अपडेट………….《 09 》
अब तक….
“आप मुझे एक आम लड़की समझकर कमजोर समझती हैं माॅम जबकि रितू सिंह बघेल कोई आम लड़की नहीं है।” रितू के चेहरे पर कठोरता थी__”बल्कि मैं मिस्टर अजय सिंह बघेल की शेरनी बेटी हूॅ। और मुझसे टकराने में किसी अपराधी को हजार बार सोचना पड़ेगा। आप जानती हैं न माॅम कि मैंने मासल आर्ट्स में ब्लैक बैल्ट हासिल किया है। क्योंकि मुझे पता है कि एक आम लड़की पुलिस में किसी अपराधी का सामना नहीं कर सकती। इसी लिए मैंने किसी भी तरह के अपराधियों से डॅटकर कर मुकाबला करने के लिए मासल आर्ट्स की ट्रेनिंग ली थी।”
अजय सिंह और प्रतिमा दोनों जानते थे कि रितू अपने कदम अब वापस नहीं करेगी। इस लिए चुप रह गए किन्तु अंदर से ये सोच सोच कर घबरा भी रहे थे कि अगर रितू ने पुलिस आफिसर के रूप में अपने दादा दादी के एक्सीडेंट वाला केस अपने हाॅथ में लिया तो क्या होगा?????”
अब आगे,,,,,,,
अजय सिंह अपने आॅफिस के शानदार केबिन में रिवाल्विंग चेयर पर बैठा कुछ फाइलों को इधर उधर रख रहा था कि तभी उसके केबिन का डोर नाॅक हुआ।
“कम इन।” उसने बिना सर उठाए ही कहा।
इसके साथ ही केबिन का डोर खुला और एक ब्यक्ति अंदर दाखिल हुआ। पचास से पचपन की उमर का वो मोटा सा आदमी था, आखों पर मोटे लैंस का चश्मा लगा रखा था उसने। उसके दाहिने हाॅथ में एक फाइल थी। चेहरे पर बारह बजे हुए थे। बड़ी ही दयनीय स्थिति में अपनी जगह खड़ा था वह।
केबिन के अंदर पैना सन्नाटा छाया रहा। अजय सिंह को जब ध्यान आया कि अभी कोई उसके केबिन में आया है तो उसने सिर उठा कर सामने देखा। नज़र केबिन में आने वाले ब्यक्ति पर पड़ी, साथ ही उसकी वस्तुस्थिति पर, तो अजय सिंह चौंका।
“क्या बात है दीनदयाल?” अजय सिंह ने पूॅछा__”तुम्हारे चेहरे पर इतना पसीना क्यों आ रहा है? तुम्हारी तबियत तो ठीक है न?”
“स सर व वो वो।” दीनदयाल हकलाते हुए बोलना चाहा।
“क्या हुआ?” अजय सिंह बोला__”तुम इस तरह हकला क्यों रहे हो भई?”
“सर बहुत बड़ी गड़बड़ हो गई।” दीनदयाल रो देने वाले लहजे में बोला__”हम बरबाद हो गए।”
“ये क्या बक रहे हो तुम?” अजय सिंह बुरी तरह चौंका__”तुम होश में तो हो न?”
“मैं पूरी तरह होश में हू सर।” दीनदयाल बोला__”सब कुछ बरबाद हो गया सर।”
“साफ साफ बोलो दीनदयाल।” अजय सिंह तीखे स्वर में बोला__”यू पहेलियाॅ न बुझाओ। ऐसा क्या हुआ है जिससे तुम सब कुछ बरबाद हो जाने की बात कर रहे हो?”
“सर पिछले महीने।” दीनदयाल बोला__”हमें जो करोड़ों का टेंडर मिला था वह सब महज एक फ्राड ही निकला।”
“क क्या मतलब?” अजय सिंह बुरी तरह चौंका था।
“मतलब साफ है सर।” दीनदयाल बोला__”हमें जिस फाॅरेन की पार्टी से करोड़ों का टेंडर मिला था वो सब झूॅठ था। हमें बरबाद करने के लिए यह किसी की सोची समझी चाल थी। हमने उस टेंडर के हिसाब से आज एक महीने से भारी मात्रा में कपड़े तैयार किये हैं जिसके लिए हमें करोड़ों की लागत का खर्च करना पड़ा किन्तु अब सब कुछ बरबाद हो गया।”
अजय सिंह ये सुनकर किसी स्टेचू की तरह बिना हिले डुले बैठा रह गया। ऐसा लग रहा था जैसे ये सब जानकर उसे साॅप सूॅघ गया हो। चेहरा निस्तेज हो गया था उसका।
“हमने यकीनन बहुत बड़ा धोखा खाया है सर।” दीनदयाल हतास भाव से बोला__”हमें इस बारे में सोचना चाहिये था। अब क्या होगा सर, हम इतने बड़े नुकसान की भरपाई कैसे कर सकेंगे?”
