।
मेरी बात सुन कर सूरज घबरा गया और बोला- नहीं नहीं.. मेरे लिए भी मिल्क शेक ही बना लाओ।
रश्मि ने मेरी बात समझ ली थी.. वो हँसती हुई वहाँ से चली गई और फिर मैं भी कपड़े चेंज करने लगी।
मैं जानती थी कि सूरज परेशान है कि वो अब मुझे क्या बताए कि वो तो अपनी बहन को पहली ही चोद चुका हुआ है। लेकिन मैं भी अब तीनों के दरम्यान का यह परदा खत्म कर देना चाहती थी।
अब आगे..
सूरज को कमरे में छोड़ कर मैं बाहर रसोई में आई.. तो रश्मि मुझे देख कर मुस्कुराने लगी।
मैंने उसे पीछे से अपनी बाँहों में भरा और बोली- क्यों फिर खूब मजे किए हैं ना.. अपने भैया के साथ सिनेमा में?


रश्मि मुझे जवाब देती हुई बोली- भाभी आप भी तो उस लड़के के साथ खूब मजे करके आई हो ना?
मैं- अरे नहीं यार.. ऐसी तो कोई बात नहीं है..
रश्मि- भाभी मैंने सब देखा था कि कैसे आप उसकी बैक पर अपनी चूचियों को रगड़ रही थीं।
मैं अब थोड़ी डिफेन्सिव होने लगी- नहीं यार.. वो तो बस बाइक पर बैठने की वजह से ऐसा हो रहा था..
रश्मि- लेकिन भाभी इसमें बुराई तो कोई नहीं है.. वैसे वो है भी खुबसूरत और चिकना लड़का.. मैं तो कहती हूँ कि पटा लो भाभी उसको.. अपनी हुस्न के जादू से..
मैं रश्मि के बाज़ू पर एक हल्का सा थप्पड़ मारते हुई बोली- इतना ही अच्छा लग रहा है.. तो तू खुद पटा ले उसको और कर ले उसके लौड़े के साथ मजे..
रश्मि- ना बाबा ना.. अभी तो मेरे लिए भैया ही काफ़ी हैं.. आप कर लो उसे क़ाबू में..
मैं बात बदलते हुई बोली- अच्छा चल छोड़ इन बातों को.. और चल मिल्क शेक लेकर चलें.. अन्दर तेरा भैया तेरा इन्तजार कर रहा होगा।(मन में अब इसको क्या बोलूँ उस साले भड़वे राजू की नजर तुझ पे थी और कॉलेज के बाथरूम में उसने तेरी नंगी फोटो उठाई थी और तुझ को वो फोटो दिखा के ब्लैक्मैल करना चाहता था और तुम्हें बचाने के लिए बाइक पर उसको धमका रही थी जिसको तुम मेरा उसके साथ मजा करना बोल रही हो,में कैसे बर्दस्त कर लूँ मेरे जान के माल पर कोई आँख डाले, उसके आंखे न नोच लूँ )

मेरी बात सुन कर रश्मि हँसने लगी मुझे मुसकुराते हुए कुछ सोचते हुए देख कर रश्मि हस्ते हुए बोली
रश्मि- क्या बात है भाभी रास्ते में अपनी चुची रगड़ाई याद कर रही हो क्या.. हे हे हे
मैंने उसको धीरे से चपत लगते हुए,
में- क्या रश्मि तुम भी कैसी बात कर रही हो वो छूई मूई सा लड़का मुझे पटाएगा और वो मेरे को देखते ही पिघल जाएगा,और एक बात कान खोल कर सुन लो मेरा पहेला और आखिरी प्यार तुम्हारे भाई हैं,ये बोल कर में चुप हो गई
मुझे सीरीअस देख कर रश्मि को उसकी गलती का एहसास होने लगा और वो मुझसे माफी मांगते हुए बोली
रश्मि-सॉरी भाभी मुझे माफ कर दो में नहीं जानती थी की आप भैया से कितना प्यार करते हो और मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था में तो बस मजाक कर रही थी,ये बोल कर उसने अपना सिर नीचे कर लिया ,फिर में उसके थोड़ी को पकड़ कर ऊपर उठाया तो उसके आँखों में आँशु थे,में उसे गले लगाया और बोली


में- अरे पगली रो मत में तो सिर्फ तुझे बता रही थी में तुझ पे नाराज नहीं हु अब रो मत तू तो मेरी गुड़िया है (उसके सिर सहलाते हुए ) और आज रात के लिए तेरे भैया को मैंने तैयार कर लिया है ये सुनते ही रोते हुए रश्मि के लाल होंठ पर स्माइल आ गई

