आपने अभी तक पढ़ा..
एक मर्द का अपने भाई का हाथ अपनी चूत पर लगते ही रश्मि की चूत गरम होने लगी और उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं।
अपनी सग़ी बहन की चूत पर अपनी उंगली फेरते हुए आहिस्ता आहिस्ता अपनी उंगली को उसकी चूत की दरार में घुसेड़ रहा था और उसकी उंगली पर उसकी अपनी ही बहन की चूत का पानी लग रहा था।
सूरज ने अपनी उंगली ऊपर की ओर रश्मि को दिखाते हुए कहा- देख.. तेरी चूत कितना पानी छोड़ रही है.. तेरी चूत मेरे लण्ड से चुदने लिए कितनी प्यासी और चुदासी हो रही है।
रश्मि ने शर्मा कर आँखें बंद कर लीं।
अब आगे..
सूरज ने रश्मि की चूत की पानी से गीली हो रही उंगली को उसके लबों से लगाया और गीला पानी उसके होंठों पर मलने लगा।

रश्मि ने अपने सिर को इधर-उधर हिलाना शुरू कर दिया.. लेकिन सूरज ने अपनी उंगली उसके होंठों के बीच में डाल कर उसके मुँह में डाल ही दी और उसे अपनी ही चूत का पानी चाटने पर मजबूर कर दिया।

सूरज ने रश्मि की दोनों टाँगों के बीच थोड़ी जगह बनाई और बीच में लेट गया।
अब रश्मि की एक टाँग मेरे ऊपर थी। सूरज ने बीच में बैठ कर अपनी बहन की कुँवारी चूत को एक किस किया

और फिर अपनी ज़ुबान की नोक को उसकी चूत के लबों की बीच की लकीर पर ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर को फेरने लगा।

आहिस्ता-आहिस्ता उसके दोनों लबों को खोल कर अपनी बहन की कुँवारी चूत के सुराख को अपने सामने किया और फिर अपनी ज़ुबान की नोक से रश्मि की चूत के सुराख को छूने लगा।

आहिस्ता आहिस्ता उसकी चूत के सुराख को चाटते हुए सूरज ने अपनी ज़ुबान को अन्दर डालना शुरू कर दिया।

रश्मि का बुरा हाल हो रहा था.. वो अपने भाई के सिर के बालों को पकड़ कर खींच रही थी और नोंच रही थी। उसकी चूत पानी-पानी हो रही थी और वो अन्दर से बिल्कुल चिकनी हो चुकी हुई थी।

सूरज ने अपनी एक उंगली उसकी चूत के अन्दर डाली.. तो उसे अपने बहन की चूत के अन्दर का कुँवारा परदा रोड़ा अटकाता महसूस हुआ।

वो उसे छूते हुए बोला- मेरी जान.. आज तेरी चूत के इस परदे को फाड़ कर तेरी चूत का ‘एंट्री गेट’ खोल दूँगा.. फिर बड़ी आसानी से तेरी चूत में लंड जा सकेगा।
रश्मि अपनी आँखें बंद किए हुए पड़ी लंबी-लंबी साँसें ले रही थी।
थोड़ी देर के बाद सूरज उठा और अपना शॉर्ट्स उतार कर अपने अकड़े हुए लंड को पकड़ कर उसकी चूत के सामने बैठ गया।
सूरज अपने हाथ में लौड़े को पकड़ कर अपनी बहन की चूत की ऊपर रगड़ने लगा।

उसके लण्ड की टोपी भी रश्मि की चूत के पानी से गीली होती जा रही थी।

उधर अपने इतने क़रीब बहन-भाई का इस क़दर सेक्सी खेल होता हुआ देख कर मेरी अपनी चूत भी पानी छोड़ रही थी।

अगर इस वक़्त सूरज मेरी चूत को छू लेता.. तो यक़ीनन मैं पकड़ी जाती कि मैं जाग रही हूँ और यह सब देखते हुए मस्त हो रही हूँ।
सूरज ने अपने दोनों हाथों की उंगलियों से अपनी सग़ी बहन की चूत के दोनों होंठों को खोला और अपनी लंड की मोटी फूली हुई टोपी.. जो कि उसकी बहन की चूत के पानी से ही गीली होकर चमक रही थी.. उसे उसकी चूत के सुराख पर रखा और धीरे-धीरे अपना लंड अन्दर घुसेड़ने लगा।


रश्मि ने पहले तो आँखें खोल कर डर के मारे अपने भाई की तरफ देखा और अपने दोनों हाथों को उसके सीने पर रखते हुए रोकने की कोशिश की.. लेकिन फिर कुछ कहे बिना ही चुप होकर अपनी आँखें बंद कर लीं।
वो अपनी चूत में दाखिल होने वाले अपने भाई के लंड का इन्तजार करने लगी।
सूरज ने थोड़ा सा जोर लगाया तो उसके लण्ड की मोटी टोपी फिसल कर उसकी बहन की चूत के सुराख के पहले छल्ले के अन्दर दाखिल हो गई..