“उसके बारे में कुछ पता किया क्या तुमने?” अजय सिंह ने अजीब भाव से पूछा।
“एक हप्ते से मैं सिर्फ इसी काम में लगा हुआ था सर।” दीनदयाल ने कहा__”मगर उस फाॅरेनर का कहीं कुछ पता नहीं चल सका। उसकी हर एक बात झूठी ही साबित हुई सर। होटल सनशाइन में पता किया तो होटल के मैनेजर ने बताया कि स्टीव जाॅनसन व एॅजेला जाॅनसन नाम के कोई भी फाॅरेनर यहाॅ पिछले एक महीने से नहीं ठहरे थे। ये दोनो पति पत्नी जिस कंपनी को अपनी कह रहे थे उसका कहीं कोई वजूद ही नहीं, जबकि अब से एक हप्ते पहले कंपनी की बाकायदा वेबसाइट हमने खुद देखी थी, जिसमें सब डिटेल्स थी।”
“कौन ऐसा कर सकता है हमारे साथ?” अजय सिंह मानो खुद से ही पूछ रहा था__”हमारी तो किसी से इस तरह की कोई दुश्मनी भी नहीं है फिर कौन इतना बड़ा नुकसान कर सकता है हमारा?”
“जिसने भी ये सब किया है सर।” दीनदयाल बोला__”उसने इस सबकी तैयारी बहुत पहले से कर रखी थी। हर चीज़ सोची समझी थी। एक एक प्वाइंट को बारीकी से जाॅच कर उस पर काम किया गया था वर्ना क्या हमें कुछ पता न चलता? “
“नुकसान तो हो ही गया दीनदयाल।” अजय सिंह बोला__”लेकिन इसका पता करना भी सबसे ज्यादा जरूरी है। हमें हर हाल में पता करना होगा कि वो दोनों कौन थे तथा हमारे साथ इतना बड़ा धोखा करके आख़िर क्या मिला उन्हें?”
“एक बुरी ख़बर और भी है सर।” दीनदयाल दीन हीन लहजे के साथ बोला__”समझ में नहीं आता कि कैसे कहूॅ आपसे?”
“आज क्या हो गया है तुम्हें दीनदयाल?” अजय सिंह एक झटके से अपनी चेयर से उठते हुए बोला__”ये क्या मनहूस ख़बरें लेकर आए हो आज हमारे पास?”
“माफ़ कीजिए सर।” दीनदयाल ने सर झुका लिया__”मगर मैं क्या करूॅ? मुझे खुद भी समझ में नहीं आ रहा है कि ये सब क्या हो रहा है?”
