अपडेट 23
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रश्मि उठ कर रसोई में चली गई, उसके जाने के बाद सूरज बोला- यार तुम मुझे यह अपनी नई ड्रेस पहन कर तो दिखाओ..
मैंने कहा- ठीक है.. हम दोनों ही पहन कर आते हैं.. फिर देखना कि ठीक है कि नहीं..
सूरज बोला- हाँ.. ठीक है आप लोग पहन कर आओ और मैं जब तक ओवन में पिज़्ज़ा गरम करता हूँ।
वो रसोई में गया और रश्मि को बाहर भेज दिया।
मैंने उससे कहा- तुम्हारे भैया कहते हैं कि यह जो ड्रेस लिया है ना.. वो पहन कर दिखाओ।
रश्मि बोली- नहीं.. भाभी मैं नहीं पहनूंगी।
अब आगे..
मैं- अरे यार क्यों शर्मा रही हो? तुमको इसमें तुम्हारे भैया देख तो चुके ही हैं.. तो फिर घबराना कैसा है? चलो जल्दी से जाओ और यह ड्रेस पहन कर आओ और मैं भी पहन कर आती हूँ.. और हाँ नीचे जीन्स ही रहने देना.. उस मॉडल की तरह कहीं पैन्टी पहन कर ना आ जाना बाहर..
रश्मि- भाभीइई..
मैं हँसने लगी।
फिर मैं अपने बेडरूम में आ गई और रश्मि अपने कमरे में चली गई। मैंने जल्दी से अपनी शर्ट उतारी और फिर अपनी ब्रा भी उतारा


फिर वो झीना सा खुला हुए ड्रेस पहन लिया।



मेरी चूचियाँ बड़ी थीं.. तो उस ड्रेस में और भी खुलासा हो रही थीं.. चूचियों के बीच की दरार भी काफ़ी ज्यादा दिख रही थी।


मेरी आधी चूचियाँ तो नंगी दिख रही थी, मैंने वो पहना और बाहर आ गई..

इतने में सूरज भी पिज़्ज़ा गरम करके आ गया।
मुझे देख कर उसने लार टपकाई.. और अपनी आँख दबा दी।
फिर हम दोनों बैठ कर रश्मि का वेट करने लगे।
जब वो बाहर नहीं आई.. तो मैंने उसे आवाज़ दी- रश्मि आ भी जाओ अब.. जल्दी से.. पिज़्ज़ा फिर से ठंडा हो रहा है..
तभी रश्मि ने हौले से दरवाज़ा खोला और बाहर क़दम रखा.. तो हम दोनों की नज़रें उस पर ही थीं। उस छोटी से शॉर्ट सेक्सी ड्रेस में वो बहुत प्यारी और सेक्सी लग रही थी।


उस का कुंवारा खूबसूरत गोरा-चिट्टा जिस्म बहुत ही सेक्सी लग रहा था।

देखने वाले का फ़ौरन ही उसे अपने बाँहों में लेने के लिए दिल मचल जाए..
रश्मि बेहद शर्मा रही थी.. इससे पहले कि वो चेंज करने के लिए वापिस जाती।
सूरज ने पिज़्जा का बॉक्स खोला और बोला- चलो आ जाओ जल्दी से ले लो..
रश्मि शरमाती हुई हौले-हौले क़दम उठाते हुई आई और मेरे पास सूरज के सामने ही बैठ गई।
अब हम तीनों ही पिज़्ज़ा खाने लगे।
मैं और सूरज की बहन दोनों ही सूरज के सामने इस तरह अधनंगे हालत में बैठे हुए थे और दोनों के ही खूबसूरत जिस्म.. सूरज पर बिजलियाँ सी गिरा रहे थे।
ज़ाहिर है कि सूरज की नजरें ज्यादातर अपनी बहन ही को देख रही थीं।
मैं भी इस चीज़ को नोट कर रही थी जैसे ही रश्मि सामने टेबल पर रखे हुए पिज्जा का पीस उठाने के लिए आगे को झुकती.. तो उसका ड्रेस सामने से नीचे को हो जाता और उसकी खूबसूरत चूचियों की घाटी नज़र आने लगती।


रश्मि ने अपनी ब्रेजियर नहीं उतारी थी और उस ड्रेस के नीचे उसकी हरे रंग की ब्रा की स्ट्रेप्स बिल्कुल खुली हुई दिख रही थीं।
थोड़ी देर बाद सूरज बोला- रश्मि जाकर रसोई में फ्रिज से कोक निकाल कर ले आओ।
रश्मि उठी और रसोई की तरफ बढ़ गई। उसकी पीठ पर वो ड्रेस इस क़दर नीचे तक खुला हुआ था कि उसकी ब्रा की पट्टी से भी नीचे तक वो ड्रेस खुली हुई थी।

रश्मि की ब्रेजियर की पट्टी और उसके हुक बिल्कुल साफ़ नज़र आ रहे थे।

यूँ समझो कि रश्मि की पीठ पर से उसकी पूरी की पूरी ब्रेजियर बिल्कुल साफ़ नज़र आ रही थी। हरे ब्रेजियर की अलावा रश्मि की पूरी की पूरी गोरी-गोरी चिकनी कमर भी बिल्कुल नंगी नज़र आ रही थी। उसकी गोरे-गोरे सफ़ेद कन्धे बिल्कुल ओपन थे.. उस ड्रेस से नीचे उसकी टाइट जीन्स थी.. जिसमें उसकी गोल-गोल चूतड़ बहुत ही अधिक फँस कर बहुत ही सेक्सी नज़र आ रहे थे।
सूरज बोला- इसकी पिछली तरफ का हिस्सा कुछ ज्यादा ही लो नहीं है क्या?
मैं- हाँ है तो सही.. लेकिन यह असल में बिना ब्रेजियर की पहनने वाली ड्रेस है ना.. जो कि तुम्हारी बहन ने गलती से ब्रा के साथ पहन ली है।
इतने में रश्मि कोक ले आई, दूर से चल कर आते हुए भी वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी।