इसी के साथ ही रश्मि की एक हल्की सी चीख निकल पड़ी- उई.. मां.. आह…!
सूरज-कुछ नही हुआ.. मेरी जान.. अभी तो कुछ भी नहीं हुआ.. अभी तो मैंने टोपा को थोड़ा सा अन्दर फंसाया ही है।
फिर सूरज ने रश्मि की दोनों टाँगों को पकड़ कर ऊपर किया और उसकी जाँघों को अपने काबू में करते हुए अपने लंड के सुपारे को ही थोड़ा-थोड़ा आगे-पीछे करने लगा।

इस थोड़ी-थोड़ी सी हरकत से रश्मि भी अपने भाई के लंड से गरम होने लगी और उसे भी मज़ा आने लगा- ईसस्स.. ओह.. इस्स्स.. आआआहह.. ओऊम्मकम.. ऊऊऊहह.. उफफ.. मा..रे..

जैसे ही रश्मि के मुँह से हल्की-हल्की सी सिसकारियाँ निकलने लगीं..

तो धीरे-धीरे सूरज ने अपने लंड को और भी अन्दर डालना शुरू कर दिया।
थोड़ी ही देर में उसका लंड अपनी बहन की चूत के परदे से टकराने लगा।
कुछ देर तक रुक कर.. वो उस परदे को अपने लंड की टोपी से सहलाते हुए सूरज ने एक हल्का सा धक्का मारा..


तो पूरी तरह गरम हो चुकी उसकी बहन की चूत का परदा फटता चला गया और उसका लंड अन्दर दाखिल हो गया।

रश्मि की एक हल्की सी मगर तेज चीख निकली.. लेकिन इसी के साथ ही सूरज ने उसके ऊपर लेटते हुए उसके होंठों को अपने होंठों में जकड़ लिया और उसे चूसने लगा।

पीछे से वो बिल्कुल सख्त था.. फिर आहिस्ता आहिस्ता अपने लंड को अन्दर बाहर करते हुए वो अपनी बहन की चूत को चोदने लगा।


ऐसा लग रहा था कि रश्मि बेसुध सी हो गई थी.. पर तभी उसके हाथों की मुठ्ठियों से चादर को खिंचते देखा तो मैं समझ गई कि रश्मि को अपनी सील टूटने से बेहद दर्द हो रहा था और वो मेरे कारण ही अपनी चीख को बाहर नहीं निकलने दे रही है.. बहुत ही हिम्मत वाली लड़की थी।

अब धकापेल चुदाई चालू हो चुकी थी

शायद सूरज के लौड़े ने चूत में अपनी जगह बना ली थी..

क्योंकि तभी रश्मि ने भी अपने दोनों बाज़ू अपने भाई की कमर की गिर्द डाल लिए थे और वो उससे लिपट गई थी..

इसका साफ़ मतलब था कि रश्मि को अब चुदने में मजा आने लगा था।
अपने हाथों को रश्मि की कमर के नीचे लाते हुए सूरज ने अपनी बहन के जिस्म को अपनी बाँहों में भर लिया और आहिस्ता आहिस्ता अपने धक्कों की रफ़्तार को बढ़ाते हुए अपनी बहन की चुदाई में तेज़ी लाने लगा।

पूरा बिस्तर उसके धक्कों की ताक़त से हिल रहा था और मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे उसका लंड मेरी ही चूत में जा रहा हो।
सूरज एक टाइट और कुँवारी चूत को पहली बार चोद रहा था..

तो कैसे ज्यादा देर तक बर्दाश्त कर सकता था.. इसलिए कुछ ही देर गुज़री कि सूरज ने अपने लंड को पूरा का पूरा अपनी बहन की चूत के अन्दर डालते हुए अपने लंड से पानी निकालना शुरू कर दिया

और उसके लण्ड से सारी की सारी मलाई निकल कर अपनी बहन की चूत में गिरने लगी।


इसी के साथ ही सूरज अपनी बहन के ऊपर ही ढेर हो गया।
रात में सूरज ने एक बार दोबारा रश्मि को चोदना चाहा.. लेकिन रश्मि ने यह कह करके इन्कार कर दिया कि अभी उसे नीचे चूत में बहुत ज्यादा तकलीफ़ हो रही है.. तो अभी वो दोबारा उससे नहीं चुदवा सकती है।
मजबूरन सूरज भी अपनी बहन के जिस्म के साथ लिपट कर सो गया।
उनकी सोने के बाद मैं भी सो गई।
सुबह मेरी आँख अपनी बिस्तर पर हो रही कुछ हरकतों की वजह से खुली और हल्की हल्की सिसकारियाँ और आवाजें भी आ रही थीं।
मैंने थोड़ी सी आँख खोल कर देखा तो सूरज दोबारा से अपनी बहन की चूत को चाटने में व्यस्त था और रश्मि के मुँह से कामुक और नशीली सिसकारियाँ निकल रही थीं।