“अब बताओ भी कि तुम्हारी दूसरी बुरी ख़बर क्या है?” अजय सिंह ने कहा।
“सर अरविंद सक्सेना जी हमारी कंपनी से अपनी पार्टनरशिप तोड़ रहे हैं।” दीनदयाल ने ये कह कर जैसे धमाका सा किया था।
“क् क्या..????”अजय सिंह बुरी तरह चौंका__”ये क्या कह रहे हो दीनदयाल? भला सक्सेना हमसे पार्टनरशिप क्यों तोड़ रहा है? उसने इसके बारे में हमसे तो कोई बात नहीं की अब तक? सक्सेना को फोन लगाओ हम उससे बात करेंगे अभी।”
“सर वो यहीं आ रहे हैं।” दीनदयाल ने कहा__”मुझे फोन करके उन्होंने मुझसे आपके बारे में पूछा की आप कहां हैं तो मैंने बता दिया कि आज आप यहीं हैं तो बोले ठीक है आ रहे हैं। उनका लहजा बड़ा अजीब था सर, मैंने वजह पूछी तो बोले कि आपसे पार्टनरशिप तोड़ना है। उनकी ये बात सुन कर मेरा तो दिमाग ही सुन्न पड़ गया था”
अभी अजय सिंह कुछ कहने ही वाला था कि केबिन के डोर में नाॅक हुआ। दीनदयाल ने कहा__”लगता है मिस्टर सक्सेना ही हैं।”
“ठीक है तुम जाओ अब।” हम बाद में तुमसे बात करेंगे।”
“ओके सर।” दोनदयाल ने कहा और केबिन का डोर खोला तो बाहर से सक्सेना अंदर दाखिल हुआ जबकि दीनदयाल सक्सेना को नमस्कार कर बाहर निकल गया।
“आओ आओ सकसेना।” अजय सिंह ने सक्सेना का इस्तकबाल करते हुऐ कहा और हैण्डशेक किया उससे।
“कैसे हो अजय सिंह?” सक्सेना ने हाॅथ मिलाने के बाद कहा।
“बेहतर।” अजय सिंह ने संक्षिप्त सा जवाब दिया।
“मेरे यहाॅ आने की वजह तो तुम्हें पता चल ही गई होगी?” सक्सेना ने कहा।
“हाॅ मुझे दीनदयाल अभी यही बता रहा था।” अजय सिंह ने गंभीरता से कहा__”और ये जानकर दुख भी हुआ कि तुम मुझसे पार्टनरशिप तोड़ रहे हो। जहाॅ तक मेरा अंदाज़ा है मैंने ऐसा कुछ नहीं किया है जिसकी वजह से तुम पार्टनरशिप तोड़ रहे हो।”
“मुझे पता है कि तुमने वाकई कुछ नहीं किया है।” सक्सेना ने सपाट लहजे में कहा__”लेकिन फिर भी मैं ये पार्टनरशिप तोड़ रहा हूॅ, क्योकि मुझे अब विदेश में सेटल होना है अपने परिवार के साथ। यहाॅ का सब कुछ बेच कर अब विदेश में ही रहूगा तथा वहीं कारोबार करूगा।”
“तो पार्टनरशिप तोड़ने की ये वजह है?” अजय सिंह ने कहा।
“बिलकुल।” सक्सेना ने कहा__”और अब मैं चाहता हूॅ कि तुम मेरा सब कारोबार खुद खरीद लो तथा मेरे हिस्से का जो कुछ है उसे मुझे देकर मुझे जाने दो।”
“यार ऐसा भी तो किया जा सकता है कि तुम विदेश में रह कर भी मेरे साथ पार्टनरशिप में ये कारोबार चला सकते हो।” अजय सिंह ने एक साॅस में ही सारी बात कर दी__”उसके लिए पार्टनरशिप तोड़ने की क्या बात है?”
“तुम्हारी बात अपनी जगह बिलकुल ठीक है अजय सिंह।” सक्सेना ने कहा__”लेकिन मेरा इरादा अब इस कारोबार को करने का बिलकुल भी नहीं है। कोई दूसरा कारोबार करने का सोचा है मैंने।”
“अब जब तुमने मन बना ही लिया है तो कोई क्या कर सकता है भला?” अजय सिंह बोला__”खैर कब जा रहे हो?”
“तुम हिसाब किताब क्लियर कर लो।”सक्सेना ने कहा__”तब तक मैं कुछ और इंतजाम कर लेता हूॅ”
“ठीक है सक्सेना।” अजय सिंह ने कहा__”हिसाब किताब भी हो जाएगा। मगर यार मेरा कुछ तो खयाल किया होता।”
“क्या करूॅ यार?” सक्सेना ने कहा__”तुम्हारे लिए अफसोस तो हो रहा है मगर अब और नहीं रुक सकता। ये सब तो मैं बहुत पहले से करने की सोच रहा था किन्तु हर बार तुम्हारा खयाल आ जाने से मैंने खुद को रोंके रखा।”
“हिसाब किताब तो ठीक है।” अजय सिंह ने कहा__”लेकिन कुछ समय की मोहलत चाहता हूॅ क्योंकि इस वक्त पैसे का बड़ा लोचा हो रखा है ये तो तुम्हें भी पता चल ही गया होगा?”