फिर कुछ पल में शर्म का चादर उसके मुखड़े ने ओढ़ लिया था और मंद मंद मुस्कराती रहती मिल्कशेक बनाने तक फिर हम दोनों रसोई से बेडरूम में आ गए और सबने मिल कर बैठ कर मिल्क शेक पिया। जितनी देर तक हम लोग बैठे.. उतनी देर भी सूरज की नजरें अपनी बहन के जिस्म का ही जायज़ा लेती रहीं।
लेकिन जैसे ही मैं उसे अपने बहन को देखता हुआ पकड़ती.. तो वो शरम से थोड़ा झेंप जाता.. लेकिन मैं उसे शर्मिंदा करने की बजाय मुस्कुरा देती।
मिल्क शेक पीकर मैं और रश्मि बाहर रसोई में आ गए और पीछे ही सूरज भी आ गया और टीवी ऑन करके देखने लगा।
रसोई से काम खतम करके मैंने रश्मि को पहनने को एक नाईटी दी और कहा- तुम आज यह नाईटी पहन कर हमसे पहले ही जाकर सो जाओ..
वो एक ढीली सी सिल्की शॉर्ट नाईटी थी.. जो कि उसके घुटनों तक आती थी और उससे नीचे उसकी दोनों खूबसूरत टाँगें बिल्कुल नंगी हो जाती थीं। इस नाईटी का गला भी काफ़ी खुला और गहरा था.. जिससे उसका क्लीवेज और चूचियों का बहुत सा दूधिया हिस्सा साफ़ नज़र आ रहा था। नाईटी थी भी स्लीबलैस जिससे उसकी दोनों खुबसूरत बाज़ू बिल्कुल नंगे दिख रहे थे।

मैं सूरज के पास आकर बिल्कुल उससे चिपक कर बैठ कर टीवी देखने लगी.. थोड़ी देर में रश्मि अपने कमरे से निकली तो जैसे ही उसकी सेक्सी ड्रेस पर फैजान की नज़र पड़ी.. तो वो चौंक उठा और उसकी आँखें भी चमक उठीं।


रश्मि ने हमारी सामने खड़ी होकर एक जोरदार अंगड़ाई ली और बोली- भाभी मुझे तो नींद आ रही है.. मैं जा रही हूँ सोने के लिए.. आप लोगों ने जब भी आना हो आ जाना..

मैं- हाँ.. ठीक है तुम जाओ.. हम भी थोड़ी देर में आ रहे हैं।
रश्मि ने एक मुस्कुराती हुई नज़र अपने भाई पर डाली और फिर अपने चूतड़ों को ठुमकाते हुए अन्दर चली गई।

मैं सूरज के साथ चिपक कर बोली- देखा अपनी बहन को.. मेरी नाईटी में कितनी सेक्सी लग रही थी.. इसे अगर कोई भी ऐसी देख ले ना.. तो कभी भी इसे चोदे बिना ना छोड़े..
सूरज- लेकिन तुमने उसे अपने नाईटी क्यों दी है?
मैं- क्यों उस पर अच्छी नहीं लग रही क्या?
सूरज- अच्छी तो लग रही है.. लेकिन..
मैं- अरे इसलिए तो उसे ऐसी ड्रेस पहनाती हूँ.. ताकि तुम देख सको कि तुम्हारी अपनी सग़ी छोटी बहन किस क़दर खूबसूरत और हसीन है और उसका जिस्म कितना सेक्सी है। तुमने चूचियाँ देखी था ना रश्मि की.. उस नाईटी में से झाँकते हुए कितनी खूबसूरत लग रही थीं।

सूरज- प्लीज़ काजल.. कैसी बातें कर रही हो.. वो बहन है मेरे.
मैं- अरे यार क्या हुआ.. बहन है तो.. तुम मेरा साथ दो ना.. तो मैं उसे तुम्हारे नीचे सुला दूँ..
सूरज चुप कर बैठ गया।
कुछ 15 मिनट के बाद हम दोनों भी उठ कर बेडरूम में आ गए.. तो रश्मि आँखें बंद करके लेटी हुई सो रही थी..