रश्मि वापिस आकर दोबारा अपनी जगह पर बैठ गई। पिज़्ज़ा खाते हुए मैंने उससे कहा- रश्मि.. तुमने यह ड्रेस की नीचे ब्रा क्यों पहनी है.. इसे तो ब्रा के वगैर पहनना होता है.. देखो सारी ब्रा साफ़ नज़र आ रही है।
मेरी बात सुन कर रश्मि घबरा गई।
सूरज बोला- अरे यार क्यों तंग कर रही हो इसे.. पहली बार तो पहना है उसने यह ड्रेस.. आहिस्ता-आहिस्ता पता चल जाएगा इसे भी.. कि कौन सा कपड़ा कैसे पहना जाता है।
रश्मि चुप कर गई.. खाने के बाद हम दोनों ने बर्तन रखे और फिर मैं रश्मि को पकड़ कर अपने कमरे में ले आई।
उसने बहुत कहा कि वो ड्रेस चेंज करके आएगी.. लेकिन मैंने उसकी एक ना सुनी और बोली- जब है ही यह नाईट ड्रेस.. तो रात को ही पहनोगी ना..
मैं उसे उसके कमरे में ले गई और उसे पैन्ट चेंज करके उसे दिया हुआ सूरज का बरमूडा पहनने को कहा। कल रात की बात से मुझे यक़ीन था कि वो ज़रूर पहन कर आएगी.. क्योंकि उसे भी अपने भाई के छूने से आख़िर मज़ा जो आ रहा था।
मैंने अपने कमरे में आकर सूरज के सामने ही खड़े होकर अपनी पैन्ट उतारी और फिर एक बरमूडा पहन लिया। अब मेरा ऊपरी और नीचे का जिस्म दोनों ही बहुत ज्यादा नंगा नज़र आ रहा था।
मैं खामोशी से जाकर सूरज के पास बैठ गई और उससे बातें करने लगी।
सूरज बोला- डार्लिंग आज तुम इस ड्रेस में बहुत ही हॉट लग रही हो।
मैं मुस्कराई और बोली- हॉट तो तुम्हारी बहन भी लग रही है.. लेकिन कहीं उसे ना कह देना ऐसा.. शरमिंदा हो जाएगी। पहले ही बड़ी मुश्किल से मैंने उसे गाँव के माहौल से आज़ाद किया है।
सूरज भी हँसने लगा.. इतने में शरमाती हुई रश्मि कमरे में आ गई.. जहाँ उसका अपना सगा भाई उसकी इंतज़ार में था।
रश्मि कमरे में दाखिल हुई तो अभी मैंने लाइट बंद नहीं की थी.. ट्यूब लाइट की सफ़ेद रोशनी में रश्मि का खूबसूरत चिकना जिस्म चमक रहा था, उसके गोरे-गोरे कंधे और छाती के ऊपर खुले मम्मे बहुत प्यारे लग रहे थे। नीचे उसके गोरे-गोरे बालों से बिल्कुल साफ चिकनी टाँगें.. घुटनों से नीचे बिल्कुल नंगी थीं।


आज मेरे ज़हन में एक और ख्याल आया था। आज मैंने सूरज से कहा- वो बिस्तर पर हम दोनों के बीच में लेटेगा और हम दोनों तुम्हारे बगल में लेटेंगी।
सूरज और रश्मि दोनों ही मेरी इस बात को सुन कर हैरान हुए लेकिन सूरज तो फ़ौरन ही बिस्तर पर बीच में होकर लेट गया। मैं उसकी एक तरफ लेट गई और फिर ज़ाहिर है कि रश्मि को सूरज के दूसरी तरफ बिस्तर पर लेटना पड़ा।
कुछ मिनटों तक सीधे लेटने के बाद मैंने करवट ली और सूरज के ऊपर अपना बाज़ू डाल कर उसे खुद से चिपकाती हुए लेट गई।

मैंने अपनी एक टाँग भी सूरज के ऊपर उसकी टाँगों पर रख दी। रश्मि भी सीधे ही लेटी हुई थी.. और यह सब देख रही थी।
मैं आहिस्ता-आहिस्ता सूरज के गालों पर रश्मि की तरफ से हाथ फेर रही थी और कभी उसकी नंगे कन्धों पर हाथ फेरने लगती।
मैं रश्मि को भी और सूरज को भी यही शो कर रही थी कि जैसे मैं उस वक़्त बहुत ज्यादा चुदासी हो रही हूँ।
हालांकि असल में मैं सूरज को गरम कर रही थी।
मैं अपनी जाँघों के नीचे सूरज के लंड को आहिस्ता आहिस्ता सहला भी रही थी।
कमरे में काफ़ी अँधेरा हो गया था.. और कुछ नज़र नहीं आता था। जब तक कि बहुत ज्यादा गौर ना किया जाए।
मैं अपना हाथ सूरज की छाती पर ले आई और आहिस्ता आहिस्ता उसकी छाती को सहलाने लगी।