“हाॅ पता चला है मुझे इस बारे में।” सक्सेना ने कहा__”पर यार इतने नुकसान से क्या फर्क पड़ता है तुम्हें? और वैसे भी कारोबार में नफा नुकसान तो चलता ही रहता है।”
“बात ये नहीं है कि क्या फर्क पड़ता है?” अजय सिंह ने कहा__”बात है रेपुटेशन की। लोग क्या सोचेंगे कि अजय सिंह बघेल को कोई ब्यक्ति चुतिया बना कर चला गया और उसे इसका पता भी नहीं चला।”
“हाॅ ये तो सही कहा तुमने।”सक्सेना ने कहा__”इज्ज़त का कचरा हो गया।”
“मैं उस हरामजादे को छोंड़ूॅगा नहीं सक्सेना।” अजय सिंह ने एकाएक गुस्से में बोला__”उसको ढूॅढ़ कर उसे ऐसी मौत दूॅगा कि उसकी रूह फिर दुबारा ऐसे किसी शरीर को धारण नहीं करेगी। मुझे अपने नुकसान का कोई ग़म नहीं है सक्सेना,ये करोड़ों का नुकसान मेरे लिए कोई मायने नहीं रखता। मगर मेरी इज्ज़त को शहर भर में यूॅ दाग़दार करके उसने ये अच्छा नहीं किया। उसे इसकी कीमत अपनी जान दे कर चुकानी पड़ेगी।”
“उसके साथ ऐसा होना भी चाहिए अजय सिंह।” सक्सेना ने एक सिगरेट सुलगाई और फिर एक गहरा कस लेकर उसका धुआॅ ऊपर की तरफ उछालने के बाद कहा__”वैसे क्या लगता है तुम्हें, ये किसका काम हो सकता है?”
“ये तो पक्की बात है सक्सेना कि वो दोनों विदेशी नहीं थे।” अजय सिंह बोला__”बल्कि वो दोनों हमारे ही देश के और हमारे ही शहर के कोई पहचान वाले ही थे।”
“ये बात तुम इतने विश्वास और दावे के साथ कैसे कह सकते हो अजय सिंह?” सक्सेना हल्के से चौंका था फिर बोला__”जबकि तुम्हारे पास इस बात का कोई छोटा सा सबूत तक नहीं है।”
“ग़लती मेरी भी है सक्सेना।” अजय सिंह ने कहा__”एक महीने पहले जब उनसे हमें ये टेंडर मिला था तब हमें ये अंदाज़ा नहीं था, बल्कि हम सोच भी नहीं सकते थे कि हम इन लोगों द्वारा किसी साजिश का शिकार होने जा रहे हैं। हम तो खुश थे कि हमारे कपड़ों की खासियत से प्रभावित होकर कोई विदेशी हमसे डील कर रहा है और इतनी ज्यादा मात्रा में हमसे कपड़े की माॅग कर रहा है। उस समय दिलो दिमाग में यही था कि अब हमारा संबंध विदेशी लोगों से हो रहा है जिससे निकट भविश्य में हमारे कारोबार को और भी फायदा होगा। किसी साजिश का हम सोच ही नहीं सके थे क्योकि उन लोगों का सब कुछ परफेक्ट था। और वैसे भी हमें इससे क्या लेना देना था कि वो कितनी बड़ी कंपनी के मालिक थे, हमें तो उनकी डील से मतलब था जिसके लिए हमे करोड़ों का मुनाफ़ा होने वाला था।”
“वो सब तो ठीक है अजय।” सक्सेना बीच में ही अजय की बात काट कर कह उठा__”मगर तुम कह रहे हो कि वो विदेशी नहीं थे ये बात तुम दावे के साथ कैसे कह सकते हो?”
“मैं बताते हुए वहीं आ रहा था सक्सेना।” अजय सिंह बोला__”ख़ैर अब जबकि ये सब हो गया उससे यही समझ आता है कि ये काम किसी फाॅरेनर का नहीं है। क्योंकि आज तक हमारा किसी भी तरह का लेन देन किसी विदेशी से नहीं हुआ और जब कोई लेन देन ही नहीं हुआ किसी विदेशी से तो किसी तरह की रंजिश के तहत किसी फाॅरेनर का ये सब करने का सवाल ही पैदा नहीं होता। अब सोचने वाली बात है कि जब हमारा किसी विदेशी से कोई ब्यौसायिक संबंध ही नहीं था तो कोई विदेशी किस वजह से हमारे साथ इतनी बड़ी साजिश करके हमें धोखा देगा अथवा हमारा इतना बड़ा नुकसान करेगा?”