उसने करवट ली हुई थी और अपनी एक टाँग आगे को करके मोड़ी हुई थी। जिसकी वजह से उसकी टांग जाँघों तक नंगी हो रही थी। उसके खूबसूरत चूतड़ बाहर को निकले हुए थे।

जैसे ही हम दोनों की नज़र रश्मि पर पड़ी.. तो हमारे क़दम वहीं पर ही रुक गए।
हमारी नजरें रश्मि की नंगी टाँगों और उसके सेक्सी पोज़ पर थीं।
मैंने मुस्कुरा कर सूरज की तरफ देखा और फिर उसका हाथ पकड़ कर आगे बिस्तर की तरफ बढ़ी। मैंने उसे रश्मि की एक साइड पर लेटने को कहा और खुद उसकी दूसरी तरफ बिस्तर की बैक से तकिया लगा कर बैठ गई।
अब मैंने आहिस्ता आहिस्ता अपना हाथ रश्मि की नंगी जांघ पर रखा और उसे सहलाने लगी। मेरा हाथ रश्मि की चिकनी जांघ पर फिसलता जा रहा था।
मैं- लो रश्मि को देखो छू कर.. कितनी चिकनी है तुम्हारी बहन की..
यह कह कर मैंने सूरज का हाथ पकड़ा और उसे रश्मि की जांघ पर रख दिया। सूरज ने अपना हाथ हटाना चाहा.. लेकिन मैंने उसके हाथ को आहिस्ता आहिस्ता रश्मि की जाँघों पर सहलवाना शुरू कर दिया। अपनी आँखों के सामने एक भाई को अपनी ही सग़ी बहन की नंगी जांघ पर इस तरह से हाथ फेरते हुए देख कर मेरी अपनी चूत भी गीली होने लगी।
कुछ ही देर में रश्मि ने करवट ली और बिस्तर पर सीधी होकर लेट गई। जैसे ही रश्मि हिली तो सूरज ने अपना हाथ हटा लिया और इतने में रश्मि अपने भाई को दिखाने के लिए दोबारा गहरी नींद में चली गई।
मैंने रश्मि के पतले-पतले होंठों पर अपनी उंगली फेरनी शुरू की और बोली- सूरज.. देखो तुम्हारी बहन के कितने प्यारे होंठ हैं..
यह कह कर मैं झुकी और अपने होंठ रश्मि के होंठों पर रख दिए और उसको किस करने लगी।

फिर मैंने सूरज के सिर के पीछे अपना हाथ रखा और उसके सिर को नीचे रश्मि के चेहरे पर झुकाने लगी।
सूरज बिना अपने मुँह से कोई भी शब्द निकाले हल्की सी झिजक कर रहा था.. लेकिन कुछ पल के बाद ही उसके होंठ अपनी बहन के होंठों तक पहुँच चुके थे। सूरज ने एक पल के लिए ऊपर मेरी तरफ देखा और अगले ही लम्हे उसके होंठ अपनी बहन के होंठों पर आ गए..

सूरज ने मेरी आँखों में देखते हुए आहिस्ता आहिस्ता अपनी बहन को किस करना शुरू कर दिया.. हौले-हौले वो अपनी बहन के होंठों को चूम रहा था और फिर उसने हिम्मत करते हुए रश्मि के एक होंठ को अपने दोनों होंठों की गिरफ्त में लिया और उसे चूसने लगा..

मेरे हाथ अब रश्मि की छोटी-छोटी चूचियों पर पहुँच चुके थे और मैं उसकी चूचियों को उसकी नाईटी के ऊपर से ही सहला रही थी और हौले-हौले दबा रही थी।


सूरज अभी भी अपनी बहन के होंठों को चूम रहा था.. तो मैंने उसका एक हाथ पकड़ा और फिर उसे आहिस्ता से रश्मि की चूची पर रख दिया।

एक पल के लिए तो शायद सूरज को सब कुछ भूल गया और उसने आहिस्ता आहिस्ता अपनी बहन की चूची को दबाना शुरू कर दिया।

फिर जैसे उसे अचानक से अहसास हुआ तो उसने अपने होंठ और हाथ दोनों ही अपनी बहन के जिस्म से पीछे कर लिए..
मैंने दोबारा से सूरज का हाथ पकड़ कर रश्मि की चूचियों पर रखा और बोली- देखो.. कितनी सॉलिड हैं.. तुम्हारी बहन की चूचियां.. बिना किसी ब्रा के सपोर्ट के भी.. कितनी तनी हुई हैं..


सूरज ने मेरी तरफ देखा और फिर आहिस्ता आहिस्ता अपनी बहन की चूचियों को दबाने लगा..

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