जैसे ही मैंने थोड़ी सी हरकत की तो सूरज ने जल्दी से रश्मि की जाँघों के बीच में से छलाँग लगाई और बिस्तर से नीचे उतर कर बाथरूम की तरफ चल पड़ा। रश्मि ने भी फ़ौरन से अपनी आँखें बंद कर लीं। मैं मुस्कुराई और फिर आहिस्ता आहिस्ता रश्मि को हिलाकर जगाने लगी- रश्मि.. उठो सुबह हो गई.. जाओ और चाय बना कर ले आओ।
रश्मि नींद से उठने की नाटक करती हुए बेडरूम से बाहर निकल गई।
कुछ देर ही गुज़री.. तो मुझे बाथरूम के अन्दर से कुछ ख़ुसर-फुसर की आवाजें आने लगीं। मैं उठ कर बाथरूम के दरवाजे के पास गई और अन्दर की आवाजें सुनने की कोशिश करने लगी। मेरा शक ठीक था.. बाथरूम में दोनों बहन-भाई मौजूद थे। रश्मि बाथरूम के दूसरे दरवाजे से बाथरूम में अपने भाई के पास आ गई थी।
अन्दर से आवाज़ आ रही थी- भैया प्लीज़.. छोड़ दो ना मुझे.. देखो भाभी भी जाग गई हुई हैं..
सूरज- तुम खुद ही बाथरूम में आई हो.. मैंने तो नहीं बुलाया था ना.. अब क्यों नखरे कर रही हो?
रश्मि ने खिलखिलाते हुए कहा- भैया.. तुम गलत समझ रहे हो.. मैं तो इसलिए आई थी कि आपको कहूँ कि आकर चाय ले लो और आप पता नहीं क्या समझे हो?
सूरज- अब आ ही गई हो.. तो थोड़ा सा इसे चूस ही लो यार..
रश्मि जैसे खुद को छुड़ाते हुए- छोड़ो भैया मुझे.. मैं चूल्हे पर चाय रख कर आई हुई हूँ।
इसी के साथ ही मुझे बाथरूम का दूसरा दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आई।
रश्मि दूसरी तरफ से निकल गई थी और मैं भी वापिस अपनी बिस्तर पर लेट गई। कुछ ही देर में सूरज भी वॉशरूम से बाहर निकल कर कमरे में आ गया।
इसके साथ ही रश्मि भी चाय लेकर आ गई और मेरे सिर पर हाथ फेर कर मुझे उठाते हुए बोली- भाभी.. उठिए.. अब कैसी तबीयत है आपकी?
मैंने आँखें खोलीं और बोली- हाँ.. अब काफ़ी बेहतर है.. रात में नींद ठीक से आ गई है.. तो इसलिए अब सिर भी भारी नहीं है और तरोताज़ा भी महसूस कर रही हूँ।
सूरज और रश्मि दोनों बैठ कर चाय पीने लगे और मैं उठ कर वॉशरूम में आ गई।
मैं जैसे ही वॉशरूम में आई.. तो बेडरूम से दोबारा आवाजें आने लगीं।
सूरज- यार लो तो सही.. इसे मुँह में थोड़ी देर के लिए ही ले लो न..
रश्मि- भैया क्या है ना.. मैं आपको देख ही नहीं रही हूँ.. मैं चाय पी रही हूँ।
सूरज- मेरी जान चाय के साथ स्नेक्स के तौर पर ही मेरा लंड अपने मुँह ले लो।
रश्मि हँसते हुए- तो फिर ठीक है.. मैं आपका लंड बिस्कट की तरह गर्म-गर्म चाय में डुबो कर ना ले लूँ?
सूरज भी इस बात पर हँसने लगा और उन दोनों की शरारतों और अठखेलियों पर मेरी भी हँसी छूट गई..
नाश्ता करने के बाद सूरज ऑफिस चला गया और रश्मि मेरे पास ही घर पर रुक गई।
रश्मि रसोई समेटने लगी.. तो मैं अपने कमरे में आ गई और अपने पूरे कपड़े उतार कर नंगी होकर लेट गई..



क्योंकि रात में एक भाई के लंड से एक बहन की चुदाई देख कर मेरी अपनी चूत में आग लगी हुई थी।
कुछ देर में रश्मि चाय बना कर लाई तो मुझे नंगी लेटी देख कर चौंक उठी।

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