“तुम्हारा तर्क बिलकुल दुरुस्त है अजय।” सक्सेना सोचपूर्ण भाव के साथ बोला__”फिर तो यकीनन ये काम किसी ऐसे ब्यक्ति का है जो तुम्हें अच्छी तरह जानता भी है और तुम्हारा बुरा भी चाहता है। कौन हो सकता है ऐसा ब्यक्ति?”
“यही तो सोच रहा हूॅ सक्सेना।” अजय सिंह बोला__”मगर जेहन में ऐसे किसी ब्यक्ति का चेहरा नहीं आ रहा।”
“ये काम तुम्हारे किसी कम्पटीटर का ही हो सकता है।” सक्सेना ने कहा__”ये एक ब्यौसायिक मामला है अजय। ब्यौसाय से जुड़े तुम्हारे किसी कम्पटीटर ने ही इस काम को अंजाम दिया हो सकता है, जिनके बारे में फिलहाल तुम ठीक से सोच नहीं पा रहे हो। इस लिए अच्छी तरह सोचो कि ये किसने किया हो सकता है?”
“मुझे तो कुछ और ही लगता है सक्सेना।” अजय सिंह ने सोचपूर्ण भाव से कहा__”ये काम मेरे किसी कम्पटीटर का भी नहीं है क्योकि इन सबसे मेरे बहुत अच्छे संबंध हैं।”
“ये क्या कह रहे हो तुम?” सक्सेना चौंका__”अगर ये सब तुम्हारे किसी कम्पटीटर का नहीं है तो फिर किसका है? कहीं तुम इन सबके लिए मुझे तो नहीं जिम्मेदार ठहरा रहे हो?”
“हाॅ ये भी हो सकता है सक्सेना।” अजय सिंह ने सपाट लहजे में कहा__”इस सब में सबसे पहले उॅगली तो तुम पर ही उठेगी। आख़िरकार तुम मेरे बिजनेस पाटनर हो”
“क्या मेरे बारे में तुम ऐसा सोचते हो कि मैं अपने घनिष्ठ मित्र के साथ ऐसा नीच काम करूॅगा?” सक्सेना ने कहा__”तुम मेरे बारे में अच्छी तरह जानते हो अजय कि मैं ऐसा किसी के भी साथ नहीं कर सकता। मेरी फितरत इस तरह किसी को धोखा देने की नहीं है।”
“रुपये पैसे के लिए कोई भी ब्यक्ति किसी के भी साथ कुछ भी कर सकता है सक्सेना।” अजय सिंह ने अजीब भाव से कहा__”मैं तुम पर कोई इल्ज़ाम नहीं लगा रहा लेकिन इस तरह का सवाल तो खड़ा होगा ही। कानून का कोई भी नुमाइंदा तुमसे ये सवाल कर सकता है कि तुम अचानक ही अजय सिंह से पार्टनशिप तोड़ कर तथा अपना हिसाब किताब करके हमेशा के लिए विदेश क्यों जा रहे हो जबकि हाल ही में अजय सिंह के साथ ऐसा संगीन वाक्या हो गया?”
“तुम तो मुझ पर साफ साफ इल्जाम लगाते हुए कानून के लपेटे में डालने की बात कर रहे हो अजय सिंह।” सक्सेना दुखी भाव से बोला__”जबकि भगवान जानता है कि मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया।”
“भगवान तो सबके विषय में सब जानता है सक्सेना।” अजय सिंह ने कहा__”लेकिन इंसान नहीं जानता। इंसान तो वही जानता है जो उसे या तो नज़र आता है या फिर जो समझ आता है। आज जो हालात बने हैं उससे साफ तौर पर यही समझ आता है कि ये सब तुम्हारे अलावा दूसरा कौन और क्यों कर सकता है भला?”
अरविन्द सक्सेना मूर्खों की तरह देखता रह गया अजय सिंह को। उसके चेहरे पर ऐसे भाव थे जैसे कि वह अभी अपने सिर के बाल नोंचने लगेगा।
“मुझे समझ नहीं आ रहा अजय सिंह कि मैं तुम्हें कैसे इस बात का यकीन दिलाऊॅ?” सक्सेना असहाय भाव से बोला__”कि ये सब मैं करने के बारे में सोच तक नहीं सकता। तुम जानते हो हम दोनो ऐसे हैं कि एक दूसरे का सब कुछ जानते हैं। हम दोनों के संबंध तो ऐसे हैं कि हम अपनी अपनी बीवियों को भी आपस में बाॅट लेते हैं। क्या कोई इतना भी घनिष्ठ मित्र हो सकता है किसी का? जिसके साथ ऐसे संबंध हों वो भला अपने दोस्त का इतना बड़ा अहित कैसे कर देगा यार?”
“तुम तो यार एक दम से सीरियस ही हो गए सक्सेना।” अजय सिंह ने मुस्कुराते हुए कहा__”मैं तो बस एक तर्कसंगत बात कह रहा था कि इस वाक्ये के बाद किसी भी ब्यक्ति के मन में सबसे पहले यही विचार उठेगा जो अभी मैने तर्क के द्वारा कहा था।”
“तुम मुझे जान से मार दो अजय सिंह मुझे ज़रा भी फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन ऐसे इल्जाम लगा कर मारोगे तो मैं मर कर भी कहीं चैन नहीं पाऊॅगा।” सक्सेना ने कहा।
“छोड़ो इस बात को और ये बताओ कि विदेश कब जा रहे हो?” अजय सिंह ने पूछा।
“दो दिन बाद।” सक्सेना ने कहा__”कल तक यहाॅ के सारे करोबार का रुपया मेरे एकाउंट में आ जाएगा और परसों यहाॅ से निकल जाऊॅगा। लेकिन…..।”
“लेकिन..??” अजय सिंह ने पूछा।
“लेकिन उससे पहले मैं चाहता हूॅ कि।” सक्सेना ने कहा__”हम लोगों का एक शानदार प्रोग्राम हो जाए।”
“जाने से पहले मेरी बीवी के मजे लेना चाहते हो।” अजय सिंह हॅसा।
“हाॅ तो बदले में तुम्हें भी तो मेरी बीवी से मजे लेना है।” सक्सेना ने भी हॅसते हुए कहा__”और वैसे भी मेरी बीवी तो रात दिन तुम्हारा ही नाम जपती रहती है। पता नहीं क्या जादू कर दिया है तुमने? साली मुझे बड़ी मुश्किल से हाॅथ लगाने देती है।”
“अच्छा ऐसा क्या?” अजय सिंह जोरों से हॅसा।
“हाॅ यार।” सक्सेना बोला__”और पता है विदेश जाने के लिए तो मान ही नहीं रही थी वो। जब मैने उसे ये कहा कि तुम हर महीने हमसे मिलने तथा मस्ती करने आओगे तब कहीं जाकर मानी थी वो।”
“मतलब कि अब मुझे हर महीने तुम्हारे पास इस सबके लिए आना पड़ेगा?”अजय सिंह मुस्कुराया।
“हाॅ बिलकुल।” सक्सेना ने कहा__”और वो भी भाभी जी के साथ।”
“सोचना पड़ेगा सक्सेना।” अजय सिंह बोला__”और वैसे भी अभी मेरे पास सिर्फ एक ही अहम काम है, और वो है उन लोगों का पता लगाना जिनकी वजह से आज मुझे करोड़ों का नुकसान हुआ है तथा मेरी इज्ज़त की धज्जियाॅ उड़ी हैं।”
“हाॅ ये तो है।” सक्सेना ने कहा__”अगर कभी मेरी ज़रूरत पड़े तो बेझिझक याद करना अजय, तुम्हारे एक बार के कहने पर मैं तुम्हारे पास आ जाऊॅगा।”
“ठीक है सक्सेना।” अजय सिंह बोला__”कल तक मैं तुम्हारा हिसाब किताब करके तुम्हारे एकाउंट में पैसे डाल दूॅगा।”
ऐसी ही कुछ और औपचारिक बातों के बाद सक्सेना वहाॅ से चला गया। जबकि अजय सिंह ये न देख सका कि जाते समय सक्सेना के होठों पर कितनी जानदार मुस्कान थी?
अपडेट हाज़िर है दोस्तो,,,,,,,,
आप सबकी प्रतिक्रिया का इन्तज़ार रहेगा,,,

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